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पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक किसी न किसी रूप में आरोपी के संपर्क में थे। आरोप है कि आरोपी शराब में सुहागा मिलाकर लोगों को पिलाता था और बाद में उनके अंतिम संस्कार में भी शामिल होता था। शुरुआती जांच में पुरानी रंजिश, विवाद और व्यक्तिगत कारणों को हत्या की वजह माना जा रहा है। फिलहाल आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ जारी है।
बीते तीन महीनों में आठ लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने के बाद ग्रामीणों को घटनाओं में समानता नजर आने लगी। सभी मामलों में शराब पीने के बाद मौत होने का पैटर्न सामने आया। ग्रामीणों ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। इसके बाद पुलिस ने मृतकों की कब्र खुदवाकर जांच कराई, जिससे पूरे घटनाक्रम की परतें खुलनी शुरू हुईं।
पुलिस जांच के दौरान पता चला कि सभी मृतक किसी न किसी तरह आरोपी रामसहाय जायसवाल के संपर्क में थे। ग्रामीणों ने भी शुरुआत से ही उसी पर संदेह जताया था। आगे की जांच में यह जानकारी मिली कि पहली संदिग्ध मौत से पहले आरोपी ने अपनी दुकान में चूहे होने का बहाना बनाकर गांव के लोगों से सुहागा मांगा था। पुलिस का आरोप है कि इसी जहरीले पदार्थ को वह शराब में मिलाकर लोगों को पिलाता था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर जहरीले पदार्थ की टेस्टिंग पहले अपने कुत्ते पर की। कुत्ते की मौत होने के बाद उसे विश्वास हो गया कि यह पदार्थ जानलेवा है। इसके बाद उसने इसी तरीके का इस्तेमाल लोगों पर किया। जांच में यह भी सामने आया कि वारदात के बाद आरोपी मृतकों के अंतिम संस्कार में भी शामिल होता था, जिससे किसी को उस पर संदेह न हो।
जांच के अनुसार, इन हत्याओं के पीछे गाली-गलौज, आपसी विवाद, पत्नी पर गलत नजर रखने का शक और पुरानी रंजिश जैसे कारण सामने आए हैं। पुलिस इन्हीं पहलुओं को आधार बनाकर मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि अब तक मिले साक्ष्य व्यक्तिगत दुश्मनी की ओर इशारा करते हैं और इसी दिशा में जांच आगे बढ़ रही है।
घटनाओं के बाद क्षेत्र में गड़े खजाने और जादू-टोने से जुड़ी चर्चाएं भी सामने आईं। हालांकि पुलिस ने इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में ऐसे किसी पहलू की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है।

बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से शराब दुकान विरोध आंदोलन के बीच एक बेहद अनोखा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां पिछले करीब 80 दिनों से शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर धरने पर बैठी महिलाओं के आंदोलन में उस समय हाई वोल्टेज ड्रामा हो गया, जब एक आंदोलनकारी महिला ने शराब पीकर पहुंचे अपने ही पति को बिजली के खंभे से बांध दिया। इस अनोखी सजा का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
यह घटना बालाघाट शहर के बुढ़ी इलाके का है। यहां स्थानीय महिलाएं लंबे समय से रिहायशी इलाके से शराब दुकान को हटाने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरने पर बैठी है। इसी आंदोलन के बीच जब महिला का पति शराब के नशे में धुत होकर वहां पहुंचा तो पत्नी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। महिला ने बिना देर किए अन्य महिलाओं की मदद से अपने शराबी पति को बीच सड़क पर एक खंभे से बांध दिया। खंभे से बांधे गए व्यक्ति की पहचान संजू चौधरी के रूप में हुई है।
अपने पति को खंभे से बांधने वाली पत्नी का साफ तौर पर कहना है कि इस जानलेवा शराब ने उसके हंसते-खेलते परिवार की सारी खुशियां छीन ली हैं। महिला ने कहा कि जब मैं खुद समाज और अपने घर को बचाने के लिए पिछले 80 दिनों से शराबबंदी की इतनी बड़ी लड़ाई लड़ रही हूं, तब मेरा अपना पति ही शराब पीकर इस आंदोलन की भावना और हमारी तपस्या को कमजोर कर रहा है। इसे सबक सिखाना जरूरी था।

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लोगों ने उखाड़ फेंके घरों में लगाए गए ‘स्मॉर्ट मीटर’, राजगढ़ में बंद मीटर में भी बनती है रीडिंग
राजगढ़। बिजली कंपनी द्वारा लगाए गए स्मॉर्ट मीटर का अनूठा विरोध राजगढ़ जिला मुख्यालय पर किया गया। यहां के रहवासियों और महिलाओं ने घरों में लगे मीटर काट दिए और उन्हें हाथों में लेकर रैली निकाली। नाका नंबर तीन पर ले जाकर उन्हें फेंक दिया। इसके बाद बिजली कंपनी के दफ्तर पहुंचे और वहां विरोध जताया। जमकर नारेबाजी की। बांसावाड़ा क्षेत्र की महिलाएं मंगलवार दोपहर बड़ी संख्या में पहुंची।
