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प्याज और लहसुन में तामसिक या नेगेटिव एनर्जी होती है या नहीं इसके लिए रिसर्च की मांग को लेकर एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. मामले में सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया(CJI) सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट के वकील सचिन गुप्ता को कड़ी फटकार लगाई. CJI ने पूछा- आधी रात को ये सब पिटीशन ड्राफ्ट करते हो क्या? CJI और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने वकील की पांचों PIL अस्पष्ट, फालतू और बेबुनियाद बताकर खारिज कर दीं. सुप्रीम कोर्ट के वकील सचिन गुप्ता 5 पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन(PIL)/जनहित याचिका फाइल की थीं.
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (9 मार्च, 2026) को एक वकील को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि वह जैन समुदाय की भावनाओं को क्यों आहत करना चाहते हैं. कोर्ट ने वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएं अदालतों का बोझ बढ़ाती हैं. लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने जब यह याचिका लगी तो वकील की अपील सुनकर सीजेआई बेहद नाराज हुए.
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि यह एक आम समस्या है और गुजरात में प्याज-लहसुन के इस्तेमाल की वजह से एक कपल का तलाक हो गया. वकील सचिन गुप्ता खुद पक्षकार के तौर पर पेश हुए थे. सीजेआई सूर्यकांत ने उनसे कहा कि वह जैन समुदाय की भावनाओं को क्यों आहत करना चाहते हैं. सीजेआई के सवाल पर वकील ने कहा, ‘क्योंकि यह एक बहुत आम समस्या है. गुजरात में एक कपल का तलाक सिर्फ भोजन में प्याज का इस्तेमाल किए जाने की वजह से हुआ है.’ हालांकि, बेंच वकील की दलीलों और जनहित याचिका पर बेहद नाराज हुई. कोर्ट ने वकील को चेतावनी दी कि अगली बार ऐसी याचिका दाखिल की तो उनके खिलाफ एक्शन भी लिया जा सकता है.
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘अगली बार आप ऐसी याचिका लेकर आए तो आप देखेंगे कि हम क्या कर सकते हैं.’ यह याचिका संविधान के आर्टिकल 32 के तहत दाखिल की गई थी, इसमें मांग की गई थी कि सुप्रीम कोर्ट कमेटी बनाकर, जांच करवाए कि क्या प्याज तामसिक भोजन में आती है या उसमें कौन से नकारात्मक तत्व हैं. याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि जैन समुदाय के लोग प्याज, लहसुन और जड़ वाली सब्जियां नहीं खाते हैं, वे उन्हें तामसिक भोजन मानते हैं.
कोर्ट ने ये याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएं अदालतों का बोझ बढ़ाती हैं. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अगर वकील न होते तो उन पर अनुकरणीय जुर्माना लगाया जाता. एडवोकेट सचिन गुप्ता ने इसके अलावा तीन और जनहित याचिकाएं भी दाखिल की थीं, लेकिन कोर्ट ने उन्हें भी खारिज कर दिया.
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मुख्य चुनाव आयुक्त पहुंचे बंगाल : मंदिर के बाहर प्रदर्शनकारियों ने गो बैक और काले झंडे दिखाए
कोलकाता। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार रविवार को पश्चिम बंगाल के दौरे पर पहुंचे हैं। उनका दौरा आगामी विधानसभा चुनाव के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके साथ ही ज्ञानेश कुमार चुनाव का रिव्यू करने बंगाल पहुंचे हैं। इस दौरे के लिए एक मीटिंग भी आयोजित करवाई गई है। जो तीन दिन तक चलेगी।
वहीं अपनी मीटिंग के बीच CEC ज्ञानेश कुमार कालीघाट मंदिर पहुंचे हैं। जैसे ही प्रदर्शनकारियों को उनके आने की खबर लगी तो बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मंदिर पर एकजुट हो गए। CEC को मंदिर से बाहर प्रदर्शनकारियों ने गो बैक और काले झंडे दिखाए। इतना ही नहीं जब वे रविवार को कोलकाता पहुंचे थे जब भी उनके काफिले के सामने प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते दिखे साथ ही उन्हें काले झंडे भी दिखाए गए।
वहीं बंगाल चुनाव को लेकर भाजपा के एक डेलीगेशन ने इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया से फुल बैंच मीटिंग की, इसमें डेलीगेशन द्वारा मांग की गई कि इलेक्शन 3 फेज में आयोजित कराए जाए। बता दें पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। जिसमें सीटों की संख्या 294 है, इसके लिए चुनाव अप्रैल में होने की संभावना जताई जा रही है।
जहां 2021 के विधानसभा चुनाव में सीएम ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने 215 सीटें जीतकर बंगाल में सरकार बनाई थी। जिसके लिए पार्टी ने ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री पद घोषित किया था।
रविवार को पश्चिम बंगाल के न्यू टाउन इलाके में एक निजी होटल के बाहर स्थानीय लोगों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ‘गो बैक ज्ञानेश कुमार, डेमोक्रेसी के हत्यारे’ लिखी टी-शर्ट पहन रखी थी। जब मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त एसएस संधू, विवेक जोशी और वरिष्ठ डिप्टी चुनाव आयुक्त मनीष गार्ड व पवन कुमार के साथ कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचे, तब भी प्रदर्शनकारी वहां पहुंच गए और विरोध जताया।
सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी राज्य में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात कर रहे हैं। इस बैठक का उद्देश्य आगामी चुनावों को लेकर पार्टियों की चिंताओं और सुझावों को सुनना है।
बैठक के दौरान भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को 16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। इसमें आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गईं।भाजपा ने चुनाव आयोग से मांग की है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान हिंसा रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। पार्टी का कहना है कि मतदाताओं को सुरक्षित माहौल में वोट डालने का अधिकार मिलना चाहिए।
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महाराष्ट्र में नए ऑटो रिक्शा परमिट पर लगी रोक, परिवहन मंत्री ने ट्रैफिक, प्रदूषण का बढ़ना कारण बताया
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में नए ऑटो रिक्शा परमिट जारी करने की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य में पहले से ही बहुत बड़ी संख्या में ऑटो परमिट जारी हो चुके हैं, जिससे शहरों में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या गंभीर रूप से बढ़ गई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में अब तक करीब 14 लाख ऑटो रिक्शा परमिट जारी किए जा चुके हैं. इनकी अधिकता के कारण मुंबई, पुणे, नागपुर जैसे बड़े शहरों में यातायात का बोझ बढ़ गया है. सड़कों पर भीड़-भाड़ से वाहनों की गति कम हो रही है, ईंधन की खपत बढ़ रही है और प्रदूषण की समस्या भी गंभीर होती जा रही है.
