


उज्जैन। बताया जा रहा है कि महिला अपने नए ससुराल की जमीन में हिस्सेदारी की मांग को लेकर गांव पहुंची थी, जिसके बाद विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। पुलिस ने 11 नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि आठ अन्य आरोपी फरार हैं। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
उज्जैन से 75 किलोमीटर दूर महिदपुर तहसील के झारड़ा के हरनिया खेड़ा गांव में यह घटना हुई। बताया जा रहा है कि तीन साल पहले अपने पहले पति को छोड़कर दूसरे युवक से विवाह करने वाली 40 वर्षीय महिला जब अपने दूसरे पति के साथ गांव लौटी, तो पूर्व पति के परिवार और ग्रामीणों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं।
पीड़िता ने शिकायत में बताया कि वह अपने घर के कमरे में थी, तभी आरोपी सुमेर सिंह, कचरू सिंह और बद्रीलाल अपने अन्य साथियों के साथ जबरन दरवाजा तोड़कर घर में घुस आए। महिला के बाल और हाथ पकड़कर उसे घसीटते हुए बाहर निकाला गया, जहां उसके बाल काटे गए, कपड़े फाड़े गए और गले में जूते-चप्पलों की माला पहनाकर गांव में जुलूस निकाला गया। इस दौरान उसके पति के साथ भी मारपीट की गई और दोनों को जान से मारने की धमकी दी गई।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस के पहुंचते ही ग्रामीणों और आरोपियों में भगदड़ मच गई, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर तीन मुख्य आरोपियों सुमेर सिंह, बद्रीलाल और कचरू को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया। झारड़ा थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर 11 नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।
पुलिस जांच में सामने आया कि महिला का विवाह पहले इसी गांव के एक युवक से हुआ था। करीब तीन साल पहले वह पहले पति को छोड़कर गांव के ही दूसरे युवक के साथ चली गई थी और दोनों ने विवाह कर लिया था। इसके बाद से दंपती इंदौर में रह रहे थे। तीन साल बाद गांव लौटने पर महिला द्वारा जमीन में हिस्सेदारी की मांग किए जाने से विवाद बढ़ गया और पूर्व ससुर ने गांव के कुछ असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया।
झारड़ा थाना प्रभारी आनंद भाबोर ने बताया कि घटना 30 जून की सुबह करीब 9:30 बजे की है। वहीं उज्जैन पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने कहा कि महिला के साथ अमानवीय व्यवहार करने वाले 11 नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर और गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि फरार आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
----------------------------------
खाद्य विभाग का छापा, अग्रवाल पब्लिक स्कूल की मेस सील, 22 फूड सैंपल लिए, रिपोर्ट के बाद होगी FIR
इंदौर। बच्चों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले विद्यालयों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग की टीम ने इंदौर के तीन प्रतिष्ठित स्कूलों की मेस और कैंटीन का औचक निरीक्षण किया, जहां बड़े पैमाने पर लापरवाही और नियम विरुद्ध संचालन उजागर हुआ है।
निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ी लापरवाही अग्रवाल पब्लिक स्कूल में देखने को मिली। यहां स्कूल की मेस बिना किसी वैध खाद्य लाइसेंस (Food License) के धड़ल्ले से संचालित हो रही थी। नियमों का खुला उल्लंघन पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मेस को तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया है।
टीम ने जब कैंटीन और मेस के दस्तावेजों और व्यवस्थाओं को खंगाला, तो कई गंभीर कमियां सामने आईं है। मुख्य नियमों को ताक पर रखकर बिना रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस के बच्चों के लिए खाना तैयार किया जा रहा था। मेस में इस्तेमाल होने वाले पानी की अनिवार्य जांच रिपोर्ट (Water Testing Report) उपलब्ध नहीं थी। खाना बनाने और परोसने वाले कर्मचारियों (Food Handlers) के पास जरूरी मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट भी नहीं मिले।
कार्रवाई के दौरान टीम ने स्वच्छता और गुणवत्ता की जांच के लिए अलग-अलग विद्यालयों की मेस से 22 खाद्य नमूने (Food Samples) एकत्र किए हैं। इन सभी सैंपलों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित विद्यालयों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम (FSSA) के तहत सख्त वैधानिक व दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
----------------------------------------
ब्लिंकिट की ड्रेस में 40 लाख की दिनदहाड़े लूट, 2 दिन बाद लिखाई रिपोर्ट
रतलाम। ब्लिंकिट कंपनी की ड्रेस में आए एक बदमाश ने शहर सराय स्थित एक घर के मेन गेट पर खड़े कर्मचारी को जान से मारने की धमकी देकर 40 लाख रुपए से भरा बैग लूट लिया। बदमाश बैग लेकर भागा और रोड पर पहले से खड़े साथी बदमाश की स्कूटी पर बैठकर उसके साथ रफूचक्कर हो गया। सीसीटीवी फुटेज में दोनों बदमाश ब्लिंकिट कंपनी की ड्रेस में स्कूटी से भागने की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं। पुलिस अन्य सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है और दोनों की शिनाख्त करने में जुटी है। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है।
