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उत्तराखंड में मानसून का कहर, 69 सड़कें बंद, भूस्खलन और तेज बारिश से जनजीवन प्रभावित

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देहरादून. उत्तराखंड में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. राज्य के कई जिलों में भूस्खलन, सड़कें बंद होने, नदियों का जलस्तर बढ़ने और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आई हैं. हालात को देखते हुए जिला प्रशासन, राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), पुलिस और अन्य आपातकालीन एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अनुसार रविवार शाम तक राज्य में निगरानी में रखी गई 202 सड़कों में से 69 सड़कें पूरी तरह बंद थीं, जबकि 13 मार्ग आंशिक रूप से चालू रहे और 120 मार्गों को बहाल कर यातायात के लिए खोल दिया गया.
लगातार बारिश के कारण उत्तरकाशी, देहरादून, चंपावत, रुद्रप्रयाग और अन्य पर्वतीय जिलों में राहत एवं बहाली का कार्य युद्धस्तर पर जारी है. अधिकारियों का कहना है कि मौसम की स्थिति को देखते हुए बंद सड़कों की संख्या में बदलाव संभव है और मशीनों की मदद से मलबा हटाने का कार्य लगातार किया जा रहा है.
उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ ब्लॉक के बरेठी क्षेत्र में एक कार तीखे मोड़ पर अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी. सूचना मिलते ही पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे और वाहन में सवार सभी पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. सभी को मामूली चोटें आईं और उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया. अधिकारियों ने बताया कि समय पर राहत कार्य शुरू होने से बड़ा हादसा टल गया.
देहरादून में शनिवार देर रात भारी बारिश के कारण हाथीबड़कला-पठरिया पीर क्षेत्र की विजय कॉलोनी स्थित नई बस्ती में एक विशाल रिटेनिंग वॉल अचानक ढह गई. दीवार गिरने से मलबा कई मकानों पर आ गिरा, जिससे चार से पांच घर क्षतिग्रस्त हो गए और एक बुजुर्ग महिला मलबे में दब गईं. जिला प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने संयुक्त अभियान चलाकर 62 वर्षीय विमला देवी को सुरक्षित बाहर निकाला. उन्हें मामूली चोटें आईं और अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई है. एहतियात के तौर पर सात परिवारों के 20 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है तथा प्रभावित क्षेत्र को सील कर दिया गया है.
देहरादून-पांवटा साहिब मार्ग पर नंदा की चौकी के पास बना अस्थायी पुल भी तेज बहाव की चपेट में आकर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया. यह पुल वर्ष 2025 की आपदा में बह गए पुराने पुल के स्थान पर बनाया गया था. प्रशासन ने तत्काल इस मार्ग को असुरक्षित घोषित कर यातायात रोक दिया. बाद में मरम्मत किए गए स्थायी पुल को यातायात के लिए खोल दिया गया, जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच संपर्क बहाल हो सका.
मसूरी-देहरादून हाईवे पर हनुमान मंदिर के पास रात के दौरान भारी भूस्खलन हुआ, जिससे सड़क पर बड़े-बड़े पत्थर और मलबा आ गया. कई घंटे तक पर्यटक और स्थानीय लोग रास्ते में फंसे रहे. सुबह सड़क साफ होने के बाद ही यातायात सामान्य हो सका. प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है.
राज्य की कई नदियों का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है. डाकपत्थर में यमुना नदी चेतावनी स्तर तक पहुंच गई, जबकि इच्छारी क्षेत्र में टौंस नदी खतरे के निशान के करीब बह रही है. ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर गंगा का जलस्तर अभी खतरे के निशान से नीचे है. अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए डाकपत्थर और इच्छारी बैराज के 20 से अधिक गेट खोल दिए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लगातार निगरानी रखी जा रही है.
उत्तरकाशी की हर्षिल घाटी में खीरगंगा नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बने कल्वर्ट में जमा हो गए. सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाकर पानी का बहाव मोड़ा, जिससे सड़क को बड़े नुकसान से बचाया जा सका. वहीं यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सरीगढ़ के पास भूस्खलन से सड़क बंद हो गई. जिला प्रशासन ने मौके का निरीक्षण कर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को जल्द से जल्द मार्ग बहाल करने के निर्देश दिए हैं. फिलहाल तीर्थयात्रियों को एसडीआरएफ की सहायता से वैकल्पिक पैदल मार्ग से निकाला जा रहा है और सड़क को छह से सात दिनों में खोलने का लक्ष्य रखा गया है.
चंपावत जिले में धौन-बड़ौली मार्ग तीन दिनों तक बंद रहने के बाद भारी मशीनों की सहायता से दोबारा खोल दिया गया. जिला प्रशासन ने बताया कि जिले की सभी प्रमुख सड़कें फिलहाल चालू हैं, लेकिन मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार रविवार को भी राज्य के कई हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश होती रही. पिछले 24 घंटों में मसूरी में सबसे अधिक 75 मिमी वर्षा दर्ज की गई. इसके अलावा कालाढूंगी, बेरीनाग, कालसी, हाथीबड़कला, गंगोलीहाट, काशीपुर, ऊखीमठ, कीर्तिनगर और देहरादून सहित कई स्थानों पर अच्छी बारिश रिकॉर्ड की गई. मौसम विभाग ने देहरादून, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है. विभाग ने 13 से 16 जुलाई के बीच पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश, गरज-चमक और तेज वर्षा की संभावना जताते हुए लोगों को सतर्क रहने और मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है.

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