मौजूदा ऑटो परमिट धारकों ने भी सरकार से शिकायत की थी कि नए परमिट जारी होने से रिक्शा चालकों में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है और उन्हें पर्याप्त सवारी नहीं मिल पा रही हैं. जिससे आय पर भी बुरा असर पड़ रहा है. सरकार ने इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए ये महत्वपूर्ण कदम उठाया है.
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में नए ऑटो रिक्शा परमिट जारी करने पर फिलहाल पूरी तरह रोक लगा दी है. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने विधानसभा के बाहर ये घोषणा करते हुए बताया कि ट्रैफिक जाम, बढ़ता प्रदूषण और अवैध परमिट धारकों की शिकायतों के बाद ये कड़ा कदम उठाया गया है.
इसके अलावा जांच में ये भी सामने आया है कि कुछ मामलों में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को भी ऑटो परमिट मिल गए थे. इस मामले की भी जांच की जा रही है और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.
ऑटो रिक्शा की अधिकता के कारण मुंबई, पुणे, नागपुर जैसे बड़े शहरों में यातायात का बोझ बढ़ गया है. सड़कों पर भीड़-भाड़ से वाहनों की गति कम हो रही है, ईंधन की खपत बढ़ रही है और प्रदूषण की समस्या भी गंभीर होती जा रही है. सरकार ने बताया कि केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद राज्य में नए ऑटो परमिट जारी करने की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया गया है.

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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव करते हुए अब उपभोक्ताओं को दो गैस सिलिंडर लेने के बीच कम से कम 21 दिनों का अंतर रखना अनिवार्य कर दिया गया है. इससे पहले यह अवधि 15 दिन निर्धारित थी. उल्लेखनीय है कि एक ही दिन पहले केद्र सरकार ने घरेलू रसोई गैस की कीमतों में 60 रुपये की बड़ी वृद्धि की है.
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब उपभोक्ता 21 दिन पूरे होने के बाद ही अगला सिलिंडर बुक करा सकेंगे. गैस एजेंसियों का कहना है कि तेल कंपनियों के निर्देश के अनुसार यह नया नियम लागू किया गया है. इसका उद्देश्य गैस वितरण प्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाना और सभी उपभोक्ताओं तक समय पर गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करना है.
उन्होंने बताया कि कई बार कम समय के अंतराल में बार-बार सिलिंडर लेने की वजह से वितरण व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है. ऐसे में 21 दिनों का अंतर तय किए जाने से आपूर्ति प्रक्रिया को संतुलित रखने में मदद मिलेगी.
