


शिवपुरी। शिवपुरी में नाग-नागिन का जोड़ा दिखने के बाद हड़कंप मच गया। लोग उस वक्त हैरान हो गए जब नाग ने नागिन को निगल लिया। यह देखते ही सभी में खौफ पैदा हो गए। मामला नरवर क्षेत्र स्थित निजी स्कूल का है।
स्कूल परिसर में नाग-नागिन का जोड़ा दिखने की सूचना मिलने पर नरवर निवासी सर्प मित्र सलमान पठान मौके पर पहुंचे।उन्होंने पूरे परिसर में तलाश किया तो केवल एक नाग दिखाई दिया। जैसे ही उन्होंने नाग को पकड़ने की कोशिश की तो उसने अचानक अपने मुंह से एक मृत नागिन को बाहर उगल दिया। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। सर्प मित्र के अनुसार, नाग की पहचान इंडियन कोबरा (स्पेक्टेकल्ड कोबरा) के रूप में हुई है। नाग का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे जंगल में छोड़ दिया गया है।
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6 मिलियन फॉलोअर्स वाले स्टार ने खोली सिस्टम की पोल, सस्पेंशन के बाद भी सड़क पर उतरा ये जांबाज
शहडोल। सोशल मीडिया पर करीब 60 लाख (6 मिलियन) फॉलोअर्स रखने वाले शहडोल के मशहूर पूर्व ट्रैफिक हेड कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पुलिस विभाग से निलंबन और उसके बाद अपने इस्तीफे के बावजूद, सड़क सुरक्षा के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ है। अब वे बिना वर्दी के स्वतंत्र रूप से ट्रैफिक जागरूकता वीडियो बना रहे हैं।
विवेकानंद तिवारी का एक नया वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने महज एक मिनट में यातायात नियमों की अनदेखी की 20 से ज्यादा गंभीर लापरवाहियां दिखाईं। मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना, रॉन्ग साइड ड्राइविंग, बिना हेलमेट सफर, तीन सवारी और नाबालिग द्वारा बाइक चलाने जैसी तस्वीरों को कैमरे में कैद कर उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों की ओर इशारा किया। यातायात विभाग की खामियों को भी आईना दिखा रहे हैं। उनका एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
हाल ही में विवेकानंद तिवारी ने शहडोल जिले के बुढार थाना क्षेत्र स्थित लोहिया चौक से एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में उन्होंने महज एक मिनट के अंदर यातायात नियमों की अनदेखी की 20 बड़ी गलतियां गिना दीं। अपने वीडियो में उन्होंने दिखाया कि लोग किस कदर अपनी जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
बुढार थाना क्षेत्र के लोहिया चौक में बनाए गए इस वीडियो में विवेकानंद तिवारी ने सड़क पर चल रहे वाहनों और लोगों की लापरवाही को कैमरे में कैद किया। वीडियो में एक बाइक चालक मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाता दिखाई देता है। वहीं कई लोग रॉन्ग साइड से गुजरते नजर आते हैं। एक बाइक पर तीन सवारी बैठी दिखाई देती हैं।
जबकि एक नाबालिग तेज रफ्तार से बाइक चलाता नजर आता है। इसके अलावा कई दोपहिया चालक बिना हेलमेट के वाहन चलाते दिखे। इन सभी उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने कहा कि यही सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह है और इसे उन्होंने भारत की असली ट्रैफिक तस्वीर बताया।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने विवेकानंद तिवारी को लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और सेवा नियमों के उल्लंघन के आरोप में निलंबित किया था। विभागीय जांच में यह भी सामने आया था कि अनुपस्थिति के दौरान वह सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो और रील्स साझा कर रहे थे। पुलिस रेग्यूलेशन-64 के तहत इसे सेवा की सामान्य शर्तों के उल्लंघन की श्रेणी में माना गया था।
निलंबन के बाद विवेकानंद तिवारी ने सोशल मीडिया पर अपनी सफाई देते हुए मेडिकल दस्तावेज, डॉक्टर की पर्चियां और उपचार संबंधी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए थे। उनका कहना था कि उन्होंने 19 मई 2026 को अपनी खराब तबीयत की सूचना मोबाइल के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को दे दी थी और मेडिकल पर्ची भी व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की थी। बाद में उन्होंने यह कहते हुए स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया कि निलंबन से उनकी छवि प्रभावित हुई है।
