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अवैध रैट होल कोयला खदान में विस्फोट से 18 मजदूरों की मौत, कई अब भी फंसे

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नई दिल्ली. मेघालय के ईस्ट जैंतिया हिल्स जिले से गुरुवार को एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई, जहां एक संदिग्ध अवैध रैटहोल कोयला खदान में हुए भीषण विस्फोट में कम से कम 18 मजदूरों की मौत हो गई. इस हादसे के बाद पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है, वहीं कई अन्य मजदूरों के अभी भी खदान के भीतर फंसे होने की आशंका जताई जा रही है. घटना के बाद राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है और प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है.
यह विस्फोट जिले के थांगस्कु इलाके में स्थित एक कथित अवैध रैटहोल कोयला खदान में गुरुवार सुबह उस समय हुआ जब मजदूर कोयला निकालने का काम कर रहे थे. शुरुआती जानकारी के अनुसार, खदान के भीतर डायनामाइट ब्लास्ट हुआ, जिससे खदान के संकरे सुरंगनुमा हिस्से ढह गए और अंदर काम कर रहे मजदूर मलबे में दब गए. पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अब तक 18 शव निकाले जा चुके हैं, जबकि खदान में मौजूद कुल मजदूरों की संख्या अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है.
घटना की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तुरंत मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा से फोन पर बात कर स्थिति की जानकारी ली. अमित शाह ने मुख्यमंत्री को हर संभव केंद्रीय सहायता का भरोसा दिलाया है. सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्री ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो केंद्र सरकार की अतिरिक्त राहत और बचाव टीमें भी मौके पर भेजी जाएंगी. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फंसे हुए मजदूरों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना प्राथमिकता होनी चाहिए.
मेघालय के पुलिस महानिदेशक आई. नोंग्रांग ने बताया कि घटना के तुरंत बाद पुलिस, जिला प्रशासन और आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें मौके पर पहुंच गईं और सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया. उन्होंने कहा कि खदान बेहद संकरी और खतरनाक है, जिससे बचाव कार्य में काफी मुश्किलें आ रही हैं. इसके बावजूद टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं कि अंदर फंसे मजदूरों को खोजा जा सके और शवों को बाहर निकाला जा सके. डीजीपी ने यह भी कहा कि कुछ मजदूरों के जिंदा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी सतर्कता के साथ चलाया जा रहा है.
ईस्ट जैंतिया हिल्स के पुलिस अधीक्षक विकाश कुमार ने बताया कि इस हादसे में एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हुआ था, जिसे पहले सुतंगा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए शिलांग के अस्पताल में रेफर किया गया. उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में खदान के अवैध रूप से संचालित होने के संकेत मिले हैं, हालांकि विस्फोट के सटीक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो पाएगी. प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं.
मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने इस दर्दनाक हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि ईस्ट जैंतिया हिल्स में हुई इस दुखद कोयला खदान दुर्घटना से वह बेहद व्यथित हैं. मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है. उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इस घटना की व्यापक जांच कराई जाएगी और जो भी लोग इसके लिए जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि लोगों की जान की कीमत पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा.
बताया जा रहा है कि जिस खदान में यह हादसा हुआ, वह रैटहोल माइनिंग पद्धति पर आधारित थी. यह पद्धति बेहद खतरनाक मानी जाती है, क्योंकि इसमें तीन से चार फीट ऊंची संकरी सुरंगें खोदी जाती हैं, जिनमें मजदूरों को घुटनों के बल या रेंगते हुए अंदर जाना पड़ता है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की खदानों में वेंटिलेशन की कमी, गैस जमा होने और विस्फोट का खतरा हमेशा बना रहता है.
गौरतलब है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पर्यावरणीय नुकसान और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर वर्ष 2014 में रैटहोल माइनिंग पर प्रतिबंध लगा दिया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस प्रतिबंध को बरकरार रखते हुए केवल वैज्ञानिक और नियंत्रित तरीके से खनन की अनुमति दी थी. इसके बावजूद मेघालय के कुछ इलाकों में आज भी अवैध रूप से रैटहोल माइनिंग किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं. इस हादसे ने एक बार फिर अवैध खनन और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, खदान में काम करने वाले अधिकतर मजदूर बेहद गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं और अपनी जान जोखिम में डालकर रोजी-रोटी कमाने को मजबूर होते हैं. घटना के बाद इलाके में मातम पसरा हुआ है और मृतकों के परिजन बदहवासी की हालत में हैं. प्रशासन द्वारा मृतकों की पहचान और उनके परिवारों से संपर्क करने की प्रक्रिया जारी है.
इस बीच, राज्य सरकार ने राहत और मुआवजे को लेकर भी संकेत दिए हैं. अधिकारियों के अनुसार, मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने पर विचार किया जा रहा है और घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी. साथ ही अवैध खनन पर लगाम कसने के लिए सख्त कदम उठाने की बात भी कही जा रही है.
