भारत में जन्मदर में बड़ी गिरावट आई है। पिछले 10 साल में भारत के जन्मदर (भारत में फर्टिलिटी रेट) में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज हुई है। हाल यह है कि भारत के कई राज्यों का जन्मदर यूरोपीय देश फिनलैंड से भी नीचे आ गया है। भारत में तेजी से गिरते जन्मदर पर स्पेसएक्स के सीईओ और दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क ने भी चिंता जताई है।
भारत में जन्मदर में बड़ी गिरावट पर एल्न मस्क ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- भारत में जन्म दर में गिरावट आई है। यह प्रतिस्थापन स्तर (रिप्लेसमेंट) से नीचे गिर गई है। सबसे ज़्यादा पढ़े-लिखे लोगों में, भारत की जन्म दर कई साल पहले रिप्लेसमेंट से नीचे गिर गई थी। उन्होंने कहा कि भारत की प्रजनन दर अब रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से नीचे आकर 1.9 रह गई है। दिल्ली की प्रजनन दर अब 1.2 है जो फिनलैंड से भी कम है।
बता दें कि एएफ पोस्ट ने द इकोनामिस्ट के 4 जून 2026 के एक लेख का हवाला दिया जिसका शीर्षक था ‘भारत की जनसंख्या जल्द ही घटने लगेगी। पिछले साल, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की 2025 विश्व जनसंख्या की स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कुल प्रजनन दर 1.9 जन्म प्रति महिला तक घट चुका है। यह रिप्लेसमेंट रेट 2.1 से नीचे है। जिसका मतलब है कि औसतन भारतीय महिलाएं ऐसी संख्या में बच्चे पैदा कर रही हैं जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जनसंख्या का आकार बनाए रखने के लिए जरूरत से कम है।
यह दुनिया के सबसे ज़्यादा आबादी वाले देश में एक बड़े डेमोग्राफिक बदलाव का संकेत है। इस गिरावट का मतलब है कि भारत विकास के एक नए दौर में पहुंच गया है। अब देश तेजी से बढ़ती आबादी की चिंता से आगे बढ़कर, बूढ़ी होती आबादी, छोटे होते परिवारों और भविष्य में काम करने वाले लोगों की कमी जैसी चिंताओं की ओर बढ़ रहा है।
एएफ पोस्ट के अनुसार, भारत में पहली बार कुल प्रजनन दर (टोटल फर्टिलिटी रेट-टीएफआर) देश के इतिहास में काफी नीचे पहुंच गई है। आंकड़ों के मुताबिक आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए आम तौर पर प्रति महिला लगभग 2.1 बच्चों की प्रजनन दर जरूरी मानी जाती है। भारत की 1.9 की दर यह बताती है कि डेमोग्राफिक मोमेंटम (आबादी की संरचना के कारण जारी रहने वाली बढ़त) की वजह से आबादी कुछ दशकों तक तो बढ़ती रहेगी, लेकिन अगर जन्म दर में सुधार नहीं हुआ, तो अंत में इसमें गिरावट आने की संभावना है। वहीं दिल्ली की प्रजनन दर घटकर सिर्फ़ 1.2 बच्चे प्रति महिला रह गई है, जबकि दक्षिणी राज्य तमिलनाडु और पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल में यह दर लगभग 1.3 तक पहुंच गई है, जो कुछ यूरोपीय देशों के बराबर है।
भारत की वर्तमान जनसंख्या 1.46 अरब से अधिक है। साल 2023 में भारत, चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन गया। हालांकि यूएनएफपीए की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक साल-दर-साल इसकी प्रजनन दर में कमी आई है। भारत की आबादी एक अरब से अधिक है और स्वास्थ्य और शिक्षा में महत्वपूर्ण सुधार के बावजूद बड़े स्तर पर असमानताएं बनी हुई हैं।
