


छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से शिक्षा के मंदिर को शर्मसार करने वाली ऐसी खबर सामने आई है, जिसे सुनकर आप भी कहेंगे- क्या यही हमारे बच्चों को पढ़ाने और संस्कार देने की जिम्मेदारी उठाने वाले शिक्षक हैं? मामला किसी दूरदराज के गांव का नहीं, बल्कि जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर कुंडाली कलां के पीएम श्री उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का है। आरोप है कि यहां पदस्थ शिक्षिका कक्षा छठवीं के छात्र-छात्राओं से ऐसी बातें करती थीं, जिन्हें सुनकर अभिभावक भी सकते में हैं।
बच्चों की शिकायत के मुताबिक शिक्षिका कथित तौर पर कहती थीं-“चार-पांच बॉयफ्रेंड बना लो, प्रेग्नेंट हो जाओ, मैं तुम्हारे बच्चों को खिलाऊंगी।” इतना ही नहीं, “मैं डेट पर जाती हूं, तुम भी डेट पर जाओ” और “आई ने कहा यू से, यू ने कहा लव से…” जैसी बातें भी बच्चों के बीच कहे जाने का आरोप है। सबसे गंभीर आरोप उस कथित धमकी को लेकर है, जिसमें शिक्षिका ने कहा-“मैंने पांच मर्डर किए हैं, तुम्हारा भी मर्डर कर दूंगी, मेरी फ्रेंड पुलिस इंस्पेक्टर है, इसलिए मुझ पर आज तक कार्रवाई नहीं हुई।”
एक और जहां सरकार बच्चों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा दिए जाने का दावा करती है वहीं दूसरी ओर मिडिल स्कूल के बच्चों को इस तरह की शिक्षा दिया जाना शिक्षा विभाग पर गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है।
बच्चों से अश्लील संवाद और धमकी दिए जाने का मामला जब अभिभावकों तक पहुंचा तो पालक संघ के पदाधिकारियों और बच्चों ने प्राचार्य के सामने शिकायत रखी। प्राचार्य ने बच्चों से जानकारी ली और लिखित शिकायत भी प्राप्त की। मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा और गंभीरता को देखते हुए संयुक्त संचालक ने शिक्षिका को निलंबित कर दिया।
बताया जा रहा है कि शिक्षिका के खिलाफ पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। यहां तक कि निलंबन आदेश लेने से इनकार करने की बात भी सामने आई है। हालांकि, अब तक पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
वहीं शिक्षिका भावना शर्मा ने आरोपों को साजिश बताया है। उनका कहना है कि बच्चों को बहला-फुसलाकर उनके खिलाफ बयान दिलवाए जा रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कई अगर आरोप सही हैं तो बच्चों के सामने ऐसी भाषा और धमकी देने वाली शिक्षिका पर सिर्फ विभागीय कार्रवाई क्यों? और अगर आरोप गलत हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच कब होगी?
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दो बहनों की बहादुरी को SP का सलाम, किया सम्मानित, मोबाइल स्नैचर की पकड़कर लगाई थी पिटाई
ग्वालियर में ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर बहुत हो रही है, घटनाक्रम दो बहादुर बेटियों से जुड़ा है जिन्होंने एक अपराधी का पीछा कर उसे न सिर्फ़ पकड़ा, उसकी जमकर पिटाई भी लगाई और पुलिस को सौंप दिया, आरोपी युवक उनका मोबाइल छीनकर भाग रहा था, बेटियों की बहादुरी पर एसपी धर्मवीर सिंह ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है।
नारी शक्तिकरण शब्द हमने नेताओं के भाषणों में बहुत सुना है, किताबों में भी ये अक्सर पढ़ने में मिल जाता है लेकिन जब इसका प्रमाण दिखाई देता है तो समझ आता है कि वाकई इस शब्द के मायने क्या है? आज इसी शब्द का अहसास कराने वाली ग्वालियर की दो बेटियों की बहादुरी की बात आपको बताते हैं।
ग्वालियर में आज शनिवार दो बहनें अपने दो पहिया वाहन पर कॉलेज जा रही थी, पड़ाव क्षेत्र में बने नए आरओबी से वे गुजर रहीं थी तभी पीछे से आये एक बाइक सवार ने पीछे बैठी बहन का मोबाइल छीन लिया और बाइक भगा दी, लड़कियों ने आवाज लगाई लेकिन सुबह करीब 7:30 का समय था तो सड़क पर ज्यादा लोग नहीं थे और जो थे उन्होंने उनकी आवाज को अनसुना कर दिया।
लड़कियों ने हिम्मत नहीं हारी बाइक के पीछे अपनी स्कूटी भी दौड़ा दी, करीब एक किलोमीटर दूर जाने पर सवारी वाहन आने पर बाइक सवार चोर ने गति धीमी की इतने में बहनों ने अपनी स्कूटी से उसमें टक्कर मार दी, दोनों बहनें गिर गई, चोट लग गई लेकिन उसकी परवाह किये बिना वो उठीं और उन्होंने बाल पकड़कर चोर की पिटाई शुरू कर दी, अपना मोबाइल वापस लिया, वहीं कुछ तमाशबीन वहां वीडियो बनाते रहे फिर पुलिस को कॉल कर उसे पुलिस थाने भिजवा दिया।
बेटियों द्वारा एक चोर को पकड़ने की कहानी एसपी धर्मवीर सिंह को मालूम चली तो उन्होंने दोनों बहनों आशिता अग्रवाल और अर्शिता अग्रवाल को एसपी ऑफिस बुलाया और वहां उनको प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया उन्होंने कहा यदि अपराध करने वालों को पकड़ने में जनता का ऐसे ही सहयोग मिला तो बदमाशों के हौसले पस्त होंगे और अपराधों में कमी आयेगी।
