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इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के लसूडिया थाना क्षेत्र में दोस्ती को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। जिस दोस्त ने रहने के लिए छत और खाने के लिए भोजन दिया, साथी ने उसी के घर की अलमारी से 1 करोड़ रुपये से अधिक के सोने के जेवर और नकदी पर हाथ साफ कर दिया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को भोपाल से गिरफ्तार कर लिया है और चोरी किया गया पूरा मशरूका बरामद कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, बीसीएम पार्क निपानिया निवासी रेनू शर्मा ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 10 से 13 अगस्त के बीच उनकी अलमारी से 630 ग्राम सोने का बिस्किट जिसकी कीमत लगभग 1 करोड़ है, 40 ग्राम सोने की चेन,2 लाख नकद और एक मोबाइल फोन चोरी हो गया है।
मामले की जांच और पूछताछ में पुलिस को पीड़िता के साथ रह रहे जोधपुर (राजस्थान) निवासी गोपाल उर्फ गोपी पर शक हुआ। घटना के बाद से ही गोपाल अपना मोबाइल बंद कर फरार चल रहा था। पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी गोपाल को भोपाल से हिरासत में लिया।
डीसीपी अमन राठौड़ ने बताया कि आरोपी गोपाल से कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी ने खुलासा किया कि राजस्थान में उसके गांव में जल्द ही सरपंची के चुनाव होने वाले हैं। वह सरपंच का चुनाव लड़ना चाहता था और चुनाव में होने वाले भारी खर्च के लिए ही उसने इस बड़ी चोरी की वारदात को अंजाम दिया था।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से चोरी किया गया करीब 1.10 करोड़ कीमत का माल बरामद कर लिया है। सरपंच बनकर गांव पर राज करने का सपना देखने वाला आरोपी अब सलाखों के पीछे पहुंच गया है।

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कार की छत पर बैठ गरबा इवेंट का प्रचार कर रही थी युवतियां, पुलिस ने काटा चलान
शिवपुरी में गरबा कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार करना गरबा आयोजकों और वाहन मालिकों को भारी पड़ गया। दरअसल, शहर में होने वाले गरबा इवेंट का प्रचार करने के लिए 20 गाड़ियों पर बालिकाओं और युवतियों को बैठक घुमाया गया था। इसे यातायात नियमों का उल्लंघन माना गया है।
जैसे ही गाड़ी छत पर बैठी युवतियों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वैसे ही कोतवाली पुलिस और यातायात पुलिस ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी। यातायात उल्लंघन के इस मामले में छह कारों पर 5-5 हजार के हिसाब से कुल 30000 का जुर्माना लगाया गया है।
यह पूरा मामला गुरुवार की शाम का है। शहर में होने वाले एक गरबा इवेंट के प्रचार के लिए लगभग 20 गाड़ियों पर बालिकाओं और युवतियों को बैठा दिया गया। इन्हें कार की छत पर बैठाकर कस्टम गेट से शहर के प्रमुख मार्गों पर घुमाया गया। इस दौरान ये गाड़ियां कोतवाली थाने के सामने से भी निकली थी। जब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। तब यातायात पुलिस ने इसे नियमों का उल्लंघन माना।
शहर में पहले से ही यातायात नियमों का पालन कराने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसके बावजूद भी सड़कों पर गरबा इवेंट के प्रचार के लिए इस तरह का नजारा देखने को मिला। वीडियो सामने आने के बाद एसपी ने तुरंत ही कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद सभी वाहनों को ट्रेस कर कार्रवाई की गई।
जानकारी के मुताबिक आनंद गुर्जर, आकाश शर्मा, कमलेश रजक, चेतन भार्गव, संदेश और दिलीप धाकड़ की गाड़ियों पर कार्रवाई की गई है। इन सभी पर पांच-पांच हजार का जुर्माना लगाया गया है। कार्रवाई के दौरान इन वाहन मालिकों ने अपनी गलती को स्वीकार करते हुए माफी भी मांगी है। सभी ने कहा है कि भविष्य में वह इस गलती को दोबारा नहीं दोहराएंगे। यातायात पुलिस ने सभी को नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
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1.30 करोड़ की लागत से बन रही सोमनाथ मंदिर की झांकी, कोलकाता के 40 कलाकार कर रहे तैयार
भोपाल। राजधानी के विट्ठन मार्केट स्थित ग्राउंड में इस बार श्रद्धालुओं को सोमनाथ मंदिर की भव्य झांकी के दर्शन होंगे। जय मां वैष्णव दुर्गा उत्सव समिति और श्री राम रसोई समिति के संयुक्त तत्वावधान में व्यापारी संघ द्वारा करीब एक करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से सोमनाथ मंदिर की प्रतिकृति तैयार कराई जा रही है।
कोलकाता से आए 40 कलाकार मंदिर का निर्माण कर रहे हैं। आयोजकों का दावा है कि झांकी तैयार होने के बाद मंदिर का स्वरूप वास्तविक सोमनाथ मंदिर जैसा नजर आएगा। नौ दिनों तक यहां मां आदिशक्ति की पूजा-अर्चना और हवन किया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों के साथ स्वयंसेवकों के अलग-अलग दल तैनात रहेंगे।
समिति के संरक्षक हरिओम खटीक के मुताबिक, यहां पिछले 24 वर्षो से मां दुर्गा की झांकी सजाई जा रही है जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। मुख्यमंत्री भी हर साल यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट करने का ऐलान किया है। प्रदर्शन को देखते हुए भारतीय रेलवे ने दिल्ली आने वाली सभी मेल और एक्स्प्रेस ट्रेनों को रद्द कर दिया है। सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक सभी ट्रेनें रद्द रहेंगी। भारतीय रेलवे द्वारा दिल्ली आने वाली ट्रेनें रद्द करने पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भड़क गए हैं। पीएम मोदी पर भड़के हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि ‘नरेंद्र मोदी ने आधिकारिक रूप से देश में आपातकाल लगा दिया है।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- नरेंद्र मोदी ने आधिकारिक रूप से देश में आपातकाल लगा दिया है। वहीं CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने भी ‘X’ पर लिखा- आपातकाल के काले दिन। भारत सरकार ने कल दिल्ली बंद का आह्वान किया है।