रिप्लेसमेंट लेवल वह न्यूनतम प्रजनन दर होती है, जो किसी देश की आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी मानी जाती है। आमतौर पर यह दर 2.1 मानी जाती है. संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की 2025 विश्व जनसंख्या स्थिति रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर घटकर 1.9 जन्म प्रति महिला रह गई है, जो रिप्लेसमेंट रेट 2.1 से नीचे है। इसका मतलब है कि औसतन भारतीय महिलाएं अब उतने बच्चे पैदा नहीं कर रही हैं, जितने किसी पीढ़ी के आकार को अगली पीढ़ी तक बनाए रखने के लिए आवश्यक होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जन्म दर में गिरावट का यही रुझान जारी रहा तो आने वाले वर्षों में भारत की जनसंख्या संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कम जन्म दर के कारण भविष्य में युवाओं की तुलना में बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढेगी। इसका असर देश की अर्थव्यवस्था, श्रम शक्ति और सामाजिक व्यवस्था पर असर पड़ेगा।
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3 महीने में दूसरी बार बढ़े LPG के दाम, घरेलू सिलेंडर 29 रुपए मंहगा तो कमर्शियल 1422 रुपए
देशभर के करोड़ों परिवारों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। घरेलू एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपए की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई कीमतें 7 जून से लागू हो गई हैं। इससे पहले मार्च में भी सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए थे। लगातार दूसरी बार हुई बढ़ोतरी ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है।
सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण गैस के दाम बढ़ाने पड़े हैं। खासतौर पर ईरान से जुड़े संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में पैदा हुई अनिश्चितता का सीधा असर एलपीजी की कीमतों पर देखने को मिल रहा है।
नई बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपए से बढ़कर 942 रुपए हो गई है। इससे पहले 7 मार्च को भी घरेलू सिलेंडर के दाम में 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी। यानी पिछले तीन महीनों में घरेलू गैस सिलेंडर कुल 89 रुपए महंगा हो चुका है।
घरेलू गैस का उपयोग लगभग हर घर में होता है। ऐसे में कीमतों में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर परिवारों के मासिक खर्च पर असर डाल सकती है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल-गैस की वैश्विक आपूर्ति पर पड़े असर के कारण एलपीजी सिलेंडर लगातार महंगे हो रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ईरान संकट शुरू होने के बाद-
कमर्शियल सिलेंडर 1422 रुपए तक महंगा हुआ है।
घरेलू सिलेंडर 89 रुपए महंगा हुआ है।
5 किलो वाला छोटा सिलेंडर 11 रुपए महंगा हुआ है।
कमर्शियल सिलेंडर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
सबसे ज्यादा असर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर देखने को मिला है। ईरान संकट शुरू होने से पहले जनवरी तक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1691.50 रुपए थी। इसके बाद मई महीने में इसकी कीमत में एक साथ 993 रुपए की बड़ी बढ़ोतरी की गई। अब 7 जून को फिर 42 रुपए दाम बढ़ा दिए गए हैं।
इस तरह फरवरी के बाद से कमर्शियल सिलेंडर कुल 1422 रुपए महंगा हो चुका है। यह लगभग 84 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैंटीन और अन्य व्यावसायिक संस्थानों में होता है। ऐसे में बढ़ती कीमतों से इन कारोबारों की लागत काफी बढ़ गई है। कई छोटे व्यवसायों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत संकट से पहले 853 रुपए थी। इसके बाद 7 मार्च को 60 रुपए की बढ़ोतरी हुई। 7 जून को फिर 29 रुपए बढ़ाए गए। दोनों बढ़ोतरी को जोड़ें तो घरेलू सिलेंडर अब तक 89 रुपए महंगा हो चुका है।
इसका असर सीधे तौर पर आम परिवारों की जेब पर पड़ रहा है। खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए यह अतिरिक्त खर्च चिंता का विषय बन सकता है।
केवल बड़े सिलेंडर ही नहीं, बल्कि 5 किलो वाले छोटे एलपीजी सिलेंडर की कीमत भी बढ़ाई गई है। 1 जून को इसकी कीमत में 11 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद दिल्ली में 5 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 821.50 रुपए हो गई है।
