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खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के कसरावद थाना क्षेत्र अंतर्गत भीलगांव में एक बड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है। 16 मार्च की शाम उद्योगपति और किसान कारोबारी दिलीप सिंह राठौर के घर के बाहर तीन बाइक सवार नकाबपोश बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग की, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। पूरी घटना घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना के समय दिलीप राठौर और उनका परिवार इंदौर में था, जिसके कारण घर पर कोई नहीं था। फायरिंग के बाद बदमाश मौके से फरार हो गए। पुत्र सत्येंद्र राठौर ने कसरावद थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिस पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने घर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी है और एहतियाती तौर पर बल तैनात किया गया है।सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों ने इस घटना की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उन्होंने दिलीप राठौर से 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी है। पोस्ट में ‘हैरी बॉक्सर’ नाम से जुड़े व्यक्ति का जिक्र है, जिसके नाम पर धमकी दी गई है। गैंग ने जान से मारने की भी धमकी दी है।एडिशनल एसपी शकुंतला रुहल ने गुरुवार को मीडिया को बताया कि घटना की पुष्टि हो चुकी है। साइबर सेल टीम सोशल मीडिया पोस्ट और वायरल वीडियो की जांच में जुटी हुई है। यह पता लगाया जा रहा है कि पोस्ट असली है या फर्जी, और गैंग से जुड़े तार कितने मजबूत हैं। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की जांच शुरू कर दी है और संभावित आरोपियों की तलाश जारी है।

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डॉक्टरों की लापरवाही: जिंदा नवजात को मृत बताकर डेथ सर्टिफिकेट किया जारी, बच्ची निकली जीवित
भोपाल। राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां डॉक्टरों ने डिलीवरी के बाद नवजात बच्ची को मृत घोषित कर परिजनों को सौंप दिया। परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने बच्ची का मृत्यु प्रमाण पत्र (डेथ सर्टिफिकेट) भी जारी कर दिया, जिसके बाद परिवार कफन-दफन की तैयारी में जुट गया था।
परिजनों के अनुसार, प्रसव के बाद बच्ची को मरा हुआ बताकर उन्हें सौंपा गया। घर पहुंचकर जब वे अंतिम संस्कार की तैयारियां कर रहे थे, तभी लगभग 4 घंटे बाद बच्ची के शरीर में हरकत दिखी। यह देखकर परिवार स्तब्ध रह गया और तुरंत बच्ची को वापस हमीदिया अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में बच्ची को आईसीयू में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश इलाज के दौरान नवजात की मौत हो गई।
परिजनों ने अस्पताल की लापरवाही पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डॉक्टरों ने बच्ची की सही जांच नहीं की और जल्दबाजी में मृत घोषित कर दिया। उन्होंने बताया कि अगर समय पर सही इलाज मिलता तो शायद बच्ची बच सकती थी। इस घटना से परिजनों में रोष है और वे अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की है। हमीदिया अस्पताल की HOD (हेड ऑफ डिपार्टमेंट) डॉ. शबाना परवेज ने जांच के लिए एक डॉक्टरों की कमेटी गठित कर दी है। कमेटी यह पता लगाएगी कि लापरवाही कहां और क्यों हुई, नवजात को मृत समझकर क्यों सौंपा गया। घटना के समय ड्यूटी पर तैनात जूनियर डॉक्टर और मौके पर मौजूद अन्य स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
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भोजशाला में ‘जैन धर्मस्थल’ होने का दावा: हिंदू-मुस्लिम के बाद जैन समाज की हुई एंट्री, दायर की याचिका
इंदौर। मध्य प्रदेश के धार जिले के बहुचर्चित भोजशाला मामले में हिंदू-मुस्लिम के बाद अब जैन समाज की भी एंट्री हुई है। इंदौर हाईकोर्ट में जैन समाज की ओर से याचिका दायर की गई है। जैन समाज का दावा है कि सर्वे के दौरान जैन धर्मस्थल होने के प्रमाण मिले हैं। हाईकोर्ट जल्द ही जैन समाज की याचिका पर सुनवाई कर सकता है।
हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट पर पक्षकारों से दावे, आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। सभी पक्षों की ओर से दिए गए जवाबों पर बहस हुई। 23 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए सभी पक्षकारों को निर्देश दिए थे कि वे रिपोर्ट का अध्ययन कर अपने दावे, आपत्तियां और सुझाव अदालत में पेश करें।
इसके बाद हिंदू पक्ष, मुस्लिम पक्ष और अन्य प्रतिवादियों की ओर से अलग-अलग आवेदन और आपत्तियां कोर्ट में दाखिल की गई हैं, जिन पर बीते 16 मार्च को सुनवाई है। इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ में लगभग डेढ़ घंटे तक बहस चली। इसी दौरान HC ने कहा कि कोर्ट खुद 2 अप्रैल से पहले भोजशाला जाकर परिसर देखेगी। इस केस की अगली सुनवाई 2 अप्रैल से निर्धारित की गई है। इसी बीच अब जैन समाज ने याचिका लगाई है। जिसमें दावा किया गया है कि ASI के सर्वे के दौरान जैन धर्मस्थल होने के सबूत मिले हैं। बताया जा रहा है कि अदालत इस पर जल्द सुनवाई कर सकती है।