बता दें कि दिल्ली में कल यानि शनिवार (10 अक्टूबर) को होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रोटेस्ट को लेकर प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। रेलवे से जुड़े सूत्रों के मुताबिक CJP की तरफ से होने वाले प्रदर्शन के मद्देनजर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और हजरत निजामुद्दीन रेलवे पर कल सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक सभी मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द रहेंगी। इसकी वजह प्रदर्शन के मद्देनजर ट्रैफिक जाम बताया जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी के कल दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन के मद्देनजर जयपुर में नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे ने दिल्ली की तरफ जाने वाली 13 ट्रेनों को रद्द कर दिया है। वहीं पटना से दिल्ली जाने वाली कुल 4 ट्रेनें रद्द की गई है।
मिली जानकारी के अनुसार मुंबई राजधानी, राजेंद्र नगर-नई दिल्ली तेजस राजधानी (12309), सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस (12313), रांची-नई दिल्ली गरीब रथ एक्सप्रेस (12877), प्रयागराज-नई दिल्ली हमसफर एक्सप्रेस (12275), प्रयागराज एक्सप्रेस (12417), संपर्क क्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस आदि ट्रेनों के रद्द होने की संभावना है। रेलवे ने यात्रियों को होने वाली असुविधा के लिए खेद जताया है।
साथ ही, दिल्ली पुलिस ने दिल्ली और उसके आसपास की सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ा दी है.जिसके बाद गाजीपुर, चिल्ला, टिकरी, सिंघू, गुरुग्राम, कापाशेरा, लोनी और बदरपुर की सीमाओं पर पुलिस ने चौकसी बढ़ दी है। लोगों की आवाजाही पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।
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CJI सूर्यकांत ने सरकार से कहा- पूरी तरह बंद न हों ट्रेनें, आम लोगों को नहीं हो परेशानी, प्रदर्शन पर कोई रोक नहीं
नई दिल्ली. जंतर-मंतर पर प्रस्तावित सीजेपी प्रदर्शन से पहले दिल्ली में मेट्रो और रेलवे सेवाओं पर पाबंदियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिया है. सीजेपी सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि मेट्रो, ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जाएगी. अदालत ने अधिकारियों से मेट्रो और रेलवे सेवाओं को उचित नियमन के साथ जारी रखने और इस संबंध में लिए गए फैसले का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा है, ताकि आम यात्रियों को परेशानी न हो.
सीजेआई सूर्यकांत ने आदेश में कहा कि अदालत के सामने 8 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर, ट्रांसपोर्ट रेंज के कार्यालय की ओर से डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक को भेजे गए पत्र और 9 अक्टूबर को रेलवे की ओर से सभी जोनल रेलवे को जारी संचार का जिक्र किया गया. इन पत्रों में जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर मेट्रो सेवाओं और नई दिल्ली तथा हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर पहुंचने वाली मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को लेकर प्रतिबंधों का उल्लेख था. अदालत ने कहा कि संबंधित आदेश 9 अक्टूबर से प्रभावी किए गए हैं. सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के आयोजकों को तत्काल याचिका के जरिए अदालत आने की छूट दी गई थी, लेकिन उनके वकीलों ने स्पष्ट किया कि वे प्रदर्शनकारियों का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे हैं. आयोजकों की ओर से भी अदालत में कोई याचिका दाखिल नहीं की गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके सामने सीमित सवाल यह था कि प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए मेट्रो और कुछ रेलवे स्टेशनों से ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह रोकना आनुपातिक प्रतिबंध है या नहीं और क्या इस फैसले पर दोबारा विचार करने की जरूरत है. अदालत की ओर से पूरी तरह रोक लगाने और आवाजाही को नियंत्रित करने के बीच अंतर बताए जाने के बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आश्वासन दिया कि वह संबंधित अधिकारियों से प्रतिबंधों पर पुनर्विचार करने को कहेंगे, ताकि मेट्रो और रेलवे सेवाएं उचित नियमन के साथ जारी रह सकें.
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मेट्रो ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा. साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया कि मेट्रो और अन्य रेलवे सेवाओं के संचालन को लेकर लिए गए फैसले का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि यात्रियों को पहले से जानकारी मिल सके और आम लोगों को होने वाली असुविधा कम से कम हो. सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरी व्यवस्था में आनुपातिकता के सिद्धांत का पालन करने पर जोर दिया. यानी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह रोकने के बजाय सेवाओं को नियंत्रित तरीके से चलाने का विकल्प अपनाया जाए.
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि संभावित पाबंदियों और यात्रा में होने वाली दिक्कतों की जानकारी लोगों को पहले से दी जानी चाहिए, अगर कुछ खास घंटों के दौरान सुरक्षित यात्रा संभव नहीं है, तो यात्रियों को इसकी अग्रिम सूचना मिलनी चाहिए, ताकि वे वैकल्पिक व्यवस्था कर सकें. उन्होंने कहा कि लोगों को मेट्रो स्टेशन पहुंचने, कतारों में खड़े होने और फिर अनिश्चितता का सामना करने देने के बजाय पहले ही जानकारी देना बेहतर होगा. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह अदालत की चिंताओं से सहमत हैं, लेकिन भविष्य में हालात कैसे होंगे, इसका अनुमान लगाकर अधिकारियों को बांधने वाला आश्वासन देना उनके लिए मुश्किल है. उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों को जमीनी हालात के अनुसार फैसले लेने की कुछ छूट मिलनी चाहिए. मेहता ने यह भी कहा कि परिस्थितियों की मांग होने पर कुछ घंटों के लिए सेवाओं को पूरी तरह रोकना भी आनुपातिक कदम हो सकता है.
