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किले से तोप चलाने का वीडियो वायरल, ईरान के समर्थन में नारे का दावा

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मध्य प्रदेश के रायसेन में स्थित ऐतिहासिक रायसेन किला से तोप चलाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ युवक किले की पहाड़ी पर खड़े दिखाई दे रहे हैं और कथित तौर पर ईरान के समर्थन में नारे लगाते हुए तोप चलाते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
इस वीडियो को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि रायसेन के संरक्षित किले से आबादी वाले इलाके की ओर देसी तोप चलाना लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि यदि यह अवैध तरीके से किया गया है तो संबंधित लोगों के खिलाफ गैरकानूनी हथियार बनाने, दहशत फैलाने और ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों में कार्रवाई की जानी चाहिए।
वायरल वीडियो में चार युवक रायसेन किले की ऊंचाई पर खड़े दिखाई देते हैं। नारे लगाने के बाद उनमें से एक युवक तोप के पास जाता है और माचिस से उसमें आग लगा देता है। कुछ ही पल बाद जोरदार धमाके के साथ तोप चलती है और आसपास का इलाका धुएं से भर जाता है। वीडियो में किले की पहाड़ी से नीचे पूरा शहर दिखाई दे रहा है।
मामले को लेकर रायसेन के तहसीलदार भरत मांडरे ने बताया कि उन्हें वायरल वीडियो की जानकारी मिली है। उन्होंने इस संबंध में पुलिस को सूचित कर दिया है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि वीडियो कब का है और किन परिस्थितियों में तोप चलाई गई थी।
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बाइक टैक्सी पर हाईकोर्ट सख्त: Ola, Uber और Rapido को नोटिस, मांगा जवाब
मध्य प्रदेश में बाइक टैक्सी सेवाएं चलाने वाली कंपनियां ओला, उबर और रेपिडो अब कानूनी घेरे में आ गई हैं। इंदौर हाईकोर्ट ने इन सेवाओं के संचालन और यात्री सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोपों पर सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संबंधित कंपनियों सहित कुल 10 पक्षों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए हाईकोर्ट के सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया कि इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में बाइक टैक्सी सेवाएं बिना उचित परमिट और नियमों का पालन किए संचालित की जा रही हैं। इससे न केवल मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। याचिका में यह भी कहा गया कि इन कंपनियों के प्लेटफॉर्म के जरिए निजी दोपहिया वाहनों को व्यावसायिक रूप से उपयोग में लाया जा रहा है, जबकि इसके लिए जरूरी परमिट और नियमों का पालन कई मामलों में नहीं किया जा रहा।
मामले की सुनवाई के दौरान इंदौर हाईकोर्ट ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि यदि यात्री परिवहन से जुड़ी सेवाएं बिना स्पष्ट नियमों और सुरक्षा प्रावधानों के संचालित हो रही हैं, तो यह कानून और आम लोगों की सुरक्षा दोनों के लिए चिंता का विषय है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार, परिवहन विभाग और बाइक टैक्सी सेवाएं संचालित करने वाली कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि आखिर इन सेवाओं को किस आधार पर संचालित किया जा रहा है और क्या इनके पास आवश्यक अनुमति है या नहीं।
याचिका में यह भी मुद्दा उठाया गया कि बाइक टैक्सी सेवाओं में यात्रियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। कई मामलों में हेलमेट की व्यवस्था नहीं होती, ड्राइवरों का सत्यापन स्पष्ट नहीं होता और दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना भी मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा यह भी कहा गया कि बिना उचित नियमों के ऐसे प्लेटफॉर्म चलने से सड़क सुरक्षा और बीमा से जुड़े कई सवाल भी खड़े होते हैं।
हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट यह जानना चाहता है कि इन सेवाओं के संचालन को लेकर सरकार की क्या नीति है और क्या कंपनियां मोटर व्हीकल एक्ट और अन्य नियमों का पालन कर रही हैं या नहीं।

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