


भोपाल। महिला कांग्रेस के सामूहिक उपवास और सद्बुद्धि यज्ञ कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए 1.11 लाख रुपए का चंदा दिया था। उन्होंने कहा कि वे अब अयोध्या की कोर्ट में केस दायर करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं अपने दिल्ली जाकर अपने वकील से बातचीत करूंगा उसके बाद 5 या 6 तारीख को अयोध्या जाकर मुकदमा दायर करूंगा।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धालुओं से जुटाए गए चंदे की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर देशभर के लोगों ने आस्था के साथ दान दिया था, इसलिए उस राशि का पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि अदालत में वित्तीय अनियमितता साबित होती है, तो वे अपना दिया हुआ चंदा वापस लेकर किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ या शंकराचार्य के न्यास को समर्पित करेंगे।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि 'मैं सनातन धर्म का पालन करने वाले व्यक्ति हूं।' उन्होंने कहा कि वे नियमित रूप से धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं, एकादशी का व्रत रखते हैं और नर्मदा परिक्रमा भी कर चुके हैं। उनका कहना था कि राजनीतिक कारणों से उनकी धार्मिक आस्था पर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं, जबकि उनका जीवन धार्मिक परंपराओं से जुड़ा रहा है।
दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) की आर्थिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि धार्मिक चंदे और गुरुदक्षिणा के उपयोग का पूरा विवरण सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने उनकी सरकार के दौरान महाकालेश्वर मंदिर की जमीन लेने के मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस जमीन का भी दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने चंपत राय के संघ से जुड़ने और राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ने तक के बारे में बताया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वे अपने घर के बाहर एक तख्ती लगाएंगे, जिस पर लिखा होगा -'मेरे घर में चंदा चोरों का प्रवेश निषिद्ध है।' उन्होंने लोगों से भी धार्मिक संस्थाओं और चंदे के उपयोग में पारदर्शिता की मांग करने की अपील की। उन्होंने अपील की कि मंदिरों के बाहर बैनर लगाएं जिस पर लिखा हो 'चंदा चोरों से सावधान।'
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मेकअप करवाकर आती हूं… दूल्हे से बोली नई-नवेली दुल्हन, फिर रहस्यमय तरीके से हुई गायब
जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां गोसलपुर में हुई शादी के ठीक बाद खुशियों के घर में उस वक्त सन्नाटा पसर गया, जब एक नवविवाहिता रहस्यमयी ढंग से लापता हो गई। बरेला निवासी पीड़ित युवक गौतम यादव ने बताया कि 21 जून को उसकी बारात गई थी, और 22 जून को वह अपनी दुल्हन को विदा कराकर घर लौटा था। इसके बाद, मौसी की शादी और बंजारिन माता के दर्शन के पारिवारिक कार्यक्रमों में सब कुछ ठीक-ठाक चला।
लेकिन तभी अचानक, जब दोनों एक फोटो स्टूडियो में तस्वीरें लेने पहुंचे, तो दुल्हन ने यह कहकर युवक को वहीं रुकने को कहा कि वह थोड़ी देर में मेकअप करवाकर आती है। आधा घंटा बीत जाने के बाद भी जब वह नहीं लौटी, तो युवक के पैरों तले जमीन खिसक गई।
ससुराल से लेकर हर संभावित जगह पर तलाश करने के बाद भी जब दुल्हन का कोई सुराग नहीं मिला, तो परेशान पीड़ित ने पहले गोसलपुर और फिर बरेला थाने में शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल, पुलिस इस मामले में जांच कर रही है, वहीं दूल्हे को हर पल अपनी जीवनसंगिनी की लौट आने की उम्मीद जगाए बैठा है।
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TI पर कुख्यात बदमाश को संरक्षण देने के आरोप, मुखबिर ने कमिश्नर से की शिकायत, अब हुई ये कार्रवाई
भोपाल। राजधानी भोपाल के कोहेफिजा थाना प्रभारी केजी शुक्ला की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। उन पर कुख्यात बदमाश यासीन मलिक को संरक्षण देने के गंभीर आरोप है। शिकायत पुलिस कमिश्नर तक पहुंचने के बाद टीआई और एक हवलदार पर अर्थदंड लगाया गया है।