सीएसपी रोबिन जैन ने बताया कि आरोपी ने अपना नाम मनप्रीत सिंह बताया है वो पंजाब का रहने वाला है ग्वालियर में काम के सिलसिले में आया है, पुलिस उससे पता लगाने का प्रयास कर ही है कि क्या इसके पहले भी मोबाइल लूट जैसी घटनाएँ उसने की हैं ? सीएसपी ने कहा कि शिकायत के आधार पर आरोपी के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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बड़ा फर्जीवाड़ा: फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर CMHO दफ्तर पहुंचे दो युवक, पुलिस ने हिरासत में लिया
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आउटसोर्स भर्ती के नाम पर फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां स्वास्थ्य विभाग (CMHO कार्यालय) में दो युवक फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर नौकरी ज्वाइन करने पहुंच गए। विभाग की सतर्कता के चलते फर्जीवाड़े का तत्काल भंडाफोड़ हो गया।
जानकारी के अनुसार, श्योपुर जिले के विजयपुर निवासी संतोष अपने एक अन्य साथी के साथ ग्वालियर स्थित CMHO कार्यालय पहुंचा था। दोनों युवकों ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. एम.एस. सागर से मुलाकात कर आउटसोर्स भर्ती का नियुक्ति पत्र सौंपते हुए पदस्थापना (ज्वाइनिंग) की मांग की।
नियुक्ति पत्र देखते ही CMHO डॉ. एम.एस. सागर को संदेह हुआ। जब पत्र की गहराई से जांच की गई तो उस पर दर्ज CMHO के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए। मामला सामने आते ही तत्काल थाटीपुर थाना पुलिस को सूचित किया गया।
सूचना मिलते ही थाटीपुर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों युवकों को हिरासत में लेकर थाने ले आई। शुरुआती पूछताछ के दौरान दोनों युवक यह स्पष्ट नहीं कर सके कि उन्हें यह नियुक्ति पत्र किस व्यक्ति या एजेंसी के माध्यम से मिला था। फिलहाल पुलिस फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करने वाले गिरोह और इसके पीछे शामिल मुख्य साजिशकर्ताओं की तलाश में जुट गई है। इस घटना के बाद सरकारी दफ्तरों में नौकरी का झांसा देकर युवाओं को ठगने वाले गिरोहों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्वालियर। पुलिस ने चोरी करने वाले एक बेहद शातिर और अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गैंग चोरी की वारदातों को अंजाम देने के लिए खासतौर पर तेज बारिश का इंतजार करता था, ताकि ताले और शटर तोड़ने की आवाज बारिश के शोर में दब जाए और किसी को भनक तक न लगे।
पुलिस के अनुसार, गिरोह ने 19-20 जुलाई की दरमियानी रात करीब 2 बजे बैजाताल से चोरी की गई एक्टिवा का इस्तेमाल कर रविंद्र शर्मा की ज्वेलरी दुकान को निशाना बनाया था। वारदात से पहले कई दिनों तक रेकी की गई। बारिश शुरू होते ही चोरों ने शटर का एक हिस्सा उठाया और अंदर दाखिल होकर करीब 5 किलो 300 ग्राम चांदी के आभूषण तथा नकदी पार कर दी। पूरी वारदात CCTV कैमरे में कैद हुई थी।
CCTV फुटेज व तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने चार आरोपियों—योगेश मंडेलिया, राजेश मंडेलिया, अतुल शर्मा और श्याम सुंदर कुशवाह को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों में से दो मुख्य आरोपी सगे भाई हैं, जिन पर पहले से 25 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
पुलिस ने आरोपियों के पास से 5.3 किलो चांदी बरामद की है, जिसमें- 38 भगवान की मूर्तियां, 16 गाय, 11 मछलियां, 34 जोड़ी पायल, 150 जोड़ी बिछिया, 6 मुकुट, 5 बांसुरी, कड़े, चूड़ियां, छल्ले और अन्य आभूषण शामिल हैं।
मामले की जानकारी देते हुए एएसपी सुजावल जग्गा ने बताया कि आरोपी अन्य राज्यों में भी चोरी की वारदातें कबूल कर चुके हैं। पुलिस सभी को अदालत में पेश कर रिमांड पर लेगी, जिससे अंतरराज्यीय नेटवर्क और अन्य चोरियों का खुलासा होने की संभावना है।
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डीजल चोरी और तालिबानी सजा! CCTV फुटेज के बाद ट्रक ड्राइवरों को कमरे में बंद कर पीटा
