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लॉरेंस गैंग का आतंक! रणवीर के बाद सलमान के जीजा को मिली धमकी, करोड़ों रुपए की मांग

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बॉलीवुड में एक बार फिर डर का माहौल बन गया है। अभिनेता रणवीर सिंह को व्हाट्सएप वॉइस नोट के जरिए धमकी मिलने के बाद अब सलमान खान के जीजा, अभिनेता आयुष शर्मा को प्रोटोनमेल ईमेल के माध्यम से करोड़ों रुपए की मांग के साथ धमकी मिली है। पुलिस का मानना है कि, इन धमकियों का संबंध लॉरेंस बिश्नोई गैंग से हो सकता है। इन घटनाओं ने इंडस्ट्री में सतर्कता और चिंता बढ़ा दी है।
10 फरवरी को रणवीर सिंह को व्हाट्सएप वॉइस नोट के जरिए धमकी मिली। संदेश में कहा गया कि, अगर करोड़ों रुपए नहीं दिए गए तो उनकी जान को गंभीर खतरा होगा। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए रणवीर के बांद्रा स्थित घर की सुरक्षा बढ़ा दी। मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच ने वॉइस नोट भेजने वाले शख्स की तलाश शुरू कर दी है। धमकी देने वाले ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य बताया। जांच में यह भी सामने आया कि, आरोपी ने अपनी पहचान छुपाने के लिए VPN का इस्तेमाल किया।
11 फरवरी को सलमान खान के जीजा और अभिनेता आयुष शर्मा को ईमेल के जरिए धमकी मिली। भेजने वाले ने खुद को लॉरेंस गैंग से जुड़ा बताया और करोड़ों रुपए की मांग की। धमकी देने वाले ने खुद को लॉरेंस गैंग का सदस्य बताया और कहा कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो जान को गंभीर खतरा होगा।
शुरुआती जानकारी में रिश्तेदार की पहचान साफ नहीं थी, लेकिन अब मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह व्यक्ति सलमान खान की छोटी बहन अर्पिता खान शर्मा के पति और अभिनेता आयुष शर्मा हैं। आयुष शर्मा फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हैं।
31 जनवरी की रात, डायरेक्टर रोहित शेट्टी के मुंबई स्थित घर के बाहर फायरिंग की घटना हुई थी। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि, क्या रणवीर सिंह और आयुष शर्मा को मिली धमकियों का इस फायरिंग मामले से कोई संबंध है। इस घटना में पुलिस के अनुसार, रोहित शेट्टी ही हमलावरों का मुख्य टारगेट बने थे।
रणवीर सिंह और आयुष शर्मा को मिली धमकियों की गहन जांच की जा रही है। पुलिस वॉइस नोट और ईमेल के स्रोत, IP एड्रेस और अन्य तकनीकी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। दोनों के घरों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। पुलिस का मानना है कि ये धमकियां मुख्य रूप से पैसे वसूली (extortion) के उद्देश्य से दी जा रही हैं।
इन धमकियों और फायरिंग की घटनाओं ने बॉलीवुड में सुरक्षा और सतर्कता का एक नया स्तर पैदा कर दिया है। कई सितारों ने अपने घर, कार्यस्थल और बाहर सुरक्षा बढ़ा दी है। इंडस्ट्री में डर और चिंता का माहौल साफ नजर आ रहा है। इसके साथ ही फिल्म जगत के प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स अब सुरक्षा उपायों पर पहले से अधिक ध्यान दे रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, यह धमकियां और फायरिंग के मामले मुख्य रूप से extortion के उद्देश्य से की जा रही हैं। रणवीर सिंह और रोहित शेट्टी के बीच पूर्व में काम किए प्रोजेक्ट्स जैसे ‘सिंघम अगेन’ आदि को देखते हुए संभावना जताई जा रही है कि धमकियों का उद्देश्य पैसा वसूलना हो सकता है।
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मणिपुर के उखरूल में हिंसा भड़की, कई घरों में आगजनी पुलिस स्टेशन पर भीड़ का हमला
मणिपुर के उखरूल जिले में एक बार फिर से हिंसा भड़कने से हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. जिले के लितान सरेइखोंग गांव में कर्फ्यू लागू होने के बावजूद गुरुवार को अज्ञात लोगों द्वारा दो घरों में आग लगा दी गई, जिसके बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. इस घटना के बाद सुरक्षा बलों और हथियारबंद उपद्रवियों के बीच करीब आधे घंटे तक गोलीबारी हुई. इसी बीच तांगखुल नागा समुदाय की महिलाओं के एक समूह ने लितान पुलिस स्टेशन पर धावा बोलने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गुरुवार सुबह करीब 7 बजे कुछ अज्ञात हमलावरों ने लितान सरेइखोंग गांव में दो मकानों को आग के हवाले कर दिया. सूचना मिलने के बाद मणिपुर फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग इतनी भीषण थी कि दोनों मकान पूरी तरह जलकर खाक हो गए. घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई और सुरक्षा बलों को स्थिति नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त जवान तैनात करने पड़े.
