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मुंबई के बोरीवली में 7.88 करोड़ के सोने की चोरी, 3 आरोपी गिरफ्तार 1 फरार

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महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के बोरीवली इलाके में करोड़ों रुपये की चोरी से हड़कंप मच गया. एक ज्वेलरी शॉप को निशाना बनाकर चोर करीब 5 किलो सोना ले उड़े. पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस वारदात में अंदरूनी मिलीभगत शामिल थी. मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक नाबालिग को हिरासत में लेकर ऑब्जर्वेशन होम भेजा गया है. अब पुलिस फरार आरोपी की तलाश में जुटी है. मुंबई के बोरीवली में मौजूद माय गोल्ड प्वाइंट ज्वेलरी शॉप से 7.88 करोड़ रुपये का सोना चोरी हो गया. इस वारदात से इलाके में हड़कंप मच गया.
हालांकि पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, एक नाबालिग भी हिरासत में है. लेकिन एक आरोपी फरार चल रहा है. मुंबई के बोरीवली पश्चिम स्थित आईसी कॉलोनी में ‘माय गोल्ड प्वाइंट’ नाम की ज्वेलरी दुकान में यह बड़ी चोरी हुई.
यह इलाका मुंबई के प्रमुख रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों में गिना जाता है. घटना 13 और 14 जनवरी 2026 की दरमियानी रात की है. सुबह जब दुकान खुली तो शोकेस खाली मिले और लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों का सोना गायब था. चोरी किए गए गहनों की कीमत बाजार में करीब 7 करोड़ 88 लाख रुपये बताई जा रही है.
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने दुकान का ताला तोड़ने के बजाय डुप्लीकेट चाबी का इस्तेमाल किया. इसी वजह से पहली नजर में कोई जबरन घुसपैठ के निशान नहीं मिले. आरोपियों ने बड़ी सफाई से शोकेस में रखे करीब 5 किलो सोने के आभूषण समेटे और फरार हो गए.
घटना के तुरंत बाद दुकान के दो कर्मचारी अचानक गायब हो गए, जिससे शक और गहरा गया. पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और जांच तेज कर दी. जांच में पता चला कि दुकान बंद करने और चाबी संभालने की जिम्मेदारी इन्हीं कर्मचारियों के पास थी. इसी भरोसे का फायदा उठाकर डुप्लीकेट चाबी बनाई गई और वारदात को अंजाम दिया गया. अंदरूनी मिलीभगत की पुष्टि के बाद पुलिस ने संदिग्धों की तलाश शुरू की.
जांच में एक नाबालिग की भूमिका भी सामने आई, जिसे हिरासत में लेकर ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया गया है. पुलिस का कहना है कि बाकी सोना बरामद करने के लिए पूछताछ जारी है. मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी गणपत चदाना (26) और किशनलाल उर्फ भैरू बगालाल रेबारी (21) को गिरफ्तार कर लिया है. पूछताछ में दोनों ने अहम खुलासे किए हैं. उनकी निशानदेही पर अब तक 3 किलो 100 ग्राम सोना बरामद किया जा चुका है.
जांच में यह भी सामने आया है कि फरार आरोपी को भागने में उसके साथियों ने वाहन और अन्य संसाधनों की मदद दी थी. पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है. तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय नेटवर्क के जरिए आरोपी को पकड़ने की कोशिश जारी है. पुलिस के मुताबिक, इस वारदात में एक अन्य आरोपी अभी भी फरार है. आशंका है कि उसके पास करीब 4 किलो सोना मौजूद है.
