खंडवा । खंडवा में पुलिस ने एक स्पा सेंटर पर छापा मारकर 3 युवतियों और 5 युवकों को हिरासत में लिया है। पुलिस को स्पा सेंटर में अनैतिक गतिविधियां संचालित होने की सूचना मिली थी। कार्रवाई के दौरान पुलिस को कुछ आपत्तिजनक सामग्री भी स्पा सेंटर में मिलने की जानकारी सामने आई है। पकड़ी गई युवतियां दिल्ली और इंदौर की रहने वाली बताई जा रही हैं। फिलहाल पुलिस सभी से पूछताछ कर रही है।
खंडवा शहर के मोघट थाना क्षेत्र में संचालित द बेस्ट स्पा सेंटर में अनैतिक गतिविधियां होने की सूचना पुलिस को मिल रही थीं, इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने देर रात द बेस्ट स्पा सेंटर पर छापा मारा तो वहां हड़कंप मच गया। पुलिस की रेड पड़ते ही स्पा सेंटर में मौजूद लड़के-लड़कियां भागने लगे जिन्हें पकड़कर पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस ने स्पा सेंटर से 3 लड़कियों और 5 लड़कों को पकड़ा है, जिन्हें थाने लाकर पूछताछ की गई।
पुलिस के मुताबिक स्पा सेंटर से आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है। जो लड़के-लड़कियां पकड़े गए हैं उनसे पूछताछ की जा रही है। बताया गया है कि पकड़ी गईं लड़कियां दिल्ली-इंदौर की रहने वाली हैं। पकड़े गए लड़कों में एक स्पा सेंटर का कर्मचारी है जिसका नाम सद्दाम बताया गया है। पकड़ी गई युवतियों को पुलिस ने वन स्टॉप सेंटर भेजा है और उनके परिजनों को भी पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद सूचना भेजी गई है।
पुलिस का कहना है कि स्पा सेंटर के संचालक के बारे में पता लगाया जा रहा है। स्पा सेंटर के लाइसेंस व अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि स्पा सेंटर की आड़ में अनैतिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। बताया गया है कि पुलिस अब शहर में संचालित अन्य स्पा सेंटरों की भी जांच करने की तैयारी में है और जल्द ही शहर में स्पा सेंटरों को लेकर चेकिंग अभियान चलाया जा सकता है।
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आईएएस अधिकारी विवेक पोरवाल-संदीप जीआर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट
जबलपुर। एमपी हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन के ढुलमुल और उदासीन रवैये पर सख्त नाराजगी जताई है। अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने तत्कालीन प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल और तत्कालीन सागर कलेक्टर संदीप जीआर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि 21 सितंबर 2026 को दोनों अधिकारियों को हर हाल में कोर्ट में पेश किया जाए। वारंट तामील करने के लिए भोपाल पुलिस कमिश्नर और सागर एसपी को जिम्मेदारी दी गई है। कोर्ट ने अपने आदेश में बताया कि सितंबर 2025 में ही दोनों अधिकारियों को अवमानना याचिका के नोटिस मिल चुके थे। इसके बाद भी अधिकारियों ने न तो किसी वकील के जरिए कोर्ट में हाजिरी लगाई और न ही आदेश पालन से जुड़ी कोई रिपोर्ट दी। सागर कलेक्टर ने दिसंबर 2025 में सिर्फ एक तहसीलदार को संपर्क अधिकारी बनाने का एक औपचारिक पत्र रजिस्ट्री को भेजा था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के इस रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि अवमानना के मामलों में अधिकारी पूरी तरह से निष्क्रियता दिखा रहे हैं। सिर्फ संपर्क अधिकारी नियुक्त करने का पत्र भेज देना और उसके बाद कानूनी प्रक्रिया से दूर रहना प्रशासनिक लापरवाही की बेहद खराब स्थिति को दिखाता है। कोर्ट ने साफ किया कि ऐसी हालत में अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा था।
यह पूरा मामला सागर कलेक्टर कार्यालय की अनुभाग अधिकारी शीला सेन के नियमितीकरण आदेश का समय पर पालन न करने से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की तरफ से वकील कविता गुप्ता और विद्या प्रसाद ने पैरवी की। इस हाई-प्रोफाइल अवमानना मामले की अगली सुनवाई अब 21 सितंबर 2026 को होगी।
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जहरीली शराब कांड के आरोपी की शादी में डांस करते नजर आए PCC चीफ जीतू पटवारी? सोशल मीडिया पर फोटो वायरल
इंदौर। मध्य प्रदेश की सियासत में एक नया भूचाल आ गया है, जहां कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इन वायरल तस्वीरों में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी कथित तौर पर बहुचर्चित बंडा जहरीली शराब कांड के आरोपी मनीष लोधी की शादी समारोह में डांस करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस खुलासे के बाद प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में विरोधियों के हाथ एक बड़ा मुद्दा लग गया है।
मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में हाल ही में जहरीली और अमानक शराब पीने से कई लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और तमाम लोग गंभीर रूप से अस्पतालों में भर्ती हुए थे। इस सनसनीखेज शराब कांड के बाद पुलिस ने जिन मुख्य आरोपियों पर शिकंजा कसा था, उनमें लाइसेंसधारी शराब ठेकेदार मनीष लोधी का नाम भी शामिल था, जिस पर अवैध और जहरीली शराब के नेटवर्क से जुड़े होने के गंभीर आरोप हैं।
घटना के सामने आने के बाद से ही कांग्रेस आक्रामक रुख अपनाए हुए थी। पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी खुद पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे थे और राज्य की बीजेपी सरकार व आबकारी विभाग पर तीखे हमले बोलते हुए ताबड़तोड़ राजनीतिक बयानबाजी की थी। कांग्रेस ने इस पूरी त्रासदी के लिए सरकार और शराब माफियाओं की मिलीभगत को जिम्मेदार ठहराया था।
