भोपाल। मध्यप्रदेश के विदिशा जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। विदिशा से करीब 40 किलोमीटर दूर शमशाबाद विधानसभा के कागपुर के समीप सिद्ध घाट पर बेतवा नदी में नहाते समय एक युवक को विशाल अजगर ने जकड़ लिया।
कागपुर निवासी सर्प मित्र कन्हैया जोशी रोजाना की तरह सिद्ध घाट पर नहाने पहुंचे थे। जैसे ही उन्होंने नदी में डुबकी लगाई, पानी के अंदर मौजूद अजगर ने उन्हें अपने शरीर में जकड़ लिया। कन्हैया सर्प मित्र होने के कारण सांपों के व्यवहार और उनसे बचाव के तरीके जानते थे।
उन्होंने हिम्मत दिखाते हुए तुरंत पानी से बाहर निकलने का प्रयास किया और अजगर के मुंह को दबाया। इसके बाद उसकी पूंछ को दबाने पर अजगर की पकड़ धीरे-धीरे ढीली हुई और उन्होंने खुद को उसकी पकड़ से छुड़ा लिया।
कन्हैया ने बताया कि सर्प मित्र होने के कारण उन्हें ऐसी स्थिति से निपटने का अनुभव था। उन्होंने कहा कि यदि उनकी जगह कोई दूसरा व्यक्ति होता तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। घटना के बाद घाट पर मौजूद लोगों में भी काफी देर तक दहशत का माहौल बना रहा।
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STF निरीक्षक पर दुष्कर्म मामले में नया मोड़: पीड़िता का यू-टर्न, SSP और महिला पुलिस पर लगाया दबाव में FIR दर्ज कराने का आरोप
ग्वालियर। भोपाल में पदस्थ स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के निरीक्षक आनंद कुमार पर दर्ज दुष्कर्म के मामले में दो दिन बाद ही नया मोड़ आ गया है। मामले में एफआईआर दर्ज कराने वाली 34 वर्षीय पीड़िता ने मीडिया के सामने आकर यू-टर्न ले लिया है। महिला ने ग्वालियर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) धर्मवीर सिंह और महिला थाने में पदस्थ रश्मि भदौरिया पर दबाव बनाकर और जबरन एफआईआर दर्ज कराने का गंभीर आरोप लगाया है।
मीडिया से चर्चा करते हुए महिला ने बताया कि एसटीएफ निरीक्षक आनंद कुमार के साथ उसके पहले से ही पारिवारिक संबंध हैं, जो आज भी कायम हैं। पीड़िता के अनुसार- उसने पहले अपने पिता के कहने पर पुलिस में शिकायत आवेदन दिया था, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया था। उसने अपने साथ किसी भी प्रकार के शारीरिक शोषण होने की बात से साफ इनकार किया है। पीड़िता ने बताया कि मामले को समाप्त करने के लिए उसने पुलिस को शपथ पत्र (Affidavit) भी सौंपा था। इसके बावजूद पुलिस ने जबरन उसका मेडिकल परीक्षण कराया और दबाव डालकर मामले में एफआईआर दर्ज की।
पुलिस में दर्ज मामले के अनुसार, घटना 2022 की बताई गई थी जब आनंद कुमार ग्वालियर जिले के भितरवार क्षेत्र (गिजौर्रा/टेकनपुर) में सब-इंस्पेक्टर (SI) के पद पर तैनात थे। आरोप था कि पारिवारिक विवाद के दौरान निरीक्षक ने महिला से संपर्क कर मदद का आश्वासन दिया और बाद में अपनी पत्नी के कैंसर से पीड़ित होने तथा उसकी मृत्यु के बाद शादी करने का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। महिला का आरोप था कि शादी के दबाव पर इनकार करने के बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, अब पीड़िता द्वारा पुलिस अधिकारियों पर ही दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई और दबाव के आरोप लगाए जाने के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले में नया विवाद खड़ा हो गया है।
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प्रेमिका को पाने मासूमों को जिंदा कुएं में फेंका! 2 भाइयों की खौफनाक हत्या से सनसनी
छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के लवकुशनगर थाना क्षेत्र से दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। अपनी शादीशुदा प्रेमिका को पाने की अंधी सनक में एक सिरफिरे प्रेमी ने उसके दो मासूम बेटों का अपहरण कर उन्हें जिंदा कुएं में फेंक दिया। शुक्रवार से रहस्यमय तरीके से लापता दोनों सगे भाइयों के शव पहाड़तरे के पुरवा स्थित एक कुएं से बरामद किए गए हैं। इस दोहरे हत्याकांड के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश और तनाव का माहौल निर्मित हो गया है। भौगोलिकसंदर्भ
