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इंदौर. मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर के बहुचर्चित शिवानी पाटेरिया हत्याकांड में करीब साढ़े छह साल बाद जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शातिर बैंक अधिकारी अमितेश उर्फ शालू पाटेरिया को अपनी ही पत्नी की हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले में आरोपी पति ने अपनी पत्नी की हत्या को सांप का काटना साबित करने की पूरी स्क्रिप्ट तैयार की थी लेकिन फॉरेंसिंक जांच और साक्ष्यों के आगे साहब की यह खूनी साजिश टिक नहीं सकी। अदालत ने आरोपी को न सिर्फ हत्या, बल्कि साक्ष्य मिटाने और कोबरा सांप की हत्या के मामले में वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत भी दोषी पाते हुए अलग से सजा और जुर्माना लगाया है।
यह खौफनाक वारदात इंदौर के संचार नगर की है। 1 दिसंबर 2019 को बैंक अधिकारी अमितेश पाटेरिया अपनी पत्नी शिवानी को लेकर अस्पताल पहुंचा और डॉक्टरों को बताया कि उसे सांप ने काट लिया है जिससे उसकी मौत हो गई। शुरुआती तौर पर परिवार ने भी इसे एक दर्दनाक हादसा बताने की कोशिश की लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब मृतका के मायके वालों ने इस मौत को संदिग्ध बताते हुए सीधे दामाद पर हत्या का आरोप मढ़ दिया और मामले में जांच की मांग की।
जब पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की गहराई से तफ्तीश शुरू की, तो परत-दर-परत जो खुलासे हुए उसने पुलिस अफसरों के भी होश उड़ा दिए। आरोपी पति किसी दूसरी महिला के संपर्क में था और अपनी पत्नी से छुटकारा पाना चाहता था। इसके लिए उसने बकायदा योजना बनाई और राजस्थान के अलवर से एक बेहद जहरीला कोबरा सांप लेकर आया।
वारदात वाली रात आरोपी ने पहले तकिए से शिवानी का मुंह और गला दबाकर उसे मौत के घाट उतारा। इसके बाद हत्या को सांप काटने का रूप देने के लिए शातिर पति ने उस कोबरा सांप को भी मार डाला और उसके शव को घटनास्थल पर रख दिया ताकि पुलिस और डॉक्टर इसे सर्पदंश का मामला मान लें।
आरोपी ने खुद को बचाने के लिए जाल तो तगड़ा बुना था लेकिन वह विज्ञान को धोखा नहीं दे सका। शिवानी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना सामने आई न कि सांप का जहर। वहीं फॉरेंसिक और वैज्ञानिक जांच में यह साफ हो गया कि बिस्तर पर मिला कोबरा सांप पहले ही मारा जा चुका था। परिस्थितियों और बयानों में विरोधाभास के आधार पर पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की तो बैंक अफसर का यह खूनी चेहरा बेनकाब हो गया।
साढ़े छह साल तक चली सुनवाई के बाद जिला अदालत ने माना कि अमितेश ने बेहद क्रूरता और शातिराना ढंग से अपनी पत्नी की जान ली। कोर्ट ने आरोपी को उम्रकैद की सजा के साथ-साथ, साक्ष्य मिटाने के अपराध में अलग से सजा सुनाई। इसके अलावा, बेजुबान कोबरा सांप की हत्या कर अपनी साजिश में इस्तेमाल करने के जुर्म में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत 3 साल की जेल और आर्थिक जुर्माना भी ठोका है। कोर्टऔर न्यायपालिका

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10 करोड़ की MD ड्रग्स जब्त; नागपुर-मुंबई तक नेटवर्क, मऊगंज फैक्ट्री का हो चुका है भंडाफोड़
रीवा. विंध्य में नशे के कारोबार पर रीवा पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। मऊगंज में एमडी ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा होने के कुछ ही घंटों बाद रीवा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ो रुपये के ड्रग्स जब्त की है। इस कार्रवाई में पुलिस ने दो आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि जब्त की गई ड्रग्स की खेप महाराष्ट्र के नागपुर और मुंबई भेजी जानी थी। पुलिस को इस मामले में अंतर्राज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग भी मिले हैं।
यह पूरी कार्रवाई गढ़ थाना और लालगांव चौकी पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा की गई। रीवा रेंज के आईजी गौरव राजपूत के निर्देश पर पुलिस टीम ने सोनबरसा गांव से भारी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किया है। जब्त ड्रग्स को बाहर भेजने की तैयारी है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में जब्त की गई इस एमडी ड्रग्स की कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
रीवा रेंज के आईजी गौरव राजपूत को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गांव में बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ छिपाकर रखा गया है और उसे महाराष्ट्र भेजने की तैयारी चल रही है। सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में विशेष टीम गठित कर छापेमारी की गई, जिसमें पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी।
