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देहरादून. उत्तराखंड में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. राज्य के कई जिलों में भूस्खलन, सड़कें बंद होने, नदियों का जलस्तर बढ़ने और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आई हैं. हालात को देखते हुए जिला प्रशासन, राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), पुलिस और अन्य आपातकालीन एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अनुसार रविवार शाम तक राज्य में निगरानी में रखी गई 202 सड़कों में से 69 सड़कें पूरी तरह बंद थीं, जबकि 13 मार्ग आंशिक रूप से चालू रहे और 120 मार्गों को बहाल कर यातायात के लिए खोल दिया गया.
लगातार बारिश के कारण उत्तरकाशी, देहरादून, चंपावत, रुद्रप्रयाग और अन्य पर्वतीय जिलों में राहत एवं बहाली का कार्य युद्धस्तर पर जारी है. अधिकारियों का कहना है कि मौसम की स्थिति को देखते हुए बंद सड़कों की संख्या में बदलाव संभव है और मशीनों की मदद से मलबा हटाने का कार्य लगातार किया जा रहा है.
उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ ब्लॉक के बरेठी क्षेत्र में एक कार तीखे मोड़ पर अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी. सूचना मिलते ही पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे और वाहन में सवार सभी पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. सभी को मामूली चोटें आईं और उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया. अधिकारियों ने बताया कि समय पर राहत कार्य शुरू होने से बड़ा हादसा टल गया.
देहरादून में शनिवार देर रात भारी बारिश के कारण हाथीबड़कला-पठरिया पीर क्षेत्र की विजय कॉलोनी स्थित नई बस्ती में एक विशाल रिटेनिंग वॉल अचानक ढह गई. दीवार गिरने से मलबा कई मकानों पर आ गिरा, जिससे चार से पांच घर क्षतिग्रस्त हो गए और एक बुजुर्ग महिला मलबे में दब गईं. जिला प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने संयुक्त अभियान चलाकर 62 वर्षीय विमला देवी को सुरक्षित बाहर निकाला. उन्हें मामूली चोटें आईं और अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई गई है. एहतियात के तौर पर सात परिवारों के 20 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है तथा प्रभावित क्षेत्र को सील कर दिया गया है.
देहरादून-पांवटा साहिब मार्ग पर नंदा की चौकी के पास बना अस्थायी पुल भी तेज बहाव की चपेट में आकर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया. यह पुल वर्ष 2025 की आपदा में बह गए पुराने पुल के स्थान पर बनाया गया था. प्रशासन ने तत्काल इस मार्ग को असुरक्षित घोषित कर यातायात रोक दिया. बाद में मरम्मत किए गए स्थायी पुल को यातायात के लिए खोल दिया गया, जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच संपर्क बहाल हो सका.
मसूरी-देहरादून हाईवे पर हनुमान मंदिर के पास रात के दौरान भारी भूस्खलन हुआ, जिससे सड़क पर बड़े-बड़े पत्थर और मलबा आ गया. कई घंटे तक पर्यटक और स्थानीय लोग रास्ते में फंसे रहे. सुबह सड़क साफ होने के बाद ही यातायात सामान्य हो सका. प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है.
राज्य की कई नदियों का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है. डाकपत्थर में यमुना नदी चेतावनी स्तर तक पहुंच गई, जबकि इच्छारी क्षेत्र में टौंस नदी खतरे के निशान के करीब बह रही है. ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर गंगा का जलस्तर अभी खतरे के निशान से नीचे है. अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए डाकपत्थर और इच्छारी बैराज के 20 से अधिक गेट खोल दिए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लगातार निगरानी रखी जा रही है.
उत्तरकाशी की हर्षिल घाटी में खीरगंगा नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बने कल्वर्ट में जमा हो गए. सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाकर पानी का बहाव मोड़ा, जिससे सड़क को बड़े नुकसान से बचाया जा सका. वहीं यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सरीगढ़ के पास भूस्खलन से सड़क बंद हो गई. जिला प्रशासन ने मौके का निरीक्षण कर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को जल्द से जल्द मार्ग बहाल करने के निर्देश दिए हैं. फिलहाल तीर्थयात्रियों को एसडीआरएफ की सहायता से वैकल्पिक पैदल मार्ग से निकाला जा रहा है और सड़क को छह से सात दिनों में खोलने का लक्ष्य रखा गया है.
चंपावत जिले में धौन-बड़ौली मार्ग तीन दिनों तक बंद रहने के बाद भारी मशीनों की सहायता से दोबारा खोल दिया गया. जिला प्रशासन ने बताया कि जिले की सभी प्रमुख सड़कें फिलहाल चालू हैं, लेकिन मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार रविवार को भी राज्य के कई हिस्सों में रुक-रुक कर बारिश होती रही. पिछले 24 घंटों में मसूरी में सबसे अधिक 75 मिमी वर्षा दर्ज की गई. इसके अलावा कालाढूंगी, बेरीनाग, कालसी, हाथीबड़कला, गंगोलीहाट, काशीपुर, ऊखीमठ, कीर्तिनगर और देहरादून सहित कई स्थानों पर अच्छी बारिश रिकॉर्ड की गई. मौसम विभाग ने देहरादून, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है. विभाग ने 13 से 16 जुलाई के बीच पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश, गरज-चमक और तेज वर्षा की संभावना जताते हुए लोगों को सतर्क रहने और मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है.

