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उज्जैन। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन एक बार फिर शर्मसार हुई है। यहां एक महामंडलेश्वर द्वारा शादी का झांसा देकर महिला के साथ दुष्कर्म किया गया है। महिला के आवेदन पर थाना महाकाल पुलिस ने जांच उपरांत आरोपी महामंडलेश्वर के खिलाफ दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी का मामला दर्ज किया है। हालांकि आरोपी अभी फरार है।
दरअसल पूरा मामला उज्जैन के सदावल मार्ग पर स्थित दादू राम आश्रम का है। आश्रम के संचालक निर्मोही अणि अखाड़े के महामंडलेश्वर ज्ञान दास महाराज पर दुष्कर्म के आरोप लगे हैं। एडिशनल एसपी आलोक शर्मा ने बताया कि फरियादी महिला सांस्कृतिक ग्रुप से जुड़ी हुई है। सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान ही महाराज से संपर्क हुआ। महाराज ने महिला को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी व व्हाट्सएप पर चैटिंग की। महिला का दादूराम आश्रम में लगभग एक वर्ष तक आना जाना लगा रहा।
बीएनएस की धारा 351(3) व 69 में केस दर्ज
इस दौरान महामंडलेश्वर ने महिला को शादी का झांसा दिया और लगातार दुष्कर्म करता रहा। जब शादी करने से इनकार किया तो महिला ने थाना महाकाल पुलिस में आवेदन दिया और घटना से संबंधित साक्ष्य दिए। जिसमें ऑडियो रिकॉर्डिंग व वाट्सएप चैटिंग थी। मामले में पुलिस ने आरंभिक जांच के बाद महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज के खिलाफ बीएनएस की धारा 351(3) व 69 में केस दर्ज कर लिया है । मामला दर्ज होने के बाद आरोपी फरार है।

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बड़ी मुश्किल है मौत की डगर : मुक्तिधाम पहुंचने से पहले दलदली सड़क से होता है सामना
कटनी । मध्य प्रदेश के कटनी जिले की ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत में लोगों को मौत के बाद भी सुकून नहीं नसीब हो रहा है। अंतिम संस्कार के लिए चिता लेकर जा रहे ग्रामीणों को दलदल भरी सड़क से होकर गुजरना पड़ता है। ग्राम पंचायत बरहटा के आश्रित ग्राम पड़रिया में शुक्रवार रात दो बुजुर्गों की मौत हो गई। 80 वर्षीय मलकिया बाई बर्मन और 82 वर्षीय अर्जुन कोल की मौत के बाद सुबह अंतिम संस्कार के लिए रिश्तेदार और ग्रामीण शामिल हुए।
मुक्तिधाम पहुंचने के लिए पक्की सड़क न होने के कारण दलदल भरी सड़क से कंधे में अर्थी लिए सभी को परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने बताया कि बीते कई सालों से शासन प्रशासन से गांव में पक्की सड़क निर्माण की मांग की जा रही है। पक्की सड़क तो छोड़िए, सड़कों के गड्ढों में भी सुधार नहीं हो पाया।
ग्रामीणों ने कलेक्टर आशीष तिवारी से जल्द से जल्द समस्या निराकरण करने की मांग की है। इस संबंध में ग्राम पंचायत सचिव सैयद अहमद अली से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि कुंसरी गांव से पड़रिया गांव तक की सड़क कच्ची है। मुक्तिधाम पहुंचने के लिए भी कच्ची सड़क से ही ग्रामीणों को जाना करना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क परियोजना के द्वारा सड़क निर्माण का सर्वे किया गया है और आश्वासन दिया गया था कि जल्द से जल्द निर्माण कार्य कराया जाएगा लेकिन निर्माण कार्य नहीं हो पाया।
इस संबंध में जनपद सीईओ यजुर्वेद कोरी से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क परियोजना के तहत सड़क निर्माण के संबंध में सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। विभाग से जानकारी ली जाएगी कि अभी तक निर्माण क्यों चालू नहीं किया गया और बारिश के मौसम में व्यवस्था बनाने को लेकर भी पत्र व्यवहार किए जाएंगे।
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‘सुरक्षा की गारंटी दो, आज ही आश्रम आ जाऊंगी’, आलोचनाओं पर साध्वी हर्षानंद का जवाब, बोलीं- हर बात पर आपत्ति करना संतों का धर्म नहीं
उज्जैन। गुरु पूर्णिमा पर उज्जैन में दिए गए अपने बयान को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच साध्वी हर्षानंद गिरि (हर्षा रिछारिया) ने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा है । उन्होंने कहा कि संन्यास लेने के बाद माता-पिता के साथ रहने पर कुछ संत सवाल उठा रहे हैं, लेकिन जब तक उनका अपना आश्रम नहीं बन जाता, तब तक उनके पास रहने के लिए दो ही स्थान हैं – गुरु का आश्रम और माता-पिता का घर।
वीडियो में साध्वी हर्षानंद ने कहा कि वह माता-पिता के घर इसलिए रहती हैं क्योंकि वहां खुद को सबसे अधिक सुरक्षित महसूस करती हैं । उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा की स्थिति किसी से छिपी नहीं है । ऐसे में यदि कोई संत सार्वजनिक रूप से यह जिम्मेदारी ले कि उनके रहते उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा, तो वह अपना सामान लेकर उसी आश्रम में रहने चली जाएंगी ।
उन्होंने कहा कि जिस दिन उनका अपना आश्रम बन जाएगा, उस दिन वह पूरी तरह आश्रम में रहकर संन्यासी जीवन का पालन करेंगी । फिलहाल स्थायी आश्रम नहीं होने के कारण माता-पिता के साथ रहना ही उनके लिए सबसे उचित और सुरक्षित विकल्प है।
