दिल्ली के प्ले स्कूल से मानवता और इंसानित को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। दिल्ली के प्ले स्कूल में मासूम से हैवानियत की सभी दरें पार की गई। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मौजपुर इलाके में निजी प्ले स्कूल में 3 साल के बच्चे को कुर्सी से बांधकर पीटा गया। इससे भी मन नहीं भरा तो मासूम से प्राइवेट पार्ट से छेड़छाड़ (यौन शोषण) किया गया।
मासूम के साथ हुई इस हैवानियत की तस्वीरें स्कूल के ही CCTV कैमरे में कैद हो गई थीं। बच्चे के पिता की शिकायत पर जाफराबाद थाना पुलिस ने शुक्रवार को जाफराबाद थाना पुलिस ने स्कूल निदेशिका सुनीता बंसल, प्रधानाचार्य नीलम, शिक्षिका सिमरन और आया पूजा के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और BNS की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
घटना की जानकारी देते हुए पीड़ित बच्चे के पिता ने पुलिस को बताया कि उनका बेटा पिछले कुछ दिनों से काफी सहमा हुआ था। वह रात में अचानक डरकर उठ जाता था और टॉयलेट जाने के नाम से बुरी तरह घबराता था। जब परिजन बच्चे को ईएनटी (ENT) स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास ले गए, तो जांच में सामने आया कि मासूम के दोनों कानों के पर्दों में भारी सूजन है। डॉक्टरों ने आशंका जताई कि बच्चे के साथ बुरी तरह मारपीट की गई है, जिससे उसके कानों में गहरी चोट आई है।
संदेह होने पर परिजनों ने स्कूल की निदेशिका से CCTV फुटेज दिखाने की मांग की, तो पहले कैमरे खराब होने का बहाना बनाया गया। दबाव बनाने पर परिजनों से 1500 रुपये की फीस ली गई और अगले दिन फुटेज दिखाने के लिए बुलाया गया। जब पिता ने CCTV फुटेज देखी तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वीडियो में दिखा वीडियो में साफ दिख रहा था कि शिक्षिका और स्टाफ बच्चे के कान पकड़कर उसे बेरहमी से पीट रहे थे। मासूम को घंटों तक कुर्सी से बांधकर रखा गया और लात मारकर कुर्सी से नीचे गिरा दिया गया। बच्चे से उसका खाना तक छीन लिया गया।
वहीं एक अन्य फुटेज में स्कूल की आया मासूम बच्चे के निजी अंगों के साथ छेड़छाड़ (यौन उत्पीड़न) करती नजर आई। इसी खौफ की वजह से मासूम टॉयलेट जाने से डर रहा था।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, जब निदेशिका से इसकी शिकायत की गई, तो उनका जवाब बेहद शर्मनाक था। उन्होंने पीड़ित परिवार से कहा कि बच्चे ऐसे रोज पीटते हैं, जो करना है कर लो। अन्य स्टाफ के लोग बच्चे में कमियां बताने लगे। इसके बाद शुक्रवार को पुलिस को मामले की सूचना दी गई। पुलिस ने बच्चे का जेपीसी और जीटीबी अस्पताल में मेडिकल कराया, जिसमें बच्चे की आंख के पास और जांघ पर चोट के निशान मिले।
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RSS प्रमुख के ‘हिंदू-मुस्लिम एकता’ संदेश पर सियासी कलह शुरू, विपक्ष बोला- ढोंग करने के लिए US जाना पड़ा
मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश देते हुए कहा कि ‘अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा.’ जिसके बाद से नेताओं ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं. RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में धर्मगुरुओं के सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए देश दुनिया के तमाम मुद्दों पर बात की और सभी धर्मों के लोगों को साथ लेकर चलने पर जोर दिया.
कुछ ने मोहन भागवत के संदेश का स्वागत किया और भारत में भी इसके अमल की बात कही. वहीं कुछ ने सवाल उठाए. वहीं कुछ लोगों ने कहा है कि भागवत जो विदेश में जाकर कह रहे हैं, उस पर भारत में अमल भी होना चाहिए.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में दिए गए ‘विविधता में एकता’ वाले बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने मोहन भागवत के बयान पर कहा कि RSS प्रमुख ने न्यूयॉर्क में जो भी कहा कि सच्चा हिंदू वह है जो अल्पसंख्यक समुदाय के बारे में सोचे, विचार करे, किसी तरह का कोई मतभेद नहीं हो यह बहुत ही अच्छी बात है.
तारिक अनवर ने RSS प्रमुख मोहन भागवत की सराहना करते हुए कहा कि यह पहली बार है जब RSS ने देश में रहने वाले अल्पसंख्यकों को लेकर चिंता जताई है और सही बात कही है.