शहडोल। शहडोल में ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़ा डीजल चोरी का मामला अब गंभीर मोड़ लेता नजर आ रहा है। एक तरफ जहां अमलाई थाना क्षेत्र में ट्रकों में भरने के बजाय डीजल को प्लास्टिक के डिब्बों में निकालकर बेचने का कथित खेल CCTV कैमरों में कैद होने का दावा किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर बुढ़ार थाना क्षेत्र में डीजल चोरी के शक में ट्रक चालकों को कमरे में बंद कर लाठी-डंडों से पीटने का कथित वीडियो सामने आया है। दोनों घटनाओं ने ट्रांसपोर्ट कारोबार के साथ-साथ पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमलाई क्षेत्र के मामले में उमरिया निवासी ट्रांसपोर्टर अब्दुल खान का आरोप है कि उनके ट्रकों के चालक पेट्रोल पंप पर वाहन की टंकी के अलावा अलग से लाए गए बड़े प्लास्टिक डिब्बों में भी डीजल भरवाते थे। आरोप है कि वाहन मालिक को पूरे डीजल का बिल दिया जाता था, जबकि कुछ डीजल निकालकर बेच दिया जाता था। कई ट्रकों के नंबर और CCTV फुटेज सामने आने के बाद पीड़ित ने 31 जुलाई को शिकायत की और 3 अगस्त को साक्ष्य के साथ पुलिस को जानकारी दी। कार्रवाई नहीं होने पर 7 अगस्त को एसपी से शिकायत की गई।
इसी बीच बुढ़ार के हिन्द ट्रांसपोर्ट कार्यालय से कथित मारपीट का वीडियो सामने आया, आरोप है कि डीजल चोरी के संदेह में कुछ ट्रक चालकों को कमरे में बंद कर उनके साथ लात-घूंसों और लाठी-डंडों से मारपीट की गई। पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे कथित कबूलनामा लिखवाने के साथ सादे कागज पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए गए तथा शिकायत करने पर धमकी दी गई।
दोनों मामलों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि डीजल चोरी हुई है तो जांच और कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाने के बजाय कथित तौर पर कानून हाथ में लेकर मारपीट क्यों की गई, और यदि CCTV में चोरी के पुख्ता साक्ष्य मौजूद हैं, तो पुलिस कार्रवाई में देरी क्यों।
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मध्य प्रदेश में 10 हजार सरकारी शिक्षकों की बंपर भर्ती को मंजूरी, लाखों युवाओं का इंतजार खत्म
मध्य प्रदेश में सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार ने 10 हजार नए शिक्षकों की भर्ती को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस अहम फैसले के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी करेगा। इस भर्ती का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में लंबे समय से खाली पड़े शिक्षकों के पदों को भरना और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना है।
मध्य प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी बनी हुई है। कई स्कूल ऐसे हैं जहां एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाना पड़ता है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और सभी विषयों की नियमित पढ़ाई भी नहीं हो पाती। सरकार का मानना है कि 10 हजार नए शिक्षकों की नियुक्ति से इस समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।
कैबिनेट के इस फैसले को प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। नए शिक्षकों की भर्ती होने से स्कूलों में पढ़ाई नियमित होगी और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलेगा। सरकार का कहना है कि अच्छी शिक्षा किसी भी राज्य के विकास की नींव होती है। इसलिए स्कूलों में पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब स्कूल शिक्षा विभाग भर्ती प्रक्रिया का विस्तृत कार्यक्रम तैयार करेगा। इसके बाद आधिकारिक भर्ती विज्ञापन जारी किया जाएगा। इस नोटिफिकेशन में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी, जैसे-
कुल पदों की संख्या
विषयवार और वर्गवार पद
शैक्षणिक योग्यता
आयु सीमा
आरक्षण नियम
आवेदन की तारीख
परीक्षा और चयन प्रक्रिया
दस्तावेज सत्यापन
नियुक्ति प्रक्रिया
सरकार ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि भर्ती से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल स्कूल शिक्षा विभाग और संबंधित सरकारी वेबसाइट पर ही भरोसा करें। सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर फैलने वाली अफवाहों और गलत जानकारी से बचने की सलाह दी गई है। भर्ती से संबंधित हर अपडेट आधिकारिक नोटिफिकेशन के माध्यम से जारी किया जाएगा।
कैबिनेट बैठक में केवल शिक्षक भर्ती ही नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर भी चर्चा हुई। सरकार का लक्ष्य स्कूलों में नई तकनीक को बढ़ावा देना है। इसके तहत डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित शिक्षण व्यवस्था को धीरे-धीरे लागू करने की योजना बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करना है।
AI आधारित शिक्षा पर रहेगा फोकस
सरकार चाहती है कि आने वाले समय में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी आधुनिक तकनीक के साथ पढ़ाई करें। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल लर्निंग और नई शिक्षा तकनीकों के इस्तेमाल से पढ़ाई को आसान और प्रभावी बनाया जाएगा। इससे बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ेगी और उन्हें नई तकनीकों की जानकारी भी मिलेगी।
