आलीराजपुर। मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले के बोरी थाना क्षेत्र में एक विधवा महिला के साथ डकैती और सामूहिक दुष्कर्म की सनसनीखेज घटना सामने आई है। वारदात रात करीब 2 बजे की बताई जा रही है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।
जानकारी के अनुसार, करीब 6 हथियारबंद बदमाश विधवा महिला के घर दरवाजा तोड़कर घर में घुस गए। आरोपियों ने महिला को बंधक बनाकर उसके साथ मारपीट की और उस पर 8 किलोग्राम चांदी छिपाने का आरोप लगाया, भय के कारण महिला ने अपने पास रखी करीब 1 किलोग्राम चांदी बदमाशों को सौंप दी, लेकिन आरोपी 8 किलोग्राम चांदी की मांग पर अड़े रहे,इसके बाद उन्होंने पूरे घर का सामान अस्त-व्यस्त कर दिया और चांदी की तलाश में घर के भीतर कई स्थानों पर खुदाई भी की।
पीड़िता के आरोप के अनुसार, मनचाही चांदी नहीं मिलने पर 6 आरोपियों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना के दौरान महिला को गंभीर शारीरिक चोटें आईं, जिनमें गुप्तांग पर गंभीर चोट भी शामिल है। घटना के बाद महिला को बोरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए इंदौर रेफर कर दिया गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक रघुवंश सिंह भदोरिया मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के लोगों से जानकारी लेकर जांच के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
पुलिस अधीक्षक रघुवंश सिंह भदोरिया ने बताया कि मामले में डकैती, सामूहिक दुष्कर्म तथा अन्य संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष पुलिस टीमें गठित की गई हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस सभी पहलुओं पर गंभीरता से जांच कर रही है और 24 घंटे के भीतर मामले का खुलासा करने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉक्टरों ने जांच के बाद पुष्टि की है कि महिला के निजी अंगों में गंभीर चोटें हैं। वहीं पीड़िता ने अपने बयान में बताया है कि आरोपियों ने उसके प्राइवेट पार्ट में लकड़ी डाली थी। घटना के बाद महिला को पहले बोरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए इंदौर रेफर किया गया। पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश जारी है।
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महाघोटाला: नगर पालिका के दो कर्मचारियों पर 7.78 करोड़ रुपये के गबन का आरोप, देर रात FIR दर्ज
नर्मदापुरम। नगर पालिका में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। नगर पालिका के ही दो कर्मचारियों पर ₹7 करोड़ 78 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि के गबन का गंभीर आरोप लगा है। इस बड़े खुलासे के बाद नगर पालिका उपाध्यक्ष की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने देर रात दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज (FIR) कर लिया है।
करोड़ों रुपये की हेराफेरी के इस बड़े मामले में पुलिस ने नगर पालिका के दो प्रमुख कर्मचारियों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें हरीश गोस्वामी- सहायक राजस्व निरीक्षक (ARI), भुवन मेहता- कंप्यूटर ऑपरेटर शामिल है।
मिली जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए नगर पालिका के राजस्व को बड़ा चूना लगाया है। आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने टैक्स रसीदों और नगर पालिका के ऑनलाइन रिकॉर्ड्स में बड़े स्तर पर कूटरचना और हेरफेर किया। जनता से टैक्स के रूप में वसूली गई करोड़ों रुपये की राशि को सरकारी खजाने में जमा करने के बजाय मिलीभगत कर खुद डकार लिया।
इस महाघोटाले का खुलासा तब हुआ जब नगर पालिका उपाध्यक्ष अभय वर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस में लिखित आवेदन दिया। उपाध्यक्ष के आवेदन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए कोतवाली थाना पुलिस ने देर रात विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस जांच और ऑडिट के बाद इस मामले में कुछ और बड़े चेहरों के नाम भी सामने आ सकते हैं। फिलहाल पुलिस आरोपियों की धरपकड़ की तैयारी में जुट गई है।
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31 मार्च 2027 से बंद होगा स्वच्छ भारत मिशन, 450 संविदा कर्मचारियों का दूसरे विभागों में होगा समायोजन