जानकारी के मुताबिक शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे जब दोनों मासूम स्कूल से घर लौट रहे थे, तभी मां के कथित प्रेमी ने रास्ते में रोककर बाइक से उनका अपहरण कर लिया।
प्रेमी ने प्रेमिका को हासिल करने के लिए उसके ही दो मासूम बच्चों को पहाड़तरे के पुरवा स्थित कुएं में जिंदा फेंक दिया, जिससे डूबने से दोनों की मौत हो गई।
मासूमों के शव मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। घटना के बाद क्षेत्र में बढ़े जनाक्रोश को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। बच्चों की मां की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
इंदौर । मालवा अंचल में मानसून की बेरुखी और बारिश थमने से चिंतित ग्रामीणों ने इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए एक अनोखी और प्राचीन परंपरा का सहारा लिया है। इंदौर जिले की महू तहसील के ग्राम गवली पलासिया में अच्छी बारिश की कामना को लेकर ‘जिंदा व्यक्ति की शव यात्रा’ निकाली गई। ग्रामीणों का मानना है कि इस अनूठे टोटके से रूठे हुए मेघराज प्रसन्न होते हैं और क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है।
गांव में फसलों को पानी न मिलने से परेशान किसानों और ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस प्रतीकात्मक यात्रा का आयोजन किया। यात्रा के दौरान एक जीवित व्यक्ति को बांस की अर्थी पर लिटाया गया और उसे कफन की तरह कपड़े से ढंका गया। इसके बाद ढोल-धमाकों और धार्मिक भजनों के साथ गांव की मुख्य गलियों और चौराहों से यह ‘जिंदा शव यात्रा’ निकाली गई। गांव के लोग पीछे-पीछे चलते हुए भगवान से जल्द से जल्द मूसलाधार बारिश कराने की प्रार्थना कर रहे थे।
गवली पलासिया के ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा नई नहीं है, बल्कि जब भी खेतों में पानी की सख्त जरूरत होती है और बारिश रुक जाती है, तो पूर्वजों के जमाने से चला आ रहा यह टोटका अपनाया जाता है। मान्यता है कि इस तरह की सांकेतिक शव यात्रा निकालने से प्राकृतिक बाधाएं दूर होती हैं और इंद्रदेव की कृपा बरसती है। बारिश की आस में निकली यह अनोखी और आस्था से भरी यात्रा अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों को पूरा भरोसा है कि उनकी यह प्रार्थना जरूर रंग लाएगी और जल्द ही गांव में झमाझम बारिश का दौर शुरू होगा।
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ट्रेन में चूहे के आतंक का सबूत खुद रेलवे PRO ने दिखाया! 78 साल के बुजुर्ग की कुतरी नाक
इंदौर। उना-इंदौर एक्सप्रेस में 78 वर्षीय रिटायर्ड अधिकारी की नाक चूहे द्वारा काटे जाने की घटना ने रेलवे की साफ-सफाई और यात्री सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि इस घटना को लेकर सामने आई शिकायत और संबंधित जानकारी को रेलवे PRO मुकेश कुमार ने खुद यात्री ट्वीट मीडिया को दिखया है । यानी मामला सिर्फ यात्री या परिजनों के आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे के ही अधिकारी द्वारा ट्वीट दिखाए जाने के बाद घटना ने गंभीर रूप ले लिया है।
रिटायर्ड अधिकारी एचपी करण चंडीगढ़ से इंदौर आ रहे थे। रात करीब साढ़े 10 बजे वह ट्रेन के कोच में सो रहे थे। इसी दौरान चूहे ने उनकी नाक पर काट लिया।अचानक दर्द और खून निकलने से उनकी नींद खुली। रात के समय ट्रेन के अंदर इस तरह की घटना से बुजुर्ग और उनके परिजन घबरा गए।
परिजनों का आरोप है कि कोच में गंदगी और चूहों की मौजूदगी को लेकर रेलवे स्टाफ से शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद गंदगी तो साफ कर दी गई, लेकिन चूहों को नियंत्रित करने के लिए पेस्ट कंट्रोल जैसी प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई।ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि अगर ट्रेन में चूहों की मौजूदगी की शिकायत पहले ही मिल चुकी थी, तो रेलवे ने उन्हें रोकने के लिए क्या कार्रवाई की?