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कश्मीरी गेट फायरिंग: लॉरेंस बिश्नोई के वकील पर गोली चलाने वाला आरोपी रोहित सोलंकी गिरफ्तार
कश्मीरी गेट इलाके में हाल ही में हुई फायरिंग की घटना में दिल्ली पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने रोहित गोदारा गैंग के मुख्य आरोपी रोहित सोलंकी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, सोलंकी ने गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की लीगल टीम पर हमला किया था। इस हमले में लॉरेंस बिश्नोई के वकील दीपक खत्री और उनके साथियों को निशाना बनाया गया था। यह वारदात पिछले मंगलवार की है, जब कश्मीरी गेट इलाके में सोलंकी और उसके सहयोगियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की। इस दौरान वकील और उनके साथ मौजूद लोग गोलीबारी में बच गए, लेकिन इलाके में हड़कंप मच गया।
लॉरेंस बिश्नोई के वकील दीपक खत्री और उनके साथियों पर हुई फायरिंग मामले में दिल्ली पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी रोहित सोलंकी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, सोलंकी रोहित गोदारा गैंग का सदस्य है और घटना के बाद फरार हो गया था। पुलिस ने बताया कि आरोपी से फिलहाल पूछताछ जारी है और मामले के पीछे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। इसके साथ ही आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि इस फायरिंग मामले में अन्य लोगों के शामिल होने की भी आशंका है, जिसे लेकर भी जांच की जा रही है। इस वारदात में लॉरेंस बिश्नोई की लीगल टीम को निशाना बनाया गया था। दिल्ली पुलिस ने प्रारंभिक जांच में बताया कि घटना के पीछे गैंग रंजिश और आपसी विवाद की संभावना है।
दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके में मंगलवार (24 फरवरी) को गैंगस्टर के वकील दीपक खत्री और उनके चार साथी कार में सवार थे, जब उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। आरोपी ने इस दौरान चार राउंड गोलियां चलाईं। पुलिस के अनुसार, घटना में कार का शीशा टूट गया, लेकिन किसी की जान को कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ। केवल एक व्यक्ति घायल हुआ, जिसकी कमर में गोली लगी थी और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। दीपक खत्री ने घटना के बाद बताया कि वारदात कश्मीरी गेट के हनुमान मंदिर के पास हुई थी। वकील ने कहा कि भगवान की दया से वे सभी सुरक्षित रहे।
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खामेनेई की हत्या पर भारत की चुप्पी क्यों? सोनिया गांधी ने उठाए गंभीर सवाल
नई दिल्ली। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित टारगेट किलिंग के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस घटना ने मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि वैश्विक कूटनीति को भी झकझोर दिया है। इसी बीच भारत की प्रतिक्रिया को लेकर देश के अंदर भी राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि, इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटना पर भारत सरकार की चुप्पी तटस्थता (न्यूट्रल रहना) नहीं बल्कि जिम्मेदारी से बचना है। उन्होंने मांग की है कि, संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
सोनिया गांधी ने एक राष्ट्रीय अखबार में प्रकाशित अपने लेख में कहा कि जब किसी देश के मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की हत्या होती है और दुनिया के लोकतांत्रिक देश इस पर स्पष्ट रुख नहीं लेते, तो इससे अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक व्यवस्था दोनों कमजोर पड़ती हैं।
सोनिया गांधी ने अपने लेख में कहा कि, 1 मार्च को ईरान ने पुष्टि की थी कि उसके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली हुसैनी खामेनेई की अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए लक्षित हमलों में मौत हो गई। यह हमला ऐसे समय में हुआ जब क्षेत्र में कूटनीतिक बातचीत चल रही थी।
उन्होंने लिखा कि, किसी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की हत्या समकालीन अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक गहरी दरार का संकेत है। लेकिन इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात भारत सरकार की चुप्पी है।
सोनिया गांधी के अनुसार, भारत जैसे बड़े लोकतंत्र से यह उम्मीद की जाती है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के मुद्दों पर स्पष्ट और नैतिक रुख अपनाए। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।
सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुरुआती बयानों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले का जिक्र किए बिना केवल संयुक्त अरब अमीरात पर ईरान की जवाबी कार्रवाई की निंदा की। उनके अनुसार, घटनाओं के पूरे क्रम को नजरअंदाज करना कूटनीतिक दृष्टि से सही नहीं माना जा सकता।
सोनिया गांधी ने कहा कि, बाद में प्रधानमंत्री ने केवल गहरी चिंता व्यक्त की और संवाद व कूटनीति की बात कही, जबकि इससे पहले ही बड़े पैमाने पर सैन्य हमले किए जा चुके थे।