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने कई अहम जानकारियां दी हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि एमडी ड्रग्स की सप्लाई मुंबई और नागपुर तक की जाती थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ड्रग्स कहां से लाई जाती थी, किन राज्यों तक इसका नेटवर्क फैला हुआ है और इस पूरे रैकेट में कौन-कौन लोग शामिल हैं। फंडिंग और सप्लाई चेन की भी गहन जांच की जा रही है।
रीवा पुलिस के मुताबिक, नशे के सौदागरों के खिलाफ चलाया जा रहा यह अभियान रुकने वाला नहीं है। यह विंध्य के इतिहास की सबसे बड़ी रिकवरी है। पुलिस को इस अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग और नाम हाथ लगे हैं, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और बड़े तस्करों की गिरफ्तारी तय मानी जा रही है।
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दर्दनाक मंजर: कुएं में गिरने से 13 हिरणों की मौत, एक कुत्ता भी मिला मृत, मचा हड़कंप
शाजापुर। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में वन्यजीवों की सामूहिक मौत का बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। जिले के कालापीपल क्षेत्र स्थित खरदौनकलां गांव के एक खेत में बने कुएं में गिरने से 13 हिरणों की मौत हो गई। कुएं में हिरणों के साथ एक कुत्ता भी मृत अवस्था में मिला। घटना से क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार खेत मालिक किसान कीटनाशक का छिड़काव करने खेत पहुंचा था। इस दौरान कुएं से दुर्गंध आने पर उसने अंदर झांककर देखा तो उसमें कई हिरणों के शव दिखाई दिए। सूचना मिलते ही वन विभाग, पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि हिरणों का झुंड आवारा कुत्ते से बचने के लिए तेजी से भाग रहा था। इसी दौरान सभी हिरण खुले कुएं में गिर गए। उनका पीछा कर रहा कुत्ता भी कुएं में गिरने से मर गया।
वन विभाग के मुताबिक मृत हिरणों में चार नर और नौ मादा शामिल हैं। शव सड़-गल चुके थे, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि यह घटना एक से दो दिन पहले हुई होगी। मौके पर पंचनामा तैयार करने के बाद वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्राणी होने के कारण नायब तहसीलदार की मौजूदगी में सभी हिरणों का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद नियमानुसार मौके पर ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

देवास। कन्नौद के ग्राम बरबईखेड़ा में किन्नर का भेष बनाकर लूट-डकैती की वारदात को अंजाम देने वाले छह आरोपियों को खातेगांव और कन्नौद पुलिस ने गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। मामले का खुलासा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सौम्या जैन ने प्रेस वार्ता में किया।
पुलिस के मुताबिक 19 जून 2026 को हुई इस वारदात के बाद विशेष टीम गठित कर तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर की सूचना के आधार पर आरोपियों की तलाश की गई। पूछताछ में आरोपियों ने किन्नर का भेष धारण कर वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार की। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने पहचान छिपाने और लोगों को शक न हो, इसके लिए किन्नर का भेष अपनाया था।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटी गई दो सोने की मालाएं, एक सोने का टॉप्स, घटना में इस्तेमाल किया गया चाकू और वारदात में प्रयुक्त दो कारें बरामद की हैं। पुलिस के अनुसार पीड़ित ने आरोपियों के डर से तत्काल रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उसने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में इस गिरोह से जुड़े अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है। खातेगांव और पुलिस की इस संयुक्त कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है।
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अन्नदाताओं से धोखाधड़ी: 31 किसानों से 80 लाख की ठगी, खाली खाते का चेक थमाकर फरार हुए व्यापारी
जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर से किसानों के साथ धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां दो शातिर व्यापारियों ने क्षेत्र के 6 गांव के 31 किसानों से करीब 80 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। आरोपियों ने किसानों से भारी मात्रा में गेहूं और चना तो खरीद लिया लेकिन भुगतान के बदले उन्हें खाली बैंक खाते के चेक थमा दिए जो बाद में बाउंस हो गए। पीड़ित किसानों की शिकायत पर कटंगी थाना पुलिस ने दोनों सगे व्यापारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह मामला कटंगी थाना क्षेत्र की है जहां अप्रैल महीने में व्यापारियों ने किसानों से अनाज खरीदा था। आरोपी व्यापारियों ने किसानों से करीब 6 हजार क्विंटल गेहूं और 150 क्विंटल चना खरीदा था। सौदा होने के बाद व्यापारियों ने किसानों को भरोसा जीतने के लिए 11 लाख रुपये और बची रकम के लिए 80 लाख रुपये का चेक थमा दिया। जब किसानों ने भुगतान के लिए चेक बैंक में लगाया तो खाता खाली होने के कारण बैंक ने चेक बाउंस कर दिया। इसके बाद जब व्यापारियों ने पैसे देने से हाथ खड़े कर लिए तो ठगे गए किसानों ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कटंगी थाना पुलिस ने दोनों आरोपी व्यापारियों राजा सिंह लोधी और सोहन लोधी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आरोपियों ने इस अनाज को कहां खपाया और किसानों के पैसे कैसे वसूले जाएंगे।
