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नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में गेहूं उपार्जन के नाम पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और समितियों पर प्रशासन का चाबुक चल गया है। कलेक्टर सोमेश मिश्रा के कड़े तेवरों के बाद जिले के खरीदी केंद्रों में हड़कंप मच गया है। किसानों को घंटों लाइन में खड़ा रखने और अव्यवस्था फैलाने के आरोप में 3 केंद्र प्रभारियों को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि 12 समितियों को ब्लैकलिस्ट (अपात्र) करने का नोटिस थमा दिया गया है।
सहकारिता उप आयुक्त शिवम मिश्रा ने बताया कि ​मामला 11 मई की टीएल बैठक से गरमाया, जहां कलेक्टर ने उपार्जन की सुस्त रफ्तार पर जमकर क्लास ली। जांच में खुलासा हुआ कि कई केंद्रों पर हम्मालों की व्यवस्था ही नहीं की गई थी। नतीजा यह हुआ कि तौल कांटा थमा रहा और भीषण गर्मी में किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें लग गईं। प्रशासन ने इसे ‘जानबूझकर की गई लापरवाही’ माना है। हमने त्वरित एक्शन लेते हुए सुरेश कुमार चौरे (सहायक समिति प्रबंधक, सेमरीखुर्द),​सुनील कुमार वर्मा (प्रभारी, खपरिया वेयरहाउस) एवं ​प्रद्युम्न कुमार यादव (प्रभारी, बिसौनीकलां) के प्रभारियों को घर बैठा दिया है।​ ​इसके अलावा रमपुरा, खपरिया और कोठरा के प्रबंधकों से जवाब तलब किया गया है, वहीं बैंक कैडर के दो बड़े अफसरों पर विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
प्रशासन ने डोलरिया, बनखेड़ी और पगढाल समेत 12 समितियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उन्हें भविष्य की खरीदी प्रक्रियाओं से बाहर कर दिया जाए? इन समितियों के पास सफाई देने के लिए सिर्फ 3 दिन का वक्त है। अगर किसानों के पसीने की कीमत चुकाने में कोताही हुई, तो कुर्सी सलामत नहीं रहेगी!

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मंदिर किसी के डैडी का नहीं है… BJP विधायक प्रीतम लोधी के फिर बिगड़े बोल, 200 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचकर कहा- अभी हिंदी में समझा रहा हूं
शिवपुरी। मध्य प्रदेश के पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी अपने विवादित बयान को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। 2 मंदिरों का विवाद सुलझाने के लिए वह 200 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे। लेकिन इस दौरान जो कहा, उसके बाद आशंका है कि वह विपक्ष के निशाने पर आ सकते हैं। उन्होंने इशारों में पुजारियों को दंगा करने वाला बताते हुए कहा कि रावण राज्य छोड़िए। जनता इन्हें यहां से खदेड़ेगी।
भाजपा विधायक प्रीतम लोधी बगीचा सरकार मंदिर में महंत पक्ष और पुजारी पक्ष के बीच चल रहे एकाधिकार की लड़ाई के मामले में करेरा पहुचे थे। विधायक ने इस दौरान महंतों का समर्थन करते हुए एक तरह से पुजारियों को खुली धमकी दे दी। उन्होंने कहा ”मंदिर किसी के डैडी का नहीं है। यहां रावण गिरी ठीक नहीं है। राम राज्य चल रहा है। अभी हिंदी में समझा रहा हूं, फिर अंग्रेजी में समझाना भी आता है।’
करेरा के प्रसिद्ध बगीचा सरकार हनुमान मंदिर में शनिवार की रात उस समय बवाल मच जब मंदिर के महंत और राम जानकी मंदिर के पुजारी के बीच विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि आस्था के इस केंद्र में जमकर लाठियां चली। इस घटना में पांच लोग घायल हो गए, जिन्हें करेरा के अस्पताल में भर्ती कराया गया l घटना का वीडियो वायरल हो गया जिसके बाद घायलों शिकायत पर पुलिस ने महंत पक्ष के लोगों पर एफआइआर दर्ज कर ली।
करेरा में बगीचा सरकार हनुमान मंदिर के महंत और राम जानकी मंदिर के पुजारी भोला पंडित के बीच कई दिनों से विवाद चला आ रहा था। आरोप है कि भोला पंडित ने कार्यक्रम के लिए 21 लाख रुपए दान दिए थे। इसके बाद से भोला पंडित ने राम जानकी मंदिर पर कब्जा कर लिया और वहां से होने वाली इनकम को वह अपने पास रखने लगा। मंदिर के महंत ने इसका विरोध किया, जिसके बाद शनिवार को एक मीटिंग का आयोजन किया गया था। इसी मीटिंग के दौरान विवाद इतना बढ़ा कि लाठियां चल गई।
इसी विवाद को लेकर भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने सुलझाने की सोची। उन्होंने 200 से ज्यादा गाड़ियों का काफिला उठाया और फर्राटा भरते हुए मंदिर पहुंच गए। लेकिन इस दौरान जो भाषा बोली, वह चर्चा में आ गई। बताया जा रहा है कि पुजारी ब्राम्हण समाज के हैं वहीँ महंत गुर्जर समाज के हैं। इसी वजह से विधायक ने महंत का समर्थन करते हुए बिना नाम लिए पुजारियों पर विवादित टिप्पणी कर दी।
गौरतलब है कि पिछोर विधायक इस मामले में दखल देने करेरा पहुंच गए जबकि करेरा के विधायक रमेश खटीक इस मामले से दूरी बनाए हुए हैं। करेरा से भाजपा विधायक रमेश खटीक हैं। भाजपा जिला अध्यक्ष जसवंत जाटव करेरा से हैं। प्रदेश पदाधिकारी रणवीर रावत करेरा से हैं और इन सभी ने अब तक इस मामले में कोई बयान नहीं दिया है। करेरा में प्रीतम लोधी का दखल ओर खुली चुनोती ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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जीतू पटवारी समेत 20 के खिलाफ FIR, आंदोलन करने वाले ग्रामीणों से बैरिकेड तोड़कर की थी मुलाकात
