महाराष्ट्र में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और लगातार तीसरे दिन हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सबसे ज्यादा असर मुंबई, पुणे और आसपास के इलाकों में देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के रेड अलर्ट के बीच प्रशासन ने लोगों से बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलने की अपील की है। कई निजी कंपनियों ने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी है, जबकि सरकारी, निजी और नगर निगम के सभी स्कूल-कॉलेजों में सोमवार को छुट्टी घोषित कर दी गई।
भारी बारिश के चलते मुंबई-पुणे रेल मार्ग पर करजत-लोनावला के भोर घाट सेक्शन में दो स्थानों पर लैंडस्लाइड हुई, जिससे तीनों रेलवे लाइनें प्रभावित हो गईं। सुरक्षा कारणों से 20 ट्रेनों को रद्द करना पड़ा, जबकि कई अन्य ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहा। वहीं, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर भी भूस्खलन के कारण यातायात बाधित हो गया और कई घंटों तक वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही।
मुंबई में रविवार से 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाएं चल रही हैं। तेज बारिश और हवाओं के कारण शहर में सैकड़ों पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। बीएमसी के अनुसार, 350 से अधिक पेड़ गिरने की सूचना मिली, जिससे कई इलाकों में यातायात और बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई।
बारिश का असर छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी पड़ा। रविवार रात 12 बजे से सोमवार सुबह 11:30 बजे तक 17 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि आने-जाने वाली 217 फ्लाइट्स निर्धारित समय से देरी से संचालित हुईं। इससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा।
भारी बारिश और रेड अलर्ट को देखते हुए महाराष्ट्र विधानसभा की सोमवार की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
उधर, जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में भी भारी बारिश के बाद लैंडस्लाइड हुई, जिसमें 6 से 7 वाहन मलबे में दब गए। राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने और वाहनों को निकालने का कार्य कर रहे हैं।
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'दोषियों को कर्मों का फल मिलेगा...', राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर स्वामी चक्रपाणि का बड़ा बयान, बोले- ट्रस्ट ले नैतिक जिम्मेदारी
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले पर हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और चढ़ावे की गिनती से जुड़े लोगों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह घटना करोड़ों रामभक्तों की भावनाओं को आहत करने वाली है और इससे मंदिर की छवि को नुकसान पहुंचा है।
स्वामी चक्रपाणि ने कहा कि जिस रामराज्य की कल्पना ईमानदारी और न्याय पर आधारित है, उसी राम मंदिर में इस तरह की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस मामले के सामने आने के बाद हिंदू विरोधी लोगों को आलोचना और उपहास का मौका मिल गया है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
स्वामी चक्रपाणि ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण लंबे कानूनी संघर्ष और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद संभव हो सका। उनका दावा है कि इस लड़ाई में कई हिंदू पक्षकारों ने वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी और अपनी निजी संपत्ति तक खर्च की। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे पक्षकारों को न तो ट्रस्ट में जगह दी गई और न ही राम मंदिर के उद्घाटन समारोह में आमंत्रित किया गया।
स्वामी चक्रपाणि ने राम मंदिर के उद्घाटन समारोह में फिल्मी हस्तियों को बुलाए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि ट्रस्ट में धार्मिक संतों, 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों और उन लोगों को शामिल किया जाना चाहिए था, जिन्होंने मंदिर आंदोलन और कानूनी लड़ाई में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ट्रस्ट में धार्मिक पृष्ठभूमि के लोग होते तो ऐसी घटना नहीं होती।
स्वामी चक्रपाणि ने कहा कि राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी व्यवस्था में कमियों की बात कही है। उनके अनुसार, चढ़ावा चोरी के मामले की नैतिक जिम्मेदारी ट्रस्ट को लेनी चाहिए। उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि चढ़ावे की व्यवस्था उनकी जिम्मेदारी में नहीं थी, तो इस पर पहले ही स्पष्टता होनी चाहिए थी।
स्वामी चक्रपाणि ने अपने बयान में धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए कहा कि मंदिर की संपत्ति या चढ़ावे की चोरी को धर्म में गंभीर अपराध माना गया है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने वालों को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति कानून या सबूतों से बच भी जाए, तो धार्मिक मान्यता के अनुसार उसके कर्मों का हिसाब भगवान के न्याय में अवश्य होगा।
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नीरव मोदी की भारत वापसी का रास्ता साफ... यूरोपियन कोर्ट से भी झटका; जल्द हो सकता है प्रत्यर्पण
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की भारत वापसी का रास्ता अब लगभग साफ हो गया है। यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECHR) से भी उसे बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उसकी याचिका पर राहत नहीं दी, जिससे भारत प्रत्यर्पण रोकने की उसकी आखिरी कानूनी उम्मीद भी खत्म हो गई है। अब ब्रिटेन सरकार उसके प्रत्यर्पण की प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीरव मोदी के पास अब भारत आने से बचने का कोई प्रभावी कानूनी विकल्प नहीं बचा है। सूत्रों का कहना है कि उसके सभी कानूनी रास्ते बंद हो चुके हैं और अब केवल कुछ प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं। इसके बाद उसे भारत लाए जाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। जिसका केंद्र को लंबे समय से इंतजार है।
इससे पहले अप्रैल 2026 में यूके हाईकोर्ट ने नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पण के फैसले को चुनौती देने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने भारत सरकार की ओर से भारतीय जेलों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर दिए गए आश्वासनों को पर्याप्त माना था। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद नीरव मोदी ने यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से भी उसे कोई राहत नहीं मिली।
ब्रिटेन की अदालत पहले ही उसके प्रत्यर्पण के पक्ष में फैसला दे चुकी थी और आवश्यक दस्तावेज सौंपने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी। इसके बाद ECHR में दाखिल याचिका उसके लिए आखिरी कानूनी विकल्प मानी जा रही थी।
नीरव मोदी को मार्च 2019 में लंदन में गिरफ्तार किया गया था। तब से वह वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। उस पर पंजाब नेशनल बैंक से हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। इस मामले में भारत की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) लंबे समय से उसकी तलाश कर रहे हैं।
नीरव ने ब्रिटेन की अदालतों में दावा किया था कि भारत भेजे जाने पर उसके साथ प्रताड़ना हो सकती है और जेलों की स्थिति ठीक नहीं है। हालांकि ब्रिटेन की अदालतों ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और भारत सरकार के आश्वासनों को पर्याप्त माना।
अब राजनयिक सूत्रों के अनुसार, ब्रिटेन के अधिकारी नीरव मोदी को भारत सौंपने की तैयारी में जुट गए हैं। यदि प्रशासनिक औपचारिकताएं तय समय पर पूरी हो जाती हैं, तो भगोड़े कारोबारी का भारत प्रत्यर्पण जल्द संभव हो सकता है। इससे पीएनबी घोटाले की जांच और मुकदमे की प्रक्रिया को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
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