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80 साल का हो चुका हूं, पार्टी ने सब कुछ दियाः अब सिर्फ धर्म की रक्षा करूंगा, दशहरे पर निकालेंगे गैर-राजनीतिक यात्रा
भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपनी भविष्य की सियासत और जीवन की दिशा को लेकर एक चौंकाने वाला बयान दिया है। दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे अब सक्रिय चुनावी राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बना रहे और उनका पूरा ध्यान धर्म-कर्म व अध्यात्म पर रहेगा। उन्होंने अपनी आगामी यात्रा का ऐलान करते हुए कहा है कि यह पूरी तरह से धार्मिक होगी, इसमें राजनीति का कोई स्थान नहीं होगा।
अपने राजनीतिक जीवन और उम्र का जिक्र करते हुए दिग्विजय सिंह ने भावुक और बेबाक अंदाज में कहा, “मैं अब 80 साल का हो चुका हूँ। मुझे मेरी पार्टी (कांग्रेस) ने सब कुछ दिया है। मैं सांसद रहा, विधायक रहा और सूबे का मुख्यमंत्री भी रहा। अब मेरी कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं बची है।” उन्होंने खुलासा करते हुए आगे कहा कि हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने खुद संगठन से कहा था कि अब मेरी जगह किसी अन्य नए चेहरे को मौका दिया जाना चाहिए।
2 अक्टूबर की जगह ‘दशहरे’ पर शुरू यात्रा होगी। दिग्विजय सिंह ने अपनी इस आगामी धार्मिक यात्रा की रूपरेखा और तारीखों में बदलाव को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। पहले यह यात्रा 2 अक्टूबर से शुरू होने वाली थी, लेकिन अब इसे बदलकर दशहरे (विजयादशमी) के पावन पर्व से शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इस यात्रा में कांग्रेस या किसी भी अन्य राजनीतिक दल का झंडा इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। यात्रा के भीतर सभी धर्मों के झंडे शामिल होंगे, जो सर्वधर्म समभाव का संदेश देंगे। उन्होंने साफ किया कि वे इस यात्रा के दौरान कोई राजनीतिक या धार्मिक प्रवचन नहीं देंगे। यहां तक कि वे सोशल मीडिया पर भी इस यात्रा को लेकर कोई प्रचार या पोस्ट नहीं लिखेंगे।
दिग्विजय की इस यात्रा का सबसे बड़ा और दिलचस्प पहलू इसके मुख्य अतिथि (Chief Guest) को लेकर है। उन्होंने ऐलान किया है कि अयोध्या आंदोलन के समय चार गोलियां खाने वाले प्रखर कारसेवक संतोष दुबे इस यात्रा के मुख्य अतिथि होंगे। संतोष दुबे को मुख्य अतिथि बनाकर दिग्विजय ने एक बड़ा दांव खेला है, जिससे सियासी गलियारों में नई चर्चा छिड़ गई हैं।
दिग्विजय का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस संगठन के भीतर पीढ़ी परिवर्तन (Generation Shift) का दौर चल रहा है। उनके इस ‘धार्मिक टर्न’ को राजनीति के जानकार उनके सक्रिय संसदीय जीवन से सन्यास और खुद को ‘मार्गदर्शक’ की भूमिका में ले जाने के संकेत के रूप में देख रहे हैं। बहरहाल, उनकी यह ‘गैर-राजनीतिक’ यात्रा आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश की राजनीति में क्या रंग लाती है, इस पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी। 

श्रीनगर। अमरनाथ यात्रा शुरू होने के महज पांच दिन बाद ही बाबा बर्फानी का प्राकृतिक हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु गुफा में दर्शन कर चुके हैं। हिमलिंग के इतनी जल्दी पिघलने के बाद अमरनाथ श्राइन बोर्ड की व्यवस्थाओं और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी। बताया जा रहा है कि 7 जुलाई तक प्राकृतिक हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया। जबकि यह यात्रा हर साल 57 दिनों तक चलती है और इस बार इसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन (सावन पूर्णिमा) के दिन होना है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि हिमलिंग का बनना और पिघलना पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया है। उन्होंने इसे मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों से जुड़ी सामान्य घटना बताया है।