इस पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि रोक कितने समय के लिए है और उस समय परिस्थितियां कैसी हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर सेवाएं केवल रात दो से चार बजे तक खुली रहें और बाकी समय बंद रहें, तो व्यावहारिक रूप से यह प्रतिबंध लगाने जैसा होगा. सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अधिकारियों को परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेना होगा. सुनवाई में अदालत ने एक बार फिर संकेत दिया कि सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है, लेकिन उसके कारण आम नागरिकों की आवाजाही और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच पर पडऩे वाले असर को भी ध्यान में रखना होगा.
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि प्रदर्शन स्थल की भौगोलिक स्थिति के कारण कई समस्याएं पैदा हो रही हैं. अगर किसी दूसरी खुली जगह की पहचान कर वहां प्रदर्शन की अनुमति दी जा सके, तो लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार की रक्षा के साथ जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ सकती है. वहां बच्चे और ऐसे लोग भी हो सकते हैं, जिन्हें विशेष सुरक्षा की जरूरत हो, इसलिए बड़ी जगह उपलब्ध कराने पर विचार किया जा सकता है, जहां किसी आपात स्थिति में स्वास्थ्य और अन्य आपातकालीन सेवाएं आसानी से पहुंच सकें. कपिल सिब्बल ने इस पर कहा कि रामलीला मैदान को प्रदर्शन स्थल के विकल्प के तौर पर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अगर जंतर-मंतर पर अनुमति देने से इनकार किया जा रहा था, तो पुलिस रामलीला मैदान में प्रदर्शन की अनुमति दे सकती थी.
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकीलों ने दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने के प्रस्ताव और कई ट्रेनों को रद्द किए जाने का मुद्दा उठाया. उन्होंने दलील दी कि प्रदर्शन की आशंका के आधार पर इतने बड़े स्तर पर प्रतिबंध लगाने से आम नागरिक प्रभावित होंगे. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत आम नागरिकों के अधिकारों को लेकर चिंतित है. उन्होंने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि मेट्रो सेवाओं को पूरी तरह बंद करने के बजाय उनकी फ्रीक्वेंसी कम करने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि नागरिकों को सार्वजनिक सुविधाओं का इस्तेमाल करने का अधिकार है. उन्होंने सरकार से तत्काल कदम उठाने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर हर सेवा रोक न दी जाए.
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि महिलाएं, छोटे बच्चे, बुजुर्ग और मरीज भी इन रास्तों से यात्रा करते हैं. उनकी सुरक्षा और सुविधाओं का ध्यान रखना भी जरूरी है. अदालत को सुरक्षा उपायों पर आपत्ति नहीं है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी गतिविधियां ठप न हो जाएं. उन्होंने बैरिकेडिंग की भी समीक्षा करने का सुझाव दिया. सीजेआई ने कहा कि अगर किसी स्थान पर बैरिकेड लगाया जाता है, तो प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि उसके कारण कौन-से रास्ते बंद होंगे और कौन-से वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध रहेंगे. ऐसी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जाना चाहिए. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह इन चिंताओं को सरकार के सामने रखेंगे. उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों की समय-समय पर समीक्षा कर उनमें बदलाव किया जा सकता है.
सुनवाई में दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों के संचालन को प्रभावित करने का मुद्दा भी उठा. सीजेआई ने कहा कि अदालत के सामने एक अन्य संचार का भी जिक्र किया गया है, जिसमें हजरत निजामुद्दीन समेत कुछ इलाकों में ट्रैफिक जाम की आशंका के आधार पर कदम उठाने की बात है. अदालत को बताया गया कि नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन पहुंचने वाली कई ट्रेनें उनके मूल स्टेशन से ही रद्द की गई हैं. कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि यदि कोई ट्रेन केरल से दिल्ली आ रही है, तो उसे भी इस तरह के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है. वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने कहा कि वकीलों के पास अपनी कारें हो सकती हैं, लेकिन सड़कें ही बैरिकेडिंग से बाधित हों तो आवाजाही कैसे होगी? सीजेआई ने कहा कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि सुरक्षा के इंतजाम आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को अनावश्यक रूप से प्रभावित न करें.
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस मस्जिदों में जाकर लोगों को आंदोलन में शामिल न होने की हिदायत दे रही है. उन्होंने इससे जुड़े वीडियो और तस्वीरों का भी जिक्र किया. इस पर सीजेआई ने कहा कि जब तक कोई मामला या सामग्री अदालत के सामने नहीं आती, तब तक वह इस बारे में टिप्पणी नहीं कर सकती. उन्होंने कहा कि पुलिस क्यों गई, उसका उद्देश्य क्या था और कार्रवाई उचित थी या नहीं- इन सवालों पर संबंधित तथ्यों के आधार पर ही विचार किया जा सकता है. कपिल सिब्बल ने कहा कि नागरिकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए और प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए लक्षित उपाय किए जा सकते हैं. वृंदा ग्रोवर ने भी प्रदर्शन के सिलसिले में युवतियों को रात में ट्रेनों से उतारे जाने का आरोप लगाया और मामले की सुनवाई के लिए सोमवार का विकल्प सुझाया.
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में फिलहाल जोर इस बात पर रहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन जरूरी कदम उठाए, लेकिन उनका दायरा जरूरत से ज्यादा व्यापक न हो. सीजेआई सूर्यकांत ने सरकार से प्रतिबंधों, मेट्रो सेवाओं, रेल संचालन और बैरिकेडिंग की समीक्षा करने को कहा. सॉलिसिटर जनरल ने अदालत की चिंताओं को सरकार तक पहुंचाने की बात कही.