अब विभाग से अलग होने के बावजूद विवेकानंद तिवारी पहले से अधिक सक्रिय होकर सड़क सुरक्षा अभियान चला रहे हैं। वह लोगों को हेलमेट वितरित करने के साथ-साथ वीडियो के माध्यम से यातायात व्यवस्था की कमियां भी उजागर कर रहे हैं। उनका यह नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और सड़क सुरक्षा को लेकर एक नई बहस भी छेड़ रहा है।
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जेल भेजे गए 3 संदिग्ध आतंकी; पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर रच रहे थे ‘टारगेट किलिंग’ की साजिश
भोपाल। मध्य प्रदेश ATS द्वारा आतंकी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किए गए तीन संदिग्धों को कोर्ट ने 14 जुलाई तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मंगलवार को एटीएस ने भोपाल निवासी फराज, उत्तर प्रदेश के देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला और बिहार के इजहारुल हक को विशेष न्यायाधीश डॉ. मुकेश मलिक की अदालत में पेश किया था।
सुनवाई के दौरान एटीएस ने आरोपियों की आगे की पुलिस रिमांड नहीं मांगी। एटीएस ने अदालत को दलील दी कि आरोपियों के पास से बरामद इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच अभी चल रही है। आशंका है कि जेल से बाहर रहने पर ये साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं। इस पर कोर्ट ने तीनों को 14 जुलाई तक जेल भेजने के आदेश दिए।
जांच में इस आतंकी नेटवर्क को लेकर बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरोपी इजहारुल हक सोशल मीडिया के जरिए सीधे एक पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में था। प्रारंभिक पूछताछ और तफ्तीश में सामने आया है कि पाकिस्तानी हैंडलर उसे देश में ‘टारगेट किलिंग’ के एजेंडे को आगे बढ़ाने के निर्देश दे रहा था। फिलहाल एटीएस जब्त इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
इंदौर। बहुचर्चित शिवानी हत्याकांड में करीब साढ़े छह वर्ष बाद अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पति अमितेश उर्फ शालू पटेरिया को पत्नी की सुनियोजित हत्या का दोषी ठहराया है। 28वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हेमंत कुमार रघुवंशी की अदालत ने आरोपी को हत्या के मामले में आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा साक्ष्य मिटाने और कोबरा सांप की हत्या करने के मामले में भी अलग-अलग सजा और अर्थदंड लगाया गया है। अदालत ने अपने फैसले में माना कि आरोपी ने हत्या को सर्पदंश से हुई प्राकृतिक मौत साबित करने के लिए पूरी साजिश रची थी, लेकिन वैज्ञानिक जांच और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने उसकी पूरी योजना का पर्दाफाश कर दिया।
अभियोजन के अनुसार, 1 दिसंबर 2019 को कनाड़िया रोड स्थित संचार नगर एक्सटेंशन स्थित मकान में अमितेश उर्फ शालू पटेरिया ने अपने साथियों के साथ मिलकर पत्नी शिवानी की तकिये से मुंह दबाकर हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी ने घटना को हादसा दिखाने के उद्देश्य से एक जिंदा कोबरा सांप लाकर शव को उससे कटवाया, ताकि पोस्टमार्टम में मौत का कारण सर्पदंश माना जाए और वह कानून की गिरफ्त से बच सके। इतना ही नहीं, घटना में इस्तेमाल किए गए कोबरा सांप को भी बाद में मार दिया गया, जिससे पूरी साजिश के सबूत मिटाए जा सकें।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल जांच और अन्य परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर हत्या की गुत्थी सुलझाई। जांच में यह भी सामने आया कि विवाह के बाद से ही शिवानी को दहेज और रुपयों की मांग को लेकर लगातार प्रताड़ित किया जाता था। अभियोजन ने अदालत में यह साबित किया कि आरोपी ने पहले पत्नी की हत्या की और फिर सर्पदंश का नाटक रचकर हत्या को प्राकृतिक मौत साबित करने का प्रयास किया।
सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की हत्या संबंधी धाराओं के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने हत्या के अपराध में आजीवन सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड, साक्ष्य मिटाने के अपराध में दो वर्ष का सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजाति कोबरा (नाजा-नाजा) की हत्या करने पर तीन वर्ष का सश्रम कारावास एवं 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
