This website uses cookies to ensure you get the best experience on our website.

राम रहीम को बड़ी राहत : पत्रकार हत्याकांड में हाईकोर्ट ने किया बरी, तीन आरोपियों की उम्रकैद बरकरार

User Rating: 5 / 5

Star ActiveStar ActiveStar ActiveStar ActiveStar Active
 

चंडीगढ़। करीब 23 साल पुराने चर्चित पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को इस मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि, उनके खिलाफ साजिश रचने के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इस केस में दोषी ठहराए गए तीन अन्य आरोपियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है।
यह मामला देश के चर्चित आपराधिक मामलों में से एक रहा है, जिसमें एक पत्रकार की हत्या, डेरा प्रमुख पर लगे गंभीर आरोप और लंबे कानूनी संघर्ष ने इसे सुर्खियों में बनाए रखा।
हरियाणा के सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या वर्ष 2002 में गोली मारकर की गई थी। उन्होंने अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा से जुड़े गंभीर आरोपों को प्रकाशित किया था। इन आरोपों में डेरे में साध्वियों के यौन शोषण से संबंधित एक चिट्ठी भी शामिल थी, जिसे छत्रपति ने अपने अखबार में प्रकाशित किया था। इसके बाद उन्हें लगातार धमकियां मिलने लगीं।
आखिरकार 19 अक्टूबर 2002 की रात को उनके घर के बाहर अज्ञात हमलावरों ने उन पर गोलियां चला दीं। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन 21 अक्टूबर 2002 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के बाद गुरमीत राम रहीम को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि, उपलब्ध सबूतों के आधार पर यह साबित नहीं होता कि राम रहीम इस हत्याकांड की साजिश में शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि, अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूत राम रहीम को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए उन्हें इस मामले में राहत दी जाती है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत और गवाह मौजूद हैं। इसी आधार पर उनकी सजा को बरकरार रखा गया है।
हालांकि, राम रहीम को साध्वियों के यौन शोषण केस में 10 साल कैद की सजा हुई है। जिसकी वजह से राम रहीम को अभी जेल में ही रहना होगा।
इस केस में हाईकोर्ट ने तीन आरोपियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। इन आरोपियों में शामिल हैं-
कुलदीप सिंह
निर्मल सिंह
कृष्ण लाल
अदालत ने कहा कि, इन तीनों के खिलाफ उपलब्ध सबूत और गवाह उनकी भूमिका को स्पष्ट रूप से स्थापित करते हैं।
इससे पहले 17 जनवरी 2019 को पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाया था। सीबीआई कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम समेत चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा जुर्माने का भी प्रावधान किया गया था। इस फैसले के खिलाफ सभी दोषियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अब अपना फैसला सुनाया है।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और सीबीआई दोनों की ओर से कई अहम दलीलें दी गईं। राम रहीम के वकील बसंत राय ने अदालत में कहा कि इस मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने कहा कि, पत्रकार को लगी गोली सॉफ्ट लेड से बनी थी। वकील ने यह भी तर्क दिया कि, ऐसी गोलियां आमतौर पर सैन्य उपकरणों और स्नाइपर में इस्तेमाल की जाती हैं।
उन्होंने अदालत को बताया कि, घटना को 23 साल बीत चुके हैं और अब गोली पर मौजूद निशान या पहचान चिन्ह स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं।
कोर्ट में यह भी सवाल उठा कि, जिस कंटेनर में गोली रखी गई थी, उस पर एम्स की सील लगी हुई थी और फोरेंसिक विशेषज्ञों के हस्ताक्षर भी मौजूद थे। बचाव पक्ष ने पूछा कि, अगर कंटेनर की सील कभी खोली ही नहीं गई, तो फिर फोरेंसिक लैब ने गोली की जांच कैसे की। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि विशेषज्ञों के हस्ताक्षर गोली पर थे या कंटेनर पर। इन सवालों के आधार पर अदालत ने सबूतों को पर्याप्त नहीं माना।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि, प्रस्तुत की गई गोलियों पर कोई स्पष्ट निशान दिखाई नहीं दे रहे हैं। अदालत ने शिकायत पक्ष के वकील से पूछा कि, फोरेंसिक विशेषज्ञों ने गोली पर हस्ताक्षर किए थे या कंटेनर पर। इस पर शिकायत पक्ष की ओर से कहा गया कि, कंटेनर पर विशेषज्ञों के हस्ताक्षर मौजूद हैं, लेकिन गोली पर हस्ताक्षर के निशान अब स्पष्ट नहीं दिखाई दे रहे।
राम रहीम पर तीन बड़े केस
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर अलग-अलग मामलों में कई गंभीर आरोप लगे थे।
1. साध्वी यौन शोषण केस
वर्ष 2017 में पंचकूला की विशेष अदालत ने दो साध्वियों के यौन शोषण के मामले में राम रहीम को दोषी ठहराया था। इस मामले में उन्हें 20 साल की सजा सुनाई गई थी।
2. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस
इस मामले में जनवरी 2019 में सीबीआई कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट ने इस मामले में उन्हें बरी कर दिया है।
3. डेरा मैनेजर रणजीत सिंह हत्याकांड
इस केस में भी हाईकोर्ट ने राम रहीम को बरी कर दिया था। हालांकि, इस फैसले को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
हालांकि हाईकोर्ट से इस मामले में राहत मिलने के बावजूद राम रहीम अभी जेल से बाहर नहीं आ सकेगा। इसकी वजह यह है कि, साध्वी यौन शोषण मामले में उसे 20 साल की सजा सुनाई जा चुकी है और वह फिलहाल उसी सजा के तहत जेल में बंद है।
रामचंद्र छत्रपति हरियाणा के सिरसा जिले के रहने वाले पत्रकार थे। उन्होंने वर्ष 2000 में वकालत छोड़कर पत्रकारिता शुरू की और सिरसा से अपना अखबार प्रकाशित करना शुरू किया।
2002 में उन्हें एक गुमनाम चिट्ठी मिली जिसमें डेरा सच्चा सौदा में साध्वियों के यौन शोषण का आरोप लगाया गया था। छत्रपति ने 30 मई 2002 को इस चिट्ठी को अपने अखबार में प्रकाशित कर दिया। इसके बाद उन्हें लगातार धमकियां मिलने लगीं।
