बिलासपुर। जानकारी के मुताबिक, होली के दिन बिल्हा पुलिस को सूचना मिली थी कि पेंडरवा निवासी एक व्यक्ति के साथ गांव के कुछ युवकों ने मारपीट की है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस टीम गांव पहुंची और शख्स को थाने लाकर FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की। इसी बीच उनकी बेटी ने पुलिस को फोन कर बताया कि- मारपीट करने वाले युवक उसके घर के सामने आकर हंगामा कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस दोबारा गांव की ओर रवाना हुई।
रास्ते में निपनिया के पास पुलिस को संदिग्ध युवकों की क्षतिग्रस्त अवस्था में कार मिली। पुलिस ने कार चालक को हिरासत में लेकर थाने ले जाने की कार्रवाई शुरू की। तभी गांव के कुछ लोग मौके पर पहुंच गए और पुलिस कार्रवाई का विरोध करने लगे। आरोप है कि उन्होंने चालक को छुड़ाने की कोशिश की और पुलिसकर्मियों से बहस करते हुए हाथापाई शुरू कर दी।
इसी के साथ यह भी बताया जा रहा है कि कुछ लोगों को फोन कर मौके पर बुलाया गया, जिसके बाद स्थिति और बिगड़ गई। महिला आरक्षक के साथ धक्का-मुक्की की गई, जबकि दूसरी आरक्षक की वर्दी फाड़ दी गई। बीच-बचाव करने पहुंचे आरक्षक से भी मारपीट की गई। हालात काबू करने के दौरान थाना प्रभारी भी घायल हुए हैं।
मामले की सूचना मिलते ही थाने से अतिरिक्त पुलिस बल तत्काल मौके पर भेजा गया। पुलिस कर्मचारियों को आता देख आरोपी और उनके समर्थक वहां से फरार हो गए। हालात पर काबू पाने के बाद पुलिस ने कार चालक को सुरक्षित हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया। फिलहाल पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्जकर सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
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‘सिर्फ व्हाट्सएप चैट के आधार पर तलाक का आदेश नहीं दे सकते’, हाई कोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक ऐसे फैसले को पलट दिया है। इस फैसले में सिर्फ व्हाट्सएप चैट्स के आधार पर पति को उसकी पत्नी से क्रूरता का हवाला देकर तलाक मिल गया था। कोर्ट ने साफ कहा कि महज मैसेज दिखाकर तलाक नहीं दिया जा सकता, जब तक कि ठोस सबूत पेश न किए जाएं और दूसरी पार्टी को अपना पक्ष रखने का मौका न मिले। यह फैसला 27 फरवरी को जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजुषा देशपांडे की बेंच ने दिया। कोर्ट ने नासिक फैमिली कोर्ट के मई 2025 के आदेश को पूरी तरह रद कर दिया और मामले को वापस उसी कोर्ट में भेज दिया है, जहां अब दोनों पक्षों को सबूत पेश करने और बहस करने का पूरा मौका मिलेगा।
यह मामला हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13(1)(ia) के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक से जुड़ा है। पति ने दावा किया था कि पत्नी ने उसे और उसके परिवार को मानसिक रूप से परेशान किया। फैमिली कोर्ट ने पति की बात को सही माना और तलाक दे दिया, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे गलत ठहराया।
नासिक फैमिली कोर्ट ने पति की गवाही को व्हाट्सएप और एसएमएस चैट्स से समर्थन मिलने की बात कही थी। कोर्ट के मुताबिक, पत्नी बार-बार नासिक छोड़कर पुणे शिफ्ट होने की जिद कर रही थी, जहां वह ससुराल वालों को छोड़ना चाहती थी। चैट्स में सास और ननद के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक बातें भी थीं। पत्नी ने पति के इनकार पर दबाव बनाने, इमोशनल ब्लैकमेल करने और गुस्से में कड़वी-कड़वी भाषा इस्तेमाल करने का आरोप लगा था।
फैमिली कोर्ट ने कहा था कि पत्नी ऐसी हरकतें नहीं कर सकती, इसलिए पति को उसके साथ रहना जरूरी नहीं है। इस आधार पर तलाक मंजूर कर दिया गया। कोर्ट ने पति की गवाही को ‘अनचैलेंज्ड’ यानी बिना विरोध के माना, क्योंकि मामला एक्स-पार्टे (एक तरफा) चला था। पत्नी को सुनवाई का मौका नहीं मिला था।
हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश की जांच की और पाया कि सिर्फ चैट्स पर भरोसा करके तलाक नहीं दिया जा सकता। जजों ने कहा, “महज व्हाट्सएप चैट्स पर निर्भर रहकर तलाक का फैसला नहीं हो सकता, क्योंकि इसे ठीक से सबूत के तौर पर पेश नहीं किया गया।” कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पत्नी को इन चैट्स का जवाब देने या उन्हें चुनौती देने का कोई मौका नहीं दिया गया।
जस्टिस डांगरे और देशपांडे ने कहा कि क्रूरता साबित करने के लिए सही तरीके से सबूत पेश करना जरूरी है। बिना दूसरी पार्टी को सुने और बिना क्रॉस-एग्जामिनेशन के ऐसे संवेदनशील फैसले नहीं हो सकते। इसलिए उन्होंने फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया।
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मशहूर अभिनेत्री वर्षा उसगांवकर से 47 लाख की ठगी, बिल्डर-प्रोड्यूसर पर केस
मुंबई। ठगी के एक मामले में अभिनेत्री वर्षा उसगांवकर ने शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है। अभिनेत्री ने आरोप लगाया है कि निवेश के नाम पर उनसे और अन्य लोगों से लाखों रुपए की ठगी की गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री वर्षा उसगांवकर धोखाधड़ी का शिकार हो गई हैं। वर्षा ने आरोप लगाया है कि एक फिल्म प्रोड्यूसर और बिल्डर ने उनसे और अन्य अभिनेत्रियों से करीब 47 लाख रुपए ठग लिए। इस मामले में शिवाजी पार्क पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता मृणालिनी सुभाष जांभले मराठी थिएटर और फिल्मों से जुड़ी अभिनेत्री हैं। उनका आरोपी अविनाश जाधव के साथ कारोबारी संबंध था। जाधव ने खुद को एक प्रतिष्ठित बिल्डर और फिल्म निर्माता बताते हुए डोंबिवली में एक निर्माण परियोजना में निवेश करने का प्रस्ताव दिया। उसने कम समय में ज्यादा मुनाफा देने और एक साल के भीतर पूरी मूल रकम वापस करने का भरोसा दिलाया था।
नवंबर 2019 से फरवरी 2020 के बीच मृणालिनी जांभले, वर्षा उसगांवकर और तीन अन्य लोगों ने चेक और ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए आरोपी को कुल 47 लाख रुपए दिए। शुरुआत में आरोपी ने भरोसा जीतने के लिए 4.52 लाख रुपए वापस भी किए, लेकिन बाद में भुगतान बंद कर दिया। पीड़ितों का आरोप है कि जब उन्होंने बार-बार संपर्क करने की कोशिश की तो आरोपी ने अपना मोबाइल नंबर और पता बदल लिया। बाद में जब वे डोंबिवली में उससे मिले और पैसे मांगे, तो उसने कथित तौर पर धमकी देते हुए पैसे लौटाने से इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़ित अभिनेत्रियों ने शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने इसी तरह अन्य लोगों के साथ भी धोखाधड़ी की है।