12 बजे दर्ज फरियादी मनीष पटवा का कहना है कि इस घटना के बाद मैं घबरा गया था। मैंने पूरी बात दोस्त गौरव शर्मा को बताई क्योंकि रुपए उन्हीं के थे। उन्होंने कहा कि मैं अभी उज्जैन आया हुआ हूं, वहां से आकर रिपोर्ट करवाएंगे। इसी वजह से रिपोर्ट कार्रवाई की हमारे दोनों कर्मचारी बैग लेकर निकले तभी ब्लिंकिट कंपनी की ड्रेस पहने एक युवक मुंह पर कपड़ा बांधे मेरे घर के गलियारे से मेन डोर पर आया।
आते ही उसने फरदीन को जान से मारने की धमकी दी और उसके हाथ से जबरन रुपए से भरा बैग छीन लिया। वह बैग लूटकर भागा तो फरदीन व फिरोज ने उसका पीछा किया, जिस पर लुटेरे ने उनको जान से मारने की धमकी भी दी। रोड पर उसका साथी बदमाश स्कूटी लेकर तैयार खड़ा था। बैग लेकर भागा लुटेरा उसकी स्कूटी पर बैठा और दोनों मौके से गायत्री टॉकीज की ओर भाग निकले। स्कूटी वाले बदमाश ने भी ब्लिंकिट कंपनी की ड्रेस पहन रखी थी।
मंदसौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। गाड़ी में पेट्रोल डलवाने के दौरान आरोपी और उसका सहयोगी पुलिसकर्मियों की ही गाड़ी लेकर फरार हो गया। पूरी घटना पेट्रोल पंप पर लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई है।
दरअसल, पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में 2 युवकों को सागर से गिरफ्तार किया था। जिसके बाद उन्हें हरियाणा ले जाया जा रहा था। इस दौरान दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस से मंदसौर के गरोठ में पेट्रोल डलवाने के लिए हरियाणा पुलिस रुकी थी। इसी दौरान मौका पाते ही आरोपी पुलिस को चकमा देकर गाड़ी लेकर रफू चक्कर हो गए।
आरोपी कुछ ही दूरी पर पुलिस की गाड़ी सड़क पर छोड़कर भाग गए। इस पूरे घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। जिसके आधार पर उनकी तलाश की जा रही है। दोनों आरोपियों को पकड़ने के लिए कई जगह मंदसौर पुलिस ने नाकाबंदी कर दी है। इस घटना के बाद पुलिस की लापरवाही को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
---------------------------------
3.30 सेकंड के डांस का वीडियो आया था सामने ....पत्नी-बेटों को कुल्हाड़ी से काटने से पहले मुरैना में बलराम ने फूफा को भेजे थे 3 ऑडियो मैसेज
मुरैना मध्यप्रदेश के मुरैना के किशनपुरा गांव में 27 जून 2026 की सुबह पत्नी और दोनों बेटों की हत्या के बाद आत्महत्या की की सनसनीखेज घटना ने हर किसी को झकझोर दिया था। अब इस घटना से जुड़े तीन ऑडियो सामने आए हैं। ये ऑडियो बीवी व बच्चों की हत्या करने वाले पति बलराम कुशवाह के हैं। ऑडियो घटना से कुछ घंटे पहले के बताए गए हैं और इनमें बलराम काफी गुस्से में बात करता हुआ सुनाई दे रहा है।
जो तीन ऑडियो मैसेज सामने आए हैं वो बलराम ने पत्नी रविता के फूफा श्रीकृष्ण कुशवाहा को भेजे थे। इतना ही नहीं फूफा श्रीकृष्ण कुशवाहा के मुताबिक उस दिन बलराम ने उन्हें 22 बार कॉल भी किए थे, लेकिन उन्होंने बलराम के काफी गुस्से में होने के कारण कॉल रिसीव नहीं किए थे। जिसका पछतावा उन्हें आज भी है। जो ऑडियो सामने आए हैं उनमें जो बलराम काफी गुस्से में बात करते सुनाई दे रहे हैं।
पहला ऑडियो- देख जा ##@%** की वीडियो तू…नहीं तो तू कहता फिरे, अब देख वीडियो मैंने तुझे डाल दी।
दूसरा ऑडियो- देख जा वीडियो #@&* की बढ़िया, देख।
तीसरी ऑडियो- देख जा ##@%** की वीडियो, थूथरो खोल के (चेहरा दिखाकर) नाच रही है, ये तो कल नग्न होकर नाचेगी, उसका जबावदार कौन होगा? जा वीडियो हे देख लो तुम चुपचाप, मैंने तुम्हें डाल दी आज।
किशनपुरा गांव में रहने वाले बलराम कुशवाह (32) ने पत्नी रविता (28) और बेटे आरव (10) व बेटे अतुल (7) की बेरहमी से कुल्हाडी से काटकर हत्या कर दी थी। पत्नी और बेटों को मारने के बाद बलराम ने खुद ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया था कि बलराम की पत्नी रविता ने करीब एक महीने पहले गांव की श्रीमद् भागवत कथा में डांस किया था, जिसका वीडियो गांव के कुछ लड़कों ने बनाकर बलराम को वॉट्सएप कर दिया था। इस वीडियो को देखने के बाद बलराम के सिर पर खून सवार हो गया और घर में सो रही पत्नी और बेटों की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या कर आत्महत्या कर ली।
इस सनसनीखेज वारदात के कुछ घंटों बाद वो वीडियो भी सामने आया था जिसमें बलराम की पत्नी रविता डांस करते हुए दिख रही थी। वीडियो में रविता भागवत कथा के पंडाल में डांस करती दिख रही थी। वीडियो में रविता सिर पर पल्लू लिए हुए पूरी तरह से शालीनता से डांस कर रही थी और पंडाल में मौजूद महिलाएं व युवतियां उसका हौसला बढ़ा रही थीं।
----------------------------------
एम्बुलेंस बनी ‘सवारी गाड़ी’: मरीज तड़प रहे और ड्राइवर स्कूली बच्चे ढो रहे, स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल
इछावर। सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजनाएं और मरीजों की जान बचाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर दौड़ाई जा रही सरकारी एम्बुलेंस अब मरीजों के लिए नहीं, बल्कि ड्राइवरों की एक्स्ट्रा कमाई का जरिया बन चुकी हैं। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र से एक ऐसा ही शर्मनाक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे जिले के स्वास्थ्य महकमे की पोल खोलकर रख दी है। जिस एम्बुलेंस को मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उसकी जिंदगी बचानी चाहिए, उस गाड़ी में अब मरीजों की जगह सवारियां और स्कूली बच्चे सफर कर रहे हैं!
