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नाबालिग निकली ‘वायरल गर्ल’ मोनालिसा: NCST रिपोर्ट से मचा हड़कंप, पति पर FIR दर्ज

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इंदौर/ महाकुंभ से सुर्खियों में आई मध्य प्रदेश की तथाकथित ‘वायरल गर्ल’ मोनालिसा अब गंभीर कानूनी विवादों में घिर गई है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की जांच रिपोर्ट ने पूरे मामले में सनसनी फैला दी है। रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मोनालिसा विवाह के समय नाबालिग थी, जिसके बाद पूरे घटनाक्रम पर सवालों का तूफान खड़ा हो गया है।
आयोग की जांच के मुताबिक, पारधी जनजाति से जुड़ी मोनालिसा की उम्र शादी के वक्त 18 वर्ष से कम थी। यह विवाह 11 मार्च 2026 को केरल में संपन्न हुआ था। शिकायतकर्ता अधिवक्ता प्रथम दुबे द्वारा 17 मार्च 2026 को आयोग में याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद गठित जांच दल ने केरल से लेकर महेश्वर तक दस्तावेजों की गहन पड़ताल की।
जांच में सबसे बड़ा खुलासा महेश्वर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रिकॉर्ड से हुआ, जहां मोनालिसा की जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 दर्ज पाई गई। इस आधार पर शादी के समय उसकी उम्र करीब 16 वर्ष बैठती है। इतना ही नहीं, केरल में विवाह पंजीयन के दौरान प्रस्तुत जन्म प्रमाण पत्र में अलग जन्मतिथि दर्ज होने का मामला भी सामने आया है। जांच टीम ने इसे गंभीर गड़बड़ी मानते हुए संबंधित दस्तावेजों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू करने की सिफारिश की है।
आयोग की सख्त अनुशंसा के बाद महेश्वर थाने में अपहरण समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। इस मामले में पति फरमान खान पर कानून का शिकंजा कसता नजर आ रहा है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और पूरे नेटवर्क की परतें खंगालने में जुटी है। इंदौर रेंज के आईजी अनुराग ने पुष्टि करते हुए बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है।
इस पूरे विवाद ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। शादी के आयोजन और संरक्षण को लेकर कुछ संगठनों और नेताओं की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल, आयोग और पुलिस की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन इस खुलासे ने यह साफ कर दिया है कि ‘वायरल’ चमक के पीछे एक बड़ा कानूनी और सामाजिक सवाल छिपा हुआ था, जो अब पूरे सिस्टम के सामने खड़ा है।
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बोरवेल में जिंदगी से जंग- मासूम 75 फीट गहरे खुले बोरवेल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा
उज्जैन। उज्जैन जिले के बड़नगर क्षेत्र के झालरिया गांव में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां दो साल का मासूम भागीरथ देवासी पिछले कई घंटों से 75 फीट गहरे खुले बोरवेल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। मासूम की हर सांस अब रेस्क्यू टीम के संघर्ष पर टिकी है, जबकि घटनास्थल पर अफरा-तफरी और बेचैनी का माहौल बना हुआ है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी NDRF और SDRF की संयुक्त टीम लगातार बच्चे तक पहुंचने की जद्दोजहद कर रही है। SDRF के कमांडेंट संतोष जाट ने बताया कि बच्चे की सटीक लोकेशन 75 फीट की गहराई पर ट्रेस की गई है और उसे सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। टीम अब बच्चे के हाथों में रस्सी की रिंग पहनाकर उसे ऊपर खींचने की रणनीति पर काम कर रही है।
रेस्क्यू के लिए पांच पोकलेन मशीनों से समानांतर सुरंग खोदी जा रही है, लेकिन 40 फीट खुदाई के बाद कठोर चट्टानों ने रास्ता रोक दिया। हालात इतने जटिल हो गए कि खुदाई का काम रोकना पड़ा। अब चट्टानों को तोड़ने के लिए हैमर मशीन मंगाई गई है, जिससे ऑपरेशन और ज्यादा संवेदनशील और जोखिम भरा हो गया है। बताया जा रहा है कि बोरवेल करीब 200 फीट गहरा है और उसमें पानी भी मौजूद है, जिससे खतरा और बढ़ गया है। कैमरे के जरिए लगातार बच्चे की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और उसे ऑक्सीजन सपोर्ट भी दिया जा रहा है ताकि उसकी सांसें बनी रहें।
यह दर्दनाक हादसा गुरुवार शाम करीब साढ़े 7 बजे हुआ। भागीरथ के पिता प्रवीण देवासी राजस्थान के पाली जिले के रहने वाले हैं और परिवार पिछले तीन दिनों से इलाके में भेड़ चराने के लिए रुका हुआ था। परिजनों के मुताबिक, मासूम घर के पास खेल रहा था। खेल-खेल में उसने पत्थर से बोरवेल का ढक्कन हटाया और बाल्टी समझकर पैर अंदर डाल दिया। देखते ही देखते वह सीधे गहराई में समा गया। मां ने उसे गिरते देखा और बचाने के लिए दौड़ी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
घटनास्थल पर दो एंबुलेंस तैनात हैं और प्रशासन का पूरा अमला अलर्ट मोड पर है। भोपाल से पहुंची NDRF टीम के साथ इंदौर, उज्जैन और हरदा की SDRF टीमें लगातार रेस्क्यू में जुटी हैं। हर गुजरता पल मासूम की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है, वहीं परिजनों की आंखें उम्मीद और डर के बीच झूल रही हैं। पूरे इलाके की निगाहें अब इस रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं—कि कब मासूम भागीरथ मौत के कुएं से बाहर निकलेगा।
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इंदौर क्राइम ब्रांच के ASI और सिपाही को ATS ने पकड़ा- CDR बेचने का शक!
इंदौर। शहर की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने बड़ी कार्रवाई की है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) बेचने के शक में क्राइम ब्रांच के एक एएसआई और एक सिपाही को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, ATS को एक डिटेक्टिव एजेंसी के संचालक की कॉल डिटेल की जांच के दौरान इन पुलिसकर्मियों के नंबर संदिग्ध रूप से जुड़े मिले। इसके बाद ATS इंदौर ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ शुरू कर दी।
जानकारी के अनुसार, हिरासत में लिए गए पुलिसकर्मियों में एएसआई राम और सिपाही रविंद्र शामिल हैं। दोनों से ATS मुख्यालय में लगातार पूछताछ की जा रही है। बताया जा रहा है कि रविंद्र क्राइम ब्रांच में निरीक्षक विष्णु वास्कले के अधीन कार्यरत था।
सूत्रों के अनुसार, एएसआई राम एक धोखाधड़ी के मामले में सिपाही कन्हैया के साथ महाराष्ट्र जा रहे थे, तभी ATS ने उनकी टावर लोकेशन ट्रेस कर कार्रवाई की। वहीं सिपाही रविंद्र को गुरुवार सुबह उसके घर से हिरासत में लिया गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि डिटेक्टिव एजेंसी के संचालक मुकेश तोमर से इन पुलिसकर्मियों का सीधा संपर्क था। आशंका जताई जा रही है कि खुफिया जानकारी जुटाने की आड़ में आम लोगों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) मोटी रकम लेकर बेची जा रही थी। इस मामले ने पुलिस विभाग के भीतर ही डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ATS फिलहाल पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट में और कौन-कौन शामिल है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।