वीडियो में उन्होंने कुछ संतों पर नाराजगी भी जताई । उन्होंने कहा कि उनकी हर बात पर आपत्ति जताई जाती है, जबकि संतों का स्वभाव प्रेम, धैर्य और सहनशीलता का होना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि यदि उनके रहने, पहनने, खाने या मिलने-जुलने से कुछ लोगों को हर बार परेशानी होती है, तो यह संतों के आचरण के अनुरूप नहीं है ।
गौरतलब है कि गुरु पूर्णिमा पर उज्जैन में मीडिया से बातचीत के दौरान साध्वी हर्षानंद ने महिलाओं की सुरक्षा और आश्रमों में रहने को लेकर बयान दिया था, जिसके बाद उनके बयान पर चर्चा शुरू हो गई थी। अब उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपने बयान का विस्तृत स्पष्टीकरण दिया है।

पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के टिकुरिया मोहल्ला स्थित एक मदरसे में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोप है कि मदरसे के मौलाना ने पहले छात्रा को कमरे में बंद किया और फिर उसके साथ गलत हरकत करने का प्रयास किया।
इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि मौलाना ने अपनी करतूत छिपाने के लिए मदरसे में लगे सीसीटीवी कैमरों की वायर भी काट दी, ताकि घटना रिकॉर्ड न हो सके। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मौलाना, जो सागर जिले का निवासी बताया जा रहा है, उसको गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने पॉक्सो (POCSO) एक्ट सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
एडिशनल एसपी वंदना सिंह चौहान ने बताया कि पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस जांच उपरांत ही मामला स्पष्ठ हो पायेगा।
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‘शिक्षा मंत्री’ के कार्यक्रम में स्वागत गेट पर उल्टा छपा राष्ट्रध्वज, तिरंगे के ऊपर लगाया भाजपा का झंडा
नर्मदापुरम। 15 अगस्त आने में चंद दिन बचे हैं। उस दिन सभी तिरंगा फहराकर अपने राष्ट्र के प्रति गौरव महसूस करेगा। लेकिन उससे पहले मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में शिक्षा मंत्री के स्वागत में जनप्रतिनिधि और कर्मचारी इतने मशगूल हुए कि उन्हें राष्ट्रध्वज की मर्यादा का जरा भी एहसास नहीं रहा। मंत्री के कार्यक्रम के दौरान बनाए स्वागत गेट पर न सिर्फ राष्ट्रध्वज उल्टा छाप दिया बल्कि तिरंगे के ऊपर भाजपा का झंडा लगा दिया। इस मामले के उजागर होने के बाद कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगने शुरू हो गए हैं।
दरअसल, पूरी घटना बनखेड़ी के निभोरा पंचायत क्षेत्र की है जहां पुलिया उद्घाटन के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर परिवहन और शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान जो स्वागत गेट बनाया गया था उसमें एक तरफ का तिरंगा उल्टा छाप दिया गया था। इतना ही नहीं, तिरंगे के ऊपर बीजेपी का झंडा भी लहराने लगा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर होने लगा और इसकी चर्चा हर तरफ होने लगी। टीवीऔर वीडियो डिवाइस
सवाल उठने लगे कि क्या पार्टी देश से बड़ी हो गई ? ​पुल का लोकार्पण तो हुआ, लेकिन स्वागत द्वार पर देश के आन-बान-शान की मर्यादा को ताक पर रखा गया। ​परिवहन और शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के कार्यक्रम में इतनी बड़ी चूक होने के बाद क्या निभौरा पंचायत और ठेकेदार पर एफआईआर होगी? ​ग्रामीणों को पुल की सौगात तो मिली लेकिन राष्ट्रध्वज के अपमान ने खुशियों पर लापरवाही का दाग लगा दिया।
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53 करोड़ का कलश और धर्म पर सवाल! ‘आयोजन सेवा के लिए हो, रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं’- आचार्य सुनील सागर महाराज
इंदौर। 16 करोड़…से लेकर 53 करोड़… और अब सवाल करोड़ों की उस बोली पर, जिसने बहस छेड़ दी है। आखिर क्या धर्म में करोड़ों की बोलियां लगाने की परंपरा है? क्या मंगल कलश जैन धर्म का अनिवार्य हिस्सा है? और धर्म के नाम पर आने वाले करोड़ों रुपये कहां खर्च होते हैं? इन सवालों पर पहली बार जैन समाज के वरिष्ठ धर्मगुरु आचार्य सुनील सागर महाराज ने खुलकर बातचीत की। आचार्य सुनील सागर महाराज ने साफ कहा कि जैन धर्म के मूल सिद्धांतों में कहीं भी मंगल कलश स्थापना का उल्लेख नहीं मिलता। यह परंपरा धर्म की नहीं बल्कि समय के साथ बड़े धार्मिक आयोजनों की व्यवस्था के लिए शुरू हुई।
सूत्रों के अनुसार चतुर्मास आयोजन में कलश स्थापना के लिए एक के बाद एक बोलियां लगती गईं। सबसे बड़ी बोली सपना मनीष गोधा और नवीन आनंद गोधा की ओर से 16 करोड़ 16 लाख रुपये की रही। इसके अलावा अन्य कलशों के लिए भी 5 करोड़, 3 करोड़ 55 लाख, 3 करोड़ 33 लाख और 2 करोड़ से अधिक की बोलियां लगीं। कुल मिलाकर यह आंकड़ा लगभग 53 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