बारिश के बीच वे हाथों में मीटर लिए और नारेबाजी करते हुए निकलीं। मैन मार्केट से होकर निकलीं और नारे लगाए कि स्मॉर्ट मीटर हटाए जाएं। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाए कि हमारे बिल चार से पांच गुना आ रहे हैं। बिजली कंपनी के कर्मचारियों ने हमारी एक भी नहीं सुनी और मनमानी करते हुए मीटर लगा दिए, जिससे परेशानी बढ़ गई।
हम गरीब और मजदूर वर्ग के लोग हैं, इतना बिल आखिर कहां से लेकर आएं। इस दौरान रानु तंवर, निर्मला, सुंदर, राधा, रेखा सहित नगर के अन्य लोग मौजूद रहे, नारेबाजी करते हुए बिजली कंपनी के दफ्तर पहुंचे। खास बात यह है कि बारिश होती रही लेकिन महिलाओं और विरोध करने वालों का हौसला कम नहीं हुआ।
शहर के प्रमुख बाजार से होते हुए ब्यावरा नाका होकर सभी महिलाएं और रहवासी बिजली कंपनी के दफ्तर पहुंचे। यहां एसई को उक्त मीटर सौंपने की मांग करने लगे, नारेबाजी की लेकिन सीएम के कार्यक्रम में लगी ड्यूटी के कारण कोई भी बिजली कंपनी का अधिकारी वहां नहीं मिला। इस पर वे नारेबाजी करते रहे। इस दौरान रहवासियों ने बताया कि हमारे 500 रुपए के बिल बढ़कर 5000 से ऊपर हो गए हैं। जिसके बारे में कोई कुछ नहीं सुनता। इसके अलावा हमारे द्वारा निकाल लिए गए मीटर की रीडिंग अभी भी चल रही है। यानी ये मीटर पूरी तरह से फर्जी है।
बिल बहुत ज्यादा आ रहा है, चार-चार हजार रुपए का बिल आते हैं। हमें कुछ नहीं चाहिए हमारे पुराने बिजली के मीटर लगवा दिए जाएं, ताकि हम पर यह मनमानी बिजली का भार न पड़े। एक पंखा, एक बल्ब का बिल इतना आ रहा है कि पहले कभी आया ही नहीं। -राधा पुष्पद, रहवासी, बांसवाड़ा
जब से मीटर लगे हैं, आठ गुना बिल आ रहा है, 700 रुपए का अधिकतम बिला आता था. अब पांच हजार तक पहुंच गया है। कभी छह हजार का आ जाता है। बिजली कंपनी के लोगों ने बिना पूछे मीटर लगा दिए। कहने लगे अभी लगवा लो नहीं तो बाद में पांच हजार अतिरिक्त लगेंगे। -रेखा मेवाड़े, रहवासी, बांसवाड़ा
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सलकनपुर देवी धाम में दान राशि को लेकर विक्रम मस्ताल ने उठाए सवाल, ट्रस्ट ने सभी आरोपों को बताया निराधार
बुधनी। प्रदेश के प्रसिद्ध विजयासन देवी धाम, सलकनपुर के प्रबंधन को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। बुधनी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी एवं अभिनेता विक्रम शर्मा मस्ताल ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय पारदर्शिता और दान राशि के प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं मंदिर ट्रस्ट ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया है।
विक्रम शर्मा मस्ताल ने कहा कि विजयासन देवी धाम प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में दान एवं चढ़ावा प्राप्त होता है। उनका कहना है कि मंदिर के प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और दान राशि के उपयोग में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं के मन में किसी प्रकार का संशय न रहे।
वहीं सलकनपुर देवी धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने मस्ताल द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार और गबन के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि मंदिर समिति का संपूर्ण कार्य पारदर्शी और नियमानुसार संचालित होता है। उन्होंने कहा कि आज तक उनके संज्ञान में गबन का कोई मामला नहीं आया है।
महेश उपाध्याय के अनुसार मंदिर में दान केवल अधिकृत रसीदों एवं दान पेटियों के माध्यम से स्वीकार किया जाता है। दान पेटियां समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों की उपस्थिति में खोली जाती हैं। प्राप्त राशि को सुरक्षित रखा जाता है तथा आवश्यकता होने पर समिति के सदस्यों के समक्ष गिनती कर मंदिर के विकास एवं अन्य आवश्यक कार्यों में नियमानुसार उपयोग किया जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर समिति का पूरा आय-व्यय रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से संधारित किया जाता है और कोई भी नागरिक आकर उसका अवलोकन कर सकता है। ट्रस्ट अध्यक्ष ने कहा कि समिति पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ कार्य कर रही है तथा श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। फिलहाल मंदिर प्रबंधन और पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी के बीच लगाए गए आरोपों और दिए गए स्पष्टीकरण के बाद यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अनुसूचित जाति विकास विभाग के आयुक्त ने उनकी जाति प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर महत्वपूर्ण नोटिस जारी किया है। नोटिस के अनुसार प्रतिमा बागरी को 6 जुलाई को राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने पक्ष में सभी आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। समिति इस मामले से जुड़े अभिलेखों की विस्तार से जांच करेगी।
सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई हाईकोर्ट की ओर से जारी नोटिस के बाद तेज हुई है। कोर्ट द्वारा मामले पर संज्ञान लेने के बाद राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने भी जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। समिति ने स्पष्ट किया है कि मंत्री को अपने जाति संबंधी दावे के समर्थन में सभी मूल और प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे, ताकि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर तथ्यों का परीक्षण किया जा सके। गौरतलब है कि मंत्री बागरी के अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र को लेकर प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने याचिका दायर की है।
इस पूरे मामले में वर्ष 1950 का रिकॉर्ड सबसे अहम माना जा रहा है। समिति ने प्रतिमा बागरी से उस समय की स्थिति के अनुसार जिला सतना का मूल निवासी होने से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इन अभिलेखों के आधार पर यह जांच की जाएगी कि अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया नियमानुसार हुई थी या नहीं।
6 जुलाई को होने वाली बैठक में प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति आगे की कार्रवाई तय करेगी। इस मामले पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है। समिति की जांच और उसके निष्कर्षों के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
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“भगवान भी माफ नहीं करेंगे”, धार में गुस्साए बीजेपी नेता जयभान सिंह पवैया
अयोध्या में श्रीराम मंदिर का चंदा चोरी करनेवालों के प्रति जहां आमजनों का गुस्सा बढ़ रहा है वहीं बीजेपी नेता भी इसके खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। कट्टर सनातनी के रूप में जाने जाते बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने भी इसके विरोध में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने श्रीराम का चंदा चुरानेवालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ऐसे लोगों को भगवान भी माफ नहीं करेंगे। हालांकि जयभानसिंह पवैया ने इस मुद्दे पर भ्रम फैलाने की बात कहते हुए नाराजगी भी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के कुछ राजनीतिक लोगों और सोशल मीडिया द्वारा अयोध्या को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है ताकि राम भक्त अयोध्या न जा पाएं।
जयभान सिंह पवैया मंगलवार को भोजशाला में दर्शन के लिए पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर के बाद भोजशाला के लिए हिंदुओं ने लंबा संघर्ष किया। जयभान सिंह पवैया ने कहा कि इस लड़ाई में मिली जीत की पूरे देश के सनातन समाज में खुशी है। उन्होंने सरस्वती लोक बनाने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा का जिक्र करते हुए उनका आभार भी व्यक्त किया। पवैया ने कहा कि भविष्य में हिंदू धर्म के आस्था से जुड़े धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया जाएगा।
अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चंदा चोरी पर जयभान सिंह पवैया ने गुस्सा जताया। उन्होंने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि अयोध्या को लेकर कुछ राजनीतिक और तथाकथित सोशल मीडिया द्वारा एक भ्रम पैदा किया जा रहा है ताकि राम भक्त अयोध्या न जाएं। साजिशन इस तरह का नॉरेटिव फैलाया जा रहा है लेकिन इससे अयोध्या और भगवान श्रीराम की महिमा कम नहीं हो सकती।
जयभान सिंह पवैया ने कहा कि अयोध्या के मामले में एसआईटी गठित हो चुकी है। जांच भी शुरू हो गई है। जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। पवैया ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने अपराध किया उन्हें भगवान राम सजा देंगे।