गैस एजेंसी संचालकों के अनुसार, उपभोक्ता पहले की तरह ही मोबाइल ऐप, ऑनलाइन पोर्टल या फोन कॉल के माध्यम से सिलिंडर बुक करा सकते हैं, लेकिन सिस्टम में 21 दिन पूरे होने से पहले बुकिंग स्वीकार नहीं होगी. एजेंसी संचालकों ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपनी गैस खपत की योजना उसी अनुसार बनाएं, ताकि रसोई गैस की उपलब्धता में किसी तरह की परेशानी न हो. नई व्यवस्था लागू होने के बाद शहर के उपभोक्ताओं को गैस वितरण प्रणाली में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
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एक्ट्रेस खुशी मुखर्जी को दुबई में शख्स ने जड़ा थप्पड़: सड़क में रोते-बिलखते सुनाई आपबीती
अपने बोल्ड कपड़ों के कारण हमेशा ही विवादों में रहने वालीं खुशी मुखर्जी ने अब रोते हुए एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें बता रही हैं कि दुबई की सड़कों पर कोई उन्हें थप्पड़ मारकर निकल गया। हाल ही रैपर सैंटी शर्मा ने खुशी मुखर्जी का एक वीडियो देख कह दिया था कि ऐसी लड़कियों की वजह से ही भारत में रेप ज्यादा होते हैं। उन्होंने खुशी मुखर्जी के बेहद रिवीलिंग और अतरंगी कपड़े पब्लिक के बीच पहनने पर सवाल उठाए थे। और अब कोई खुशी मुखर्जी को थप्पड़ मार गया, जिससे एक्ट्रेस बुरी तरह रोने लगीं।
खुशी मुखर्जी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह सड़क पर रोते हुए नजर आ रही हैं। वह बोल रही हैं, ‘रात के 9 बज रहे हैं और एक आदमी बाइक पर जा रहा था और मुझे थप्पड़ मारकर चला गया। मैं सड़क पर थी। पुलिस स्टेशन में जाकर भी क्या होगा। सड़कों पर कैमरे तो लगे नहीं हैं।’ वीडियो में खुशी मुखर्जी बता रही हैं कि सड़क पर कोई लगातार उनका पीछा भी कर रहा है। वीडियो में खुशी बार-बार पीछे मुड़कर देखती हैं और फिर तेजी से चलने लगती हैं।
इस वीडियो को शेयर कर खुशी मुखर्जी ने इंस्टाग्राम पर लिखा है, ‘कुछ लोग बेवजह ही मुझसे पुराना बदला ले रहे हैं। इस बार तो ऐसा लग रहा है जैसे मैं अकेली ही पूरी दुनिया से लड़ रही हूं। पुलिस भी कोई मदद नहीं कर रही। पुलिस स्टेशन खाली पड़ा है। यहां तक कि महिला अधिकारी भी इस मामले में कोई कार्रवाई करने से कतरा रही हैं। खैर, दुबई भी कोई अलग नहीं है। लगता है पूरी दुनिया ने हमें शरिया कानून फॉलो करने के लिए दबाना शुरू कर दिया है।’
खुशी मुखर्जी के इस वीडियो पर यूजर्स के काफी रिएक्शन आ रहे हैं। वो खुशी से पूछने लगे कि क्या वह ठीक हैं। उनके साथ क्या हुआ है। हालांकि, कुछ ऐसे भी थे, जिन्होंने यह कहकर खुशी का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया कि वह सब पब्लिसिटी के लिए कर रही हैं।
खुशी मुखर्जी पेशे से एक टीवी एक्ट्रेस हैं और उन्होंने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी। वह ‘स्प्लिट्सविला’ जैसा रियलिटी शो भी कर चुकी हैं। उन्होंने कुछ टीवी शोज और सीरीज भी की हैं, जिनमें ‘बालवीर’, ‘रीति रिवाज’, ‘नादान’ और ‘देविका’ जैसे नाम शामिल हैं। खुशी मुखर्जी ने साउथ की फिल्मों में भी काम किया है। वह साल 2013 में तमिल फिल्म ‘अंजल थुरई’ में नजर आईं। इसके अलावा वह तेलुगु और हिंदी फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। उनकी हिंदी फिल्म का नाम ‘श्रृंगार’ था, जो 2013 में आई।
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अनिल अंबानी की मुश्किलें बढ़ीं ! सामने आया ₹1,085 करोड़ की धोखाधड़ी का नया केस, CBI ने दर्ज की नई FIR
केंद्रीय जांच ब्यूरो ने कारोबारी अनिल अंबानी के खिलाफ आईपीसी की धारा-420 और 120बी के तहत एक नया मामला दर्ज किया है. यह एफआईआर पंजाब नेशनल बैंक के चीफ मैनेजर संतोषकृष्ण अन्नावरपू की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है. इस एफआईआर के मुताबिक, 2013 से 2017 के बीच अनिल अंबानी ने रिलायंस कम्‍युनिकेशंस के अन्य तत्कालीन अधिकारियों के साथ मिलकर पीएनबी के साथ 1085 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की.
पंजाब नेशनल बैंक का आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस ने 1085 करोड़ रुपये का लोन इस मंशा से लिया कि उसे वापस नहीं किया जाएगा. पीएनबी ने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी ने बैंक से लिए गए फंड को जानबूझकर दूसरी जगह डायवर्ट कर दिया. आरोप है कि अनिल कंपनी ने बैंक के पैसों का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) किया. एफआईआर में रिलायंस कम्युनिकेशंस, अनिल अंबानी और मझारी काकर समेत कुछ अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. FIR में कहा गया है कि आरोपियों ने PNB को 621.39 करोड़ रुपए और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (जिसका अब PNB में विलय हो चुका है) को 463.80 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया है.
बता दें कि, इससे पहले शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी की रिलायंस पावर कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी की. ये छापेमारी रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) से जुड़े बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रिलायंस पावर लिमिटेड से जुड़े लोगों के खिलाफ की गई. गौरतलब है कि इससे पहले 25 फरवरी ईडी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) से जुड़े बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अनिल अंबानी की मुंबई के पाली हिल स्थित आवासीय संपत्ति ‘अबोड’ को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया था, जिसकी अनुमानित कीमत 3,716.83 करोड़ रुपये है. इसके साथ ही इस समूह से जुड़ी अब तक कुर्क की गई कुल संपत्तियों का मूल्य 15,700 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है.

