जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में दो पाकिस्तानी आतंकी मारे गए। इनमें से एक आतंकी रुबानी उर्फ अबू माविया था, जो आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का बड़ा कमांडर माना जा रहा था और लंबे समय से इलाके में सक्रिय था।
मंगलवार शाम बसंतगढ़ इलाके के किया गांव के जंगलों में सुरक्षाबलों को आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिली। इसके बाद सेना, सीआरपीएफ, व्हाइट नाइट कोर और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर एक संयुक्त अभियान शुरू किया और पूरे इलाके को घेर लिया।
सुरक्षाबलों ने आतंकियों से संपर्क साधते ही जवाबी कार्रवाई शुरू की। करीब 20 मिनट तक चली फायरिंग में दोनों आतंकियों को मार गिराया गया। मुठभेड़ के दौरान आतंकियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाबलों की घेराबंदी के चलते वे बच नहीं सके।
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार रामनगर, बसंतगढ़ और बिलावर के जंगलों में अभी भी आतंकियों के छिपे होने की आशंका है। इसी वजह से पूरे इलाके में कड़ी निगरानी रखी जा रही है और सर्च ऑपरेशन जारी है।
इस ऑपरेशन में सुरक्षाबलों की सटीक रणनीति, आपसी तालमेल और पेशेवर कार्रवाई की सराहना की जा रही है। मुठभेड़ खत्म होने के बाद भी इलाके में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बनाए रखी गई है, ताकि किसी भी खतरे को समय रहते रोका जा सके।
इससे पहले 31 जनवरी को किश्तवाड़ जिले के जंगलों में भी सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। उस दौरान तीन जवान घायल हो गए थे, जबकि एक आतंकी भी जख्मी हुआ था। बसंतगढ़ के जंगल किश्तवाड़ जिले तक फैले हुए हैं।
पिछले साल 8 अप्रैल 2025 को जोफड़ इलाके में भी आतंकी मुठभेड़ हुई थी। उस समय तीन आतंकियों के घिरे होने की सूचना थी। इसके बाद 26 नवंबर को तीन संदिग्ध चिगला बलोता गांव में एक स्थानीय व्यक्ति से खाना लेकर पास के जंगल की ओर भाग गए थे। पहाड़ी और घने जंगलों का फायदा उठाकर आतंकी रात के अंधेरे में फरार हो गए थे।
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SIR पर सुप्रीम सुनवाई : ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को कहा Whatsapp Commission, जज से 5 मिनट मांगे, चुनाव आयोग को नोटिस
नई दिल्ली। वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने शीर्ष अदालत से लोगों के हितों की रक्षा करने की अपील की। अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी।
ममता बनर्जी की ओर से सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने बताया कि कैसे तार्किक विसंगति के नाम पर पश्चिम बंगाल में लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए। साथ ही उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि कैसे माता-पिता और बच्चों के सरनेम की वर्तनी में अंतर होने की वजह से नोटिस जा रहा है।
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने शीर्ष अदालत से अपनी बात रखने की अनुमति मांगी और कहा कि मैं बंगाल से हूं और समस्याओं को बेहतर बता सकती हूं। उन्होंने कहा कि हमें न्याय नहीं मिल रहा है, मैंने 6 बार चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। ममता बनर्जी ने कहा, मैं साधारण परिवार से हूं। मैं बहुत महत्वपूर्ण नहीं हूं, लेकिन मैं सभी के लिए लड़ रही हूं।
चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से बेहतरीन वकील आपका पक्ष रख रहे हैं। फिर ममता बनर्जी ने 5 मिनट अपनी बात रखने की इजाजत मांगी। जिस पर सीजेआई ने कहा कि हम आपको 15 मिनट देंगे।
बCJI ने कहा कि हम समाधान निकालेंगे। शीर्ष अदालत ने कहा, जो असली मतदाता हैं, उनका चुनावी अधिकार कोई नहीं छीन सकता है। हम जिम्मेदारी से नहीं भागेंगे। इसका समाधान निकालेंगे।
चुनाव आयोग की ओर से एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने कहा कि माइक्रो ऑब्जर्वर सिर्फ ERO की मदद कर रहे हैं। उन्हें कानून के मुताबिक ही पश्चिम बंगाल में लगाया गया है। उन्होंने कहा, ''हमने राज्य सरकार को कई बार लिखा कि क्लास टू अधिकारियों को ERO के तौर पर नियुक्त किया जाए। सिर्फ 80 अधिकारी दिए गए... गलती उनकी है, इसीलिए हमने माइक्रो ऑब्ज़र्वर नियुक्त किए हैं।
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‘गद्दार दोस्त’ से लेकर ‘देश का दुश्मन’ तक.. संसद के गेट पर रणवीर सिंह बिट्टू और राहुल गांधी में जबरदस्त भिड़ंत
संसद में आज एक अलग नजारा देखने को मिला जब संसद के मकर द्वार पर कांग्रेस सांसद हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे थे तो राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का आमना-सामना हुआ और जुबानी जंग देखने को मिली. इस दौरान जहां राहुल गांधी ने कांग्रेस सांसदों की तारीफ की तो वहीं केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को गद्दार दोस्त बताया. वीडियो में दिख रहा है कि राहुल गांधी बिट्टू की तरफ हैंड शेक करने के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं लेकिन बिट्टू हाथ आगे नहीं बढ़ाते हैं. ‘गद्दार दोस्त’ वाले कमेंट पर बिट्टू ने भी तुरंत पलटवार किया और कहा कि उनका “देश के दुश्मनों” से कोई लेना-देना नहीं है.
तीन बार कांग्रेस सांसद रह चुके रवनीत सिंह बिट्टू पहली बार 2009 में आनंदपुर साहिब से लोकसभा के लिए चुने गए थे. इसके बाद 2014 और 2019 में लुधियाना से जीते थे. खालिस्तान समर्थक कट्टरपंथी आवाजों के मुखर आलोचक माने जाने वाले बिट्टू 2024 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हो गए.
इस चुनाव में वह लुधियाना से पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वारिंग से लगभग 20 हजार वोटों से हार गए. चुनाव हारने के बावजूद केंद्र सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया रेल तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी.
बिट्टू महज 11 साल के थे जब उनके पिता का निधन हो गया. इसके बाद 20 साल की उम्र में उन्होंने अपने दादा और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह को भी खो दिया, जिनकी 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी. वर्ष 2007 में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद बिट्टू ने राजनीति में कदम रखा.
यह पहली बार नहीं जब बिट्टू और राहुल गांधी के बीच इस तरह की बयानबाजी चली हो. सितंबर 2024 में बिट्टू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर तीखा और विवादास्पद बयान दिया था. बिट्टू ने राहुल गांधी पर सिख समुदाय को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि सिख किसी भी राजनीतिक दल से बंधे नहीं हैं.
उन्होंने अमेरिका में सिखों को लेकर दिए गए राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, ‘राहुल गांधी ने सिखों को बांटने की कोशिश की है, सिख किसी पार्टी से जुड़ा नहीं है और यह चिंगारी लगाने की कोशिश है, राहुल गांधी देश के नंबर वन टेरेरिस्ट हैं.’
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