इस मामले में रेलवे PRO मुकेश कुमार ने यात्री की शिकायत से जुड़ा ट्वीट खुद दिखाया। इससे घटना की जानकारी रेलवे अधिकारियों तक पहुंचने और शिकायत दर्ज होने की पुष्टि होती है।अब रेलवे के सामने सिर्फ घटना की जानकारी देना नहीं, बल्कि यह जवाब देना भी जरूरी है कि जिस कोच में बुजुर्ग यात्री सफर कर रहे थे, वहां चूहों की समस्या क्यों बनी रही और शिकायत के बाद भी इसे पूरी तरह खत्म क्यों नहीं किया गया।
घटना के बाद इंदौर पहुंचने पर बुजुर्ग को इलाज के लिए कोकिलाबेन अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने रेबीज से बचाव के लिए पहला इंजेक्शन लगाया।एक बुजुर्ग यात्री का ट्रेन में सोते समय चूहे का शिकार होना रेलवे की व्यवस्था पर गंभीर सवाल है। यात्री टिकट लेकर सफर करता है तो उसे कम से कम सुरक्षित और स्वच्छ माहौल मिलने की उम्मीद होती है।
कुछ समय पहले इंदौर एयरपोर्ट पर भी यात्री को चूहे के काटने की घटना सामने आई थी। अब ट्रेन में बुजुर्ग यात्री की नाक चूहे ने कुतर दी।ट्रेन हो या एयरपोर्ट… यात्रियों के पीछे चूहे पड़े हैं या व्यवस्था ही इतनी कमजोर है कि चूहे यात्रियों तक पहुंच जा रहे हैं?रेलवे को सिर्फ शिकायत दर्ज करने और सफाई कराने तक सीमित रहने के बजाय यह सुनिश्चित करना होगा कि ट्रेनों में चूहों की समस्या दोबारा सामने न आए। क्योंकि सवाल सिर्फ एक बुजुर्ग की नाक पर लगे जख्म का नहीं, सवाल उस व्यवस्था का है जिसमें यात्री चैन से सोने के लिए भी सुरक्षित नहीं हैं।
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मां ही निकली अपनी दो मासूम बेटियों की सौदागर, कराया यौन शोषण, दोनों लड़कियां निकलीं प्रेग्नेंट
बुरहानपुर। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र से इंसानियत और पवित्र रिश्तों को तार-तार कर देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक मां ने आर्थिक लाभ कमाने की नीयत से अपनी ही दो नाबालिग बेटियों का सौदा कर दिया और उन्हें अलग-अलग पुरुषों के पास पत्नी की तरह रहने के लिए सौंप दिया। पुलिस ने इस मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए पीड़िताओं की मां सहित 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
शाहपुर थाना पुलिस के अनुसार, 21 अगस्त को नाबालिग बालिकाओं के साथ यौन शोषण और बलात्कार के इस गंभीर मामले में पॉक्सो (POCSO) एक्ट सहित विभिन्न संगीन धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। विवेचना के दौरान 23 अगस्त को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 3 मुख्य आरोपियों को धर दबोचा।
दिसंबर 2024 से पहली नाबालिग पीड़िता को अलग-अलग समय पर आरोपी गिरधर (पिता भूरमल), शेर सिंह (पिता कुटलिया) और बाद में गोविंदा (पिता पप्पू) के पास रखा गया। जांच में आरोपी गोविंदा से संबंधित 1 लाख रुपये के आर्थिक लेनदेन की पुष्टि हुई है। वहीं दूसरी नाबालिग पीड़िता को आरोपी कमलेश (पिता नानसिंह) के पास रखा गया था। इंसानियत को झकझोर देने वाली बात यह है कि आरोपियों द्वारा लगातार किए गए यौन शोषण और बलात्कार के कारण दोनों नाबालिग बालिकाएं गर्भवती हो गई हैं। पुलिस ने दोनों का तत्काल मेडिकल परीक्षण कराया है।
शाहपुर थाना सब-इंस्पेक्टर शैलेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएनए (DNA) परीक्षण और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पीड़िताओं के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, आर्थिक लेनदेन के सबूत और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को विवेचना में शामिल कर केस को मजबूत बनाया जा रहा है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में बालिकाओं की कलयुगी मां, गोविंदा (पिता पप्पू) और कमलेश (पिता नानसिंह) शामिल हैं। पुलिस की टीमें फरार चल रहे शेष आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं।
भारत से फरार चल रहे तीन कुख्यात भगौड़े गैंगस्टरों को मलेशिया से भारत लाया गया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार 24 अगस्त, 2026 को घोषणा करते हुए कहा कि ये तीनों भगौड़े गैंगस्टर बंबीहा गैंग से जुड़े हैं. जिसे मलयेशिया से डिपोर्ट कर भारत लाया गया है. गृह मंत्रालय के मुताबिक, भारत लाए गए तीन आरोपियों की पहचान जसप्रीत सिंह, अजय सिंह और पवनीदीप सिंह के रूप में हुई है. दक्षिण-एशियाईऔर प्रवासी
इन तीनों पर जबरन वसूली, सीमा पार हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी समेत कई आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं.