10 हजार शिक्षकों की भर्ती से प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने का बड़ा अवसर खुलेगा। काफी समय से शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को इस फैसले से राहत मिलने की उम्मीद है। भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में उम्मीदवार आवेदन कर सकेंगे।
पारदर्शी तरीके से होगी भर्ती
सरकार ने साफ किया है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार और पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी की जाएगी। योग्य उम्मीदवारों का चयन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा, ताकि सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके।
फिलहाल राज्य कैबिनेट ने 10 हजार शिक्षकों की भर्ती को मंजूरी दी है। अब उम्मीदवारों को आधिकारिक भर्ती विज्ञापन का इंतजार करना होगा। नोटिफिकेशन जारी होने के बाद आवेदन की तारीख, परीक्षा, चयन प्रक्रिया, मेरिट सूची और नियुक्ति से जुड़ी पूरी जानकारी सामने आएगी। यदि आप इस भर्ती की तैयारी कर रहे हैं, तो अभी से अपने जरूरी दस्तावेज तैयार रखें और केवल आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होने वाली जानकारी पर ही भरोसा करें। जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है, जिससे हजारों युवाओं का सरकारी शिक्षक बनने का सपना साकार हो सकता है।
खालिस्तानी समर्थक 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस ) पर बड़े हमले की फिराक में है। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक खालिस्तानी समर्थक 15 अगस्त के दिन हमले की तैयारी में हैं। लिहाजा एजेंसियों ने हाई अलर्ट किया है। खालिस्तानी ग्रुप दिल्ली समेत पंजाब के कई हिस्सों में हमले की योजना बना रहे हैं। लिहाजा हाई अलर्ट पर रखा गया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक खुफिया ब्यूरो के अधिकारी ने कहा कि खालिस्तानी ग्रुप पंजाब के कई हिस्सों में हमले की योजना बना रहे हैं। खालिस्तान समर्थक आतंकी ग्रुप सांकेतिक हमला करना चाहता है इसलिए 15 अगस्त को चुना गया है। वे लंबे समय से इसकी तैयारी कर रहे हैं।
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक भारत और कनाडा द्वारा गैंगस्टर-आतंकवादी नेटवर्क पर ताबड़तोड़ कार्रवाई के कारण, ये ग्रुप खुद को बैकफुट हैं। लिहाजा बेचैनी में वे पंजाब में कुछ गलत करने की सोच रहे हैं। बैन किए गए संगठन सिख्स फॉर जस्टिस यानी एसएफजे की गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। बैन किए गए संगठन का चीफ, गुरपतवंत सिंह पन्नू सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय है। वह पंजाब के युवाओं से स्कूलों और दूसरे सार्वजनिक स्थलों पर खालिस्तान के झंडे फहराने की अपील कर रहा है। वह युवाओं को स्वतंत्रता दिवस पर भारत सरकार के खिलाफ प्रोटेस्ट करने के लिए उकसा रहा है।
एक तरफ, जहां टेरर स्ट्राइक की प्लानिंग हो रही है। वहीं दूसरी ऑनलाइन दुष्प्रचार अभियान को भी तेजी से बढ़े हैं। इंटेलिजेंस एजेंसियां एसएफजी की ऑनलाइन गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रही हैं। गुरपतवंत सिंह सोशल मीडिया पर खालिस्तान समर्थक कंटेंट जोरों-शोरों से फैलाने की कोशिश कर रहा है। जो अलग प्रांत की उसकी मांग और युवाओं को भड़काने पर केंद्रित है। वह भारत के विरुद्ध ‘हेट कैंपेन’ चलाने की भी कोशिश में लिप्त है। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने का खेल रच रहा है।
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भारत का एक और दुश्मन ढेर, लश्कर कमांडर कारी सईद की इस्लामाबाद में मौत
पड़ोसी देश पाकिस्तान के अंदर बीते कई वर्षों में कई आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में अचानक मौत हो गई. लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), हिजबुल मुजाहिदीन और अल-बद्र जैसे भारत विरोधी आतंकी संगठनों से जुड़े कई प्रमुख चेहरे अलग-अलग शहरों में अज्ञात हमलावरों की गोलियों का निशाना बन गए. अधिकांश मामलों में हमलावर मौके से फरार हो गए और इनमें से कई हत्याओं की जांच आज भी अधूरी है. दक्षिण-एशियाईऔर प्रवासी
इस बीच अब खबर है कि, संगठन लश्कर ए तैयबा के कमांडर कारी सईद उर्फ अब्दुल अज़ीज़ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. आतंकी कारी सईद उर्फ अब्दुल अज़ीज़ लश्कर ए तैयबा के शोबा-ए-वारसा-ए-शोहदा विभाग का दक्षिण पंजाब में प्रमुख था, जिसका काम भारत में मारे गए आतंकियों के परिजनों को हर महीने पेंशन देना था.
घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसमें दिखाई दे रहा है आतंकी कारी सईद उर्फ अब्दुल अज़ीज़ इस्लामाबाद में स्थित लश्कर ए तैयबा की मस्जिद क़ूबा में बैग टांग कर नमाज पढ़ने पहुंचता है. पहुंचने के बाद अपने एक साथी को बैग पकड़ाता है और नमाज़ पढ़ने से पहले वुज़ू करता है. वुज़ू करने के बाद जैसे ही आतंकी कारी सईद उर्फ अब्दुल अज़ीज़ अपना बैग वापस लेकर सीढ़ी चढ़कर मस्जिद के मुख्य हाल में नमाज़ पढ़ने के लिए जाता है. वो जैसे ही चप्पल उतारने के लिए बैठता है वैसे से एकाएक ज़मीन पर गिर जाता है.
पास में ही मौजूद लश्कर ए तैयबा के कैडर के अन्य लोग उसे उठाकर किसी जगह पर लेकर जाते हैं, जहां उसे सांस ना चलने पर सीपीआर दिया जाता है. लेकिन इसके बावजूद कारी सईद उर्फ अब्दुल अज़ीज़ होश में नहीं आता है. कारी को बाद में अस्पताल ले जाया जाता है, जहां पर उसे मृत घोषित कर दिया जाता है. कहा जा रहा है कि, वीडियो सीसीटीवी का है लेकिन साफ समझ आ रहा है कि, उसे किसी ने छुपकर बनाया है.
सूत्रों के मुताबिक़ कारी सईद उर्फ अब्दुल अज़ीज़ साल 1990 से आतंकी हाफिज सईद के साथ जुड़ा हुआ था और उसका ख़ास कमांडर था. साल 2017 तक कारी सईद उर्फ अब्दुल अज़ीज़ एक्टिव आतंकी रहा और इसका प्रमुख काम लश्कर ए तैयबा के लिए आतंकियों की भर्ती करना था. बाद में इसे लश्कर ने अपने प्रशासनिक कार्यों में लगा दिया, जहां पर दक्षिण पंजाब के मुल्तान, बहावलपुर, डेरा ग़ाज़ी ख़ान के भारत में मारे गए आतंकियों के परिजनों को हर महीने पेंशन पहुंचाने और इन जिलों से ताल्लुक रखने वाले आतंकियों की लिस्ट तैयार करना था.
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कांग्रेस नेता का दिनदहाड़े मर्डर: कॉन्ट्रैक्ट किलर ने सिर में सटाकर मारी गोली, पुलिस एनकाउंटर में यूपी का शूटर गिरफ्तार
कर्नाटक के उडुपी जिले के पडुबिद्री में शुक्रवार दोपहर अज्ञात हमलावरों ने स्थानीय कांग्रेस नेता की गोली मारकर मारकर हत्या कर दी. हत्या के मुख्य आरोपी शूटर को बिंदूर के पास ओट्टिनाने इलाके में पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ़्तार कर लिया गया है. पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए कहा कि डेविड डिसूजा की हत्या एक कान्ट्रैक्ट किलिंग थी.
कर्नाटक के उडुपी में कांग्रेस नेता की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. उडुपी पुलिस ने बताया कि कांग्रेस नेता की हत्या सुपारी लेकर की गई थी.
यह घटना शुक्रवार दोपहर को उडुपी के पडुबिद्री में घटी. कर्नाटक में कांग्रेस नेता और कारोबारी डेविड डिसूजा की सरेआम दो मोटरसाइकल सवार युवकों ने हत्या कर दी थी. इस मामले में पुलिस को सफलता हाथ लगी है. मृतक की पहचान मुदारंगड़ी ग्राम पंचायत के पूर्व अध्यक्ष डेविड डिसूजा के रूप में हुई है.
आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश निवासी राजू के रूप में हुई. आरोपी राजू ने जब कथित तौर पर पुलिस टीम पर हमला किया तो पुलिस ने अपने बचाव में आरोपी पर गोली चलाई. आरोपी के दाहिने पैर में गोली लग गई.
डेविड डिसूजा कांग्रेस नेता होने के साथ, ठेकेदार और ग्राम पंचायत के पूर्व अध्यक्ष भी थे. प्रथम दृष्टया यह वित्तीय विवाद का मामला लग रहा है.
पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए कहा कि डेविड डिसूजा की हत्या एक कान्ट्रैक्ट किलिंग थी. पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. तीनों आरोपियों की पहचान राजू (UP) अजय रस्तोगी (उत्तराखंड) और जियाहुल हक (बिहार) के रूप में हुई है.
पुलिस मामले से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही है. मृतक नेता पूर्व में एक पादरी की आत्महत्या के मामले में सजा काट चुके थे. फिलहाल आरोपी राजू का इलाज अभी जारी है. मुठभेड़ में एक SI तेजस्वी भी घायल हुए है.