इछावर में एम्बुलेंस ड्राइवरों की इस मनमानी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे एम्बुलेंस का उपयोग मरीजों को लाने के बजाय स्कूली बच्चों और आम सवारियों को ढोने के लिए किया जा रहा है। इतना ही नहीं, ये ड्राइवर सरकारी डीजल फूंककर अपनी गाड़ियों को अनावश्यक इधर-उधर घुमाते हैं, ताकि मीटर की रीडिंग बढ़ाई जा सके और जमकर फर्जीवाड़ा किया जा सके।
क्षेत्र की जनता का आरोप है कि जब भी कोई गंभीर मरीज एम्बुलेंस के लिए फोन करता है, तो उन्हें 3 से 4 घंटे तक गाड़ी उपलब्ध नहीं होने का बहाना बना दिया जाता है। मरीज अस्पताल जाने के लिए तड़पता रहता है, लेकिन ये एम्बुलेंस किसी मरीज के घर के बाहर नहीं, बल्कि क्षेत्र के ढाबों, होटलों या निजी आयोजनों के बाहर कतार में खड़ी दिखाई देती हैं। एक-एक आयोजन स्थल पर तीन-तीन, चार-चार एम्बुलेंस का खड़ा होना इस बात का सबूत है कि इन्हें न तो किसी नियम का खौफ है और न ही किसी की जान की परवाह। बड़ा सवाल है कि क्या सीहोर का स्वास्थ्य विभाग और जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे गोरखधंधे से अनजान हैं? या फिर आंखें मूंदकर इस लापरवाही को शह दी जा रही है? मरीजों के हक की एम्बुलेंस से निजी काम करने वाले इन ड्राइवरों पर कब तक कार्रवाई होगी, यह देखने वाली बात होगी।
अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा (दान) चोरी के मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस बीच आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का जिक्र करते हुए कई सवाल उठाए हैं। केजरीवाल ने कहा कि मामले में “बड़े नामों” के शामिल होने की बात सामने आ रही है और यह भी दावा किया कि कुछ लोग खुलकर नाम लेने से बच रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे कौन से प्रभावशाली लोग हैं, जिनका नाम लेने से डर का माहौल बताया जा रहा है। उन्होंने अपने बयान में यह भी उल्लेख किया कि कुछ धार्मिक प्रवक्ता भी इस तरह की बात कर रहे हैं कि बड़े नाम शामिल हो सकते हैं और नाम लेने पर दबाव या खतरे की आशंका जताई जा रही है। इस संदर्भ में उन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का भी जिक्र किया।
अरविंद केजरीवाल ने दावा किया है कि पार्टी नेता संजय सिंह जब कथित घोटाले से जुड़े दस्तावेज लेकर विशेष जांच दल (SIT) के पास गए तो उन्हें चौंकाने वाला जवाब मिला। केजरीवाल के अनुसार, SIT ने कहा कि वह जमीन घोटाले की जांच नहीं कर रही है। इस दावे को लेकर उन्होंने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में पारदर्शिता की जरूरत है। उन्होंने आगे यह भी आरोप लगाया कि “चंदा चोरों” के मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है और संबंधित मामलों में सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। केजरीवाल ने यह भी कहा कि फिलहाल कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है, जबकि मामला इससे कहीं बड़ा है।
अरविंद केजरीवाल ने विशेष जांच दल (SIT) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मामले में अब तक जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई है, वे केवल “प्यादे” हैं और असली जिम्मेदार लोगों तक जांच नहीं पहुंची है। उन्होंने कहा कि बिना प्राथमिकी (FIR) दर्ज किए एसआईटी का गठन कैसे किया जा सकता है? उनके अनुसार, यह एसआईटी लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए बनाई गई है। आप नेता ने कहा कि वर्ष 2021 में अयोध्या में जमीन से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में भी SIT गठित की गई थी, लेकिन उस जांच में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय भी मामला एसआईटी बनाकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। केजरीवाल ने जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। केजरीवाल ने कहा कि उनके पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि कथित तौर पर चोरी की गई राशि प्रधानमंत्री तक पहुंची। उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं कह सकता… मेरे पास इस बात का सबूत नहीं कि पैसा मोदी जी तक पहुंचा, इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता।” हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम से यह प्रतीत होता है कि मामले को दबाने और दोषियों को बचाने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर ट्रस्ट के गठन और उसके सदस्यों के चयन में प्रधानमंत्री की भूमिका रही और ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों को उनका करीबी बताया।
अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित मामलों को लेकर केंद्र सरकार और ट्रस्ट पर कई आरोप लगाए। उन्होंने वर्ष 2021 में सामने आए भूमि खरीद के विवादों का हवाला देते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। केजरीवाल ने दावा किया कि वर्ष 2021 में एक भूमि सौदे का मामला सार्वजनिक रूप से सामने आया था, जिसमें एक परिवार ने करीब दो करोड़ रुपये में जमीन बेची और कुछ ही मिनटों बाद वही जमीन कथित तौर पर 18 करोड़ रुपये में राम मंदिर ट्रस्ट को बेची गई। उन्होंने इस मामले का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि यदि यह जानकारी सार्वजनिक थी, तो संबंधित स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण से जुड़े टेंडरों में कथित तौर पर 40 प्रतिशत कमीशन मांगा जाता था। साथ ही उन्होंने यह दावा भी किया कि आठ महीने की CCTV फुटेज कथित रूप से हटा दी गई। इन आरोपों के आधार पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि क्या उन्हें इन घटनाओं की जानकारी नहीं थी। केजरीवाल ने यह भी कहा कि ट्रस्ट से जुड़े प्रशासनिक ढांचे में सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।