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‘मक्खी मारने के लिए हथौड़ा न चलाएं…,’ CJP प्रोटेस्ट से पहले CJI सूर्यकांत की एक और अजीब टिप्पणी, लगता हैं सारे कीट-पतंगों की पार्टियां बनवा कर ही मानेंगे
कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट करने का ऐलान किया है। प्रदर्शन को देखते हुए भारतीय रेलवे ने दिल्ली आने वाली सभी मेल और एक्स्प्रेस ट्रेनों को रद्द कर दिया है। सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक सभी ट्रेनें रद्द रहेंगी। वहीं दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन को अवैध करार देते हुए पूरे दिल्ली में किलेबंदी कर दी है। नोएडा और दिल्ली के बीच सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. नोएडा से दिल्ली जाने वाले सभी बॉर्डर पर पुलिस और सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ाई गई है। दिल्ली के ट्रांसपोर्ट को बंद करने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। प्रदर्शन को लेकर ज्यादा सख्ती पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई। हालांकि सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट सीजेआई सूर्यकांत एक बार फिर ऐसा टिप्पणी कर दी, जिसे लेकर बवाल बढ़ सकता है। सीजेआई ने प्रदर्शनकारियों की तुलना मक्खी से कर डाली।
CJI सूर्यकांत ने कहा- आपको कुछ चीजों को रोकना ही होगा। उन्हें रोकने के लिए सिर्फ उतनी ही कार्रवाई करें जितनी जरूरी हो। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल करें।
मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने रेल सेवा, मेट्रो समेत तमाम पाबंदियों पर चिंता जताई। चीफ जस्टिस ने इस दौरान कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके लिए आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं कर सकते। CJI सूर्यकांत ने कहा- मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी प्रशासन की ओर से मेट्रो रेल सेवाएं बंद करने के फैसले पर थी। शीर्ष अदालत का कहना था कि पुलिस और प्रशासन ताकत के इस्तेमाल से बचना और उसे आनुपातिक कार्रवाई करनी चाहिए।
शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सरकार से बंद किए गए मेट्रो स्टेशनों की संख्या कम करने और सड़कों पर की गई बैरिकेडिंग की समीक्षा करने को कहा। कोर्ट ने जोर दिया कि सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ आम लोगों की सुविधा और सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। मामले में अगली सुनवाई सोमवार को होगी। अब इस पर नजर रहेगी कि सरकार सुरक्षा उपायों में क्या बदलाव करती है और मेट्रो व सड़क यातायात को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि दिल्ली में कई मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई हैं और कुछ ट्रेनों को उनके शुरुआती स्टेशनों से ही रोक दिया गया है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सवाल किया कि क्या कई मेट्रो स्टेशनों को पूरी तरह बंद रखने की योजना है। कोर्ट की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर थी कि सुरक्षा इंतजामों के कारण आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
बता दें सकि सुप्रीम कोर्ट सीजेआई सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद ही कॉकरोच जनता पार्टी का उद्भव हुआ था। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत 16 मई 2026 को अभिजीत दीपके द्वारा एक व्यंग्यात्मक (सटायर) और डिजिटल राजनीतिक आंदोलन के रूप में की गई थी। दरअसल 15 मई 2026 को सीजेआई सूर्यकांत की एक टिप्पणी से विवाद खड़ा हो गया था, जिसमें कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं और सिस्टम पर टिप्पणी करते हुए ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। सीजेआई सूर्यकांत की इस टिप्पणी से नाराज होकर अभिजीत दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी की नींव रखी थी।
बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट करने का ऐलान किया है। प्रदर्शन को देखते हुए भारतीय रेलवे ने दिल्ली आने वाली सभी मेल और एक्स्प्रेस ट्रेनों को रद्द कर दिया है। वहीं दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के धरना प्रदर्शन की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सीजीपी के पिछले ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए प्रोटेस्ट की अनुमति नहीं दी गई है। इसी के साथ ही पूरे दिल्ली में ‘धारा 163’ कर दिया गया है। साथ ही दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी को सख्त वॉर्निंग देते हुए कहा कि प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में इस ‘गैर-कानूनी’ प्रोटेस्ट में शामिल न हों, अपना और अपने परिचितों का ख्याल रखें।

रीवा। रीवा में हैरान करने वाला सामने आया है। एक घर के सीसीटीवी कैमरे में यह घटना कैद हो गई है। रात को एक मोटरसाइकिल बगैर ड्राइवर के चलती हुई नजर आने से मोहल्ले वाले हैरान है। यह घटना रीवा शहर से लगे भुंडहा गांव की है।
रीवा के भुंडहा गांव में रात को हुई इस घटना ने सभी को हैरान कर दिया है। एक घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में बगैर चालक के बाइक दौड़ती नजर आई। यह वीडियो वायरल होने के बाद तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी। कई लोग इसे भूतहा समझ रहे हैं तो कोई इसे किसी की शरारत समझ रहा है। लोग कह रहे हैं कि मोटरसाइकिल से वाहन चालक उतर गया होगा और बगैर ड्राइवर के मोटरसाइकिल जाते हुए नजर आई।जो भी है, इस घटना के बाद लोग तरह-तरह से तर्क दे रहे हैं।
