


सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में रविवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। सफेद मिट्टी की एक खदान अचानक धंस गई, जिससे उसमें काम कर रहे पांच लोग दब गए। इस हादसे में तीन महिलाएं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोगों को गंभीर हालत में सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। वहीं घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
लगातार कड़ी मेहनत के बाद दबे हुए दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिन्हें तुरंत इलाज के लिए देवसर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। यह हादसा जियावन थाना क्षेत्र की कुदवार चौकी के अंतर्गत आने वाले इलाके में हुआ। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सभी लोग सफेद मिट्टी, जिसे स्थानीय भाषा में ‘छूही’ कहा जाता है, निकालने के लिए खदान में उतरे थे। इसी दौरान खदान की मिट्टी अचानक धंस गई, जिससे यह भयावह दुर्घटना सामने आई। घटना के बाद इलाके में मातम का माहौल है।
शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि खदान में फंसे लोग परसोहर और हर्हा गांव के रहने वाले हैं। पुलिस को डर है कि मिट्टी के मलबे के नीचे अभी और लोग दबे हो सकते हैं। इसी वजह से मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार चलाया जा रहा है। दूसरी ओर घटना की खबर मिलते ही पुलिस के साथ-साथ प्रशासनिक अमला भी तुरंत घटनास्थल पर पहुंच चुका है।
यहां मशीनों और स्थानीय लोगों की मदद से राहत कार्य किया जा रहा है। हादसे के बाद पूरे इलाके में सन्नाटा और डर का माहौल है। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर खदान धंसने की नौबत क्यों आई।
सिंगरौली जिले के परसोहर गांव में हुए हादसे को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। बताया गया कि 5 महिलाएं और बच्चियां खुरपी लेकर गांव की छुई (पोतने वाली मिट्टी) की खदान में मिट्टी खोदने गई थीं। सुबह करीब 11:21 बजे अचानक खदान की मिट्टी भरभराकर धंस गई और सभी लोग उसके नीचे दब गए। घटना की सूचना मिलते ही आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और शोर मचाया। इस दर्दनाक हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है हालांकि शासन पूरे मामले की जांच कर रहा।
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जान जोखिम में डालने का ट्रेंडः मोबाइल टावर पर चढ़ा प्रेमी, पति से नाराज पत्नी भी चढ़ी
सिंगरौली। शहर में बीते दो दिनों के भीतर सामने आए दो अलग-अलग घटनाक्रम चर्चा का विषय बने हुए हैं। दोनों घटनाएं भले ही अलग-अलग परिस्थितियों से जुड़ी हों, लेकिन सवाल एक ही खड़ा करती हैं। आखिर लोग अपनी बात मनवाने के लिए जान जोखिम में डालने वाले ऐसे कदम क्यों उठाते हैं?
पहला मामला 23 जनवरी का है, देवसर जिआवान थाना अंर्तगत रवि कुशवाहा निवासी धनहा गांव में बने मोबाइल टावर पर चढ़ गया। प्रेम प्रसंग और अंतरजातीय विवाह को लेकर युवक ने परिजनों को मनाने के लिए फिल्म शोले की तर्ज पर खतरनाक कदम उठा लिया। हालांकि समय रहते पुलिस और परिजनों के समझाने पर स्थिति नियंत्रण में आई और बड़ा हादसा टल गया।
दूसरा मामला सराय थाना अंतर्गत 24 जनवरी का है, पीपलखाड़ गांव की रहने वाली युवती अपने पति के साथ मेला घूमने गई थी। पत्नी ने पति से बोला कि मुझे झूला झूलना है पति ने मना किया तो पत्नी टावर पर चढ़ गईं। उसके बाद मेला परिसर में लोगों का हुजूम इकट्ठा हो गया। सरई पुलिस ने सूझबूझ और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए संवाद किया, उसकी मांग पूरी करने का भरोसा दिलाया और आखिरकार युवती को सकुशल नीचे उतारा गया।
