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विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा में कपल का चलती गाड़ी में रोमांस करते हुए एक वीडियो सामने आया है। युवक और युवती की अश्लीलता की चर्चा न सिर्फ शहर में बल्कि पूरे सोशल मीडिया में सुर्खियां बटोर रहा है। यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने वाले युवक पर पुलिस ने कार्रवाई भी कर ली है।
जांच में पता चला कि बाइक चालक करैया खेड़ा रोड निवासी निखिल अहिरवार है। वह सांची रोड पर बाइक चलाते समय अपने आगे गोद में एक युवती को बैठाकर फर्राटे भर रहा था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई। पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी के निर्देश पर कोतवाली थाना प्रभारी आनंद राज ने टीम गठित कर बाइक के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर चालक की पहचान कराई।
वीडियो में वह युवती को गोद में बैठाकर बाइक चला रहा था, जिससे न केवल यातायात नियमों का उल्लंघन हुआ बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी।
कोतवाली थाना प्रभारी आनंद राज ने बताया कि आरोपी की पहचान कर उसके खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि इस तरह की लापरवाही और स्टंटबाजी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।

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PM मोदी की आपत्तिजनक वॉल पेंटिंग पर विवाद! बीजेपी ने जताया विरोध, पुतवाकर पुलिस को दी सूचना, FIR दर्ज
इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के लैंटर्न चौराहा क्षेत्र में शनिवार सुबह एक विवादित पेंटिंग को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई। चौराहे के पास स्थित एक इमारत की दीवार पर देश के प्रधानमंत्री और देश के प्रमुख उद्योगपतियों से जुड़ी एक पेंटिंग बनाई गई थी, जिस पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और भाजपाइयों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचे एमआईसी सदस्य व क्षेत्रीय पार्षद नंदकिशोर पहाड़िया ने समर्थकों के साथ विरोध जताते हुए दीवार से उस चित्र को साफ करवाया।
जानकारी के मुताबिक शनिवार सुबह जब स्थानीय नागरिक वॉक के लिए निकले तो उनकी नज़र लैंटर्न चौराहा स्थित एक बिल्डिंग की दीवार पर बनी इस पेंटिंग पर पड़ी। नागरिकों ने इसे आपत्तिजनक मानते हुए तत्काल क्षेत्रीय एमआईसी सदस्य नंदकिशोर पहाड़िया को सूचित किया।
सूचना मिलते ही पार्षद पहाड़िया अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और पेंटिंग को मिटवाया। उन्होंने इस तरह के कृत्यों को शांति व्यवस्था और सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश करार दिया।
एमआईसी सदस्य नंदकिशोर पहाड़िया ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस प्रशासन को दी। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जाए और सार्वजनिक संपत्ति या दीवार पर इस तरह के विवादित चित्र बनाने वाले तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
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ये कैसी स्वास्थ्य व्यवस्था? सतना में मरीज को ई रिक्शा से लेकर वार्ड तक पहुंचाया, इधर सिंगरौली में बाइक पर मासूम का शव रखकर ले गए परिजन
सतना।जिला अस्पताल में आज एक इलेक्ट्रिक ऑटो के हड्डी वार्ड के सामने तक पहुंचने से कुछ देर के लिए हड़कंप मच गया। सुरक्षा गार्डों ने ऑटो चालक को पकड़कर पुलिस चौकी के हवाले कर दिया, लेकिन जब पूरी कहानी सामने आई तो यह मामला सुरक्षा चूक से ज्यादा अस्पताल की बदहाल व्यवस्था और एक ऑटो चालक की इंसानियत की मिसाल बनकर सामने आया।