पन्ना। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की मुश्किलें बढ़ गई है। पन्ना टाइगर रिजर्व ने PCC चीफ समेत 20 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। उन पर सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगा है।
दरअसल, जमीन छिनने से रोकने के लिए बुंदेलखंड में आदिवासी महिलाएं चिता पर लेटकर आंदोलन कर रही हैं। छतरपुर में चल रहे केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध किया जा रहा है। ग्रामीणों का समर्थन करने के लिए पीसीसी चीफ जीतू पटवारी बड़ी संख्या में निर्माण स्थल पर पहुंचना चाह रहे थे। लेकिन प्रशासन ने उन्हें वन्यजीवों की सुरक्षा का हवाला देते हुए रोक दिया और बैरिकेडिंग कर दी।
हालांकि जीतू पटवारी नहीं रुके और कार्यकर्ताओं के साथ गेट फांदकर अंदर दाखिल हो गए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने उन्हें जनता के बीच भेजा है और वे आदिवासियों के हक के लिए सौ बार जेल जाने को भी तैयार हैं। जिसके बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अवैध रूप से रह रही एक उज्बेकिस्तानी महिला को गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि वह बिना पासपोर्ट और दस्तावेज के रह रही थी। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल के एक युवक को भी हिरासत में लिया गया है। फिलहाल पुलिस ने विदेशी विषयक अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया है। दोनों से पूछताछ की जा रही है।
राजधानी भोपाल के शाहपुरा थाना क्षेत्र में पुलिस ने उज्बेकिस्तान की एक महिला को गिरफ्तार किया है। महिला की पहचान निलुफर बखरोमोखा के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके साथ मौजूद पश्चिम बंगाल निवासी साजिद हुसैन को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की है। जानकारी के मुताबिक, युवक और विदेशी महिला की जानकारी मकान मालिक ने दी थी। वह 10 दिन पहले भोपाल पहुंची थीं और साजिद के साथ किराए के कमरे में रह रही थी।
किराएदार साजिद हुसैन कमरे से सामान हटाने की तैयारी कर रहा था। संदेह होने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और कमरे की तलाशी ली। जांच के दौरान वहां एक विदेशी महिला मिली, जिसके पास वैध दस्तावेज नहीं पाए गए। कमरे में रखा सामान भी पूरी तरह पैक था और बाहर ले जाने की तैयारी चल रही थी।
इस मामले पर पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि विदेशी नागरिक को अपने पास रखने और इसकी जानकारी स्थानीय थाने को नहीं देने के मामले में पुलिस साजिद की भूमिका की भी जांच कर रही है। यह भी जानकारी जुटाई जा रही है कि विदेशी महिला भारत कब और किस वीजा भोपाल आने से पहले किन शहरों पर आई थी। इसके अलावा भी अन्य जानकारियां जुटाई जा रही है। उन्होंने उसको वापस भेजे जाने को लेकर कहा कि जांच के बाद कार्यवाही की जाएगी।
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छतरपुर में अतिक्रमण हटाने गई टीम पर पथराव, कई वाहनों में तोड़फोड़
छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत ग्राम ढोडन में अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम को उस समय भारी विरोध का सामना करना पड़ा, जब ग्रामीणों की भीड़ अचानक उग्र हो गई। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद लोगों ने प्रशासन और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। देखते ही देखते मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कार्रवाई कुछ समय के लिए बाधित हो गई। हालात बिगड़ते देख अधिकारियों को अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा।
हिंसक झड़प के दौरान एडिशनल एसपी की गाड़ी समेत पुलिस के करीब आधा दर्जन वाहनों के कांच टूट गए। अतिक्रमण हटाने में लगी जेसीबी मशीन को भी ग्रामीणों ने नुकसान पहुंचाया। जानकारी के मुताबिक पथराव में कुछ पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आई हैं, हालांकि किसी गंभीर घायल की पुष्टि नहीं हुई है। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर डटे रहे और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश करते रहे। फिलहाल गांव और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
घटना के दौरान एक ऐसा वीडियो भी सामने आया, जिसने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। जिस मकान पर कार्रवाई की जा रही थी, वहां एक युवक खुद को घायल दिखाने की कोशिश करता नजर आया। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि दूसरा युवक उसके शरीर पर लाल रंग डाल रहा है, ताकि यह साबित किया जा सके कि वह पुलिस कार्रवाई में घायल हुआ है। यह दृश्य कैमरे में रिकॉर्ड होने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है।