केजरीवाल ने दावा किया कि उन्हें “सूत्रों” से जानकारी मिली है कि Intelligence Bureau (आईबी) ने कथित तौर पर कम से कम 12 रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपी थीं, जिनमें जमीन, निर्माण और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। हालांकि, उन्होंने इन दावों के समर्थन में कोई सार्वजनिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में समय रहते कार्रवाई नहीं की गई और जब विवाद बढ़ गया तो लोगों को भ्रमित करने के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। केजरीवाल ने यह भी सवाल उठाया कि बिना प्राथमिकी (FIR) दर्ज किए SIT का गठन कैसे किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में दर्ज FIR के बाद कुछ निचले स्तर के लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन जांच प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ाई गई। केजरीवाल ने अपने बयान में बृजभूषण शरण सिंह और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ लोग बड़े नामों का खुलासा करने से डरने की बात कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि आखिर किसे और क्यों बचाया जा रहा है।
----------------------------------
'बम-बम भोले' के साथ अमरनाथ यात्रा शुरू! जम्मू से रवाना हुआ पहला जत्था, उपराज्यपाल ने दिखाई हरी झंडी
जम्मू-कश्मीर में बाबा अमरनाथ की पवित्र यात्रा 2 जुलाई से औपचारिक रूप से शुरू हो गई। यात्रा के पहले दिन जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से श्रद्धालुओं का पहला जत्था कड़ी सुरक्षा के बीच श्रीनगर के लिए रवाना किया गया। जैसे ही जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रद्धालुओं को हरी झंडी दिखाई, पूरा परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारों से गूंज उठा।
गुरुवार सुबह करीब 5 बजे जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से अमरनाथ यात्रा के पहले जत्थे को रवाना किया गया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा मौजूद रहे। उन्होंने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं और यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। श्रद्धालुओं ने यात्रा शुरू होने के साथ ही भगवान भोलेनाथ के जयकारे लगाए। पूरा माहौल भक्तिमय हो गया और हर तरफ शिवभक्ति की गूंज सुनाई देने लगी।
इस बार अमरनाथ यात्रा में बड़ी संख्या में ऐसे श्रद्धालु शामिल हैं, जो पहली बार बाबा बर्फानी के दर्शन करने जा रहे हैं। खासतौर पर युवाओं में इस यात्रा को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, दिल्ली और देश के कई अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं का कहना है कि वे लंबे समय से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। कई लोगों ने बताया कि यह उनका वर्षों पुराना सपना था, जो अब पूरा होने जा रहा है।
पहली बार यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पिछले एक साल से इस यात्रा का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही अमरनाथ यात्रा के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हुआ, उन्होंने तुरंत अपना पंजीकरण करा लिया। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि उनकी इच्छा थी कि वे पहले ही दिन बाबा बर्फानी के दर्शन करें। अब उन्हें यह सौभाग्य मिला है कि वे यात्रा के पहले जत्थे में शामिल होकर भगवान शिव के पवित्र हिम शिवलिंग के दर्शन करेंगे।
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद इस बार सुरक्षा को लेकर कई तरह की चर्चाएं थीं। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। यात्रा पर निकले युवाओं ने कहा कि जब बाबा का बुलावा आता है तो कोई डर नहीं रहता। उनका कहना था कि उन्हें भारतीय सेना, केंद्रीय सुरक्षा बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस पर पूरा भरोसा है। श्रद्धालुओं ने कहा कि सुरक्षा के इतने मजबूत इंतजाम हैं कि उन्हें किसी तरह का भय महसूस नहीं हो रहा।
इस बार अमरनाथ यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। यात्रा मार्ग पर करीब 70 हजार अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना, बीएसएफ और सीआरपीएफ के जवान भी पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा में लगे हुए हैं।
श्रद्धालुओं के काफिले के साथ CRPF और कोबरा कमांडो लगातार मौजूद रहते हैं। जम्मू से श्रीनगर तक करीब 300 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग पर पूरे काफिले को सुरक्षा के साथ आगे बढ़ाया जाता है।
अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर विशेष ट्रैफिक व्यवस्था लागू की गई है। जब श्रद्धालुओं का काफिला हाईवे से गुजरता है, तब आम वाहनों की आवाजाही कुछ समय के लिए रोक दी जाती है। पूरे मार्ग पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी करती हैं, ताकि यात्रा बिना किसी परेशानी के आगे बढ़ सके। सड़क मार्ग के अलावा संवेदनशील इलाकों में ड्रोन, CCTV कैमरों और आधुनिक निगरानी उपकरणों की भी मदद ली जा रही है।
जम्मू से रवाना हुआ पहला जत्था गुरुवार शाम तक श्रीनगर पहुंचेगा। इसके बाद श्रद्धालुओं को बालटाल और पहलगाम बेस कैंप भेजा जाएगा। शुक्रवार सुबह श्रद्धालु दोनों मार्गों से बाबा अमरनाथ की पवित्र गुफा की ओर रवाना होंगे। यहां प्राकृतिक रूप से बने हिम शिवलिंग के दर्शन कर श्रद्धालु भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
बाबा अमरनाथ की यात्रा दो प्रमुख मार्गों से पूरी की जाती है। पहला मार्ग पहलगाम का है, जो अपेक्षाकृत लंबा लेकिन आसान माना जाता है। वहीं दूसरा मार्ग बालटाल का है, जो छोटा जरूर है, लेकिन चढ़ाई अधिक कठिन होती है।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा के दौरान जारी सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। मौसम की जानकारी पर नजर रखें, प्रशासन द्वारा तय समय का पालन करें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। यात्रा को सुरक्षित और सफल बनाने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं।
---------------------------------------
बृजभूषण शरण सिंह यौन उत्पीड़न मामले में फैसला 3 अगस्त को, दिल्ली अदालत ने सुरक्षित रखा निर्णय
नई दिल्ली. पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ छह महिला पहलवानों द्वारा दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. अदालत अब इस मामले में 3 अगस्त को फैसला सुनाएगी.