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जिंदा महिला को कागजों में ‘मृत’ दिखाकर 100 करोड़ की जमीन हड़पने का खेल! 13 नामजद समेत अन्य पर केस , मृत्यु प्रमाण पत्र की भी होगी जांच
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में जमीन हड़पने का ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने राजस्व व्यवस्था और जमीन की खरीद-फरोख्त पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक जिंदा महिला को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर उसकी करोड़ों रुपये की जमीन का नामांतरण करा दिया गया। इसके बाद कथित तौर पर जमीन को बेच भी दिया गया। इस पूरे मामले में महिला ने अपने ससुराल पक्ष के कई लोगों सहित राजेंद्र नगर थाने में 13 नामजद आरोपियों और अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जिस जमीन को लेकर विवाद है, उसकी बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। वहीं पुलिस इस पूरे मामले में उज्जैन के भूमाफियाओं से संभावित कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही हैं।
एफआईआर के मुताबिक फरियादी द्रोपदीबाई ने पुलिस को बताया कि वह मूल रूप से ग्राम बीजलपुर मुंडी रोड की रहने वाली हैं और वर्तमान में अपनी बेटी के साथ कनाड़िया क्षेत्र में रह रही हैं। उनके पति स्वर्गीय रणछोड़दास के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में सर्वे नंबर 567, रकबा 5.647 हेक्टेयर जमीन दर्ज थी। पति के निधन के बाद नियमानुसार जमीन उनके नाम दर्ज हो गई थी, लेकिन इसी दौरान कथित रूप से ससुराल पक्ष के लोगों ने विश्वास में लेकर कई दस्तावेजों पर उनके अंगूठे लगवा लिए। महिला का आरोप है कि उन्हें बताया गया था कि यह प्रक्रिया जमीन के रिकॉर्ड और राजस्व संबंधी औपचारिकताओं के लिए है, लेकिन बाद में इन्हीं दस्तावेजों का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया।
शिकायत में महिला ने यह भी आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष ने गांव का मकान भी बेच दिया और बिक्री की रकम उन्हें नहीं दी। कुछ समय तक साथ रखने के बाद छोटी-छोटी बातों पर विवाद, गाली-गलौज और मारपीट की गई। आखिरकार उन्हें घर से निकाल दिया गया। इसके बाद उनकी बेटी सुनीता उन्हें अपने साथ लेकर रहने लगी।
मामले का खुलासा तब हुआ जब बेटी सुनीता ने जमीन के रिकॉर्ड निकलवाए। दस्तावेज देखने पर पता चला कि राजस्व रिकॉर्ड से महिला का नाम हट चुका है और जमीन का नामांतरण अन्य लोगों के नाम कर दिया गया है। इसके बाद नामांतरण के खिलाफ एसडीएम न्यायालय में अपील दायर की गई। शिकायत के अनुसार एसडीएम के समक्ष चली कार्यवाही में यह जानकारी सामने आई कि रिकॉर्ड में महिला को मृत दर्शाया गया था। इसी आधार पर आगे की राजस्व कार्रवाई की गई। महिला का कहना है कि वह जीवित हैं, लेकिन उन्हें मृत दिखाकर उनकी संपत्ति पर कब्जा करने की साजिश रची गई।
एफआईआर में गंभीर आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने मिलकर महिला का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया। इसी कथित फर्जी दस्तावेज के आधार पर जमीन का नामांतरण कराया गया और बाद में करोड़ों रुपये की जमीन का सौदा कर दिया गया। फरियादी का कहना है कि उन्हें पूरे घटनाक्रम की कोई जानकारी नहीं थी और उनकी सहमति भी नहीं ली गई।
जानकारी के अनुसार विवादित जमीन तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में स्थित है। रियल एस्टेट कारोबारियों के मुताबिक इस जमीन की वर्तमान बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। इसी वजह से इस मामले को जमीन से जुड़े बड़े फर्जीवाड़े के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस अब जमीन के नामांतरण, बिक्री और उससे जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच कर रही है।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर कैलाश चौधरी, शंकर चौधरी, जगदीश चौधरी, प्रकाश चौधरी, विष्णु चौधरी, शांतिलाल चौधरी, राजन चौधरी, सदन चौधरी, पवित्रा चौधरी, पार्वती चौधरी, लखन चौधरी, मनोज चौधरी, रामू नागदावाला सहित अन्य लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। आरोप है कि सभी ने मिलकर कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार किए, महिला को मृत दर्शाया, नामांतरण कराया और जमीन बेच दी।