भुंडहा के रहने वाले विवेक कुमार शर्मा के सीसीटीवी कैमरे में यह रिकार्ड हुआ है। यह वीडियो वायरल होने के बाद शर्मा मीडिया के सामने आए और उन्होंने बताया कि घर में लगे एक कैमरे में दिख रहा है कि ड्राइवर नहीं है, जबकि घर के दूसरे हिस्से में लगे सीसीटीवी कैमरे में जो बाइक दिखी, जिस पर कोई चालक वाहन चला रहा था।
शर्मा ने यह भी बताया कि उनके भांजे ने सीसीटीवी का एक फुटेज मजाक के रूप में अपने दोस्तों को शेयर किया था, जिसमें उसने बताया था कि एक बाइक बगैर चालक के जाते हुए कैमरे में कैद हुई है। जबकि भांजे को दूसरे वीडियो के बारे में जानकारी नहीं थी, जिसमें कोई चालक नजर आ रहा था। यह वीडियो वायरल होने के बाद विवेक कुमार शर्मा ने सभी से अपील की है कि लोग इसे देखकर हैरान न हों। विवेक कुमार शर्मा ने लोगों से अफवाह पर ध्यान नहीं देने की भी अपील की है। उन्होंने कहा कि यह टेक्नॉलाजी का एक ग्लीच हो सकता है। शर्मा ने यह दोनों ही वीडियो उपलब्ध करवाए हैं।

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माता की चौकी में बैनर लगाने पर बवाल! घर में घुसकर परिवार पर मुस्लिम युवकों ने किया हमला, 5 आरोपी गिरफ्तार
इंदौर। माता की चौकी के आयोजन में बैनर लगाने को लेकर शुरू हुआ विवाद इंदौर में कथित तौर पर मारपीट और घर में घुसकर हमला करने तक पहुंच गया। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के तेजपुर गड़बड़ी स्थित काली मल्टी में रहने वाले एक ऑटो चालक ने आरोप लगाया है कि माता की चौकी के पंडाल में बैनर लगाने का विरोध करने पर कुछ मुस्लिम युवकों ने पहले उसके साथ मारपीट की और इसके बाद उसके घर में घुसकर परिवार के सदस्यों को भी निशाना बनाया।मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। ACP निधि सक्सेना के मुताबिक मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बाकी आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस की टीम लगाई गई है।
शिकायत के मुताबिक तेजपुर गड़बड़ी की स्कीम नंबर 103 में रहने वाले ऑटो चालक सुरेश साह अपने घर के सामने सड़क पर बने पंडाल में माता की चौकी का बैनर लगा रहे थे।आरोप है कि इसी दौरान काली मल्टी में रहने वाले कुछ मुस्लिम युवक वहां पहुंचे और बैनर लगाने को लेकर आपत्ति जताई। सुरेश ने कथित तौर पर कहा कि यह धार्मिक कार्यक्रम का बैनर है और इसे लगाया जाएगा। बस इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया। शिकायत में आरोप है कि कहासुनी के बाद आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। सुरेश ने इसका विरोध किया तो एक युवक ने कथित तौर पर बल्ली उठाकर उनके बाएं हाथ पर हमला कर दिया। इसके बाद कई अन्य लोगों ने भी लात-घूंसों से मारपीट की।
विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। शिकायत के मुताबिक शोर सुनकर सुरेश की पत्नी सपना, सास द्वारिकाबाई और रिश्तेदार रोहित मौके पर पहुंचे तो आरोपियों ने कथित तौर पर उनके साथ भी मारपीट की।आरोप है कि इसके बाद कुछ आरोपी सुरेश के घर में घुस गए और उनके बेटों विकास और आकाश को घसीटते हुए बाहर लाकर उनके साथ भी मारपीट की।शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि जाते-जाते आरोपियों ने जान से खत्म करने की धमकी दी। यानी जिस विवाद की शुरुआत एक बैनर लगाने को लेकर हुई, वह देखते ही देखते पूरे परिवार के साथ कथित मारपीट तक पहुंच गया।पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर माता की चौकी के बैनर को लेकर शुरू हुई बहस इतनी हिंसक कैसे हो गई? क्या विवाद अचानक बढ़ा या इसके पीछे पहले से कोई रंजिश थी?
मामला सामने आने के बाद राजेंद्र नगर पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।ACP निधि सक्सेना के मुताबिक पुलिस ने अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मामले में शामिल बाकी आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस टीम लगाई गई है।पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विवाद की वास्तविक शुरुआत कैसे हुई और इसमें किस-किस की क्या भूमिका रही।
माता की चौकी जैसे धार्मिक आयोजन में एक बैनर लगाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अगर वास्तव में घर में घुसकर पूरे परिवार से मारपीट तक पहुंचा है, तो मामला गंभीर है। हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पूरी तस्वीर पुलिस जांच के बाद ही साफ होगी।फिलहाल 5 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है।
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मध्य प्रदेश में पटवारियों का 3 दिन सामूहिक अवकाश: स्वामित्व योजना और निलंबन का विरोध, आंदोलन की चेतावनी
भोपाल। मध्यप्रदेश में पटवारी आज से 3 दिन तक सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। स्वामित्व योजना और राजस्व कार्य में कार्रवाई का विरोध करेंगे। प्रदेश में अब तक दो दर्जन से ज्यादा पटवारियों की सेवा समाप्त हुई है। कार्रवाई वापस नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं पटवारियों के अवकाश से राजस्व कार्य प्रभावित होगा।