जयभान सिंह पवैया का अयोध्या के श्रीराम मंदिर आंदोलन में गहरा योगदान है। विहिप और बजरंग दल के नेता के रूप में उन्होंने कई आंदोलन और प्रदर्शन किए थे। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के समर्थन में जयभान सिंह पवैया देशभर में घूमे। यही कारण है कि उनकी हार्डकोर हिंदूवादी नेता के रूप में छवि बनी। जयभान सिंह पवैया बाद में मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान की सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री भी बने। वे सन 2013 से 2018 तक मंत्री रहे।
जयभान सिंह पवैया को मध्यप्रदेश में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शुमार किया जाता है। ग्वालियर-चंबल अंचल की राजनीति में तो उनका खासा दबदबा रहा है। जयभान सिंह पवैया ग्वालियर से लोकसभा सदस्य भी रह चुके हैं।
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‘भारत के मुसलमान को इंडोनेशिया जाना चाहिए’, पंडित धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान, सौहार्द सीखने की दी सलाह
भोपाल। बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र शास्त्री राम मंदिर चंदा चोरी पर फिर भड़के हैं। उन्होंने संत परम्परा के लोगों को ही सेवा का काम सौंपने की बात कही। साथ ही भारत के मुसलमानों को सौहार्द सीखने के लिए इंडोनेशिया जाने की सलाह दी।है’
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने राम मंदिर में चंदा चोरी पर कहा, राम भक्तों की श्रद्धा पर आघात पहुंचा है। धार्मिक, सनातन परंपराओं से जुड़े लोगों को आघात हुआ है। ऐसे लोग महादण्ड पाएंगे। रावण ने माता जानकी का हरण किया था उसका सर्वनाश हुआ है। राम मंदिर की इस घटना के बाद संत परंपरा के लोगों को ही सेवा का काम सौंपा जाए।
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भारत के मुसलमान को इंडोनेशिया जाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भारत के मुसलमान को इंडोनेशिया के मुसलमान से सौहार्द सीखना चाहिए। वहां पांच टाइम का नमाज पढ़ा जाता है। सभी परंपराओं का सम्मान किया जाता है। बाली में हिंदुत्व बाहुल्य लोग रहते हैं। वहां हिंदू अपने नववर्ष पर 24 घंटे निर्जला व्रत, मौन व्रत करता हैं। वहां के मुसलमान माइक से आजान नहीं पढ़ते हैं। हिंदुओ का सपोर्ट करते हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली दंगा के आरोपी उमर खालिद का नाम लेकर विवादित बयान दिया है। अभिजीत दिपके के विवादित बयान के बाद बवाल मच गया है। सीजेपी फाउंडर अभिजीत दिपके ने इंटरव्यू में कहा कि अगर मैं खालिद या मुसलमान होता तो जेल में बंद होता। इसकी मुझे अवेयरनेस है। अभिजीत दिपके के इस बयान ने नई बहस छेड़ दी है।
बता दें कि अभिजीत दिपके शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत NEET, NTA में धांधली, SSC पेपर लीक समेत कई मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। अभिजीत दिपके को सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक का समर्थन मिला है। उनके आंदोलन में नीट पेपर लीक के बाद सुसाइड करने वाले छात्रों के परिजन भी पहुंच रहे हैं।
वहीं जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे सीजेपी फाउंडर अभिजीत दिपके ने एक इंटरव्यू में विवादित बयान दे डाला। सीजेपी फाउंडर ने कहा कि अगर मैं खालिद होता या मुसलमान होता तो अब तक मैं जेल में होता। इसकी मुझे अवेयरनेस है। उनके इस बयान के बाद लोग उमर खालिद को लेकर चर्चा करने लगे हैं, जोकि दिल्ली दंगों के आरोप में करीब पांच साल से जेल में बंद है। सुप्रीम कोर्ट से भी खालिद को जमानत नहीं दी है।
दिपके ने कहा कि मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि सत्ता में बैठे लोग इतने उदासीन और अहंकारी कैसे हो सकते हैं कि उन्हें उन परिवारों से संपर्क करने की भी जरूरत महसूस नहीं होती। न्होंने कहा कि आप उनके बच्चों को वापस नहीं ला सकते, लेकिन कम से कम इतना तो कर सकते हैं कि उनके परिवारों से मिलकर खेद व्यक्त करें और माफी मांगें।
अभिजीत दिपके ने छात्रों के सुसाइड मामलों का जिक्र करते हुए सरकार की उदासीनता की आलोचना की और उस पर पीड़ित परिवारों से संपर्क नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने एक्स पर कहा कि दीप मेघवाल, आकांक्षा चतुर्वेदी, अमायरा कुमार और कहान पटेल- के नाम लेते हुए कहा कि उनके परिवारों को न्याय के लिए भीख मांगने की स्थिति में छोड़ दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के किसी भी प्रतिनिधि ने उनके परिवारों से संपर्क करके बच्चों की मौत पर खेद तक व्यक्त नहीं किया।

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आठ मौतों के पीछे अंधविश्वास या कोई गहरी साजिश: शराब पार्टी के बाद क्या हुआ?
पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक किसी न किसी रूप में आरोपी के संपर्क में थे। आरोप है कि आरोपी शराब में सुहागा मिलाकर लोगों को पिलाता था और बाद में उनके अंतिम संस्कार में भी शामिल होता था। शुरुआती जांच में पुरानी रंजिश, विवाद और व्यक्तिगत कारणों को हत्या की वजह माना जा रहा है। फिलहाल आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ जारी है।
बीते तीन महीनों में आठ लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने के बाद ग्रामीणों को घटनाओं में समानता नजर आने लगी। सभी मामलों में शराब पीने के बाद मौत होने का पैटर्न सामने आया। ग्रामीणों ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। इसके बाद पुलिस ने मृतकों की कब्र खुदवाकर जांच कराई, जिससे पूरे घटनाक्रम की परतें खुलनी शुरू हुईं।
पुलिस जांच के दौरान पता चला कि सभी मृतक किसी न किसी तरह आरोपी रामसहाय जायसवाल के संपर्क में थे। ग्रामीणों ने भी शुरुआत से ही उसी पर संदेह जताया था। आगे की जांच में यह जानकारी मिली कि पहली संदिग्ध मौत से पहले आरोपी ने अपनी दुकान में चूहे होने का बहाना बनाकर गांव के लोगों से सुहागा मांगा था। पुलिस का आरोप है कि इसी जहरीले पदार्थ को वह शराब में मिलाकर लोगों को पिलाता था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर जहरीले पदार्थ की टेस्टिंग पहले अपने कुत्ते पर की। कुत्ते की मौत होने के बाद उसे विश्वास हो गया कि यह पदार्थ जानलेवा है। इसके बाद उसने इसी तरीके का इस्तेमाल लोगों पर किया। जांच में यह भी सामने आया कि वारदात के बाद आरोपी मृतकों के अंतिम संस्कार में भी शामिल होता था, जिससे किसी को उस पर संदेह न हो।
जांच के अनुसार, इन हत्याओं के पीछे गाली-गलौज, आपसी विवाद, पत्नी पर गलत नजर रखने का शक और पुरानी रंजिश जैसे कारण सामने आए हैं। पुलिस इन्हीं पहलुओं को आधार बनाकर मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि अब तक मिले साक्ष्य व्यक्तिगत दुश्मनी की ओर इशारा करते हैं और इसी दिशा में जांच आगे बढ़ रही है।
घटनाओं के बाद क्षेत्र में गड़े खजाने और जादू-टोने से जुड़ी चर्चाएं भी सामने आईं। हालांकि पुलिस ने इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में ऐसे किसी पहलू की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है।
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एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का बड़ा बयान, अभी प्रयोग के दौर में है योजना
नई दिल्ली. पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की राष्ट्रीय नीति को लेकर दायर एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम अभी एक सतत प्रयोग की प्रक्रिया है और इसके वास्तविक परिणाम अगले वर्ष तक अधिक स्पष्ट रूप से सामने आएंगे. मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की अवकाशकालीन पीठ ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है. यह मामला कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें तेल विपणन कंपनियों को वर्ष 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन बढ़ाने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था.
मामले में भारत पेट्रोलियम निगम लिमिटेड ने कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. कंपनी का कहना है कि यदि न्यायालय के निर्देश के अनुसार एथेनॉल आवंटन में बदलाव किया जाता है तो इससे पूरे देश में लागू एथेनॉल मिश्रण नीति प्रभावित हो सकती है. भारत सरकार की ओर से महान्यायवादी आर. वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम एक दीर्घकालिक नीति का हिस्सा है और इसकी सफलता का समग्र मूल्यांकन अभी किया जाना बाकी है. उन्होंने अदालत को बताया कि अगले वर्ष तक इस नीति के प्रभावों का अधिक स्पष्ट आकलन संभव होगा.
सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि वर्ष 2025-26 के लिए एथेनॉल आपूर्ति से संबंधित अनुबंध अक्टूबर 2025 में ही अंतिम रूप दिए जा चुके थे. 17 अक्टूबर 2025 को आवंटन प्रक्रिया पूरी होने के बाद देशभर के 378 आपूर्तिकर्ताओं को कुल 1,050 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति का आवंटन किया गया था. इनमें से 18 जून 2026 तक लगभग 680 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की जा चुकी है. सरकार का तर्क है कि इस स्तर पर आवंटन व्यवस्था में बदलाव करने से राष्ट्रीय स्तर पर लागू नीति और आपूर्ति श्रृंखला दोनों प्रभावित हो सकती हैं.
भारत में वर्तमान में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण की नीति लागू है, जिसे सामान्य रूप से ई-20 ईंधन कहा जाता है. केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति में संशोधन करते हुए चरणबद्ध तरीके से एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया था. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वर्ष 2022-23 में 12.06 प्रतिशत, वर्ष 2023-24 में 14.60 प्रतिशत तथा वर्ष 2024-25 में लगभग 18 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य रखा गया था. बाद में सरकार ने 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य भी प्राप्त कर लिया.