प्रशासन अब पूरे घटनाक्रम की जांच में जुट गया है। पथराव और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर क्षेत्र में लंबे समय से विरोध की स्थिति बनी हुई है, इसलिए प्रशासन अब आगे की कार्रवाई को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।
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बीमा के चक्कर में अपनी ही कार चोरी करा दी, सीसीटीवी कैमरों ने खोला राज
ग्वालियर। शहर में कार चोरी का ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया, जिसने पुलिस को भी हैरत में डाल दिया। शातिर कार मालिक ने अपनी ही गाड़ी चोरी करा दी। वह खुद चोरी की रिपोर्ट करने कोतवाली थाने भी पहुंच गया। बीच बाजार चोरी की वारदात से पुलिस भी चिंता में पड़ गई। पुलिस ने चोरों तक पहुंचने के लिए सीसीटीवी कैमरे खंगाले। इन कैमरों से मिले सबूत के जरिये पुलिस चोरों तक पहुंची, तो कार मालिक हड़बड़ा गया।
चोरों को राउंड अप कर जब पूछताछ की तो उन्होंने सबकुछ उगल दिया। कार मालिक के ही इशारे पर चोरी का षड्यंत्र रचा था। पुलिस ने कार चोरी होने की पुष्टि तो की है, लेकिन इस मामले का राजफाश पुलिस बुधवार को करेगी। पुलिस ने अभी चोरों के पकड़े जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
सूत्रों के मुताबिक चोरी का राज खुल गया है। यह षड़यंत्र बीमा की रकम हड़पने के लिए रचा गया था। अनिल कुशवाह नाम का शख्स कोतवाली थाने कार चोरी की रिपोर्ट लिखाने पहुंचा था। उसने खुद को सीए बताया और रिपोर्ट की कि वह बालाबाई का बाजार में आया था। यहां से कार चोरी हो गई। भरे बाजार से चोरी होने से पुलिस सकते में आ गई।
कोतवाली थाना पुलिस द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में बताया गया। इसके बाद पड़ताल शुरू की गई। कैमरों से रूट खंगाला और पुलिस डबरा तक पहुंच गई। यहां से संदेहियों को राउंड अप किया तो पूरी कहानी खुल गई। सामने आया कि कार मालिक ने खुद ही कार चोरी करवाई थी। पड़ताल के लिए कैमरे खंगाले तो दूसरी ही कहानी सामने आई
यह षड्यंत्र बीमा की रकम हड़पने के लिए रचा गया। कार को यह छिपाकर रखते। इसके बाद पुलिस कार नहीं ढूंढ पाती तो रिपोर्ट पेश कर देती। इसके कार बीमा कंपनी से क्लेम मिल जाता।

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में आरोपी शुभम खैरनार को महाराष्ट्र के नासिक स्थित इंदिरा नगर इलाके से गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तार शुभम खैरनार को मुंबई के किला कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर CBI को सौंप दिया गया. CBI अब उसे दिल्ली ले जाकर पूछताछ करेगी. एजेंसी का कहना है कि मामले में कई अन्य आरोपी शामिल हैं, जिनका पता लगाना जरूरी है.
खैरनार को अब गुरुवार (14 मई) को दिल्ली की CBI कोर्ट में पेश किया जाएगा. जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पेपर लीक का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे.
नीट- यूजी 2026 परीक्षा पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है. इस मामले में नासिक से गिरफ्तार आरोपी शुभम खैरनार को मुंबई की किला कोर्ट ने दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया है. कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को उसे आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली ले जाने की अनुमति भी दे दी है. CBI ने कोर्ट में कहा था कि मामले में अन्य आरोपियों का पता लगाने और पेपर लीक नेटवर्क की गहराई से जांच करने के लिए शुभम खैरनार की हिरासत जरूरी है. अब CBI अब इस मामले में जुड़े अन्य आरोपियों और पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी हुई है.
नीट पेपर लीक मामले में पुलिस ने पुणे से एक महिला आरोपी को भी गिरफ्तार किया है. महिला को बिबवेवाड़ी इलाके से हिरासत में लिया गया. पुणे पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने बताया कि महिला फिलहाल CBI की कस्टडी में है और उससे पूछताछ की जा रही है.
नीट परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में छात्रों और छात्र संगठनों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है. नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) समेत कई छात्र संगठनों ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, केरल और अन्य राज्यों में प्रदर्शन किया.
राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान समूह (SOG) ने जांच में बड़ा खुलासा किया है. SOG के अनुसार, NEET-UG 2026 परीक्षा में पूछे गए सवालों से मिलता-जुलता गेस पेपर मूल रूप से केरल के एक छात्र से राजस्थान के सीकर पहुंचे छात्रों तक पहुंचा था. इसके बाद यह दस्तावेज सीकर में कोचिंग कर रहे कई छात्रों तक पहुंच गया और फिर 3 मई को परीक्षा से पहले जयपुर और आसपास के इलाकों के अभ्यर्थियों तक फैल गया.