कश्मीर के कुछ पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से गुफा के आसपास का तापमान बढ़ता है, जिससे हिमलिंग तेजी से पिघल सकता है। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं की संख्या और पर्यावरणीय परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। हालांकि, इस दावे पर सभी विशेषज्ञों की एक जैसी राय नहीं है और हिमलिंग के जल्दी पिघलने के पीछे मौसम और जलवायु भी अहम कारण माने जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमरनाथ गुफा में बनने वाला प्राकृतिक हिम शिवलिंग हर साल तापमान, बर्फबारी और मौसम की स्थिति के अनुसार आकार लेता है। ऊंचाई वाले इलाकों में बढ़ता तापमान, कम बर्फबारी और जलवायु परिवर्तन जैसी स्थितियां इसके बनने और पिघलने की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 23 मई को हिमलिंग की ऊंचाई करीब 7 फीट थी। 29 जून तक यह घटकर करीब 5 फीट रह गई और अब इसके पूरी तरह पिघलने की जानकारी सामने आई है। यह पहली बार नहीं है जब हिमलिंग यात्रा के दौरान जल्दी पिघला हो। वर्ष 2016 में यात्रा शुरू होने के करीब 10 दिन बाद ही हिमलिंग पिघल गया था। वहीं, 2013 में भी यात्रा समाप्त होने से पहले ही हिमलिंग अंतर्ध्यान हो गया था।
इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी। हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए इस पवित्र गुफा तक पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमरनाथ गुफा वही स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाया था। इसी वजह से यह हिंदू धर्म की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक मानी जाती है।
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राम मंदिर चढ़ावा मामला: तीन आरोपी एक दिन की पुलिस रिमांड पर, बैंक खातों की होगी जांच
अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान से जुड़े कथित गबन मामले की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंचती नजर आ रही है। इस मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों को कोर्ट ने 24 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस अब आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ करेगी।
कोर्ट से पुलिस रिमांड मिलने के बाद जांच एजेंसियां अब आरोपियों से गहन पूछताछ करेंगी। SIT की अंतरिम रिपोर्ट में छह लोगों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही की बात कही गई है। जांच के दौरान CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। अब पुलिस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
अयोध्या कोर्ट ने दान गबन मामले में गिरफ्तार लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडे को 24 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेजने की अनुमति दे दी है। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस बुधवार सुबह 10 बजे से तीनों आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ करेगी। जांच के दौरान उनसे गबन की पूरी प्रक्रिया और अन्य संभावित लोगों की भूमिका के बारे में भी जानकारी जुटाई जाएगी। जिसमें कई अहम खुलासे हो सकते है।
पुलिस पूछताछ के साथ तीनों आरोपियों को उनके ठिकानों पर भी लेकर जाएगी। वहां कथित गबन से जुड़े सामान और अन्य साक्ष्यों की बरामदगी की जाएगी। जांच एजेंसियों की नजर विशेष रूप से अनुकल्प मिश्रा की हाल ही में खरीदी गई संपत्तियों पर है। उसके नए घर और वाहन के संबंध में भी पूछताछ होगी। जरुरत पड़ने पर संबंधित स्थानों की तलाशी लेकर साक्ष्य एकत्र किए जाएंगे।
विशेष जांच दल की अंतरिम रिपोर्ट में छह लोगों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में अवनीश शुक्ला, अनुज कुमार मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, कृष्णम पाण्डेय और रामशंकर मिश्रा के नाम शामिल हैं। एसआईटी के अनुसार, संबंधित लोगों ने सुरक्षा उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित नहीं किया। कमियों की जानकारी होने के बावजूद समय पर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए। इससे कथित गड़बड़ियों को रोकने में लापरवाही सामने आई।
जांच के दौरान CCTV फुटेज का परीक्षण किया गया, जिसमें कुछ कर्मचारियों की गतिविधियां संदिग्ध बताई गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, गणना कक्ष में कुछ कर्मचारियों को नोटों की गड्डियों से खुले नोट निकालकर उन्हें अपने कपड़ों, जेबों, जूतों और अन्य स्थानों पर छिपाते हुए देखा गया। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ कर्मचारी इशारों के जरिए एक-दूसरे को सतर्क करते दिखाई दिए।
SIT की अंतरिम रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उपलब्ध CCTV फुटेज और जांच के आधार पर करीब 70 बार चोरी या गबन किए जाने के संकेत मिले हैं। हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह निष्कर्ष जांच का हिस्सा है और इसकी विस्तृत पड़ताल अभी जारी है। ट्रस्ट ने जांच दल को बताया कि CCTV सिस्टम की स्टोरेज क्षमता सीमित होने के कारण पुरानी फुटेज खुद डिलीट हो जाती थी। यदि 27 अप्रैल से पहले की रिकॉर्डिंग उपलब्ध होती तो जांच में और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते थे।
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कॉकरोच जनता पार्टी को दिल्ली HC से राहत... एक्स पर लगा बैन हटा, जानें सरकार ने क्या दलीलें दी?