आचार्य सुनील सागर महाराज ने बताया कि करीब 50 से 70 वर्ष पहले जब बड़े-बड़े धार्मिक आयोजन होने लगे, तब उनके खर्च की व्यवस्था के लिए समाज ने मंगल कलश की परंपरा शुरू की। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार राशि देते थे ताकि भोजन, प्रवचन, साधु-संतों की व्यवस्था और अन्य धार्मिक कार्य सुचारु रूप से चल सकें।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में यह श्रद्धा और सहयोग का प्रतीक था लेकिन धीरे-धीरे इसकी बोली लगने लगी और अब यह करोड़ों तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि धर्म में कहीं नहीं लिखा कि मंगल कलश रखना अनिवार्य है। यह समय के साथ शुरू हुई व्यवस्था है, धर्म का मूल सिद्धांत नहीं।
आचार्य ने कहा कि पहले लाखों रुपये तक की राशि से धार्मिक आयोजन आराम से संपन्न हो जाते थे लेकिन अब करोड़ों की बोलियां लग रही हैं। उन्होंने माना कि आज इसका स्वरूप इतना बड़ा हो गया है कि इसे संभालना भी आसान नहीं रह गया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी राशि देखकर स्वाभाविक रूप से लोगों के मन में सवाल उठते हैं कि आखिर इतना पैसा कहां से आता है और उसका उपयोग किस तरह होता है।
आचार्य सुनील सागर महाराज ने धार्मिक संस्थाओं में आर्थिक पारदर्शिता की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु विश्वास और आस्था के साथ दान देते हैं, इसलिए यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उस धन का उपयोग किन कार्यों में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर करोड़ों रुपये किसी धार्मिक आयोजन में आ रहे हैं तो उसके उद्देश्य और उपयोग की जानकारी समाज के सामने भी होनी चाहिए। धर्म के नाम पर लोग पैसा देते हैं तो उसका सदुपयोग होना चाहिए। ऐसे मामलों में निगरानी भी जरूरी है और उद्देश्य भी स्पष्ट होना चाहिए।
आचार्य सुनील सागर महाराज ने कहा कि धार्मिक आयोजनों में सेवा और साधना से ज्यादा अब दिखावे की चर्चा होने लगी है। उनका कहना था कि धर्म का केंद्र त्याग, तप, संयम और आत्मकल्याण होना चाहिए, न कि करोड़ों की बोलियां और रिकॉर्ड। उन्होंने कहा कि अगर धार्मिक आयोजन समाज, शिक्षा, गौशालाओं, गरीबों के भोजन, चिकित्सा और जनकल्याण के लिए काम करें तो उसका वास्तविक लाभ समाज को मिलेगा।
आचार्य ने कहा कि यदि करोड़ों रुपये का उपयोग मेडिकल कॉलेज, शिक्षा, अस्पताल, गौशालाओं या अन्य सामाजिक कार्यों में हो रहा है तो यह अच्छी बात है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें संबंधित आयोजन की पूरी जानकारी नहीं है इसलिए वे उसके उपयोग पर अंतिम टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने केवल इतना कहा कि समाज को यह भरोसा मिलना चाहिए कि धर्म के नाम पर आया पैसा समाज के हित में खर्च हो रहा है
आचार्य सुनील सागर महाराज ने कहा कि जब किसी धार्मिक आयोजन में करोड़ों रुपये की चर्चा होती है तो लोगों का सवाल पूछना भी स्वाभाविक है। इसलिए धार्मिक संस्थाओं को खुद आगे आकर पारदर्शिता दिखानी चाहिए ताकि किसी तरह का भ्रम या विवाद पैदा न हो।
बातचीत के अंत में आचार्य ने कहा कि धर्म का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा, प्रतिष्ठा या रिकॉर्ड बनाना नहीं है। धर्म का उद्देश्य समाज को जोड़ना, सेवा करना और आत्मशुद्धि का मार्ग दिखाना है। यदि धार्मिक परंपराएं इन मूल्यों को मजबूत करती हैं तो उनका स्वागत होना चाहिए लेकिन यदि चर्चा केवल करोड़ों की बोलियों तक सीमित रह जाए तो धर्म का मूल संदेश पीछे छूट सकता है। 53 करोड़ के मंगल कलश को लेकर उठे सवालों के बीच जैन धर्मगुरु का यह बयान अब एक नई बहस को जन्म दे रहा है। सवाल सिर्फ रिकॉर्ड बोली का नहीं, बल्कि उस आस्था, पारदर्शिता और धर्म के वास्तविक स्वरूप का है, जिस पर करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास टिका हुआ है।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में शनिवार एक संदिग्ध दस्तावेज मिलने के बाद हड़कंप मच गया। कॉलेज के एक्स-रे विभाग की एक दराज से ऐसा कागज बरामद हुआ, जिसमें कथित तौर पर विस्फोटक तैयार करने से जुड़ा एक लेआउट बना होने की आशंका जताई जा रही है। सूचना मिलते ही कॉलेज प्रशासन ने पुलिस को बुलाया, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी। फिलहाल पुलिस ने पूछताछ के लिए तीन छात्रों को हिरासत में लिया है।
जानकारी के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब 8 बजे एक्स-रे विभाग के प्रभारी अपनी नियमित ड्यूटी पर पहुंचे। विभाग की एक दराज खोलने पर उन्हें एक संदिग्ध कागज मिला। प्रारंभिक तौर पर उस पर कथित रूप से विस्फोटक तैयार करने से जुड़ा लेआउट बना दिखाई दिया। विभागाध्यक्ष ने तुरंत इसकी जानकारी मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. अरविंद सिंह को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने बिना देरी किए स्थानीय पुलिस को सूचना दे दी।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि शुक्रवार रात एक्स-रे विभाग में फर्स्ट ईयर का एक छात्र ड्यूटी पर मौजूद था। पुलिस के अनुसार, छात्र की पहचान सरफराज, निवासी बलरामपुर (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि ड्यूटी के समय दो अन्य लोग भी उसके साथ मौजूद थे। इसके बाद पुलिस ने सरफराज के अलावा अभिषेक और संतोष नामक दो अन्य युवकों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी।