जबलपुर. एमपी के जबलपुर में महिला के साथ दो करोड़ 27 लाख रुपए की ठगी करने के आरोपियों को साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार कर लिया है. शेयर बाजार में निवेश के नाम पर ठगी करने वाले तीनों आरोपी हरियाणा के पानीपत और मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर के रहने वाले हैं. महिला की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच की गई.
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जबलपुर निवासी एक महिला को प्रतिदिन 5 प्रतिशत और दीर्घकालिक निवेश पर 500 प्रतिशत तक रिटर्न का लालच दिया गया. आरोपियों ने शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के नाम पर निवेश कराने का झांसा देकर 2 करोड़ 27 लाख रुपए की ठगी की. जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी कंपनी बनाकर कई करंट अकाउंट खुलवाए. इन खातों के जरिए ठगी की रकम अलग.अलग खातों में ट्रांसफर की गई.
एक खाते से 20 लाख रुपए साथियों को भेजे गए. आरोपी अभिषेक विश्वकर्मा को नागपुर केंद्रीय जेल से प्रोडक्शन वारंट पर जबलपुर लाकर गिरफ्तार किया गया. वह पहले से नागपुर और मुंबई के साइबर फ्रॉड मामलों में आरोपी है. अन्य आरोपी रोहित भगोरिया और तरुण की निशानदेही पर उसकी संलिप्तता सामने आई. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि गारंटीड रिटर्न के झांसे में न आएं. अनजान लोगों या सोशल मीडिया ग्रुप से निवेश सलाह न लें. केवल ैम्ठप् रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें और संदिग्ध मामलों की सूचना हेल्पलाइन 1930 या साइबर सेल को दें.
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धार भोजशालाः इंदौर हाईकोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने हाई सिक्योरिटी के साथ किया अवलोकन
धार। मध्यप्रदेश के धार की ऐतिहासिक भोजशाला में आज इंदौर हाईकोर्ट से एक प्रतिनिधिमंडल हाई सिक्योरिटी के साथ पहुंचा। भोजशाला का अवलोकन किया और रवाना हो गया।
बता दें कि धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला का 98 दिन आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के द्वारा वैज्ञानिक सर्वे किया गया है। इस वैज्ञानिक सर्वे की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर माननीय हाईकोर्ट में पटल पर प्रस्तुत की जा चुकी है। याचिकाकर्ता आम पक्षकारों को इसकी कॉपी भी उपलब्ध करवा दी गई है। माननीय हाईकोर्ट ने अगली तारीख 2 अप्रैल निर्धारित की है।
इसके पूर्व हाईकोर्ट के न्यायाधीश धार स्थित भोजशाला में 2 अप्रैल के पूर्व ग्राउंड जीरो पर पहुंचेंगे। सूत्रों की मानें तो उसके पूर्व हाईकोर्ट से एक दल पूर्वालोकन के लिए धार स्थित भोजशाला निरीक्षण के लिए पहुंचा। हालांकि इस मौके पर ASI के प्रशांत पाटणकर, धार एसडीएम राहुल गुप्ता, सीएसपी सुजावल जग्गा तहसीलदार सहित पुलिस का अमला मौके पर मौजूद रहा।
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बड़ी खबरः कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, अगली सुनवाई तक मिला स्टे
भोपाल। मध्यप्रदेश के बहुचर्चित कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। अगली सुनवाई तक मुकेश मल्होत्रा को स्टे मिल गया है। मामले में अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी। उन्हें 23 जुलाई तक राहत मिली है। मुकेश मल्होत्रा की तरफ से वरिष्ठ वकील एवं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने पैरवी की।
बता दें कि ग्वालियर हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा के चुनाव को शून्य घोषित किया था। मुकेश मल्होत्रा को 15 दिन का समय ग्वालियर हाईकोर्ट ने दिया था। आज सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। मुकेश मल्होत्रा ग्वालियर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का ने दरवाजा खटखटाया था। ग्वालियर हाईकोर्ट ने 15 दिन में सुप्रीम कोर्ट जाने का समय दिया था।
बीते 9 मार्च को ग्वालियर हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा का चुनाव शून्य घोषित किया था। उनके खिलाफ चुनावी हलफनामे में क्रिमिनल केस छुपाने का आरोप है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच में याचिका पर सुनवाई हुई। मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा में वोट नहीं कर पाएंगे। मानदेय भी नहीं मिलेगा। वे विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हो सकेंगे।