नर्मदापुरम। जिले में स्वामित्‍व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 को लेकर पटवारियों पर हो रही निलंबन, सेवा समाप्ति और अन्य दंडात्मक कार्रवाइयों के विरोध में मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ के आह्वान पर नर्मदापुरम जिले में आज से पटवारियों ने बुधवार को सभी ऑनलाइन राजस्व कार्य पूरी तरह बंद कर दिए है। पटवारी संघ की नर्मदापुरम जिला इकाई ने कलेक्ट्रेट परिसर में उग्र नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराया। इसके बाद राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव के नाम एक ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर सीमा बडोले को सौंपा गया।
संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पटवारियों पर की गई दंडात्मक कार्रवाई वापस नहीं ली जाती है, तो गुरुवार से सभी पटवारी सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे। ​देवास में तीन पटवारियों की सेवा समाप्त करने का कड़ा विरोध करते हुए जिला अध्यक्ष देवेंद्र कदम और इटारसी तहसील अध्यक्ष देवीशरण पटेल ने बताया कि राज्यभर में पटवारियों पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। संघ का कहना है कि स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में आ रही व्यावहारिक और कानूनी अड़चनों से सरकार को पहले ही अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद विसंगतियां दूर करने के बजाय पटवारियों को निशाना बनाया जा रहा है।
राजस्व निरीक्षक और तहसीलदार संघ भी इस कार्य पर अपनी आपत्ति दर्ज करा चुके हैं। पटवारियों की हड़ताल और ऑनलाइन कार्य बंद करने से गिरदावरी, किसानों को नामांतरण व दस्तावेजों की नकल और खाद-बीज से जुड़े महत्वपूर्ण राजस्व कार्य पूरी तरह ठप्प होने की आशंका है। ​ज्ञापन सौंपने के दौरान देवेंद्र कदम, मुकेश गौर, प्रदीप यादव, चेतन वर्मा और राजेश गहरवार समेत संघ के कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और इंदौर समेत प्रदेश के कई बड़े शहरों में शारदीय नवरात्रि के ठीक पहले सोशल मीडिया पर शुरू हुए ‘रेंट ए गरबा पार्टनर’के ट्रेंड ने तूल पकड़ लिया है। ऑनलाइन वेबसाइट्स और सोशल मीडिया के जरिए पैसे लेकर गरबा पार्टनर उपलब्ध कराने के दावों और विज्ञापनों को लेकर अब पुलिस प्रशासन, हिंदू संगठनों और संत समाज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, मुंबई, दिल्ली NCR के साथ-साथ इंदौर और भोपाल जैसे शहरों के नाम से भी अलग-अलग सेक्शन बनाकर ‘Find Garba Partner’ और ‘Find Dandiya Partner’ के विज्ञापन चलाए जा रहे हैं। आगामी 11 से 19 अक्टूबर तक यानी 9 दिनों के लिए 1000 रुपये से लेकर 6500 रुपये तक के बुकिंग पैकेज तय किए गए हैं। इसमें गरबा खेलने, डांस सीखने, रील्स बनाने, मैचिंग आउटफिट पहनने और साथ में सेल्फी लेने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन कुछ पोस्ट्स में व्यक्तिगत नजदीकी के ऑफर भी लिखे गए हैं, जिससे यह मामला गंभीर हो गया है।
बढ़ते मामलों को देखते हुए भोपाल पुलिस ने आम जनता के लिए चेतावनी जारी की है। धोखाधड़ी से बचने की सलाह के साथ एडिशनल डीसीपी अनिल शर्मा ने कहा है कि सोशल मीडिया पर गरबा और पार्टनर्स के नाम से कई फर्जी और भ्रामक आईडी सक्रिय हैं। इन विज्ञापनों के झांसे में आकर पार्टनर के लिए अप्लाई करने वाले लोग भारी ठगी का शिकार हो सकते हैं। पुलिस ने नागरिकों से ऐसे किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बुकिंग न करने की अपील की है।
अखिल भारतीय संत समिति के कार्यकारी अध्यक्ष अनिलानंद महाराज ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि इस तरह के ट्रेंड्स के जरिए हिंदू बहन-बेटियों को टारगेट किया जा रहा है और इससे ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा मिलने की आशंका है। उन्होंने ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स और ट्रेंड्स की गहराई से जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
‘जय मां भवानी हिंदू संगठन’ के अध्यक्ष भानु हिंदू ने कहा कि सनातन धर्म के आयोजनों का बड़े पैमाने पर व्यवसायीकरण हो रहा है। पैड गरबा पार्टनर उपलब्ध कराने वाली कंपनियों और फर्जी अकाउंट्स को बख्शा नहीं जाएगा। संगठनों ने अपील की है कि हिंदू महिलाएं और युवतियां इस तरह के पैड और व्यावसायिक गरबा आयोजनों से पूरी तरह दूर रहें।
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98 हजार परिवारों के चूल्हे पर संकट: PNG के रिकॉर्ड की गड़बड़ी से 15 हजार LPG कनेक्शन ब्लॉक
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गैस एजेंसियों के रिकॉर्ड की गड़बड़ी का खामियाजा आम उपभोक्ता भुगत रहे हैं। शहर की 30 से ज्यादा कॉलोनियों में करीब 98 हजार घरों में रसोई गैस परेशानी का सबब बन गई है। इसमें सबसे बड़ा आंकड़ा ई-केवाईसी का है, जहां 83 हजार कनेक्शन बिना केवाईसी के कारण बंद कर दिए गए हैं। हालांकि केवाईसी को लेकर पहले से ही सरकार ने गाइडलाइन जारी की थी। लेकिन दूसरा मामला ज्यादा गंभीर है।
भोपाल में लगभग 14 से 15 हजार ऐसे परिवार हैं, जिनका LPG कनेक्शन इसलिए ब्लॉक कर दिया गया क्योंकि कंपनी के रिकॉर्ड में उनके क्षेत्र में PNG पाइपलाइन उपलब्ध दिखाई गई। जमीन पर हकीकत कुछ और है। कई कॉलोनियों में आज तक PNG लाइन बिछी ही नहीं है, तो कुछ जगह लाइन बिछने के बाद भी घरों तक कनेक्शन नहीं पहुंचा है। इस दोहरी व्यवस्था में उपभोक्ता बुरी तरह फंस गए हैं।