दरअसल, यासीन ने जिला बदर के दौरान शहर में घूमकर मारपीट और तोड़फोड़ की थी। जब मुखबिर इसकी जानकारी देने थाने पहुंचा तो TI के जी शुक्ला ने उन्हें वहां से भगा दिया। इसके बाद मुखबिर ने सीधे पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर पूरी दास्तान सुनाई।
कमिश्नर ने मामले को गंभीरता से लिया और TI को जमकर फटकार लगाई। जिसके बाद TI शुक्ला ने आनन-फानन में जिला बदर का उल्लंघन करने पर यासीन मलिक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वहीं लापरवाही बरतने पर कमिश्नर ने TI शुक्ला पर 50 हजार और हवलदार रामभरत सुमन पर 5 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया।
भोपाल। मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले में पुलिस ने नकली नोट बनाने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने कृषि सेवा केंद्र की आड़ में चल रहे इस अवैध कारोबार का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मौके से 57 हजार 500 रुपये के 500-500 के नकली नोट, रंगीन प्रिंटर, कटर और अन्य उपकरण जब्त किए गए हैं।
आगर मालवा जिले के नलखेड़ा थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि बस स्टैंड स्थित पवार कृषि सेवा केंद्र पर नकली नोट बनाए जा रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी। दुकान से नरेंद्र सिंह सौंधिया और शुभम सोलंकी को हिरासत में लिया गया। तलाशी के दौरान एक बैग से 500-500 रुपये के कुल 115 नकली नोट बरामद हुए, जिनकी कुल कीमत 57 हजार 500 रुपये है।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने यूट्यूब पर वीडियो देखकर नकली नोट बनाने का तरीका सीखा था। इसके बाद असली 500 रुपये के नोट को स्कैन कर रंगीन प्रिंटर से उसकी कॉपी निकालते थे और कटर से काटकर उसे असली जैसा आकार देते थे। जांच में कई नोटों के सीरियल नंबर एक जैसे पाए गए, जिससे उनके नकली होने की पुष्टि हुई। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने रंगीन प्रिंटर, कटर, नकली नोट और अन्य सामग्री जब्त की। दोनों आरोपियों गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी अब तक कितने नकली नोट बाजार में चला चुके और गिरोह से कौन-कौन लोग जुड़े हैं।
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कैमरे की एक क्लिक ने उजाड़ा हंसता-खेलता परिवार: युवक ने फांसी लगाकर दी जान, मातम में बदली शादी की खुशियां
पन्ना: मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां शादी समारोह की खुशियां पल भर में मातम में तब्दील हो गईं। पन्ना टाइगर रिजर्व के मड़ला पेट्रोल पंप के पास कोर क्षेत्र जमुनिया में एक 36 वर्षीय युवक का शव पेड़ से लटका मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतक की पहचान कैलाश प्रजापति निवासी छतरपुर के रूप में हुई है, जो मड़ला में अपने साले के बेटे की शादी में आया था।
बताया जा रहा है कि वैवाहिक रस्मों के दौरान कैलाश की पत्नी ने लड़की के फूफा के साथ एक फोटो खिंचवा ली थी। इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच तीखा विवाद हुआ। परिजनों के बीच-बचाव के बाद मामला शांत तो हो गया, लेकिन कैलाश इस बात से अंदरूनी तौर पर बेहद आहत था।
कैलाश शौच का बहाना बनाकर घर से निकला और टाइगर रिजर्व के प्रतिबंधित कोर इलाके में जाकर फांसी लगा ली। अगले दिन चरवाहों ने शव देखकर पुलिस को सूचना दी। मृतक अपने पीछे पत्नी और तीन बच्चों को रोता-बिलखता छोड़ गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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25 लाख की चोरी का 24 घंटे में खुलासाः चालक ही निकला मास्टरमाइंड, महंगे शौक और ऐशो-आराम की जिंदगी के लिए की थी चोरी