यह मामला केवल एक परिवार के संपत्ति विवाद तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसमें राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण प्रक्रिया, कथित फर्जी दस्तावेज और करोड़ों रुपये की जमीन के सौदे जैसे कई गंभीर पहलू जुड़े हुए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र किसने तैयार किया, नामांतरण की प्रक्रिया किन दस्तावेजों के आधार पर पूरी हुई और जमीन आखिर किन लोगों को बेची गई। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह इंदौर के सबसे बड़े भूमि फर्जीवाड़ों में शामिल हो सकता है और इसमें कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
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PCC चीफ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी: कोर्ट ने पुलिस को फटकारा- ‘नेताजी हर जगह घूम रहे बस आपको नहीं दिखते’
ग्वालियर। मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। ग्वालियर की विशेष MP-MLA कोर्ट ने जीतू पटवारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। यह कार्रवाई लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान दिए गए एक विवादित बयान और कोर्ट के नोटिस की लगातार नाफरमानी करने पर की गई है। इस मामले में अदालत ने भिंड पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए सख्त टिप्पणी भी की है।”
यह पूरा विवाद लोकसभा चुनाव 2024 के समय का है। 27 अप्रैल 2024 को जीतू पटवारी भिंड के ऊमरी कस्बे में कांग्रेस प्रत्याशी फूल सिंह बरैया के समर्थन में एक चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे थे। इस सभा में उन्होंने बसपा प्रत्याशी देवाशीष जरारिया पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने भाजपा से सांठगांठ कर ली है। पटवारी ने मंच से कहा था कि बसपा प्रत्याशी BJP से माल लाए हैं।
इस बयान से नाराज होकर देवाशीष जरारिया ने 4 मई 2024 को भिंड के ऊमरी थाने में जीतू पटवारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा।
अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए इसी साल 16 जनवरी 2026 को जीतू पटवारी को कोर्ट में पेश होने का नोटिस जारी किया था, लेकिन वे अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। कोर्ट ने इसे अवहेलना बताया और अब विशेष न्यायाधीश ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को तय की गई है और कोर्ट ने पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि अगली तारीख पर जीतू पटवारी को हर हाल में कोर्ट में उपस्थित कराया जाए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वारंट तामील न करा पाने को लेकर भिंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर बेहद तीखी और गंभीर टिप्पणी की। माननीय कोर्ट ने कहा कि जीतू पटवारी हर जगह दिखाई दे रहे हैं, बस पुलिस को ही नजर नहीं आ रहे हैं। कोर्ट की इस तल्ख टिप्पणी के बाद अब पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया है।
राजस्थान के जालोर जिले से एक पंचायत के कथित तुगलकी फरमान का मामला सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र में बहस छेड़ दी है। आरोप है कि समाज के कुछ पंचों ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे युवक और युवती के परिवारों पर 21 लाख रुपए का जुर्माना लगा दिया। इतना ही नहीं, दोनों परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करने, हुक्का-पानी बंद करने और उन्हें धार्मिक स्थलों व सामाजिक आयोजनों में शामिल होने से रोकने का भी फैसला सुनाया गया। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है।