इन दोनों घटनाओं ने एक बात तो साफ कर दी है कि आज भी आम लोगों का भरोसा पुलिस पर कायम है, लेकिन साथ ही यह भी उजागर हुआ है कि समाज में संवाद की कमी और भावनात्मक असंतुलन किस हद तक खतरनाक रूप ले सकता है। क्या परिवारों की सख्ती युवाओं को ऐसे जोखिम भरे कदम उठाने को मजबूर कर रही है? क्या बच्चों की मानसिक स्थिति को लेकर हम अब भी लापरवाह हैं? और क्या इस तरह के “स्टैंड” अब अपनी बात मनवाने का तरीका बनते जा रहे हैं
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'बीमार' एंबुलेंस ने ली मरीज की जान, अस्पताल पहुंचने के बाद भी नहीं खुला का दरवाजा, हार्ट पेशेंट ने अंदर ही तोड़ा दम
सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की एक ऐसी लापरवाही सामने आई जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया। एक ओर जहां 108 एंबुलेंस को 'जीवनदायिनी' माना जाता है, वहीं इसकी तकनीकी खराबी और बदहाली एक अति गंभीर मरीज के लिए काल बन गई। अस्पताल पहुंचने के बावजूद एंबुलेंस का दरवाजा न खुलने के कारण मरीज समय पर इलाज के अभाव में दम तोड़ गया।
घटना के अनुसार, रामनगर क्षेत्र से हार्ट अटैक के शिकार मरीज राम प्रसाद को लेकर 108 एंबुलेंस जिला अस्पताल पहुंची थी। मरीज की हालत बेहद नाजुक थी और उसे तत्काल आपातकालीन चिकित्सा की आवश्यकता थी। जैसे ही वाहन अस्पताल की दहलीज पर रुका, एंबुलेंस का पिछला दरवाजा अचानक जाम हो गया। काफी कोशिशों के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला, तो गंभीर रूप से तड़प रहा मरीज और उसके दो परिजन वाहन के अंदर ही कैद होकर रह गए।
मरीज की बिगड़ती हालत और परिजनों की चीख-पुकार के बीच वहां अफरा-तफरी मच गई। जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो एंबुलेंस चालक ने सूझबूझ और कड़ी मशक्कत दिखाते हुए ड्राइवर वाली खिड़की से अंदर प्रवेश किया। इसके बाद अंदर से लॉक तोड़ने का प्रयास किया गया ताकि मरीज को बाहर निकाला जा सके। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय बर्बाद हो गया, जो कि एक हार्ट अटैक के मरीज के लिए बेहद कीमती था।
तकनीकी खराबी के कारण हुई इस देरी का खामियाजा अंततः मरीज को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा। पर्याप्त उपचार शुरू होने से पहले ही राम प्रसाद की मृत्यु हो गई। इस घटना ने जिले की 108 एंबुलेंस सेवाओं के रखरखाव और फिटनेस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि यदि एंबुलेंस सही स्थिति में होती और दरवाजा तुरंत खुल जाता, तो शायद समय पर डॉक्टरी सहायता मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती थी।
रीवा। जिले के ग्राम पंचायत गढ़ा 138 में सड़क और पुल निर्माण को लेकर लापरवाही अब बड़े विरोध का रूप ले चुकी है। गांव निवासी धनेश सोनकर कलेक्टरेट गेट के सामने भूख हड़ताल पर बैठ गए, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। धनेश एक बैनर के माध्यम से वर्षों से अधूरी पड़ी सड़क-पुल परियोजना की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। जिस पर लिखा है, 'किडनी बेचना है, ताकि सड़क-पुल बनवा सकूं।'
वर्ष 2022 में ग्राम पंचायत गढ़ा 138 में सड़क-पुल निर्माण के लिए 2 करोड़ 51 लाख 15 हजार रुपए स्वीकृत किए गए थे। योजना के तहत 2200 मीटर लंबी सड़क का निर्माण होना था, लेकिन अब तक महज करीब 500 मीटर सड़क ही बन पाई है। शेष कार्य बिना किसी स्पष्ट कारण के बंद कर दिया गया। इससे गांव का संपर्क प्रभावित हो गया है और ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सुखराम, केशव, मकबूल आदि ग्रामीणों का कहना है कि, खराब और अधूरे रास्ते के कारण गांव तक एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती। आपात स्थिति में मरीजों को चारपाई पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है, जिससे जान जोखिम में पड़ती है। धनेश सोनकर का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद सुनवाई नहीं हुई, इसलिए मजबूरी में भूख हड़ताल करनी पड़ी।