भारतीय एजेंसियों की मदद से इन तीनों को मलेशिया से डिपोर्ट कराया गया और भारत पहुंचने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. गृह मंत्री कार्यालय ने भारत से फरार चल रहे तीन कुख्यात गैंगस्टरों को मलेशिया से भारत लाने की पुष्टि की है. ये तीनों लुधियाना में ग्रेनेड हमले की नाकाम साजिश में भी शामिल होने के अलावे हत्या, रंगदारी, विस्फोटक जैसे जुड़े मामलों में वांछित थे. दक्षिण-एशियाईऔर प्रवासी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ‘ये फरार अपराधी- जसप्रीत सिंह, अजय सिंह और पवनदीप सिंह- बंबीहा गैंग से जुड़े हैं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुरक्षित और संरक्षित भारत के विजन के तहत, हमारी एजेंसियों ने साल 2026 में अब तक 51 कुख्यात अपराधियों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी करने में सफलता हासिल की है. दक्षिण-एशियाईऔर प्रवासी
गृह मंत्री कार्यालय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुरक्षित और सुदृढ़ भारत के विजन के तहत भारतीय एजेंसियां विदेशों में छिपे कुख्यात अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही हैं. सरकार के मुताबिक, विदेशों में छिपकर आपराधिक गतिविधियों को संचालित करने वाले आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज किया जा रहा है. तीनों आरोपियों का प्रत्यर्पण इसी ऑपरेशन का शानदार उदाहरण है.
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J&K SIA ने खोली 28 साल बाद वंधामा नरसंहार की फाइल, 23 कश्मीरी पंडित एक ही रात में मारे गए थे
जम्मू-कश्मीर स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी जम्मू-कश्मीर में 28 साल पहले वंधामा में 23 कश्मीरी पंडितों की हत्या की जांच फिर से शुरू की है. गांदरबल जिले के वंधामा में 25 जनवरी 1998 में रात को आतंकियों ने 23 कश्मीरी पंडितों की सामूहिक हत्या कर दी थी. मामले में हत्या, आगजनी, धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने और हथियारों से संबंधित धाराएं लगाई गई थीं. मरने वालों में 9 महिलाएं और 4 बच्चे शामिल थे.
जानकारी के मुताबिक, हमलावर सेना की वर्दी में गांव पहुंचे थे. वारदात के बाद कुछ घरों और एक मंदिर में आग लगाए जाने की भी जानकारी सामने आई थी.
SIA 25 जनवरी 1998 को जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले के वंधामा गांव में हुए कुख्यात नरसंहार की फाइल को 28 साल बाद दोबारा खोल दिया है. उस रात को आतंकियों ने 23 कश्मीरी पंडितों की सामूहिक हत्या कर दी थी, जिसमें नौ महिलाएं और चार बच्चे भी शामिल थे.
हालांकि, वंधामा केस की जांच शुरू होने के बाद से ही इस नरसंहार के पीछे कौन था, इसको लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे. SIA ने मामले से जुड़े सबूत जुटाने के लिए कश्मीर घाटी में कई जगहों पर तलाशी ली है. बाद में पुलिस और CID के रिकॉर्ड में हरकत-उल-अंसार के आतंकियों को इस हमले से जोड़कर देखा गया.