इंदौर। शहर के लसूड़िया थाना पुलिस ने 25 लाख रुपये की चोरी के मामले का महज 24 घंटे में खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि चोरी किसी बाहरी बदमाश ने नहीं, बल्कि फरियादी के चालक ने अपने साथी के साथ मिलकर की थी। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 24 लाख रुपये नकद और वारदात में इस्तेमाल की गई हुंडई औरा कार भी जब्त कर ली है।
पुलिस के मुताबिक 30 जून को वृंदावन पैलेस कॉलोनी, निपानिया निवासी मनीष संघवी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके घर के बाहर खड़ी कार में रखे 25 लाख रुपये नकद और कार की दोनों चाबियां उनका चालक दीपक सोलंकी लेकर फरार हो गया है। शिकायत के आधार पर लसूड़िया थाने में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीम गठित कर घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की। फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर चालक दीपक सोलंकी अपने साथी मोहित उर्फ चिंटू यादव के साथ काले रंग की हुंडई औरा कार में जाता दिखाई दिया। साइबर जांच में दोनों की लोकेशन पचमढ़ी मिली, जिसके बाद पुलिस टीम वहां पहुंची और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने पहले से योजना बनाकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। उनका उद्देश्य चोरी की रकम से महंगे शौक पूरे करना, घूमना-फिरना और ऐशो-आराम की जिंदगी जीना था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 24 लाख रुपये नकद और करीब 10 लाख रुपये कीमत की हुंडई औरा कार बरामद कर ली है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड लिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
अयोध्या। राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी और VIP दर्शन में वसूली के मामले ने बड़ा मोड़ ले लिया है। SIT की जांच में सामने आया है कि मंदिर में कुछ लोगों ने संगठित नेटवर्क बनाकर श्रद्धालुओं से अवैध रूप से पैसे वसूले। आरोप है कि VIP दर्शन के नाम पर श्रद्धालुओं से बड़ी रकम ली जाती थी और उन्हें बिना लाइन के दर्शन कराए जाते थे। यह पूरा नेटवर्क होटल, होमस्टे और बाहरी संपर्कों के जरिए चलाया जा रहा था। जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं और कई लोगों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
जांच में सामने आया है कि राम मंदिर में कुछ लोगों ने VIP दर्शन के नाम पर संगठित सिस्टम बना लिया था। श्रद्धालुओं को भरोसा दिया जाता था कि उन्हें बिना लाइन और जल्दी दर्शन कराए जाएंगे लेकिन इसके बदले 20 से 25 हजार रुपये तक वसूले जाते थे। यह पैसा सीधे एक नेटवर्क के जरिए बांटा जाता था, जिसमें कई लोग शामिल बताए जा रहे हैं। SIT अब इस पूरी व्यवस्था के पैसों के लेनदेन की जांच कर रही है।
राम मंदिर में सामान्य श्रद्धालुओं के लिए लंबी कतारें होती हैं जबकि VIP पास पूरी तरह निःशुल्क दिए जाते हैं। जांच में दावा किया गया है कि इसी व्यवस्था का कुछ लोगों ने गलत इस्तेमाल किया। फर्जी तरीके से या प्रभाव का इस्तेमाल कर VIP दर्शन के नाम पर लोगों से पैसे लिए गए। यह भी सामने आया है कि कुछ मंदिर कर्मचारियों की भूमिका पर भी शक जताया गया है, जिसकी जांच की जा रही है।
SIT की जांच में यह भी सामने आया है कि इस कथित रैकेट का संपर्क शहर के कुछ होटल, होमस्टे और धर्मशालाओं से भी था। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की जानकारी जुटाकर उन्हें VIP दर्शन का ऑफर दिया जाता था। इसके बाद उनसे पैसे लेकर विशेष दर्शन की व्यवस्था की जाती थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि इस नेटवर्क में कौन कौन लोग सक्रिय थे और किस स्तर पर यह काम हो रहा था।
इस मामले में टिन्नू यादव के साथ साथ कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं। जांच में अनुकल्प, करुणेश, मनीष, अविनाश और लवकुश जैसे नामों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। SIT इनके बीच आपसी संपर्क और पैसों के लेनदेन को खंगाल रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क में बाहरी लोगों के साथ-साथ अंदरूनी सहयोग की भी संभावना हो सकती है।