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हैदराबाद. तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के शबाद मंडल में शुक्रवार, 10 जुलाई की देर रात एक खौफनाक वारदात ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है. यौन उत्पीडऩ के एक मामले में हाल ही में अग्रिम जमानत पर बाहर आए 35 वर्षीय एक शख्स ने कथित तौर पर प्रतिशोध की आग में अपनी पत्नी और दो बेहद छोटे बच्चों की हत्या कर दी.
इसके तुरंत बाद उसने छह किलोमीटर दूर जाकर उस 17 वर्षीय नाबालिग लड़की, उसकी मां और नानी को भी बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया, जिसने उसके खिलाफ पोक्सो अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कराई थी. एक ही रात में कुल छह लोगों की निर्मम हत्या करने के बाद आरोपी ने अपने पिता को फोन पर जुर्म कबूला और तब से वह फरार है.
आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी की पहचान बी. राजकुमार (35) के रूप में हुई है, जो शबाद इलाके का निवासी है. पुलिस कमिश्नर तरुण जोशी ने बताया कि शुक्रवार देर रात करीब 11:30 बजे राजकुमार ने शबाद स्थित अपने आवास पर सबसे पहले अपनी 30 वर्षीय पत्नी पार्वती सरिता, अपने 4 वर्षीय बेटे और महज 18 महीने (डेढ़ साल) के दूसरे मासूम बेटे पर चाकू से जानलेवा हमला किया.
घटनास्थल का निरीक्षण करने वाले रिश्तेदारों और पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोनों मासूम बच्चों की हत्या उस समय की गई जब वे गहरी नींद में सो रहे थे, जबकि जिस कमरे में पत्नी सरिता का शव मिला वहां गंभीर संघर्ष के निशान दिखाई दिए. वारदात को अंजाम देने के बाद राजकुमार ने कमरे के दरवाजे को अंदर से बंद कर दिया और पंखा, एयर कंडीशनर व कूलर चालू छोड़कर खिड़की के रास्ते बाहर निकल गया.
पारिवारिक सूत्रों और सह-आरोपियों की कडिय़ों को जोड़ते हुए पुलिस ने बताया कि अपनी पत्नी और बच्चों को खत्म करने के बाद राजकुमार कार लेकर सीधे उस 17 वर्षीय किशोरी के घर की तरफ बढ़ा, जिसने उस पर यौन उत्पीडऩ के आरोप लगाए थे. रात करीब 10:45 से 11:00 बजे के बीच वह लड़की के घर पहुंचा और उसे जबरन कार में खींचकर एक सुनसान इलाके में स्थित तालाब के पास ले गया, जहां उसने चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर दी. इसके बाद उसने किशोरी की 45 वर्षीय मां और 65 वर्षीय नानी की भी गला रेतकर नृशंस हत्या कर दी. हालांकि, घर में मौजूद मृतका की 20 वर्षीय दिव्यांग (विकलांग) बहन को आरोपी ने कोई नुकसान नहीं पहुंचाया.
इस भयावह सामूहिक हत्याकांड को अंजाम देने के ठीक बाद, करीब 11:50 बजे राजकुमार ने अपने पिता को फोन किया और स्वीकार किया कि उसने सभी छह लोगों को मार डाला है. आरोपी ने फोन बंद करने से पहले अपने पिता से यह भी कहा कि वह अब खुदकुशी (सुसाइड) करने जा रहा है, हालांकि पुलिस ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है. फोन कॉल से घबराए पिता ने तुरंत शबाद पुलिस स्टेशन पहुंचकर पुलिस को पूरी बात बताई.
जांचकर्ताओं के मुताबिक, राजकुमार और सरिता ने साल 2018 में प्रेम विवाह (लव मैरिज) किया था. उनके तीन बच्चे थे, जिनमें से पहली बेटी की शिशु अवस्था में ही मौत हो गई थी. राजकुमार का जुआ खेलने (गैंबलिंग) का आदी होना और उस पर भारी कर्ज होना भी सामने आया है. इसके अतिरिक्त, उसका मानसिक संतुलन भी अस्थिर बताया गया है जिसके लिए पूर्व में उसकी दो-तीन बार काउंसलिंग भी कराई गई थी.