जानकारी के मुताबिक, हमलावरों ने परिवारों के लोगों को एक जगह इकट्ठा कर गोलियां चलाई थीं, यह हमला गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर हुआ था. घाटी से पलायन नहीं करने के कारण कश्मीरी हिंदुओं को निशाना बनाया गया था.
टीमों ने कई हत्याओं में शामिल आतंकियों, ओवर ग्राउंड वर्कर्स और अन्य लोगों की पहचान कर ली है जिसमें से कुछ आरोपियों की मौत हो चुकी है और कुछ अब भी जीवित हैं. मृत्युव विपदा
SIA ने कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट, लेखक सर्वानंद कौल प्रेमी और उनके बेटे वीरेंद्र कौल की हत्या का केस भी खोला है. साथ में कश्मीरी पंडित नेता टीका लाल टपलू और जस्टिस नीलकंठ गंजू की हत्या के मामलों में भी जांच तेज कर दी है.
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आगरा ट्रेन सूटकेस कांड: चेन्नई के किचन में मिले ओडिशा की महिला के शव के अवशेष, CCTV से खुला खौफनाक राज
चेन्नई। आगरा में कुछ दिन पहले एक ट्रेन के भीतर सूटकेस में सड़े-गले इंसानी अंग मिलने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हासिल हुई है। इस दिल दहला देने वाली वारदात की जांच करते हुए पुलिस अब तमिलनाडु के चेन्नई स्थित एक ऐसे मकान तक पहुंच गई है, जहां इस जघन्य अपराध से जुड़े खौफनाक राज छिपे थे। पुलिस ने मृतका की पहचान ओडिशा की रहने वाली 38 वर्षीय हयुथन निशा के रूप में की है।
तफ्तीश में सामने आया है कि महिला की बेरहमी से हत्या करने के बाद उसके शव को दो टुकड़ों में काट दिया गया। सबूत मिटाने की नीयत से शव के हिस्से को सूटकेस में बंद करके ट्रेन में लावारिस छोड़ दिया गया था।
मामले का खुलासा आगरा रेलवे पुलिस द्वारा खंगाले गए CCTV फुटेज से हुआ। जांच के दौरान पुलिस को दो संदिग्ध व्यक्ति एक भारी ट्रॉली बैग के साथ दिखाई दिए। आगरा पुलिस ने तुरंत इस फुटेज की जानकारी चेन्नई सेंट्रल रेलवे पुलिस के साथ साझा की।
चेन्नई रेलवे पुलिस ने जब अपने स्टेशनों के फुटेज की जांच की, तो वही दोनों संदिग्ध उसी तरह के लाल रंग के ट्रॉली बैग के साथ ट्रेन में सवार होते हुए साफ नजर आए। फुटेज के आधार पर पुलिस ने संदिग्धों की पहचान माणिक उद्दीन लस्कर और भगवती माझी के रूप में की।
सुराग मिलते ही चेन्नई रेलवे पुलिस की एक विशेष टीम ने चेन्नई के गुडुवांचेरी इलाके में स्थित संदिग्धों के किराए के मकान का पता लगाया और वहां छापेमारी की। जब पुलिस टीम ने घर के अंदर तलाशी ली, तो वहां का नजारा देखकर पुलिसकर्मी भी दंग रह गए।
कथित तौर पर घर के किचन में रखे खाना पकाने वाले एक बड़े बर्तन (भगोने) से शरीर के और भी सड़े-गले अवशेष बरामद हुए। आरोपी शव के बाकी हिस्सों को पूरी तरह ठिकाने नहीं लगा पाए थे और उन्हें किचन में छिपाकर रखा हुआ था।
पुलिस अधिकारी के अनुसार, घटना के बाद से ही दोनों मुख्य आरोपी फरार चल रहे हैं। पुलिस की कई टीमें उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोनों संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद ही हत्या के सही कारणों और पूरी साजिश का खुलासा हो सकेगा।
फिलहाल, पुलिस की फॉरेंसिक टीम वैज्ञानिक जांच और DNA मैपिंग की तैयारी कर रही है। इससे यह प्रमाणित किया जाएगा कि आगरा में ट्रेन के सूटकेस से मिले अंग और चेन्नई के घर के किचन से बरामद हुए अवशेष एक ही महिला हयुथन निशा के हैं या नहीं।
महिला के अचानक गायब होने के बाद उनके बेटे की शिकायत के आधार पर पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और जल्द ही आरोपियों को हिरासत में लेने का दावा कर रही है।
छतरपुर। छतरपुर जिले के लवकुशनगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक दुर्लभ जन्म का मामला सामने आया है. यहां एक महिला ने ऐसे नवजात को जन्म दिया, जिसके चार हाथ और चार पैर दिखाई देने की बात सामने आई है. बच्चे को देखकर परिजन और अस्पताल का स्टाफ हैरान रह गया. इसके बाद अस्पताल में लोगों की भीड़ जुट गई और नवजात की तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे.