पुलिस ने संदिग्ध दस्तावेज को कब्जे में लेकर उसकी जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि दस्तावेज किसने तैयार किया, उसका उद्देश्य क्या था और क्या इसके पीछे कोई गंभीर साजिश थी या फिर किसी ने शरारत अथवा माहौल बिगाड़ने की नीयत से ऐसा किया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि हिरासत में लिए गए तीनों लोगों की इस मामले में क्या भूमिका रही।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए CMS डॉ. अरविंद सिंह ने कहा कि जैसे ही संदिग्ध पर्चे की जानकारी मिली, पुलिस को तत्काल सूचित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि कॉलेज प्रशासन जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रहा है और आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।
घटना के बाद मेडिकल कॉलेज परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी गई है। पुलिस और अन्य एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं। फिलहाल अधिकारियों ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होने का इंतजार करने की बात कही है।
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असम में 82 लोगों की मौत, गुजरात-महाराष्ट्र में कई इलाके डूबे, जम्मू-कश्मीर-हिमाचल में हर तरफ तबाही का मंजर
भारत में इस वक्त मानसून अपने चरम सीमा है। इसके कारण पूरे देश में भारी बारिश हो रही है। भारी बारिश के कारण कई राज्यों में बाढ़ के कारण व्यापक क्षति हुई है। देश के पूर्वोत्तर राज्य असम से लेकर पश्चिमी राज्य गुजरात-महाराष्ट्र तक हर तरफ सिर्फ तबाही ही तबाही दिख रही है। अकेले असम में 82 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि पहाड़ी राज्यों (जम्मू-कश्मीर-हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) में बादल फटने से बाढ़ और लैंडस्लाइड के कारण हर तरफ तबाही दिख रहा है।
वहीं दूसरी तरफ भारतीय मौसम विभाग यानी आईएमडी (IMD) ने पूर्वी राजस्थान, मध्य महाराष्ट्र, कोंकण-गोवा, कर्नाटक और केरल के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और बिहार समेत 13 राज्यों में यलो अलर्ट जारी किया गया है।
जल प्रलय का सबसे ज्यादा असर असम में दिख रहा है, जहां अब तक 82 लोगों की मौत हो चुकी है। असम के पांच जिलों- शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव और चराइदेव में करीब दो लाख लोग बाढ़ की वजह से मुश्किलें झेल रहे हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, शुक्रवार को बाढ़ की वजह से दो और लोगों की जान गंवानी पड़ी. राहत की बात यह है कि कुदरती आपदा में फिलहाल कोई व्यक्ति लापता नहीं है। बाढ़ से प्रभावित पांच जिलों के 17 राजस्व क्षेत्रों और 379 गांवों में असर साफ दिख रहा है। करीब दो लाख की आबादी बाढ़ की चपेट में है। राज्य में 54 राहत शिविर बनाए गए हैं, 26 राहत वितरण केंद्र भी चलाए जा रहे हैं।
गुजरात में शुक्रवार को हुई भारी बारिश के कारण कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। सूरत में सबसे अधिक 24 इंच बारिश दर्ज की गई, जबकि 12 अन्य क्षेत्रों में 10 इंच से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं खेड़ा जिले में वसो का मुख्य बाजार हो या रिहाइशी इलाके, हर तरफ बस पानी ही पानी नजर आ रहा है. लोगों के घरों और दुकानों के भीतर तक पानी घुस चुका है।
महाराष्ट्र में लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में जनजीवन प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग (IMD) ने कई क्षेत्रों के लिए अलर्ट जारी किया है। पुणे जिले में इस वर्ष मानसून ने रिकॉर्ड तोड़ बारिश की है। 31 जुलाई तक जिले में सामान्य वर्षा के मुकाबले 179.9 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। जहां औसत वर्षा 309.3 मिमी होनी चाहिए थी, वहीं अब तक 556.3 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। नंदुरबार जिले के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए जिला प्रशासन ने जिले के सभी स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ी केंद्रों में एक दिन की छुट्टी घोषित कर दी है। उजनी बांध से 80 हजार क्यूसेक और वीर बांध से 43 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद भीमा और चंद्रभागा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है. पंढरपुर में पुंडलिक मंदिर सहित कई छोटे-बड़े मंदिर पानी से घिर गए हैं।
