


सिवनी। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से मां की ममता का एक बेहद भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है। लखनादौन तहसील के ग्राम चूरका में एक मुर्गी अपने चूजों को बचाने के लिए जहरीले सांप से भिड़ गई। पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो में देखा जा सकता है कि जहरीला सांप मुर्गी के पांच चूजों की ओर बढ़ता है। खतरा भांपते ही मुर्गी बिना डरे सांप पर हमला कर देती है और अपने बच्चों को बचाने के लिए लगातार संघर्ष करती रहती है। काफी देर तक दोनों के बीच संघर्ष चलता है, लेकिन अंततः मुर्गी सांप के सामने टिक नहीं पाती और सांप उसके चूजों को अपना शिकार बना लेता है।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मां अपने बच्चों की रक्षा के लिए किसी भी खतरे का सामना करने से पीछे नहीं हटती। घटना का सीसीटीवी वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग मुर्गी की ममता और साहस की सराहना कर रहे हैं।
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प्रेम प्रसंग का आरोप... कानून को दरकिनार कर भीड़ बनी 'जज'; महिला-पुरुष को बांधकर गांव में घुमाया
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां कथित प्रेम प्रसंग के आरोप में एक महिला और एक पुरुष को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। आरोप है कि दोनों के हाथ बांधकर पूरे गांव में घुमाया गया और इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई और महिला की शिकायत पर उसके पति, देवर सहित तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना बड़वानी जिले के ठीकरी थाना क्षेत्र के ग्राम बरुफाटक की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और वीडियो के आधार पर अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। यदि जांच में किसी और की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस के मुताबिक, ग्राम बरुफाटक में एक विवाहित महिला और एक पुरुष को कथित प्रेम प्रसंग के आरोप में कुछ लोगों ने पकड़ लिया। आरोप है कि इसके बाद पुरुष के साथ मारपीट की गई। वहीं महिला के पति, देवर और उनके साथ मौजूद अन्य लोगों ने दोनों के हाथ बांध दिए और पूरे गांव में घुमाया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे। घटना का वीडियो भी बनाया गया, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया गया। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस और प्रशासन सक्रिय हुआ। पुलिस मौके पर पहुंची और महिला तथा पुरुष को सुरक्षित थाने लेकर आई, जहां दोनों से अलग-अलग पूछताछ की गई। पुलिस ने घटनास्थल से जुड़े लोगों से भी जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है।
पुलिस पूछताछ के दौरान महिला ने बताया कि उसकी शादी करीब 15 वर्ष पहले हुई थी। महिला का आरोप है कि उसका पति अक्सर शराब के नशे में उसके साथ मारपीट करता है और लंबे समय से मानसिक तथा शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि घटना वाले दिन उसके साथ मारपीट की गई। इसके बाद कथित प्रेम प्रसंग का आरोप लगाकर पहले उसे और दूसरे व्यक्ति को खंभे से बांधा गया, फिर हाथ बांधकर पूरे गांव में घुमाया गया। महिला का कहना है कि इस घटना से उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को गंभीर ठेस पहुंची है।
महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने उसके पति, देवर सहित तीन लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है।
मामले को लेकर एसडीओपी महेश सुनय्या ने कहा कि आरोपियों की तलाश की जा रही है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। महिला के न्यायालय में बयान दर्ज कराए जाएंगे, जिसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है और इस तरह किसी महिला या पुरुष को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना गंभीर अपराध है। दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
बड़वानी की इस घटना से पहले मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में भी महिला के साथ अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया था। चंबल अंचल के निरार थाना क्षेत्र के बलालपुरा गांव में कथित तौर पर कचरा और गोबर डालने के विवाद के बाद एक महिला को घर से बाहर घसीटकर पेड़ से बांध दिया गया और लाठी-डंडों से पीटा गया। महिला को बचाने पहुंचे उसके बेटे के साथ भी मारपीट की गई थी। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद निरार थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन महिलाओं सहित पांच आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने कानून-व्यवस्था और भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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फर्जी क्राइम ब्रांच चलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, महिला वकील निकली मास्टरमाइंड
