टीकमगढ़. मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के ग्राम पंचायत मनेथा के गोवा पूर्वी ग्राम में बनी पानी की टंकी में शुक्रवार 16 जनवनरी को असामाजिक तत्वों द्वारा मैला डालने का मामला सामने आया. ऐसे में गांव में हड़कंप सा मच गया और लोगों ने अपने घरों में रखे पानी को बाहर फेंक दिया. वहीं मामला सामने आने पर सतर्क हुए एसडीएम ने टंकी से पेयजल की सप्लाई रोक दी है और इसका सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा है.
ग्राम गोवा पूर्वी में नलजल योजना के तहत पानी की टंकी का निर्माण किया गया है. इसी टंकी से पूरे गांव में पानी की सप्लाई की जाती है. शुक्रवार को इस टंकी में मैला डालने की खबर सामने आई. गांव के ही देवेन्द्र यादव ने सरपंच को फोन कर इसकी सूचना दी थी कि उन्होंने अपने साथियों के साथ पानी की टंकी में मैला डाल दिया है. कल से पानी सप्लाई मत करवाना. यह जानकारी लगते ही सरपंच ने इसकी शिकायत एसडीएम से की और इसका ऑडियो भी उन्हें भेज दिया.
यह खबर सामने आते ही एसडीएम अशोक कुमार सेन ने तत्काल ही जल निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए और पेयजल की सप्लाई बंद कराने को कहा. साथ ही इसकी शिकायत थाने में शिकायत दर्ज कराई. जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंच कर आरोपी देवेंद्र यादव की तलाश की, लेकिन वह फरार हो गया था. वहीं सूचना मिलते ही नलजल के अधिकारियों ने टंकी से पानी का सैंपल लेकर उसे जांच के लिए लैब में भेज दिया है. यहां से रिपोर्ट आने के बाद ही गांव में पानी की सप्लाई करने के निर्देश दिए गए है.
वहीं गांव में टंकी में गैला डालने की खबर के बाद लोग अंदर ही अंदर घृणित होते दिख और उन्होंने घरों में जमा किए गए पानी को बाहर सड़कों पर फेंक दिया. इसके बाद अपने बर्तनों को अच्छे से साफा किया और बाहर से पानी लाते दिखाई दिए. इस घटना से पूरे गांव को परेशान कर दिया है. लोगों ने ऐसा कृत्य करने वाले पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.
सूचना पर गांव में पानी की सप्लाई रोक दी गई है. इसकी जांच कराने के निर्देश दिए हैं. इस खबर को फैलाने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. यदि जांच में यह खबर सही पाई जाती है तो आरोपी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
- अशोक कुमार सैन, एसडीएम, पृथ्वीपुर
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50 सालों से नहीं सोया रिटायर्ड अफसर लगातार जाग रहे, शरीर में दर्द भी नहीं होता
रीवा. एमपी के रीवा जिले से एक आश्चर्यजनक मामला सामने आया है, जिसने मेडिकल साइंस के तमाम दावों को चुनौती दे दी है. यहां रहने वाले रिटायर्ड ज्वाइंट कलेक्टर मोहनलाल द्विवेदी का दावा है कि वे पिछले 50 सालों से एक पल के लिए भी नहीं सोए हैं.
आम तौर पर इंसान के लिए 24 घंटे में 6 से 8 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है, लेकिन 75 वर्षीय मोहनलाल का कहना है कि उन्होंने पांच दशकों से नींद नहीं ली है, इसके बावजूद उन्हें कोई गंभीर बीमारी नहीं है और वे पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी रहे हैं. उनकी इस अजीबोगरीब स्थिति ने डॉक्टरों को भी सोच में डाल दिया है.
रीवा की चाणक्यपुरी कॉलोनी के निवासी मोहनलाल द्विवेदी केवल अनिद्रा ही नहीं, बल्कि एक और रहस्यमयी स्थिति का सामना कर रहे हैं. उनका दावा है कि उनका शरीर पत्थर जैसा सख्त हो चुका है. स्थिति यह है कि चोट लगने पर भी उन्हें शरीर में किसी तरह के दर्द का अहसास नहीं होता. मोहनलाल बताते हैं कि साल 1973 में जब उनकी लेक्चरर की नौकरी लगी थी, उसके कुछ ही दिन बाद जुलाई महीने से उनकी नींद अचानक गायब हो गई. शुरुआत में उन्होंने यह बात किसी को नहीं बताई और पूरी रात जागकर बिताते रहे. हैरानी की बात यह थी कि पूरी रात जागने के बाद भी न तो उनकी आंखों में जलन होती थी और न ही उनकी दिनचर्या पर कोई असर पड़ता था.