अब उन्हीं गंभीर आरोपी मनीष लोधी की शादी समारोह में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के शामिल होने और कथित तौर पर डांस करने की तस्वीरें सामने आने के बाद बीजेपी को कांग्रेस को घेरने का मौका मिल गया है। सोशल मीडिया पर वायरल इन तस्वीरों ने विपक्षी दलों को कांग्रेस के दोहरे चरित्र पर सवाल उठाने का बड़ा अवसर दे दिया है। हालांकि, इन वायरल फोटोज की सत्यता और संदर्भ को लेकर अभी विभिन्न राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है, लेकिन इस घटना ने सूबे की राजनीति का पारा जरूर चढ़ा दिया है।
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर क्राइम विंग ने एक बड़े ऑनलाइन फ्रॉड और सट्टा नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। विंडसर हिल्स स्थित एक किराए के डुप्लेक्स में ऑफिस बनाकर ऑनलाइन सट्टा, गैम्बलिंग और बैंक खातों की खरीदफरोख्त का काम करने वाले पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे नेटवर्क तक पुलिस को पहुंचाने में आम लोगों की सूचना अहम साबित हुई है। जांच में आरोपियों के दुबई और श्रीलंका से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के सुराग भी मिले हैं।
दरअसल साइबर क्राइम विंग को शहर के पॉश इलाके विंडसर हिल्स स्थित एक डुप्लेक्स में संदिग्ध गतिविधियां संचालित होने की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए डुप्लेक्स से पांच युवकों को गिरफ्तार किया। सभी आरोपी एक साथ किराए के मकान में रहकर उसे अपने ऑफिस के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे।पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 23 मोबाइल फोन, 37 सिम कार्ड, 11 एटीएम कार्ड, 3 लैपटॉप और 6 बैंक पासबुक सहित कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं।
एएसपी सुजावल जग्गा के मुताबिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी हर महीने करीब 7 से 8 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन करते थे। यानी सालभर में यह आंकड़ा लगभग 100 करोड़ रुपए तक पहुंचने की बात सामने आई है। आरोपी 100 पैनल नाम की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा खिलाने का काम कर रहे थे। इसके अलावा बैंक खातों की खरीद फरोख्त और ऑनलाइन गैम्बलिंग के जरिए भी नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। गिरफ्तार आरोपियों में चार ग्वालियर और एक दतिया जिले का रहने वाला है। सभी की उम्र करीब 28 साल बताई जा रही है और शुरुआती जांच में सामने आया है कि जल्दी पैसा कमाने की चाह में यह पूरा नेटवर्क खड़ा किया गया था।
आरोपियों के मोबाइल फोन में कई बैंक खातों की जानकारी भी मिली है, जिनका विवरण संबंधित बैंकों से जुटाया जा रहा है। वहीं जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच कराई जा रही है। पुलिस अब बैंकिंग डाटा और तकनीकी जांच के आधार पर साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन सट्टा और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। साथ ही डुप्लेक्स किराए पर देने वाले व्यक्ति की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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भोपाल में स्पा सेंटर पर रेड: 5 कमरों में आपत्तिजनक हालत में मिले लड़के-लड़कियां
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में पुलिस ने स्पा सेंटर पर रेड करते हुए अनैतिक गतिविधियों का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने स्पा सेंटर पर शनिवार रात को रेड मारी थी और रविवार को इसका खुलासा किया। पुलिस ने स्पा सेंटर में अनैतिक गतिविधियां होने की पुष्टि करते हुए बताया है कि पकड़े गए 4 युवकों के खिलाफ अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 3, 4 और 5 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पिपलानी थाना क्षेत्र के इंद्रपुरी स्थित पिंक वाइब्स स्पा (Pink Vibes Spa) में अनैतिक गतिविधियां होने की सूचना मिली थी। इसके बाद शनिवार रात को सूचना की पुष्टि करने के लिए एक पुलिसकर्मी को ग्राहक बनाकर स्पा सेंटर में भेजा। कस्टमर बनकर गए पुलिसकर्मी ने जैसे ही स्पा सेंटर में अनैतिक गतिविधियां होने की पुष्टि की तो पुलिस टीम ने स्पा सेंटर पर रेड की। रेड पड़ते ही स्पा सेंटर में अफरा-तफरी मच गई और मौजूद युवक-युवतियां भागने लगे।
पुलिस की रेड के दौरान स्पा सेंटर के 9 में से 5 कमरों में लड़के-लड़कियां आपत्तिजनक हालत में पकड़े गए। पुलिस युवक-युवतियों को पकड़कर थाने लाई जहां उनसे पूछताछ की गई। पुलिस ने स्पा सेंटर से 8,800 रुपए नकद, मोबाइल फोन और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की है। पूछताछ और मौके से मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने स्पा सेंटर में अनैतिक गतिविधियां संचालित होने की पुष्टि की। इसके बाद भुवन सिंह चंदेल, दीपक ठाकुर, पंकज त्रिपाठी और देवीसिंह रजक को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 3, 4 और 5 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर स्पा के संचालन, अन्य लोगों की भूमिका और कथित देह व्यापार से जुड़े नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।
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मौत के बाद भी सुकून नहीं! सड़क के अभाव में 2 किमी कंधे पर शव, विधायक के डेढ़ साल पुराने वादे पर सवाल