धार। मध्य प्रदेश के धार जिले में युवती के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों का जुलूस निकालकर उन्हें न्यायालय में पेश किया। जहां उनके खिलाफ अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। घटना में प्रयुक्त तीन बाइक भी जब्त की गईं। यह पूरा मामला टांडा थाना क्षेत्र का है।
पुलिस के अनुसार, 3 अगस्त की रात करीब 11.30 बजे ग्राम कालीदेवी में पीड़िता अपने घर के आंगन में सो रही थी। इसी दौरान उसका जीजा दीपक सिंगार अपने साथियों करमसिंह सिंगार, भंगु डावर और सुरेश के साथ बाइक से वहां पहुंचा। आरोपियों ने युवती का जबरन अपहरण कर लिया। विरोध करने पर परिजनों के साथ गाली-गलौज की। जान से मारने की धमकी दी।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी युवती को ग्राम नरवाली के जंगल में ले गए। जहां मुख्य आरोपी करमसिंह ने उसके साथ दुष्कर्म किया। अगले दिन परिजनों की तलाश के बाद पीड़िता मिली। उसने थाना टांडा पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। फरियादिया की शिकायत पर पुलिस ने बीएनएस की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में, थाना प्रभारी संजय कुमार रावत के नेतृत्व में गठित टीम ने दबिश देकर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
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27 से ज्यादा गंभीर मामलों का आरोपी ‘डकैत’ चढ़ा पुलिस के हत्थे, जांच में खुलेंगे कश्मीर और अतीक कनेक्शन
इंदौर। अपराध की दुनिया से सियासत तक पहुंचे पूर्व कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी उर्फ डकैत की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। 27 से ज्यादा आपराधिक मामलों में आरोपी अनवर कादरी को सदर बाजार पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस बार पुलिस के हाथ लगा है फर्जी जम्मू-कश्मीर शस्त्र लाइसेंस का कनेक्शन। पुलिस की जांच में सामने आया है कि अनवर ने इसी लाइसेंस के आधार पर हथियार हासिल किया था।अब सवाल सिर्फ अनवर कादरी की गिरफ्तारी का नहीं… बल्कि उस पूरे नेटवर्क का है, जिसने फर्जी शस्त्र लाइसेंस तैयार किया। पुलिस इसी नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
दरअसल, सदर बाजार थाना पुलिस ने कुख्यात अपराधी अनवर कादरी उर्फ डकैत को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, अनवर कादरी के खिलाफ इंदौर के अलग-अलग थानों में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, बलवा, मारपीट, लव जिहाद फंडिंग, धर्मांतरण समेत 27 से ज्यादा गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसकी आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत भी कार्रवाई हो चुकी है। लेकिन इस बार पुलिस की जांच एक ऐसे हथियार तक पहुंची, जिसके लाइसेंस ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। फरवरी 2025 में अनवर कादरी पर जावेद खान के घर लाइसेंसी बंदूक के साथ जबरन घुसने, मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज हुआ था। जांच के दौरान पुलिस ने उसके शस्त्र लाइसेंस की पड़ताल की तो बड़ा खुलासा हुआ।
पुलिस के मुताबिक, जिस शस्त्र लाइसेंस के आधार पर अनवर ने हथियार हासिल किया था, वह जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले से जारी बताया गया, लेकिन जांच में उसे फर्जी पाया गया। यहीं से पुलिस की जांच का दायरा बढ़ गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस आखिर किसने तैयार किया? इसे बनवाने में कौन-कौन लोग शामिल थे? लाइसेंस के लिए फर्जी दस्तावेज कहां से आए? और सबसे बड़ा सवाल… इस नेटवर्क के तार आखिर कहां तक जुड़े हैं? इसी मामले में पुलिस ने आर्म्स एक्ट के साथ धोखाधड़ी और कूटरचना की धाराओं में भी कार्रवाई की है। यानी जिस हथियार के सहारे अनवर कादरी ने अपराध की दुनिया में दबदबा कायम किया अब उसी हथियार के लाइसेंस की जांच ने पुलिस के सामने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। और ये सवाल सिर्फ एक फर्जी लाइसेंस तक सीमित नहीं हैं।
पुलिस अब अनवर के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड, उसके संपर्कों और कथित कश्मीर कनेक्शनों की भी पड़ताल कर रही है। कश्मीर कनेक्शन को लेकर भी उससे पूछताछ की जा रही है। इसी बीच इस पूरे मामले पर मंत्री ऊषा ठाकुर ने भी सख्त जांच की मांग की है। हालांकि अनवर कादरी बाणगंगा थाने में हिंदू युवतियों के शोषण और लव जिहाद फंडिंग के मामले में पहले जेल जा चुका है और कुछ दिन पहले ही जमानत पर जेल से रिहा हुआ था। फर्जी लाइसेंस किसने बनाया? हथियार तक पहुंच कैसे बनी? और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है? फिलहाल डीसीपी जांच कर रहे है…और अगर जांच की कड़ियां सही दिशा में जुड़ीं… तो अनवर कादरी की कहानी में आने वाले दिनों में कई और बड़े राज सामने आ सकते हैं। सवाल भी यही है क्या अनवर कादरी के और भी कई किरदार सामने आना बाकी हैं।
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इंदौर में डेढ़ करोड़ के घी पर बड़ी कार्रवाई, 25 हजार लीटर स्टॉक की बिक्री पर रोक