सूरत। डिजिटल ट्रांजेक्शन के दौर में तकनीकी खामी कभी-कभी बैंकों पर भारी पड़ जाती है। सूरत के एक ग्राहक के साथ हुई एटीएम की गड़बड़ी बैंक ऑफ बड़ौदा के लिए इतनी महंगी साबित हुई कि अब उसे मूल राशि से लगभग 30 गुना ज्यादा हर्जाना भरना पड़ रहा है। 9 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कंज्यूमर कोर्ट ने बैंक की लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए फैसला सुनाया है।
मामला फरवरी 2017 का है, जब एक ग्राहक ने सूरत के उधना इलाके में एसबीआई (SBI) के एटीएम से अपने बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से 10,000 रुपये निकालने की कोशिश की। मशीन से न तो पैसे निकले और न ही कोई रसीद मिली, लेकिन ग्राहक के मोबाइल पर राशि कटने का मैसेज आ गया।
ग्राहक ने 21 फरवरी 2017 को डुम्भल ब्रांच में लिखित शिकायत दी, कई ईमेल किए और यहां तक कि सीसीटीवी फुटेज के लिए आरटीआई (RTI) का भी सहारा लिया। बैंक ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि ट्रांजेक्शन सफल दिख रहा है और एटीएम दूसरे बैंक का था। हार मानकर ग्राहक ने 20 दिसंबर 2017 को कंज्यूमर फोरम का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान कंज्यूमर कमीशन ने बैंक की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरबीआई (RBI) के नियमों के अनुसार, ट्रांजेक्शन फेल होने पर बैंक को 5 दिनों के भीतर पैसा वापस करना चाहिए था। बैंक ने न तो पैसा लौटाया और न ही ट्रांजेक्शन का कोई ठोस सबूत पेश किया। कोर्ट ने पाया कि 26 फरवरी 2026 तक रिफंड में कुल 3,288 दिनों की देरी हुई है।
जुर्माने का गणित: ₹10,000 के बदले ₹3.5 लाख
कंज्यूमर कमीशन ने बैंक ऑफ बड़ौदा को निम्नलिखित भुगतान करने का आदेश दिया...
मूल राशि: ₹10,000 (9% वार्षिक ब्याज के साथ)।
विलंब शुल्क: ₹100 प्रति दिन के हिसाब से (3,288 दिनों के लिए) कुल ₹3,28,800।
मानसिक प्रताड़ना: ₹3,000 का अतिरिक्त हर्जाना।
कानूनी खर्च: ₹2,000 अदालती कार्यवाही के लिए।
इस तरह 10 हजार रुपये की छोटी सी रकम के लिए बैंक को अब करीब 3.5 लाख रुपये चुकाने होंगे। यह फैसला उन ग्राहकों के लिए बड़ी जीत है जो बैंकिंग सेवाओं में तकनीकी खामियों का शिकार होते हैं।
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लोन फ्रॉड केस में अनिल अंबानी से CBI की पूछताछ, 2929 करोड़ के घोटाले का है मामला
एसबीआई के 2929 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड मामले में सीबीआई ने अनिल अंबानी से पूछताछ की है। इसके अलावा, उनके बेटे से जुड़े एक अन्य बैंक धोखाधड़ी केस की जांच भी जारी है, जिससे रिलायंस ग्रुप की कंपनियों पर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है।
उद्योगपति अनिल अंबानी से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में पूछताछ की। यह जांच रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड (आरकॉम) से जुड़े कथित लोन फ्रॉड मामले में की जा रही है। बता दें कि मामला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर पर आधारित है, जिसमें करीब 2929 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है।
जांच एजेंसी के अनुसार, बैंक से लिए गए कर्ज के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर यह कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। शिकायत के मुताबिक, आरकॉम पर कई बैंकों का 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है, जिसमें अकेले एसबीआई को करीब 2929 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