भोपाल। मिसरोद पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर लोगों को रोकते और एमडी ड्रग्स जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी देकर उनसे पैसे और सामान छीन लेते थे। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर गिरोह तक पहुंच बनाई। जांच में महिला मास्टरमाइंड के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आए हैं। पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश के साथ पूरे नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हुई है।
भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र में सक्रिय यह गिरोह खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर लोगों को रोकता था। आरोपी ऐसे लोगों की तलाश में रहते थे जिन्हें आसानी से डराया जा सके। व्हाइट स्कॉर्पियो में घूमते हुए वे राह चलते लोगों से पूछताछ शुरू कर देते और पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर उन्हें मानसिक दबाव में ले आते। इसके बाद उनसे नकदी और कीमती सामान छीनकर मौके से फरार हो जाते। शुरुआती जांच में पुलिस को इस गिरोह के सुनियोजित तरीके से वारदात करने के कई अहम सुराग मिले हैं।
पुलिस के अनुसार गिरोह ने एक युवक को रोककर खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया और उससे सख्ती से पूछताछ शुरू कर दी। आरोपियों ने युवक को धमकाया कि उसके खिलाफ एमडी ड्रग्स से जुड़ा मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया जाएगा। कार्रवाई के डर से युवक पूरी तरह घबरा गया और आरोपियों ने इसी स्थिति का फायदा उठाकर उससे लूटपाट कर ली। इतना ही नहीं, आरोपी उसका पीछा करते हुए उसकी कॉलोनी तक पहुंच गए।
घटना की शिकायत मिलने के बाद मिसरोद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू की। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, जिसमें संदिग्ध स्कॉर्पियो और आरोपियों की एक्टिविटी सामने आईं। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई व्हाइट स्कॉर्पियो भी बरामद की गई है।
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि गिरोह की मास्टरमाइंड एक महिला है, जो खुद को वकील बताती थी। पुलिस के मुताबिक उसी ने फर्जी पुलिस बनकर लोगों को डराने और लूटने की पूरी योजना तैयार की थी। पूछताछ में यह भी सामने आया कि महिला कानून की जानकारी का इस्तेमाल लोगों को भ्रमित करने और अपने साथियों को निर्देश देने में करती थी। पुलिस उसके संपर्कों और गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
पुलिस जांच में महिला आरोपी के खिलाफ पहले से मारपीट और चाकूबाजी जैसे मामलों में मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है। अधिकारियों का मानना है कि गिरोह लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में शामिल हो सकता है। एडीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि चार आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। वहीं दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
शमशाबाद। हर गांव का बच्चा पढ़े, आगे बढ़े… इसी सोच के साथ मध्यप्रदेश सरकार ने सांदीपनि विद्यालय योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य दूर-दराज गांवों के मेधावी बच्चों को बेहतर शिक्षा देना और उन्हें स्कूल तक पहुंचाने के लिए सुरक्षित परिवहन भी उपलब्ध कराया जाना था। लेकिन विदिशा में इस महत्वाकांक्षी योजना की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। यहां स्कूल बसों की कमी के चलते बच्चों को ट्रैक्टर-ट्रॉली में बैठकर स्कूल जाना पड़ रहा है।
ये तस्वीरें शमशाबाद विधानसभा के नटेरन स्थित सांदीपनि विद्यालय की हैं। सुबह-सुबह दूरस्थ गांवों से आने वाले बच्चे ट्रैक्टर-ट्रॉली में बैठकर स्कूल पहुंचते दिखाई देते हैं। जिन बच्चों के लिए कभी सरकारी स्कूल वाहन चलते थे, अब वे गांव तक नहीं पहुंच रहे। मजबूरी में अभिभावकों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली का सहारा लिया है।
सरकार ने सांदीपनि विद्यालयों की शुरुआत इस सोच के साथ की थी कि ग्रामीण क्षेत्र का कोई भी प्रतिभाशाली बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। लेकिन वाहनों की संख्या कम होने से अब वही बच्चे रोज जोखिम उठाकर स्कूल पहुंच रहे हैं। बच्चों का कहना है कि पढ़ाई नहीं छोड़ेंगे, चाहे ट्रॉली से जाना पड़े या किसी और संघर्ष का सामना करना पड़े।
“बस नहीं चल रही है, इसलिए मजबूरी में बच्चों को ट्रॉली से भेजना पड़ रहा है”
अभिभावकों का कहना है कि जब सरकारी बसें बंद हो गई हैं तो उनके पास बच्चों को ट्रॉली से भेजने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा। उनका कहना है कि वे बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकने देना चाहते, लेकिन सुरक्षा को लेकर चिंता भी लगातार बनी हुई है।