रीवा। रीवा जिले की मनगवां विधानसभा क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो ग्रामीण सड़कों और सरकारी दावों पर सवाल खड़े करती है। करौंदहा से सटे नदना गांव में सड़क की सुविधा नहीं होने का दावा है। हालात ऐसे हैं कि मौत के बाद अंतिम यात्रा भी ग्रामीणों के लिए चुनौती बन जाती है। ग्राम पंचायत नदना उर्फ डिहिया के ग्राम करौंदहा में सड़क की बदहाली का दावा एक बार फिर सामने आया है।
स्थानीय जानकारी के मुताबिक, रिटायर्ड शिक्षिका बताई जा रही कमलेश प्रसाद ओझा की पत्नी के निधन के बाद उनके शव को करीब दो किलोमीटर तक कंधे पर लेकर जाना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है। करीब पांच वर्ष पहले भी कमलेश प्रसाद ओझा के भाई की पत्नी के निधन पर शव को इसी तरह कंधे पर ले जाना पड़ा था। यानी ग्रामीणों के मुताबिक वर्षों से सड़क की समस्या बनी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब डेढ़ साल पहले विधायक नरेंद्र प्रजापति स्वयं सड़क का निरीक्षण करने पहुंचे थे। ग्रामीणों का दावा है कि उस दौरान विधायक ने सड़क निर्माण को लेकर भरोसा दिलाते हुए कहा था कि अगर सड़क ऐसी नहीं बनी, जिस पर मोटरसाइकिल, कार और चार पहिया वाहन निकल सकें, तो जनप्रतिनिधि होने का क्या फायदा। लेकिन आज भी सड़क की स्थिति जस की तस होने का दावा किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने आरटीआई के जरिए सड़क निर्माण से जुड़ी जानकारी हासिल की, जिसमें 57 गाड़ी मुरुम और 29 गाड़ी मिट्टी डाले जाने की जानकारी सामने आई। ग्रामीण आरोप लगा रहे हैं कि कागजों में काम दिखाई देता है, लेकिन मौके की स्थिति अलग तस्वीर बयां कर रही है। मामले की जांच के लिए संबंधित विभाग में आवेदन दिए जाने की बात भी कही जा रही है, हालांकि ग्रामीणों का दावा है कि अब तक मौके पर जांच नहीं हुई।
ग्रामीणों के मुताबिक, जनपद पंचायत सिरमौर, जिला पंचायत रीवा और कलेक्टर कार्यालय में कई बार शिकायत की गई है। जनसुनवाई में भी आवेदन देने की बात सामने आई है। अब सवाल सीधा है कि आखिर करौंदहा से नदना तक सड़क कब बनेगी? ग्रामीणों को शव कंधे पर ले जाने की मजबूरी से कब निजात मिलेगी? और डेढ़ साल पहले दिए गए विधायक के आश्वासन का क्या हुआ? ग्रामीण अब आश्वासन नहीं, जमीन पर सड़क चाहते हैं।
मुंबई से इस वक्त बड़ी वक्त बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां दिशा सल्यान मौत मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी यानि CBI ने एक नई FIR दर्ज करते हुए हत्या और गैंगरेप की धराएं जोड़ीं हैं। जानकारी के मुताबिक इस FIR में एक्टर डिनो मौर्या, सूरज पंचोली, रिया चक्रवर्ती और आदित्य ठाकरे का नाम भी जोड़ा गया है। इसके अलावा तत्कालीन गृहमंत्री यनिल देशमुख, सौविक चक्रवर्ती, रोहन रॉय (दिशा साल्यान का मंगेतर) और तत्कालीन मुंबई पुलिस कमिश्नर परामबीर सिंह का भी इस FIR में नाम दर्ज है। सबसे बड़ी बात यह कि, मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और आदित्य के पिता उद्धव ठाकरे का भी इस FIR में नाम जोड़ा गया है। उद्धव पर मामले में साजिश रचने का आरोप लगाया गया है।
बता दें कि, दिशा सालियान (Disha Salian) बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व सेलिब्रिटी मैनेजर थीं। 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के कारण मात्र 28 वर्ष की उम्र में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उनकी इस मौत के ठीक 6 दिन बाद, 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत भी अपने बांद्रा स्थित फ्लैट में मृत पाए गए थे।
FIR की कॉपी – कहा गया कि, दोनों की ही हत्या हुई थी। उस वक्त मुंबई पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह पर इस केस को दबाने के गंभीर आरोप लगे थे। कहा गया कि, इस मामले में उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे का नाम सीधे तौर पर जुड़ रहा था। सालों बाद अब एक बार फिर जब सीबीआई ने नई FIR दर्ज की है तब न्याय की उम्मीद जगी है। खबर है कि, केन्द्रीय अजेंसी इस केस से जुड़े पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करेगी।?
FIR में दिशा के मोबाइल फोन को लेकर कई गंभीर विरोधाभासों का जिक्र किया गया है. दस्तावेज में कहा गया है कि अलग-अलग बयानों और रोहन रॉय के बयान/इंटरव्यू से यह सवाल उठता है कि पुलिस ने 9 जून 2020 को सुबह करीब 9:40 बजे दिशा का मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया था.
लेकिन FIR के मुताबिक, फोन को जब्त दिखाए जाने के बावजूद बाद में मीडिया रिपोर्टों में सामने आया कि वह फोन एक्टिव रहा और उसके बाद भी इस्तेमाल किया जाता रहा. बताया जा रहा है कि इसके बाद पुलिस की तरफ से यह स्पष्टीकरण दिया गया कि फोन को सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद संभावित कनेक्शन की जांच के लिए दोबारा खोला गया था.
FIR में दावा किया गया है कि यह स्पष्टीकरण भी उपलब्ध सामग्री से मेल नहीं खाता था और इसके बाद पहले के जब्ती रिकॉर्ड दबा दिए गए या नष्ट कर दिए गए तथा फोन को कब और किन परिस्थितियों में जब्त किया गया, इसे लेकर आधिकारिक रिकॉर्ड में एक अलग कहानी दर्ज की गई.
FIR में यह भी गंभीर दावा किया गया है कि दिशा का मोबाइल फोन सचिन वाजे और आदित्य ठाकरे के कब्जे में रहा और उसका इस्तेमाल किया गया. दस्तावेज के मुताबिक, फोन से उन लोगों की पहचान करने के लिए जानकारी हासिल की गई, जिनसे दिशा ने घटना से जुड़ी बातचीत की थी या जो संभावित गवाह बन सकते थे अथवा मामले से जुड़े लोगों के लिए खतरा पैदा कर सकते थे.
दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने मार्च 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। उन्होंने अपनी बेटी की मौत को लेकर गंभीर संदेह जताते हुए एफआईआर और सीबीआई जांच की मांग की थी। उनके वकील ने अदालत में आरोप लगाया था कि दिशा को कुछ प्रभावशाली लोगों से जुड़ी कथित आपत्तिजनक गतिविधियों की जानकारी थी और इसी वजह से उसकी हत्या की गई।
सतीश सालियान की ओर से उनकी बेटी के साथ गैंगरेप और हत्या जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए। हालांकि, ये याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जिन्हें अदालत ने इस स्तर पर सत्यापित तथ्य के तौर पर स्वीकार नहीं किया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि CBI की जांच में पर्याप्त सामग्री मिलने तक किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाएगा।
सीबीआई ने पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) पूरन कुमार को विशेष जांच अधिकारी नियुक्त किया है। इस नई नियुक्ति के साथ, इस मामले की जांच, जो कुछ समय से रुकी हुई थी या धीमी पड़ गई थी, अब तेजी से आगे बढ़ेगी और इस मामले के रहस्यों और सच्चाई के सामने आने की संभावना है।
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स्पा सेंटर में पुलिस की दबिश, बिजली-पानी बंद फिर भी अंदर मिलीं 8 युवतियां
दुर्ग भिलाई: दुर्ग जिले में स्पा सेंटरों की गतिविधियों को लेकर पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। जुनवानी स्थित सूर्या टीआई मॉल की दूसरी मंजिल पर संचालित एक स्पा सेंटर में पुलिस ने औचक दबिश दी। कार्रवाई के दौरान सेंटर के भीतर 7 से 8 युवतियां मिलीं। हालांकि शुरुआती जांच में अनैतिक देह व्यापार की पुष्टि नहीं हुई है।
दुर्ग जिले के जुनवानी इलाके में सूर्या टीआई मॉल की दूसरी मंजिल पर संचालित स्पा सेंटर में पुलिस टीम अचानक पहुंची। एएसपी शोभराज अग्रवाल के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई से सेंटर में हड़कंप मच गया।
पुलिस के मुताबिक मॉल प्रबंधन की ओर से स्पा सेंटर की बिजली और पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई थी। इसके बावजूद जांच के दौरान पुलिस टीम को सेंटर के अंदर 7 से 8 युवतियां मौजूद मिलीं। इसी वजह से पुलिस ने सेंटर की गतिविधियों को लेकर मौके पर जांच की।
पुलिस ने मौके पर मिली युवतियों के खिलाफ बाउंड ओवर की कानूनी कार्रवाई की है। पुलिस की ओर से मामले में आवश्यक पूछताछ और प्रारंभिक जांच की गई।
तलाशी और शुरुआती जांच के दौरान पुलिस को मौके से किसी भी प्रकार के अनैतिक देह व्यापार के प्रमाण नहीं मिले। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई संदिग्ध गतिविधियों की जांच और निगरानी के तौर पर सामने आई है।
सीएसपी निशांत पाठक ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में किसी भी तरह की संदिग्ध या अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में आगे भी पुलिस की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
स्पा सेंटर में हुई इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि शहर में संचालित ऐसे प्रतिष्ठानों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी। नियमों का उल्लंघन या संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।
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देश में 9.78 फीसदी से बढ़कर 9.92% हुई थोक महंगाई दर, ईंधन से लेकर खाने-पीने की चीजें हुई महंगी
नई दिल्ली. देशवासियों को अगस्त के महीने में महंगाई का झटका लगा. इस दौरान ईंधन से लेकर खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ गए. सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में थोक महंगाई दर 9.78 फीसदी से बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई.
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई अगस्त 2026 के लिए 9.92 प्रतिशत रही, जो जुलाई में 9.78 प्रतिशत थी. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बताया कि अगस्त 2026 में सभी वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) 110.8 रहा, जबकि जुलाई में यह 110.0 था. आंकड़ों से पता चलता है कि प्राथमिक वस्तुओं, ईंधन एवं ऊर्जा तथा विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का समग्र महंगाई पर असर पड़ा.
अगस्त में ईंधन एवं ऊर्जा श्रेणी की महंगाई बढ़कर 22.93 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 20.05 प्रतिशत थी. हाल के सप्ताहों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का असर इस श्रेणी पर साफ दिखाई दिया. वहीं, प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई अगस्त में 7.76 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 8.52 प्रतिशत थी. दूसरी ओर, विनिर्मित उत्पादों की महंगाई मामूली बढ़कर 8.37 प्रतिशत हो गई, जो पिछले महीने 8.29 प्रतिशत थी.
अगस्त में प्राथमिक वस्तुओं का सूचकांक 118.1, ईंधन एवं ऊर्जा का 108.3 और विनिर्मित उत्पादों का 108.8 रहा. जुलाई में ये क्रमश: 117.2, 105.4 और 108.4 थे. डब्ल्यूपीआई खाद्य सूचकांक-आधारित महंगाई अगस्त में बढ़कर 7.05 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में यह 6.65 प्रतिशत थी. इससे संकेत मिलता है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी दबाव बना हुआ है.
मंत्रालय के अनुसार, पिछले महीने अगस्त में थोक महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में खनिज तेल (पेट्रोलियम उत्पाद सहित), खाद्य वस्तुएं, खाद्य उत्पादों का विनिर्माण, मूल धातुएं, गैर-खाद्य पदार्थ और रसायन एवं रासायनिक उत्पादों का निर्माण शामिल रहे. सरकार ने जून 2026 के अंतिम आंकड़ों में भी संशोधन किया है. जून का डब्ल्यूपीआई सूचकांक 110.2 के अस्थायी अनुमान से बढ़ाकर 110.3 कर दिया गया है.