ऑटो में सवार मरीज संतोष अग्रवाल ने बताया कि सड़क दुर्घटना में उनका पैर टूट गया है और उनका ऑपरेशन होना है। फिलहाल खून की कमी के कारण उन्हें वार्ड क्रमांक-4 में भर्ती किया जाना था। मरीज के मुताबिक वह अस्पताल में अकेले थे और मेन गेट पर उन्हें वार्ड तक ले जाने के लिए न तो स्ट्रेचर मिला और न ही कोई सहयोगी। ऐसे में उन्होंने ऑटो चालक से वार्ड तक छोड़ने की गुजारिश की। मरीज की परेशानी को देखते हुए चालक ने मानवता दिखाते हुए ऑटो सीधे वार्ड के गेट तक पहुंचा दिया। हालांकि अस्पताल के अंदर ऑटो पहुंचते ही सुरक्षा गार्ड सक्रिय हुए और चालक को पकड़कर पुलिस चौकी ले गए जहां उससे पूछताछ की गई।
यह घटना जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है। अगर प्रवेश द्वार पर मरीजों के लिए समय पर स्ट्रेचर और सहायक कर्मचारी उपलब्ध होते तो शायद ऑटो चालक को ऐसा कदम उठाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। गंभीर मरीज को तत्काल इलाज दिलाने की कोशिश में चालक ने नियमों का उल्लंघन जरूर किया लेकिन उसका उद्देश्य केवल मरीज की मदद करना था।
यह पहली बार नहीं है जब अस्पताल की अव्यवस्था के कारण किसी वाहन को वार्ड तक ले जाना पड़ा हो। इससे पहले 30 मई को भी स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होने पर एक युवक अपने मरीज को लेने बाइक से फर्स्ट फ्लोर स्थित वार्ड तक पहुंच गया था। उस समय मरीज को रीवा रेफर किया जाना था और तत्काल स्थिति को देखते हुए परिजन को केवल समझाइश देकर जाने दिया गया था।
दोनों घटनाएं यह बताती हैं कि समस्या केवल सुरक्षा व्यवस्था की नहीं, बल्कि मरीजों के लिए मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता की भी है। जब जरूरतमंद मरीज को समय पर स्ट्रेचर नहीं मिलता, तब परिजन और मददगार लोग मजबूरी में ऐसे कदम उठाते हैं। ऐसे में नियमों के पालन के साथ-साथ अस्पताल प्रबंधन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि किसी मरीज को इलाज तक पहुंचने के लिए इस तरह की मजबूरी का सामना न करना पड़े।
सिंगरौली। सिंगरौली के चितरंगी अस्पताल से इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। सर्पदंश से 8 वर्षीय मासूम की मौत के बाद अस्पताल में शव वाहन तक उपलब्ध नहीं था। मजबूर परिजन मासूम का शव मोटरसाइकिल पर रखकर घर ले गए। सवाल ये है कि क्या सरकारी अस्पतालों में मौत के बाद भी सम्मान नसीब नहीं होगा।
सिंगरौली जिले के चितरंगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियां एक बार फिर सामने आई हैं। ग्राम हरफरी निवासी बाबूलाल सिंह अपने 8 वर्षीय बेटे को शनिवार सुबह सर्पदंश के बाद इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद दोपहर करीब 2 बजे मासूम की मौत हो गई।
लेकिन असली दर्द तब शुरू हुआ, जब अस्पताल में शव वाहन उपलब्ध नहीं मिला। परिजन घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं हुई। आखिरकार मजबूरी में मासूम के शव को मोटरसाइकिल पर रखकर गांव ले जाना पड़ा। यह दृश्य देखकर अस्पताल में मौजूद लोग भी भावुक हो उठे और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने लगे।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शव वाहन जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव लंबे समय से बना हुआ है। उनका कहना है कि अगर समय पर शव वाहन उपलब्ध होता तो परिजनों को इस दर्दनाक और अपमानजनक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
अब इस घटना के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद क्या एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शव वाहन जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो सकती।

नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी मां नर्मदा से देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा जुड़ी हैं। मां नर्मदा देश की एकमात्र ऐसी नदी है जिनकी परिक्रमा करने का विधान है। इसी क्रम में भक्ति और संकल्प की एक ऐसी ही अद्भुत और विहंगम तस्वीर सामने आई है। दरअसल श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा हरिद्वार के एक साधक संत मां नर्मदा की 3,600 किलोमीटर की कठिन परिक्रमा पैदल नहीं बल्कि अपने हाथों के बल पर कर रहे हैं।