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चंडीगढ़। करीब 23 साल पुराने चर्चित पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को इस मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि, उनके खिलाफ साजिश रचने के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इस केस में दोषी ठहराए गए तीन अन्य आरोपियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है।
यह मामला देश के चर्चित आपराधिक मामलों में से एक रहा है, जिसमें एक पत्रकार की हत्या, डेरा प्रमुख पर लगे गंभीर आरोप और लंबे कानूनी संघर्ष ने इसे सुर्खियों में बनाए रखा।
हरियाणा के सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या वर्ष 2002 में गोली मारकर की गई थी। उन्होंने अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा से जुड़े गंभीर आरोपों को प्रकाशित किया था। इन आरोपों में डेरे में साध्वियों के यौन शोषण से संबंधित एक चिट्ठी भी शामिल थी, जिसे छत्रपति ने अपने अखबार में प्रकाशित किया था। इसके बाद उन्हें लगातार धमकियां मिलने लगीं।
आखिरकार 19 अक्टूबर 2002 की रात को उनके घर के बाहर अज्ञात हमलावरों ने उन पर गोलियां चला दीं। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन 21 अक्टूबर 2002 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के बाद गुरमीत राम रहीम को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि, उपलब्ध सबूतों के आधार पर यह साबित नहीं होता कि राम रहीम इस हत्याकांड की साजिश में शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि, अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूत राम रहीम को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए उन्हें इस मामले में राहत दी जाती है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत और गवाह मौजूद हैं। इसी आधार पर उनकी सजा को बरकरार रखा गया है।
हालांकि, राम रहीम को साध्वियों के यौन शोषण केस में 10 साल कैद की सजा हुई है। जिसकी वजह से राम रहीम को अभी जेल में ही रहना होगा।
इस केस में हाईकोर्ट ने तीन आरोपियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। इन आरोपियों में शामिल हैं-
कुलदीप सिंह
निर्मल सिंह
कृष्ण लाल
अदालत ने कहा कि, इन तीनों के खिलाफ उपलब्ध सबूत और गवाह उनकी भूमिका को स्पष्ट रूप से स्थापित करते हैं।
इससे पहले 17 जनवरी 2019 को पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाया था। सीबीआई कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम समेत चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा जुर्माने का भी प्रावधान किया गया था। इस फैसले के खिलाफ सभी दोषियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अब अपना फैसला सुनाया है।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और सीबीआई दोनों की ओर से कई अहम दलीलें दी गईं। राम रहीम के वकील बसंत राय ने अदालत में कहा कि इस मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने कहा कि, पत्रकार को लगी गोली सॉफ्ट लेड से बनी थी। वकील ने यह भी तर्क दिया कि, ऐसी गोलियां आमतौर पर सैन्य उपकरणों और स्नाइपर में इस्तेमाल की जाती हैं।
उन्होंने अदालत को बताया कि, घटना को 23 साल बीत चुके हैं और अब गोली पर मौजूद निशान या पहचान चिन्ह स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं।
कोर्ट में यह भी सवाल उठा कि, जिस कंटेनर में गोली रखी गई थी, उस पर एम्स की सील लगी हुई थी और फोरेंसिक विशेषज्ञों के हस्ताक्षर भी मौजूद थे। बचाव पक्ष ने पूछा कि, अगर कंटेनर की सील कभी खोली ही नहीं गई, तो फिर फोरेंसिक लैब ने गोली की जांच कैसे की। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि विशेषज्ञों के हस्ताक्षर गोली पर थे या कंटेनर पर। इन सवालों के आधार पर अदालत ने सबूतों को पर्याप्त नहीं माना।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि, प्रस्तुत की गई गोलियों पर कोई स्पष्ट निशान दिखाई नहीं दे रहे हैं। अदालत ने शिकायत पक्ष के वकील से पूछा कि, फोरेंसिक विशेषज्ञों ने गोली पर हस्ताक्षर किए थे या कंटेनर पर। इस पर शिकायत पक्ष की ओर से कहा गया कि, कंटेनर पर विशेषज्ञों के हस्ताक्षर मौजूद हैं, लेकिन गोली पर हस्ताक्षर के निशान अब स्पष्ट नहीं दिखाई दे रहे।
राम रहीम पर तीन बड़े केस
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर अलग-अलग मामलों में कई गंभीर आरोप लगे थे।
1. साध्वी यौन शोषण केस
वर्ष 2017 में पंचकूला की विशेष अदालत ने दो साध्वियों के यौन शोषण के मामले में राम रहीम को दोषी ठहराया था। इस मामले में उन्हें 20 साल की सजा सुनाई गई थी।
2. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस
इस मामले में जनवरी 2019 में सीबीआई कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट ने इस मामले में उन्हें बरी कर दिया है।
3. डेरा मैनेजर रणजीत सिंह हत्याकांड
इस केस में भी हाईकोर्ट ने राम रहीम को बरी कर दिया था। हालांकि, इस फैसले को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
हालांकि हाईकोर्ट से इस मामले में राहत मिलने के बावजूद राम रहीम अभी जेल से बाहर नहीं आ सकेगा। इसकी वजह यह है कि, साध्वी यौन शोषण मामले में उसे 20 साल की सजा सुनाई जा चुकी है और वह फिलहाल उसी सजा के तहत जेल में बंद है।
रामचंद्र छत्रपति हरियाणा के सिरसा जिले के रहने वाले पत्रकार थे। उन्होंने वर्ष 2000 में वकालत छोड़कर पत्रकारिता शुरू की और सिरसा से अपना अखबार प्रकाशित करना शुरू किया।
2002 में उन्हें एक गुमनाम चिट्ठी मिली जिसमें डेरा सच्चा सौदा में साध्वियों के यौन शोषण का आरोप लगाया गया था। छत्रपति ने 30 मई 2002 को इस चिट्ठी को अपने अखबार में प्रकाशित कर दिया। इसके बाद उन्हें लगातार धमकियां मिलने लगीं।