सतना। मध्य प्रदेश के सतना से छात्राओं के बीच मारपीट का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि चार छात्राओं ने मिलकर कॉलेज में पढ़ने वाली एक छात्रा को सुनसान जगह ले जाकर बुरी तरह पीटा। इतना ही नहीं, पूरी घटना का वीडियो भी बनाया गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पीड़िता ने अब पुलिस से शिकायत की है।
मामला कोलगवां थाना क्षेत्र का है। पीड़िता के मुताबिक, एक छात्र उसे वॉट्सऐप पर परेशान करता था। छात्रा ने जब उसे फटकार लगाई तो उसके साथ कॉलेज में पढ़ने वाली और पड़ोस में रहने वाली एक छात्रा ने उस पर अपने दोस्त के साथ रिलेशनशिप में आने का दबाव बनाया। पीड़िता ने इससे इनकार कर दिया। आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर आरोपी छात्रा ने 6 अगस्त को उसे बहाने से अपने स्कूटर पर बैठाया। पहले उसे इधर-उधर घुमाया गया और फिर रिश्तेदार के यहां जाने की बात कहकर नगर वन के सामने सुनसान जगह ले जाया गया।
आरोप है कि सुनसान जगह पर आरोपी छात्रा की तीन सहेलियां पहले से मौजूद थीं। चारों ने कथित तौर पर अपने चेहरे ढंक रखे थे। इसके बाद उन्होंने पीड़िता को घेर लिया और उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। सामने आए वीडियो में चार लड़कियां छात्रा को घेरकर मारती दिखाई दे रही हैं। वीडियो में गाली-गलौज और धमकाने की बात भी सामने आई है।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान एक लड़की ने डंडे से उसके कान और आंख के आसपास वार किया, जबकि बाकी लड़कियों ने लात-घूंसों से उसकी पिटाई की। इसी दौरान एक आरोपी छात्रा ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
आरोप है कि मारपीट के दौरान पीड़िता पर दबाव बनाया गया कि वह आरोपी छात्र की बात माने। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए उससे उस छात्र से माफी भी मंगवाई गई। पीड़िता के मुताबिक, जब उसने छात्र के साथ रिलेशनशिप में आने के लिए हामी भर दी, तब आरोपी छात्राओं ने उसे सेमरिया चौराहे पर छोड़ दिया।
घटना के बाद पीड़िता डर की वजह से काफी समय तक चुप रही। उसने अपने परिवार को भी इस बारे में नहीं बताया। बताया गया कि उसकी मां गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं, जबकि पिता इलाज के सिलसिले में बाहर थे। छात्रा फिलहाल एक रिश्तेदार के यहां रहकर पढ़ाई कर रही है। इसी बीच मारपीट का वीडियो पीड़िता के एक रिश्तेदार के पास पहुंच गया। उन्होंने छात्रा से पूछताछ की, जिसके बाद पूरी घटना सामने आई।
घटना की जानकारी मिलने के बाद 11 सितंबर को मामला कोलगवां थाने पहुंचा। थाना प्रभारी सुदीप सोनी ने बताया कि पुलिस ने मामले को संज्ञान में लिया है। पीड़िता के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच की जा रही है। पुलिस अब वायरल वीडियो, पीड़िता के बयान और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है।
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50 हजार की सुपारी देकर हमला मामले में पंचायत सचिव और बिल्डर समेत 5 गिरफ्तार
भोपाल। नजीराबाद थाना क्षेत्र में प्लॉट के विवाद को लेकर एक किसान पर जानलेवा हमला करने का मामला सामने आया है। इस साजिश का खुलासा करते हुए पुलिस ने पंचायत सचिव और एक बिल्डर समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्होंने किसान पर हमले के लिए 50 हजार रुपये की सुपारी दी थी।
दरअसल फरियादी किसान इंदर सिंह गुर्जर का आरोपियों के साथ प्लॉट को लेकर पुराना विवाद चल रहा था, जिसके चलते इस खूनी साजिश को अंजाम दिया गया। पंचायत सचिव और बिल्डर जितेंद्र श्रीवास्तव ने किसान को रास्ते से हटाने के लिए बदमाशों को 50 हजार रुपये की सुपारी दी थी। बदमाशों ने वारदात को अंजाम देने के लिए किराए पर एक रेंटर कार ली थी और अपनी पहचान छुपाने के लिए गाड़ी की नंबर प्लेट पर मिट्टी पोत दी थी ताकि कोई वाहन का नंबर न देख सके।
नजीराबाद के बागसी रोड पर आरोपियों ने कार सवार बदमाशों के जरिए किसान से पता पूछने के बहाने रोका और फिर उस पर जानलेवा हमला कर दिया। नजीराबाद थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में पंचायत सचिव और बिल्डर सहित कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि 2 अन्य फरार आरोपियों की तलाश सरगर्मी से की जा रही है।
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स्पा की आड़ में देह व्यापार! तीन लड़कियां समेत छह लोग पकड़ाए, आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद
खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्पा सेंटर की आड़ में देह व्यापार के खेल का बड़ा खुलासा हुआ है। शनिवार देर रात पुलिस ने दबिश देकर स्पा से तीन लड़कियों और तीन लड़कों को पकड़ा है। बताया जा रहा है कि बीते दो हफ्ते से यहां अनैतिक गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। जिसके बाद पुलिस ने छापेमार कार्रवाई की है। यह पूरा मामला मोघट थाना क्षेत्र का है।
जानकारी के मुताबिक, शनिवार देर रात मोघट पुलिस ने आनंद नगर रोड पर स्थित एक स्पा सेंटर पहुंची। बताया गया कि बीते 15 दिनों से यहां अनैतिक गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दबिश दी। जहां से तीन लड़कियों और तीन लड़कों को हिरासत में लिया गया है। आरोप है कि यह स्पा सेंटर की आड़ में देह व्यापार चल रहा था।
सीएसपी अभिनव बारंगे ने जानकारी देते हुए बताया कि, पिछले 15 दिनों से स्पा की आड़ में अनैतिक गतिविधियों की जानकारी मिल रही थी। इसके बाद टीम बनाकर दबिश दी गई तो मौके से तीन लड़के और तीन लड़कियां आपत्तिजनक हालात में पकड़े गए। वहां अनैतिक चीजें भी मिली, जिन्हें जब्त किया गया हैं। फिलहाल जांच चल रही है। लड़कियों को वन स्टॉप सेंटर भेजा जाएगा। जबकि लड़कों को आरोपी बनाकर कोर्ट में पेश किया जाएगा।