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सोनिया गांधी की तबीयत फिर खराब, गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती, राहुल-प्रियंका गांधी भी मौजूद
इस वक्त की बड़ी खबर सोनिया गांधी को लेकर आई है। सोनिया गांधी की तबीयत फिर खराब हो गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सोनिया गांधी के साथ उनके बेटे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद हैं। सोनिया गांधी आंख की समस्या को लेकर मेदांता अस्पताल में भर्ती हुई हैं। सोनिया की माइनर सर्जरी होनी है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक वह थोड़ी देर में अस्पताल से डिस्चार्ज होंगी।
इससे पहले 25 मार्च 2026 को भी कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी की तबीयत बिगड़ गई थी। चेस्ट समस्या होने के कारण उन्हें दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी साथ में मौजूद थे।
बता दें कि सोनिया गांधी की तबीयत ठीक नहीं रहती है। उन्हें पेट से जुड़ी समस्याएं,फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं और सांस से जुड़ी दिक्कत रहती हैं। उनका सर गंगा राम अस्पताल, शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में इलाज चलता है।
फिलहाल सोनिया गांधी इस वक्त केरल में सरकार गठन को लेकर अहम भूमिका निभा रही हैं। हाल ही केरलम में हुए विधानसभा चुनाव केरल यूडीएफ (कांग्रेस) की जीत हुई है। जिसके बाद वहां कांग्रेस सरकार बनाने के लिए कवायद कर रही है। इसके लिए दिल्ली से तिरुवनंतपुरम तक कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। केरलम मसले पर सोनिया गांधी ही अंतिम फैसला करेंगी।
साल 2011 में अमेरिका में कैंसर का उपचार भी करवाना पड़ा था, जिसके बाद से वह स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहीं हैं। हालांकि, 2012 में इलाज करवाने के बाद उनकी तबीयत सही हो गई थी।
सोनिया गांधी की शादी 1968 में राजीव गांधी के साथ हुई थी। राजीव ने राजनीति से दूरी बनाकर एक एयरलाइन पायलट के रूप में अपना करियर चुना था। 1980 में संजय गांधी के निधन के बाद राजीव गांधी राजनीति में आए। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव प्रधानमंत्री बने। सोनिया गांधी ने इस दौरान राजनीति से दूरी बनाए रखी और कला संरक्षण के क्षेत्र में काम किया। हालांकि 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी को कांग्रेस का नेतृत्व संभालने का प्रस्ताव मिला, जिसे उन्होंने शुरुआत में ठुकरा दिया था।
हालांकि 1998 में सोनिया गांधी ने कांग्रेस पार्टी की कमान संभाली। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने 2004 में लोकसभा चुनाव जीता और यूपीए गठबंधन का गठन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार करने के बजाय मनमोहन सिंह को यह जिम्मेदारी सौंपी। 2009 में एक बार फिर उनके पास प्रधानमंत्री बनने का मौका थाय़ उन्होंने दोनों ही मौकों पर इसे ठुकराया और खुद की जगह डॉक्टर मनमोहन सिंह को नामित किया। सोनिया के इस फैसले ने सभी को चकित कर दिया था। वर्तमान में सोनिया गांधी कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख और राज्यसभा सांसद हैं।
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मध्यप्रदेश TET विवाद: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संकेत, बिना TET नियुक्ति नहीं
मध्यप्रदेश में शिक्षक बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों और पहले से कार्यरत शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा और निर्णायक संदेश सामने आया है। बुधवार को इस महत्वपूर्ण मामले पर सुप्रीम कोर्ट में एक अहम सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने अपने रुख से भावी दिशा स्पष्ट कर दी है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ संकेत दिए हैं कि अब बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास किए किसी भी शिक्षक की नियुक्ति संभव नहीं होगी, जो इस क्षेत्र में कार्यरत और इच्छुक दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।
अदालत ने अपनी टिप्पणी में यह भी साफ किया कि पात्रता परीक्षा से संबंधित जो भी विशेष राहत या छूट पहले प्रदान की जानी थी, वह अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी है और अब इस संबंध में कोई नई रियायत संभव नहीं है। यह बयान उन सभी पुनर्विचार याचिकाओं के संदर्भ में आया है, जो मध्यप्रदेश सरकार के साथ-साथ प्रदेश और देशभर के कई शिक्षक संगठनों की ओर से दायर की गई थीं। इन याचिकाओं में मुख्य रूप से वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों को TET परीक्षा से छूट देने की मांग उठाई गई थी, जिससे उन्हें अपनी नौकरी जारी रखने में सुविधा मिल सके।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि वर्ष 2017 में नियम लागू होने के बाद शिक्षकों को पहले ही पांच साल तक की छूट दी जा चुकी है। अब राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा तय किए गए नियमों का पालन सभी राज्यों और शिक्षकों को अनिवार्य रूप से करना होगा। अदालत ने इस बात को भी स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि शिक्षक बनने के लिए निर्धारित न्यूनतम पात्रता मानकों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य से जुड़ा एक गंभीर विषय है।