इसी साल मई 2026 में राजकुमार को पड़ोस की रहने वाली एक नाबालिग लड़की का पीछा करने और उसे जबरन प्रपोजल स्वीकार करने के लिए दबाव बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. पीडि़त परिवार की शिकायत पर उसके खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था. चूंकि धाराएं सात साल से कम की सजा वाली थीं, इसलिए उसे करीब एक सप्ताह पहले ही 20,000 रुपये के निजी मुचलके पर अदालत से अग्रिम जमानत मिली थी. जमानत पर बाहर आते ही उसने कानूनी शिकायत का बदला लेने के लिए इस खौफनाक नरसंहार को अंजाम दे डाला. पुलिस ने हत्या का मुख्य हथियार बरामद कर लिया है और कानूनी कार्रवाई जारी है
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24 भारतीय पर्यटकों से भरी नाव वियतनाम के समुद्र में पलटी, 15 की मौत, दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
हनोई. छुट्टियां मनाने वियतनाम गए भारतीय पर्यटकों के लिए उनका यह सफर एक बड़े और खौफनाक हादसे में तब्दील हो गया है. वियतनाम के मशहूर फु क्वोक द्वीप के पास दर्जनों पर्यटकों को ले जा रही एक नाव अचानक समुद्र में पलट गई. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस भयानक हादसे में अब तक 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जान गंवाने वालों में कितने भारतीय नागरिक शामिल हैं. घटना के तुरंत बाद स्थानीय अधिकारियों और आसपास के लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है.
जानकारी के मुताबिक, इस दुर्भाग्यपूर्ण नाव में कुल 24 भारतीय नागरिक सवार थे. एक पर्यटक श्रीनिवास ने बताया कि भारत के आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु से कुल 105 पर्यटकों का एक बड़ा ग्रुप वियतनाम घूमने गया था. हादसे का शिकार हुई नाव में आंध्र प्रदेश के 5 और तमिलनाडु के 17 लोग मौजूद थे. फिलहाल आंध्र प्रदेश के 2 लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं, जबकि 3 को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
इसके अलावा तमिलनाडु के भी कई पर्यटकों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीद बोट वालों ने बताया कि हादसे के महज पांच मिनट के भीतर ही कई दूसरी नावें बचाव के लिए पहुंच गई थीं. लेकिन नाव के उल्टे होने के कारण ज्यादातर यात्री अंदर ही बुरी तरह फंस गए थे, जिससे बचाव कार्य बेहद मुश्किल हो गया और केवल कुछ ही लोगों को होश की हालत में बाहर निकाला जा सका.
इस बड़े हादसे के बाद वियतनाम में स्थित भारतीय दूतावास पूरी तरह से अलर्ट हो गया है. दूतावास ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया है कि स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है और घटना की सटीक जानकारी जुटाई जा रही है. अपनों की जानकारी और मदद के लिए भारतीय दूतावास ने हो ची मिन्ह सिटी और हनोई में विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किए हैं. प्रभावित परिवार जानकारी प्राप्त करने के लिए हो ची मिन्ह सिटी के हेल्पलाइन नंबरों +84-362817930, +84-915523714 और +84-334520414 पर सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, हनोई में बनाए गए कंट्रोल रूम के नंबर +84-913089165 पर भी कॉल करके पूरी मदद ली जा सकती है.
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थार से बांधी रस्सी: उखाड़ ले गए ATM, CCTV में कैद हुई वारदात
ओडिशा। महिंद्रा थार से एटीएम मशीन को रस्सी के सहारे बांधकर कई मीटर तक घसीटा गया। सुनसान जगह पर मशीन तोड़कर उसमें रखा कैश निकाल लिया गया और आरोपी फरार हो गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
ओडिशा के बालासोर जिले के खैरा थाना क्षेत्र स्थित तुदीगड़िया बाजार में यह वारदात हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, पांच से ज्यादा बदमाश काले रंग की महिंद्रा थार SUV में मौके पर पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने ATM कियोस्क का दरवाजा तोड़ा और फिर रस्सी की मदद से पूरी एटीएम मशीन को वाहन से बांध दिया। इसके बाद उन्होंने वारदात को अंजाम देने की तैयारी पूरी कर ली। पूरी वारदात को कुछ ही मिनटों में अंजाम दिया गया।
बदमाशों ने थार को आगे बढ़ाया तो एटीएम मशीन अपनी जगह से उखड़ गई। इसके बाद मशीन को सड़क पर घसीटते हुए काफी दूर एक सुनसान स्थान तक ले जाया गया। वहां पहुंचकर आरोपियों ने मशीन को तोड़ा और उसके अंदर रखा कैश निकाल लिया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। बाद में क्षतिग्रस्त एटीएम मशीन सड़क किनारे छोड़ दी।
पूरी घटना आसपास लगे CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हो गई। फुटेज में कथित तौर पर एटीएम मशीन महिंद्रा थार के पीछे बंधी हुई सड़क पर घिसटती हुई दिखाई दे रही है। पुलिस अब इसी वीडियो के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच एजेंसियां वाहन और उसमें सवार लोगों की पहचान करने में जुटी हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि एटीएम मशीन में कितनी नकदी मौजूद थी और बदमाश कितनी रकम लेकर फरार हुए। पुलिस बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर मशीन में मौजूद कैश का पूरा हिसाब जुटा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही लूटी गई राशि का सही आंकड़ा सामने आ सकेगा। पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है।
घटना के बाद इलाके के लोगों में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में चोरी और लूट की कई घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन रात के समय पुलिस गश्त पर्याप्त नहीं होने से अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं। लोगों ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और रात में गश्त बढ़ाने की मांग की है। वहीं खैरा थाना पुलिस ने क्षतिग्रस्त एटीएम मशीन बरामद कर मामला दर्ज कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश जारी है।

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अयोध्या. रामनगरी अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दरबार में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान की चोरी मामले में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. रामलला के खजाने पर डाका डालने वाले शातिर आरोपी इस चोरी के पैसे को सिर्फ ऐशो-आराम में नहीं उड़ा रहे थे, बल्कि इसे सफेद करने के लिए शेयर बाजार में भी मोटा दांव खेल रहे थे.