इंदौर। मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा योजना के तहत नई तकनीक से लैस बसों का मॉडल सामने आया है। इंदौर में आयोजित मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा परिवहन समिट-2026 के एक्सपो में टाटा, स्विच, ईका, आयशर-वैरो ईगल सहित प्रमुख कंपनियों ने आधुनिक बसों के मॉडल प्रदर्शित किए।
एक्सपो में प्रदर्शित आधुनिक बसों में सुरक्षा तकनीक खास आकर्षण रही। इनमें एआई आधारित ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी तकनीक शामिल है। पुणे की बस निर्माता के कम्पनी वैरो ईगल की प्रोजेक्ट मैनेजर फोरम ब्रम्भट्ट ने बताया कि हमारी बसों में यात्रियो की सुरक्षा और रोड सेफ्टी को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्राथमिकता दी जाती है। जिसके तहत बस को स्टार्ट करने से पहले बस में लगे ब्रेथ एनालाइज़र सिस्टम से ड्राइवर की अल्कोहल जांच होगी यदि ड्राइवर ने शराब पी रखी है तो बस स्टार्ट नहीं होगी। इसका उद्देश्य नशे में ड्राइविंग को रोककर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ईका के प्राजेक्ट मैनेजर रियाज ने बताया कि हमारी बसों में सीसीटीवी कैमरे, पैनिक अलार्म, सीट बेल्ट, बेहतर साउंड सिस्टम और फायर सेफ्टी सिस्टम जैसे फीचर भी शामिल किए जा रहे हैं। 45 डिग्री से अधिक तापमान की स्थिति में फायर सिक्योरिटी एक्शन जैसी तकनीक भी बसों को ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
एक्सपो में इलेक्ट्रिक बसों पर विशेष फोकस रहा। प्रदर्शित ई-बसों के अलग-अलग मॉडल सिंगल चार्ज में करीब 200 से 500 किलोमीटर तक की दूरी तय करने की क्षमता वाले बताए गए। इससे प्रदेश के शहरों के बीच पर्यावरण-अनुकूल और कम लागत वाले सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
एमपीवायपीआईएल के डिप्टी सेक्रेट्री कमल नागर ने बताया कि मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा योजना के तहत सरकार सिर्फ बस संचालन तक सीमित नहीं रहना चाहती। बस निर्माण, संचालन, टिकटिंग, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और यात्री सुविधाओं को जोड़कर पूरा ट्रांसपोर्ट इकोसिस्टम विकसित करने की योजना है। यह व्यवस्था पीपीपी मॉडल पर आगे बढ़ाई जाएगी। इंदौर और भोपाल को छोड़कर प्रदेश के अन्य शहरों में पीपीपी मॉडल पर आईएसबीटी बस टर्मिनल विकसित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। साथ ही टिकटिंग, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और यात्री सुविधाओं से जुड़े स्टार्टअप्स को भी इस व्यवस्था से जोड़ने की योजना है।
मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा योजना के माध्यम से भविष्य में यात्रियों को घर से लेकर बस तक कनेक्टनीविटी देने की तैयारी है, इसके लिए एमपीवायपीआईएल रैपिडो से एमओयू करने जा रहा है। जिसके तहत एमपीवायपीआईएल की टिकट बुकिंग के साथ यात्रियों को यह विकल्प दिया जाएगा कि वो बस तक पहुंचने के लिए ओटो और कैब भी बुक कर सकेंगे। तय समय अनुसार आटो और कैब यात्रियों को घर पर रसीव करने पहुंच जाएंगे। इससे लोगों को अंतिम स्थान तक कनेक्टीविटी मिल जाएगी।
परिवहन सचिव मनीष सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा योजना के तहत दो दिवसीय समिट के दौरान हम एक ईको सिस्टम तैयार कर रहे है, जिससे लोक परिवहन सुगम बनाना है समिट के माध्यम से हमारी अपेक्षाएं उद्योग जगत, निवेशकों, बस निर्माता टेक कंपनियां बैंक और वित्तीय संस्थाओं, परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटीएमएस और डिजिटल सॉल्यूशन उपलब्ध करने वाली कम्पनियों से जो हमारी से जुड़कर काम करें और देश में एक बेहतर पीपीपी मॉडल पर आधारित बस सेवा मध्यप्रदेश में स्थापित हो।
सरकार का लक्ष्य मध्यप्रदेश में पुराने रोडवेज सिस्टम को आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बेहतर यात्री सुविधाओं से जोड़कर सुरक्षित, किफायती और आरामदायक सार्वजनिक परिवहन का नया मॉडल तैयार करना है।
- मनीष सिंह, परिवहन सचिव
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प्रशासन को कहा ‘सिर्फ सगाई होगी’, टीम के जाते ही कर दिया विवाह! बाल विवाह पर 9 पर FIR
इंदौर। बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन की समझाइश और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी के बावजूद परिवार ने नियमों को धता बता दिया। गांधी नगर क्षेत्र में एक नाबालिग बालिका के परिजनों ने प्रशासन और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम के सामने शपथ पत्र देकर 18 साल की उम्र पूरी होने तक विवाह नहीं कराने का भरोसा दिया, लेकिन टीम के लौटते ही उसी शाम नाबालिग की शादी करा दी। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए नाबालिग से विवाह कराने वाले बालिग युवक, दोनों पक्षों के माता-पिता और रिश्तेदारों सहित कुल नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। यह कार्रवाई जिले में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर की गई है।