इस पूरे मामले को लेकर हाल ही में अनिल अंबानी के बेटे जय अनमोल अंबानी से भी सीबीआई ने पूछताछ की थी। यह जांच रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े 228 करोड़ रुपये के कथित बैंक फ्रॉड मामले में हुई। इस केस में पूर्व सीईओ रविंद्र सुधालकर समेत अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज है। यह कार्रवाई यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर की गई थी, जिसमें बैंक को भारी वित्तीय नुकसान का आरोप लगाया गया है।
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मिजोरम में गिरफ्तार US-यूक्रेन के नागरिकों पर बड़ा खुलासा, भारत के खिलाफ रच रहे थे बहुत बड़ी साजिश
मिजोरम में एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू और छह यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। ये सभी बिना अनुमति भारत-म्यांमार सीमा में अवैध गतिविधियों में संलिप्त थे। जानकारी के अनुसार, मैथ्यू कुछ ईसाई संगठनों से चंदा इकट्ठा कर रहा था, जिसका इस्तेमाल शायद विद्रोही समूहों को वित्तीय मदद देने के लिए हो रहा था। यह मामला तब उजागर हुआ जब इन सभी को संदिग्ध गतिविधियों के तहत पकड़ा गया। यह स्पष्ट है कि इनकी गतिविधियों में भारत के खिलाफ साजिश के तत्व शामिल हो सकते हैं। अमेरिकी नागरिक मैथ्यू विदेशों में कुछ ईसाई संगठनों और धार्मिक ग्रुप्स से चंदा इकट्ठा कर रहा था.
मिजोरम में बिना अनुमति प्रवेश और गैरकानूनी गतिविधियों के आरोप में यूक्रेन के 6 और अमेरिका के 1 नागरिक को गिरफ्तार किया गया था. इन सातों विदेशियों को लेकर हर रोज नए खुलासे हो रहे है. सूत्रों के मुताबिक, सातों आरोपी भारत को आतंकी गतिविधि के लिए एक बड़ा ट्रांजिट कॉरिडोर बनाने की तैयारी में थे. इतना ही नहीं वे ड्रोन और आधुनिक युद्ध तकनीक की ट्रेनिंग भी दे रहे थे.
जांच में पता चला है कि इन विदेशी नागरिकों का उद्देश्य भारत को आतंकवादी गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में उपयोग करना था। जानकारी के मुताबिक, ये लोग ड्रोन और आधुनिक युद्ध तकनीक के प्रशिक्षण में भी शामिल थे। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस संभावना की जांच कर रही हैं कि आरोपी भारत विरोधी संगठनों से संपर्क में थे। यह संदिग्ध नेटवर्क सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन चुका है।
इस मामले की आगे की जांच के लिए एनआईए की दो टीम मिजोरम म्यांमार सीमा पर स्लीपर सेल मॉड्यूल के लोगों की तलाश में पहुंची है. इस संवेदनशील मामले की जांच कर रही केन्द्रीय संयुक्त जांच टीम को जानकारी मिली है कि इस मॉड्यूल के मिजोरम म्यांमार सीमा पर स्थानीय नागरिकों का बड़ा सपोर्ट मिला था. ये नागरिक भारत और म्यांमार दोनों देशों में हैं.
जांच एजेंसियों को शक है कि कुछ विदेशी भाड़े के लड़ाके यानी फ्रीलांसर म्यांमार के गृहयुद्ध में शामिल होने के लिए भारत का इस्तेमाल रास्ते के तौर पर कर रहे हैं.
सूत्रों के मुताबिक, 2024 में मिजोरम के अधिकारियों ने पहली बार अलर्ट किया था. एजेंसियों के पास कुछ वीडियो और फोटो भी आए हैं, जिनकी जांच चल रही है. इनमें म्यांमार के जंगलों में कुछ विदेशी हथियारबंद लोग नजर आ रहे हैं. उनकी भाषा और बोलचाल स्थानीय नहीं लगती, जिससे शक और बढ़ गया है कि ये बाहर से आए लड़ाके हैं. सूत्रों का कहना है कि इनकी गतिविधियां वैसी ही हैं जैसी दूसरे देशों में विदेशी लड़ाकों की होती रही हैं.
यूक्रेन कनेक्शन भी सामने आया- पकड़े गए लोगों में एक यूक्रेनी नागरिक मारियन स्टेफानकिव का नाम भी सामने आया है. उसका नाम यूक्रेन के कुछ कट्टरपंथी संगठनों से जुड़ा रहा है. उसे डोनबास इलाके में लड़ाई का अनुभव है. हालांकि, इन बातों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
जांच में यह भी उभरकर सामने आया है कि कुछ संगठन पहले खुद को मात्र मदद करने वाले बताते थे, लेकिन अब नए ग्रुप खुलकर अपमानजनक गतिविधियों में संलिप्त हैं। कुछ विदेशी लड़ाकों के साथ म्यांमार में लड़ाई में शामिल होने की बात भी सामने आ रही है।