यह पहली बार नहीं है जब विदिशा की शिक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आई हो। हाल ही में पलोंह गांव का वीडियो भी सामने आया था, जिसमें स्कूली बच्चे नदी पार कर अपनी जान जोखिम में डालते हुए स्कूल पहुंच रहे थे। अब ट्रैक्टर-ट्रॉली में सफर करती ये तस्वीरें एक बार फिर ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था और परिवहन सुविधाओं पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं।
उधर, शिक्षा विभाग का कहना है कि सांदीपनि विद्यालयों के लिए उपलब्ध वाहनों की संख्या कम है। विभाग का दावा है कि संसाधनों के अनुसार व्यवस्था संचालित की जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है।
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मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की कुर्सी पर खतरा? चुनावी हलफनामे में संपत्ति छिपाने का आरोप, HC ने सुरक्षित रखा फैसला
जबलपुर। मध्य प्रदेश सरकार के खाद्य एंव नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। साल 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान अपने चुनावी हलफनामे में संपत्ति की जानकारी छिपाने के गंभीर आरोपों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अहम सुनवाई पूरी हो गई है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
यह पूरा मामला सागर जिले के सुरखी विधानसभा क्षेत्र और कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत से जुड़ा हुआ है। सागर निवासी राजकुमार सिंधी ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग को सौंपे गए अपने चुनावी हलफनामे में अपनी कई अचल संपत्तियों और वित्तीय ब्यौरे की पूरी जानकारी नहीं दी और उसे जानबूझकर छिपाया है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में दलीलें पेश करते हुए कहा गया कि जनप्रतिनिधि कानून के तहत चुनावी हलफनामे में सही और पूरी जानकारी देना अनिवार्य है, जबकि मंत्री की ओर से नियमों की अनदेखी की गई।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और पेश किए गए दस्तावेजों पर विस्तृत सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब हर किसी की निगाहें हाईकोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी हुई हैं। यदि फैसला मंत्री के खिलाफ जाता है तो राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल आ सकता है।
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अबू धाबी से इंदौर तक सोने की तस्करी का नेटवर्क बेनकाब! एयरलाइन कर्मचारी समेत 4 गिरफ्तार
इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सोना तस्करी के बड़े नेटवर्क का केंद्र बनकर सामने आया है। राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने अबूधाबी से इंदौर पहुंची एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट से एक यात्री के पास से एक किलो से अधिक सोना पकड़ने के बाद जो जांच शुरू की, उसने महज 48 घंटे में पूरे रैकेट का पर्दाफाश कर दिया। जांच में एयरलाइन का एक कर्मचारी, एक ड्राइवर और शहर का एक सराफा कारोबारी इस नेटवर्क की अहम कड़ी के रूप में सामने आए हैं। चारों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक DRI ने अबू धाबी से आने वाली फ्लाइट में एक संदिग्ध यात्री पर नजर रखी हुई थी। जांच के दौरान उसके पास से एक किलो से अधिक सोना बरामद हुआ। शुरुआत में मामला सिर्फ एक यात्री तक सीमित लग रहा था, लेकिन लगातार पूछताछ के बाद अधिकारियों ने तस्करी के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ लीं।
जांच में सामने आया कि एयर इंडिया एक्सप्रेस का एक ग्राउंड स्टाफ कर्मचारी यात्रियों से सोने का पैकेट लेकर उसे एयरपोर्ट से बाहर निकालता था। इसके बाद वह पैकेट एक ड्राइवर को सौंप देता, जो उसे शहर के सराफा कारोबारी तक पहुंचाता था। इसी तरीके से कथित तौर पर लंबे समय से सोने की तस्करी का यह नेटवर्क संचालित हो रहा था।
पूछताछ के बाद DRI ने चार लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें सोना लेकर आने वाला यात्री, एयरलाइन कर्मचारी, कार चालक और शहर का एक सराफा कारोबारी शामिल हैं। जांच एजेंसियां इन सभी से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि अब तक कितनी बार इस तरीके से सोना इंदौर लाया गया और इसका असली मास्टरमाइंड कौन है।
सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इस गिरोह के तार पहले पकड़े गए सोना तस्करी के मामलों से भी जुड़े हो सकते हैं। इसी वजह से DRI अब आरोपियों के पुराने यात्रा रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और कॉल डिटेल्स की भी जांच कर रही है।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि इसी नेटवर्क से जुड़े अन्य यात्री भी पहले कई बार सोना लेकर इंदौर पहुंचे होंगे। ऐसे यात्रियों के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रा रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है तो आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