यह मामला जालोर जिले के सायला पंचायत क्षेत्र का है। पीड़ित परिवार के अनुसार, युवती का बचपन में विवाह हुआ था, लेकिन बालिग होने के बाद वर्ष 2024 में उसका तलाक हो गया। इसके बाद वह अपने पति से अलग रहने लगी। परिवार का कहना है कि 1 नवंबर 2025 से युवती अपनी इच्छा से समाज के ही 22 वर्षीय युवक के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगी। दोनों बालिग हैं और अपनी सहमति से साथ रह रहे हैं, लेकिन इसी बात को लेकर समाज के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई।
परिवार का आरोप है कि फरवरी 2026 में समाज के धर्मस्थल पर पंचायत की बैठक बुलाई गई, जिसमें दोनों परिवारों को उपस्थित होने के लिए कहा गया। बैठक में पंचों ने युवक और युवती को अलग करने का दबाव बनाया और युवती को उसके मायके भेजने के लिए दो महीने का समय दिया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उन्होंने यह शर्त स्वीकार नहीं की, जिसके बाद पंचायत ने दोबारा बैठक बुलाने का निर्णय लिया।
पीड़ित परिवार के मुताबिक, 20 अप्रैल 2026 को एक पंच के घर दूसरी बैठक आयोजित की गई, जिसमें करीब 61 लोग मौजूद थे। आरोप है कि बैठक में शामिल 11 पंचों ने दोनों परिवारों पर 21 लाख रुपए का जुर्माना लगाने का फैसला सुनाया। साथ ही सामाजिक बहिष्कार की घोषणा करते हुए परिवारों से सभी सामाजिक संबंध समाप्त करने का निर्णय लिया गया। शिकायत में लतीफ खां, नैने खां, मटार खां, जुसे खां समेत 11 लोगों को नामजद किया गया है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि पंचायत के फैसले के बाद समाज के लोगों ने उनसे बातचीत बंद कर दी। उन्हें धार्मिक स्थलों, सामुदायिक कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों में शामिल होने से रोक दिया गया। परिवार ने आरोप लगाया कि 6 जून को एक रिश्तेदार की मृत्यु के बाद आयोजित बारहवें कार्यक्रम में भी उन्हें शामिल नहीं होने दिया गया और वहां से बाहर निकाल दिया गया। उनका कहना है कि इस तरह के फैसलों से उनके सामाजिक और व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
परिवार ने बताया कि उन्होंने 1 जून को सायला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 29 जून को पीड़ित पक्ष जालोर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पंचायत ने सामाजिक दबाव बनाकर परिवारों को प्रताड़ित किया और उनके मौलिक अधिकारों का हनन किया।
जालोर पुलिस का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अधीक्षक ने जांच की जिम्मेदारी अधिकारी महीपाल सिंह को सौंपी है। अधिकारियों के अनुसार, जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
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बांग्लादेश में हर तरफ ‘कलमा’ लिखे झंडे दिखाई दिए, भारत के लिए नई टेंशन?
बांग्लादेश में फीफा वर्ल्ड कप के दौरान ब्राजील और अर्जेंटीना के झंडों के बीच अचानक काले और सफेद रंग के कलमा लिखे झंडे दिखाई दिए है. इसे लेकर देश में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं. यह बांग्लादेश में विदेशी चरमपंथी समूहों की बढ़ती उपस्थिति की ओर इशारा करता है जैसा कि विश्लेषकों का अनुभव बता रहा है. ये झंडे तालिबान, अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट और हिज्ब उत-तहरीर जैसे आतंकी संगठनों के द्वारा इस्तेमाल किए जाते है.
बांग्लादेश में सड़कों, पुलों, छतों और बाइक रैलियों में कई ‘कलमा’ झंडे दिखाई देने के बाद सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं. इन झंडों के दिखने से भारत में चिंता बढ़ गई है.
फीफा विश्व कप की गहमागहमी के बीच बांग्लादेश में एक जाना-पहचाना नजारा फिर से देखने को मिल रहा है, और वह है इस्तेमाल इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस), अल-कायदा और तालिबान जैसे आतंकवादी संगठन द्वारा इस्तेमाल किए जानेवाले झंडे. काले और सफेद रंग के झंडे जिन पर कलेमा लिखा है, जो अरबी भाषा में ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ लिखा है. झंडों पर लिखे अरबी भाषा में “ला इलाहा इल्लल्लाह” का अर्थ है अल्लाह के सिवा कोई पूजनीय देवता नहीं.
सोशल मीडिया पर इन झंडों के साथ मोटरसाइकिल रैलियों के वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिसने पुलिस की नींद उड़ा दी है. इन झंडों का दिखने का सीधा मतलब है बांग्लादेश में विदेशी चरमपंथी गुटों के बढ़ते पैर पसारने का संकेत.
भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने भी हाल ही में चेतावनी दी थी कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में हमास की गतिविधियां बढ़ रही हैं. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की फिलिस्तीन के लिए हमदर्दी जगजाहिर है.
झंडों में दो रंग देखे गए है. सफेद बैकग्राउंड पर काले रंग से लिखा झंडा है, जो तालिबान को प्रदर्शित करता है. दूसरा काले बैकग्राउंड पर सफेद रंग में लिखे झंडे जो अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट और हिज्ब उत-तहरीर जैसे आतंकी संगठन की पहचान को बताता है.
आपको बताते चले कि हिज्ब उत-तहरीर पर 2009 में शेख हसीना सरकार ने प्रतिबंध लगाया था, लेकिन 2024 की अशांति के बाद इसने अपना दायरा तेजी से बढ़ाया है.
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डोडा में बादल फटा : भारी बारिश से मची तबाही, फसलें बर्बाद; कई सड़कें बंद
जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भारी बारिश और बादल फटने की घटना के बाद जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। कई इलाकों में अचानक आई बाढ़ से फसलें, बाग-बगीचे और लोगों की निजी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है।
डोडा जिले के भलेसा के खलजुगासर इलाके में बादल फटने के बाद अचानक बाढ़ आ गई। तेज बहाव की वजह से किसानों की खेती बर्बाद हो गई। खेतों में खड़ी फसलें बह गईं, जबकि फलदार बाग-बगीचों को भी भारी नुकसान पहुंचा। कई मकान और अन्य निजी संपत्तियां भी इस आपदा की चपेट में आ गईं।
लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जिले की कई प्रमुख सड़कें बंद हो गईं। इससे भलेसा का भट्यास इलाका कई घंटों तक दूसरे क्षेत्रों से पूरी तरह कट गया। सड़कें बंद होने से लोगों को आने-जाने और जरूरी सामान पहुंचाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
डोडा के कश्तीगढ़ इलाके में भी मूसलाधार बारिश के बाद अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। राहत की बात यह है कि अब तक इस इलाके से किसी के घायल होने या जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और पूरी जानकारी जुटाई जा रही है।
बादल फटने और लगातार बारिश के कारण कई नाले और जल स्रोत उफान पर आ गए। इससे निचले इलाकों में पानी भर गया और कई जगह मिट्टी का कटाव भी हुआ। सड़कें बंद होने से जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हुईं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है।
प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। बंद सड़कों को जल्द से जल्द खोलने के लिए मशीनें लगाई गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावित लोगों को हर संभव मदद पहुंचाई जा रही है।
पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक किसी न किसी रूप में आरोपी के संपर्क में थे। आरोप है कि आरोपी शराब में सुहागा मिलाकर लोगों को पिलाता था और बाद में उनके अंतिम संस्कार में भी शामिल होता था। शुरुआती जांच में पुरानी रंजिश, विवाद और व्यक्तिगत कारणों को हत्या की वजह माना जा रहा है। फिलहाल आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ जारी है।
बीते तीन महीनों में आठ लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने के बाद ग्रामीणों को घटनाओं में समानता नजर आने लगी। सभी मामलों में शराब पीने के बाद मौत होने का पैटर्न सामने आया। ग्रामीणों ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। इसके बाद पुलिस ने मृतकों की कब्र खुदवाकर जांच कराई, जिससे पूरे घटनाक्रम की परतें खुलनी शुरू हुईं।