हालांकि, इस मामले में अंतिम फैसला अभी तक नहीं आया है। बुधवार शाम तक 70 से भी अधिक याचिकाओं पर सुनवाई जारी रही, जिसमें विभिन्न पक्षों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं और रिटायर्ड जजों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। लेकिन, सुनवाई के दौरान कोर्ट का जो रुख सामने आया, वह शिक्षकों के पक्ष में बहुत अधिक सकारात्मक नजर नहीं आया, जिससे याचिकाकर्ताओं में थोड़ी निराशा भी देखने को मिली।
जनजातीय कल्याण शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगौर ने इस संदर्भ में अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि उनके संगठन की ओर से भी इस मामले में याचिका दायर की गई थी। सिंगौर ने कहा कि उन्होंने अदालत के समक्ष मजबूत और ठोस तर्क प्रस्तुत किए थे, इसके बावजूद अदालत का रुख उन्हें राहत देने वाला प्रतीत नहीं हुआ, जिससे उनके संगठन की उम्मीदों को झटका लगा है।
दरअसल, यह पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के उस आदेश के बाद शुरू हुआ था, जिसमें यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि यदि कोई शिक्षक TET परीक्षा पास नहीं करता है, तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है। इस आदेश के बाद स्कूल शिक्षा विभाग और लोक शिक्षण संचालनालय ने वर्ष 1998 से 2009 के बीच बिना TET नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा को अनिवार्य करने के निर्देश जारी किए थे। मध्यप्रदेश में ऐसे शिक्षकों की संख्या लगभग डेढ़ लाख बताई जा रही है, जिन पर इस फैसले का सीधा असर पड़ने वाला है।
इस फैसले के विरोध में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने आंदोलन भी किए थे। भोपाल में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन आयोजित हुए और मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के माध्यम से केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट से इस आदेश पर पुनर्विचार करने की पुरजोर मांग उठाई गई थी। टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) एक राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा है, जिसे राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने वर्ष 2010 में अनिवार्य किया था। यह परीक्षा मुख्य रूप से इस बात का निर्धारण करती है कि कोई अभ्यर्थी कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को पढ़ाने के लिए आवश्यक योग्यता रखता है या नहीं।

ग्वालियर। जिले में पुलिस महकमे से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट में पेश दस्तावेजों और गवाहों के बयान के आधार पर विशेष न्यायालय ने तत्कालीन ग्वालियर एसपी सहित चार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में कोर्ट ने ही प्रकरण दर्ज किया है। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि जिन CCTV फुटेज में कथित लेन-देन कैद होने का दावा किया गया था, वही फुटेज बाद में डिलीट मिली।
दरअसल मामला ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र का है। जहां दीनदयाल नगर निवासी अनूप नाम के व्यक्ति के भाई के खिलाफ धोखाधड़ी यानी 420 का मामला दर्ज किया गया था। मामला पैसों के लेन-देन से जुड़ा था। शिकायतकर्ताओं और आरोपी पक्ष के बीच समझौते की बातचीत भी हो चुकी थी। कोर्ट में दिए गए परिवाद के मुताबिक, फरियादियों ने खुद जांच अधिकारी को बताया था कि समझौता हो चुका है और आरोपी का नाम एफआईआर से हटाया जाए।
आरोप है कि यहीं से शुरू हुआ वसूली का पूरा खेल। परिवाद में कहा गया है कि जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर अजय सिकरवार ने दोनों पक्षों से पैसों की मांग शुरू कर दी। दस्तावेज के मुताबिक, अनूप पक्ष से पहले करीब 4 लाख 90 हजार रुपये दिए जा चुके थे, इसके बाद 23 दिसंबर 2023 को अनूप को फोन कर थाने बुलाया गया। जहां कथित तौर पर उसे पूरी रात बैठाकर रखा गया और अगले दिन रकम का दबाव बनाया गया।
कोर्ट में दर्ज परिवाद के मुताबिक 24 दिसंबर 2023 को अनूप को कथित तौर पर पुलिसकर्मियों ने थाने में रखा और उसके घर से करीब 9 लाख 75 हजार रुपये उसके साथ दबाब बनाकर उठा लिए। आरोप है कि यह रकम आरक्षक संतोष वर्मा के जरिए उठवाई गई। इतना ही नहीं, इसी दौरान मामले में शामिल चंद्रलेखा जैन नाम की महिला को भी दबाव में लिया गया। परिवाद के अनुसार उसके घर से करीब 15 लाख रुपये पुलिसकर्मियों द्वारा उठवाए गए, यानि दोनों जगहों से कुल करीब 30 लाख रुपये लिए जाने का आरोप है।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि रकम लाल रंग के बैग में रखकर दी गई थी और पूरी गतिविधि थाने के CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हुई थी। परिवाद में कई घटनाओं का विस्तार से जिक्र किया गया है। बताया गया कि पुलिसकर्मियों द्वारा लगातार फोन कॉल, घर पर दबिश और रकम के लिए दबाव बनाया जाता रहा। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जब उसने तत्कालीन एसपी राजेश चंदेल से शिकायत की, तो कार्रवाई होने के बजाय उसे ही इस प्रकरण में आरोपी बना दिया गया। बाद में जमानत मिलने के बाद अनूप राणा ने विशेष न्यायालय में परिवाद दायर किया। जिसमें तत्कालीन एसपी राजेश चंदेल, थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ यादव, सब इंस्पेक्टर अजय सिकरवार और आरक्षक संतोष वर्मा को आरोपी बनाया गया।