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कानून व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आम लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को ही अब अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। मध्य प्रदेश पुलिस के एडीजी (ट्रेनिंग) राजाबाबू सिंह ने अपनी जान को खतरा बताते हुए पुलिस कमिश्नर और डीजीपी से सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। आरोप है कि, कुछ अज्ञात युवक उनके भोपाल स्थित घर के बाहर पहुंचे, जहां उन्होंने गाली-गलौज की और धमकी भरा व्यवहार किया।
इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसके आधार पर पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जुट गई है। घटना के सामने आने के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि जब वरिष्ठ पुलिस अधिकारी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या हाल होगा।
जानकारी के मुताबिक यह घटना 17 मार्च की सुबह करीब 6 बजे की है। भोपाल के त्रिलंगा इलाके में स्थित एडीजी राजाबाबू सिंह के सरकारी आवास के बाहर एक चार पहिया वाहन आकर रुका। कार से दो युवक उतरे। इनमें से एक युवक के हाथ में डंडा था। बताया जा रहा है कि युवक घर के बाहर तैनात कर्मचारियों से गाली-गलौज करने लगे और अमर्यादित व्यवहार किया।
घर के कर्मचारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो कुछ देर बाद वे वहां से चले गए। हालांकि इस दौरान उनकी पूरी गतिविधि घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई।
घटना के बाद एडीजी राजाबाबू सिंह ने तुरंत शाहपुरा थाना पुलिस को सूचना दी। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस को सौंप दिया है। इसके अलावा उन्होंने भोपाल पुलिस कमिश्नर और पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखकर इस घटना की जानकारी दी है और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।
पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अज्ञात युवकों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी कौन थे और उनका मकसद क्या था।
एडीजी राजाबाबू सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि, यह घटना बेहद गंभीर है और इससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो गई है। उन्होंने आशंका जताई है कि, पुलिस प्रशिक्षण प्रणाली में किए जा रहे कुछ नए बदलावों और नवाचारों से कुछ लोग नाराज हो सकते हैं। उनका मानना है कि, इसी वजह से उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की जा सकती है। इसलिए उन्होंने अपने आवास की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
राजाबाबू सिंह इन दिनों मध्य प्रदेश पुलिस की ट्रेनिंग प्रणाली में नए प्रयोगों को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में भर्ती होने वाले नए कांस्टेबलों की ट्रेनिंग में भारतीय सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को शामिल करने की पहल शुरू की है। इस पहल के तहत कुछ प्रशिक्षण केंद्रों में रामचरितमानस और भगवद गीता का पाठ भी शुरू कराया गया है। उनका मानना है कि, पुलिस अधिकारियों को केवल शारीरिक और कानूनी प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि मानसिक और नैतिक रूप से भी मजबूत होना चाहिए।