समस्या के समाधान के लिए निर्देश दिए हैं
संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। युवक की समस्या के शीघ्र निदान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।
प्रतिभा पाल, कलेक्टर, रीवा
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गणतंत्र दिवस पर - पुलिस कमिश्नर सहित 4 अधिकारियों को राष्ट्रपति पदक, 17 को सराहनीय सेवा पदक
भोपाल। गणतंत्र दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार ने पुलिस, फायर, होमगार्ड एवं अन्य सेवाओं के लिए पदकों की घोषणा कर दी है। इस वर्ष मध्य प्रदेश पुलिस के लिए यह अवसर विशेष रहा है। आधिकारिक सूची के अनुसार राज्य के कुल 21 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विशिष्ट और सराहनीय सेवाओं के लिए पदकों से सम्मानित किया जाएगा।
राज्यवार जारी सूची में मध्य प्रदेश के चार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को प्रेसिडेंट्स मेडल फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस (राष्ट्रपति पदक) से सम्मानित करने की घोषणा की गई है, जबकि 17 अधिकारियों और कर्मचारियों को मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस (सराहनीय सेवा पदक) प्रदान किया जाएगा।
राष्ट्रपति पदक पाने वाले अधिकारी
गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची के अनुसार राष्ट्रपति पदक (PSM) से सम्मानित किए जाने वाले अधिकारियों में—
संतोष कुमार सिंह – पुलिस आयुक्त
मिथिलेश कुमार शुक्ला – पुलिस महानिरीक्षक
अवधेश कुमार गोस्वामी – उप पुलिस महानिरीक्षक
शिव कुमार पटेल – निरीक्षक
इन अधिकारियों को कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक दक्षता और दीर्घकालिक विशिष्ट सेवा के लिए यह सम्मान दिया जाएगा।
17 अधिकारियों को सराहनीय सेवा पदक-मध्य प्रदेश पुलिस के 17 अन्य अधिकारी और कर्मचारी विभिन्न रैंक पर रहते हुए उत्कृष्ट, निष्ठावान और अनुकरणीय सेवा के लिए मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस से सम्मानित किए जाएंगे। यह पदक फील्ड ड्यूटी, अपराध जांच, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।
सराहनीय सेवा पदक पाने वालों में—कृष्णावेणी देशावतु (आईजी), मनोज कुमार राय (एसपी), गितेश कुमार गर्ग (एसपी), दुर्गेश कुमार राठौर (एसपी), प्रवीण सिंह (इंस्पेक्टर), राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता (इंस्पेक्टर), निधि श्रीवास्तव (इंस्पेक्टर), संजय सिंह ठाकुर (डीएसपी), शफाली टकलकर (इंस्पेक्टर), श्रीराम मिश्रा (हेड कांस्टेबल), सुशील कुमार चौबे (कांस्टेबल), प्रेम किशोर व्यास (सब इंस्पेक्टर), उमराव प्रसाद जाटव (सब इंस्पेक्टर), महेंद्र सिंह नेगी (एएसआई), संतोष मेहरा (एएसआई), रविंद्र मिश्रा (कांस्टेबल) और राजू गुराने (इंस्पेक्टर) शामिल हैं।
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सीएम डॉ. यादव संतुलन बिगड़ने से घोड़े से नीचे गिरे, बड़ा हादसा टला, उज्जैन में हुई घटना
उज्जैन. बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में आयोजित राहगीरी आनंदोत्सव के दौरान रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. कार्यक्रम के दौरान जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव घुड़सवारी कर रहे थे, तभी अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वे घोड़े से नीचे गिर पड़े. इस अचानक हुई घटना से वहां मौजूद लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया.
हालांकि, मुख्यमंत्री के पास तैनात सुरक्षाकर्मियों ने गजब की फुर्ती दिखाई और स्थिति बिगड़ती उससे पहले ही सीएम को तत्काल संभालते हुए उठाया. गनीमत रही कि मुख्यमंत्री को कोई गंभीर चोट नहीं आई. घटना के बाद मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में अन्य गतिविधियों का भी आनंद लिया.