हालांकि, सरकार ने अभी तक आधिकारिक रूप से 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण लागू करने का कोई निर्णय नहीं लिया है. इसके बावजूद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समय-समय पर भविष्य में एथेनॉल मिश्रण की मात्रा और बढ़ाने की संभावना का संकेत दे चुके हैं. उन्होंने अधिक एथेनॉल आधारित ईंधन के उपयोग को ऊर्जा सुरक्षा, आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है.
एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को लेकर देश में लंबे समय से बहस भी जारी है. कुछ वाहन विशेषज्ञों और उपभोक्ताओं का मानना है कि अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का उपयोग पुराने वाहनों की कार्यक्षमता और ईंधन दक्षता को प्रभावित कर सकता है. कुछ लोगों ने इंजन पर संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की है. हालांकि केंद्र सरकार लगातार यह स्पष्ट करती रही है कि उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से वाहनों को यांत्रिक क्षति होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है.
वर्तमान मामला तब शुरू हुआ जब एक एथेनॉल उत्पादक इकाई ने कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका दायर कर वर्ष 2025-26 के लिए किए गए एथेनॉल आवंटन को चुनौती दी. याचिकाकर्ता का कहना था कि उसकी उत्पादन क्षमता लगभग 9.9 करोड़ लीटर प्रतिवर्ष है, जबकि उसे केवल 3.92 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति का आवंटन दिया गया. कंपनी ने इसे अनुचित बताते हुए आवंटन बढ़ाने की मांग की थी.
मामले की सुनवाई के बाद कर्नाटक हाई कोर्ट ने भारत पेट्रोलियम निगम लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम निगम लिमिटेड और इंडियन ऑयल निगम लिमिटेड को वर्ष 2025-26 के लिए संबंधित इकाई के एथेनॉल आवंटन में वृद्धि पर विचार करने का निर्देश दिया था. तेल विपणन कंपनियों ने इस आदेश का विरोध करते हुए कहा कि किसी एक उत्पादक के पक्ष में आवंटन बढ़ाने से पूरी राष्ट्रीय नीति में बदलाव करना पड़ेगा और इससे अन्य आपूर्तिकर्ताओं के साथ भी असमानता उत्पन्न हो सकती है.
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत से कहा कि एथेनॉल आवंटन की प्रक्रिया राष्ट्रीय नीति और व्यापक योजना के आधार पर तय की गई है. इसलिए किसी एक मामले में हस्तक्षेप से संपूर्ण नीति प्रभावित हो सकती है. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है, जिससे वर्तमान व्यवस्था में तत्काल कोई परिवर्तन नहीं होगा.
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम भारत की ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है. इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर उपलब्ध कराना, गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों से जैव ईंधन उत्पादन को बढ़ावा देना तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना है. दूसरी ओर वाहन उद्योग और उपभोक्ताओं के एक वर्ग का मानना है कि एथेनॉल मिश्रण की मात्रा बढ़ाने से पहले उसके दीर्घकालिक प्रभावों का व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक है.
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर सभी पक्षों की निगाहें टिकी हैं. अदालत का अंतिम निर्णय न केवल संबंधित एथेनॉल उत्पादक और तेल विपणन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि देश की एथेनॉल मिश्रण नीति और जैव ईंधन कार्यक्रम की भविष्य की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है. फिलहाल केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम अभी मूल्यांकन की प्रक्रिया में है और इसके व्यापक परिणामों का वास्तविक आकलन अगले वर्ष तक सामने आने की संभावना है.

राजगढ़ । राजगढ़ जिले में शादी के नाम पर कथित ठगी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए विवाह कराने का मामला सामने आया है। खुजनेर क्षेत्र के ग्राम बांसखेड़ा निवासी एक युवक की आठ माह पहले झारखंड की युवती से शादी कराई गई थी। अब युवती के परिजनों ने उसे नाबालिग बताते हुए झारखंड में अपहरण की शिकायत दर्ज करा दी है। इसके बाद झारखंड पुलिस रविवार को खुजनेर पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से युवती और उसके पति को अपने साथ ले गई।
जानकारी के अनुसार बांसखेड़ा निवासी युवक रंगलाल की शादी अक्टूबर 2025 में झारखंड की एक युवती से कराई गई थी। आरोप है कि शादी कराने के एवज में बिचौलियों द्वारा करीब दो लाख रुपए लिए गए थे। विवाह के दौरान युवती का आधार कार्ड भी प्रस्तुत किया गया था। बताया जा रहा है कि जून माह में युवती के माता-पिता ने झारखंड के भगवानपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए अपनी बेटी को नाबालिग बताया और उसके अपहरण की आशंका जताई।