बताया जा रहा है कि सुबह करीब 8 बजकर 50 मिनट पर पुलिस और हथियारबंद बदमाशों के बीच जबरदस्त गोलीबारी हुई, जो करीब 30 मिनट तक चली. हालांकि इस गोलीबारी में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन इलाके में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है. पुलिस का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और सुरक्षा बल लगातार गश्त कर रहे हैं.
इस हिंसा की शुरुआत पिछले शनिवार को हुई थी जब लितान गांव में तांगखुल नागा और कुकी समुदाय के लोगों के बीच झड़प हो गई थी. इस झड़प में सकीबुंग गांव के निवासी स्टर्लिंग शिमरे नामक व्यक्ति घायल हो गए थे. घटना के बाद जिला मजिस्ट्रेट असीश दास ने 8 फरवरी की शाम 7 बजे से इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर दी थी, लेकिन इसके बावजूद हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है.
निषेधाज्ञा के बावजूद मंगलवार को अज्ञात हमलावरों ने लितान गांव में करीब 50 घरों को आग के हवाले कर दिया था, जिससे बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए. इस घटना के बाद प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उखरूल जिले में पांच दिनों के लिए इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी थीं. प्रशासन का मानना है कि इंटरनेट सेवाओं के जरिए अफवाह फैलने से स्थिति और बिगड़ सकती है, इसलिए एहतियातन यह कदम उठाया गया.
गुरुवार को हुई आगजनी की घटना के बाद तांगखुल नागा समुदाय की महिलाओं में भारी आक्रोश देखने को मिला. बड़ी संख्या में महिलाएं लितान पुलिस स्टेशन पहुंचीं और सुरक्षा बलों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन और पुलिस हिंसा को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है. प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने पुलिस स्टेशन में घुसने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कई राउंड आंसू गैस के गोले छोड़े. इसके बाद भीड़ धीरे-धीरे छंट गई.
दूसरी ओर, मणिपुर में राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भी तनाव की स्थिति बनी हुई है. गुरुवार को वैपहेई जनजाति की महिलाओं ने कुकी-जो समुदाय के विधायक एलएम खौटे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. विधायक खौटे हाल ही में मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के साथ इंफाल जाकर सरकार बनाने का दावा पेश करने पहुंचे थे. खौटे वैपहेई समुदाय से आते हैं, जो मणिपुर में कुकी-जो जनजातियों का हिस्सा माना जाता है.
वैपहेई महिला संघ के नेतृत्व में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं. प्रदर्शनकारियों ने सुबह चुराचांदपुर के डोरकास वेंग स्थित वैपहेई पीपुल्स काउंसिल हॉल में एकत्र होकर विधायक के आवास की ओर मार्च किया. प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने विधायक के फैसले पर नाराजगी जताई और इसे समुदाय के हितों के खिलाफ बताया.
जब प्रदर्शनकारी विधायक के घर की ओर बढ़ रहे थे, तब जोमी मदर्स एसोसिएशन के सदस्यों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया. यह संगठन कुकी और जोमी समुदाय के विभिन्न उपजनजातियों का प्रतिनिधित्व करता है. हालांकि प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि यह मामला वैपहेई समुदाय का आंतरिक मुद्दा है और इसमें किसी अन्य संगठन को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है.
स्थिति को बिगड़ता देख विधायक के आवास के पास तैनात रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कुछ राउंड फायरिंग की और उन्हें तितर-बितर कर दिया. दोपहर करीब 12 बजकर 45 मिनट पर प्रदर्शन पूरी तरह समाप्त हो गया और सुरक्षा बलों ने इलाके को अपने नियंत्रण में ले लिया.