नरसिंदी। बांग्लादेश में चुनावी माहौल के बीच धार्मिक कट्टरता और अल्पसंख्यक विरोधी हिंसा खुलकर सामने आने लगी है। एक ओर जमात-ए-इस्लामी के नेताओं के भड़काऊ और कट्टरपंथी बयान, दूसरी ओर 23 वर्षीय हिंदू युवक चंचल चंद्र भौमिक को जिंदा जलाकर मार दिए जाने की दिल दहला देने वाली घटना। इन दोनों घटनाओं ने देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालिया घटनाक्रम यह संकेत देता है कि, चुनावी राजनीति के साथ कट्टर सोच का मेल बांग्लादेश के सामाजिक ताने-बाने को गहरी चोट पहुंचा रहा है।
यह दर्दनाक घटना बांग्लादेश के नरसिंदी जिले के मस्जिद मार्केट इलाके में शुक्रवार रात सामने आई। 23 साल का चंचल चंद्र भौमिक रोज की तरह अपनी ही दुकान (गैराज) में सो रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, रात के समय किसी अज्ञात व्यक्ति ने बाहर से दुकान का शटर बंद किया, उस पर पेट्रोल डाला और फिर आग लगा दी। आग तेजी से दुकान के अंदर फैल गई और कुछ ही मिनटों में पूरा गैराज लपटों में घिर गया।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि, हमलावर कुछ देर तक बाहर खड़ा रहा और चंचल को जलते हुए देखता रहा, इसके बाद वह मौके से फरार हो गया। अंदर फंसे चंचल के पास बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था। दमघोंटू धुएं और तेज आग की लपटों के बीच उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना न सिर्फ अमानवीय थी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी गहरे सदमे का कारण बनी।
घटना की सूचना मिलते ही नरसिंदी फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंची। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग बुझने के बाद दुकान के अंदर से चंचल का पूरी तरह जला हुआ शव बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस ने इलाके को घेर लिया और फॉरेंसिक जांच शुरू की।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घटनास्थल से कई अहम सबूत जुटाए गए हैं और CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति आग लगाकर भागता हुआ दिखाई देता है, हालांकि पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मामले की जांच हत्या के रूप में की जा रही है और आरोपियों की तलाश जारी है।
चंचल चंद्र भौमिक अपने परिवार का एकमात्र सहारा था। उसके पिता खोकन चंद्र भौमिक का पहले ही निधन हो चुका था। उसकी मां प्रमिता रानी भौमिक बीमार रहती हैं, बड़ा भाई दिव्यांग है और एक छोटा भाई भी परिवार पर निर्भर है। चंचल पिछले छह वर्षों से उसी गैराज में काम करता था और वहीं रहता भी था।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, वह बेहद शांत, सीधा और मेहनती युवक था। उसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी और वह अपने काम से काम रखने वाला इंसान था। परिवार का कहना है कि, यह कोई सामान्य अपराध नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या लगती है, जिसके पीछे धार्मिक नफरत की साजिश हो सकती है।
यह घटना कोई अकेला मामला नहीं है। इससे पहले भी बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लोगों पर हिंसक हमले सामने आ चुके हैं। दीपु चंद्र दास और खोकोन चंद्र दास जैसे मामलों में भी लोगों को जिंदा जलाए जाने की घटनाएं रिपोर्ट की जा चुकी हैं। हाल के महीनों में हिंदुओं पर हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिससे अल्पसंख्यक समुदाय में भय और असुरक्षा का माहौल बनता जा रहा है।
मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि, धार्मिक पहचान के आधार पर हिंसा की घटनाएं देश की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं।
इसी बीच जमात-ए-इस्लामी के नेता अफजल हुसैन का एक चुनावी भाषण भी विवादों में आ गया है। बर्गुना-2 सीट से चुनाव लड़ रहे अफजल हुसैन ने एक सभा में कहा कि, जिस देश की 80 फीसदी आबादी मुस्लिम है, वहां संसद में गैर-मुस्लिमों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कुरान आधारित शासन व्यवस्था लागू करने की बात कही और संविधान की अवधारणा को भी खारिज किया।
उन्होंने चोरी करने वालों के हाथ काटने जैसी सजा को सही ठहराते हुए कहा कि इससे अपराध खत्म हो जाएगा। इस तरह के बयान न सिर्फ धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि समाज में नफरत और विभाजन की भावना को भी मजबूत करते हैं।
एक तरफ राजनीतिक मंचों से भड़काऊ बयान, दूसरी तरफ हिंदू युवक की जिंदा जलाकर हत्या ये दोनों घटनाएं साफ संकेत देती हैं कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा गंभीर खतरे में है। यह मामला अब सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि धार्मिक कट्टरता, चुनावी राजनीति और सामाजिक अस्थिरता के खतरनाक मेल का प्रतीक बन चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि, यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसी घटनाएं समाज में और गहरी दरार पैदा कर सकती हैं। अल्पसंख्यक समुदाय के लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और सरकार से कड़ी कार्रवाई व ठोस सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
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अविमुक्तेश्वरानंद बोले! हम भाजपा की आंख की किरकिरी बन गए, कितना भी परेशान कर लें, मैं पीछे नहीं हटूंगा