इधर, कश्मीर घाटी में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच ऊपरी इलाकों में बादल फटने (क्लाउडबर्स्ट) की घटनाएं हुई हैं। दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के कई गांव अचानक आई बाढ़ की चपेट में आ गए। । पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश दर्ज की गई, जबकि मौसम विभाग (MeT) ने अगले एक सप्ताह तक लगातार बारिश का पूर्वानुमान जारी करते हुए फ्लैश फ्लड, भूस्खलन और मडस्लाइड का बड़ा अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने आम लोगों, पर्यटकों, यात्रियों और ट्रांसपोर्टरों से मौसम को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है।
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एंटी-पेपर लीक कानून में बदलाव को राष्ट्रपति की मिली मंजूरी, अब तीन महीने के अंदर होगा पेपर माफियाओं का हिसाब
नई दिल्ली. देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के साथ ही यह कानून लागू हो गया है. नए प्रावधानों के तहत अब पेपर लीक के मामलों में त्वरित सुनवाई होगी और दोषियों को 10 वर्ष तक के कठोर कारावास तथा 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा.
केंद्र सरकार का कहना है कि संशोधित कानून का उद्देश्य केवल पेपर लीक करने वालों को सजा देना नहीं, बल्कि पूरे संगठित नेटवर्क को ध्वस्त करना है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यह कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित करेगा तथा युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त करेगा.
लोकसभा से तीखी बहस के बाद पारित हुए इस विधेयक में जांच और न्यायिक प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाया गया है. सरकार का दावा है कि इससे वर्षों तक लंबित रहने वाले मामलों पर रोक लगेगी और दोषियों को शीघ्र सजा मिल सकेगी.
नए कानून की प्रमुख बातें
हर राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन होगा, जहां पेपर लीक मामलों की रोजाना सुनवाई होगी.
90 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा कर फैसला सुनाने का प्रावधान.
दोषियों को अब 5 से 10 वर्ष तक की सजा, जबकि पहले 3 से 5 वर्ष की सजा का प्रावधान था.
जुर्माने की राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी गई है.
मामलों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित की जाएगी.
जांच दो महीने के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा, जबकि पहले कोई समय सीमा निर्धारित नहीं थी.
सरकार का मानना है कि संशोधित कानून लागू होने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित परीक्षा माफिया पर प्रभावी अंकुश लगेगा तथा लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा परीक्षा प्रणाली पर और मजबूत होगा.

कटनी (ढीमरखेड़ा)। कटनी जिले के ढीमरखेड़ा थाना क्षेत्र के खमरिया हार में बीते दिनों जमीनी विवाद में उचेहरा निवासी 50 वर्षीय प्रहलाद कोल से मारपीट की जिसमें उसकी मौत हो गई थी। मृतक की पत्नी सुखबरा बाई की रिपोर्ट पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर मामले को जांच में लिया था। पुलिस ने मुस्तैदी के साथ हत्या में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
एडिशनल एसपी कमल मौर्य ने बताया कि मृतक की पत्नी सुखवरा बाई की रिपोर्ट पर हत्या का मामला दर्ज कर मामले की विवेचना थाना प्रभारी महिमा रघुवंशी कर रही थी। जिसमें खमरिया बिजरावगढ़ निवासी विदेशी उर्फ परदेसी कोल, कुलसिया बाई, संतराम कोल और रतनलाल कोल के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश की गई जिसमें विदेशी उर्फ परदेसी कुलसिया बाई, रतनराम कोल को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
घटना में फरार आरोपी संतराम कोल की तलाश की जा रही है। विवाद के बाद से मृतक के दामाद सुनील सिंह भी लापता है जिनकी तलाश की जा रही है। एडिशनल एसपी ने आगे बताया कि डॉग स्क्वाड की टीम को भी बुलाया गया है। विवाद में घायल महिला और बेटी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज जारी था जिनका स्वास्थ्य अब ठीक है। हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी में एसडीओपी आकांक्षा चतुर्वेदी, थाना प्रभारी महिमा रघुवंशी और थाना स्टाफ की विशेष भूमिका रही।

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53 करोड़ की बोलियों ने मचाई सनसनी! इंदौर के चातुर्मास में कलश स्थापना के लिए लगी रिकॉर्ड बोली
इंदौर। धर्म, आस्था और दान के नाम पर इंदौर में ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने हर किसी को चौंका दिया। मुनिश्री सुधासागर महाराज के चातुर्मास के दौरान कलश स्थापना के लिए हुई बोलियों ने करोड़ों के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। महज कुछ ही देर में अलग-अलग कलशों के लिए करीब 53 करोड़ रुपये की बोलियां लग गईं। इनमें दो श्रद्धालुओं ने अकेले 16 करोड़ 16 लाख रुपये की बोली लगाकर सबसे अधिक चर्चा बटोरी।