कोर्ट में एक अहम आवेदन भी पेश किया गया,जिसमें 24 और 25 दिसंबर 2023 की CCTV फुटेज सुरक्षित मंगाने की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता का दावा था कि फुटेज में पैसों से भरा लाल बैग, पुलिसकर्मियों की आवाजाही और पूरी कथित वसूली की घटना दिखाई दे रही है। लेकिन जब कोर्ट ने पुलिस से CCTV फुटेज पेश करने को कहा, तो जवाब दिया गया कि फुटेज उपलब्ध नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने कारण बताओ नोटिस जारी किया, कोर्ट के आदेश पर एडिशनल एसपी रेडियो की जांच में सामने आया कि 3 जनवरी 2024 से पहले की CCTV रिकॉर्डिंग डिलीट की जा चुकी थी।यहीं से मामला और ज्यादा गंभीर हो गया।
कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि आरोप उन लोगों पर हैं जो स्वयं कानून के रक्षक हैं और कानून की बारीकियों से पूरी तरह परिचित हैं। ऐसे में प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि पहले अपराध किया गया और बाद में सबूत मिटाने का प्रयास भी हुआ। इसी आधार पर विशेष न्यायालय डकैती ने चारों आरोपियों तत्कालीन एसपी राजेश चंदेल, तत्कालीन थाटीपुर थाना प्रभारी टीआई सुरेंद्र नाथ यादव,IO सब इंस्पेक्टर अजय सिकरवार,आरक्षक संतोष वर्मा के खिलाफ IPC की धारा 392, 201, 120-B और एमपीडीपी एक्ट की धारा 11/13 के तहत कोर्ट ने ही प्रकरण दर्ज किया। इस पूरे मामले ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। क्योंकि सवाल सिर्फ अवैध वसूली का नही, बल्कि उस भरोसे का है जो आम जनता कानून और पुलिस व्यवस्था पर करती है।
बहरहाल ग्वालियर का यह मामला इसलिए भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर पुलिस अधिकारियों पर डकैती, साजिश और सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। फिलहाल कोर्ट के आदेश के बाद पूरे मामले की कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है और अब सभी की नजर अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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पीएम मोदी की अपील और चीफ जस्टिस की प्रेरणा से साइकिल चलाकर हाईकोर्ट पहुंचे जज
जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले से आई सादगी की ये तस्वीर सोशल मीडिया पर छा गई है! जहां एक तरफ रसूख और वीआईपी कल्चर का शोर रहता है, वहीं हाईकोर्ट के एक माननीय जस्टिस ने ‘साइकिल’ चलाकर सबको चौंका दिया और एक बड़ा संदेश दे दिया। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेल बचत और पर्यावरण संरक्षण की अपील का जबलपुर में बड़ा असर देखने को मिला है।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस डीडी बंसल (High Court Justice D.D. Bansal) आज अपनी लग्जरी सरकारी गाड़ी छोड़कर साइकिल से कोर्ट पहुंचे। जस्टिस बंसल करीब 3 किलोमीटर का रूट तय करते हुए कोर्ट पहुंचे। रोज की तरह आज जज साहब अपनी सरकारी गाड़ी से न पहुंचते हुए ​पचपेढ़ी सिविल लाइंस स्थित आवास से हाई कोर्ट तक ​साधारण साइकिल से ही पहुंच गए।​ जस्टिस बंसल शहर की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर किसी आम नागरिक की तरह पैडल मारते नजर आए। उनके साथ उनके स्टाफ के कर्मचारी भी थे, जो बैग और टिफिन लेकर साइकिल पर ही उनके पीछे चल रहे थे।
जस्टिस बंसल ने इस दौरान कहा कि, यह सोचना गलत है कि हाई कोर्ट का जज होने के नाते आप साइकिल नहीं चला सकते। संकट के समय में प्रधानमंत्री के आह्वान और हमारे चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की प्रेरणा से मैंने यह पहल की है। जहां तक संभव हो, हम सबको तेल की बचत करनी चाहिए।
एक उच्च पद पर आसीन व्यक्ति का आम सड़क पर साइकिल चलाना वीआईपी कल्चर पर कड़ा प्रहार है। ​पर्यावरण और बचत: पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और फिटनेस को बढ़ावा देने का सीधा संदेश। ​सामूहिक प्रयास: जस्टिस के साथ उनके स्टाफ का शामिल होना टीम वर्क और साझा संकल्प को दर्शाता है। जब न्याय के रक्षक खुद सड़क पर उतरकर देशहित की अपील पर अमल करते हैं, तो वह समाज के लिए एक नजीर बन जाता है। जस्टिस डीडी बंसल की यह ‘राइड’ सिर्फ कोर्ट तक का सफर नहीं, बल्कि जागरूक नागरिक बनने की प्रेरणा है।
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अपोलो अस्पताल ने बिना बीमारी के बना दिया हजारों का बिल, जहर खाने के ‘नाटक’ को ICU तक ले गए डॉक्टर्स
ग्वालियर। अक्षय कुमार की फिल्म ‘गब्बर इज बैक’ तो आपने देखी होगी, जिसमें अस्पताल मुर्दों का इलाज कर बिल वसूलते हैं। ऐसा ही कुछ हकीकत में देखने को मिला है ग्वालियर के नामी अपोलो अस्पताल में! जहां एक बेटी के छोटे से झूठ और अस्पताल की बड़ी ‘लूट’ ने एक पिता को बेबस कर दिया। महज 4 घंटे का बिल 38 हजार और फिर देखते ही देखते बिल पहुंचा 67 हजार के पार!