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के X अकाउंट को फिर से चालू करने का आदेश दिया है। यह फैसला CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके की याचिका पर सुनाया गया। अदालत ने केंद्र सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत मई 2026 में CJP का अकाउंट भारत में ब्लॉक कराया गया था। कोर्ट ने कहा कि जिस वजह से अकाउंट ब्लॉक किया गया था, वह अब खत्म हो चुकी है, इसलिए प्रतिबंध जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि 21 जून को हुए NEET री-टेस्ट से पहले CJP की कुछ पोस्ट छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम और अफरा-तफरी फैला सकती थीं। इसी आशंका को देखते हुए X को अकाउंट अस्थायी रूप से ब्लॉक करने का निर्देश दिया गया था। सरकार ने कहा कि यह कदम केवल परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाने के लिए उठाया गया था।
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अब NEET री-टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। ऐसे में सरकार द्वारा दिया गया कारण अब लागू नहीं होता। अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगाए गए प्रतिबंधों की न्यायिक कसौटी पर जांच जरूरी है और बिना उचित आधार के ऐसे प्रतिबंध जारी नहीं रखे जा सकते। इसी आधार पर कोर्ट ने ब्लॉकिंग आदेश रद्द करते हुए X को CJP का अकाउंट तत्काल प्रभाव से बहाल करने का निर्देश दिया।
'कॉकरोच जनता पार्टी' की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक पहल के रूप में हुई थी। शुरुआती दिनों में इसे एक मीम प्लेटफॉर्म माना गया, लेकिन धीरे-धीरे बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन मिलने लगा। इसके बाद यह मंच विभिन्न सरकारी नीतियों और व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला अभियान बन गया।
इंस्टाग्राम पर अकाउंट बनने के महज पांच दिनों के भीतर CJP के 1.35 करोड़ फॉलोअर्स हो गए थे। फिलहाल इंस्टाग्राम पर इसके 2.19 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हैं। X पर भी इसकी तेजी से बढ़ती लोकप्रियता चर्चा का विषय रही थी।
5 पॉइंट्स में समझिए पूरा मामला
21 मई 2026 को अकाउंट ब्लॉक हुआ
केंद्र सरकार के निर्देश पर X ने भारत में CJP का आधिकारिक अकाउंट अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया था।
सरकार की क्या चिंता थी?
सरकार का कहना था कि NEET री-टेस्ट से पहले की गई कुछ पोस्ट छात्रों और अभिभावकों में भ्रम फैला सकती हैं।
अभिजीत दिपके कोर्ट क्यों पहुंचे?
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सरकार के ब्लॉकिंग आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
हाई कोर्ट ने कहा कि परीक्षा खत्म हो चुकी है, इसलिए प्रतिबंध का आधार भी खत्म हो गया है और अकाउंट बहाल किया जाना चाहिए।
फैसले का क्या महत्व है?
अदालत ने साफ किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगाए गए सरकारी प्रतिबंधों की न्यायिक समीक्षा जरूरी है और ऐसे आदेश अनिश्चितकाल तक जारी नहीं रखे जा सकते।

रीवा. मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बदहाल सड़कें और लचर स्वास्थ्य व्यवस्था किस तरह मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ रही है, इसका एक बेहद बिचलित करने वाला मामला रीवा जिले से सामने आया है। मनगंवा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत नदना के डिहिया गांव में आकाशीय बिजली की चपेट में आई एक आदिवासी महिला को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल सकी। अस्पताल पहुंचने के लिए तड़पते मरीज को परिजनों ने दो किलोमीटर तक खाट पर उठाकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाने की जद्दोजहद की लेकिन इलाज मिलने से पहले ही महिला की सांसे थम गईं।
जानकारी के मुताबिक डिहिया गांव की रहने वाली रामकली रावत आकाशीय बिजली गिरने से गंभीर रूप से झुलस गई थी। घटना के तुरंत बाद परिजनों ने आपातकालीन सेवा एंबुलेंस को सूचना दी। परिजनों का आरोप है कि गांव तक पहुंचने वाली सड़क इस कदर जर्जर और कीचड़ से बदहाल थी कि एंबुलेंस अंदर गांव तक नहीं आ सकी।
जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो बेबस परिवार और ग्रामीणों ने घायल रामकली को एक खाट पर लिटाया और अपने कंधों पर उठाकर करीब दो किलोमीटर पैदल चलते हुए मुख्य मार्ग की तरफ भागे। प्रशासनिक तंत्र की इस लेट-लतीफी के कारण काफी देर हो चुकी थी और महिला ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
इस दर्दनाक मौत ने न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग बल्कि लोक निर्माण और स्थानीय विकास के दावों की भी पोल खोलकर रख दी है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि गांव की इसी सड़क के निर्माण के लिए विधायक निधि से 5 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी।