इस मामले के सामने आने के बाद मंदिर की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या VIP पास जारी करने की प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है। SIT यह भी जांच कर रही है कि सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षा सिस्टम का सही उपयोग हुआ या नहीं।
SIT इस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है। मोबाइल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और कॉल डिटेल्स की जांच की जा रही है।
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर RSS का पहला बयान: दोषियों को मिले कड़ी सजा-दत्तात्रेह होसबाले
नई दिल्ली। दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि पर निर्मित भव्य मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था, समर्पण और बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की कार्रवाई का जिक्र करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों को सख्त सजा देने की आवश्यकता बताई। साथ ही मंदिर प्रबंधन से व्यवस्था और संचालन की कमियों को दूर करने की अपेक्षा भी जताई। उन्होंने समाज से धैर्य और संयम बनाए रखने की अपील करते हुए किसी भी तरह के भ्रम से बचने का आग्रह किया।
संघ सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर पीढ़ियों के संघर्ष, करोड़ों रामभक्तों के समर्पण, त्याग और बलिदान का परिणाम है। ऐसे पवित्र स्थल पर दान पात्रों में जमा राशि की कथित चोरी की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इससे पूरे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। यह केवल वित्तीय मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़ा विषय है। इसलिए इस घटना को पूरी गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
होसबाले ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के आग्रह पर उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल का गठन किया है। जांच के आधार पर कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
संघ सरकार्यवाह ने कहा कि इस घटना को एक असाधारण स्थिति मानते हुए मंदिर प्रबंधन को व्यवस्था और संचालन की सभी कमियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। वित्तीय प्रबंधन पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह होना चाहिए। साथ ही मंदिर का संचालन धार्मिक मर्यादाओं और पवित्र वातावरण के अनुरूप हो, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास हमेशा कायम रहे।
इस मामले को लेकर समाज में जो भ्रम और असमंजस की स्थिति बनी हुई है, उसे जल्द खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि मंदिर प्रबंधन और सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल आवश्यक कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि पारदर्शी जांच और स्पष्ट तथ्यों के सामने आने से लोगों के मन में उठ रहे सभी सवालों का समाधान होगा।
इधर, मामले की जांच कर रहा विशेष जांच दल श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के खातों का दोबारा ऑडिट कराने की तैयारी में है। शुरूआती जांच में वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद यह निर्णय लिया गया है। ऑडिट में निर्माण कार्यों पर हुए खर्च के साथ-साथ दान में प्राप्त आभूषण, सोना और चांदी जैसी कीमती वस्तुओं का भी परीक्षण किया जाएगा।
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केंद्र सरकार का सख्त एक्शन, ई-रिक्शा को रोकने में उपयोग हो रहे एप्स को बंद करने के निर्देश, ये हैं APPS
नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए BAT-BMS, Lossigy और Epoch Li-Ion मोबाइल ऐप्स को हटाने का आदेश दिया है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने गूगल और एप्पल को निर्देश दिया है कि इन तीनों ऐप्स को अपने-अपने ऐप स्टोर से तत्काल हटाया जाए. यह फैसला सोशल मीडिया पर वायरल हुए उन वीडियो के बाद लिया गया, जिनमें लोग ब्लूटूथ के जरिए चलते हुए ई-रिक्शा की लिथियम-आयन बैटरी को बंद करते हुए दिखाई दे रहे थे.
