जबलपुर. एमपी के जबलपुर में क्राइम ब्रांच व थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए नशीले इंजेक्शनों का बड़ा जखीरा बरामद किया है. इस मामले में दो मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. सभी आरोपी जबलपुर के रहने वाले हैं और कम कीमत पर इंजेक्शन खरीदकर नशा करने वालों को ऊंचे दामों पर बेचते थे. पुलिस इस कारोबार के मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी है. आज आरोपियों के कब्जे से करीब 6,600 इंजेक्शन, एक ऑटो और पांच मोबाइल फोन जब्त किए गए.
बेलबाग थाना प्रभारी जितेंद्र पाटकर को मुखबिर से सूचना मिली थी कि नशीले इंजेक्शनों की बड़ी खेप उत्तर प्रदेश से रीवा, सतना और कटनी होते हुए बस के जरिए जबलपुर लाई गई है. यहां से इसे शहर के विभिन्न इलाकों में सप्लाई किया जाना था. सूचना मिलने पर एसपी संपत उपाध्याय को अवगत कराया गया. इसके बाद एएसपी क्राइम जितेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम गठित कर कार्रवाई की गई. पुलिस ने रामलीला मैदान के पास ई-रिक्शा क्रमांक रूक्क-20र्-ंङ्ग-7302 के साथ एक संदिग्ध युवक को देखा. पूछताछ के लिए रोकने पर वह भागने लगा, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया. पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम दुर्गा पटेल (46) निवासी समता कॉलोनी, थाना गोहलपुर बताया. तलाशी के दौरान ई-रिक्शा से तीन कार्टन और एक सफेद बोरी बरामद हुई. तीनों कार्टनों में 16-16 बॉक्स रखे थे. प्रत्येक बॉक्स में 25-25 शीशियांमिलीं. कुल 1,200 शीशियों की कीमत लगभग 26,400 रुपए आंकी गई. सफेद बोरी में 80 डिब्बे मिले. इनमें कुल 2,000 इंजेक्शन थे, जिनकी कीमत करीब 54,400 रुपए बताई गई. इस तरह दोनों प्रकार के कुल 3,200 नशीले इंजेक्शन बरामद हुए, जिन्हें ई-रिक्शा समेत जब्त कर लिया गया.
दुर्गा पटेल से नशीले इंजेक्शनों के संबंध में पूछताछ की गई तो उसने बताया कि गोहलपुर निवासी अमजद खान के कहने पर उसे खेप मोहम्मद आरिफ तक पहुंचानी थी. इसके बदले उसे पैसे मिलते थे. दुर्गा की निशानदेही पर पुलिस ने भानतलैया बढ़ई मोहल्ला रोड में दबिश देकर मोहम्मद आरिफ (32) निवासी ठक्कर ग्राम पचकुइया, हनुमानताल और अमजद खान (48) निवासी गाजी नगर झुग्गी-झोपड़ी, 10 नल को गिरफ्तार कर लिया. आरोपियों से पूछताछ में सैय्यद अशरफ अली और मदनमहल के गुलाटी पेट्रोल पंप क्षेत्र निवासी सौरभ नामदेव का नाम सामने आया. पुलिस के अनुसार, सौरभ नामदेव उत्तर प्रदेश से नशीले इंजेक्शन मंगवाकर अमजद खान और अन्य लोगों के माध्यम से उनकी सप्लाई करवाता था. मामले में सौरभ सोनकर अभी फरार है. आरोपियों के खिलाफ धारा 5/13 मप्र ड्रग्स कंट्रोल एक्ट तथा 8/21, 22 और 29 एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है.-
आज बेलबाग पुलिस के साथ अधारताल थाना पुलिस ने भी नशीले इंजेक्शन बेचने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया. मुखबिर की सूचना पर मिल्क स्कीम क्षेत्र में चार बोरियों के साथ खड़े एक युवक को पकड़ा गया. उसने अपना नाम गीतांशु साहू (25) निवासी बजरंग बाड़ा, आधारताल बताया. बोरियों की तलाशी लेने पर 3,400 नशीले इंजेक्शन बरामद किए गए. पूछताछ में गीतांशु ने बताया कि भानतलैया निवासी कल्लू दद्दा ने उसे ये इंजेक्शन बेचने के लिए रखवाए थे. पुलिस ने सभी इंजेक्शन जब्त कर आरोपी के खिलाफ मप्र ड्रग्स कंट्रोल एक्ट और एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है.