मध्यप्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) 31 मार्च 2027 को समाप्त होने जा रहा है। मिशन की अवधि खत्म होने से पहले राज्य सरकार ने इसमें कार्यरत संविदा अधिकारियों और कर्मचारियों को बड़ी राहत देने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मिशन बंद होने के बाद कर्मचारियों को सेवा मुक्त करने के बजाय उनकी सेवाओं का उपयोग अन्य विभागों और योजनाओं में किया जाएगा। इसके लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने विभिन्न विभागों से रिक्त संविदा पदों की जानकारी मांगी है ताकि समय रहते कर्मचारियों का समायोजन किया जा सके।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में वर्तमान में राज्य, जिला और जनपद स्तर पर करीब 450 अधिकारी और कर्मचारी संविदा पर कार्यरत हैं। सरकार की योजना है कि मिशन समाप्त होने के बाद इन सभी योग्य कर्मचारियों को अन्य विभागों में समायोजित किया जाए जिससे उनकी नौकरी सुरक्षित रहे। सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव को अगले सप्ताह होने वाली एजीएम (AGM) की बैठक में मंजूरी मिलने की संभावना है। बैठक में विभागीय मंत्री और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) भी मौजूद रहेंगे।
इन विभागों से मांगी गई रिक्त पदों की जानकारी
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने कई विभागों और योजनाओं से खाली संविदा पदों का विवरण मांगा है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-
मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (MPRRDA)
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM)
पंचायत राज संचालनालय
विकास आयुक्त कार्यालय
प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना
विकसित भारत अभियान
राजीव गांधी जलग्रहण मिशन
वाल्मी (WALMI)
राज्य ग्रामीण विकास संस्थान (SIRD), जबलपुर
इन विभागों में उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर कर्मचारियों का समायोजन किया जाएगा।
किन पदों के कर्मचारियों का होगा समायोजन?
सरकार ने राज्य, जिला और जनपद स्तर पर कार्यरत विभिन्न श्रेणी के संविदा कर्मचारियों के समायोजन की योजना बनाई है।
राज्य स्तर पर
प्रोग्रामर
उपयंत्री
मानचित्रकार
लेखापाल
सहायक ग्रेड-1 एवं ग्रेड-3
डाटा एंट्री ऑपरेटर
भृत्य
जिला स्तर पर
जिला समन्वयक
परियोजना अधिकारी (तकनीकी)
मानचित्रकार
लेखापाल
डाटा एंट्री ऑपरेटर
जनपद (ब्लॉक) स्तर पर
ब्लॉक समन्वयक (Block Coordinator)
इस फैसले से संविदा कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित रहेगी और सरकार को भी प्रशिक्षित एवं अनुभवी मानव संसाधन का लाभ मिलेगा।
सरकार को होने वाले प्रमुख लाभ:
रिक्त पदों पर अनुभवी कर्मचारियों की नियुक्ति होगी।
नई भर्ती की आवश्यकता कम होगी।
विभिन्न योजनाओं के संचालन में तेजी आएगी।
प्रशिक्षण पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा।
कर्मचारियों को होने वाले लाभ:
मिशन बंद होने के बाद भी रोजगार सुरक्षित रहेगा।
सेवा में निरंतरता बनी रहेगी।
लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों के अनुभव का बेहतर उपयोग होगा।
रिक्त पदों की सूची मिलते ही शुरू होगी प्रक्रिया
विभागीय अधिकारियों के अनुसार जैसे ही संबंधित विभागों से रिक्त संविदा पदों का पूरा विवरण प्राप्त होगा, कर्मचारियों के समायोजन की अंतिम प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सरकार की कोशिश है कि 31 मार्च 2027 से पहले ही सभी कर्मचारियों को नए विभागों में पदस्थ कर दिया जाए ताकि किसी को भी बेरोजगार न होना पड़े।
वहीं Swachh Bharat Mission (शहरी) के मामले में स्थिति अलग है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस मिशन के लिए अलग से बड़ा संविदा अमला नियुक्त नहीं किया गया था। भारत सरकार की यह योजना मार्च 2026 में समाप्त हो चुकी थी जिसे 31 मार्च 2027 तक बढ़ाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि शहरी मिशन मुख्य रूप से आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों पर केंद्रित रहा है। इसलिए वहां कार्यरत संविदा कर्मचारियों के समायोजन को लेकर फिलहाल ग्रामीण मिशन जैसी कोई व्यापक योजना नहीं बनाई गई है।
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