अस्पताल के अनुसार, जन्म के समय नवजात का वजन करीब 3 किलोग्राम था. डॉक्टरों की टीम फिलहाल मां और बच्चे की स्थिति पर नजर रख रही है. बच्चे को आगे के उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजने की तैयारी की जा रही है.
ड्यूटी पर मौजूद महिला डॉक्टर के मुताबिक, इस तरह के मामले बेहद दुर्लभ होते हैं. डॉक्टर ने बताया कि कई बार गर्भ में जुड़वां भ्रूण विकसित हो रहे होते हैं, लेकिन उनमें से एक भ्रूण का विकास पूरी तरह नहीं हो पाता. ऐसी स्थिति में अविकसित भ्रूण दूसरे भ्रूण से जुड़ सकता है और उसके शरीर पर अतिरिक्त अंग दिखाई दे सकते हैं. हालांकि, बच्चे की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति और आगे के उपचार का फैसला विशेषज्ञ जांच के बाद ही स्पष्ट होगा. अस्पताल की ओर से मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों से भी सलाह लेने की बात कही गई है.
डॉक्टरों की टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नवजात की स्थिति में आगे किस तरह का उपचार संभव है. अतिरिक्त अंगों को सर्जरी के जरिए हटाया जा सकता है या नहीं, इसका निर्णय विशेषज्ञ चिकित्सकों की जांच और बच्चे की मेडिकल स्थिति के आधार पर लिया जाएगा. फिलहाल नवजात को निगरानी में रखा गया है. मां की हालत भी डॉक्टरों की देखरेख में बताई जा रही है.
मध्य प्रदेश में इससे पहले भी अतिरिक्त अंगों के साथ जन्म लेने वाले नवजातों के मामले सामने आ चुके हैं. खंडवा में एक बच्चे के चार हाथ, चार पैर और चार कान होने का मामला सामने आया था. जन्म के कुछ समय बाद ही उसकी मौत हो गई थी. इसी तरह विदिशा में चार पैरों वाली बच्ची का जन्म हुआ था, जिसे बेहतर उपचार के लिए एम्स भोपाल रेफर किया गया था. इंदौर में भी एक बेहद दुर्लभ जन्म का मामला सामने आया था, जिसमें नवजात के दो सिर, चार हाथ, दो पैर और दो दिल होने की जानकारी सामने आई थी.
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उज्जैन में इटली-स्पेन और इंग्लैंड के 3 विदेशी जोड़ों ने की शादी, हिंदू रीति-रिवाज से लिए 7 फेरे
धार्मिक। नगरी उज्जैन में इन दिनों एक अनोखा और भव्य विवाह समारोह काफी सुर्खियों में बना हुआ है. यहां किसी भारतीय जोड़े ने नहीं, बल्कि सात समंदर पार से आए तीन विदेशी जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए और विवाह के पवित्र बंधन में बंधे. शादी समारोह की शुरुआत भारतीय परंपरा के अनुसार हुई पहले दूल्हा-दुल्हन को हल्दी और मेहंदी लगाई गई, फिर धूमधाम से बारात निकाली गई और अंत में वैदिक रीति-रिवाज से विवाह संपन्न हुआ.
इंदौर रोड स्थित निनोरा आनंद में वैलनेस रिट्रीट पार्क में योग गुरु डॉ. ओमानंद महाराज के पावन सानिध्य में यह विवाह समारोह आयोजित किया गया. डॉ. ओमानंद गुरु ने बताया कि योग और अध्यात्म के कारण विदेशों में भी उनके कई शिष्य हैं. वे समय-समय पर अपने शिष्यों को भारतीय संस्कृति और अटूट विवाह बंधन के महत्व के बारे में बताते रहते हैं. उनकी इसी सीख से प्रभावित होकर इटली, स्पेन और इंग्लैंड के तीन विदेशी जोड़ों ने सनातन धर्म अपनाकर परिणय सूत्र में बंधने की इच्छा जताई थी.
