भोपाल। राजधानी भोपाल में राष्ट्रीय ध्वज जलाने के मामले में 2 निगम कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
बता दें कि मामला बीते दिनों 5 जुलाई का है। शाहपुरा के भरत नगर के वार्ड क्रमांक 50 में कुछ लोग कचरे में तिरंगा जलाते हुए पाए गए थे। जिसके बाद स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया और वीडियो बना लिया। मामला सामने आने के बाद निगम कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत हुई।
इस पूरे मामले में कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की थी। इसके अलावा कांग्रेस नेता अमित शर्मा ने भी आपत्ति जताई थी।
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8 पुलिसकर्मी सस्पेंड, ट्रांसफर आदेश की अनदेखी पर DCP श्रद्धा तिवारी ने किया निलंबित
भोपाल। राजधानी भोपाल में पुलिस विभाग ने अनुशासनहीनता को लेकर आठ पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन पुलिसकर्मियों को ट्रांसफर आदेशों का पालन न करने और निर्धारित स्थान पर अपनी उपस्थिति दर्ज न कराने के कारण सस्पेंड किया गया है।
डीसीपी श्रद्धा तिवारी द्वारा ये कार्रवाई की गई है। सस्पेंड होने वालों में एक सब इंस्पेक्टर, एक एएसआई, 2 कांस्टेबल और 4 हेड कांस्टेबल शामिल हैं। इस बारे में पुलिस उपायुक्त कार्यालय द्वारा सस्पेंशन आदेश जारी किए गए हैं।
भोपाल में ट्रांसफर के आदेश के बावजूद नई पदस्थापना स्थल पर रिपोर्ट नहीं करने वाले 8 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई नगरीय पुलिस उपयुक्त डीसीपी श्रद्धा तिवारी द्वारा की गई है। पुलिसकर्मियों ने अपने स्थानांतरण आदेश को अनदेखा किया था, जिसके चलते उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। निलंबित पुलिसकर्मियों में 1 सब इंस्पेक्टर, 1 सहायक उप-निरीक्षक, 2 कांस्टेबल और 4 हेड कांस्टेबल शामिल हैं।
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शिक्षा विभाग ने कड़ा कदम उठाते हुए 87 निजी स्कूलों की मान्यता की रद्द
देवास। जिले में शिक्षा विभाग ने कड़ा कदम उठाते हुए 87 निजी स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी है। यह कार्रवाई उन स्कूलों के खिलाफ की गई है जिन्होंने मान्यता प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए, गलत जानकारियां दीं और बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी भी की।
इस वर्ष जिले के लगभग 800 निजी स्कूलों ने मान्यता/नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था। जांच के दौरान पाया कि कई स्कूलों में अयोग्य शिक्षक कार्यरत थे। भवन मानक के अनुरूप नहीं और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं थी। कई स्कूलों ने पुराने फोटो, अपूर्ण जानकारी और भ्रमित दस्तावेज के सहारे मान्यता प्राप्त करने का प्रयास किया। कलेक्टर ऋतुराज सिंह के निर्देश पर डीपीसी अजय कुमार मिश्र द्वारा जांच कराई गई। जांच के पश्चात दोषी पाए गए 87 स्कूलों की मान्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई।
इन स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षा विभाग ने उन्हें निकटवर्ती शासकीय विद्यालयों में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है। स्कूलवार सूची तैयार कर समायोजन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। कुछ स्कूलों ने कलेक्टर के समक्ष अपील की थी, लेकिन उन अपीलों को भी निरस्त कर दिया गया। डीपीसी ने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी स्कूल मान्यता रद्द होने के बावजूद संचालन करता पाया गया तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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