परिवार के अनुसार चिट्ठी प्रकाशित होने के बाद कई महीनों तक उन्हें धमकियां मिलती रहीं। 19 अक्टूबर 2002 की रात को जब रामचंद्र छत्रपति अपने घर के बाहर मौजूद थे, तभी हमलावरों ने उन पर गोली चला दी। उन्हें कुल पांच गोलियां मारी गईं। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन दो दिन बाद उनकी मौत हो गई।
शुरुआत में पुलिस जांच से परिवार संतुष्ट नहीं था। इसके बाद पत्रकार के परिवार ने मुख्यमंत्री से मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की। जनवरी 2003 में उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इसके बाद 10 नवंबर 2003 को हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया।
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गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने पर भड़की कांग्रेस, प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका पर उठाए सवाल
घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद कांग्रेस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने पीएम को महंगाई मैन बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार महंगाई का बोझ सीधे आम लोगों पर डाल रही है। दरअसल, कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मोदी सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाकर आम परिवारों के बजट पर सीधा हमला किया है। वहीं 19 किलोग्राम वाले व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। पार्टी ने यह भी दावा किया कि पिछले तीन महीनों में व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 307 रुपये तक बढ़ चुकी है।
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों को सस्ता और टिकाऊ ईंधन उपलब्ध कराना है। खेड़ा ने तंज कसते हुए लिखा कि एक दिन बाद ही घरेलू एलपीजी की कीमत 60 रुपये और व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 115 रुपये बढ़ा दी गई। खेड़ा कहा कि हरदीप सिंह पुरी जो कहते हैं, उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
दरअसल पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि देश में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर किसी तरह की कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य नागरिकों को किफायती और टिकाऊ ईंधन उपलब्ध कराना है।
सूत्रों के अनुसार, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 7 मार्च से देशभर में 60 रुपये बढ़ा दी गई है। वहीं होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के व्यावसायिक सिलेंडर के दाम में भी 115 रुपये की बढ़ोतरी लागू हो गई है।
इससे पहले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अप्रैल 2025 से स्थिर थी, जब दिल्ली में गैर-सब्सिडी वाला सिलेंडर 853 रुपये का था। नई बढ़ोतरी से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ एलपीजी पर निर्भर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लागत भी बढ़ेगी।
इस बीच इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने भी सोशल मीडिया पर पेट्रोल और डीजल की कमी से जुड़ी खबरों को खारिज करते हुए कहा कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार है और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य रूप से चल रही है। कंपनी ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।
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बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा की हो रही मांग
बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होना है, और पहले ही दिन लोकसभा में हंगामा देखने को मिल सकता है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने से जुड़े विपक्ष के प्रस्ताव पर सोमवार को ही लोकसभा में चर्चा होने की संभावना है. लोकसभा सचिवालय की ओर से 9 मार्च के लिए जो कार्यसूची जारी की गई है, उसके मुताबिक़ उस दिन प्रश्नकाल के अलावा केवल इस प्रस्ताव पर चर्चा से जुड़ी कार्यवाही को ही शामिल किया गया है. कांग्रेस ने अपने सांसदों से कहा है कि वे इन दिनों सदन में मौजूद रहें क्योंकि लोकसभा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा की संभावना है। वहीं भाजपा ने भी सांसदों को मौजूद रहने का निर्देश दिया है।
संसद का बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने लोकसभा सांसदों को 9 से 11 मार्च तक सदन में मौजूद रहने के लिए 3-लाइन व्हिप जारी किया है।
विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव का नोटिस दिया है। विपक्ष के 118 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों (29) ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए।
आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही चलाने में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और विपक्षी नेताओं को बोलने का मौका नहीं दिया।
नियमों के अनुसार स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लोकसभा में साधारण बहुमत से पारित होता है। मौजूदा लोकसभा में एनडीए के पास करीब 290 से अधिक सांसदों का समर्थन है, इसलिए प्रस्ताव पारित होना कठिन है। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्पीकर स्वयं सदन की अध्यक्षता नहीं करेंगे, लेकिन उन्हें अपना पक्ष रखने और मतदान करने का अधिकार होगा।
कार्यसूची के मुताबिक, कांग्रेस सांसद मो जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि इस प्रस्ताव को पेश करेंगे. प्रस्ताव में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि स्पीकर के कुछ फ़ैसलों से सदन के सुचारु रूप से संचालन को खतरा पैदा हो गया है.
ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि स्पीकर ज़्यादातर विवादित मुद्दों पर सत्तापक्ष के सांसदों का साथ देते हैं. ये भी कहा गया है कि स्पीकर विपक्ष के अधिकारों का संरक्षण नहीं करते हैं और गैर पक्षपाती रवैया नहीं अपनाते हैं, जो सदन के सभी पक्षों का विश्वास हासिल करने के लिए ज़रूरी है.