इंदौर। मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 25 हजार लीटर गोवर्धन ब्रांड घी के स्टॉक की बिक्री पर रोक लगा दी है। इस घी की अनुमानित कीमत करीब 1.50 करोड़ रुपये बताई जा रही है। साथ ही विभिन्न पैकिंग के 20 नमूने जांच के लिए लिए गए हैं। अब जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
आयुक्त खाद्य सुरक्षा, मध्य प्रदेश के निर्देश पर जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में दूध और दूध से बने उत्पादों की गुणवत्ता जांचने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में खासतौर पर दूसरे राज्यों से मध्य प्रदेश आने वाले दूध और दुग्ध उत्पादों की निगरानी की जा रही है। कुछ ब्रांडों के घी के नमूने पहले अमानक पाए जाने के बाद उनके खिलाफ विशेष जांच के निर्देश दिए गए थे।
कलेक्टर शिवम वर्मा के मार्गदर्शन में 6 अगस्त को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम एबी रोड स्थित पराग मिल्क फूड्स लिमिटेड के डिपो पहुंची। जांच में सामने आया कि यहां से गोवर्धन ब्रांड घी पूरे मध्य प्रदेश में सप्लाई किया जाता है।प्रतिष्ठान केंद्रीय लाइसेंसधारी होने के कारण एफएसएसएआई वेस्टर्न रीजन, इंदौर की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। केंद्रीय अधिकारियों ने निरीक्षण कर 20 नमूने लिए और करीब 25 हजार लीटर घी, जिसकी अनुमानित कीमत 1.50 करोड़ रुपये है, उसकी बिक्री पर जांच पूरी होने तक रोक लगा दी।
इसी अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा प्रशासन की टीम ने भावण्या इंटरप्राइजेज, साउथ हरसिद्धि से गोपीश्री ब्रांड घी के 4 नमूने जांच के लिए लिए। साथ ही 312 लीटर घी, जिसकी कीमत करीब 1.34 लाख रुपये है, उसे जांच रिपोर्ट आने तक जब्त कर लिया गया।
एक शिकायत के आधार पर विजयनगर स्थित एक रेस्टोरेंट का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान रसोई में साफ-सफाई और स्वच्छता मानकों का पालन नहीं पाया गया। इसके बाद प्रतिष्ठान को इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई। वहीं पनीर, दही और मसालों के नमूने भी जांच के लिए भोपाल की राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
एक अन्य शिकायत के आधार पर महू के प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। यहां से बेसन, मिठाई, शक्कर और नमकीन के कुल 6 नमूने जांच के लिए लिए गए। कार्रवाई के बाद शिकायतकर्ता ने संतोष जताया।
खाद्य सुरक्षा प्रशासन के मुताबिक विशेष अभियान के दौरान लिए गए सभी नमूनों को संबंधित प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी उत्पाद में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित नियमों के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
छिंदवाड़ा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को छिंदवाड़ा से मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान की शुरुआत करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को जवाबदेही का कड़ा संदेश दिया। अभियान के शुभारंभ के दौरान ही उन्होंने शिकायतों के निराकरण में लापरवाही पाए जाने पर छिंदवाड़ा के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ नरेश गुन्नाडे, और परासिया तहसीलदार सुनैयना ब्रह्मे और सिद्धात साडू पटवारी हल्माने-02 ग्राम बाद्यबाधया तहसील- परासिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जन-विश्वास अभियान का उद्देश्य केवल शिकायतें प्राप्त करना नहीं, बल्कि उनका समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता से जुड़े मामलों में लापरवाही करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। अभियान की शुरुआत के साथ ही की गई यह कार्रवाई सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का संकेत है।
डॉ. यादव ने अधिकारियों से कहा कि वे सीएम हेल्पलाइन और अन्य जनशिकायतों का गंभीरता से निराकरण करें। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास तभी मजबूत होगा, जब लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान होगा और अधिकारी पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्व निभाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन-विश्वास अभियान के दौरान पूरे प्रदेश में शिकायतों के निराकरण और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की लगातार समीक्षा की जाएगी। बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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350 करोड़ के स्कूल ड्रेस टेंडर पर हाई कोर्ट की बड़ी रोक, सरकार से एक सप्ताह में जवाब तलब
जबलपुर. मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए यूनिफॉर्म की आपूर्ति से जुड़े करीब 350 करोड़ रुपये के टेंडर पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम राहत देते हुए टेंडर प्रक्रिया को फिलहाल अंतिम रूप देने पर रोक लगा दी है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को एक सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जवाब दाखिल होने तक टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा. इस आदेश को प्रदेश के पावरलूम उद्योग और बुनकर समुदाय के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है.