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने एक पूरी साजिश के तहत दान के काले पैसे को नंबर एक बनाने का खेल रचा था. इस खुलासे के बाद पुलिस ने आरोपियों के कई रिश्तेदारों और करीबियों के खातों पर भी कड़ा शिकंजा कस दिया है.
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, चढ़ावे से चुराए गए कैश को आरोपी सीधे अपने खातों में जमा नहीं करते थे. पैसों का असली सोर्स छिपाने के लिए पहले इस नकदी को रिश्तेदारों और जानकारों के बैंक अकाउंट में जमा कराया जाता था. इसके बाद वही पैसा ट्रांसफर के जरिए आरोपियों के निजी खातों में पहुंचता था, ताकि इसे पूरी तरह से वैध कमाई दिखाया जा सके. इस गोरखधंदे का पर्दाफाश होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों के दोस्तों और रिश्तेदारों के करीब दो दर्जन बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है. इसके अलावा, पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है कि चुराया गया सोना किन स्थानीय सर्राफा कारोबारियों द्वारा गलाया जाता था.
इस महाघोटाले में एक और हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि शातिर आरोपी दान के पैसों की आधिकारिक गिनती शुरू होने से पहले ही बड़ी चालाकी से नोटों की गड्डियां छिपा लेते थे. पुलिस ने गहन पूछताछ के बाद मुख्य आरोपियों अनुकल्प, लवकुश और करुणेश की निशानदेही पर भारी मात्रा में कैश, सोने की चेन, मोबाइल और एक लग्जरी कार बरामद कर जब्त कर ली है. पकड़े गए तीनों मुख्य आरोपियों को पुलिस की पूछताछ के बाद अदालत में पेश कर जेल भेजा जा चुका है.
गौरतलब है कि अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दानपात्रों में डाले गए चढ़ावे की चोरी का यह गंभीर मामला इसी साल जून (2026) में पहली बार सुर्खियों में आया था. पुलिस इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनके प्रोफाइल ने सबको चौंका दिया है. इन शातिर आरोपियों में मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय का निजी ड्राइवर टिन्नू यादव, आउटसोर्सिंग कर्मचारी अनुकल्प मिश्रा, ऑटोमोबाइल मैकेनिक लवकुश मिश्रा और एक प्राइमरी स्कूल का टीचर अविनाश शुक्ला शामिल हैं. इनके अलावा, कैश संभालने की अहम जिम्मेदारी उठाने वाला संविदा कर्मचारी रामशंकर मिश्रा, हाउसकीपिंग का काम देखने वाला मनीष यादव, चंदा गिनने वाला संविदाकर्मी करुणेश पांडेय और एक रिटायर्ड कर्मचारी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव भी इस चोरी के बड़े किरदार निकले हैं, जिन्होंने आस्था के नाम पर इस भयंकर धोखे को अंजाम दिया.