दरअसल मामला 7 तारीख का है। एक घर में पिता और बेटी के बीच मामूली झगड़ा हुआ। बेटी ने गुस्से में आकर जहर खाकर बेहोशी का नाटक किया। डरा हुआ पिता आनन-फानन में अपनी लाडली को लेकर शहर के साईं बाबा मंदिर रोड अपोलो अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड पहुंचा। पिता को लगा कि डॉक्टर जान बचाएंगे, लेकिन आरोप है कि डॉक्टरों ने इस मौके को ‘कमाने’ का जरिया बना लिया।
बेटी के नाटक को डॉक्टरों ने ‘हाई रिस्क’ बताकर सीधे ICU में भर्ती कर लिया। 10 हजार रुपए एडवांस भी जमा करा लिए गए। लेकिन रात 11 बजे लगातार मेडिसिन लगने पर बेटी ने खुद पिता को सच बताया कि वह बिल्कुल ठीक है, तब पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। पिता ने तुरंत अस्पताल प्रबंधन को सच्चाई बताई, लेकिन तब तक अस्पताल अपना जाल बुन चुका था। महज 4 घंटे के अंदर पिता के हाथ में 38 हजार का बिल थमा दिया गया,लेकिंग पिता के पास तत्काल पैसे नहीं थे,तो आरोप है कि अस्पताल ने बेटी को डिस्चार्ज करने से मना कर दिया। दो दिन बीतते-बीतते बिल 68 हजार हो गया।
आरोप है कि पैसे के अभाव में अस्पताल ने बेटी को ‘बंधक’ बना लिया और पिता को मिलने तक नहीं दिया गया। अस्पताल की इस मनमानी के आगे जब पिता थक गया, तो उसने जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई।खबर मिलते ही कांग्रेस नेता सुनील शर्मा और समाजसेवी अनंत शर्मा अस्पताल पहुँचे। भारी दबाव और मामले के तूल पकड़ते ही अस्पताल प्रबंधन के हाथ-पांव फूल गए।आखिरकार, प्रबंधन ने अपनी गलती मानी और लगाए गए सभी अवैध चार्ज माफ कर दिए, जिसके बाद बेटी को डिस्चार्ज किया गया।
यह घटना सवाल उठाती है उन बड़े अस्पतालों पर,जो सेवा के नाम पर सिर्फ पैसा कमाना जानते हैं। अगर जनप्रतिनिधि समय पर न पहुंचते, तो शायद उस पिता को अपनी जमीन या गहने गिरवी रखने पड़ते। अस्पताल ने गलती तो मान ली, लेकिन क्या इस मानसिक प्रताड़ना का कोई हिसाब है?

बड़वानी। सरकारी अस्पताल आने वाले मरीजों को खून सहित अन्य जांचों के लिए प्राइवेट पैथालॉजी भेजने के बदले में पैथालॅजी संचालक से कमीशन लेने वाले बड़वानी जिले के राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के दो ब्लॉक मेडिकल आफीसर सहित एक संविदा डॉक्टर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
मरीज भेजने के बदले 20 प्रतिशत के बजाय 50 प्रतिशत कमीशन मांगने की शिकायत अदनान अली पिता फरहत अली, मैंनेजर, सेवा पेथेलॉजी लैब, राजपुर, निवासी-टेमला मार्ग, बड़वानी रोड़ राजपुर, जिला बड़वानी ने लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में की। शिकायतकर्ता ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर के बीएमओ डॉ अमित शाक्य और बीएमओ डॉ. दिव्या सांई के साथ संविदा पर कार्यरत चिकित्सा अधिकारी डॉ मनोहर गोदारा कमीशन का रेट बढ़ाकर कमीशन की रिश्वत मांग रहे हैं।
शिकायतकर्ता के अनुसार उसकी लैब में बीते माह मरीजों की जांच की राशि की 50 प्रतिशत राशि डॉ. अमित शाक्य द्वारा 18,000 रुपए, डॉ. दिव्या सांई द्वारा 8,000 रुपए एवं डॉ. मनोहर गोदारा द्वारा 21,800 रुपए कमीशन (रिश्वत) मांगी जा रही थी। बातचीत के बाद कमीशन में कुछ कमी करके देने के लिए दबाव बनाया गया। इसके बाद आरोपी अमित शाक्य 8000 रुपए, आरोपी दिव्या 5000 रुपए और आरोपी मनोहर गोदारा 12000 रूपए लेने पर सहमत हो गए।
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक इंदौर राजेश सहाय ने रिश्वत मांगने की शिकायत का सत्यापन करवाया, जिसमें शिकायत सही पाई गई। इसके बाद कमीशनखोरों को पकडने के लिए ट्रैप दल का गठन किया गया। ट्रैपदल में डीएसपी सुनील तालान, कार्यवाहक निरीक्षक श्रीमती रेनू अग्रवाल, कार्यवाहक प्रधान आरक्षक प्रमोद यादव, विवेक मिश्रा, आरक्षक चंद्रमोहन बिष्ट, रामेश्वर निंगवाल, कमलेश परिहार, आशीष नायडू, श्रीकृष्णा अहिरवार, शेरसिंह, प्रभात मोरे, महिला आरक्षक जाह्नवी सेंगर, जानू वास्केल शामिल शामिल किया गया। इसके बाद ट्रैप दल को रवाना किया गया।
पैथालॉजी के मैनेजर अदनान अली से आरोपी डॉ. अमित शाक्य को 8,000 रुपए, आरोपी लेडी डॉक्टर दिव्या साईं को 5,000 हजार रुपए और आरोपी डॉक्टर मनोहर गोदारा को 12,000 रुपए की रिश्वत (कमीशन) राशि लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा-7 एवं बी.एन.एस. 2023 की धारा 61 (2), के अंतर्गत कार्यवाही की गई।
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मनचले ने AI से बनाए छात्रा के आपत्तिजनक फोटो, ब्लैकमेल कर तुड़वाई सगाई, केस दर्ज