बजट पास होने के बावजूद आज तक सड़क का निर्माण क्यों नहीं हुआ और सड़क बदहाल क्यों पड़ी रही? स्वीकृत राशि का उपयोग कहां किया गया, इसे लेकर अब भ्रष्टाचार के गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
इस घटना के बाद से डिहिया गांव सहित पूरे इलाके में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों के साथ-साथ अब विपक्ष ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं की इस दुर्दशा की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की जाए और विधायक निधि के पैसों में हेरफेर करने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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आष्टा-शुजालपुर रोड पर ट्रक-बुलेरो की भीषण टक्कर, 5 की मौत, 4 गंभीर घायल
सीहोर। जिले में आष्टा-शुजालपुर मार्ग पर सोमवार को ट्रक और 'बोलेरो' वाहन के बीच भिड़ंत होने से पांच लोगों की मौत हो गई तथा चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि टक्कर इतनी भीषण थी कि 'बोलेरो' वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। उन्होंने बताया कि बोलेरो वाहन में सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हो गए। उन्होंने कहा कि घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पार्वती के थाना प्रभारी हरिसिंह परमार ने बताया कि पुलिस ने एंबुलेंस की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान राजगढ़ जिले के भियापुरा के इंदर सिंह और राजाराम के रूप में हुई है, जबकि दो अन्य मृतकों की पहचान नहीं हो पायी है। पुलिस के मुताबिक प्रारंभिक जांच के अनुसार, बोलेरो में कुल नौ लोग सवार थे, जो एक मानसिक रूप से एक अस्वस्थ व्यक्ति का उपचार कराने जा रहे थे।
दुर्घअना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर घायलों को बाहर निकाला और एंबुलेंस की मदद से सिविल अस्पताल पहुंचाया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम घटनास्थल पर पहुंची तथा दुर्घटना की जांच शुरू कर दी।
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रेलवे स्टेशन पर हैवानियत! खंभे से बांधकर बेदम पीटा; चीखता रहा बच्चा, वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप
अनूपपुर. मध्य प्रदेश क अनूपपुर रेलवे स्टेशन परिसर से इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक बेहद अमानवीय और विचलित करने वाली घटना सामने आई है। कुछ युवकों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए एक नाबालिग बच्चे को रस्सी के सहारे लोहे के खंबे से बांध दिया और फिर उसकी बेरहमी से पिटाई की। इस खौफनाक और बर्बर कृत्य का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर हर किसी का दिल दहल उठा है।
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह चंद रसूखदार और बेखौफ युवक उस लाचार और सहमे हुए नाबालिग बच्चे पर अपनी हैवानियत बरसा रहे हैं। बच्चा खुद को छुड़ाने के लिए तड़पता रहा, रोता रहा और रहम की भीख मांगता रहा लेकिन उन युवकों का दिल नहीं पसीजा। वे लगातार उस मासूम पर लात-घूंसे और डंडे बरसाते रहे। सबसे ज्यादा हैरान और परेशान करने वाली बात यह है कि यह पूरी वारदात रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक और व्यस्त इलाके के मुख्य गेट के पास सरेआम होती रही लेकिन कोई भी उस मासूम को बचाने आगे नहीं आया।
इस अमानवीय घटना ने रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था पर एक बहुत बड़ा और गंभीर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। रेलवे परिसरों की सुरक्षा के लिए चौबीसों घंटे तैनात रहने वाली जीआरपी (GRP) और आरपीएफ (RPF) का इस पूरी वारदात के दौरान दूर-दूर तक कोई अता-पता नहीं था।
वीडियो वायरल होने के बाद से ही इलाके के लोगों में भारी आक्रोश है। लोग इस अमानवीय कृत्य को अंजाम देने वाले युवकों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई और रासुका जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।
मध्यप्रदेश के अनूपपुर रेलवे स्टेशन से इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक बेहद खौफनाक वीडियो सामने आया है। यहाँ कुछ रसूखदार गुंडों ने एक बेबस नाबालिग बच्चे को लोहे के खंभे से रस्सी के सहारे जकड़ दिया और फिर उस पर बेरहमी से लात-घूंसे और डंडे बरसाए।

 

ग्वालियर/मुरैना। चर्चित केएस ऑयल्स एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला करीब 75 करोड़ रुपये के ट्रेड फाइनेंस घोटाले का है। आरोप है कि सरकारी कंपनी स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (STC) के अधिकारियों और केएस ऑयल्स के पदाधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये का खेल किया गया। मामले की जांच के बाद सीबीआई ने 12 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक साल 2010 से 2014 के बीच एसटीसी ने केएस ऑयल्स लिमिटेड को सरसों तेल खरीदने के लिए 75 करोड़ रुपये का ट्रेड फाइनेंस मंजूर किया था। जांच में सामने आया कि नियमों को दरकिनार कर कंपनी की वित्तीय स्थिति और साख की उचित जांच किए बिना लोन स्वीकृत किया गया, इतना ही नहीं, 75 करोड़ की मंजूरी के बावजूद करीब 83.30 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ क्रेडिट जारी कर दिए गए।
सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि जिन दो कंपनियों को सरसों तेल सप्लाई करने वाला बताया गया, वे वास्तव में शेल कंपनियां थीं और उनका संचालन भी केएस ऑयल्स से जुड़े लोगों द्वारा किया जा रहा था। इन कंपनियों के जरिए जारी की गई एलसी की रकम वापस केएस ऑयल्स के खातों में पहुंचाई गई। सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ, जब गुना और मुरैना स्थित टैंकों का निरीक्षण किया गया,जहां सरसों तेल होना चाहिए था, वहां 90 प्रतिशत से ज्यादा पानी मिला। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की और कंपनी को लगातार राहत दी जाती रही। इस पूरे मामले में एसटीसी को करीब 74 करोड़ 77 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
सीबीआई ने इस मामले में तत्कालीन एसटीसी के कई सीनियर अधिकारियों, केएस ऑयल्स लिमिटेड, उसके चेयरमैन रमेश चंद गर्ग, डायरेक्टर दवेश अग्रवाल, स्टार एग्री वेयरहाउसिंग एंड कोलेटरल मैनेजमेंट लिमिटेड और उसके डायरेक्टर अमित खंडेलवाल सहित 12 आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश,धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। मामले की जांच सीबीआई के डीएसपी गौरव सोम को सौंपी गई है।
करीब डेढ़ दशक पुराने इस कथित घोटाले में सीबीआई की एफआईआर के बाद एक बार फिर केएस ऑयल्स और उससे जुड़े अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है। अब जांच एजेंसी पूरे वित्तीय लेन-देन, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और सरकारी धन के दुरुपयोग की परतें खोलने में जुटी है।
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आष्टा-शुजालपुर रोड पर ट्रक-बुलेरो की भीषण टक्कर, 5 की मौत, 4 गंभीर घायल
सीहोर। जिले में आष्टा-शुजालपुर मार्ग पर सोमवार को ट्रक और 'बोलेरो' वाहन के बीच भिड़ंत होने से पांच लोगों की मौत हो गई तथा चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि टक्कर इतनी भीषण थी कि 'बोलेरो' वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। उन्होंने बताया कि बोलेरो वाहन में सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हो गए। उन्होंने कहा कि घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पार्वती के थाना प्रभारी हरिसिंह परमार ने बताया कि पुलिस ने एंबुलेंस की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान राजगढ़ जिले के भियापुरा के इंदर सिंह और राजाराम के रूप में हुई है, जबकि दो अन्य मृतकों की पहचान नहीं हो पायी है। पुलिस के मुताबिक प्रारंभिक जांच के अनुसार, बोलेरो में कुल नौ लोग सवार थे, जो एक मानसिक रूप से एक अस्वस्थ व्यक्ति का उपचार कराने जा रहे थे।
दुर्घअना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर घायलों को बाहर निकाला और एंबुलेंस की मदद से सिविल अस्पताल पहुंचाया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम घटनास्थल पर पहुंची तथा दुर्घटना की जांच शुरू कर दी।
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वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्य : आरिफ मसूद ने कहा-सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा
भोपाल। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर सनवर पटेल को पुन: अध्यक्ष बनाया गया है। इसके साथ ही पहली बार बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों को भी शामिल किया गया है। ऐसा करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है। इस फैसले को लेकर जहां कुछ संगठनों और लोगों ने विरोध जताया है। भोपाल मध्य सीट से विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि सरकार के इस निर्णय के खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।
विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि कांग्रेस नेता ने कहा कि ट्रस्ट में नियुक्ति का पूरा मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने संशोधन के प्रावधान के विपरीत दो की जगह तीन श्रेणियों को शामिल कर गलती की है। सवाल उठाया कि जब मामला कोर्ट में लंबित है तो इतनी जल्दबाजी और घबराहट क्यों दिखाई गई। मसूद ने कहा, इस मुद्दे पर जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका या आवेदन दायर किया जाएगा।
विधायक मसूद ने कहा कि सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से संशोधन का आश्वासन दिया गया था, फिर भी सरकार ने अलग तरीके से कार्रवाई की। ट्रस्ट को लेकर दिए गए सद्भावना वाले तर्क पर मसूद ने आपत्ति जताई और कहा कि धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में ऐसे प्रयोग उचित नहीं हैं।