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बड़ा बैंक घोटाला: फर्जी दस्तावेजों से 33 लाख का लोन, ईओडब्ल्यू ने किया 6 आरोपियों पर केस दर्ज
भोपाल। मध्य प्रदेश में बैंकिंग क्षेत्र में एक और बड़ा घोटाला सामने आया है। भोपाल में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर केनरा बैंक से 33 लाख रुपये का लोन हासिल करने के मामले में बड़ा एक्शन लिया है।
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी कारोबारी ने पहले से ही बैंक में गिरवी रखी और 2021 में नीलाम हो चुकी संपत्ति को ही दोबारा गिरवी दिखाकर नया लोन ले लिया। 2019 में ही यह लोन NPA घोषित हो चुका था, लेकिन फिर भी कूटरचित दस्तावेज तैयार कर बैंक को चकमा दिया गया।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, बैंक के ब्रांच मैनेजर और क्रेडिट मैनेजर की भूमिका संदिग्ध है। पैनल एडवोकेट और मूल्यांकनकर्ता इंजीनियर ने गलत रिपोर्ट दी, जिसके आधार पर लोन स्वीकृत हुआ। KYC और ड्यू डिलिजेंस प्रक्रिया में भारी लापरवाही बरती गई। कुल 6-7 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं ईओडब्ल्यू ने जांच तेज कर दी है और जल्द ही और खुलासे होने की संभावना है।
जांच में सामने आया कि मेसर्स आबू रोड लाइंस के संचालक करामत खान ने साल 2016 में बैंक खाता खोलकर 10 लाख रुपए का लोन लिया था। साल 2017 में लोन लिमिट बढ़ाने के लिए इंदौर की ग्रीन पार्क कॉलोनी स्थित मकान के फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए गए जिसके आधार पर 21 नवंबर 2017 को 33 लाख रुपए का लोन स्वीकृत कर दिया गया। लोन नहीं भर पाने पर दिसंबर 2019 में खाता एनपीओ घोषित कर दिया गया ।
जांच को खुलासा हुआ कि जिस दस्तावेज से लोन लिया गया था उस पर पहले से ही लोन लिया गया था। कार्रवाई के दौरान खुलासा हुआ कि संबंधित संपत्ति पहले से इंडियन बैंक में बंधक थी और वर्ष 2021 में उसकी नीलामी भी हो चुकी थी, जिसके करामत खान सहित सात आरोपियों के खिलाफ EOW ने मामला दर्ज किया है।
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जज को फोन करने पर बुरे फंसे BJP विधायक , कार्रवाई की मांग को लेकर याचिका दाखिल
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जज को सुनवाई से पहले फोन करने के मामले में भाजपा विधायक संजय पाठक बुरे फंस गए हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। डबल बेंच में इस पूरे केस की सुनवाई होगी।
कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित ने याचिका दाखिल की है। जिसमें संजय पाठक पर कार्रवाई की मांग की गई है। 26 मार्च को मामले की सुनवाई होगी।
दरअसल, माइनिंग मामले में हाईकोर्ट में जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच में 1 सितंबर को सुनवाई होना थी। लेकिन जस्टिस विशाल मिश्रा ने कहा था कि सुनवाई से पहले संजय पाठक ने उन्हें फोन करने की कोशिश की थी। जिसके बाद उन्होंने संजय पाठक का केस सुनने से इंकार कर दिया था और खुद को इस केस से अलग कर लिया था। वहीं भाजपा विधायक के वकील ने भी उनका केस लड़ने से इंकार कर दिया था।