मणिपुर में पिछले कुछ समय से विभिन्न समुदायों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी तरह की हिंसा को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं. राज्य सरकार ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है.
उखरूल जिले में हुई ताजा घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है. पुलिस और अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गई हैं और संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त की जा रही है. प्रशासन का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रही हिंसा से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. कई परिवार अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हो गए हैं. व्यापारिक गतिविधियां ठप पड़ गई हैं और लोगों में भय का माहौल बना हुआ है.
सरकार और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती शांति बहाल करना और विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास कायम करना है. राज्य में बढ़ते तनाव को देखते हुए केंद्र सरकार भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजने की तैयारी कर रही है. फिलहाल उखरूल सहित आसपास के इलाकों में स्थिति नाजुक लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है.
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दिल्ली बम धमाका : जैश-ए-मोहम्मद निकला मास्टरमाइंड, UN रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के लाल किले के पास हुए भीषण धमाके को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ताजा रिपोर्ट ने इस हमले के तार सीधे जैश-ए-मोहम्मद से जोड़ते हुए सीमा पार आतंकवाद की गंभीर सच्चाई उजागर की है। रिपोर्ट न सिर्फ भारत की चिंताओं को सही ठहराती है, बल्कि दक्षिण एशिया में आतंक के बदलते चेहरे और वैश्विक सुरक्षा के लिए बढ़ते खतरे की ओर भी इशारा करती है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 सैंक्शंस कमेटी को सौंपी गई 37वीं रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। इस हमले में 15 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई घायल हुए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक सदस्य देश ने यह जानकारी साझा की है कि जैश ने हमले की जिम्मेदारी स्वीकार की, हालांकि इस मुद्दे पर कुछ सदस्य देशों के बीच मतभेद भी दर्ज किए गए हैं।
10 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में लाल किले के पास एक कार बम धमाका हुआ था। हमले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को सौंपी गई। जांच एजेंसियों ने इसे एक व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल करार दिया, जिसमें पढ़े-लिखे और प्रोफेशनल लोगों की भूमिका सामने आई। अब तक इस केस में 9 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें तीन डॉक्टर भी शामिल हैं।
UN रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि, जैश-ए-मोहम्मद की सक्रियता को लेकर भारत और पाकिस्तान के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल उलट हैं। भारत का कहना है कि जैश अब भी सक्रिय है और सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। वहीं पाकिस्तान का दावा है कि, जैश और लश्कर जैसे संगठन प्रतिबंध के बाद निष्क्रिय हो चुके हैं। हालांकि, UN रिपोर्ट ने भारत की चिंता को गंभीरता से दर्ज किया है।
रिपोर्ट का एक और चौंकाने वाला पहलू जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर द्वारा बनाई गई महिला विंग ‘जमात-उल-मुमिनात’ से जुड़ा है। इस विंग का ऐलान 8 अक्टूबर को किया गया था, जिसका उद्देश्य आतंकी गतिविधियों को वैचारिक और लॉजिस्टिक समर्थन देना बताया गया है। फिलहाल यह संगठन संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची में शामिल नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इसकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। यह खुलासा आतंकवाद के बदलते और अधिक संगठित स्वरूप की ओर इशारा करता है।
UNSC की रिपोर्ट में अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद सुरक्षा बलों ने लगातार कार्रवाई करते हुए 28 जुलाई 2025 को तीन संदिग्ध आतंकवादियों को मार गिराया। संयुक्त राष्ट्र ने इस कार्रवाई को आतंक के खिलाफ अहम कदम बताया है और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण माना है।
रिपोर्ट में मई 2025 में भारत द्वारा पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर की गई कार्रवाई और उसके बाद चार दिनों तक चले सैन्य तनाव का भी जिक्र किया गया है। यह दिखाता है कि क्षेत्रीय सुरक्षा हालात कितने संवेदनशील बने हुए हैं।
इस रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के आतंकवाद विरोधी रुख को और मजबूती दी है। साथ ही, आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान के दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में आतंकी संगठनों के नए नेटवर्क, बदलती रणनीतियों और सहयोगी ढांचे का खुलासा हुआ है, जो वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी माना जा रहा है।