आईटी सचिव एस. कृष्णन ने शुक्रवार को दौरान बताया कि जैसे ही मंत्रालय के संज्ञान में यह मामला आया, तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी गई. उन्होंने कहा कि जिन ऐप्स का दुरुपयोग किया जा रहा था, उन्हें ऐप स्टोर से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. सूत्रों के मुताबिक BAT-BMS, Lossigy और Epoch Li-Ion ऐप्स को औपचारिक रूप से हटाने के निर्देश जारी किए गए हैं. साथ ही ऐप स्टोर संचालित करने वाली कंपनियों से कहा गया है कि भविष्य में ऐसे ऐप्स की जांच और अधिक सख्ती से की जाए.
जांच में सामने आया कि BAT-BMS और Lossigy जैसे ऐप्स मूल रूप से Battery Management System (BMS) के लिए बनाए गए थे. इनका उद्देश्य बैटरी की वोल्टेज, तापमान और अन्य तकनीकी जानकारियों की निगरानी करना था. हालांकि कई कम कीमत वाली चीनी लिथियम-आयन बैटरियों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण कोई भी व्यक्ति करीब 10 से 15 मीटर की ब्लूटूथ रेंज के भीतर इन ऐप्स के जरिए बैटरी से कनेक्ट होकर उसका क्कश2द्गह्म् ष्ठद्बह्यष्द्धड्डह्म्द्दद्ग स्नह्वठ्ठष्ह्लद्बशठ्ठ बंद कर सकता था. इसके बाद ई-रिक्शा तुरंत रुक जाता था और ऐप के जरिए दोबारा सक्रिय किए बिना चालू नहीं हो पाता था.
इस सुरक्षा खामी का फायदा उठाकर कई लोगों ने इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर प्रैंक वीडियो बनाए. इनमें चलते हुए ई-रिक्शा को अचानक बंद कर दिया जाता था. कई ई-रिक्शा चालकों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग बाद में पैसे लेकर उनकी गाड़ी दोबारा चालू करने की पेशकश भी कर रहे थे.
घटना के बाद दिल्ली परिवहन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है. परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने अधिकारियों को तकनीकी जांच के निर्देश दिए हैं ताकि इस खामी की पूरी जानकारी सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार किसी वाहन के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में बिना अनुमति डिजिटल हस्तक्षेप करना अपराध माना जाता है. ऐसे मामलों में जुर्माने के साथ जेल की सजा का भी प्रावधान है.
उज्जैन। बताया जा रहा है कि महिला अपने नए ससुराल की जमीन में हिस्सेदारी की मांग को लेकर गांव पहुंची थी, जिसके बाद विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। पुलिस ने 11 नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि आठ अन्य आरोपी फरार हैं। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
उज्जैन से 75 किलोमीटर दूर महिदपुर तहसील के झारड़ा के हरनिया खेड़ा गांव में यह घटना हुई। बताया जा रहा है कि तीन साल पहले अपने पहले पति को छोड़कर दूसरे युवक से विवाह करने वाली 40 वर्षीय महिला जब अपने दूसरे पति के साथ गांव लौटी, तो पूर्व पति के परिवार और ग्रामीणों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं।
पीड़िता ने शिकायत में बताया कि वह अपने घर के कमरे में थी, तभी आरोपी सुमेर सिंह, कचरू सिंह और बद्रीलाल अपने अन्य साथियों के साथ जबरन दरवाजा तोड़कर घर में घुस आए। महिला के बाल और हाथ पकड़कर उसे घसीटते हुए बाहर निकाला गया, जहां उसके बाल काटे गए, कपड़े फाड़े गए और गले में जूते-चप्पलों की माला पहनाकर गांव में जुलूस निकाला गया। इस दौरान उसके पति के साथ भी मारपीट की गई और दोनों को जान से मारने की धमकी दी गई।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस के पहुंचते ही ग्रामीणों और आरोपियों में भगदड़ मच गई, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर तीन मुख्य आरोपियों सुमेर सिंह, बद्रीलाल और कचरू को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया। झारड़ा थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर 11 नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।