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: 23 कर्मचारियों ने दिया इस्तीफा, दान की करते थे गिनती
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद मंदिर ट्रस्ट ने दान की गिनती से जुड़ी व्यवस्था में बड़े बदलाव शुरू कर दिए हैं। नए नियम लागू होने के साथ ही काम के घंटे बढ़ने और वेतन में बदलाव से 23 कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। अब चढ़ावे की गिनती के लिए अलग व्यवस्था और विशेष कर्मचारियों की नियुक्ति की तैयारी की जा रही है।
चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बाद मंदिर प्रशासन ने दान की गिनती की पूरी प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाने का फैसला लिया है। नए कर्मचारियों के लिए पुलिस सत्यापन, बिना जेब वाली वर्दी और कड़े सुरक्षा नियम अनिवार्य किए जाएंगे। वहीं पहले यह काम कर रहे कर्मचारियों के इस्तीफे के बाद नई भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। ट्रस्ट का उद्देश्य चढ़ावे की व्यवस्था में पारदर्शिता और सुरक्षा को और मजबूत करना है।
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद दान की गिनती की प्रक्रिया की समीक्षा की गई। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि हाउसकीपिंग से जुड़े कर्मचारी भी इस काम में लगे हुए थे। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने व्यवस्था में बदलाव का फैसला लिया। अब चढ़ावे की गिनती के लिए अलग से प्रशिक्षित और निर्धारित कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे, ताकि पूरी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित रह सके।
मंदिर प्रशासन की ओर से ड्यूटी के नए नियम लागू किए गए हैं। अब कर्मचारियों को सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक यानी 10 घंटे की ड्यूटी करनी होगी। इसके साथ ही छुट्टियों में भी कटौती की गई है और वेतन संबंधी बदलाव किए गए हैं। इन नए नियमों के लागू होने के बाद चढ़ावे की गिनती में लगे 23 कर्मचारियों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया।
दान की रकम की गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए अब कई नई शर्तें लागू की जाएंगी। उन्हें पुलिस से सत्यापित चरित्र प्रमाण पत्र जमा करना होगा। साथ ही ऐसे कपड़े पहनने होंगे, जिनमें कोई जेब न हो। इसके अलावा सुरक्षा से जुड़े अन्य सभी नियमों का पालन करना भी अनिवार्य रहेगा, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे।
बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति कराई थी। इन कर्मचारियों को मुख्य रूप से हाउसकीपिंग का काम सौंपा गया था। हालांकि बाद में इनमें से कुछ कर्मचारियों को दान व्यवस्था से जुड़े कार्यों में भी लगाया गया, जिसे लेकर अब पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए किसी विशेष योग्यता की जरूरत नहीं थी, क्योंकि उन्हें नकदी की गिनती का जिम्मा नहीं दिया गया था। उनकी भूमिका केवल मुड़े हुए नोटों को सीधा करना और उन्हें व्यवस्थित बंडलों में रखना थी। चढ़ावा चोरी के मामले के बाद अब ट्रस्ट पूरी व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
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“गुनाहगारों को फांसी दी जाए..” राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर बोले अरविंद केजरीवाल, हस्ताक्षर अभियान का किया ऐलान
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि गुनाहगारोंं को सबके सामने फांसी दी जानी चाहिए। साथ ही कहा कि आम आदमी पार्टी 12 जुलाई को देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान शुरू करेगी।
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर देश में सियासी घमासान जारी है। विपक्ष लगातार मामले को लेकर भाजपा सरकार और श्रीराम मंदिर जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट को घेर रहा है। इस बीच, शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है।
अरविंद केजरीवाल ने नई दिल्ली पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कहा कि पूरे मामले में सिर्फ 8 छोटे लोगों को पकड़कर जेल भेज दिया गया है, जबकि असली और बड़े चेहरों को बचाने की कोशिश की जा रही है। इतना ही नहीं केजरीवाल ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मुद्दे पर लड़ाई जारी रखते हुए एक अभियान शुरू करने का भी ऐलान कर दिया है।
AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद को लेकर कहा कि अब इस मुद्दे पर जनता को अपनी आवाज बुलंद करनी होगी और भगवान के दरबार में जाकर न्याय की प्रार्थना करनी होगी। उन्होंने घोषणा की कि इस रविवार, 12 जुलाई सुबह 11:30 बजे दिल्ली के रोहिणी में सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाएगा। केजरीवाल ने सभी श्रद्धालुओं और राम भक्तों से बड़ी संख्या में इस धार्मिक आयोजन में शामिल होने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सुंदरकांड पाठ के बाद भगवान का आशीर्वाद लेकर देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान शुरू किया जाएगा। जहां-जहां आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता मौजूद हैं, वहां इस अभियान को चलाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों का समर्थन जुटाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस अभियान के जरिए जुटाए गए हस्ताक्षरों के साथ एक पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा जाएगा, जिसमें मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग की जाएगी।