एएसपी जितेंद्र सिंह ने बताया कि जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. आरोपी एविल और बुप्रेनॉर्फिन इंजेक्शन का कॉम्बो तैयार कर सिरिंज के जरिए नशेडिय़ों को 300 से 500 रुपए में बेचते थे. पुलिस अब तक इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है.
पुलिस गिरफ्त में आरोपी-
-दुर्गा पिता बेनीप्रसाद पटेल, उम्र 46 वर्ष, निवासी समता कॉलोनी, गोहलपुर
-मोहम्मद आरिफ पिता निसार अहमद, उम्र 32 वर्ष, निवासी ठक्कर ग्राम, पचकुइया, हनुमानताल.
-अमजद पिता गफ्फार खान, उम्र 48 वर्ष, निवासी गाजी नगर झुग्गी-झोपड़ी, 10 नल, गोहलपुर.
-सैय्यद अशरफ अली उर्फ जीजा उम्र 39 वर्ष, निवासी बंद कुआं, ओमती.
-सौरभ नामदेव पिता रमेश नामदेव, उम्र 45 वर्ष, निवासी गुलाटी पेट्रोल पंप के पास, मदनमहल.
-गीतांशु साहू पिता संतोष साहू, उम्र 26 वर्ष, निवासी बजरंग बाड़ा, आधारताल.
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49.50 लाख के फर्जी लूटकांड का 24 घंटे में खुलासा: खुद पीड़िता ही निकली मास्टरमाइंड
ग्वालियर। डबरा में बीते दो दिनों से चर्चा का विषय बने कथित लाखों रुपये की लूटकांड का ग्वालियर पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। जिस महिला को पूरे मामले में पीड़िता माना जा रहा था, वही अपने पति और उसके साथियों के साथ मिलकर इस पूरी साजिश की मुख्य किरदार निकली। पुलिस ने न केवल फर्जी लूटकांड का खुलासा किया बल्कि लगभग 49.50 लाख रुपये का पूरा मशरूका भी बरामद कर लिया। एसएसपी धर्मवीर सिंह ने प्रेसवार्ता में मामले की जानकारी दी है।
घटना 4 जून 2026 की है, जब डबरा सिटी थाना क्षेत्र के संस्कृति नगर स्थित सचदेवा फार्म के पास रहने वाली मोनिका उर्फ रानू श्रीवास्तव ने पुलिस को सूचना दी कि उसकी भाभी पिंकी श्रीवास्तव घर पर अकेली थी। इसी दौरान एसी सर्विसिंग के बहाने दो युवक घर में घुसे, मारपीट कर उसे बंधक बनाया और अलमारी का लॉक तोड़कर 2.50 लाख रुपये नगद तथा लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवरात लूटकर फरार हो गए।
डबरा अनुभाग, क्राइम ब्रांच और साइबर टीम ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की बारीकी से पड़ताल की गई। तकनीकी साक्ष्य जुटाए गए, मोबाइल लोकेशन और संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान पुलिस को कई ऐसे तथ्य मिले जिन्होंने कथित लूट की कहानी पर सवाल खड़े कर दिए।
सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दे रहे संदिग्धों की पहचान शुभम श्रीवास्तव और सोनू जाटव के रूप में हुई। पुलिस ने जब शुभम श्रीवास्तव को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पूरे मामले की परतें खुलती चली गईं। पूछताछ में सामने आया कि शुभम अपनी पत्नी पिंकी के साथ पिछले तीन महीनों से अपनी बहन मोनिका के घर रह रहा था। इसी दौरान पिंकी ने मोनिका को अलमारी में बड़ी मात्रा में नगदी और जेवर रखते हुए देख लिया था। तभी से दोनों ने संपत्ति हड़पने की योजना बनानी शुरू कर दी।
योजना के तहत शुभम ने अपने दोस्त सोनू जाटव को साथ लिया। तय हुआ कि घर में लूट की झूठी कहानी तैयार कर नगदी और जेवरात गायब कर दिए जाएंगे। घटना वाले दिन जब मोनिका अपने बच्चों के साथ घर से बाहर गई हुई थी, तब शुभम और सोनू घर पहुंचे। पिंकी ने खुद दरवाजा खोला और सीसीटीवी कैमरे के सामने सामान्य बातचीत का अभिनय किया ताकि किसी को शक न हो।
इसके बाद घर के अंदर जाकर लोहे की रॉड से अलमारी तोड़ी गई और उसमें रखे 2.50 लाख रुपये नगद तथा लाखों के जेवर निकाल लिए गए। साजिश को असली लूट जैसा दिखाने के लिए ड्रेसिंग टेबल का कांच तोड़ा गया और पिंकी के माथे पर हल्की चोट भी पहुंचाई गई। फिर उसके हाथ-पैर बांध दिए गए ताकि वह खुद को पीड़िता साबित कर सके।