जांच का फोकस अब उस कारोबारी पर भी है, जिसके पास कथित तौर पर तस्करी का सोना पहुंचाया जाता था। एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि सोने को कहां खपाया जाता था, उसका भुगतान किस माध्यम से होता था और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य कारोबारी कौन हैं।
अधिकारियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक किलो सोने की बरामदगी तक सीमित नहीं है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, अंतरराष्ट्रीय सोना तस्करी से जुड़े कई और चेहरे सामने आ सकते हैं। इंदौर एयरपोर्ट के जरिए संचालित इस कथित नेटवर्क ने सुरक्षा व्यवस्था और एयरलाइन संचालन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक को मोदी सरकार से 10-20 रुपये के प्लास्टिक के नोट के प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वित्त वर्ष 2028 की शुरुआत तक पॉलिमर करेंसी नोटों (Polymer Currency Notes) को प्रचलन में लाने का लक्ष्य रखा है. आरबीआई की ओर से 10-20 Plastic Notes को लेकर ये बड़ा अपडेट वित्त मंत्रालय द्वारा बीते दिनों संसद में इस प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद आया है. भौगोलिकसंदर्भ
RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में पॉलिमर यानी प्लास्टिक के नोट जारी करने की तैयारी कर रहा है, अभी पॉलिमर के कागज के लिए निविदा आमंत्रित की गई है, इसके बाद उस पर परीक्षण किए जाएंगे.
भारत में जल्द लोगों के हाथों में 10-20 रुपये के प्लास्टिक के नोट होंगे. आरबीआई का लक्ष्य वित्त वर्ष 2028 की शुरुआत में पॉलिमर करेंसी नोटों या प्लास्टिक के नोटों को सर्कुलेशन में लाने का है और इसके लिए लगातार तैयारियां जारी हैं. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि इन नोटों को बाजार में लाने से पहले हम इसका परीक्षण आकलन करेंगे. भौगोलिकसंदर्भ
RBI ने नए प्लास्टिक के नोट लाने के पीछे एक बड़ा कारण बताया है. RBI ने कहा कि हर साल खराब हो चुके अरबों गंदे नोटों को बदलकर नए छापने पड़ते हैं, जिससे कि करोड़ों रुपये खर्च हो जाते है. पिछले एक दशक में छपाई पर 52,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके है.
मौद्रिक नीति समिति के मीटिंग के बाद मीडिया ब्रीफ़िंग के दौरान, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि पॉलीमर नोटों के लिए एक पायलट प्रोग्राम चल रहा है और बाज़ार में लाने से पहले नोटों की टेस्टिंग और जांच की जाएगी.
₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोटों के ट्रायल को मंज़ूरी देने के बाद, सरकार ने साफ़ किया कि इस कदम से अभी चलन में मौजूद कागज़ी नोटों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. कागज़ी नोट बंद नहीं किए जाएंगे, बल्कि, वे पॉलीमर नोटों के साथ-साथ बाज़ार में बने रहेंगे.
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‘मदरसों में वंदे मातरम् गाने से आसमान नहीं टूट पड़ेगा…,’ कलकत्ता HC ने याचिकाकर्ता को लगाई फटकार
पश्चिम बंगाल के मदरसों में सुबह की प्रार्थना के दौरान वंदे मातरम गाने से जुड़े विवाद पर बुधवार को कलकत्ता हाइकोर्ट में सुनवाई हुई. राज्य मदरसा विभाग ने एक नोटिफिकेशन जारी कर राज्य के मदरसों में भी ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया था. सामाजिक कार्यकर्ता सौरव दत्ता ने इस कदम को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की. कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को पीआईएल पर सुनवाई करते हुए कहा कि आसमान नहीं गिर पड़ेगा.
कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी और मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर तय की है. पीआईएल दाखिल करने वाले की ओर से वरिष्ठ वकील विकास रंजन भट्टाचार्य पेश हुए.
पश्चिम बंगाल के मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ गाने संबंधी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से हलफनामा मांगा है. हालांकि, अदालत ने फिलहाल किसी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है और मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को तय की गई है.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास रंजन भट्टाचार्य का तर्क है कि कोई भी व्यक्ति ‘वंदे मातरम्’ स्वेच्छा से गा सकता है, लेकिन किसी को इसे गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी करके वंदे मातरम् के सभी छह छंदों को गाना अनिवार्य कर दिया है. अगर कोई अपनी मर्जी से गाना चाहता है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है लेकिन इसे थोपा नहीं जा सकता.