इस बीच, अरविंद केजरीवाल ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर एक बड़ी मांग भी की है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सप्ताह की घटनाओं से मालूम पड़ता है कि केंद्र सरकार राम मंदिर में डकैती करने वाले गुनाहगारों को बचाने में लगी हुई है। अब देश के हर सनातन हिंदू का फर्ज है कि वह इन बड़े सनातन के ​गुनाहगारों को सजा दिलाने के लिए आगे आए। इसे छिपाना बहुत बड़ा पाप है। इन गुनाहगारों को सबके सामने फांसी दे देनी चाहिए।

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भारतीय रेलवे अक्सर अपनी सेवाओं और नए बदलावों को लेकर चर्चा में रहता है, लेकिन इस बार एक वायरल वीडियो ने रेलवे प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में महाराष्ट्र के बल्हारशाह से मुंबई (दादर) जाने वाली नंदीग्राम एक्सप्रेस के फर्स्ट AC कोच को एक हनीमून सूट की तरह सजाया गया दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद रेलवे ने मामले को गंभीरता से लिया और ड्यूटी पर मौजूद टीटीई (TTE) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं।
यह मामला नंदीग्राम एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 11002 डाउन) का है। ट्रेन के फर्स्ट एसी कोच का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें एक पूरा केबिन शादी की पहली रात यानी हनीमून रूम की तरह सजाया गया था।
वीडियो में देखा जा सकता है कि केबिन को रंग-बिरंगे गुब्बारों, ताजे फूलों, गुलदस्तों और लाल गुलाब की पंखुड़ियों से सजाया गया था। सीट पर गुलाब की पंखुड़ियों से दिल का आकार बनाया गया था, जिससे पूरा कोच किसी होटल के लग्जरी कमरे जैसा दिखाई दे रहा था।
रेलवे प्रशासन ने जांच के बाद बताया कि यह सजावट किसी रेलवे कर्मचारी ने नहीं कराई थी। दरअसल, ट्रेन में सफर कर रहे एक नवविवाहित जोड़े ने अपनी यात्रा को खास बनाने के लिए ऑनलाइन एक प्राइवेट डेकोरेशन एजेंसी की सेवा बुक की थी।
डेकोरेटर स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ा और बिना रेलवे की अनुमति के फर्स्ट AC कोच के अंदर जाकर पूरी बर्थ को सजा दिया। रेलवे के अनुसार, इस काम के लिए न तो रेलवे से अनुमति ली गई थी और न ही सुरक्षा एजेंसियों को इसकी जानकारी दी गई थी।
रेलवे के मुताबिक, यह केवल सजावट का मामला नहीं था, बल्कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन भी था। सजावट के दौरान ट्रेन के अंदर मोमबत्ती और दीपक जैसी ज्वलनशील वस्तुओं का इस्तेमाल किया गया, जिससे आग लगने का खतरा पैदा हो सकता था। इसके अलावा किसी बाहरी व्यक्ति का बिना अनुमति फर्स्ट एसी कोच में प्रवेश करना भी रेलवे सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है।
जांच में यह सामने आया कि ड्यूटी पर मौजूद ट्रेन टिकट परीक्षक (TTE) ने इस अनधिकृत गतिविधि को नहीं रोका। रेलवे का मानना है कि अगर TTE अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाते, तो बिना अनुमति कोई भी व्यक्ति कोच के अंदर प्रवेश नहीं कर पाता। इसी लापरवाही के चलते रेलवे ने संबंधित TTE को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
किन लोगों पर हो सकती है कार्रवाई?
रेलवे के अनुसार इस मामले में कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
नवविवाहित जोड़ा- यदि जांच में यह साबित होता है कि उन्होंने बिना अनुमति डेकोरेशन एजेंसी को बुलाया, तो उनके खिलाफ भी रेलवे नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है।
डेकोरेशन एजेंसी- बिना अनुमति रेलवे परिसर और ट्रेन के अंदर व्यावसायिक गतिविधि करना नियमों का उल्लंघन है।
रेलवे कर्मचारी- यदि जांच में किसी रेलवे कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
रेलवे के नियम क्या कहते हैं?
भारतीय रेलवे अधिनियम, 1989 के अनुसार ट्रेन और रेलवे परिसर में बिना अनुमति कई गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। बिना अनुमति प्रवेश और व्यावसायिक गतिविधि- रेलवे की अनुमति के बिना किसी भी व्यक्ति का ट्रेन के अंदर जाकर व्यवसाय करना अपराध माना जाता है। यदि कोई डेकोरेटर बिना अनुमति ट्रेन में सजावट करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में 6 महीने तक की जेल, 1,000 रुपये तक का जुर्माना, या दोनों सजा हो सकती है।
चलती ट्रेन में मोमबत्ती, दीपक या किसी भी तरह की आग जलाना बेहद खतरनाक माना जाता है।ऐसा करने से पूरी ट्रेन में आग लग सकती है और यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है।
रेलवे अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत ऐसे मामले में 3 साल तक की जेल, 5,000 रुपए तक का जुर्माना, या दोनों सजा हो सकती है।
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी बोले-'किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा'
राम मंदिर दान हेराफेरी के मामले पर बीजेपी ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। पंकज चौधरी ने ट्रस्ट को स्वतंत्र संस्था बताते हुए सरकार की जिम्मेदारी भी साफ की। विपक्ष के आरोपों को उन्होंने राजनीतिक करार दिया और एसआईटी जांच पर पूरा भरोसा जताया। साथ ही उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की वापसी की भी बात कही।
मिर्जापुर दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में पंकज चौधरी ने कहा कि राम मंदिर में दान से जुड़ी कथित गड़बड़ी की खबर से सभी को दुख पहुंचा है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उनके मुताबिक, श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामलों में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ रही है।