लूट की रकम में से एक लाख रुपये पिंकी के बैग में छिपाकर रख दिए गए, जबकि डेढ़ लाख रुपये सोनू जाटव को दे दिए गए। वहीं करोड़ों के बराबर महत्व रखने वाले जेवरातों को एक बैग में भरकर ग्वालियर निवासी आशिफ खान के घर छिपा दिया गया।
पुलिस की तकनीकी जांच, सीसीटीवी विश्लेषण और लगातार पूछताछ के दबाव में आखिरकार आरोपियों की कहानी टूट गई। पुलिस ने शुभम की निशानदेही पर सोनू जाटव को गिरफ्तार किया और उसके घर से 1.50 लाख रुपये बरामद किए। इसके बाद आशिफ खान के घर छापा मारकर सोने-चांदी के सभी जेवरात बरामद कर लिए गए। जांच के दौरान पिंकी के बैग से भी एक लाख रुपये बरामद हुए।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 252.82 ग्राम सोने के जेवर, लगभग 1.9 किलोग्राम चांदी के आभूषण, 2.50 लाख रुपये नगद और घटना में प्रयुक्त डिस्कवर मोटरसाइकिल जब्त की है। बरामद संपत्ति की कुल कीमत लगभग 49 लाख 50 हजार रुपये आंकी गई है।
पूरे मामले को ट्रेस करने में डबरा सिटी थाना प्रभारी निरीक्षक संजय शर्मा, एसडीओपी डबरा सौरभ कुमार, डीएसपी अपराध नागेंद्र सिंह सिकरवार, डीएसपी मनीष यादव, क्राइम ब्रांच, साइबर सेल तथा डबरा, पिछोर और गिजौरा थाना पुलिस की संयुक्त टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और वैज्ञानिक जांच के दम पर पुलिस ने 24 घंटे के भीतर इस हाई-प्रोफाइल मामले का खुलासा कर दिया।
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स्कूल शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: बंद होगी यूनिफॉर्म की नकद राशि, सीधे बांटी जाएगी गणवेश
भोपाल। मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब छात्रों के खातों में ड्रेस की राशि भेजने के बजाय सीधे सिली हुई यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जाएगी जिसे प्रदेश की गारमेंट्स इंडस्ट्री तैयार करेगी,हालांकि इस फैसले को लेकर बच्चों और अभिभावकों की राय अलग-अलग है। वहीं कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता स्वदेश शर्मा ने आरोप लगाया कि विद्यार्थियों के खातों में यूनिफॉर्म की राशि भेजने की व्यवस्था बंद कर गणवेश वितरण के नाम पर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का नया रास्ता खोला गया है।
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को अब यूनिफॉर्म के लिए राशि नहीं मिलेगी। मध्य प्रदेश में स्कूल यूनिफॉर्म को लेकर बड़ा नियम बदल गया हैअब कक्षा 1 से 8वीं तक के छात्रों के बैंक खातों में 600 रुपए नहीं भेजे जाएंगे। इसकी जगह बच्चों को सीधे रेडीमेड यूनिफॉर्म दी जाएगी, जिसे प्रदेश की गारमेंट्स इंडस्ट्री तैयार करेगी।
बता दें कि मध्यप्रदेश में 2024-25 से कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के खातों में यूनिफॉर्म के लिए 600 रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से भेजी जा रही थी। इससे पहले गणवेश स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सिलवाकर वितरित की जाती थी।
हालांकि कई विद्यार्थियों का मानना है कि ड्रेस की जगह राशि मिलना अधिक सुविधाजनक था। छात्राओं का कहना है कि तैयार यूनिफॉर्म में साइज की समस्या हो सकती है, जबकि नकद राशि मिलने पर वे अपनी पसंद और सही नाप की ड्रेस खरीद सकती थी। कुछ छात्राओं ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर परिवार की ओर से अतिरिक्त राशि जोड़कर अच्छी यूनिफॉर्म खरीदी जा सकती थी। अभिभावकों का कहना है कि पहले यूनिफॉर्म की राशि विद्यार्थियों के खातों में जाती थी, लेकिन कई बार यह अन्य जरूरतों में खर्च हो जाती थी, जिससे कुछ बच्चे नई ड्रेस नहीं बनवा पाते थे. इसे देखते हुए सरकार ने व्यवस्था बदलकर सीधी यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।
मध्य प्रदेश