इंदौर. एमपी के इंदौर में बुधवार 18 मार्च की तड़के 4 बजे दर्दनाक हादसा हुआ. यहां के राजबाड़ा इलाके के पास भीषण आग लगी. हादसे में 8 लोगों की जलने से मौत हुई है. सभी मृतक एक ही परिवार के बताए जा रहे हैं. आग से कई लोग बुरी तरह झुलसे हैं जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
बताया जाता है कि एक ईवी कार में चार्जिंग के दौरान आग लग गई थी जिसकी लपटें घर तक पहुंच गई. सूचना मिलते ही पुलिस और दमकलें मौके पर पहुंची और बचाव अभियान शुरु किया. प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और तुलसी सिलावट भी मौके पर पहुंचे हैं. दोनों नेताओं ने स्थितियों का जायजा लिया.
इंदौर के ब्रजेश्वरी में घर में भीषण आग लगी जिससे परिवार के 8 सदस्यों की मौत हो गई. कार में लगी आग की लपटें घर तक जा पहुंची जिससे मनोज पुगलिया सहित 8 लोग जिंदा जल गए. इंदौर के ऐतिहासिक राजबाड़ा इलाके के पास यह हादसा हुआ. शुरुआती जानकारी के अनुसार कार में चार्जिंग के दौरान आग लगी. यह घर तक फैल गई. मकान में कई गैस सिलेंडर रखे थे. आग लगने से इनमें ब्लास्ट हो गया. एक के बाद एक कई ब्लास्ट हुए. इससे मकान में मौजूद 8 लोग जिंदा जल गए.
मंगलवार रात तिलक नगर थाना क्षेत्र के छोटा राजबाड़ा इलाके में यह हादसा हुआ. घर में भीषण आग लग गई, जिसमें परिवार फंस गया. देर रात आगजनी की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें घटनास्थल पर पहुंची. आग पर बमुश्किल काबू पाया गया. इस बीच वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए. बंगाली चौराहे के पास ब्रजेश्वरी कॉलोनी में रहनेवाले पुगलिया परिवार के साथ यह हादसा हुआ. उनके यहां एक कार्यक्रम था जिससे कुछ करीबी रिश्तेदार भी घर पर ही रुके थे. सभी लोग सो रहे थे कि अचानक आग भड़क उठी. इससे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला.
शुरुआती जांच के अनुसार, घर के बाहर खड़ी एक ईवी कार चार्जिंग पर लगी थी. चार्जिंग पॉइंट में शॉर्ट सर्किट हो गया जिससे कार में आग लग गई और तेजी से फैलते हुए घर में रखे गैस सिलेंडरों तक पहुंच गई. आग के कारण गैस से भरे सिलेंडर फटने लगे. यहां करीब 15 सिलेंडर रखे थे जिनमें से 4 गैस सिलेंडरों में ब्लास्ट हुआ. इससे घर का एक हिस्सा भी जमींदोज हो गया. हादसे में विजय सेठिया, छोटू सेठिया, सुमन, मनोज, सिमरन, राशि सेठिया, तनय और टीनू की मौत हुई है. सौरभ पुगलिया, आशीष और हर्षित पुगलिया घायल हैं.
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अपराधियों के हौसले बुलंद! नशे में धुत शराबियों ने पुलिसकर्मियों को पटक-पटककर पीटा
रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा में अपराधियों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं, शराबियों ने नशे की हालत में पुलिसकर्मियों को बीच सड़क पटक-पटककर पीटा। बीच सड़क पर झूमाझटकी एक-दूसरे को जमकर घसीटा। लोग बोले-पुलिस वाले खुद नशे में है। रीवा शहर में बीच सड़क पर शराबियों और पुलिस के बीच जमकर मारपीट हुई। इसका एक वीडियो भी सामने आया है।
वीडियो में साफ दिख रहा है कि नशे में धुत कुछ युवक पुलिसकर्मियों से बीच सड़क पर भिड़ गए और उन्हें पटक-पटककर पीटने लगे।स्थिति इतनी बिगड़ गई कि दोनों आपस में गुत्थम-गुत्था हो गए। दोनों पक्षों के बीच जमकर धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और मारपीट होती रही। वीडियो के एक हिस्से में नजर आ रहा है कि एक युवक को संभालने में दो-दो पुलिसकर्मियों के पसीने छूट रहे हैं। वहीं वीडियो के दूसरे हिस्से में सुना जा सकता है कि मौके पर मौजूद लोग पीछे से बोल रहे हैं कि ये… पुलिस वाले खुद नशे में हैं। जबरदस्ती लोगों को उठाकर ले जा रहे हैं। इनको मारो… इनको मारो…। पुलिस वालों को ही मारो…।
पुलिसकर्मियों पर भी नशे में होने का आरोप लग रहे हैं, सड़क पर सरे राह एक-दूसरे को लिटाकर घसीटा गया, जिससे मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। विवाद के दौरान वहां मौजूद स्थानीय लोगों ने पुलिसकर्मियों पर भी नशे में होने का आरोप लगाया है। सड़क से गुजर रहे राहगीरों ने इस पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल में कैद कर लिया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है। एडिशनल एस.पी. आरती सिंह का कहना है कि हमारे पास अभी बल की कमी है। सभी पुलिसकर्मी चेकिंग और गश्त के लिए गए थे। लेकिन कुछ लोग नशे की हालत में पुलिस के साथ उलझ गए। उनके साथ गाली-गलौज और झूमाझटकी करने की कोशिश की। सभी की तलाश की जा रही है।
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NDPS कोर्ट का बड़ा फैसला: SAF जवान और साथी को गांजा तस्करी में 9-9 साल की सजा
ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिला कोर्ट (विशेष एनडीपीएस न्यायालय) ने 20 किलो गांजा तस्करी के एक बड़े मामले में सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट ने SAF (स्पेशल आर्म्ड फोर्स) जवान राजू सिंह तोमर और उसके साथी अल्बर्ट संजय विलियम्स को दोषी करार देते हुए दोनों को 9-9 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह मामला 11 नवंबर 2020 का है, जब ग्वालियर जिले के डबरा में विधानसभा उपचुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद पुलिस द्वारा सघन चेकिंग की जा रही थी। चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक टाटा टियागो कार को रोका, जिसमें राजू सिंह तोमर और अल्बर्ट संजय विलियम्स सवार थे। कार की तलाशी में डिक्की से एक ट्रॉली बैग और एक बिट्टू बैग बरामद हुआ, जिसमें तीन पैकेट में कुल करीब 20 किलो गांजा रखा था। पुलिस ने मौके पर ही गांजा जब्त किया, सैंपल लिए और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। विशेष एनडीपीएस न्यायालय ने सभी दलीलों, सबूतों और पुलिस जांच को सही ठहराते हुए दोनों को दोषी पाया। कोर्ट ने माना कि पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह वैध थी और गांजा तस्करी के सबूत स्पष्ट थे।
SAF जवान का शामिल होना मामले को और गंभीर बनाता है, क्योंकि राजू सिंह तोमर उस समय स्पेशल आर्म्ड फोर्स में तैनात जवान थे। यह घटना सुरक्षा बलों में भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों पर सवाल उठाती है। एनडीपीएस एक्ट के तहत 20 किलो से अधिक गांजा तस्करी में 10 साल तक की सजा का प्रावधान है, लेकिन कोर्ट ने सबूतों के आधार पर 9 साल की सजा सुनाई। दोनों दोषी अब जेल भेज दिए गए हैं। यदि जुर्माना नहीं चुकाया गया तो अतिरिक्त सजा भी हो सकती है।