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने अभियोजन और बचाव पक्ष को दो सप्ताह के भीतर अपने लिखित तर्क प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया है.
बृजभूषण शरण सिंह पर भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने के उद्देश्य से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), धारा 354ए (यौन उत्पीड़न) तथा धारा 506(1) (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप तय किए गए हैं. वहीं, सह-आरोपी एवं डब्ल्यूएफआई के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर पर आपराधिक धमकी देने का आरोप है. इन धाराओं में अधिकतम पांच वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है.
यह मामला वर्ष 2023 में जंतर-मंतर पर कई प्रमुख महिला पहलवानों के लंबे आंदोलन के बाद सामने आया था. महिला खिलाड़ियों ने बृजभूषण शरण सिंह पर वर्षों तक कई महिला पहलवानों का यौन उत्पीड़न करने के आरोप लगाए थे और उनकी गिरफ्तारी व डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की थी.
आरोपों के बाद बृजभूषण शरण सिंह को भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद से हटाया गया, जबकि उनके करीबी सहयोगी विनोद तोमर को भी निलंबित कर दिया गया. केंद्रीय खेल मंत्रालय द्वारा जांच समिति गठित करने का आश्वासन मिलने पर आंदोलन कुछ समय के लिए स्थगित हुआ, लेकिन कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए पहलवानों ने अप्रैल 2023 में फिर प्रदर्शन शुरू कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 28 अप्रैल 2023 को दिल्ली पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की थीं. पहली एफआईआर छह वयस्क महिला पहलवानों की शिकायत पर दर्ज हुई, जबकि दूसरी एफआईआर एक नाबालिग पहलवान की शिकायत के आधार पर पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज की गई थी. दोनों एफआईआर में आरोप वर्ष 2012 से 2022 के बीच की घटनाओं से जुड़े बताए गए थे.
हालांकि, नाबालिग पहलवान द्वारा बाद में अपने आरोप वापस लेने और जांच में पर्याप्त पुष्ट साक्ष्य नहीं मिलने के आधार पर दिल्ली पुलिस ने पॉक्सो मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसे अदालत ने मई 2025 में स्वीकार कर लिया था.
दिल्ली पुलिस ने जून 2023 में बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करते हुए कहा था कि अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं. मई 2024 में अदालत ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए, जिन्हें उन्होंने अस्वीकार करते हुए मुकदमे का सामना करने का निर्णय लिया.
जुलाई 2024 से बंद कमरे (इन-कैमरा) में शुरू हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 32 गवाहों के बयान दर्ज कराए, जिनमें छह शिकायतकर्ता महिला पहलवानों के अलावा भारतीय कुश्ती महासंघ और भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) के अधिकारी भी शामिल थे.
अभियोजन पक्ष का कहना है कि सभी गवाहों के बयान शिकायतकर्ता महिला पहलवानों के आरोपों की पुष्टि करते हैं. वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपों को राजनीतिक और पद से हटाने की साजिश बताते हुए इन्हें निराधार करार दिया तथा गवाहों के बयानों में बदलाव का भी दावा किया. अब इस बहुचर्चित मामले में अदालत 3 अगस्त को अपना फैसला सुनाएगी.
शिवपुरी। शिवपुरी में नाग-नागिन का जोड़ा दिखने के बाद हड़कंप मच गया। लोग उस वक्त हैरान हो गए जब नाग ने नागिन को निगल लिया। यह देखते ही सभी में खौफ पैदा हो गए। मामला नरवर क्षेत्र स्थित निजी स्कूल का है।
स्कूल परिसर में नाग-नागिन का जोड़ा दिखने की सूचना मिलने पर नरवर निवासी सर्प मित्र सलमान पठान मौके पर पहुंचे।उन्होंने पूरे परिसर में तलाश किया तो केवल एक नाग दिखाई दिया। जैसे ही उन्होंने नाग को पकड़ने की कोशिश की तो उसने अचानक अपने मुंह से एक मृत नागिन को बाहर उगल दिया। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। सर्प मित्र के अनुसार, नाग की पहचान इंडियन कोबरा (स्पेक्टेकल्ड कोबरा) के रूप में हुई है। नाग का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे जंगल में छोड़ दिया गया है।
-----------------------------------------
6 मिलियन फॉलोअर्स वाले स्टार ने खोली सिस्टम की पोल, सस्पेंशन के बाद भी सड़क पर उतरा ये जांबाज
शहडोल। सोशल मीडिया पर करीब 60 लाख (6 मिलियन) फॉलोअर्स रखने वाले शहडोल के मशहूर पूर्व ट्रैफिक हेड कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पुलिस विभाग से निलंबन और उसके बाद अपने इस्तीफे के बावजूद, सड़क सुरक्षा के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ है। अब वे बिना वर्दी के स्वतंत्र रूप से ट्रैफिक जागरूकता वीडियो बना रहे हैं।
विवेकानंद तिवारी का एक नया वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने महज एक मिनट में यातायात नियमों की अनदेखी की 20 से ज्यादा गंभीर लापरवाहियां दिखाईं। मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना, रॉन्ग साइड ड्राइविंग, बिना हेलमेट सफर, तीन सवारी और नाबालिग द्वारा बाइक चलाने जैसी तस्वीरों को कैमरे में कैद कर उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों की ओर इशारा किया। यातायात विभाग की खामियों को भी आईना दिखा रहे हैं। उनका एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
हाल ही में विवेकानंद तिवारी ने शहडोल जिले के बुढार थाना क्षेत्र स्थित लोहिया चौक से एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में उन्होंने महज एक मिनट के अंदर यातायात नियमों की अनदेखी की 20 बड़ी गलतियां गिना दीं। अपने वीडियो में उन्होंने दिखाया कि लोग किस कदर अपनी जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
बुढार थाना क्षेत्र के लोहिया चौक में बनाए गए इस वीडियो में विवेकानंद तिवारी ने सड़क पर चल रहे वाहनों और लोगों की लापरवाही को कैमरे में कैद किया। वीडियो में एक बाइक चालक मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाता दिखाई देता है। वहीं कई लोग रॉन्ग साइड से गुजरते नजर आते हैं। एक बाइक पर तीन सवारी बैठी दिखाई देती हैं।