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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राज्य की गिरती प्रजनन दर को लेकर गहरी चिंता जताई है. साथ ही उन्होंने विधानसभा में जनसंख्या प्रबंधन नीति का प्रस्ताव भी रखा है. इस नीति के तहत सरकार तीसरे बच्चे के जन्म पर आर्थिक प्रोत्साहन, माता-पिता को विशेष अवकाश और महिलाओं के लिए व्यापक सुविधाएं प्रदान करेगी. उन्होंने घोषणा की कि अब जनसंख्या वृद्धि एक बून (वरदान) है और राज्य सरकार इसे प्राथमिकता देकर बढ़ावा देगी. नीति को मार्च अंत तक अंतिम रूप देकर 1 अप्रैल से लागू करने का लक्ष्य है.
सीएम ने विधानसभा में कहा कि जनसंख्या प्रबंधन नीति का उद्देश्य गिरती हुई प्रजनन दर (TFR) को सुधारना है जो जो 1993 में 3.0 थी और अब घटकर 1.5 रह गई है. मुख्यमंत्री ने चिंता जताई कि ये गिरावट आर्थिक विकास के लिए खतरा है, क्योंकि युवा कार्यबल की संख्या कम हो रही है और राज्य को जापान, दक्षिण कोरिया-इटली जैसी उम्रदराज आबादी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है.
मुख्यमंत्री ने सदन में बताया कि 2023 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में हर साल केवल 6.70 लाख जन्म दर्ज किए जा रहे हैं. यदि यही स्थिति रही तो 2047 तक बुजुर्गों का अनुपात 23 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा जो कि आर्थिक विकास के लिए खतरा है. राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) को 15 प्रतिशत तक ले जाने के लिए महिला कार्यबल की भागीदारी को 31 प्रतिशत से बढ़ाकर 59 प्रतिशत करना अनिवार्य है. सरकार अब जनसंख्या वृद्धि को एक बोझ के बजाय वरदान के रूप में देख रही है.’
प्रस्तावित नीति के तहत सरकार मातृत्व, शक्ति, नैपुण्यम, क्षेम और संजीवनी जैसे पांच चरणों वाला लाइफ साइकिल सिस्टम शुरू करेगी. महिलाओं की सहायता के लिए ‘मातृत्व सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित किए जाएंगे, जहां आईवीएफ (IVF) सेवाएं उपलब्ध होंगी. सरकार सिजेरियन ऑपरेशन को हतोत्साहित करेगी. हर 50 बच्चों के लिए चाइल्ड केयर सेंटर और पिंक टॉयलेट बनाए जाएंगे. विशाखापत्तनम में 172 करोड़ रुपये की लागत से कामकाजी महिलाओं के लिए एक विशाल हॉस्टल भी तैयार किया जाएगा.
जनसंख्या को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ‘पोषण-शिक्षा-सुरक्षा’ पैकेज के तहत तीसरे बच्चे के जन्म पर 25,000 रुपये का प्रोत्साहन देगी. इसके अलावा, तीसरे बच्चे को पांच साल तक हर महीने 1,000 रुपये दिए जाएंगे और 18 साल की उम्र तक मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाएगी. मुख्यमंत्री ने ये भी बताया कि माता को 12 महीने का और पिता को 2 महीने का पितृत्व अवकाश दिया जाएगा. हर चौथे शनिवार को ‘जनसंख्या देखभाल’ पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
गठबंधन सरकार ने पहले ही उन लोगों को स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने का अवसर दिया है जिनके दो से अधिक बच्चे हैं. इसके अलावा, ‘तल्लीकी वंदनम’ योजना के तहत बच्चों की संख्या की सीमा हटाकर वित्तीय सहायता दी जा रही है. सुरक्षा के लिए ‘शी कैब्स’ (She Cabs) शुरू की जाएंगी और 175 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दो हफ्ते के विशेष क्लीनिक आयोजित होंगे. सरकार का लक्ष्य इस नीति के माध्यम से राज्य को भविष्य के जनसांख्यिकीय संकट से बचाना है.
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चारधाम यात्रा 2026 का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू, 19 अप्रैल से खुलेंगे गंगोत्री-यमुनोत्री के कपाट
चारधाम यात्रा-2026 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन आज शुक्रवार की सुबह 7 बजे से शुरू हो गया है. जबकि 17 अप्रैल से ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू होगा. उत्तराखंड सरकार ने यात्रा से पहले रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उत्तराखंड सरकार की वेबसाइट रजिस्ट्रेशनडीटूरिस्टकेयर.यूके.जीओवी.इन और मोबाइल ऐप टूरिस्ट केयर उत्तराखंड से कर सकते हैं.
उत्तराखंड सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलेंगे. 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे. श्रीहेमकुण्ड साहिब की आधिकारिक घोषणा बाद में की जाएगी. उत्तराखंड सरकार की ओर से बताया गया है कि चारधाम यात्रा 2026 में आने के लिए भारतीय श्रद्धालु अपना पंजीकरण आधार कार्ड के माध्यम से कर सकेंगे, जबकि विदेशी श्रद्धालुओं के लिए ई-मेल आईडी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है.
जिन श्रद्धालुओं के पास आधार कार्ड उपलब्ध नहीं है, उनके लिए पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी पंजीकरण काउंटरों की व्यवस्था की गई है. इन काउंटरों पर रजिस्ट्रेशन कपाट खुलने से दो दिन पूर्व, 17 अप्रैल 2026 से प्रारम्भ की जाएगी. पंजीकरण केन्द्र एवं ट्रांजिट कैंप ऋषिकेश, पंजीकरण केन्द्र ऋषिकुल ग्राउंड हरिद्वार और पंजीकरण केंद्र विकास नगर देहरादून में खुलेंगे.