मेघालय में हुए इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अवैध रैटहोल माइनिंग न केवल पर्यावरण के लिए घातक है, बल्कि मजदूरों की जान के लिए भी एक बड़ा खतरा बनी हुई है. राहत और बचाव कार्य के साथ-साथ अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है और क्या इस घटना के बाद अवैध खनन के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाएगी या नहीं.
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फिल्म घूसखोर पंडत पर मचा बवाल, मेकर के चेहरे पर कालिख पोतेंगे, टायटल पर विवाद, ब्राह्मण समाज में आक्रोश
मुंबई. नेटफ्लिक्स पर अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म घूसखोर पंडत का टीजर जारी होते ही विवाद खड़ा हो गया है. देश के कई शहरों में ब्राह्मण समाज ने फिल्म के टायटल का विरोध किया है. इधर उज्जैन में भी फिल्म के नाम को लेकर अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने विरोध दर्ज कराते हुए ऐसी फिल्म बनाने वालों के मुंह पर कालिख पोतने की बात कही है.
ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स ने 3 फरवरी को मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म घूसखोर पंडत का टीजर रिलीज किया था. रिलीज से पहले ही फिल्म के टायटल को लेकर विवादों में फंस गई है. फिल्म के टाइटल को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है. इसमें आरोप लगाया गया है कि फिल्म का शीर्षक ब्राह्मण समुदाय के प्रति अपमानजनक है. इधर जयपुर और दिल्ली के बाद अब उज्जैन में भी फिल्म पर रोक लगाने की मांग उठने लगी है.
अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष महेश शर्मा ने बताया कि फिल्म के नाम में ही पंडितों और ब्राह्मणों का अपमान है. देश में ब्राह्मणों, क्षत्रिय और वैश्य समाज को गाली देने का पैटर्न चल गया है. अपमानित करने वाले शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है. एक कानून पंडितों के लिए बनाना चाहिए. हम निंदा करते हैं ऐसे फिल्म मेकर की. वक्त आने पर पुतले जलाए जाएंगे, हमारी नजर के सामने आएंगे तो मुंह पर कालिख पोती जाएगी.
उज्जैन में तीर्थ पंडा समिति के पंडित अमर डिब्बेवाला ने बताया कि फिल्म में पंडितों की घोर निंदा की गई है, ये निंदनीय अपराध है. ब्राह्मण समाज फिल्म के टायटल की निंदा करता है. सेंसर बोर्ड से आग्रह करते हैं कि इस तरह की फिल्मों पर रोक लगाई जाए.
टीचर में मनोज बाजपेयी सीनियर इंस्पेक्टर अजय दीक्षित के किरदार में नजर आ रहे हैं, जिन्हें दिल्ली में पंडित के नाम से जाना जाता है. फिल्म में उन्हें भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के रूप में दिखाया गया है. टीजर के मुताबिक दीक्षित 20 साल पहले एसआई के रूप में भर्ती हुए थे और अपने किए गए कारनामों की वजह से उन्हें बार-बार डिमोट किया गया.
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रेवड़ी कल्चर पर सुप्रीम सुनवाई : 'चांद और सूरज को छोड़कर सब कुछ देने का वादा करती हैं पॉलिटिकल पार्टियां'
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक जनहित याचिका पर मार्च महीने में सुनवाई करने की सहमति दी है, जिसमें चुनाव से पहले मुफ्त उपहार देने या बांटने वाली राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में ऐसी पार्टियों का चुनाव चिन्ह जब्त करने या उनका पंजीकरण रद्द करने का निर्देश देने की अपील की गई है। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ को बताया कि इस मामले में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को वर्ष 2022 में ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा कि सूर्य और चंद्रमा को छोड़कर राजनीतिक दल चुनाव के दौरान हर चीज का वादा करते हैं, जो एक तरह से भ्रष्ट आचरण है। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह निश्चित रूप से एक गंभीर और महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने याचिकाकर्ता से मार्च में इसे सूचीबद्ध कराने के लिए अदालत को याद दिलाने को कहा।
इससे पहले 25 जनवरी 2022 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा था। उस समय पीठ ने कहा था कि कई बार मुफ्त उपहारों का बजट नियमित बजट से भी अधिक हो जाता है, जो गंभीर चिंता का विषय है और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर असर डालता है।
याचिका में कहा गया है कि चुनाव से पहले सार्वजनिक धन से अतार्किक मुफ्त उपहार देने का वादा मतदाताओं को अनुचित रूप से प्रभावित करता है, जिससे निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया बाधित होती है। याचिका में इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना के खिलाफ बताया गया है। साथ ही चुनाव आयोग से मांग की गई है कि वह चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 में संशोधन कर यह शर्त जोड़े कि कोई भी राजनीतिक दल चुनाव से पहले सार्वजनिक निधि से मुफ्त उपहारों का वादा नहीं करेगा।