प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच जारी टकराव अब सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस बीच शिविर में हुए हंगामे पर शंकराचार्य ने पहली बार खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन पर हमला इसलिए किया जा रहा है क्योंकि वे खुलकर गो-रक्षा की बात कर रहे हैं।
शंकराचार्य ने कहा कि वे भाजपा की आंखों की किरकिरी बन चुके हैं, लेकिन किसी भी दबाव या उत्पीड़न के आगे झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि जितना अधिक उन पर जुल्म होगा, उतनी ही दृढ़ता से वे अपने कदम आगे बढ़ाएंगे।
दरअसल, शनिवार देर रात खुद को ‘कट्टर सनातनी सेना’ बताने वाले संगठन के 8 से 10 युवक भगवा झंडे लेकर शंकराचार्य के शिविर के पास पहुंच गए थे। युवक ‘आई लव बुलडोजर बाबा’ और ‘योगी जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाते हुए शिविर में घुसने की कोशिश करने लगे। इस दौरान शंकराचार्य के शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई और करीब 15 मिनट तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा।
बताया जा रहा है कि इस संगठन का नेतृत्व सचिन सिंह नाम का व्यक्ति कर रहा था। घटना के बाद सुरक्षा को देखते हुए शंकराचार्य के शिष्यों ने शिविर को चारों ओर से घेर लिया और भीतर जाने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया।
अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की की घटना के बाद करीब 15 मिनट तक शिविर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। बताया जा रहा है कि हंगामा करने वाले समूह का नेतृत्व सचिन सिंह नाम का व्यक्ति कर रहा था। हालात बिगड़ते देख शंकराचार्य के शिष्यों ने तुरंत सतर्कता बरतते हुए पूरे शिविर को चारों ओर से घेर लिया और अंदर आने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया।
वहीं इस मामले में शंकराचार्य के शिविर प्रभारी ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि कुछ असामाजिक तत्व लाठी-डंडे और झंडे लेकर शिविर में पहुंचे और जबरन अंदर घुसकर मारपीट पर आमादा हो गए। शिविर में मौजूद सेवकों ने समझाइश देकर उन्हें बाहर तो निकाल दिया, लेकिन स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी और किसी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। शिविर प्रभारी ने प्रशासन से शंकराचार्य की सुरक्षा पुख्ता करने की मांग की है।
18 जनवरी को माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में सवार होकर स्नान के लिए जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पैदल जाने का निर्देश दिया। इस बात को लेकर विरोध हुआ, जिसके बाद शंकराचार्य के शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। घटना से आहत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शिविर के बाहर धरना शुरू कर दिया, जिससे मेला क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।
इस प्रकरण के बाद मेला प्रशासन ने 48 घंटे के भीतर शंकराचार्य को दो अलग-अलग नोटिस जारी किए। पहले नोटिस में उनके द्वारा ‘शंकराचार्य’ पदवी के उपयोग को लेकर आपत्ति जताई गई, जबकि दूसरे नोटिस में मौनी अमावस्या के दिन हुए पूरे घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण मांगा गया। प्रशासन ने नोटिस में यह भी चेतावनी दी कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में उन्हें हमेशा के लिए माघ मेले से प्रतिबंधित क्यों न कर दिया जाए।
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जजों का ट्रांसफर सरकार का काम नहीं… SC जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां का बड़ा बयान, बोले- संविधान सर्वोच्च है
पुणे। भारत की न्यायिक व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा संवैधानिक विवाद सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने हाई कोर्ट जजों के तबादले (ट्रांसफर) को लेकर साफ शब्दों में कहा है कि, यह पूरी तरह न्यायपालिका का आंतरिक मामला है। जिसमें केंद्र सरकार या कार्यपालिका की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि, सरकार के खिलाफ फैसले देने वाले जजों का तबादला करना न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हस्तक्षेप है और इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद कमजोर होती है।
जस्टिस भुइयां ने यह बयान पुणे के ILS लॉ कॉलेज में आयोजित प्रिंसिपल जीवी पंडित मेमोरियल लेक्चर के दौरान दिया। उन्होंने कॉलेजियम सिस्टम, न्यायिक स्वतंत्रता और कार्यपालिका के प्रभाव पर खुलकर अपनी बात रखी।
अपने भाषण में जस्टिस भुइयां ने दो टूक कहा कि, हाई कोर्ट जजों के ट्रांसफर और पोस्टिंग पूरी तरह न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसमें सरकार या केंद्र की कोई भूमिका नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि, यदि किसी जज का तबादला सिर्फ इसलिए किया जाता है क्योंकि उसने सरकार के लिए असहज या कठिन फैसले दिए हैं, तो यह सीधे तौर पर न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला है।
जस्टिस भुइयां ने एक बेहद गंभीर सवाल उठाया- क्या किसी जज को सिर्फ इसलिए एक हाई कोर्ट से दूसरे हाई कोर्ट में ट्रांसफर किया जाना चाहिए, क्योंकि उसने सरकार के खिलाफ कुछ मुश्किल आदेश पारित किए?