एक तरफ उनके पुराने LPG सिलेंडर की बुकिंग बंद है, दूसरी तरफ PNG का विकल्प भी उनके पास नहीं है। नया LPG कनेक्शन भी नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में लोगों के सामने चूल्हा कैसे जलेगा, यह बड़ा सवाल बन गया है। उधर जारी एडवाइजरी में बताया गया है कि एजेंसी में जाकर उपभोक्ता नंबर से कारण पता करें। कई बार ई-केवाईसी पूरी होने के बाद भी PNG रिकॉर्ड में गड़बड़ी से कनेक्शन ब्लॉक रहता है। ये दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं। यदि आपकी कॉलोनी में PNG लाइन नहीं है, तो संबंधित एजेंसी को लिखित में आवेदन दें और दोबारा केवाईसी कराएं। इसके बाद एजेंसी से मौके पर जांच कराने की मांग करें। यदि सुनवाई नहीं होती है तो गैस कंपनी की वेबसाइट या टोल-फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
इस मामले को लेकर अब सियासत भी जमकर बोल रही है। पूर्व मंत्री पीपी शर्मा ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। महंगाई के साथ असुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है। सरकार की गलत नीति के चलते ही बड़ा संकट खड़ा हो गया है। मामले पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता पवन दुबे ने कहा कि कांग्रेस मामले पर सियासत कर रही है। कई बार समस्याएं होती है जिनका समाधान भी अपने स्तर पर निकाला जाता है। इस समस्या का भी समाधान निकाला जा रहा है।
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ट्रेन में यात्रियों से अवैध वसूली करने वाले 3 किन्नर गिरफ्तारः आरपीएफ ने की कार्रवाई
जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में रेल यात्रियों की सुरक्षा और सुगम सफर को लेकर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने सख्ती बढ़ा दी है। आरपीएफ ने ‘ऑपरेशन यात्री सुरक्षा’ के तहत कार्रवाई करते हुए ट्रेनों में यात्रियों से जबरन पैसे वसूलने (अवैध वसूली) और न्यूसेंस फैलाने वाले तीन किन्नरों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
घटना उस वक्त सामने आई जब ट्रेन संख्या 11401 इटारसी स्टेशन के आउटर पर रुकी थी। इसी दौरान ये किन्नर ट्रेन के डिब्बों में दाखिल हुए और यात्रियों से जबरन पैसों की मांग करने लगे। यात्रियों द्वारा विरोध करने और शिकायत मिलने पर आरपीएफ ने त्वरित एक्शन लेते हुए तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम:
पुलिस द्वारा पकड़े गए तीनों आरोपी किन्नर इटारसी के ही रहने वाले हैं, जिनकी पहचान इस प्रकार है:
बबली (उम्र 35 वर्ष), निवासी- नाला मोहल्ला, इटारसी।
काली (उम्र 45 वर्ष), निवासी- नाला मोहल्ला, इटारसी।
गंगा (उम्र 48 वर्ष), निवासी- नाला मोहल्ला, इटारसी।
आरपीएफ ने तीनों आरोपियों के खिलाफ रेलवे अधिनियम और संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रेनों में यात्रियों को परेशान करने और अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ आगे भी इस तरह की सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी, ताकि यात्रियों का सफर सुरक्षित और सुगम हो सके।

नागौर। राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता क्षेत्र से कुदरत का एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। करीब सवा साल (1 साल, 2 महीने और 21 दिन) पहले एक हादसे में जान गंवाने वाले दो घनिष्ठ दोस्तों का एक ही दिन पुनर्निमाण/पुनर्जन्म के रूप में नए जीवन की शुरुआत माना जा रहा है। इस अद्भुत संयोग ने दोनों शोक संतप्त परिवारों के साथ-साथ पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ा दी है।
यह पूरी घटना मेड़ता के पास स्थित मोकलपुर और सातलावास गांवों से जुड़ी है। 14 जुलाई 2025 को नरेंद्र बेड़ा और नरेंद्र मुंवाल अपने एक अन्य साथी प्रदीप विश्नोई के साथ चित्तौड़गढ़ के निलिया महादेव झरने में पिकनिक मनाने गए थे। इस दौरान अचानक हुए हादसे में तीनों दोस्त झरने में डूब गए और उनकी असमय मृत्यु हो गई।
हादसे के बाद नरेंद्र बेड़ा का पार्थिव शरीर उसी दिन मिल गया था, जिसके बाद 14 जुलाई को ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं दूसरे दोस्त नरेंद्र मुंवाल का शव लगभग 12 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मिला, जिससे उनका अंतिम संस्कार अगले दिन हो सका।
प्रकृति का अनोखा करिश्मा देखिए कि नरेंद्र बेड़ा की मां ने जिस समय नवजात को जन्म दिया, उसके ठीक 12 घंटे बाद नरेंद्र मुंवाल की मां की गोद भी बच्चे की किलकारी से गूंज उठी। दोनों परिवारों में महज 12 घंटे के अंतराल पर पुत्रों का जन्म हुआ है, जिसे ग्रामीण और परिजन दोनों दोस्तों का पुनर्जन्म मान रहे हैं।
हादसे से पहले दोनों माताओं ने नसबंदी का ऑपरेशन करवा लिया था। लेकिन अपने जवान बेटों को खोने के गहरे सदमे के बाद दोनों माताओं ने नसबंदी खुलवाने (ट्यूबेक्टमी रिवर्सल) का साहसिक फैसला लिया। हादसे के ठीक 1 साल, 2 महीने और 21 दिन बाद जब दोनों घरों में नन्हे मेहमानों ने कदम रखा, तो दोनों माताओं के चेहरे खिल उठे। इस अद्भुत संयोग की चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है।
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बेंगलुरु में CJP का अनोखा प्रदर्शन, चुनाव आयोग के खिलाफ उठी जवाबदेही की मांग
बेंगलुरु.मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी खेमे की नाराजगी लगातार बढ़ती नजर आ रही है. देश के अलग-अलग हिस्सों में इस मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं. इसी कड़ी में बेंगलुरु में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से अलग अंदाज में प्रदर्शन किया गया.