पुलिस जांच के दौरान पता चला कि सभी मृतक किसी न किसी तरह आरोपी रामसहाय जायसवाल के संपर्क में थे। ग्रामीणों ने भी शुरुआत से ही उसी पर संदेह जताया था। आगे की जांच में यह जानकारी मिली कि पहली संदिग्ध मौत से पहले आरोपी ने अपनी दुकान में चूहे होने का बहाना बनाकर गांव के लोगों से सुहागा मांगा था। पुलिस का आरोप है कि इसी जहरीले पदार्थ को वह शराब में मिलाकर लोगों को पिलाता था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर जहरीले पदार्थ की टेस्टिंग पहले अपने कुत्ते पर की। कुत्ते की मौत होने के बाद उसे विश्वास हो गया कि यह पदार्थ जानलेवा है। इसके बाद उसने इसी तरीके का इस्तेमाल लोगों पर किया। जांच में यह भी सामने आया कि वारदात के बाद आरोपी मृतकों के अंतिम संस्कार में भी शामिल होता था, जिससे किसी को उस पर संदेह न हो।
जांच के अनुसार, इन हत्याओं के पीछे गाली-गलौज, आपसी विवाद, पत्नी पर गलत नजर रखने का शक और पुरानी रंजिश जैसे कारण सामने आए हैं। पुलिस इन्हीं पहलुओं को आधार बनाकर मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि अब तक मिले साक्ष्य व्यक्तिगत दुश्मनी की ओर इशारा करते हैं और इसी दिशा में जांच आगे बढ़ रही है।
घटनाओं के बाद क्षेत्र में गड़े खजाने और जादू-टोने से जुड़ी चर्चाएं भी सामने आईं। हालांकि पुलिस ने इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में ऐसे किसी पहलू की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है।
बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से शराब दुकान विरोध आंदोलन के बीच एक बेहद अनोखा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां पिछले करीब 80 दिनों से शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर धरने पर बैठी महिलाओं के आंदोलन में उस समय हाई वोल्टेज ड्रामा हो गया, जब एक आंदोलनकारी महिला ने शराब पीकर पहुंचे अपने ही पति को बिजली के खंभे से बांध दिया। इस अनोखी सजा का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
यह घटना बालाघाट शहर के बुढ़ी इलाके का है। यहां स्थानीय महिलाएं लंबे समय से रिहायशी इलाके से शराब दुकान को हटाने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरने पर बैठी है। इसी आंदोलन के बीच जब महिला का पति शराब के नशे में धुत होकर वहां पहुंचा तो पत्नी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। महिला ने बिना देर किए अन्य महिलाओं की मदद से अपने शराबी पति को बीच सड़क पर एक खंभे से बांध दिया। खंभे से बांधे गए व्यक्ति की पहचान संजू चौधरी के रूप में हुई है।
अपने पति को खंभे से बांधने वाली पत्नी का साफ तौर पर कहना है कि इस जानलेवा शराब ने उसके हंसते-खेलते परिवार की सारी खुशियां छीन ली हैं। महिला ने कहा कि जब मैं खुद समाज और अपने घर को बचाने के लिए पिछले 80 दिनों से शराबबंदी की इतनी बड़ी लड़ाई लड़ रही हूं, तब मेरा अपना पति ही शराब पीकर इस आंदोलन की भावना और हमारी तपस्या को कमजोर कर रहा है। इसे सबक सिखाना जरूरी था।
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लोगों ने उखाड़ फेंके घरों में लगाए गए ‘स्मॉर्ट मीटर’, राजगढ़ में बंद मीटर में भी बनती है रीडिंग
राजगढ़। बिजली कंपनी द्वारा लगाए गए स्मॉर्ट मीटर का अनूठा विरोध राजगढ़ जिला मुख्यालय पर किया गया। यहां के रहवासियों और महिलाओं ने घरों में लगे मीटर काट दिए और उन्हें हाथों में लेकर रैली निकाली। नाका नंबर तीन पर ले जाकर उन्हें फेंक दिया। इसके बाद बिजली कंपनी के दफ्तर पहुंचे और वहां विरोध जताया। जमकर नारेबाजी की। बांसावाड़ा क्षेत्र की महिलाएं मंगलवार दोपहर बड़ी संख्या में पहुंची।
बारिश के बीच वे हाथों में मीटर लिए और नारेबाजी करते हुए निकलीं। मैन मार्केट से होकर निकलीं और नारे लगाए कि स्मॉर्ट मीटर हटाए जाएं। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाए कि हमारे बिल चार से पांच गुना आ रहे हैं। बिजली कंपनी के कर्मचारियों ने हमारी एक भी नहीं सुनी और मनमानी करते हुए मीटर लगा दिए, जिससे परेशानी बढ़ गई।
हम गरीब और मजदूर वर्ग के लोग हैं, इतना बिल आखिर कहां से लेकर आएं। इस दौरान रानु तंवर, निर्मला, सुंदर, राधा, रेखा सहित नगर के अन्य लोग मौजूद रहे, नारेबाजी करते हुए बिजली कंपनी के दफ्तर पहुंचे। खास बात यह है कि बारिश होती रही लेकिन महिलाओं और विरोध करने वालों का हौसला कम नहीं हुआ।