उन्होंने कहा कि ऐसी सोच-
न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करती है।
कॉलेजियम सिस्टम की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।
जनता के न्याय व्यवस्था पर भरोसे को नुकसान पहुंचाती है।
कॉलेजियम सिस्टम पर सीधी आलोचना
जस्टिस भुइयां ने कॉलेजियम प्रक्रिया में कार्यपालिका के दखल को लेकर खुली आलोचना करते हुए कहा कि, जब कॉलेजियम के प्रस्ताव में ही यह दर्ज हो कि किसी जज का ट्रांसफर केंद्र सरकार के पुनर्विचार अनुरोध के बाद किया गया, तो यह कॉलेजियम सिस्टम की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने इसे कार्यपालिका के प्रभाव की खुली स्वीकारोक्ति बताया और कहा कि, यह एक संवैधानिक रूप से स्वतंत्र मानी जाने वाली प्रक्रिया को कमजोर करता है।
अपने संबोधन में जस्टिस भुइयां ने संविधान की सर्वोच्चता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि, भारत में संसद सर्वोच्च नहीं है, संविधान सर्वोच्च है। उन्होंने याद दिलाया कि, संविधान निर्माताओं ने जानबूझकर संविधान की सर्वोच्चता को चुना था, ताकि किसी भी संस्था का वर्चस्व लोकतंत्र के संतुलन को नुकसान न पहुंचा सके।
यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जज जस्टिस अतुल श्रीधरन के तबादले से जुड़ा है।
अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस अतुल श्रीधरन का ट्रांसफर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से बदलकर इलाहाबाद हाई कोर्ट करने की सिफारिश की। कॉलेजियम के आधिकारिक बयान में यह दर्ज था कि, यह बदलाव केंद्र सरकार के पुनर्विचार अनुरोध के बाद किया गया।
यह फैसला इसलिए भी विवादास्पद बना क्योंकि, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में जस्टिस श्रीधरन सीनियरिटी के आधार पर कॉलेजियम का हिस्सा बनते, जबकि इलाहाबाद हाई कोर्ट में उनकी सीनियरिटी काफी नीचे चली गई। यानी यह सिर्फ स्थान परिवर्तन नहीं था, बल्कि संस्थागत भूमिका और प्रभाव में गिरावट भी थी।
जस्टिस अतुल श्रीधरन की पहचान एक स्वतंत्र, निर्भीक और सख्त जज के रूप में रही है। अपने न्यायिक करियर के दौरान उन्होंने कई ऐसे फैसले दिए, जिनमें सत्ता पक्ष के खिलाफ सख्त रुख साफ दिखाई दिया। उनके चर्चित मामलों में BJP मंत्री विजय शाह के खिलाफ लिया गया स्वत: संज्ञान प्रमुख रूप से शामिल है।
इस मामले में उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई टिप्पणी को गंभीर मानते हुए स्वत: संज्ञान लेकर FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। यह फैसला सरकार के लिए असहज माना गया, जिसके बाद उनके तबादले को लेकर विवाद और गहरा गया तथा इसे न्यायिक स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जाने लगा।
जस्टिस भुइयां ने कहा कि, जब न्यायपालिका ने NJAC (नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट्स कमीशन) को खारिज कर कॉलेजियम सिस्टम को बनाए रखा, तब जजों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष बनी रहे। उन्होंने कहा, जजों ने संविधान को बिना डर और बिना पक्षपात के निभाने की शपथ ली है और उन्हें उस शपथ पर कायम रहना चाहिए।
शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी के फिजिकल थाना पुलिस ने शादी एवं महिलाओं से दोस्ती कराने के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी करने वाले दो अवैध मैट्रीमोनियल कॉल सेंटर पर पुलिस ने छापा मार कारवाई की है। कॉल सेंटर से जुड़े तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया बाकी 4 अन्य फरार हो गए।
टीआई नम्रता भदौरिया ने बताया कि उन्हें लम्बे समय से सूचना मिल रही थी की कुछ लोग यूनिक रिश्ते डॉट कॉम, एवं शादी मैचिंग डॉट कॉम नाम से ऑनलाइन साइड का उपयोग कर लोगों को शादी एवं लड़कियों से दोस्ती का झांसा देकर उनसे रुपये ऐंठ कर उनके साथ धोखा धड़ी कर रहे है। हालांकि पुलिस अभी इस मामले में आगे और जांच कर ओर अन्य जानकारी देने की बात कर रही है।