मामले की शुरुआत चाइल्ड हेल्पलाइन पर मिली शिकायत से हुई थी। शिकायत के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग और चाइल्ड लाइन की टीम ने मामले की जानकारी जुटाई और परिवार को समझाइश दी। टीम ने परिजनों को स्पष्ट रूप से बताया कि नाबालिग की शादी 18 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद ही की जा सकती है।निर्धारित विवाह के दिन दोनों परिवार ड्रीम वर्ल्ड रिसोर्ट, गोम्मटगिरि पहुंच गए। इसी दौरान दोबारा शिकायत मिलने पर विभाग और चाइल्ड लाइन की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने दोनों पक्षों को समझाया और विवाह रोकने के लिए कहा।इस पर परिजनों ने शपथ पत्र देकर भरोसा दिलाया कि विवाह नहीं किया जाएगा और केवल सगाई की रस्म होगी। 24 जून को प्रस्तावित विवाह को निरस्त करने की बात भी कही गई। प्रशासनिक टीम परिवार को समझाकर वहां से लौट गई।लेकिन आरोप है कि टीम के जाते ही परिवार ने अपना वादा तोड़ दिया। उसी शाम नाबालिग का विवाह करा दिया गया।
परिजनों ने प्रशासन से विवाह निरस्त करने की बात कही थी, इसलिए मामला शांत मान लिया गया। बाद में रक्षाबंधन के दौरान जब बालिका अपने ससुराल से मायके पहुंची, तब ग्रामीणों को जानकारी मिली कि विवाह टला नहीं था, बल्कि नाबालिग की शादी पहले ही कराई जा चुकी थी।इसके बाद मामले की शिकायत प्रशासन तक पहुंची।
मामले की जानकारी 1 सितंबर को कलेक्टर की जनसुनवाई में सामने आई। एक आवेदक ने विवाह से जुड़े प्रमाणों के साथ शिकायत की और बताया कि नाबालिग बालिका का विवाह कराया जा चुका है।शिकायत मिलने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा ने कार्रवाई के लिए बाल विवाह विरोधी उड़नदस्ता प्रभारी महेंद्र पाठक को जांच के निर्देश दिए।
जांच के दौरान टीम ने विवाह से जुड़े साक्ष्य जुटाए। उड़नदस्ता प्रभारी महेंद्र पाठक के अनुसार फोटोग्राफर और परिवार के सदस्यों द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए फोटो और वीडियो से विवाह होने की पुष्टि हुई।इसके साथ ही बालिका की उम्र से संबंधित दस्तावेज भी जुटाए गए। स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर उसकी आयु का प्रमाण तहसीलदार सांवेर के माध्यम से प्राप्त किया गया। सभी दस्तावेज और अन्य प्रमाण एकत्र करने के बाद कार्रवाई की गई।
सभी साक्ष्य जुटाने के बाद बाल विवाह विरोधी उड़नदस्ता प्रभारी महेंद्र पाठक ने उड़नदस्ता सदस्य संगीता सिंह के साथ थाना गांधी नगर पहुंचकर एफआईआर दर्ज कराई।पुलिस ने मामले में विवाह करने वाले बालिग युवक अभिषेक और रितिक सोनी, वर-वधू के माता-पिता तथा विवाह में शामिल रिश्तेदारों सहित कुल नौ लोगों को आरोपी बनाया है। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
इस मामले में खास बात यह है कि परिवार को प्रशासन और चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम पहले ही समझा चुकी थी। इतना ही नहीं, परिजनों ने लिखित शपथ पत्र देकर नाबालिग की शादी 18 साल की उम्र पूरी होने के बाद करने का भरोसा भी दिया था। इसके बावजूद विवाह करा दिया गया।
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हैवानियत की हद पार चोरी के शक में नाबालिग को पिलर से बांधकर पीटा
सीधी. चोरी का शक किसी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं देता, लेकिन सीधी में सामने आए एक मामले ने इस बुनियादी बात को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है. शहर के विजय फिलिंग पेट्रोल पंप परिसर में एक नाबालिग को चोरी के संदेह में पकड़कर पिलर से बांधने और बेरहमी से पीटने का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुआ है. वीडियो में बच्चा खुद को छोड़ने के लिए लोगों के पैर पकड़कर गिड़गिड़ाता दिखाई दे रहा है, लेकिन उसकी गुहार के बावजूद मारपीट जारी रहने का आरोप है.
घटना रविवार सुबह करीब 10 बजे की बताई जा रही है. पेट्रोल पंप शहर के मनीष अग्रवाल का बताया गया है. आरोप है कि नाबालिग पंप के पीछे बने घर में चोरी की नीयत से घुसा था. इसी दौरान वहां मौजूद कर्मचारियों ने उसे पकड़ लिया. इसके बाद पुलिस को सूचना देने या कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बजाय उसे परिसर में ही बांधकर पूछताछ और मारपीट की गई.
मामले का वीडियो सामने आने के बाद घटना को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी व्यक्ति पर चोरी का संदेह था तो उसे पुलिस के हवाले करने के बजाय सजा देने का अधिकार कर्मचारियों को किसने दिया. पुलिस के अनुसार फिलहाल घटना की कोई शिकायत नहीं मिली है.
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में नाबालिग पेट्रोल पंप परिसर में एक पिलर से बंधा दिखाई दे रहा है. आसपास कुछ लोग खड़े हैं और बच्चा उन्हें छोड़ने की गुहार लगाता नजर आ रहा है. वह लोगों के पैर पकड़ता है और खुद को छोड़ने के लिए कहता दिखाई देता है.
वीडियो में बच्चे से उसके घर का मोबाइल नंबर भी पूछा जाता दिखाई दे रहा है. आरोप है कि जब बताया गया नंबर बंद मिला तो कर्मचारियों ने यह मान लिया कि बच्चा गलत या पुराना नंबर बता रहा है. इसके बाद उसके साथ फिर मारपीट की गई.
वीडियो में दिखाई देने वाला घटनाक्रम इस मामले को महज चोरी के संदेह से आगे ले जाता है. किसी अपराध का संदेह होने पर भी किसी नाबालिग को बांधना और उसके साथ मारपीट करना गंभीर सवाल खड़े करता है. घटना में बच्चे की उम्र को देखते हुए मामला और संवेदनशील हो जाता है.
कानून व्यवस्था का सबसे सामान्य सिद्धांत यही है कि अपराध का संदेह होने पर पुलिस को सूचना दी जाए और जांच कानून के अनुसार हो. किसी व्यक्ति को पकड़कर उससे जबरन पूछताछ करना या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना कानून व्यवस्था का विकल्प नहीं हो सकता.
इस मामले में भी यदि पेट्रोल पंप कर्मचारियों को नाबालिग के चोरी की नीयत से परिसर में आने का संदेह था तो वे तत्काल पुलिस को सूचना दे सकते थे. पुलिस मौके पर पहुंचकर बच्चे से पूछताछ करती, उसके स्वजन को सूचना दी जाती और यदि कोई अपराध सामने आता तो नियमानुसार कार्रवाई होती.