वैदिक विवाह से पूर्व सभी तीन जोड़ों का नामकरण कर उन्हें भारतीय सनातन नाम दिए गए:
पहला जोड़ा (इटली): ईवा को ‘दर्पण आनंद’ और मास्सिमिलियानो को ‘बलराम आनंद’ नाम दिया गया.
दूसरा जोड़ा (इटली): जेसिका को ‘मां सीता आनंद’ और लुका को ‘राम आनंद’ नाम दिया गया.
तीसरा जोड़ा (स्पेन व इंग्लैंड): स्पेन की इन्मा को ‘मां शांति आनंद’ और इंग्लैंड के मार्क को ‘प्रकाशानंद’ नाम दिया गया.
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व वर्ष 2024 में भी डॉ. ओमानंद महाराज के परमानंद योग आश्रम में इटली, अमेरिका और पेरू के तीन जोड़ों ने सनातन परंपरा से विवाह रचाया था.
डॉ. ओमानंद गुरु ने बताया कि पश्चिमी देशों में शादी को महज एक ‘लीगल कॉन्ट्रैक्ट’ (कानूनी अनुबंध) माना जाता है, जिसे लोग आसानी से तोड़ देते हैं. इसके विपरीत भारत में विवाह केवल दो शरीरों का नहीं, बल्कि आत्मा का संबंध माना जाता है, जिसे जीवन भर निभाया जाता है. भारतीय संस्कृति की इसी विशेषता ने विदेशियों को गहराई से प्रभावित किया.
विवाह समारोह के दौरान विदेशी दूल्हा-दुल्हन और उनके साथ आए बारात के अन्य मेहमान भारतीय परिधानों में नजर आए. हल्दी और मेहंदी की रस्मों के दौरान सभी विदेशी मेहमान भारतीय भजनों और गानों की धुन पर जमकर झूमते दिखे.
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SBI बैंक मैनेजर से 15 लाख का साइबर फ्रॉड! , कंपनी मालिक बनकर ठगों ने ट्रांसफर कराई रकम
भोपाल। जनता अपना पैसा बचाने के लिए गाढ़ी कमाई बैंकों में जमा करती है। लेकिन राजधानी भोपाल से बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है जहां एक बैंक मैनेजर ही ठगी का शिकार हो गई। साइबर ठगों ने खाताधारक बनकर मैनेजर को निशाना बनाया और 15 लाख की रकम अपने खाते में ट्रांसफर करवा ली।
पूरी घटना पिपलानी थाना क्षेत्र की है। दरअसल, चंदना पुष्पा सोनागिरी स्थित एसबीआई बैंक में ब्रांच मैनेजर पद पर पदस्थ हैं। जांच अधिकारी नितेश मुजाल्दे ने बताया कि आरोपियों ने खाताधारक बनकर फोन पर FD और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी ली।
आरोपियों ने कंपनी मालिक बनकर बैंक मैनेजर को मेडिकल इमरजेंसी बता कर फर्जी दस्तावेज ई-मेल पर भेजकर RTGS कराया और अपने खाते में 15 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए। साइबर ठगी का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस आरोपियों की पहचान करने और जानकारी जुटाने में लगी है।
धार। अस्पतालों को मरीजों को लिए जीवन रक्षा देने वाली जगह माना जाता है। लेकिन धार का एक अस्पताल फेयरवेल पार्टी का अड्डा बन गया। सरदारपुर अस्पताल परिसर के एक हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में डॉक्टर और स्टाफ तेज संगीत पर नाचते-गाते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह आयोजन एक डॉक्टर की विदाई के लिए किया गया था।
जानकारी के मुताबिक, पार्टी के दौरान जिस हॉल में डॉक्टर और स्टाफ मौजूद थे, उससे करीब 10 फीट की दूरी पर मरीज भर्ती थे और उनका उपचार चल रहा था। कार्यक्रम के दौरान तेज संगीत पर डॉक्टर और स्टाफ ने डांस किया।
सरदारपुर सिविल अस्पताल जिला मुख्यालय से करीब 35 से 40 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। बताया जा रहा है कि एक डॉक्टर के फेयरवेल के लिए अस्पताल परिसर के हॉल में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
मामले को लेकर सीएमएचओ डॉ. अनीता सिंगारे से टेलीफोनिक बात की गई। उन्होंने कहा कि यह गंभीर विषय है। यदि अस्पताल परिसर में डॉक्टरों और कर्मचारियों द्वारा इस तरह का आयोजन किया गया है, तो मामले की जांच कराई जाएगी। जांच के बाद नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
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‘ट्रेन पहुंची, लेकिन एम्बुलेंस आज भी दूर!’ बदहाल रास्ते पर लाचार ग्रामीण