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कुएं से मिला मां और 3 महीने के मासूम का शव, इलाके में सनसनी
दमोह प्रदेश के दमोह जिले के तेंदूखेड़ा नगर के वार्ड क्रमांक-1 में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक सरकारी कुएं में महिला और उसके तीन माह के मासूम बच्चे का शव पानी में तैरात नजर आया। घटना की खबर लगते ही मौके पर लोगों की भारी भीड़ लग गई। मृतक महिला की पहचान जयंती केवट (पति दुर्गा केवट) तथा मासूम बच्चे की पहचान दीपांश केवट के रूप में की गई है।
बताया गया है कि जिस कुएं में दोनों के शव मिले हैं, वह कुआं ऐसा है, जिसका उपयोग नगर में पेयजल आपूर्ति के लिए किया जाता है। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी टी.आई. राघवेंद्र बागरी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए।
पुलिस ने कुएं से दोनों शवों को बाहर निकलवाकर पंचनामा कार्रवाई शुरू की। साथ ही मृतक महिला और बच्चे की मौत के कारणों को जानने के लिए परिजनों एवं आसपास के लोगों भी शुरू कर दी है।
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हमले का मामलाः माइनिंग माफिया के खिलाफ 3 करोड़ 24 लाख की पेनाल्टी
जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर में माइनिंग के अवैध परिवहन की चेकिंग के दौरान सरकारी अमले पर हमला मामले में माइनिंग माफिया के खिलाफ 3 करोड़ 24 लाख की पेनाल्टी लगाई है। माइनिंग विभाग और राजस्व की जांच में खुलासा हुआ।
दरअसल अवैध रूप से सरकारी जमीन पर गिट्टी और एम सैंड का स्टॉक किया गया था। अलॉट जमीन के अलावा अन्य जमीन पर भी माइनिंग की जा रही थी। घाघरा स्थित खसरा no 63 था अलॉट लेकिन खसरा no 64/1,64/2 और खसरा no 65 में माइनिंग हो रही थी। निर्माण कार्य में लगी ISC कंपनी को खसरा no 112 की जमीन पर माइनिंग की मंजूरी थी, लेकिन कंपनी खसरा no 110,113,111 और 117 पर भी खुदाई कर रही थी। खनिज और माइनिंग विभाग की संयुक्त जांच में यह खुलासा हुआ है।
मानेगांव क्षेत्र में 9 जनवरी को माइनिंग माफिया रोहित जैन ने घेराव किया था। सरकारी कर्मचारियों को हाइवा से कुचलने की कोशिश थी। फिल्मी स्टाइल में बीच सड़क पर कार अड़ाकर सरकारी अमला को रोका था। हाइवा के ड्राइवर से सरकारी कर्मचारियों को कुचलने की धमकी दी थी। रोहित जैन बीच सड़क पर सरकारी अमले को गाली गलौज कर रहा था। माइनिंग विभाग के लोग एम सैंड और गिट्टी से लोड हाइवा जब्त कर ले जा रहे थे।
भोपाल एमपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स एसटीएफ (STF) ने अवैध शस्त्रों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने कई अत्याधुनिक पिस्तौलें बरामद की हैं। हथियारों के साथ दो आरोपियों को भी पकड़ा है। STF के अधिकारियों के अनुसार प्रकरण में अवैध शस्त्रों की आपूर्ति, नेटवर्क तथा इनके संभावित उपयोग से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई चल रही है।
मध्यप्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को अवैध शस्त्रों के विरुद्ध कार्यवाही में बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। एसटीएफ इंदौर की दो विशेष टीमों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई कर 5 अत्याधुनिक पिस्तौलें मय मैगजीन जब्त की हैं। दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है।
STF इंदौर के उप पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चौहान के निर्देशन में दो विशेष टीमें गठित की गई थीं। इनमें प्रथम टीम में इंस्पेक्टर रमेश चौहान, प्रधान आरक्षक भूपेन्द्र गुप्ता एवं आरक्षक विवेक द्विवेदी शामिल थे जबकि दूसरी टीम में प्रधान आरक्षक आदर्श दीक्षित, आरक्षक देवराज बघेल एवं आरक्षक देवेन्द्र सिंह को सम्मिलित किया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि STF को प्राप्त विश्वसनीय सूचना के आधार पर अवैध शस्त्रों की धरपकड़ के लिए दोनों टीमों को कार्रवाई के लिए रवाना किया गया। सूचना के अनुसार बताए गए स्थान पर पहुंचकर टीमों द्वारा घेराबंदी कर दो संदिग्ध व्यक्तियों को रोका गया। विधिवत तलाशी के दौरान उनके कब्जे से 5 अत्याधुनिक पिस्तौलें एवं मैगजीन बरामद की गईं।