पंकज चौधरी ने कहा कि मामले की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) कर रही है और जांच अपने तय दायरे में आगे बढ़ रही है। उन्होंने विपक्ष द्वारा जांच पर उठाए जा रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दलों की संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने की पुरानी आदत रही है। उनका कहना था कि जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं और किसी भी दोषी को कानून से राहत नहीं मिलेगी।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर निर्माण के बाद उसके संचालन के लिए एक स्वतंत्र ट्रस्ट का गठन किया गया था। उन्होंने कहा कि मंदिर के प्रबंधन और उसके कामकाज की जिम्मेदारी ट्रस्ट की है, सरकार की नहीं। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि अगर जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सबसे सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
पंकज चौधरी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले भगवान राम और राम भक्तों के मुद्दों पर गंभीर नहीं थे, वे अब इस मामले पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता सब कुछ देख रही है और ऐसे बयानों का सही समय पर जवाब भी देगी।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इस घटना से पार्टी को दुख जरूर हुआ है, लेकिन इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव पर नहीं पड़ेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश की जनता एक बार फिर बीजेपी पर भरोसा जताएगी और 2027 में पार्टी लगातार तीसरी बार सरकार बनाएगी।
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तिहाड़ में 50 दिन से भूख हड़ताल पर है अमेरिकी कैदी, भारतीय खाने पर उठाए सवाल; कोर्ट पहुंचा मामला
दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद अमेरिकी नागरिक वैन डाइक की डाइट को लेकर नया विवाद सामने आया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के एक मामले में बंद वैन डाइक ने दावा किया है कि वह जेल में मिलने वाला मसालेदार और डीप-फ्राइड भोजन नहीं खा पा रहा है। इसी वजह से वह पिछले 50 दिनों से भूख हड़ताल पर है और केवल सोया मिल्क समेत लिक्विड डाइट का सेवन कर रहा है।
वैन डाइक की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि भारतीय जेल का सामान्य भोजन उसकी सेहत के अनुकूल नहीं है। याचिका के मुताबिक, जब भी उसने जेल का खाना खाने की कोशिश की, तबीयत बिगड़ गई और भोजन पचाने में गंभीर दिक्कत हुई। इसलिए उसने कोर्ट से अपनी स्वास्थ्य जरूरतों के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराने की मांग की है।
मामले की सुनवाई के दौरान जेल प्रशासन ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा। अदालत ने इस पर सहमति जताते हुए मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई के लिए निर्धारित कर दी।
NIA ने 13 मार्च को वैन डाइक को छह यूक्रेनी नागरिकों के साथ गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, सभी आरोपी म्यांमार से मिजोरम सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे और बाद में देश के विभिन्न घरेलू हवाई अड्डों से पकड़े गए।
जांच में एजेंसी को संदेह है कि यह समूह भाड़े के लड़ाकों (Mercenaries) के रूप में सक्रिय था। उन पर भारत और म्यांमार में सक्रिय जातीय सशस्त्र संगठनों की मदद करने तथा उन्हें ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देने का आरोप है। इसी मामले में उनके खिलाफ गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) सहित आतंकवादी साजिश से जुड़ी धाराओं में कार्रवाई की गई है।
वैन डाइक ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ (SOLI) नामक एक गैर-लाभकारी संगठन का संस्थापक बताया जाता है। संगठन का दावा है कि उसने इराक में ISIS के खिलाफ लड़ने वाले समूहों को प्रशिक्षण दिया और वर्ष 2022 से यूक्रेन को भी सहायता प्रदान की। वैन डाइक का कहना है कि उसका संगठन तानाशाही शासन के खिलाफ काम करता है।
हालांकि, NIA का आरोप है कि यह नेटवर्क भारत के पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी संगठनों से जुड़ा हुआ है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अब अदालत की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी, जहां जेल प्रशासन अपना पक्ष रखेगा।

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कर्नाटक लोकायुक्त ने बुधवार को भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में राज्यभर में बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 सरकारी अधिकारियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई बेंगलुरु सिटी, बेंगलुरु साउथ, रायचूर, चित्रदुर्ग, तुमकुरु, शिवमोगा और कलबुर्गी समेत कई जिलों में की गई।
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, सभी अधिकारियों पर अपनी वैध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का संदेह है। छापेमारी के दौरान कृषि विभाग की कृषि विस्तार अधिकारी (AEO) पुष्पा डी.आर. के आवास से बड़ी मात्रा में सोने के आभूषण और भारी नकदी बरामद हुई है। बरामद गहनों का मूल्यांकन करने के लिए सुनार को बुलाया गया है, जबकि नकदी और अन्य संपत्तियों की गिनती का कार्य जारी है। जांच पूरी होने के बाद बरामद संपत्ति का वास्तविक मूल्य सामने आएगा।