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने चप्पलें हाथ में लेकर अपना विरोध दर्ज कराया. सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में यूट्यूबर ध्रुव राठी की मौजूदगी भी दिखाई दी. प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई.
CJP नेता सौरभ दास ने प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं. उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब मिलना जरूरी है. पार्टी का दावा है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर नागरिकों की चिंताएं कई शहरों में सामने आ रही हैं.
पार्टी नेताओं के मुताबिक, विरोध का उद्देश्य चुनाव व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर अपनी बात सार्वजनिक तौर पर रखना है.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. CJP नेता आशुतोष रांका ने दावा किया है कि उनका प्रस्तावित आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा.
रांका ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को प्रभावित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोगों को जुटाने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
CJP की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि उसके कुछ कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों को प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए हिरासत में लिया जा रहा है. पार्टी का दावा है कि अलग-अलग राज्यों में उसके समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.
पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की गई तो इससे आंदोलन को लेकर लोगों की नाराजगी और बढ़ सकती है.
हालांकि, हिरासत से जुड़े इन दावों पर संबंधित पुलिस या प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. ऐसे में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है.
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं. पटना से लेकर दिल्ली और अब बेंगलुरु तक इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिल रही हैं. 10 अक्टूबर को होने वाले प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और बढ़ने की संभावना है.
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ज्ञानेश कुमार सहित तीन चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, प्रक्रिया पर उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की नियुक्तियों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता सूरी पसाला ने इन नियुक्तियों की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
याचिका में 14 मार्च 2024 की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है जिसके जरिए ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था। इसके साथ ही फरवरी 2025 में ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त और विवेक जोशी को चुनाव आयुक्त बनाए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता ने खास तौर पर 2024 में हुई नियुक्तियों के दौरान खोज समिति की ओर से तैयार किए गए नामों के पैनल को लेकर आपत्ति जताई है। याचिका के मुताबिक उस समय चुनाव आयुक्त के दो पद खाली थे। कानून में हर रिक्त पद के लिए पांच नामों का पैनल तैयार किए जाने का प्रावधान है। इस हिसाब से 10 नाम होने चाहिए थे लेकिन खोज समिति ने चयन समिति के सामने सिर्फ छह नाम रखे।
याचिका में 22 मार्च 2024 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी हवाला दिया गया है। इसमें नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अदालत के सामने यह बात आई थी कि चयन समिति के सदस्यों को उम्मीदवारों से जुड़ी पूरी जानकारी पर्याप्त समय पहले मिलनी चाहिए। याचिकाकर्ता का आरोप है कि 14 मार्च 2024 को खोज समिति ने छह नामों की सिफारिश की और उसी दिन चयन समिति ने ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू के नामों को मंजूरी दे दी।
इस याचिका में नियुक्तियों के लिए तय पात्रता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। 2023 के कानून के मुताबिक चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्ति के लिए ऐसे व्यक्ति पात्र हैं, जो भारत सरकार में सचिव या समकक्ष पद पर रह चुके हों और जिन्हें चुनावों के प्रबंधन और संचालन का पर्याप्त ज्ञान एवं अनुभव हो। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि तीनों नियुक्तियों में इन प्रावधानों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच की जानी चाहिए।
सूरी पसाला ने सुप्रीम कोर्ट से नियुक्तियों से जुड़ी खोज समिति और चयन समिति के रिकॉर्ड मंगाने की मांग की है। याचिका में तीनों अधिकारियों के खिलाफ क्वो वारंटो की रिट जारी करने की मांग की गई है। इसके तहत अदालत किसी व्यक्ति से यह स्पष्ट करने को कह सकती है कि वह किस कानूनी अधिकार के तहत किसी सार्वजनिक पद पर बना हुआ है।

 

प्रमुख समाचार

कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट करने का ऐलान किया है। प्रदर्शन को देखते हुए भारतीय रेलवे ने दिल्ली आने वाली सभी मेल और एक्स्प्रेस ट्रेनों को रद्द कर दिया है। सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक सभी ट्रेनें रद्द रहेंगी। भारतीय रेलवे द्वारा दिल्ली आने वाली ट्रेनें रद्द करने पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भड़क गए हैं। पीएम मोदी पर भड़के हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि ‘नरेंद्र मोदी ने आधिकारिक रूप...

मध्य प्रदेश

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अपराध

इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के लसूडिया थाना क्षेत्र में दोस्ती को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। जिस दोस्त ने रहने के लिए छत और खाने के लिए भोजन दिया, साथी ने उसी के घर की अलमारी से 1 करोड़ रुपये से अधिक के सोने के जेवर और नकदी पर हाथ साफ कर दिया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को भोपाल से गिरफ्तार कर लिया है और चोरी किया गया पूरा मशरूका बरामद कर लिया है।पुलिस के अनुसार, बीसीएम पार्क निपानिया निवासी रेनू शर्मा ने...
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गुना सिटी

गुना। (गरिमा टीवी न्यूज़) कुंभराज थानाक्षेत्र के ग्राम बंदरुआ में हुए जानलेवा हमले के शिकार पीड़ित गुरुवार को न्याय की गुहार लगाने एसपी ऑफिस पहुंचा। हाथों में बैसाखी, पैर में फ्रैक्चर और लंगड़ाते हुए पीड़ित और स्वजनों ने शिकायती आवेदन सौंपा। पीड़ितों ने एसपी से आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी और मामले में जान से मारने के प्रयास जैसी धाराएं बढ़ाने की गुहार लगाई।पुलिस अधीक्षक को सौंपे आवेदन में पीड़ित मोहरसिंह गुर्जर उम्र 40 साल ने बताया कि बीते 27 सितंबर को गांव के ही...

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
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गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
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बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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