श्रद्धालु किसी भी प्रकार की जानकारी या असुविधा होने पर टोल फ्री नंबर 0135-1364 पर कॉल कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा में आने वाले सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि यात्रा को सुगम एवं व्यवस्थित बनाने के लिए यात्रा से पूर्व अपना पंजीकरण अनिवार्य रूप से करवा लें. हर साल की तरह इस बार भी बाबा केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है.
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बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- कहीं भी नमाज अदा करने का नहीं दे सकते अधिकार
बॉम्बे हाई कोर्ट ने छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास टैक्सी और ऑटो रिक्शा चालकों को रमजान के दौरान नमाज पढ़ने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है।
अदालत ने स्पष्ट कहा कि रमजान इस्लाम का महत्वपूर्ण धार्मिक महीना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति किसी भी स्थान पर नमाज पढ़ने का अधिकार मांग सकता है। खासकर एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
जस्टिस बी.पी. कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की पीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत सुरक्षा संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
कोर्ट ने कहा कि एयरपोर्ट परिसर और उसके आसपास का क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील होता है, जहां किसी भी तरह की भीड़ या अस्थायी व्यवस्था सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्म चाहे जो भी हो, सुरक्षा सबसे पहले है और इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
यह मामला टैक्सी-रिक्शा ओला-उबर मेंस यूनियन द्वारा दाखिल याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास बने एक अस्थायी शेड के नीचे नमाज अदा करते थे। हालांकि, पिछले वर्ष अधिकारियों ने उस शेड को हटा दिया था।
यूनियन ने अदालत से मांग की थी कि उन्हें उसी स्थान पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाए या फिर आसपास किसी अन्य स्थान को इसके लिए निर्धारित किया जाए।
इससे पहले अदालत ने पुलिस और एयरपोर्ट प्राधिकरण को निर्देश दिया था कि वे आसपास के क्षेत्रों का सर्वे कर यह देखें कि क्या नमाज के लिए कोई अन्य स्थान उपलब्ध कराया जा सकता है।
गुरुवार को अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि सात अलग-अलग स्थानों का सर्वे किया गया, लेकिन भीड़, सुरक्षा चिंताओं और एयरपोर्ट के विकास कार्यों के कारण कोई भी जगह उपयुक्त नहीं पाई गई।
रिपोर्ट देखने के बाद अदालत ने कहा कि वह इस मामले में कोई राहत नहीं दे सकती। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे आसपास मौजूद धार्मिक स्थलों का उपयोग करें।
कोर्ट ने बताया कि प्रस्तावित स्थान से करीब एक किलोमीटर के भीतर एक मदरसा मौजूद है, जहां नमाज अदा की जा सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में टर्मिनल-1 के पुनर्विकास के दौरान यदि संभव हुआ तो याचिकाकर्ता अपनी मांग एयरपोर्ट प्राधिकरण के सामने रख सकते हैं।

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बिलासपुर। जानकारी के मुताबिक, होली के दिन बिल्हा पुलिस को सूचना मिली थी कि पेंडरवा निवासी एक व्यक्ति के साथ गांव के कुछ युवकों ने मारपीट की है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस टीम गांव पहुंची और शख्स को थाने लाकर FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की। इसी बीच उनकी बेटी ने पुलिस को फोन कर बताया कि- मारपीट करने वाले युवक उसके घर के सामने आकर हंगामा कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस दोबारा गांव की ओर रवाना हुई।
रास्ते में निपनिया के पास पुलिस को संदिग्ध युवकों की क्षतिग्रस्त अवस्था में कार मिली। पुलिस ने कार चालक को हिरासत में लेकर थाने ले जाने की कार्रवाई शुरू की। तभी गांव के कुछ लोग मौके पर पहुंच गए और पुलिस कार्रवाई का विरोध करने लगे। आरोप है कि उन्होंने चालक को छुड़ाने की कोशिश की और पुलिसकर्मियों से बहस करते हुए हाथापाई शुरू कर दी।
इसी के साथ यह भी बताया जा रहा है कि कुछ लोगों को फोन कर मौके पर बुलाया गया, जिसके बाद स्थिति और बिगड़ गई। महिला आरक्षक के साथ धक्का-मुक्की की गई, जबकि दूसरी आरक्षक की वर्दी फाड़ दी गई। बीच-बचाव करने पहुंचे आरक्षक से भी मारपीट की गई। हालात काबू करने के दौरान थाना प्रभारी भी घायल हुए हैं।
मामले की सूचना मिलते ही थाने से अतिरिक्त पुलिस बल तत्काल मौके पर भेजा गया। पुलिस कर्मचारियों को आता देख आरोपी और उनके समर्थक वहां से फरार हो गए। हालात पर काबू पाने के बाद पुलिस ने कार चालक को सुरक्षित हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया। फिलहाल पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्जकर सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