प्रमुख समाचार

सूरत। डिजिटल ट्रांजेक्शन के दौर में तकनीकी खामी कभी-कभी बैंकों पर भारी पड़ जाती है। सूरत के एक ग्राहक के साथ हुई एटीएम की गड़बड़ी बैंक ऑफ बड़ौदा के लिए इतनी महंगी साबित हुई कि अब उसे मूल राशि से लगभग 30 गुना ज्यादा हर्जाना भरना पड़ रहा है। 9 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कंज्यूमर कोर्ट ने बैंक की लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए फैसला सुनाया है।मामला फरवरी 2017 का है, जब एक ग्राहक ने सूरत के उधना इलाके में एसबीआई (SBI) के एटीएम से अपने बैंक ऑफ बड़ौदा...

मध्य प्रदेश

जबलपुर. एमपी के जबलपुर में महिला के साथ दो करोड़ 27 लाख रुपए की ठगी करने के आरोपियों को साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार कर लिया है. शेयर बाजार में निवेश के नाम पर ठगी करने वाले तीनों आरोपी हरियाणा के पानीपत और मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर के रहने वाले हैं. महिला की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच की गई.पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जबलपुर निवासी एक महिला को प्रतिदिन 5 प्रतिशत और दीर्घकालिक निवेश पर 500 प्रतिशत तक रिटर्न का लालच...

अपराध

खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के कसरावद थाना क्षेत्र अंतर्गत भीलगांव में एक बड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है। 16 मार्च की शाम उद्योगपति और किसान कारोबारी दिलीप सिंह राठौर के घर के बाहर तीन बाइक सवार नकाबपोश बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग की, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। पूरी घटना घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना के समय दिलीप राठौर और उनका परिवार इंदौर में था, जिसके कारण घर पर कोई नहीं था।...
More inअपराध  

गुना सिटी

गुना।(गरिमा टीवी न्यूज़) गुना सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सुदृढीकरण करने हेतु तथा कालाबाजारी करने वाले के विरुद्ध चलाये जा रहे अभियान के तहत कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल के निर्देशानुसार शासकीय उचित मूल्य दुकान शहबाजपुर तहसील आरोन के विक्रेता चन्द्रभान यादव के विरुद्ध खाद्यान्न का अपयोजन करने के कारणपुलिस थाना आरोन में ईसी एक्ट के तहत एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई।कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी, आरोन द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के अनुसार शासकीय उचित मूल्य दुकान शहबाजपुर (आरोन) के विक्रेता...

फोटो गैलरी

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
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गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
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गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
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बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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