जानकारी के अनुसार, चातुर्मास आयोजन में कलश स्थापना के लिए एक के बाद एक बोलियां लगती गईं। सबसे बड़ी बोली सपना मनीष गोधा और नवीन आनंद गोधा की ओर से 16 करोड़ 16 लाख रुपये की रही। इसके अलावा अन्य कलशों के लिए भी 5 करोड़, 3 करोड़ 55 लाख, 3 करोड़ 33 लाख और 2 करोड़ से अधिक की बोलियां लगीं। कुल मिलाकर यह आंकड़ा लगभग 53 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
करोड़ों की इन बोलियों के बाद शहर में चर्चा सिर्फ धार्मिक आयोजन की नहीं, बल्कि इतनी बड़ी राशि के भुगतान को लेकर भी शुरू हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतनी बड़ी रकम का भुगतान किस तरह होगा? क्या पूरी राशि एकमुश्त दी जाएगी या चरणबद्ध तरीके से? और क्या इतनी बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धताओं पर संबंधित विभागों की भी नजर जाएगी?
आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार, बोली की राशि तत्काल पूरी जमा नहीं कराई जाती। परंपरा के अनुसार पहले एक निश्चित प्रतिशत राशि जमा कराई जाती है और शेष राशि निर्धारित समय सीमा के भीतर दी जाती है। भुगतान नकद, चेक या अन्य वैध माध्यमों से किया जा सकता है।
इतनी बड़ी बोलियों ने धार्मिक आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। जहां एक ओर श्रद्धालु इसे आस्था और दान की भावना से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इतनी बड़ी रकम को लेकर सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं।फिलहाल करोड़ों की इन रिकॉर्ड बोलियों ने इंदौर के इस धार्मिक आयोजन को सुर्खियों में ला दिया है और अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि घोषित राशि का भुगतान किस प्रक्रिया के तहत पूरा किया जाता है।
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जुए के फड़ पर पुलिस की दबिश: रकम और घायलों को लेकर उठे सवाल! 17 आरोपी गिरफ्तार
शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी शहर के ग्वालियर-गुना फोरलेन बायपास स्थित एक होटल में चल रहे जुए के फड़ पर सिटी कोतवाली पुलिस ने छापामार कार्रवाई करते हुए 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार मौके से 1 लाख 65 हजार रुपये नकद, 17 मोबाइल फोन तथा चार लग्जरी वाहन जब्त किए गए हैं।
इधर, सूत्रों के अनुसार पुलिस की दबिश के दौरान तीन जुआरी बचने के प्रयास में होटल की छत से कूद गए, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जा रहा है कि उनका उपचार शहर के निजी अस्पतालों में कराया गया। हालांकि, कोतवाली पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में इन घायलों का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। साथ अधिकारी मामले में कैमरे के सामने आधिकारिक तौर पर बाईट देने से बचते रहे।
इस कार्रवाई को लेकर एक और बड़ा सवाल भी उठ रहा है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि होटल में बड़े स्तर पर जुआ संचालित हो रहा था और मौके पर करीब 20 लाख रुपये की राशि मौजूद थी, जबकि पुलिस ने केवल 1.65 लाख रुपये नकद बरामद होना बताया है। ऐसे में जब्त की गई राशि को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। फिलहाल पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध जुआ अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश कर दिया है। वहीं, घायलों और बरामद राशि को लेकर उठ रहे सवालों पर पुलिस की ओर से कोई अलग आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

इंदौर। एक वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं के साथ मारपीट का वीडियो सामने आया है। इसमें साफ दिख रहा है कि एक लड़का, जिसकी उम्र 14 साल बताई जा रही है, वह डंडे से महिलाओं को पीट रहा है। मामला मरीमाता पानी की टंकी के पास महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसाइटी के वृद्धाश्रम का है। मामला सामने आने के बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने एसडीएम और तहसीलदार को मौके पर भेजा। जांच के बाद पाया गया कि आश्रम अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था। पर कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर वृद्धाश्रम को सील कर दिया गया। साथ ही आश्रम संचालकों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं वृद्ध महिलाओं की पिटाई करने वाले बच्चे को महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने रेस्क्यू कर काउंसलिंग शुरू कर दी है।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि उनके निर्देश पर एसडीएम मल्हारगंज, सामाजिक न्याय एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त दल को मौके पर भेजा गया। दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित वृद्धजनों को मान्यता प्राप्त वृद्धाश्रमों-गणेश आश्रम, निराश्रित सेवाश्रम और आशा निलय-में सुरक्षित स्थानांतरित कराया। वहीं नाबालिग को आवश्यक संरक्षण एवं आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया है।