पुलिस जांच में सामने आया कि महिला का विवाह पहले इसी गांव के एक युवक से हुआ था। करीब तीन साल पहले वह पहले पति को छोड़कर गांव के ही दूसरे युवक के साथ चली गई थी और दोनों ने विवाह कर लिया था। इसके बाद से दंपती इंदौर में रह रहे थे। तीन साल बाद गांव लौटने पर महिला द्वारा जमीन में हिस्सेदारी की मांग किए जाने से विवाद बढ़ गया और पूर्व ससुर ने गांव के कुछ असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया।
झारड़ा थाना प्रभारी आनंद भाबोर ने बताया कि घटना 30 जून की सुबह करीब 9:30 बजे की है। वहीं उज्जैन पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने कहा कि महिला के साथ अमानवीय व्यवहार करने वाले 11 नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर और गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि फरार आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
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खाद्य विभाग का छापा, अग्रवाल पब्लिक स्कूल की मेस सील, 22 फूड सैंपल लिए, रिपोर्ट के बाद होगी FIR
इंदौर। बच्चों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले विद्यालयों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा विभाग (Food Safety Department) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग की टीम ने इंदौर के तीन प्रतिष्ठित स्कूलों की मेस और कैंटीन का औचक निरीक्षण किया, जहां बड़े पैमाने पर लापरवाही और नियम विरुद्ध संचालन उजागर हुआ है।
निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ी लापरवाही अग्रवाल पब्लिक स्कूल में देखने को मिली। यहां स्कूल की मेस बिना किसी वैध खाद्य लाइसेंस (Food License) के धड़ल्ले से संचालित हो रही थी। नियमों का खुला उल्लंघन पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मेस को तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया है।
टीम ने जब कैंटीन और मेस के दस्तावेजों और व्यवस्थाओं को खंगाला, तो कई गंभीर कमियां सामने आईं है। मुख्य नियमों को ताक पर रखकर बिना रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस के बच्चों के लिए खाना तैयार किया जा रहा था। मेस में इस्तेमाल होने वाले पानी की अनिवार्य जांच रिपोर्ट (Water Testing Report) उपलब्ध नहीं थी। खाना बनाने और परोसने वाले कर्मचारियों (Food Handlers) के पास जरूरी मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट भी नहीं मिले।
कार्रवाई के दौरान टीम ने स्वच्छता और गुणवत्ता की जांच के लिए अलग-अलग विद्यालयों की मेस से 22 खाद्य नमूने (Food Samples) एकत्र किए हैं। इन सभी सैंपलों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित विद्यालयों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम (FSSA) के तहत सख्त वैधानिक व दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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ब्लिंकिट की ड्रेस में 40 लाख की दिनदहाड़े लूट, 2 दिन बाद लिखाई रिपोर्ट
