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कोयंबटूर CID ने 9600 करोड़ के घोटाले के आरोपी को दबोचा, जानिए कौन है आरोपी

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झारखंड के गिरिडीह जिले में कोयंबटूर सीआईडी ने 9600 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई की है। सीआईडी टीम ने जमुआ थाना क्षेत्र के जगन्नाथडीह निवासी गुलशन दाराद को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद सीआईडी आरोपी को अपने साथ कोयंबटूर लेकर रवाना हो गई। जानकारी के मुताबिक, गुलशन दाराद कोयंबटूर में एक टूरिज्म कंपनी का संचालन करता था। इसी साल जनवरी महीने में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद वह कोयंबटूर से फरार हो गया था। आरोपी की तलाश में कोयंबटूर स्थित कृष्णागिरी सीआईडी की टीम सोमवार को गिरिडीह पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से उसे गिरफ्तार किया।
वहीं, आरोपी के परिजनों ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गुलशन कई वर्षों से पर्यटन व्यवसाय से जुड़ा रहा है। उसे साजिश के तहत फंसाया गया है। परिजनों ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
झारखंड के गिरिडीह जिले में कोयंबटूर सीआईडी ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए 9600 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के आरोपी गुलशन दाराद को गिरफ्तार कर लिया है। कोयंबटूर सीआईडी आरोपी गुलशन दाराद को अपने साथ ले गई।
आरोपी के परिजनों ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गुलशन कई वर्षों से पर्यटन व्यवसाय से जुड़ा रहा है। उसे साजिश के तहत फंसाया गया है। परिजनों ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
गुलशन दाराद और उसके करीब आधा दर्जन सहयोगियों के खिलाफ कृष्णागिरी सीआईडी पुलिस ने 9600 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मामला दर्ज किया है। मामले के सामने आने के बाद से ही आरोपी फरार बताया जा रहा था।
सीआईडी की टीम में नकली करेंसी विंग और क्राइम ब्रांच सीआईडी कोयंबटूर के पुलिस इंस्पेक्टर शामिल थे। टीम ने जमुआ थाना पुलिस की मदद से सोमवार को आरोपी को उसके आवास से गिरफ्तार किया और आगे की कार्रवाई के लिए उसे अपने साथ ले गई।
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वंदे मातरम् गाना हुआ अनिवार्य, जन गण मन से पहले सभी स्कूलों में सभी 6 पैरा बजाना होगा, सिनेमाघरों को छूट
नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने वंदे मातरम को लेकर 11 फरवरी बुधवार को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. नए निर्देश के तहत, अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और कई महत्वपूर्ण आयोजनों में वंदे मातरम बजना अनिवार्य होगा. सभी लोगों को खड़े होकर इसका सम्मान करना होगा, ठीक वैसे ही जैसे राष्ट्रगान जन गण मन के समय होता है, लेकिन सिनेमा हॉल में फिल्मों के दौरान यह नियम लागू नहीं होगा.
सबसे अहम बात यह है कि गीत के पूरे छह छंद बजाए जाएंगे, जिनमें से चार छंद 1937 में कांग्रेस ने हटा दिए थे. यह फैसला स्वतंत्रता संग्राम के इस गीत को उसकी मूल शक्ति के साथ वापस लाने की कोशिश है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के इन नए नियमों के तहत वंदे मातरम को राष्ट्रगान के तुरंत बाद बजाया जाएगा. यानी पहले फिर जन गण मन. यह सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों में लागू होगा.
वंदे मातरम अब पद्म पुरस्कार जैसे नागरिक सम्मान समारोहों में भी बजाया जाएगा. राष्ट्रपति के किसी भी कार्यक्रम में उनके आने-जाने के समय यह गीत बजना जरूरी होगा. राष्ट्रपति या राज्यपालों के आगमन, प्रस्थान, उनके भाषण से पहले और बाद में भी यह नियम लागू होगा. तिरंगा फहराने के मौके पर भी इसका पालन होगा. गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब यह गीत बजाया या गाया जाएगा, तो मौजूद सभी लोग ध्यान मुद्रा में खड़े रहेंगे.
बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में वंदे मातरम लिखा था, जो 1882 में उनके उपन्यास आनंदमठ में छपा. इसमें कुल छह छंद हैं. शुरुआती छंद भारत को मां के रूप में चित्रित करते हैं. बाद के छंदों में दुर्गा, कमला (लक्ष्मी) और सरस्वती जैसी हिंदू देवियों का जिक्र है. 1937 में कांग्रेस ने फैजपुर अधिवेशन में सिर्फ पहले दो छंदों को अपनाया, क्योंकि कुछ मुस्लिम सदस्यों को देवियों के जिक्र से आपत्ति थी. अब सरकार ने फैसला किया है कि पूरे छह छंद ही बजेंगे, जो लगभग 3 मिनट 10 सेकंड लंबे होंगे.
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मुर्शिदाबाद हिंसा से जुड़े मामले में, ‘UAPA पर फैसला करेगा कलकत्ता हाईकोर्ट’, सुप्रीम कोर्ट ने NIA को दिया बड़ा निर्देश
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को निर्देश दिया है कि वह पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में कई हुई हिंसा और अशांति से संबंधित एक मामले में आतंकवाद से जुड़े कठोर प्रावधानों वाले गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के इस्तेमाल का औचित्य स्पष्ट करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय में सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दाखिल करे। मुर्शिदाबाद हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनआईए की तरफ से यूएपीए लगाने की वैधता अब कलकत्ता हाईकोर्ट तय करेगा।
देश की शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान यह कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट इस मामले में NIA जांच का आदेश देने के केंद्र के फैसले को राज्य सरकार की चुनौती की भी जांच कर सकता है.
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से की गई अपील का निपटारा करते हुए, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने राज्य सरकार से मुर्शिदाबाद हिंसा मामले में NIA जांच के खिलाफ अपनी शिकायतों के साथ कलकत्ता हाई कोर्ट जाने को भी कहा. देश की शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान यह कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट इस मामले में NIA जांच का आदेश देने के केंद्र के फैसले को राज्य सरकार की चुनौती की भी जांच कर सकता है.
इससे पहले 16 जनवरी को, झारखंड में बेलडांगा के रहने वाले एक प्रवासी मजदूर की कथित मौत को लेकर प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे 12 को करीब छह घंटे तक जाम कर रखा था. अगले दिन 17 जनवरी की सुबह भी, बिहार में मुर्शिदाबाद के रहने वाले एक प्रवासी मजदूर के साथ कथित तौर पर बदसलूकी को लेकर सड़क और रेल जाम कर दिया गया था.
फिर 20 जनवरी को, हाई कोर्ट ने मुर्शिदाबाद जिले में बार-बार भड़क रही हिंसा और अशांति की घटनाओं पर चिंता जताई और पुलिस तथा प्रशासन को वहां शांति बनाए रखने का निर्देश दिया. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल की अगुवाई वाली एक डिवीजन बेंच ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो राज्य सरकार केंद्रीय सुरक्षा बलों को भी बुला सकती है.
कलकत्ता हाई कोर्ट में 2 जनहित याचिका दायर की गईं, जिनमें मांग की गई थी कि मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की जाए, क्योंकि पड़ोसी राज्यों में प्रवासी मजदूरों पर कथित हमलों के सिलसिले में वहां हिंसा हुई थी.
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार NIA से जांच कराने का फैसला करने के लिए राज्य सरकार की रिपोर्ट देखेगी. इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को इस मामले में NIA जांच का आदेश दिया था.