मथुरा के वृंदावन में यमुना नदी में बड़ा हादसा हो गया। केशी घाट के पास एक स्टीमर (नाव) पलट गई, जिससे वहां हड़कंप मच गया। इस नाव में करीब 25 लोग सवार थे, जो अचानक हादसे का शिकार हो गए। इस हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। वहीं, करीब एक दर्जन लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। कई लोगों के डूबने की आशंका जताई जा रही है।
डीएम चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि यह घटना दोपहर करीब 2:45 बजे हुई। उन्होंने कहा कि लुधियाना से लगभग 30 लोग यमुना नदी घूमने आए थे और इसी दौरान यह हादसा हुआ। डीएम ने कहा कि सभी लोगों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। आर्मी से भी मदद मांगी गई है।
प्रशासन ने सभी अस्पतालों को अलर्ट पर रखा है। रामकृष्ण मिशन अस्पताल को विशेष रूप से तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि घायलों का तुरंत इलाज हो सके।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई। गोताखोरों की मदद से तेजी से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अब तक 13 लोगों को बाहर निकाला गया है, जिनमें 8 की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि 5 लोग सुरक्षित हैं।
एसपी (ग्रामीण) सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि अब तक 22 लोगों को निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है। सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि घायलों को एंबुलेंस और PRV गाड़ियों के जरिए अस्पताल भेजा गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वहां एक पीपा पुल खराब हालत में था और उसकी मरम्मत चल रही थी। आशंका है कि इसी वजह से यह हादसा हुआ हो।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का संज्ञान लिया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मृतकों के परिवार को मुआवजा देने के भी निर्देश दिए गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर दुख जताया है। उन्होंने एक्स पर लिखा- उत्तर प्रदेश के मथुरा में नाव पलटने से हुई दुर्घटना से मैं अत्यंत दुखी हूं। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की सहायता कर रहा है।
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बस्तर में नक्सल ढांचा ढहा : अंतिम कमांडर सोड़ी केशा ने अपने 42 साथियों के साथ भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद सौंपे
बस्तर। छत्तीसगढ़ से लगे राज्य तेलंगाना से आई एक बड़ी खबर ने दक्षिण बस्तर में नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है। नक्सलियों की बटालियन के अंतिम कमांडर सोड़ी केशा ने अपने 42 साथियों के साथ हैदराबाद में पुलिस के सामने समर्पण कर दिया है। इस दौरान उन्होंने पुलिस को भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी सौंपे हैं।
बताया जा रहा है कि सोड़ी केशा लंबे समय से दक्षिण बस्तर में सक्रिय नक्सलियों की आखिरी मजबूत कड़ी था, जिसने कर्रेगुट्टा की दुर्गम पहाड़ियों को अपना ठिकाना बना रखा था। हिड़मा के एनकाउंटर और बारसे देवा के सरेंडर के बाद संगठन की कमान पूरी तरह सोड़ी केशा के हाथों में आ गई थी, लेकिन लगातार दबाव और सुरक्षा बलों के ऑपरेशन के चलते अब उसने भी हथियार डाल दिए। इस बड़े समर्पण के साथ ही दक्षिण बस्तर में सक्रिय नक्सलियों की आखिरी संगठित टुकड़ी भी खत्म मानी जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक 42 माओवादियों के सरेंडर के बाद इलाके में नक्सल संगठन अब लगभग पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है। लगातार ऑपरेशन, रणनीतिक दबाव और सरेंडर पॉलिसी के असर से अब बस्तर में नक्सलवाद अपने अंतिम दौर में पहुंचता नजर आ रहा है।
कैडर के हिसाब से सरेंडर करने वाले नक्सली
DVCM (डिवीजनल कमेटी मेंबर)
ACM (एरिया कमेटी मेंबर)
PM (पार्टी मेंबर)
अन्य निचले स्तर के कैडर
आत्मसमर्पण के साथ डाले हथियार और गोला-बारूद
सरेंडर के दौरान नक्सलियों ने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी सौंपा, जिनमें शामिल हैं—
AK-47 राइफल – 5
SLR और INSAS राइफल – कई
303 राइफल, 8mm और 9mm पिस्टल
38 रिवॉल्वर
देशी हथियार और शॉटगन
कुल हथियार – 36
कुल गोलियां – 1007
ग्रेनेड – 2
इसके अलावा नक्सलियों ने करीब 800 ग्राम सोना भी सुरक्षा बलों को सौंपा है।
सरेंडर करने वाले नक्सलियों पर घोषित इनाम की राशि
सरेंडर करने वाले इन नक्सलियों पर सरकार ने अलग-अलग कैडर के हिसाब से इनाम घोषित कर रखा था।
राज्य समिति सदस्य – ₹20 लाख
डीवीसीएम – ₹8 लाख
एसीएम – ₹5 लाख
क्षेत्रीय समिति सदस्य – ₹4 लाख
पार्टी सदस्य – ₹1 लाख
इन सभी को मिलाकर कुल इनामी राशि करीब ₹1 करोड़ 93 लाख थी, जिसे छोड़कर ये सभी मुख्यधारा में लौटे हैं।
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