रतलाम। ब्लिंकिट कंपनी की ड्रेस में आए एक बदमाश ने शहर सराय स्थित एक घर के मेन गेट पर खड़े कर्मचारी को जान से मारने की धमकी देकर 40 लाख रुपए से भरा बैग लूट लिया। बदमाश बैग लेकर भागा और रोड पर पहले से खड़े साथी बदमाश की स्कूटी पर बैठकर उसके साथ रफूचक्कर हो गया। सीसीटीवी फुटेज में दोनों बदमाश ब्लिंकिट कंपनी की ड्रेस में स्कूटी से भागने की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं। पुलिस अन्य सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है और दोनों की शिनाख्त करने में जुटी है। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है।
12 बजे दर्ज फरियादी मनीष पटवा का कहना है कि इस घटना के बाद मैं घबरा गया था। मैंने पूरी बात दोस्त गौरव शर्मा को बताई क्योंकि रुपए उन्हीं के थे। उन्होंने कहा कि मैं अभी उज्जैन आया हुआ हूं, वहां से आकर रिपोर्ट करवाएंगे। इसी वजह से रिपोर्ट कार्रवाई की हमारे दोनों कर्मचारी बैग लेकर निकले तभी ब्लिंकिट कंपनी की ड्रेस पहने एक युवक मुंह पर कपड़ा बांधे मेरे घर के गलियारे से मेन डोर पर आया।
आते ही उसने फरदीन को जान से मारने की धमकी दी और उसके हाथ से जबरन रुपए से भरा बैग छीन लिया। वह बैग लूटकर भागा तो फरदीन व फिरोज ने उसका पीछा किया, जिस पर लुटेरे ने उनको जान से मारने की धमकी भी दी। रोड पर उसका साथी बदमाश स्कूटी लेकर तैयार खड़ा था। बैग लेकर भागा लुटेरा उसकी स्कूटी पर बैठा और दोनों मौके से गायत्री टॉकीज की ओर भाग निकले। स्कूटी वाले बदमाश ने भी ब्लिंकिट कंपनी की ड्रेस पहन रखी थी।
मंदसौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। गाड़ी में पेट्रोल डलवाने के दौरान आरोपी और उसका सहयोगी पुलिसकर्मियों की ही गाड़ी लेकर फरार हो गया। पूरी घटना पेट्रोल पंप पर लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई है।
दरअसल, पुलिस ने धोखाधड़ी के आरोप में 2 युवकों को सागर से गिरफ्तार किया था। जिसके बाद उन्हें हरियाणा ले जाया जा रहा था। इस दौरान दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस से मंदसौर के गरोठ में पेट्रोल डलवाने के लिए हरियाणा पुलिस रुकी थी। इसी दौरान मौका पाते ही आरोपी पुलिस को चकमा देकर गाड़ी लेकर रफू चक्कर हो गए।
आरोपी कुछ ही दूरी पर पुलिस की गाड़ी सड़क पर छोड़कर भाग गए। इस पूरे घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। जिसके आधार पर उनकी तलाश की जा रही है। दोनों आरोपियों को पकड़ने के लिए कई जगह मंदसौर पुलिस ने नाकाबंदी कर दी है। इस घटना के बाद पुलिस की लापरवाही को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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3.30 सेकंड के डांस का वीडियो आया था सामने ....पत्नी-बेटों को कुल्हाड़ी से काटने से पहले मुरैना में बलराम ने फूफा को भेजे थे 3 ऑडियो मैसेज
मुरैना मध्यप्रदेश के मुरैना के किशनपुरा गांव में 27 जून 2026 की सुबह पत्नी और दोनों बेटों की हत्या के बाद आत्महत्या की की सनसनीखेज घटना ने हर किसी को झकझोर दिया था। अब इस घटना से जुड़े तीन ऑडियो सामने आए हैं। ये ऑडियो बीवी व बच्चों की हत्या करने वाले पति बलराम कुशवाह के हैं। ऑडियो घटना से कुछ घंटे पहले के बताए गए हैं और इनमें बलराम काफी गुस्से में बात करता हुआ सुनाई दे रहा है।
जो तीन ऑडियो मैसेज सामने आए हैं वो बलराम ने पत्नी रविता के फूफा श्रीकृष्ण कुशवाहा को भेजे थे। इतना ही नहीं फूफा श्रीकृष्ण कुशवाहा के मुताबिक उस दिन बलराम ने उन्हें 22 बार कॉल भी किए थे, लेकिन उन्होंने बलराम के काफी गुस्से में होने के कारण कॉल रिसीव नहीं किए थे। जिसका पछतावा उन्हें आज भी है। जो ऑडियो सामने आए हैं उनमें जो बलराम काफी गुस्से में बात करते सुनाई दे रहे हैं।
पहला ऑडियो- देख जा ##@%** की वीडियो तू…नहीं तो तू कहता फिरे, अब देख वीडियो मैंने तुझे डाल दी।
दूसरा ऑडियो- देख जा वीडियो #@&* की बढ़िया, देख।