शहर के प्रमुख बाजार से होते हुए ब्यावरा नाका होकर सभी महिलाएं और रहवासी बिजली कंपनी के दफ्तर पहुंचे। यहां एसई को उक्त मीटर सौंपने की मांग करने लगे, नारेबाजी की लेकिन सीएम के कार्यक्रम में लगी ड्यूटी के कारण कोई भी बिजली कंपनी का अधिकारी वहां नहीं मिला। इस पर वे नारेबाजी करते रहे। इस दौरान रहवासियों ने बताया कि हमारे 500 रुपए के बिल बढ़कर 5000 से ऊपर हो गए हैं। जिसके बारे में कोई कुछ नहीं सुनता। इसके अलावा हमारे द्वारा निकाल लिए गए मीटर की रीडिंग अभी भी चल रही है। यानी ये मीटर पूरी तरह से फर्जी है।
बिल बहुत ज्यादा आ रहा है, चार-चार हजार रुपए का बिल आते हैं। हमें कुछ नहीं चाहिए हमारे पुराने बिजली के मीटर लगवा दिए जाएं, ताकि हम पर यह मनमानी बिजली का भार न पड़े। एक पंखा, एक बल्ब का बिल इतना आ रहा है कि पहले कभी आया ही नहीं। -राधा पुष्पद, रहवासी, बांसवाड़ा
जब से मीटर लगे हैं, आठ गुना बिल आ रहा है, 700 रुपए का अधिकतम बिला आता था. अब पांच हजार तक पहुंच गया है। कभी छह हजार का आ जाता है। बिजली कंपनी के लोगों ने बिना पूछे मीटर लगा दिए। कहने लगे अभी लगवा लो नहीं तो बाद में पांच हजार अतिरिक्त लगेंगे। -रेखा मेवाड़े, रहवासी, बांसवाड़ा
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सलकनपुर देवी धाम में दान राशि को लेकर विक्रम मस्ताल ने उठाए सवाल, ट्रस्ट ने सभी आरोपों को बताया निराधार
बुधनी। प्रदेश के प्रसिद्ध विजयासन देवी धाम, सलकनपुर के प्रबंधन को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। बुधनी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी एवं अभिनेता विक्रम शर्मा मस्ताल ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय पारदर्शिता और दान राशि के प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं मंदिर ट्रस्ट ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया है।
विक्रम शर्मा मस्ताल ने कहा कि विजयासन देवी धाम प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में दान एवं चढ़ावा प्राप्त होता है। उनका कहना है कि मंदिर के प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और दान राशि के उपयोग में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं के मन में किसी प्रकार का संशय न रहे।
वहीं सलकनपुर देवी धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने मस्ताल द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार और गबन के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि मंदिर समिति का संपूर्ण कार्य पारदर्शी और नियमानुसार संचालित होता है। उन्होंने कहा कि आज तक उनके संज्ञान में गबन का कोई मामला नहीं आया है।
महेश उपाध्याय के अनुसार मंदिर में दान केवल अधिकृत रसीदों एवं दान पेटियों के माध्यम से स्वीकार किया जाता है। दान पेटियां समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों की उपस्थिति में खोली जाती हैं। प्राप्त राशि को सुरक्षित रखा जाता है तथा आवश्यकता होने पर समिति के सदस्यों के समक्ष गिनती कर मंदिर के विकास एवं अन्य आवश्यक कार्यों में नियमानुसार उपयोग किया जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर समिति का पूरा आय-व्यय रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से संधारित किया जाता है और कोई भी नागरिक आकर उसका अवलोकन कर सकता है। ट्रस्ट अध्यक्ष ने कहा कि समिति पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ कार्य कर रही है तथा श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। फिलहाल मंदिर प्रबंधन और पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी के बीच लगाए गए आरोपों और दिए गए स्पष्टीकरण के बाद यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
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