इसके बजाय बच्चे को पिलर से बांधकर मारपीट किए जाने का आरोप सामने आया है. यही वजह है कि वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में आक्रोश है.
इस पूरे घटनाक्रम का किसी व्यक्ति ने वीडियो भी बनाया. यही वीडियो अब इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है. वीडियो में घटना के दौरान मौजूद लोगों और नाबालिग के बीच का घटनाक्रम दिखाई देता है.
यह सवाल भी उठ रहा है कि जब घटना के समय कई लोग मौके पर मौजूद थे और उसका वीडियो बनाया जा रहा था, तब किसी ने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी. यदि किसी बच्चे पर चोरी का गंभीर संदेह था तो उसे पुलिस के हवाले करने के बजाय परिसर में बांधकर रखने की स्थिति कैसे बनी.
घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि अब मामला केवल किसी शिकायत पर निर्भर नहीं रह जाता. वीडियो में दिखाई देने वाली घटना की स्वतंत्र रूप से जांच की जा सकती है. हालांकि फिलहाल पुलिस का कहना है कि उसे किसी पक्ष से शिकायत प्राप्त नहीं हुई है.
मामले में कोतवाली थाना प्रभारी दिव्य प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि फिलहाल पुलिस को घटना की जानकारी नहीं है और किसी भी पक्ष की ओर से शिकायत प्राप्त नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को चोरी या किसी अन्य अपराध की जानकारी मिलती है तो उसे कानून अपने हाथ में लेने के बजाय पुलिस को सूचना देनी चाहिए. किसी को भी कानून हाथ में लेकर मारपीट करने का अधिकार नहीं है.
पुलिस का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है. ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि वीडियो के आधार पर पुलिस स्वतः संज्ञान लेकर घटना की जांच करती है या फिर औपचारिक शिकायत का इंतजार करती है.
घटना में जिस बच्चे के साथ मारपीट का आरोप है, वह नाबालिग बताया जा रहा है. बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और कानूनी प्रक्रिया का पालन और भी जरूरी हो जाता है. किसी बच्चे पर आरोप लगने मात्र से उसे अपराधी मान लेना और उसके साथ दंडात्मक व्यवहार करना उचित नहीं हो सकता.
यदि बच्चे ने वास्तव में चोरी का प्रयास किया था, तब भी उसके विरुद्ध कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए. और यदि वह चोरी के आरोप से निर्दोष है तो उसके साथ हुई मारपीट और भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है.
यही कारण है कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है. वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम, घटना के समय मौजूद लोगों, नाबालिग की स्थिति और चोरी के आरोप की वास्तविकता—इन सभी पहलुओं की जांच के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी.
सीधी की यह घटना केवल एक पेट्रोल पंप तक सीमित मामला नहीं है. वीडियो ने समाज में बढ़ती उस प्रवृत्ति पर सवाल खड़ा किया है, जिसमें अपराध के संदेह मात्र पर लोग खुद ही फैसला करने लगते हैं.
किसी व्यक्ति को चोर समझकर पकड़ लेना और उसके साथ मारपीट करना न्याय की प्रक्रिया नहीं है. इससे कई बार वास्तविक अपराध की जांच भी प्रभावित हो सकती है. गलत व्यक्ति को निशाना बनाए जाने की स्थिति में नुकसान की भरपाई भी संभव नहीं होती.
विशेष रूप से नाबालिगों के मामले में ऐसी घटनाएं उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं. इसलिए किसी भी आरोप की जांच पुलिस और कानून के माध्यम से ही होनी चाहिए.
वायरल वीडियो का सबसे विचलित करने वाला हिस्सा वह है, जब बच्चा खुद को छोड़ने के लिए सामने मौजूद लोगों के पैर पकड़ता दिखाई देता है. वह मदद की गुहार लगाता है, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद उसके साथ मारपीट की जाती रही.
यह दृश्य इस पूरे मामले को सामान्य चोरी के आरोप से अलग बना देता है. एक ओर चोरी की आशंका की जांच का सवाल है, दूसरी ओर एक नाबालिग के साथ कथित हिंसा का सवाल. दोनों को अलग-अलग जांचना जरूरी है.
यदि चोरी का आरोप सही था तो उसकी पुष्टि सबूतों से होनी चाहिए. यदि आरोप गलत था तो बच्चे को किस आधार पर बांधकर पीटा गया, इसका जवाब भी सामने आना चाहिए. और यदि चोरी का प्रयास हुआ भी था तो कानून के तहत कार्रवाई का रास्ता खुला था.
वीडियो वायरल होने के बाद घटना सार्वजनिक हो चुकी है. ऐसे में केवल यह कहना कि अभी शिकायत नहीं मिली है, पूरे मामले का अंत नहीं हो सकता. पुलिस के सामने अब वीडियो की सत्यता, घटनास्थल, उसमें दिखाई दे रहे लोगों और नाबालिग की पहचान तथा घटना की परिस्थितियों की जांच का रास्ता खुला है.
सबसे जरूरी यह है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हो और किसी भी पक्ष को केवल आरोप के आधार पर दोषी या निर्दोष न माना जाए. पेट्रोल पंप कर्मचारियों का पक्ष, नाबालिग के स्वजन का बयान और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्य भी सामने आने चाहिए.
सीधी की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि अपराध रोकने की जिम्मेदारी पुलिस की है या भीड़ की? कानून का शासन तभी प्रभावी माना जाएगा, जब चोरी के संदेह में पकड़े गए व्यक्ति को भी न्याय पाने का अधिकार मिले और किसी को भी अपने हाथ से सजा देने की छूट न हो.
फिलहाल वीडियो सामने है, घटना के आरोप गंभीर हैं और पुलिस के अनुसार शिकायत अभी नहीं मिली है. अब देखना यह है कि वायरल वीडियो के बाद पुलिस मामले की तह तक कब पहुंचती है और नाबालिग के साथ हुई कथित मारपीट की जिम्मेदारी तय होती है या नहीं.
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