इस मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापोब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी चटर्जी की खंडपीठ ने की. कोर्ट ने कहा कि केंद्र का हलफनामा देखे बिना कोई अंतरिम आदेश जारी करना संभव नहीं है.
अदालत के सामने यह भी जानकारी आई कि दूसरी याचिका दायर होने के बाद राज्य मदरसा विभाग ने नया नोटिफिकेशन जारी करते हुए कहा है कि सभी मदरसों में सुबह की प्रार्थना के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाया जाना चाहिए.
इस दौरान न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की, “हजारों ईसाई स्कूलों में भी प्रार्थना के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाया जाता है. क्या उससे आसमान गिर पड़ेगा?” जस्टिस ने कहा, “इस समय कोई अंतरिम आदेश जारी करना संभव नहीं है. अब इस मामले में अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी.
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सिद्धिविनायक मंदिर दान घोटाला: महाराष्ट्र सरकार ने 5 साल में मिले खजाने का ऑडिट करने का आदेश दिया, मंदिर प्रशासन में हड़कंप मचा
मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में हुए दान घोटाले को लेकर महाराष्ट्र में सियासी तापमान हाई लेवल पर है। सबसे पहले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने मंदिर में 18 करोड़ रुपए की चोरी का दावा किया था। इसके बाद श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट (Shree Siddhivinayak Ganapati Mandir Trust) ने भी माना कि सिद्धिविनायक मंदिर के चढ़ावे से चोरी हुई है। अब पूरे मामले में महाराष्ट्र सरकार ने एक्शन लेते हुए सिद्धिविनायक गणपति के खजाने का ऑडिट करने का आदेश दिया है। सिद्धिविनायक मंदिर में पिछले साल में मिले पैसे और जेवरात का ऑडिट करने का आदेश देवेंद्र फडणवीस सरकार ने दिया है।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सिद्धिविनायक मंदिर के पिछले 5 सालों के दौरान दान पेटी में आए रुपए-पैसे और चढ़ावे में मिले सोने-चांदी के जेवरात का ऑडिट कराने का आदेश दिया है। इसके बाद मंदिर प्रशासन में हड़कंप मच गया है। माना जा रहा है कि सरकार के इस एक्शन से घोटाले में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है।
बता दें कि सिद्धिविनायक मंदिर दान घोटाले में 18 करोड़ की चोरी होने का आरोप लगा है। ट्रस्ट की शिकायत पर मुंबई पुलिस ने 9 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। वहीं 46 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। ट्रस्ट अध्यक्ष सदा सर्वणकर ने पुलिस हिरासत में लिए गए कर्मचारियों की जमानत की पुष्टि की है। सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के नेता सदा सर्वणकर ने राज ठाकरे के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है। सिद्धिविनायक ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवनकर ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि करीब 18 करोड़ की चोरी का मामला सामने आया है। सिद्धिविनायक मंदिर में चोरी या दर्शन करवाने में जो शामिल थे, उन्हें सस्पेंड किया गया है। अब तक 46 कर्मचारी निलंबित किये गए हैं और नौ लोगों को अरेस्ट किया गया है। इस मामले में वे लोग सीआईडी जांच की भी मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चोरी करने वालों का नाता यूबीटी से है।
वहीं सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट ने 18 करोड़ की चोरी के आरोपों को खारिज कर दिया है। ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर और ट्रस्टी राहुल लोंढे के मुताबिक मई में ट्रस्ट ने खुद ही कानून एवं न्याय विभाग को पत्र लिखकर पिछले 5 सालों के दान का विस्तृत ऑडिट कराने की मांग की थी। ट्रस्ट का कहना है कि गड़बड़ी की जानकारी मिलते ही उन्होंने सबसे पहले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के प्रमुख विश्वास नांगरे पाटिल से शिकायत की थी। इसके बाद मंदिर में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। मार्च में दान पेटी से पैसे गायब होने की घटना सामने आई थी। सीसीटीवी फुटेज की जांच में कुछ कर्मचारी छोटी दान पेटी से नकदी निकालते पकड़े गए थे।