परिवार के अनुसार चिट्ठी प्रकाशित होने के बाद कई महीनों तक उन्हें धमकियां मिलती रहीं। 19 अक्टूबर 2002 की रात को जब रामचंद्र छत्रपति अपने घर के बाहर मौजूद थे, तभी हमलावरों ने उन पर गोली चला दी। उन्हें कुल पांच गोलियां मारी गईं। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन दो दिन बाद उनकी मौत हो गई।
शुरुआत में पुलिस जांच से परिवार संतुष्ट नहीं था। इसके बाद पत्रकार के परिवार ने मुख्यमंत्री से मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की। जनवरी 2003 में उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इसके बाद 10 नवंबर 2003 को हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया।
----------------------------------------
गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने पर भड़की कांग्रेस, प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका पर उठाए सवाल
घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद कांग्रेस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने पीएम को महंगाई मैन बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार महंगाई का बोझ सीधे आम लोगों पर डाल रही है। दरअसल, कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मोदी सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाकर आम परिवारों के बजट पर सीधा हमला किया है। वहीं 19 किलोग्राम वाले व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। पार्टी ने यह भी दावा किया कि पिछले तीन महीनों में व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 307 रुपये तक बढ़ चुकी है।
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों को सस्ता और टिकाऊ ईंधन उपलब्ध कराना है। खेड़ा ने तंज कसते हुए लिखा कि एक दिन बाद ही घरेलू एलपीजी की कीमत 60 रुपये और व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 115 रुपये बढ़ा दी गई। खेड़ा कहा कि हरदीप सिंह पुरी जो कहते हैं, उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
दरअसल पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि देश में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर किसी तरह की कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य नागरिकों को किफायती और टिकाऊ ईंधन उपलब्ध कराना है।
सूत्रों के अनुसार, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 7 मार्च से देशभर में 60 रुपये बढ़ा दी गई है। वहीं होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के व्यावसायिक सिलेंडर के दाम में भी 115 रुपये की बढ़ोतरी लागू हो गई है।
इससे पहले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अप्रैल 2025 से स्थिर थी, जब दिल्ली में गैर-सब्सिडी वाला सिलेंडर 853 रुपये का था। नई बढ़ोतरी से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ एलपीजी पर निर्भर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लागत भी बढ़ेगी।
इस बीच इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने भी सोशल मीडिया पर पेट्रोल और डीजल की कमी से जुड़ी खबरों को खारिज करते हुए कहा कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार है और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य रूप से चल रही है। कंपनी ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।
---------------------------------------
बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा की हो रही मांग
बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होना है, और पहले ही दिन लोकसभा में हंगामा देखने को मिल सकता है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने से जुड़े विपक्ष के प्रस्ताव पर सोमवार को ही लोकसभा में चर्चा होने की संभावना है. लोकसभा सचिवालय की ओर से 9 मार्च के लिए जो कार्यसूची जारी की गई है, उसके मुताबिक़ उस दिन प्रश्नकाल के अलावा केवल इस प्रस्ताव पर चर्चा से जुड़ी कार्यवाही को ही शामिल किया गया है. कांग्रेस ने अपने सांसदों से कहा है कि वे इन दिनों सदन में मौजूद रहें क्योंकि लोकसभा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा की संभावना है। वहीं भाजपा ने भी सांसदों को मौजूद रहने का निर्देश दिया है।
संसद का बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने लोकसभा सांसदों को 9 से 11 मार्च तक सदन में मौजूद रहने के लिए 3-लाइन व्हिप जारी किया है।
विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव का नोटिस दिया है। विपक्ष के 118 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों (29) ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए।
आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही चलाने में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और विपक्षी नेताओं को बोलने का मौका नहीं दिया।
नियमों के अनुसार स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लोकसभा में साधारण बहुमत से पारित होता है। मौजूदा लोकसभा में एनडीए के पास करीब 290 से अधिक सांसदों का समर्थन है, इसलिए प्रस्ताव पारित होना कठिन है। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्पीकर स्वयं सदन की अध्यक्षता नहीं करेंगे, लेकिन उन्हें अपना पक्ष रखने और मतदान करने का अधिकार होगा।
कार्यसूची के मुताबिक, कांग्रेस सांसद मो जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि इस प्रस्ताव को पेश करेंगे. प्रस्ताव में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि स्पीकर के कुछ फ़ैसलों से सदन के सुचारु रूप से संचालन को खतरा पैदा हो गया है.
ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि स्पीकर ज़्यादातर विवादित मुद्दों पर सत्तापक्ष के सांसदों का साथ देते हैं. ये भी कहा गया है कि स्पीकर विपक्ष के अधिकारों का संरक्षण नहीं करते हैं और गैर पक्षपाती रवैया नहीं अपनाते हैं, जो सदन के सभी पक्षों का विश्वास हासिल करने के लिए ज़रूरी है.