जबकि एक नाबालिग तेज रफ्तार से बाइक चलाता नजर आता है। इसके अलावा कई दोपहिया चालक बिना हेलमेट के वाहन चलाते दिखे। इन सभी उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने कहा कि यही सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह है और इसे उन्होंने भारत की असली ट्रैफिक तस्वीर बताया।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने विवेकानंद तिवारी को लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और सेवा नियमों के उल्लंघन के आरोप में निलंबित किया था। विभागीय जांच में यह भी सामने आया था कि अनुपस्थिति के दौरान वह सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो और रील्स साझा कर रहे थे। पुलिस रेग्यूलेशन-64 के तहत इसे सेवा की सामान्य शर्तों के उल्लंघन की श्रेणी में माना गया था।
निलंबन के बाद विवेकानंद तिवारी ने सोशल मीडिया पर अपनी सफाई देते हुए मेडिकल दस्तावेज, डॉक्टर की पर्चियां और उपचार संबंधी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए थे। उनका कहना था कि उन्होंने 19 मई 2026 को अपनी खराब तबीयत की सूचना मोबाइल के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को दे दी थी और मेडिकल पर्ची भी व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की थी। बाद में उन्होंने यह कहते हुए स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया कि निलंबन से उनकी छवि प्रभावित हुई है।
अब विभाग से अलग होने के बावजूद विवेकानंद तिवारी पहले से अधिक सक्रिय होकर सड़क सुरक्षा अभियान चला रहे हैं। वह लोगों को हेलमेट वितरित करने के साथ-साथ वीडियो के माध्यम से यातायात व्यवस्था की कमियां भी उजागर कर रहे हैं। उनका यह नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और सड़क सुरक्षा को लेकर एक नई बहस भी छेड़ रहा है।
-------------------------------------------
जेल भेजे गए 3 संदिग्ध आतंकी; पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर रच रहे थे ‘टारगेट किलिंग’ की साजिश
भोपाल। मध्य प्रदेश ATS द्वारा आतंकी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किए गए तीन संदिग्धों को कोर्ट ने 14 जुलाई तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मंगलवार को एटीएस ने भोपाल निवासी फराज, उत्तर प्रदेश के देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला और बिहार के इजहारुल हक को विशेष न्यायाधीश डॉ. मुकेश मलिक की अदालत में पेश किया था।
सुनवाई के दौरान एटीएस ने आरोपियों की आगे की पुलिस रिमांड नहीं मांगी। एटीएस ने अदालत को दलील दी कि आरोपियों के पास से बरामद इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच अभी चल रही है। आशंका है कि जेल से बाहर रहने पर ये साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं। इस पर कोर्ट ने तीनों को 14 जुलाई तक जेल भेजने के आदेश दिए।
जांच में इस आतंकी नेटवर्क को लेकर बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरोपी इजहारुल हक सोशल मीडिया के जरिए सीधे एक पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में था। प्रारंभिक पूछताछ और तफ्तीश में सामने आया है कि पाकिस्तानी हैंडलर उसे देश में ‘टारगेट किलिंग’ के एजेंडे को आगे बढ़ाने के निर्देश दे रहा था। फिलहाल एटीएस जब्त इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
इंदौर। बहुचर्चित शिवानी हत्याकांड में करीब साढ़े छह वर्ष बाद अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पति अमितेश उर्फ शालू पटेरिया को पत्नी की सुनियोजित हत्या का दोषी ठहराया है। 28वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हेमंत कुमार रघुवंशी की अदालत ने आरोपी को हत्या के मामले में आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा साक्ष्य मिटाने और कोबरा सांप की हत्या करने के मामले में भी अलग-अलग सजा और अर्थदंड लगाया गया है। अदालत ने अपने फैसले में माना कि आरोपी ने हत्या को सर्पदंश से हुई प्राकृतिक मौत साबित करने के लिए पूरी साजिश रची थी, लेकिन वैज्ञानिक जांच और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने उसकी पूरी योजना का पर्दाफाश कर दिया।
अभियोजन के अनुसार, 1 दिसंबर 2019 को कनाड़िया रोड स्थित संचार नगर एक्सटेंशन स्थित मकान में अमितेश उर्फ शालू पटेरिया ने अपने साथियों के साथ मिलकर पत्नी शिवानी की तकिये से मुंह दबाकर हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी ने घटना को हादसा दिखाने के उद्देश्य से एक जिंदा कोबरा सांप लाकर शव को उससे कटवाया, ताकि पोस्टमार्टम में मौत का कारण सर्पदंश माना जाए और वह कानून की गिरफ्त से बच सके। इतना ही नहीं, घटना में इस्तेमाल किए गए कोबरा सांप को भी बाद में मार दिया गया, जिससे पूरी साजिश के सबूत मिटाए जा सकें।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल जांच और अन्य परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर हत्या की गुत्थी सुलझाई। जांच में यह भी सामने आया कि विवाह के बाद से ही शिवानी को दहेज और रुपयों की मांग को लेकर लगातार प्रताड़ित किया जाता था। अभियोजन ने अदालत में यह साबित किया कि आरोपी ने पहले पत्नी की हत्या की और फिर सर्पदंश का नाटक रचकर हत्या को प्राकृतिक मौत साबित करने का प्रयास किया।
सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की हत्या संबंधी धाराओं के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने हत्या के अपराध में आजीवन सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड, साक्ष्य मिटाने के अपराध में दो वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजाति कोबरा (नाजा-नाजा) की हत्या करने पर तीन वर्ष का सश्रम कारावास एवं 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
----------------------------------
जिंदा महिला को कागजों में ‘मृत’ दिखाकर 100 करोड़ की जमीन हड़पने का खेल! 13 नामजद समेत अन्य पर केस , मृत्यु प्रमाण पत्र की भी होगी जांच
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में जमीन हड़पने का ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने राजस्व व्यवस्था और जमीन की खरीद-फरोख्त पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक जिंदा महिला को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर उसकी करोड़ों रुपये की जमीन का नामांतरण करा दिया गया। इसके बाद कथित तौर पर जमीन को बेच भी दिया गया। इस पूरे मामले में महिला ने अपने ससुराल पक्ष के कई लोगों सहित राजेंद्र नगर थाने में 13 नामजद आरोपियों और अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जिस जमीन को लेकर विवाद है, उसकी बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। वहीं पुलिस इस पूरे मामले में उज्जैन के भूमाफियाओं से संभावित कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही हैं।