बता दें कि नसे प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने मंदिर में 18 करोड़ रुपये के दान के गबन का आरोप लगाया था। अपनी पार्टी की छात्र इकाई के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया था कि मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल करीब 18 करोड़ रुपये के दान का गबन किया जा रहा था। राज ठाकरे ने इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जवाब देने की मांग की थी। उन्होंने कहा, “आजकल मंदिर भी सुरक्षित नहीं हैं। ठाकरे ने बताया कि मंदिर के दानपात्र से पैसे चोरी करने वाले कुछ कर्मचारियों का पर्दाफाश ट्रस्ट की सतर्कता के कारण हो सका। उन्होंने दावा किया कि उन्हें मंदिर ट्रस्ट के आठ ट्रस्टियों द्वारा महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लिखे गए पत्र की जानकारी मिली है
बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के ठीकरी थाना क्षेत्र में कथित प्रेम प्रसंग के आरोप में एक महिला और एक पुरुष को हाथ बांधकर पूरे गांव में घुमाया गया। यह घटना ठीकरी थाना क्षेत्र के ग्राम बरुफाटक की है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और सोमवार शाम को महिला की शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, महिला और पुरुष को कथित प्रेम प्रसंग के आरोप में महिला के पति, देवर और कुछ अन्य लोगों ने हाथ बांधकर गांव में घुमाया। इस दौरान किसी ने घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों को सुरक्षित थाने लेकर आई।
पूछताछ के दौरान महिला ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी करीब 15 साल पहले हुई थी। उसने आरोप लगाया कि उसका पति अक्सर शराब पीकर उसके साथ मारपीट करता है और उसे प्रताड़ित करता है। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। एसडीओपी महेश सुनय्या ने बताया कि फिलहाल सभी आरोपियों की तलाश की जा रही है। महिला के न्यायालय में बयान दर्ज होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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कारोबारी से 1.63 करोड़ की साइबर ठगी: ऑनलाइन ट्रेडिंग में मुनाफे का झांसा देकर लगाया करोड़ों का चूना,
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर एक कारोबारी से 1 करोड़ 63 लाख रुपये की साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बहोड़ापुर निवासी कारोबारी मनीष जैन को शेयर बाजार में भारी मुनाफे का लालच देकर साइबर ठगों ने अपने जाल में फंसा लिया।
जानकारी के अनुसार, ठगों ने खुद को ‘एक्सिस-डीमैट’ प्लेटफॉर्म का अधिकारी बताकर कारोबारी का विश्वास जीता। इसके बाद उन्हें एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कराया गया और व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर निवेश पर लगातार भारी मुनाफा दिखाया गया। इसी झांसे में आकर पीड़ित ने 22 अप्रैल से 20 जुलाई के बीच अलग-अलग बैंक खातों में 1 करोड़ 86 लाख 44 हजार 900 रुपये जमा कर दिए।
जब कारोबारी ने निवेश की गई राशि और मुनाफा निकालने का प्रयास किया तो ठगों ने कैपिटल गेन टैक्स, इनकम टैक्स, सर्विस चार्ज और अन्य शुल्क के नाम पर और पैसे जमा करने की मांग शुरू कर दी। पीड़ित द्वारा अतिरिक्त रकम देने से इनकार करने पर उसे व्हाट्सएप ग्रुप से हटा दिया गया और सभी संपर्क बंद कर दिए गए। अपने साथ हुई ठगी का एहसास होने पर कारोबारी ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन और क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर क्राइम ब्रांच थाना ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों को फ्रीज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। साथ ही साइबर अपराधियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के लिए विभिन्न तकनीकी माध्यमों से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
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इंदौर प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम मामला: हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- संचालिका पर FIR क्यों नहीं?
इंदौर। बहुचर्चित प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की और पूछा कि आखिर अब तक आश्रम की संचालिका के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज क्यों नहीं की गई? इसके साथ ही अदालत ने भवन आवंटन, प्रशासनिक जवाबदेही और आपराधिक कार्रवाई को लेकर सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है।
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने सरकार से पूछा- यदि वृद्धाश्रम के लिए भवन उपलब्ध कराया गया था, तो उससे संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड कहां हैं? इतने गंभीर मामले के बाद भी संचालिका के विरुद्ध आपराधिक मामला (FIR) दर्ज करने में देरी क्यों हुई?