सोनिया गांधी ने अपने लेख में यह भी कहा कि किसी विदेशी नेता की लक्षित हत्या पर भारत की ओर से संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट समर्थन नहीं किया गया। उनके मुताबिक, इससे भारत की विदेश नीति की दिशा और उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने लिखा कि, भारत लंबे समय से नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की वकालत करता रहा है। लेकिन जब कठिन परिस्थितियों में देश स्पष्ट रुख नहीं लेता, तो उसके नैतिक तर्क कमजोर पड़ जाते हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि, जब संसद का बजट सत्र दोबारा शुरू होगा, तब सरकार की इस चिंताजनक चुप्पी पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि, पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ती स्थिति और अंतरराष्ट्रीय मानकों के कमजोर होने का असर भारत के रणनीतिक और नैतिक हितों पर भी पड़ सकता है।
सोनिया गांधी के अनुसार, संसद में इस विषय पर बिना किसी बचाव के गंभीर बहस होनी चाहिए, ताकि सरकार अपनी विदेश नीति के रुख को स्पष्ट कर सके।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सोनिया गांधी का लेख साझा करते हुए कहा कि जब किसी विदेशी नेता की लक्षित हत्या पर भारत स्पष्ट रूप से संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन नहीं करता, तो इससे देश की विदेश नीति की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। राहुल गांधी ने लिखा कि ऐसे समय में चुप रहना तटस्थता नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि, भारत को अपनी नैतिक शक्ति बनाए रखने के लिए शांति, संप्रभुता और संवाद के पक्ष में खड़ा होना चाहिए।
सोनिया गांधी ने अपने लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि, खामेनेई की हत्या से महज 48 घंटे पहले प्रधानमंत्री इजरायल से लौटे थे, जहां उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के प्रति अपना समर्थन दोहराया था।
सोनिया गांधी के अनुसार, यह समर्थन उस समय दिया गया जब गाजा संघर्ष में बड़ी संख्या में नागरिकों, महिलाओं और बच्चों की मौत को लेकर दुनिया भर में आक्रोश देखा जा रहा था।
अपने लेख में सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि वैश्विक दक्षिण के कई देशों के साथ-साथ भारत के ब्रिक्स सहयोगी रूस और चीन ने भी इस मामले में दूरी बनाए रखी है। उनके मुताबिक, ऐसे समय में भारत का बिना स्पष्ट नैतिक आधार के किसी पक्ष के करीब दिखाई देना एक चिंताजनक बदलाव का संकेत देता है।
उन्होंने कहा कि, इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत की छवि प्रभावित हो सकती है।
सोनिया गांधी ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 51 का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि, इस अनुच्छेद के अनुसार भारत की विदेश नीति का आधार अंतरराष्ट्रीय शांति, न्याय, संप्रभुता का सम्मान और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान होना चाहिए।
उन्होंने लिखा कि, भारत ने हमेशा बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता दी है, इसलिए ऐसे मामलों में स्पष्ट रुख अपनाना जरूरी है।
अपने लेख में सोनिया गांधी ने भारत और ईरान के पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि, 1994 में जब इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के कुछ देशों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में कश्मीर के मुद्दे पर भारत के खिलाफ प्रस्ताव लाने की कोशिश की थी, तब ईरान ने उसे रोकने में अहम भूमिका निभाई थी।
इसके अलावा ईरान ने पाकिस्तान सीमा के पास ज़ाहेदान में भारत को कूटनीतिक मौजूदगी की अनुमति भी दी, जो क्षेत्रीय रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। ऐसे में पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का सीधा असर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि, भारत अतीत में कई संकटों के दौरान अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने में सफल रहा है क्योंकि दुनिया उसे एक स्वतंत्र और संतुलित देश के रूप में देखती थी।
बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई शहरों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे। इन हमलों में सैन्य कमांड सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल ठिकानों और सरकारी ढांचों को निशाना बनाया गया।
इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और उनके सहयोगी देशों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से जवाबी हमला किया। इस घटनाक्रम के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है और क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि, भारत के लिए यह स्थिति कूटनीतिक रूप से बेहद जटिल है। भारत के इजरायल और ईरान दोनों देशों से रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। वहीं खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं। ऐसे में भारत को संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
सोनिया गांधी के बयान के बाद भारत की विदेश नीति को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। कांग्रेस का कहना है कि, भारत को अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए, जबकि सरकार के समर्थकों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में संतुलित और सावधानीपूर्ण कूटनीति जरूरी होती है।
अब देखना होगा कि संसद के आगामी सत्र में यह मुद्दा कितना राजनीतिक रूप लेता है और सरकार इस पर क्या जवाब देती है।