कीमतें बढ़ने के बीच लोगों के मन में यह सवाल भी है कि क्या गैस की सप्लाई प्रभावित होगी? इस पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है। मंत्रालय के अनुसार किसी भी गैस एजेंसी पर गैस की कमी की स्थिति नहीं है। देशभर में पर्याप्त मात्रा में एलपीजी उपलब्ध है। उपभोक्ताओं को घबराने या अतिरिक्त सिलेंडर जमा करने की जरूरत नहीं है।
सरकार का कहना है कि संकट के बावजूद लोगों तक गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
सरकार ने यह भी बताया है कि गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। देशभर में निगरानी बढ़ाई गई है ताकि कोई भी व्यक्ति या एजेंसी कृत्रिम कमी पैदा कर मुनाफाखोरी न कर सके। इसके अलावा तेल कंपनियों और प्रशासन को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने एलपीजी बुकिंग को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में अब लगभग 99 प्रतिशत गैस बुकिंग ऑनलाइन हो रही है। वहीं करीब 95 प्रतिशत गैस डिलीवरी ग्राहकों के मोबाइल पर भेजे गए ओटीपी के जरिए सत्यापित की जा रही है। इस व्यवस्था का उद्देश्य गैस वितरण में पारदर्शिता बढ़ाना और हेराफेरी को रोकना है।
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भारतीय रेलवे 100% विद्युतीकरण के करीब, अब बस 5 राज्यों में 269 रूट किलोमीटर का काम बाकी…
भारतीय रेलवे अपने पूरे ब्रॉड गेज (BG) नेटवर्क के विद्युतीकरण का काम मिशन मोड में कर रहा है। रेल मंत्रालय ने बताया कि देश के ब्रॉड गेज (BG) नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत हिस्सा पहले ही विद्युतीकृत हो चुका है। BG लाइनों के कुल 70,271 रूट किलोमीटर (RKm) में से, 31 मई 2026 तक 70,002 RKm का विद्युतीकरण हो चुका है, और नेटवर्क का बहुत छोटा सा हिस्सा ही बाकी है।
भारत में रेलवे विद्युतीकरण 1925 में शुरू हुआ था, जब देश की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन, जो 1,500-वोल्ट DC सिस्टम पर चलती थी, महाराष्ट्र में बॉम्बे विक्टोरिया टर्मिनस और कुर्ला हार्बर के बीच चली थी। रेल मंत्रालय के ताज़ा अपडेट के अनुसार, 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने ब्रॉड गेज (BG) रेलवे नेटवर्क का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया है, और कोई भी रूट किलोमीटर बाकी नहीं है।
अभी भी सिर्फ़ पाँच राज्यों में कुछ हिस्सों का विद्युतीकरण होना बाकी है। इन बचे हुए हिस्सों की कुल लंबाई सिर्फ़ 269 RKm है। इनके अलावा, सभी नई लाइन और मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को विद्युतीकरण के साथ मंज़ूरी दी जा रही है और बनाया जा रहा है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, सिर्फ़ पाँच राज्यों – राजस्थान, तमिलनाडु, असम, कर्नाटक और गोवा – में ब्रॉड गेज (BG) रेलवे सेक्शन का विद्युतीकरण अभी बाकी है, जिनकी कुल लंबाई 269 रूट किलोमीटर (RKm) है।
राजस्थान में, राज्य के कुल 6,514 RKm BG नेटवर्क में से 6,504 RKm का विद्युतीकरण हो चुका है, और सिर्फ़ 10 RKm का काम बाकी है। इसी तरह, तमिलनाडु ने अपने 3,926 RKm BG नेटवर्क में से 3,858 RKm का विद्युतीकरण कर लिया है, और 68 RKm बाकी है। असम ने अपने 2,589 RKm ब्रॉड गेज नेटवर्क का 97.9 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया है, जबकि कर्नाटक ने अपने 3,743 RKm BG नेटवर्क का 96.8 प्रतिशत विद्युतीकरण किया है। गोवा में, कुल 187 RKm ब्रॉड गेज नेटवर्क में से 171 RKm का विद्युतीकरण हो चुका है, और केवल 16 RKm का काम बाकी है।
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