इस मामले में भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि वक्फ बोर्ड की जमीन किसी मुल्ला या मौलवी की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि देश और समाज की संपत्ति है। उन्होंने कहा कि वक्फ की जमीनों का उपयोग गरीबों और जरूरतमंदों के हित में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में गंगा-जमुनी तहजीब हमारी संस्कृति का हिस्सा है और सभी समुदायों की भागीदारी से ही व्यवस्था मजबूत होगी।
विधायक शर्मा ने कहा कि वक्फ संशोधन के बाद बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों को शामिल किया गया है, जिनका उद्देश्य भी गरीबों के हित में काम करना होगा। इससे आम मुसलमानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। शर्मा ने आगे कहा कि यदि किसी को इस फैसले से आपत्ति है तो वे लोग हैं, जो अब तक वक्फ की संपत्तियों का गलत लाभ उठाते रहे हैं। उनके अनुसार नए सदस्यों की नियुक्ति से वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।
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दिग्विजय की अयोध्या यात्रा पर घमासान: ‘बाबरी के लिए रोने वाले अब चंदा वापस मांगने जा रहे हैं’- BJP विधायक का तंज
मध्य प्रदेश में एक बार फिर राम मंदिर और सनातन के मुद्दे पर सियासत गर्मा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा उज्जैन से अयोध्या तक निकाली जाने वाली पदयात्रा को लेकर भाजपा ने उन पर सीधा और तीखा हमला बोला है। भोपाल की हुजूर सीट से भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने दिग्विजय सिंह की इस यात्रा को ‘सनातन विरोधी’ करार देते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
विधायक रामेश्वर शर्मा ने दिग्विजय सिंह के पुराने स्टैंड को याद दिलाते हुए उन पर चौतरफा हमला बोला। शर्मा ने कहा कि हम आपको हिंदू नहीं मानते। आप वो हैं जिन्होंने कार सेवा से लेकर मंदिर निर्माण तक हमेशा श्रीराम मंदिर का विरोध किया। विरोध ही नहीं किया, बल्कि बाबरी मस्जिद के लिए रोए और गाए भी। भाजपा की पांच-पांच सरकारें गिराने में भी आपकी भूमिका रही। अब जब आपने चंदा दिया तो मैं पहली बार देख रहा हूं कि कोई चंदा वापस लेने अयोध्या जा रहे हैं। क्या दिग्विजय सिंह जी गंगा मैया में विसर्जित पुरखों की अस्थियों को भी वापस लेने जाओगे?
भाजपा विधायक ने आगे कहा कि दिग्विजय सिंह केवल सनातन को बदनाम और टारगेट करने के लिए यह यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह सनातन विरोधी यात्रा देश भर में कांग्रेस की ‘अंतिम यात्रा’ साबित होगी।
रामेश्वर शर्मा ने दिग्विजय सिंह को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे सच में धार्मिक यात्रा करना चाहते हैं तो श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए पदयात्रा करें। उन्होंने कहा कि चलो मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति यात्रा पर मैं और पूरा संत समाज और देश का करोड़ों हिंदू आपके साथ चलेगा। हो सके तो अपने कांग्रेसी कुनबे और गांधी परिवार को भी साथ ले चलना, चुनाव के समय सिर्फ गंगा नहाने से काम नहीं चलेगा।
दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उत्तर प्रदेश में राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं यानि चोरी के आरोपों को लेकर 2 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक करीब 1000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा का ऐलान किया है।
दिग्विजय सिंह ने स्वयं राम मंदिर के लिए 1 लाख 11 हजार रुपये का चंदा दिया था, जिसकी रसीद और चेक की प्रति उनके पास सुरक्षित है। उन्होंने कहा है कि वे वरिष्ठ वकीलों से चर्चा कर कोर्ट में मुकदमा दायर करेंगे और चंदे का पूरा हिसाब मांगेंगे।
दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर संघ प्रमुख मोहन भागवत को संबोधित करते हुए लिखा था कि धर्म को चंदा चोरों से बचाने के लिए RSS और VHP को आगे आकर मेरी पदयात्रा का समर्थन करना चाहिए।
भाजपा के अलावा धार्मिक हलकों से भी दिग्विजय सिंह की इस यात्रा का विरोध शुरू हो गया है। धर्मगुरु अनिलानंद महाराज ने कांग्रेस के पुराने रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों ने एक समय कोर्ट में भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे और उन्हें काल्पनिक बताया था, आज वही लोग राजनीतिक लाभ के लिए यात्राएं निकालने का ढोंग रच रहे हैं, जो पूरी तरह से गलत है।

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
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गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
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गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
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बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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