एफआईआर के मुताबिक फरियादी द्रोपदीबाई ने पुलिस को बताया कि वह मूल रूप से ग्राम बीजलपुर मुंडी रोड की रहने वाली हैं और वर्तमान में अपनी बेटी के साथ कनाड़िया क्षेत्र में रह रही हैं। उनके पति स्वर्गीय रणछोड़दास के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में सर्वे नंबर 567, रकबा 5.647 हेक्टेयर जमीन दर्ज थी। पति के निधन के बाद नियमानुसार जमीन उनके नाम दर्ज हो गई थी, लेकिन इसी दौरान कथित रूप से ससुराल पक्ष के लोगों ने विश्वास में लेकर कई दस्तावेजों पर उनके अंगूठे लगवा लिए। महिला का आरोप है कि उन्हें बताया गया था कि यह प्रक्रिया जमीन के रिकॉर्ड और राजस्व संबंधी औपचारिकताओं के लिए है, लेकिन बाद में इन्हीं दस्तावेजों का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया।
शिकायत में महिला ने यह भी आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष ने गांव का मकान भी बेच दिया और बिक्री की रकम उन्हें नहीं दी। कुछ समय तक साथ रखने के बाद छोटी-छोटी बातों पर विवाद, गाली-गलौज और मारपीट की गई। आखिरकार उन्हें घर से निकाल दिया गया। इसके बाद उनकी बेटी सुनीता उन्हें अपने साथ लेकर रहने लगी।
मामले का खुलासा तब हुआ जब बेटी सुनीता ने जमीन के रिकॉर्ड निकलवाए। दस्तावेज देखने पर पता चला कि राजस्व रिकॉर्ड से महिला का नाम हट चुका है और जमीन का नामांतरण अन्य लोगों के नाम कर दिया गया है। इसके बाद नामांतरण के खिलाफ एसडीएम न्यायालय में अपील दायर की गई। शिकायत के अनुसार एसडीएम के समक्ष चली कार्यवाही में यह जानकारी सामने आई कि रिकॉर्ड में महिला को मृत दर्शाया गया था। इसी आधार पर आगे की राजस्व कार्रवाई की गई। महिला का कहना है कि वह जीवित हैं, लेकिन उन्हें मृत दिखाकर उनकी संपत्ति पर कब्जा करने की साजिश रची गई।
एफआईआर में गंभीर आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने मिलकर महिला का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया। इसी कथित फर्जी दस्तावेज के आधार पर जमीन का नामांतरण कराया गया और बाद में करोड़ों रुपये की जमीन का सौदा कर दिया गया। फरियादी का कहना है कि उन्हें पूरे घटनाक्रम की कोई जानकारी नहीं थी और उनकी सहमति भी नहीं ली गई।
जानकारी के अनुसार विवादित जमीन तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में स्थित है। रियल एस्टेट कारोबारियों के मुताबिक इस जमीन की वर्तमान बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। इसी वजह से इस मामले को जमीन से जुड़े बड़े फर्जीवाड़े के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस अब जमीन के नामांतरण, बिक्री और उससे जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच कर रही है।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर कैलाश चौधरी, शंकर चौधरी, जगदीश चौधरी, प्रकाश चौधरी, विष्णु चौधरी, शांतिलाल चौधरी, राजन चौधरी, सदन चौधरी, पवित्रा चौधरी, पार्वती चौधरी, लखन चौधरी, मनोज चौधरी, रामू नागदावाला सहित अन्य लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। आरोप है कि सभी ने मिलकर कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार किए, महिला को मृत दर्शाया, नामांतरण कराया और जमीन बेच दी।
यह मामला केवल एक परिवार के संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसमें राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण प्रक्रिया, कथित फर्जी दस्तावेज और करोड़ों रुपये की जमीन के सौदे जैसे कई गंभीर पहलू जुड़े हुए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र किसने तैयार किया, नामांतरण की प्रक्रिया किन दस्तावेजों के आधार पर पूरी हुई और जमीन आखिर किन लोगों को बेची गई। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह इंदौर के सबसे बड़े भूमि फर्जीवाड़ों में शामिल हो सकता है और इसमें कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
-------------------------------------
PCC चीफ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी: कोर्ट ने पुलिस को फटकारा- ‘नेताजी हर जगह घूम रहे बस आपको नहीं दिखते’
ग्वालियर। मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। ग्वालियर की विशेष MP-MLA कोर्ट ने जीतू पटवारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। यह कार्रवाई लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान दिए गए एक विवादित बयान और कोर्ट के नोटिस की लगातार नाफरमानी करने पर की गई है। इस मामले में अदालत ने भिंड पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए सख्त टिप्पणी भी की है।”
यह पूरा विवाद लोकसभा चुनाव 2024 के समय का है। 27 अप्रैल 2024 को जीतू पटवारी भिंड के ऊमरी कस्बे में कांग्रेस प्रत्याशी फूल सिंह बरैया के समर्थन में एक चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे थे। इस सभा में उन्होंने बसपा प्रत्याशी देवाशीष जरारिया पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने भाजपा से सांठगांठ कर ली है। पटवारी ने मंच से कहा था कि बसपा प्रत्याशी BJP से माल लाए हैं।
इस बयान से नाराज होकर देवाशीष जरारिया ने 4 मई 2024 को भिंड के ऊमरी थाने में जीतू पटवारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा।
अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए इसी साल 16 जनवरी 2026 को जीतू पटवारी को कोर्ट में पेश होने का नोटिस जारी किया था, लेकिन वे अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। कोर्ट ने इसे अवहेलना बताया और अब विशेष न्यायाधीश ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को तय की गई है और कोर्ट ने पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि अगली तारीख पर जीतू पटवारी को हर हाल में कोर्ट में उपस्थित कराया जाए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वारंट तामील न करा पाने को लेकर भिंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर बेहद तीखी और गंभीर टिप्पणी की। माननीय कोर्ट ने कहा कि जीतू पटवारी हर जगह दिखाई दे रहे हैं, बस पुलिस को ही नजर नहीं आ रहे हैं। कोर्ट की इस तल्ख टिप्पणी के बाद अब पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया है।
- राम मंदिर चढ़ावा विवाद: ‘बृजभूषण भी नाम लेने से डर रहे’, आखिर किन बड़े नामों का है डर? केजरीवाल का बड़ा दावा
- अजब फरमान : लिव-इन में रह रहे युवक-युवती के घर वालों पर 21 लाख रुपए का फाइन!