प्राथमिक जांच में संबंधित प्रेमाश्रय वृद्ध आश्रम, बाणगंगा का संचालन अवैध रूप से पाया गया। इसके बाद प्रशासन ने आश्रम को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। सामाजिक न्याय विभाग द्वारा आश्रम की संचालिका के विरुद्ध पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि नगर निगम के भवन में, जो शासकीय भूमि पर निर्मित है, आश्रम का संचालन किस आदेश के तहत किया जा रहा था।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वृद्धजनों की सुरक्षा और सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वृद्धाश्रम में रह रहे 30 बुजुर्गों में से स्वस्थ लोगों को गांधी नगर स्थित निराश्रित आश्रम और गणेश वृद्धाश्रम में भेजा गया है, जबकि बीमार बुजुर्गों को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने बच्चे से पूछताछ की। अधिकारियों के अनुसार लड़के की मानसिक स्थिति सामान्य है। अभी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। लड़का करीब पांच महीने पहले अपनी मां के साथ वृद्धाश्रम आया था। उसकी मां झुलस गई थी और कुछ दिनों बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद से वह आश्रम में ही रह रहा था। उसकी बड़ी बहन मुंबई में रहती है, जिसे इंदौर बुलाया गया है।
एसडीएम निधि वर्मा ने बताया कि बुधवार को लड़के का एक बुजुर्ग महिला से विवाद हो गया था। इसके बाद उसने महिला को डंडे से पीटना शुरू कर दिया। वायरल वीडियो में वह बीच-बचाव करने वालों के साथ भी हाथापाई करता दिखाई दे रहा है। एसीपी के अनुसार बच्चे की काउंसलिंग कराई जाएगी और उसे वृद्धाश्रम से हटाकर नाबालिग बच्चों की देखरेख करने वाली संस्था में भेजा जाएगा।
वृद्धाश्रम की संचालिका नीलम दुबे ने बताया कि घटना उस समय की है जब वह गुरु पूजन के लिए बाहर गई थीं। उन्होंने कहा कि सभी बुजुर्गों को भोजन कराने के बाद उनके कमरों में भेज दिया गया था। वापस आने पर पता चला कि बच्चे ने एक बुजुर्ग महिला को डंडे से मारा है। पूछने पर लड़के ने बताया कि महिला ने उसके सिर पर टब मार दिया था, जिसके बाद उसने गुस्से में डंडा चला दिया। संचालिका ने कहा कि वह बच्चे को थाने भी लेकर गई थीं। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ गलतियां हुई हैं और अब प्रशासन अपनी कार्रवाई कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार आश्रम जिस जमीन पर संचालित हो रहा था, वह शासकीय भूमि है और उस पर कब्जा कर आश्रम बनाया गया है। प्रशासन जमीन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रहा है। मामले में पूर्व पार्षद एवं एमआईसी सदस्य संतोष गौर का नाम भी सामने आ रहा है। सामाजिक न्याय विभाग के अनुसार आश्रम का पंजीयन फर्म एवं सोसायटी के रूप में है, लेकिन वृद्धाश्रम संचालित करने के लिए विभाग को अनिवार्य रूप से सूचना देना आवश्यक होता है, जो संचालकों द्वारा नहीं दी गई। इस पूरे मामले की भी जांच की जा रही है।
मामला संज्ञान में आने के बाद तत्काल कार्रवाई की है, 30 वृद्धजनों को अन्य आश्रम में शिफ्ट किया है, संचालिका पर अपराधीक प्रकरण निर्देश दिए है, पूरे मामले की गहता के साथ सभी पहलूओं पर जांच की जा रही है।
शिवम वर्मा, कलेक्टर
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जैन मंदिर से चोरी हुई 200 साल पुरानी मूर्तियां , नारों के साथ निकला चोरों का जुलूस
नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले से एक अनोखी और राहत भरी खबर सामने आई है। करेली थाना क्षेत्र के सगौरिया गांव स्थित जैन मंदिर में हुई 200 साल पुरानी बहुमूल्य मूर्तियों की चोरी का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने मामले में चार शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें गिरफ्तार करने के बाद जब करेली की सड़कों पर घुमाया गया, तो चोर खुद ही “चोरी करना पाप है, पुलिस हमारी बाप है” के नारे लगाते दिखे।
घटना 22 जुलाई की है, जब सगौरिया के प्राचीन जैन मंदिर से भगवान की 18 बहुमूल्य मूर्तियां चोरी हो गई थीं। वारदात को अंजाम देने वाले चोर बेहद शातिर थे। उन्होंने मंदिर में दाखिल होते ही सबसे पहले सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया था। हालांकि, कैमरों में चोरी से पहले के कुछ पल कैद हो गए थे, जिसके आधार पर पुलिस ने अपनी जांच आगे बढ़ाई।
करेली पुलिस ने घटना के आसपास के दिनों के सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्डिंग्स खंगाली, जिससे कुछ संदिग्धों की पहचान हुई। संदिग्धों को हिरासत में लेकर जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उन्होंने न केवल सगौरिया जैन मंदिर, बल्कि दो अन्य धार्मिक स्थलों में भी चोरी करने की बात कबूल की। पुलिस के अनुसार, यह गैंग विशेष रूप से धार्मिक स्थलों को ही अपना निशाना बनाता था।
पुलिस ने आरोपियों के पास से जैन मंदिर से चोरी गई 18 में से 2 प्राचीन मूर्तियां बरामद कर ली हैं। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि पुलिस की बढ़ती दबिश और पकड़े जाने के डर से उन्होंने बाकी मूर्तियों को गाडरवारा की शक्कर नदी में फेंक दिया था। पुलिस अब नदी से अन्य मूर्तियों को तलाशने की कोशिश कर रही है। फिलहाल, करेली थाना पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है।