जब समस्या बढ़ी तो परिजनों ने पहले झाड़-फूंक का सहारा लिया, लेकिन कोई फायदा न होने पर डॉक्टरी सलाह ली गई. मोहनलाल ने रीवा और जबलपुर से लेकर दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के बड़े अस्पतालों में जांच कराई, लेकिन डॉक्टर उनकी इस बीमारी की वजह नहीं ढूंढ पाए. दिलचस्प बात यह है कि मोहनलाल की पत्नी नर्मदा द्विवेदी भी नींद की समस्या से जूझ रही हैं और वह भी 24 घंटे में मात्र 3 से 4 घंटे ही सो पाती हैं. 1974 में एमपीपीएससी क्वालिफाई कर नायब तहसीलदार बनने और 2001 में ज्वाइंट कलेक्टर पद से रिटायर होने तक, उन्होंने अपना पूरा कार्यकाल बिना सोए ही बिता दिया. वे अपना रात का समय किताबें पढऩे और छत पर टहलने में बिताते हैं.
इस अनोखे मामले पर रीवा के संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा का कहना है कि मेडिकल साइंस में नींद न आने के हजारों कारण हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि मानसिक रोग विभाग में स्लीप डिसऑर्डर पर पूरी स्टडी की जाती है. डॉ. मिश्रा के अनुसार, यदि पति-पत्नी या परिवार में एक जैसी समस्या है, तो यह अनुवांशिक कारणों से भी हो सकता है. हालांकि, दर्द का अहसास न होना और 50 साल तक बिल्कुल न सोना एक बेहद दुर्लभ और जटिल स्थिति है. डॉक्टरों का मानना है कि विस्तृत जांच के बाद ही इस रहस्य से पर्दा उठ सकेगा कि आखिर मोहनलाल बिना नींद के इतने सालों से स्वस्थ कैसे हैं.
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मुरैना में नकली शराब का बड़ा भंडाफोड़, 600 लीटर स्प्रिट और राइफल के साथ 7 गिरफ्तार
मुरैना जिले के नाका गांव में पुलिस ने नकली शराब बनाने वाले बड़े प्लांट का भंडाफोड़ किया है। माता बसैया थाना पुलिस की टीम ने बीहड़ इलाके में आसन नदी के किनारे छापेमारी कर सात आरोपितों को गिरफ्तार किया। इस छापेमारी में 1000 लीटर अवैध शराब और 600 लीटर स्प्रिट बरामद हुआ।
आरोपितों के पास से 12 बोर की राइफल और चार कारतूस भी मिले। शुरुआती जांच में पता चला है कि नकली शराब ग्रामीण क्षेत्रों में खपाई जा रही थी और इसे आबकारी विभाग की असली शराब के कार्टन में पैक करके बाजार में भेजा जाता था। इस मामले में आबकारी एक्ट और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, नकली शराब प्लांट बीहड़ इलाके में असली शराब जैसी पैकिंग के साथ काम कर रहा था। आरोपितों ने स्प्रिट और अन्य केमिकल का उपयोग करके शराब तैयार की और उसे ग्रामीण इलाकों में बेचने का नेटवर्क बनाया।
बरामद सामग्री
1000 लीटर अवैध शराब
600 लीटर ओपी (स्प्रिट)
12 बोर राइफल और चार कारतूस
नकली शराब पैक करने के लिए कार्टन
माता बसैया थाना पुलिस ने सात आरोपितों को मौके से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ आबकारी एक्ट और आर्म्स एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपितों से पूछताछ जारी है और जल्द ही उनके नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। इसमें यह भी पता लगाया जा रहा है कि नकली शराब का व्यापार किस हद तक फैल चुका था।
अवैध शराब के सेवन से लोगों की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं। नकली शराब में स्प्रिट और अन्य केमिकल मिलाने से यह अत्यंत हानिकारक बन जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे असली शराब के नाम पर बेचने से कई बार लोगों की मौतें भी हो चुकी हैं। इस छापेमारी के बाद ग्रामीणों ने पुलिस की कार्यवाही की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब बाजार में नकली शराब की आपूर्ति रोकने में मदद मिलेगी और ग्रामीण सुरक्षित महसूस करेंगे।
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