ग्वालियर। मध्य प्रदेश ग्वालियर में रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर के बैग से एक लाख रुपए चोरी का मामला सामने आया हैं। जहां रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर बैंक से पांच लाख रुपए निकालने गए थे पासबुक पर प्रिंटिंग मशीन के पास उनके रुपए निकल गए बैंक के सीसीटीवी में दो संदिग्ध महिला नजर आई हैं। जिसकी शिकायत उन्होंने थाने मे की हैं वहीं पुलिस ने उनकी शिकायत पर मामले की जांच कर संदिग्ध महिलाओं की तलाश शुरू कर दी हैं।
दरअसल ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र संकट मोचन नगर निवासी केएस श्रीवास्तव ने पुलिस से शिकायत कर बताया कि वह रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर हैं। उनका मुरार बारादरी चौराहा स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में अकाउंट है। उनको किसी को पैसा देना था इसलिए वह मंगलवार दोपहर में बैंग पहुंचे थे और बैंक से उन्होंने पांच लाख रुपए निकाले थे। बैंक से उन्हें पांच-पांच सौ रुपए की दस गड्डिया दी थी। बैंक से मिली गड्डियों को उन्होंने बैग में रख लिया था जिसके बाद वह पासबुक में प्रिंट करने के लिए प्रिंटिंग मशीन के पास खड़े हो गए। इसी समय दो संदिग्ध महिलाएं उनके पीछे से आकर लाइन में लग गई और भीड़ में हाथ की सफाई दिखाते हुए रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर के बैग से दो गड्डिया निकाल कर 1 लाख रुपए चोरी कर फरार हो गई।
जब वह घर पहुंचे और बैंग से रुपए निकले तो चोरी का पता चला। चोरी का पता चलते ही रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर तत्काल बैंक पंहुचे और पूरी घटना बैंक प्रबंधक को बताई। जिसके बाद बैंक में लगे CCTV कैमरों को चेक किया तो पासबुक प्रिंटिंग मशीन की लाइन में दो महिलाएं रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर के पीछे खड़ी हुई दिखाई दी। जिनको उन्होंने संदिग्ध मना हैं। सीसीटीवी फुटेज मिलने के बाद पीड़ित ने थाने पहुचकर शिकायत की हैं। वहीं पुलिस ने उनके आवेदन लेकर जांच शुरू कर दी है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बैंक के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और जल्द ही आरोपियों तक पहुंच कर मामले का खुलासा किया जाएगा।
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TET अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का घेराव, DPI मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन
भोपाल में टीईटी अनिवार्यता के आदेश के विरोध में बुधवार को शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) मुख्यालय का घेराव किया। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक सड़कों पर उतरे और नारेबाजी करते हुए परीक्षा रद्द करने की मांग उठाई। साथ ही प्रदेशभर में जिला कलेक्ट्रेट कार्यालयों में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपे जा रहे हैं।
अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के सदस्य उपेंद्र कौशल ने बताया कि राजधानी भोपाल में आसपास के जिलों से शिक्षक पहुंचकर DPI कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग टीईटी परीक्षा को रद्द करना है। साथ ही प्रदेशभर में भी संयुक्त मोर्चा के सदस्य जिला स्तर पर कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंप रहे हैं।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस आदेश से प्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। इनमें लगभग 70 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी। इन शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति के समय टीईटी अनिवार्य नहीं था, ऐसे में अब इसे लागू करना गलत है और उनकी नौकरी पर खतरा खड़ा कर रहा है।
हाल ही में DPI भोपाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय बाकी है उन्हें अनिवार्य रूप से टीईटी परीक्षा पास करनी होगी। आदेश में साफ कहा गया है कि संबंधित शिक्षकों को दो वर्ष के भीतर परीक्षा पास करनी होगी अन्यथा उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि आरटीई एक्ट 2009 में लागू हुआ और टीईटी 2011 से अनिवार्य किया गया। ऐसे में उससे पहले नियुक्त शिक्षकों पर यह नियम लागू करना “रेट्रोस्पेक्टिव” फैसला है जो न सिर्फ अन्यायपूर्ण है बल्कि कानूनी रूप से भी कमजोर है।
स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लिया गया है। हालांकि इस आदेश के बाद शिक्षकों में व्यापक असंतोष देखने को मिल रहा है।
शिक्षक संगठनों ने साफ किया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन करते हुए स्थानीय विधायक, मंत्री और सांसदों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इस दौरान टीईटी आदेश को निरस्त करने और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग प्रमुख रहेगी।
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मुस्लिम महिला कांग्रेस पार्षद का वंदे मातरम पर भड़काऊ बयान, बोली- ‘तुम्हारे बाप में दम हो तो कहलवा कर दिखाओ
इंदौर। इंदौर नगर निगम परिषद के बजट सम्मेलन में उस वक्त माहौल पूरी तरह बिगड़ गया जब “वंदे मातरम” के मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने आ गए। कांग्रेस की मुस्लिम पार्षदों पर वंदे मातरम का अपमान करने का आरोप लगा, जिसके बाद बीजेपी पार्षदों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया। बीजेपी ने कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम पर सीधे-सीधे वंदे मातरम के अपमान का आरोप लगाया।
इसी दौरान सदन में तीखी बहस के बीच रुबीना इकबाल खान ने विवादित बयान दे दिया — “तुम्हारे बाप में दम हो तो कहलवा कर दिखाओ”। इस बयान के बाद बीजेपी पार्षद भड़क गए और पूरे सदन में “वंदे मातरम” के नारे गूंजने लगे। स्थिति इतनी बिगड़ी कि सभापति को दखल देना पड़ा और कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख को एक दिन के लिए सदन से बाहर कर दिया गया। फोजिया शेख आलम ने कहा संविधान का एक्ट है जिसके अंदर लिखा है कि आप राष्ट्रगान गा सकते हैं लेकिन राष्ट्रगीत नहीं मैंने यह बात सभापति के सामने रखी लेकिन फिर भी सभापति ने सदन से बाहर कर दिया। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इसे वंदे मातरम् का अपमान बताया है।
फौजिया शेख अलीम का कहना है हमारे इस्लाम में वंदे मातरम नहीं बोल सकते है। संविधान में साफ लिखा है वंदे मातरम गाने पर कोई जबरदस्ती नहीं है, संविधान में हमें छूट है हम राष्ट्रगान गा सकते है राष्ट्रीय गीत के लिए कोई बाध्य नहीं कर सकता है , साथ ही फौजिया शेख अलीम ने कहा हम भारत माता की पूजा नहीं करते हैं।
वंदे मातरम विवाद के बाद सदन में एक और टकराव सामने आया। कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए पार्षदों को “गद्दार” कहे जाने पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी पार्षद सभापति के सामने धरने पर बैठ गए और कांग्रेस से सार्वजनिक माफी की मांग पर अड़ गए। उनका कहना था कि यह बयान राजनीतिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत हमला है।
मामले को शांत कराने के लिए सभापति ने कांग्रेस पार्षद को खेद जताने के निर्देश दिए, लेकिन तब तक सदन का माहौल पूरी तरह से गरमा चुका था। इंदौर नगर निगम का बजट सम्मेलन विकास की बजाय विवादों का अखाड़ा बन गया। “वंदे मातरम” और “गद्दार” जैसे मुद्दों पर सियासी टकराव ने साफ कर दिया कि सदन में बहस कम और बवाल ज्यादा हो रहा है।