लोकायुक्त की कार्रवाई के दायरे में आए अधिकारियों में कृष्णा भाग्य जल निगम लिमिटेड, रायचूर के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बसनगौड़ पाटिल, कृषि इंजीनियरिंग (बागवानी) विश्वविद्यालय, चित्रदुर्ग के असिस्टेंट प्रोफेसर शंकर एम, वॉटरशेड डेवलपमेंट विभाग, चित्रदुर्ग के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर दुग्गप्पा बी.एच., बेंगलुरु पीडब्ल्यूडी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर नरेंद्र कुमार, केआरआईडीएल बेंगलुरु रेंज के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर प्रवीण बी. श्री हरि तथा बेंगलुरु एपीएमसी की डिप्टी डायरेक्टर (प्रशासन) पुष्पा डी.आर. शामिल हैं
इसके अलावा तुमकुरु के माइनर इरिगेशन विभाग के असिस्टेंट इंजीनियर मधुसूदन एन., बेंगलुरु साउथ के कुंबलगोडु पंचायत के पीडीओ थिम्मे गौड़ा, शिवमोगा फॉरेस्ट रिसर्च डिवीजन के असिस्टेंट कंजरवेटर किरण अंगड़ी और कलबुर्गी जीईएससीओएम के असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) अमृत राव के परिसरों की भी तलाशी ली गई।
लोकायुक्त की टीमें सभी अधिकारियों की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, दस्तावेजों और निवेश संबंधी रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित अधिकारियों की घोषित आय और उनके पास मौजूद संपत्ति में कोई असंगति तो नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर ढेर: 5 दिनों से छिपा था जाकिर अहमद, शोपियां में ऑपरेशन जारी
जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त अभियान के दौरान लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर जाकिर अहमद गनी मारा गया है। उसका शव ऑपरेशन के पांचवें दिन बरामद किया गया। सुरक्षा एजेंसियां अब इलाके में छिपे दूसरे आतंकी की तलाश में लगातार अभियान चला रही हैं।
सूचना के आधार पर शुरू किए गए इस ऑपरेशन में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने मिलकर कार्रवाई की। जाकिर गनी का नाम पहलगाम आतंकी हमले के बाद जारी 14 वांछित आतंकियों की सूची में शामिल था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि उसकी मौत आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की बड़ी सफलता है। फिलहाल पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है और सुरक्षाबल किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरत रहे हैं।
शनिवार शाम सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि शोपियां के चनापोरा इलाके में आतंकियों ने ठिकाना बना रखा है। इसके बाद पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया गया। लगातार कई दिनों तक चलाए गए ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने इलाके को चारों ओर से घेरकर आतंकियों के बच निकलने के सभी रास्ते बंद कर दिए। आखिरकार पांचवें दिन जाकिर अहमद गनी का शव बरामद कर लिया गया।
इस संयुक्त अभियान में सेना की राष्ट्रीय राइफल्स की कई यूनिट, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और सीआरपीएफ के जवान शामिल रहे। सेना की विक्टर फोर्स ने घने जंगल और बाग वाले इलाके में विशेष रणनीति के साथ मोर्चा संभाला। रात के समय भी निगरानी बनी रहे, इसके लिए अतिरिक्त जवानों की तैनाती और रोशनी की व्यवस्था की गई। पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिला।
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ईडी का टीएमसी पर बड़ा एक्शन: 440 करोड़ रुपये वाले 3 बैंक खाते फ्रीज, विमान-हेलीकॉप्टर खरीद में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज
पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए टीएमसी से जुड़े तीन बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। इन खातों में करीब 440 करोड़ रुपये जमा बताए जा रहे हैं। एजेंसी कथित संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और चार्टर्ड विमान व हेलीकॉप्टर खरीद से जुड़े मनी ट्रेल की जांच कर रही है।
ईडी ने हाल ही में कोलकाता के करीब पांच स्थानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दायरे में केयरवेल ग्रुप ऑफ कंपनीज भी शामिल रही, जिसकी इकाई केयरवेल एविएशन प्राइवेट जेट किराए पर उपलब्ध कराती है। जांच का मकसद टीएमसी के खातों से जुड़े वित्तीय लेन-देन और विमान खरीद की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल करना है।
ईडी की शुरुआती जांच के अनुसार, अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से करीब 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किए गए। इसके बाद कंपनी ने 82.96 करोड़ रुपये एक नई कंपनी के खाते में भेजे।
एजेंसी का दावा है कि इसी वित्तीय श्रृंखला के जरिए करीब 112 करोड़ रुपये का उपयोग Embraer Legacy 600 कॉरपोरेट विमान और AgustaWestland 109SP हेलीकॉप्टर खरीदने में किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि हेलीकॉप्टर खरीद के लिए विदेश से प्राप्त धन का भी इस्तेमाल किया गया। बाद में इन दोनों विमानों को कथित तौर पर टीएमसी को किराए पर उपलब्ध कराया गया।
प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि विमानों के उपयोग के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन हुआ, जो प्रथम दृष्टया संदिग्ध प्रतीत होता है। एजेंसी को आशंका है कि वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपाने के लिए कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इस पहलू की विस्तृत जांच जारी है।
यह मामला टीएमसी के भीतर राजनीतिक विवाद के बाद सामने आया। पार्टी के कुछ बागी विधायकों ने पार्टी फंड में जमा धन के स्रोत की जांच की मांग उठाई थी। इसके बाद कोलकाता पुलिस ने टीएमसी के तीन बैंक खातों से होने वाले वित्तीय लेन-देन पर रोक लगाई। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया। वहीं, अब ईडी की जांच ने इस पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।

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