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‘सिर्फ व्हाट्सएप चैट के आधार पर तलाक का आदेश नहीं दे सकते’, हाई कोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक ऐसे फैसले को पलट दिया है। इस फैसले में सिर्फ व्हाट्सएप चैट्स के आधार पर पति को उसकी पत्नी से क्रूरता का हवाला देकर तलाक मिल गया था। कोर्ट ने साफ कहा कि महज मैसेज दिखाकर तलाक नहीं दिया जा सकता, जब तक कि ठोस सबूत पेश न किए जाएं और दूसरी पार्टी को अपना पक्ष रखने का मौका न मिले। यह फैसला 27 फरवरी को जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजुषा देशपांडे की बेंच ने दिया। कोर्ट ने नासिक फैमिली कोर्ट के मई 2025 के आदेश को पूरी तरह रद कर दिया और मामले को वापस उसी कोर्ट में भेज दिया है, जहां अब दोनों पक्षों को सबूत पेश करने और बहस करने का पूरा मौका मिलेगा।
यह मामला हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13(1)(ia) के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक से जुड़ा है। पति ने दावा किया था कि पत्नी ने उसे और उसके परिवार को मानसिक रूप से परेशान किया। फैमिली कोर्ट ने पति की बात को सही माना और तलाक दे दिया, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे गलत ठहराया।
नासिक फैमिली कोर्ट ने पति की गवाही को व्हाट्सएप और एसएमएस चैट्स से समर्थन मिलने की बात कही थी। कोर्ट के मुताबिक, पत्नी बार-बार नासिक छोड़कर पुणे शिफ्ट होने की जिद कर रही थी, जहां वह ससुराल वालों को छोड़ना चाहती थी। चैट्स में सास और ननद के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक बातें भी थीं। पत्नी ने पति के इनकार पर दबाव बनाने, इमोशनल ब्लैकमेल करने और गुस्से में कड़वी-कड़वी भाषा इस्तेमाल करने का आरोप लगा था।
फैमिली कोर्ट ने कहा था कि पत्नी ऐसी हरकतें नहीं कर सकती, इसलिए पति को उसके साथ रहना जरूरी नहीं है। इस आधार पर तलाक मंजूर कर दिया गया। कोर्ट ने पति की गवाही को ‘अनचैलेंज्ड’ यानी बिना विरोध के माना, क्योंकि मामला एक्स-पार्टे (एक तरफा) चला था। पत्नी को सुनवाई का मौका नहीं मिला था।
हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश की जांच की और पाया कि सिर्फ चैट्स पर भरोसा करके तलाक नहीं दिया जा सकता। जजों ने कहा, “महज व्हाट्सएप चैट्स पर निर्भर रहकर तलाक का फैसला नहीं हो सकता, क्योंकि इसे ठीक से सबूत के तौर पर पेश नहीं किया गया।” कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पत्नी को इन चैट्स का जवाब देने या उन्हें चुनौती देने का कोई मौका नहीं दिया गया।
जस्टिस डांगरे और देशपांडे ने कहा कि क्रूरता साबित करने के लिए सही तरीके से सबूत पेश करना जरूरी है। बिना दूसरी पार्टी को सुने और बिना क्रॉस-एग्जामिनेशन के ऐसे संवेदनशील फैसले नहीं हो सकते। इसलिए उन्होंने फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया।
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मशहूर अभिनेत्री वर्षा उसगांवकर से 47 लाख की ठगी, बिल्डर-प्रोड्यूसर पर केस
मुंबई। ठगी के एक मामले में अभिनेत्री वर्षा उसगांवकर ने शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है। अभिनेत्री ने आरोप लगाया है कि निवेश के नाम पर उनसे और अन्य लोगों से लाखों रुपए की ठगी की गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री वर्षा उसगांवकर धोखाधड़ी का शिकार हो गई हैं। वर्षा ने आरोप लगाया है कि एक फिल्म प्रोड्यूसर और बिल्डर ने उनसे और अन्य अभिनेत्रियों से करीब 47 लाख रुपए ठग लिए। इस मामले में शिवाजी पार्क पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता मृणालिनी सुभाष जांभले मराठी थिएटर और फिल्मों से जुड़ी अभिनेत्री हैं। उनका आरोपी अविनाश जाधव के साथ कारोबारी संबंध था। जाधव ने खुद को एक प्रतिष्ठित बिल्डर और फिल्म निर्माता बताते हुए डोंबिवली में एक निर्माण परियोजना में निवेश करने का प्रस्ताव दिया। उसने कम समय में ज्यादा मुनाफा देने और एक साल के भीतर पूरी मूल रकम वापस करने का भरोसा दिलाया था।
नवंबर 2019 से फरवरी 2020 के बीच मृणालिनी जांभले, वर्षा उसगांवकर और तीन अन्य लोगों ने चेक और ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए आरोपी को कुल 47 लाख रुपए दिए। शुरुआत में आरोपी ने भरोसा जीतने के लिए 4.52 लाख रुपए वापस भी किए, लेकिन बाद में भुगतान बंद कर दिया। पीड़ितों का आरोप है कि जब उन्होंने बार-बार संपर्क करने की कोशिश की तो आरोपी ने अपना मोबाइल नंबर और पता बदल लिया। बाद में जब वे डोंबिवली में उससे मिले और पैसे मांगे, तो उसने कथित तौर पर धमकी देते हुए पैसे लौटाने से इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़ित अभिनेत्रियों ने शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने इसी तरह अन्य लोगों के साथ भी धोखाधड़ी की है।