तीसरी ऑडियो- देख जा ##@%** की वीडियो, थूथरो खोल के (चेहरा दिखाकर) नाच रही है, ये तो कल नग्न होकर नाचेगी, उसका जबावदार कौन होगा? जा वीडियो हे देख लो तुम चुपचाप, मैंने तुम्हें डाल दी आज।
किशनपुरा गांव में रहने वाले बलराम कुशवाह (32) ने पत्नी रविता (28) और बेटे आरव (10) व बेटे अतुल (7) की बेरहमी से कुल्हाडी से काटकर हत्या कर दी थी। पत्नी और बेटों को मारने के बाद बलराम ने खुद ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया था कि बलराम की पत्नी रविता ने करीब एक महीने पहले गांव की श्रीमद् भागवत कथा में डांस किया था, जिसका वीडियो गांव के कुछ लड़कों ने बनाकर बलराम को वॉट्सएप कर दिया था। इस वीडियो को देखने के बाद बलराम के सिर पर खून सवार हो गया और घर में सो रही पत्नी और बेटों की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या कर आत्महत्या कर ली।
इस सनसनीखेज वारदात के कुछ घंटों बाद वो वीडियो भी सामने आया था जिसमें बलराम की पत्नी रविता डांस करते हुए दिख रही थी। वीडियो में रविता भागवत कथा के पंडाल में डांस करती दिख रही थी। वीडियो में रविता सिर पर पल्लू लिए हुए पूरी तरह से शालीनता से डांस कर रही थी और पंडाल में मौजूद महिलाएं व युवतियां उसका हौसला बढ़ा रही थीं।
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एम्बुलेंस बनी ‘सवारी गाड़ी’: मरीज तड़प रहे और ड्राइवर स्कूली बच्चे ढो रहे, स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल
इछावर। सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजनाएं और मरीजों की जान बचाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर दौड़ाई जा रही सरकारी एम्बुलेंस अब मरीजों के लिए नहीं, बल्कि ड्राइवरों की एक्स्ट्रा कमाई का जरिया बन चुकी हैं। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र से एक ऐसा ही शर्मनाक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे जिले के स्वास्थ्य महकमे की पोल खोलकर रख दी है। जिस एम्बुलेंस को मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उसकी जिंदगी बचानी चाहिए, उस गाड़ी में अब मरीजों की जगह सवारियां और स्कूली बच्चे सफर कर रहे हैं!
इछावर में एम्बुलेंस ड्राइवरों की इस मनमानी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे एम्बुलेंस का उपयोग मरीजों को लाने के बजाय स्कूली बच्चों और आम सवारियों को ढोने के लिए किया जा रहा है। इतना ही नहीं, ये ड्राइवर सरकारी डीजल फूंककर अपनी गाड़ियों को अनावश्यक इधर-उधर घुमाते हैं, ताकि मीटर की रीडिंग बढ़ाई जा सके और जमकर फर्जीवाड़ा किया जा सके।
क्षेत्र की जनता का आरोप है कि जब भी कोई गंभीर मरीज एम्बुलेंस के लिए फोन करता है, तो उन्हें 3 से 4 घंटे तक गाड़ी उपलब्ध नहीं होने का बहाना बना दिया जाता है। मरीज अस्पताल जाने के लिए तड़पता रहता है, लेकिन ये एम्बुलेंस किसी मरीज के घर के बाहर नहीं, बल्कि क्षेत्र के ढाबों, होटलों या निजी आयोजनों के बाहर कतार में खड़ी दिखाई देती हैं। एक-एक आयोजन स्थल पर तीन-तीन, चार-चार एम्बुलेंस का खड़ा होना इस बात का सबूत है कि इन्हें न तो किसी नियम का खौफ है और न ही किसी की जान की परवाह। बड़ा सवाल है कि क्या सीहोर का स्वास्थ्य विभाग और जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे गोरखधंधे से अनजान हैं? या फिर आंखें मूंदकर इस लापरवाही को शह दी जा रही है? मरीजों के हक की एम्बुलेंस से निजी काम करने वाले इन ड्राइवरों पर कब तक कार्रवाई होगी, यह देखने वाली बात होगी।
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