इंदौर। कॉलेज छात्रा की शिकायत पर बाणगंगा पुलिस ने एक मनचले के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोप है कि उसने छात्रा का एआई से फोटो बनाया और ब्लैकमेल किया। आरोपित ने युवती की सगाई भी तुड़वा दी। आरोपित पीड़िता का परिचित है। पुलिस के अनुसार प्रथम वर्ष की छात्रा द्वारा आरोपित विशाल गुर्जर निवासी राऊ के विरुद्ध शिकायत की थी। बयान लेकर पुलिस ने विशाल के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली।
साल 2024 में एक कार्यक्रम के दौरान विशाल से पीड़िता का परिचय हुआ था। इस दौरान विशाल ने फोटो खींच लिए थे। बातचीत बढ़ने पर विशाल शादी का दबाव बनाने लगा। इनकार करने पर उसने एआई से फोटो बनाए और इंटरनेट मीडिया पर बदनाम करने लगा। स्वजन ने पीड़िता का अन्य जगह रिश्ता तय किया तो आरोपित ने एडिटेड फोटो भेज कर रिश्ता तुड़वा दिया।
होटल में महिला से दुष्कर्म: शादी का झांसा देकर बनाए संबंध
महिला पुलिस ने एक महिला की शिकायत पर स्कीम-71 निवासी अचल प्रेम जैन के खिलाफ केस दर्ज किया है। उस पर शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार भंवरकुआं निवासी महिला का तलाक हो चुका है। अचल ने पिछले साल शादी के संबंध में चर्चा की और भंवरकुआं स्थित होटल में शारीरिक संबंध बनाए।
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सिंधिया-दिग्विजय सिंह मानहानि केस: ‘देश विरोधी’ शब्द को लेकर MPMLA कोर्ट में हुई सुनवाई
ग्वालियर। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह के मानहानि केस को लेकर ग्वालियर जिला कोर्ट के MPMLA कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में परिवादी एडवोकेट नितिन शर्मा के बयान दर्ज किए गए।
मामला 26 अप्रैल 2023 की कथित टिप्पणियों से जुड़ा हुआ है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिग्विजय सिंह के लिए ‘देश विरोधी’ शब्द का उपयोग किया था। परिवाद में सिंधिया के अलावा मंत्री तुलसीराम सिलावट और महेंद्र सिंह सिसोदिया पर भी आपत्तिजनक बयान देने और पोस्ट को री-पोस्ट करने के आरोप लगाए गए।
मामला पहले सीजेएम कोर्ट में था। जिसे अब एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया है। जांच के दौरान पुलिस ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट पहले ही न्यायालय में पेश कर दी है। जिसमें विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के मौजूद होने की पुष्टि हुई है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 जून की तारीख तय की गई है।

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NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में आरोपी शुभम खैरनार को महाराष्ट्र के नासिक स्थित इंदिरा नगर इलाके से गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तार शुभम खैरनार को मुंबई के किला कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर CBI को सौंप दिया गया. CBI अब उसे दिल्ली ले जाकर पूछताछ करेगी. एजेंसी का कहना है कि मामले में कई अन्य आरोपी शामिल हैं, जिनका पता लगाना जरूरी है.खैरनार को अब गुरुवार (14 मई) को दिल्ली की CBI कोर्ट में पेश किया जाएगा. जांच...

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नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में गेहूं उपार्जन के नाम पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और समितियों पर प्रशासन का चाबुक चल गया है। कलेक्टर सोमेश मिश्रा के कड़े तेवरों के बाद जिले के खरीदी केंद्रों में हड़कंप मच गया है। किसानों को घंटों लाइन में खड़ा रखने और अव्यवस्था फैलाने के आरोप में 3 केंद्र प्रभारियों को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि 12 समितियों को ब्लैकलिस्ट (अपात्र) करने का नोटिस थमा दिया गया है।सहकारिता उप आयुक्त शिवम मिश्रा ने बताया कि ​मामला...
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गुना सिटी

गुना। (गरिमा टीवी न्यूज़) गुना जिले के विजयपुर थाना सहित दो थानों में फेर बदल किया गया है जिसमें विजयपुर थाना प्रभारी निरीक्षक प्रमोद कुमार साहू को बनाया गया है। वही उनि संदीप यादव को मृगवास थाने की कमान सोपी गई है। उनि गोपाल चौबे को मधुसूदनगढ़ थाना भेजा गया है।

फोटो गैलरी

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
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गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
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गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
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बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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