शिकायत के आधार पर झारखंड पुलिस ने मामले में शामिल दो युवकों और एक महिला को हिरासत में लिया। उक्त महिला खुद को युवती की मौसी बता रही थी। रविवार को झारखंड पुलिस उक्त महिला के साथ खुजनेर थाने पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से बांसखेड़ा गांव जाकर युवती और उसके पति को अपने साथ थाने लेकर आई। इस दौरान युवती ने पुलिस के सामने कहा कि उसकी शादी उसकी रिश्तेदारी में रहने वाली महिला के माध्यम से हुई थी और वह अपने पति के साथ ही रहना चाहती है। युवती ने अपनी उम्र 21 वर्ष बताई।
इधर जैसे ही युवती और उसके पति को पुलिस थाने लाई, बांसखेड़ा गांव के बड़ी संख्या में ग्रामीण खुजनेर थाने पहुंच गए। ग्रामीणों का कहना था कि यदि युवती अपनी इच्छा से पति के साथ रहना चाहती है तो उसे साथ क्यों ले जाया जा रहा है। हालांकि पुलिस ने ग्रामीणों को बताया कि शादी के समय प्रस्तुत किया गया आधार कार्ड फर्जी प्रतीत हो रहा है तथा युवती के पिता ने उसे नाबालिग बताया है। ऐसे में उम्र का सत्यापन और बयान की प्रक्रिया झारखंड में ही पूरी होगी। यदि जांच और दस्तावेजों में युवती बालिग पाई जाती है तो उसके बयान और इच्छा के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राजगढ़ में महिला- पुरुष प्रतिशत प्रति एक हजार पुरुष 956 है। इस आंकड़े के साथ ही जिले में लड़कियों की कमी रहती है। इसीलिए यहां पहले मप्र के बैतूल जिले से लड़कियां लाई जाती थीं। इसके बाद बिहार से रुपए देकर लाने का ट्रेंड शुरू हुआ। यहां रुपए देकर उसके बदले में युवतियों को लाकर बिचौलिए विवाह करवाते हैं। कानून तौर पर यह मामला खरीद-फरोख्त से जुड़ा माना जाता है। इसमें कई बार बिचौलिए नाबालिगों की भी शादी करवा देते हैं। ऐसे असंख्य मामले जिले में सामने आ चुके हैं। यह एक तरह का ट्रेंड जिले में बन चुका है।
इनका कहना है-
लड़के के परिजनों को समझाइश दी गई है कि युवती की उम्र की जांच और उसके बयान झारखंड में होंगे। आगे की कार्रवाई और निर्णय वहीं की पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा। -रवि ठाकुर, थाना प्रभारी, खुजनेर

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बंदूक की नोक पर सराफा व्यापारी से लाखों के जेवर लूटे, विरोध करने पर सिर पर बरसाईं लाठियां
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में शनिवार रात एक सराफा व्यापारी के साथ हुई लूट की वारदात ने इलाके में दहशत फैला दी। लांजी-आमगांव मार्ग पर हथियारबंद बदमाशों ने कामना ज्वेलर्स के संचालक कपिल आसटकर को निशाना बनाया। घटना उस समय हुई, जब वह रोज की तरह दुकान बंद कर सोने-चांदी के जेवरों से भरे दो बैग लेकर अपने घर जा रहे थे। बदमाशों ने उन्हें घेरकर लूट की कोशिश की और विरोध करने पर जानलेवा हमला कर दिया।
पीड़ित व्यापारी के अनुसार, जब उन्होंने बैग छोड़ने से इनकार किया तो आरोपियों ने पहले बंदूक से हवाई फायरिंग की, जिससे आसपास दहशत फैल गई। इसके बाद एक बदमाश ने उनके सिर पर लगातार कई बार लाठी से हमला किया। गंभीर चोट लगने के कारण वह बाइक सहित सड़क पर गिर पड़े। इसी दौरान बदमाश दोनों बैग लेकर आमगांव रोड की ओर फरार हो गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लूटे गए जेवरों की कीमत करीब 8 से 9 लाख रुपये बताई जा रही है।
घटना के बाद घायल कपिल आसटकर को उनके परिजन तुरंत लांजी के सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक इलाज के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए महाराष्ट्र के गोंदिया रेफर कर दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक पुलिस ने आधिकारिक तौर पर आरोपियों की पहचान या लूट की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
जांच एजेंसियां आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं और वारदात के समय उस इलाके से गुजरने वाले लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बदमाश पहले से व्यापारी की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे और उन्हें इस बात की जानकारी थी कि वह रोजाना दुकान बंद करने के बाद जेवर अपने साथ घर ले जाते हैं। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं आरोपियों को व्यापारी की दिनचर्या की पहले से जानकारी तो नहीं थी। फिलहाल इलाके में नाकाबंदी कर संदिग्धों की तलाश तेज कर दी गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लांजी क्षेत्र में सराफा व्यापारी के साथ इस तरह की यह पहली बड़ी लूट की घटना है। इसलिए व्यापारियों में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। व्यापारिक संगठनों का मानना है कि यदि बाजार और संवेदनशील इलाकों में रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाई जाए तो ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। कई व्यापारियों ने कीमती सामान ले जाने के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने की भी मांग की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में सराफा कारोबारियों को निशाना बनाकर लूट की घटनाओं में सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है। दुकान बंद करने के समय तय रूट बदलना, सुरक्षा इंतजाम मजबूत करना और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद लेना ऐसे कदम हैं, जो जोखिम को कम कर सकते हैं। फिलहाल इस मामले में पुलिस आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। व्यापारियों और स्थानीय लोगों की नजर अब इस बात पर है कि पुलिस इस हाई-प्रोफाइल लूटकांड का खुलासा कब तक कर पाती है।