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बड़ी खबर: पुलिस के तत्कालीन AIG अनिल मिश्रा को उम्रकैद, जानें पूरा मामला
भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस के तत्कालीन एआईजी रहे अनिल मिश्रा को दुष्कर्म और नाबालिग से गलत हरकत के मामले में जयपुर की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई है। अदालत ने दुष्कर्म के मामले में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दी है, जबकि पीड़िता की नाबालिग बेटी के साथ गलत हरकत करने के मामले में तीन वर्ष के कारावास और जुर्माने से भी दंडित किया है।
विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने अपने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए पीड़िता का विश्वास तोड़ा और उसे मदद का झांसा देकर अपना शिकार बनाया। अदालत ने इसे विश्वास और अधिकार के गंभीर दुरुपयोग का मामला माना।
मामले के अनुसार, वर्ष 2012 में पीड़िता के पति के खिलाफ सीहोर में एक मामला दर्ज हुआ था। इसी मामले में मदद की उम्मीद से पीड़िता के पति ने अपनी पत्नी को तत्कालीन एआईजी अनिल मिश्रा से मिलने भेजा। मार्च 2012 में भोपाल में दोनों की मुलाकात हुई, जहां आरोपी ने कानूनी सहायता का भरोसा दिलाया। आरोप है कि मदद के बहाने अनिल मिश्रा ने पीड़िता को ऑफिसर्स मैस बुलाया और वहां उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद आरोपी ने पीड़िता को जोधपुर और मुंबई सहित अन्य शहरों में भी बुलाया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी ने पीड़िता से आर्थिक लेन-देन भी कराया और उसके खाते में पैसे ट्रांसफर करवाए। मामले में एक और गंभीर आरोप यह था कि अप्रैल 2014 में आरोपी ने पीड़िता की नाबालिग बेटी के साथ भी गलत हरकत की। इस संबंध में दर्ज प्रकरण में पॉक्सो एक्ट के तहत सुनवाई हुई और अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए तीन वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।

प्रमुख समाचार

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में शनिवार एक संदिग्ध दस्तावेज मिलने के बाद हड़कंप मच गया। कॉलेज के एक्स-रे विभाग की एक दराज से ऐसा कागज बरामद हुआ, जिसमें कथित तौर पर विस्फोटक तैयार करने से जुड़ा एक लेआउट बना होने की आशंका जताई जा रही है। सूचना मिलते ही कॉलेज प्रशासन ने पुलिस को बुलाया, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी। फिलहाल पुलिस ने पूछताछ के लिए तीन छात्रों को हिरासत में लिया है।जानकारी के मुताबिक,...

मध्य प्रदेश

उज्जैन। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन एक बार फिर शर्मसार हुई है। यहां एक महामंडलेश्वर द्वारा शादी का झांसा देकर महिला के साथ दुष्कर्म किया गया है। महिला के आवेदन पर थाना महाकाल पुलिस ने जांच उपरांत आरोपी महामंडलेश्वर के खिलाफ दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी का मामला दर्ज किया है। हालांकि आरोपी अभी फरार है।दरअसल पूरा मामला उज्जैन के सदावल मार्ग पर स्थित दादू राम आश्रम का है। आश्रम के संचालक निर्मोही अणि अखाड़े के महामंडलेश्वर ज्ञान दास महाराज पर...

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पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के टिकुरिया मोहल्ला स्थित एक मदरसे में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोप है कि मदरसे के मौलाना ने पहले छात्रा को कमरे में बंद किया और फिर उसके साथ गलत हरकत करने का प्रयास किया। इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि मौलाना ने अपनी करतूत छिपाने के लिए मदरसे में लगे सीसीटीवी कैमरों की वायर भी काट दी, ताकि घटना रिकॉर्ड न हो सके। मामले की...
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गुना (गरिमा टीवी न्यूज़) चांचौड़ा थाना पुलिस ने गौवंश की अवैध तस्करी के विरुद्ध बड़ी कार्यवाही करते हुए एक कंटेनर से 31 गौवंशीय पशु बरामद किए, जिनमें दो मृत अवस्था में पाए गए, जबकि 29 गौवंशीय पशुओं को सुरक्षित मुक्त कर गौसेवा धाम गौशाला, चांचौड़ा भेजा गया । इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर परिवहन में प्रयुक्त कंटेनर को किया गया । दिनांक 31 जुलाई 2026 को बीनागंज पुलिस चौकी को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि एक कंटेनर में बड़ी संख्या में गौवंशीय पशुओं को...

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
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गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
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गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
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