वहीं, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि आरएसएस के मुखिया छवि बनाने के लिए ढोंग कर रहे हैं. राशिद अल्वी ने कहा, ‘पहला सवाल यह है कि अमेरिका में जाकर यह बोलने की जरूरत क्यों पड़ रही है? अगर भारत में हिंदू-मुसलमान का कोई मसला ही नहीं है तो यह अचानक वहां जाकर बोलने की क्या जरूरत? इसका मतलब यह है कि समस्या है.
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने रविवार को भागवत के बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ बोलने से कुछ नहीं होगा, बल्कि काम भी दिखाई देना चाहिए.
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि RSS प्रमुख मोहन यादव विदेश में जो यह जो सीख दे रहे हैं, तो देश के अधिकांश राज्यों में उन्हीं की सरकार है. उन्होंने कहा कि अच्छा होगा अगर यह सीख भागवत सरकार में बैठे हुए लोगों को दें.
RJD सांसद मनोज कुमार झा ने भागवत के बयान पर रिएक्शन देते हुए कहा कि सिर्फ ये बातें बोलने के लिए RSS प्रमुख को अमेरिका जाना पड़ा. यह कितना विरोधाभासी है कि मोहन भागवत को नहीं पता है कि केंद्रीय कैबिनेट के मंत्री कौन सी जुबान बोलते हैं.
वहीं ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर कहा ‘बिल्कुल सही बात है, शिक्षा ही असल कामयाबी की कुंजी है.
भागवत ने शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इंफोसिस थिएटर में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के 6,000 से अधिक सदस्यों और नेताओं की सभा को संबोधित किया था.
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अमेरिका में मोहन भागवत बोले- भारत से मुस्लिमों को निकालना हिंदुत्व नहीं, सभी रास्ते ईश्वर की तरफ जाते हैं
अमेरिका के न्यूयार्क में एक दुनिया, एक मानवता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने धर्म, विविधता और सामाजिक एकता पर बात की. उन्होंने कहा कि दुनिया में धर्मों के रास्ते अलग हो सकते हैं लेकिन अंतिम लक्ष्य एक है. भागवत ने मुस्लिम समुदाय के साथ संवाद और सेवा का भी उदाहरण दिया.
मोहन भागवत ने कहा कि अलग-अलग धर्म अपने रीति-रिवाज और तरीके अपनाते हैं लेकिन उनका लक्ष्य एक ही अंतिम सत्य तक पहुंचना है. उन्होंने पानी का उदाहरण देते हुए कहा कि धरती पर गिरने वाला पानी अलग-अलग रास्तों से आखिर समुद्र तक पहुंचता है. इसी तरह ईश्वर तक पहुंचने के रास्ते भी अलग हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि विविधता प्रकृति का नियम है और इसे स्वीकार करने के साथ उसका सम्मान भी होना चाहिए. उनके मुताबिक इंसान अपनी सीमाओं और अनुभवों के आधार पर सत्य को समझता है, इसलिए लोगों की समझ अलग होना स्वाभाविक है.
भागवत ने 2018 में दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि वहां मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उनसे पूछा था कि हिंदू राष्ट्र की बात में उनका क्या स्थान होगा. उन्होंने बताया कि उन्होंने जवाब दिया था कि किसी मुस्लिम को भारत से बाहर करने की सोच हिंदू विचार नहीं हो सकती. उनके अनुसार हर इंसान की गरिमा समान है और अलग-अलग समुदायों की पहचान समाज की विविधता का हिस्सा है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत की परंपरा में अलग-अलग संप्रदायों के लोगों के लिए जगह रही है और देश ने कई ऐसे लोगों को शरण दी, जिन्हें दुनिया में सुरक्षित जगह नहीं मिली.
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि समाज में एकता केवल राजनीति के जरिए नहीं लाई जा सकती. इसके लिए लोगों के बीच संवाद और सेवा जरूरी है. उन्होंने बताया कि 2018 के बाद मुस्लिम और ईसाई समुदायों के लोगों के साथ संवाद बढ़ाया गया. भागवत के मुताबिक सेवा करते समय यह नहीं देखा जाता कि सामने वाला किस धर्म का है. उन्होंने दावा किया कि आरएसएस से जुड़े करीब 1.30 लाख छोटे-बड़े सेवा प्रकल्प चल रहे हैं. उनका कहना था कि पहले समाज में एकता और भरोसे का माहौल बनाना होगा, इसके बाद जनमत के जरिए राजनीति पर भी असर डाला जा सकता है.
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