मामले की सुनवाई अल्पसंख्यक पिछड़ा वर्ग पावरलूम बुनकर संघ सहित तीन बुनकर संगठनों द्वारा दायर याचिकाओं पर हुई. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता श्रेयस धर्माधिकारी और तीर्थेश भारिल्ल ने पक्ष रखा, जबकि राज्य शासन की ओर से डॉ. एस.एस. चौहान ने न्यायालय में अपना पक्ष प्रस्तुत किया. याचिकाओं में मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा 3 जून 2026 को जारी स्कूल ड्रेस आपूर्ति संबंधी टेंडर प्रक्रिया को चुनौती दी गई है.
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह टेंडर मध्यप्रदेश भंडार क्रय नियम, 2023 के प्रावधानों के विपरीत जारी किया गया है. उनका तर्क है कि वर्ष 1993 से राज्य स्तरीय पावरलूम सहकारिता समिति को सरकारी स्कूलों की यूनिफॉर्म आपूर्ति के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करने की व्यवस्था रही है. इसके अलावा वर्ष 2023 के भंडार क्रय नियमों के अनुसार राज्य उपक्रमों से स्कूल ड्रेस की खरीदी के लिए खुली निविदा जारी करने की आवश्यकता नहीं है. इसके बावजूद मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम ने लगभग 350 करोड़ रुपये का खुला टेंडर जारी कर दिया, जिससे स्थापित व्यवस्था प्रभावित हुई है.
याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि यदि वर्तमान टेंडर प्रक्रिया लागू होती है तो प्रदेश के पावरलूम और स्पिनिंग मिल उद्योग से जुड़े लगभग दो लाख बुनकर परिवारों की आजीविका पर गंभीर संकट आ सकता है. बुनकर संगठनों का दावा है कि इस उद्योग से जुड़े अनेक परिवारों ने अपने व्यवसाय के संचालन और विस्तार के लिए बैंकों से ऋण लिया है. यदि यूनिफॉर्म आपूर्ति का कार्य निजी टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से अन्य एजेंसियों को दिया जाता है तो इन बुनकरों के सामने रोजगार और आर्थिक स्थिरता का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से विस्तृत जवाब मांगा तथा अंतरिम व्यवस्था के रूप में टेंडर को अंतिम रूप देने पर रोक लगा दी. साथ ही निर्देश दिया कि इन याचिकाओं को पहले से विचाराधीन संबंधित याचिका के साथ सूचीबद्ध किया जाए, ताकि सभी जुड़े मुद्दों पर एक साथ सुनवाई की जा सके.
हाई कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल 350 करोड़ रुपये की यूनिफॉर्म खरीदी प्रक्रिया पर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है. अब सभी पक्षों की नजर राज्य सरकार के जवाब और अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी या याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों के आधार पर इसमें कोई बदलाव अथवा अन्य निर्देश जारी किए जाएंगे. न्यायालय के अंतिम निर्णय का प्रभाव न केवल सरकारी खरीद प्रक्रिया पर पड़ेगा, बल्कि प्रदेश के लाखों बुनकरों और उनसे जुड़े उद्योग के भविष्य पर भी महत्वपूर्ण असर डाल सकता है.
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EVM से चुने जाएंगे सरपंच और पंच, 2027 में होने वाले इलेक्शन के लिए आयोग ने कसी कमर
भोपाल। मध्य प्रदेश में अगले साल होने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। इस बार सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पंचायत चुनावों में सरपंच और पंच पदों का चुनाव भी पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से कराया जा सकता है। अब तक ये चुनाव बैलेट पेपर से होते आए हैं।
आयोग के अनुसार, जून-जुलाई 2027 में प्रस्तावित इन चुनावों में पूरे प्रदेश की करीब 443 नगरीय निकायों और लगभग 23 हजार पंचायतों में मतदान होगा। नगरीय क्षेत्रों के लिए करीब 22 हजार और ग्रामीण इलाकों में करीब 72 हजार पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे।राज्य निर्वाचन आयोग इस बार पूरे चुनाव को शत-प्रतिशत डिजिटल बनाने की दिशा में काम कर रहा है। अगर योजना लागू होती है तो पंचायत और निकाय दोनों स्तर पर EVM से मतदान होगा, जिससे मतगणना तेज होगी और परिणाम जल्दी आएंगे।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की भी व्यवस्था की जा रही है, ताकि प्रक्रिया की निगरानी बेहतर हो सके।पिछले चुनावों में जिला पंचायत और जनपद पंचायत सदस्यों का चुनाव EVM से होता था, जबकि सरपंच और पंच बैलेट पेपर से चुने जाते थे। इस बार पूरी प्रक्रिया को आधुनिक और तेज बनाने का प्रयास है। प्रशासनिक तैयारियां पहले से शुरू हो चुकी हैं और अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।यह कदम स्थानीय निकाय चुनावों को और अधिक पारदर्शी, तेज और भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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