- आठ मौतों के पीछे अंधविश्वास या कोई गहरी साजिश: शराब पार्टी के बाद क्या हुआ?
- ‘अगर मैं मुस्लिम होता तो जेल में बंद होता…,’ उमर खालिद का नाम लेकर अभिजीत दिपके ने दिया विवादित बयान, मचा बवाल
- स्कूल में बच्चे पढ़ रहे ‘निंबूड़ा-निंबूड़ा’! किताब में छपा पूरा बॉलीवुड सॉन्ग, चार वरिष्ठ अधिकारियों निलंबित
- मुहर्रम जुलूस के दौरान लोगों को जहर देने की साजिश नाकाम, मुंबई में 14,900 जहरीली कैप्सूल के साथ एक आरोपी गिरफ्तार
- राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में प्रियंका गांधी बोलीं – ‘क्या छोटे कर्मचारी अकेले कर सकते हैं इतनी बड़ी हेराफेरी?’
- कौशांबी : LPG टैंकर ब्लास्ट में ड्राइवर जिंदा जला, 16 बाइकें और 2 कारें जलकर खाक
प्रमुख समाचार
03 July 2026
अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा (दान) चोरी के मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस बीच आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का जिक्र करते हुए कई सवाल उठाए हैं। केजरीवाल ने कहा कि मामले में “बड़े नामों” के शामिल होने की बात सामने आ रही है और यह भी दावा किया कि कुछ लोग खुलकर नाम लेने से बच रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे... मध्य प्रदेश
03 July 2026
मंदसौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। गाड़ी में पेट्रोल डलवाने के दौरान आरोपी और उसका सहयोगी पुलिसकर्मियों की ही गाड़ी लेकर फरार हो गया। पूरी घटना पेट्रोल पंप पर लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई है।दरअसल, पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में 2 युवकों को सागर से गिरफ्तार किया था। जिसके बाद उन्हें हरियाणा ले जाया जा रहा था। इस दौरान दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस से मंदसौर के गरोठ में पेट्रोल डलवाने के लिए हरियाणा पुलिस रुकी थी। इसी... अपराध
उज्जैन। बताया जा रहा है कि महिला अपने नए ससुराल की जमीन में हिस्सेदारी की मांग को लेकर गांव पहुंची थी, जिसके बाद विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। पुलिस ने 11 नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि आठ अन्य आरोपी फरार हैं। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।उज्जैन से 75 किलोमीटर दूर महिदपुर तहसील के झारड़ा... गुना सिटी
भाजपा राज' में पठार मोहल्ला के नलों से आ रहा गंदा पानी, प्रशासन बेपरवाह, केंद्रीय मंत्री श्री सिंधिया को शिकायत के बाद भी 'जीरो रिजल्ट' (एल.एन भडेरिया) गुना। गुना जिले के वार्ड क्रमांक 11 पठार मोहल्ला में दूषित पानी की समस्या अब 'हद' पार कर चुकी है। आज शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 की सुबह करीब 7 बजे नलों से मिट्टी जैसा लाल और गंदा पानी निकला। हालात यह हैं कि इस पानी को देखकर चाय-कॉफी का भ्रम हो जाए। लेकिन यह किसी चाय की केतली नहीं, बल्कि नगर पालिका के जल प्रकोष्ठ की सप्लाई का पानी है, जो लोगों के घरों में पहुंच रहा है।स्थानीय लोगों के अनुसार... फोटो गैलरी
सड़कों पर लगाए गेट, 4 कॉलोनियों का रास्ता...
फरार बदमाशों में से 1 का हरिद्वार में...
चौकीदारी कर रहा हत्यारा राजस्थान से पकड़ाया ...
एससी-एसटी एक्ट के विरोध में मुंडन आज
पेट्रोल-डीजल: केंद्र ने साधे एक तीर से कई...
आपके शहर में पेट्रोल-डीजल कितना सस्ता
इस मोर्चे पर एयरटेल से आगे निकली जियो...
बैंकिंग रेग्युलेशन ऐक्ट है कोचर के इस्तीफे की...
पेट्रोल सरकारी खजाने-तेल कंपनियों पर असर
आपकी दवा असली है या नकली, ऐसे करें...
पत्नी की हत्या के आरोप में जेल में...
चीन के खाने पर जी रहे हैं उत्तराखंड...