आलीराजपुर। विकास के दावों के बीच मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले के जोबट जनपद पंचायत से बुनियादी सुविधाओं की पोल खोलती एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है। ग्राम डेकाकुंड के पास रेलवे ट्रैक तो बिछ गया और ट्रेन की पटरियां गांव तक पहुंच गईं, लेकिन इसी गांव के ‘तड़वी फलिये’ के ग्रामीण आज भी एक किलोमीटर पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं।
आजादी के 80 साल बाद भी तड़वी फलिये के लोग मिट्टी के कच्चे और बदहाल रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं। बारिश के दिनों में यह रास्ता फिसलन भरे कीचड़ में तब्दील हो जाता है। स्कूली छोटे-छोटे बच्चे भारी बस्ते लेकर गिरते-संभलते स्कूल जाने की जद्दोजहद करते हैं।
सबसे दर्दनाक स्थिति तब बनती है जब गांव में कोई बीमार पड़ता है। कीचड़ के कारण एम्बुलेंस फलिये तक नहीं पहुंच पाती, जिससे परिजनों को मरीज को खटिया पर लिटाकर कई किलोमीटर पैदल मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है।
स्थानीय ग्रामीण धनसिंह बघेल ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे भी चाहते हैं कि उनके बच्चे सुरक्षित स्कूल जाएं और बीमारों को समय पर इलाज मिले, लेकिन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं।
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MP में 12 लाख अंत्योदय कार्ड धारकों की शक्कर बंद, 70 रु. पहुंचे दाम
मऊगंज। मध्य प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का दावा उस वक्त सवालों के घेरे में आ गया, जब प्रदेश के अति-गरीब परिवारों के राशन से मिठास गायब हो गई। शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से अति गरीबी रेखा में आने वाले लगभग 12 लाख अंत्योदय कार्ड धारकों को मिलने वाली 20 रुपये प्रति किलो की रियायती शक्कर अप्रैल माह से पूरी तरह बंद है। एक तरफ खुले बाजार में शक्कर की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अति-गरीब परिवारों को मिलने वाला कोटा ठप होना प्रशासनिक दावों और सरकारी नीतियों पर सवाल खड़े करता है।
इस संबंध में जब मैदानी अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने साफ शब्दों में पल्ला झाड़ते हुए कहा कि शक्कर का आवंटन ऊपर (शासन/केंद्र स्तर) से ही नहीं आ रहा है, जिसके कारण वितरण संभव नहीं है।
शक्कर की किल्लत और बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक गलियारों में जुबानी जंग तेज हो गई है। इंडियन नेशनल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) ने सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। विपक्ष का सीधा आरोप है कि सरकार गन्ने का उपयोग बड़े पैमाने पर इथेनॉल बनाने के लिए कर रही है। इथेनॉल उत्पादन की वजह से चीनी मिलों में शक्कर का उत्पादन गिरा है। उत्पादन कम होने से बाजार में शक्कर के दाम बेतहाशा बढ़े हैं और इस नीतिगत संकट का सीधा खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ रहा है।
रियायती शक्कर बंद होने से गरीब परिवारों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। जमीनी हालात (जैसे मऊगंज जिले का उदाहरण) बताते हैं कि जो 50 किलो की बोरी पहले 2,000 रुपये में मिलती थी, वह अब 3,225 रुपये की हो चुकी है। बाजार में शक्कर 65 से 70 रुपये प्रति किलो बिक रही है। शक्कर महंगी होने से आम दुकानों पर 10 रुपये में मिलने वाली चाय अब 15 रुपये में मिल रही है।
एक तरफ गन्ने से इथेनॉल बनाने की नीति पर उठते सवाल और दूसरी तरफ PDS दुकानों से अप्रैल से शक्कर गायब होना—इस पूरे प्रकरण ने विपक्ष को और हमलावर कर दिया है। सवाल यह है कि बाजार में लगभग दोगुनी कीमत पर बिक रही शक्कर के बीच 12 लाख अंत्योदय कार्ड धारकों को उनका हक कब मिलेगा?
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