पुलिस ने दोनों आरोपियों से सख्ती से पूछताछ की। इस दौरान पता चला कि दोनों, जिला खरगोन के थाना भिकनगांव के ग्राम बोराड़िया के रहनेवाले हैं। दोनों आरोपी किसी भी प्रकार का वैध शस्त्र लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सके। इस पर सभी हथियारों को जब्त करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की गई।
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गौमांस मिलने का मामला: नगर निगम ने 8 कर्मचारियों को किया सस्पेंड, पुलिस ने फाइलें की जब्त
भोपाल। राजधानी भोपाल से बड़ी खबर सामने आई है, जहां नगर निगम के संचालित आधुनिक स्लॉटर हाउस में गौमांस मिलने की शिकायत के बाद पुलिस और प्रशासन की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार, भोपाल के जहांगीराबाद इलाके स्थित इस स्लॉटर हाउस से जुड़े कई कर्मचारियों पर लापरवाही और अवैध गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप लगे हैं। नगर निगम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्लॉटर हाउस में तैनात 8 कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है।
सस्पेंड किए गए कर्मचारियों में शामिल हैं
वसीम खान
सलीम खान
राजा खान
शेख यूसुफ
वहीद खान
मोहम्मद फैयाज खान
ईसा मोहम्मद
अब्दुल रहमान
इसके अलावा, यूसुफ खान, अब्दुल हकीम और मोहम्मद रफीक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। पुलिस ने इस मामले में नगर निगम से स्लॉटर हाउस से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। इनमें वर्ष 2014-15 से अब तक के सभी टेंडर, अनुमति पत्र और अन्य रिकॉर्ड शामिल हैं।
प्रभारी सहायक यंत्री सौरभ सूद सहित दो अन्य कर्मचारियों से लगातार पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां इस बात की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर इतने लंबे समय से यह अवैध गतिविधि कैसे चल रही थी।
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ई-चालान के नाम से आई एपीके फाइल, फिर बैंक अकाउंट से निकल गए 9.42 लाख रुपए
ग्वालियर। ई-चालान के नाम पर साइबर ठगी की घटनाएं लगातार हो रही हैं। अब मुरार के रहने वाले प्रापर्टी डील के साथ 9.42 लाख रुपए की ठगी हुई है। प्रापर्टी डीलर के वाट्स एप पर ई-चालान के नाम से एपीके फाइल आई। इसे उन्होंने पीडीएफ समझकर डाउनलोड कर लिया। इसके बाद उनका मोबाइल करीब आठ मिनट के लिए बंद हो गया। फिर मोबाइल चालू हो गया। शातिर हैकर ने मोबाइल का सारा एक्सेस ले लिया।
फिर मोबाइल हैक होने के 20 दिन बाद खाते से रुपए निकाल लिए। तीन बार में नौ लाख 42 हजार 182 रुपए की ठगी उनके साथ हुई है। इस मामले में उन्होंने साइबर हेल्पलाइन शिकायत की। जिसके बाद ई-जीरो एफआइआर दर्ज की गई है। मुरार थाने में एफआइआर दर्ज हुई है।
मुरार थाना क्षेत्र के अंतर्गत बड़ागांव क्षेत्र में रहने वाले विजय पुत्र लक्ष्मीनारायण यादव प्रापर्टी कारोबारी हैं। वह व्यापार में पैसों के लेनदेन के लिए पत्नी के बैंक खाते का इस्तेमाल करते हैं। पत्नी के बैंक खाते में मोबाइल नंबर विजय का ही लिंक है। 25 दिसंबर को ई-चालान नाम से एपीके फाइल आई। उन्होंने इसे डाउनलोड कर लिया। फिर 16 जनवरी को उनका मोबाइल दोबारा बंद हुआ और पांच मिनट में ही तीन बार में नौ लाख 42 हजार 182 रुपए निकल गए। फिर उन्होंने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत की।
पहली बार- 4.49 लाख रुपए
दूसरी बार- तीन लाख 45 हजार 522 रुपए
तीसरी बार- एक लाख 50 हजार 660 रुपए
ई-चालान की फाइल नहीं आती, सिर्फ एसएमएस आता है- सावनधान रहें
स्मार्ट सिटी के आइटीएमएस द्वारा जो ई-चालान किए जाते हैं, उनकी सूचना एसएमएस के माध्यम से भेजी जाती है। साथ ही वहां से फोन भी आता है। कभी भी एपीके फाइल नहीं भेजी जाती। इसलिए सावधान रहने की आवश्यकता है। यह तरीका अपनाकर ठग अब सबसे ज्यादा ठगी कर रहे हैं।
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