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जमीन विवाद सुलझाने पहुंची पुलिस टीम पर हमलाः कमिश्नर की फटकार के बाद FIR दर्ज, 4 आरोपी गिरफ्तार
इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र से पुलिस टीम पर हमले की एक बड़ी घटना सामने आई है। कनाड़िया इलाके की डायमंड कॉलोनी में जमीन विवाद सुलझाने पहुंची पुलिस टीम पर कुछ असामाजिक तत्वों ने हमला कर दिया। इस हमले में दो पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर की सख्त फटकार के बाद आनन-फानन में एफआईआर (FIR) दर्ज कर चारों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
जानकारी के अनुसार, कनाड़िया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली डायमंड कॉलोनी में एक जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई थी। घटना वाले दिन पुलिस को इस जमीन विवाद की सूचना मिली थी, जिसके बाद स्थिति को संभालने और मामला शांत कराने के लिए पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची थी। लेकिन वहां मौजूद आरोपियों ने पुलिस टीम पर ही हमला बोल दिया।ह मले में दो आरक्षक विजयपाल सिकरवार और आशीष शर्मा घायल हुए थे।
घटना के बाद शुरुआत में मामले को लेकर ढिलाई बरती जा रही थी, लेकिन जैसे ही यह बात पुलिस कमिश्नर के संज्ञान में आई, उन्होंने कड़ा रुख अपनाया। कमिश्नर की सख्त फटकार के बाद कनाड़िया थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई और शासकीय कार्य में बाधा डालने व पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करने की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस मामले में संलिप्त चारों आरोपियों मोहसिन मुश्ताक अली2. मोहम्मद अफजल शेख मोहम्मद लियाकत 3. दर्शन राधेश्याम 4.चंदन वर्मा सुरेश वर्मा शामिल है।

प्रमुख समाचार

पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक किसी न किसी रूप में आरोपी के संपर्क में थे। आरोप है कि आरोपी शराब में सुहागा मिलाकर लोगों को पिलाता था और बाद में उनके अंतिम संस्कार में भी शामिल होता था। शुरुआती जांच में पुरानी रंजिश, विवाद और व्यक्तिगत कारणों को हत्या की वजह माना जा रहा है। फिलहाल आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ जारी है।बीते तीन महीनों में आठ लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने के बाद ग्रामीणों को घटनाओं में समानता नजर आने लगी। सभी मामलों...

मध्य प्रदेश

बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से शराब दुकान विरोध आंदोलन के बीच एक बेहद अनोखा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां पिछले करीब 80 दिनों से शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर धरने पर बैठी महिलाओं के आंदोलन में उस समय हाई वोल्टेज ड्रामा हो गया, जब एक आंदोलनकारी महिला ने शराब पीकर पहुंचे अपने ही पति को बिजली के खंभे से बांध दिया। इस अनोखी सजा का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।यह घटना बालाघाट शहर के बुढ़ी इलाके का...

अपराध

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अनुसूचित जाति विकास विभाग के आयुक्त ने उनकी जाति प्रमाण पत्र की वैधता को लेकर महत्वपूर्ण नोटिस जारी किया है। नोटिस के अनुसार प्रतिमा बागरी को 6 जुलाई को राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने पक्ष में सभी आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। समिति इस मामले से जुड़े अभिलेखों की विस्तार से जांच...
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गुना सिटी

गुना।(गरिमा टीवी न्यूज़) गुना जिले के चांचौड़ा थाना क्षेत्रों में चोरी की वारदात सामने आई हैं, जहां अज्ञात चोरों ने एक ट्रैक्टर पर हाथ साफ कर दिया। पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत पर अज्ञात चोरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।घटना चांचौड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम ऊदोखेड़ी की है। फरियादी ईश्वर सिंह सेन निवासी कनकानेहरू ने बताया कि उन्होंने ऊदोखेड़ी स्थित अपने खेत पर नया मकान और ट्रैक्टर रखने के लिए गैराज बनवाया है। गत दोपहर करीब 2 बजे वे...

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
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गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
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गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
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बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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