सरकारी जमीन से हटाया कब्जा हाईकोर्ट की सख्ती के बीच नगर निगम की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम को खाली करा लिया है। निगम ने सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जे को मुक्त कराते हुए अवैध रूप से खड़ी की गई दीवार को ध्वस्त कर दिया और पूरे परिसर को दोबारा अपने कब्जे में ले लिया। इसके अलावा, परिसर के भीतर अवैध रूप से संचालित हो रही गोशाला को भी हटाने का नोटिस जारी कर दिया गया है। प्रशासन ने आसपास के अन्य अवैध कब्जों की जांच भी शुरू कर दी है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने दावा किया है कि वृद्धाश्रम को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। आश्रम में रह रहे सभी बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित (शिफ्ट) कर दिया गया है, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक जांच जारी है।
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में मानव तस्करी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। बाणगंगा थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ऐसे रैकेट का खुलासा किया है, जो नाबालिग लड़कियों की फर्जी पहचान बनाकर उनकी शादी कराता था और उन्हें लाखों रुपये में बेचने की साजिश रचता था। मामले में पुलिस ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि पांच अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह ने 16 वर्षीय नाबालिग को 21 वर्ष की युवती बताने के लिए उसके आधार कार्ड में जन्मतिथि बदलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इसके बाद गिरोह के सदस्य खुद ही लड़की के फर्जी माता-पिता बन गए और उसकी शादी रतलाम में कराकर उसे करीब 3 लाख रुपये में बेच दिया।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरोह की योजना नाबालिग को केवल एक बार नहीं, बल्कि 5 से 6 अलग-अलग जगहों पर बार-बार शादी कराकर बेचने की थी। इसके लिए पूरी साजिश पहले से तैयार की गई थी। बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला एक अपहरण की जांच के दौरान सामने आया। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क की जानकारी मिली, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
फिलहाल बाणगंगा पुलिस पूरे रैकेट की गहन जांच में जुटी है। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस गिरोह का नेटवर्क किन-किन जिलों और राज्यों तक फैला हुआ है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस तरह की वारदातों का शिकार और कितनी लड़कियां हुई हैं।
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जिस कोबरा का रेस्क्यू करने पहुंचे, उसी के डसने से गई जान, हादसे में सर्प मित्र बॉबी की मौत
मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। सैकड़ों लोगों को जहरीले सांपों से बचाने वाले प्रसिद्ध सर्प मित्र बॉबी खुद एक हादसे का शिकार हो गए। इंडियन स्पेक्टेकल्ड कोबरा सांप का रेस्क्यू करने के दौरान सांप के डसने से उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, सर्प मित्र बॉबी अपने घर से करीब 6 किलोमीटर दूर एक इंडियन स्पेक्टेकल्ड कोबरा (नाग) का रेस्क्यू करने पहुंचे थे। रेस्क्यू के बाद जब वे सांप को डिब्बे में पैक कर रहे थे, तभी डिब्बा डैमेज होने के कारण कोबरा बाहर निकल आया और उनके पैर में डस लिया।
घटना के तुरंत बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि, इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। मौत से पहले सर्प मित्र बॉबी ने खुद इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी थी और माना था कि जरा सी लापरवाही उन पर कितनी भारी पड़ गई। इस हादसे के बाद क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है।
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युवक की लाश मिलने के बाद फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, महिलाओं की पुलिस से हुई झूमाझटकी
सतना। सतना जिले के जसो थाना क्षेत्र के अमकुई गांव में लापता युवक अतुल कुशवाहा का चार दिन बाद शव मिलने से पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों का आरोप है कि युवक के लापता होने के बाद जसो थाना पुलिस ने समय पर गुमशुदगी की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की और परिजनों को लगातार इधर-उधर भटकाती रही।
इतना ही नहीं, जिस व्यक्ति पर परिजनों ने संदेह जताया था, उसे भी पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। शव मिलने की खबर फैलते ही गांव में गुस्से का विस्फोट हो गया आक्रोशित ग्रामीणों ने डायल-112 वाहन पर पथराव कर दिया और पुलिस के वाहनों को रोककर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
हालात बिगड़ते देख उचेहरा और नागौद थानों से अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर बुलाया गया एसडीओपी स्वयं भारी पुलिस बल के साथ मोर्चा संभाले हुए हैं और नाराज़ ग्रामीणों को शांत कराने का प्रयास कर रहे हैं, फिलहाल पूरे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है पुलिस मामले की जांच में जुटी है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
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