साधक संत ने मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से इस अति-दुर्लभ और कठिन परिक्रमा का संकल्प लिया था। निरंतर हाथों के बल चलने के कारण उनके हाथों में बड़े-बड़े निशान और छाले पड़ चुके हैं लेकिन मां नर्मदा के प्रति अटूट आस्था के आगे यह शारीरिक पीड़ा भी बौनी साबित हो रही है। हाल ही में जब इस अनोखी यात्रा का आगमन नरसिंहपुर जिले के करेली बस्ती में हुआ तो संत के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा।
संत की इस कठिन यात्रा में उनके साथ चल रहे साथी संतों ने बताया कि इस अत्यंत दुर्लभ परिक्रमा का एकमात्र उद्देश्य विश्व का कल्याण, सनातन संस्कृति का संवर्धन और मानव जाति की सुख-समृद्धि है। संत का मानना है कि मां नर्मदा की कृपा और शक्ति के बल पर ही यह असंभव सा दिखने वाला संकल्प पूरा हो रहा है।
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जेल से बाहर आना है तो 75 लाख दो, कटनी सीएसपी नेहा पर लगा हत्या के आरोपी से डील का आरोप
जेल से बाहर आना है तो 75 लाख दो, कटनी सीएसपी नेहा पर लगा हत्या के आरोपी से डील का आरोप
कटनी. एमपी के कटनी में पदस्थ सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर ट्रांसपोर्ट कारोबारी से कथित रिश्वत मांगने के बाद अब हत्या के एक आरोपी और उसके परिवार ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं. आरोप है कि आरोपी के परिवार पर जमीन बेचने का दबाव बनाया गया, दलाली कराई गई और जेल से छुड़ाने के नाम पर 75 लाख रुपए मांगे गए.
मामले की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग और अदालत तक पहुंच चुकी है. आईजी प्रमोद वर्मा ने ट्रांसपोर्टर से कथित वसूली और हत्या के आरोपी की शिकायत, दोनों की जांच जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल को सौंपी है. कटनी पुलिस ने 3 अप्रैल 2026 को आदिवासी युवक की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी आकाश लोधी को गिरफ्तार किया था. आकाश का आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद कुठला थाना प्रभारी राजेंद्र मिश्रा और सीएसपी नेहा पच्चीसिया ने उसके परिवार पर जमीन बेचने का दबाव बनाया. उसके मुताबिक, पिता रमेश लोधी को दो दिन सीएसपी के घर बैठाया गया.
15 अप्रैल को उन्हें सरकारी वाहन से ग्राम कन्हवारा स्थित खसरा नंबर 2618/1 (2.15 हेक्टेयर) की जमीन की रजिस्ट्री कराने ले जाया गया. करीब 82 लाख रुपए गाइडलाइन कीमत वाली जमीन का सौदा 1.07 करोड़ रुपए में कराया गया. आरोप है कि रजिस्ट्री के समय 15 लाख रुपए का चेक दिया गया और बाकी 92 लाख रुपए सात दिन में देने का आश्वासन दिया गया. आकाश लोधी का आरोप है कि जमीन का पैसा नहीं मिलने पर उसके पिता रमेश लोधी ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत की और नामांतरण पर आपत्ति दर्ज कराई.
इसके बाद रमेश लोधी और उनके दामाद सतीश लोधी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. आरोप है कि आपत्ति के बावजूद जमीन का नामांतरण मारूफ अहमद हनफी के नाम कर दिया गया. आकाश का दावा है कि इसके बाद मृतक पक्ष और सीएसपी ने 75 लाख रुपए मांगे. उससे कहा गया कि अगर जेल से बाहर आना है तो 75 लाख रुपए दे दो, कोर्ट में बयान बदल दिए जाएंगे और सभी आरोपी जेल से बाहर आ जाएंगे. हत्या के मामले में गिरफ्तारी के तीन महीने बाद 7 जुलाई को डिफॉल्ट जमानत पर बाहर आने के बाद आकाश ने ये आरोप लगाए.
सीएसपी नेहा पच्चीसिया के खिलाफ शिकायतों की शुरुआत ट्रांसपोर्ट व्यवसायी महेंद्र कुमार जैन की शिकायत से हुई थी. महेंद्र जैन का आरोप है कि 21 जुलाई की रात वाहन चेकिंग के दौरान रेत और डोलोमाइट का वैध परिवहन कर रहे उनके हाईवा वाहनों को रोककर 30 हजार रुपए मांगे गए. आरोप के मुताबिक, मौके पर 25 हजार रुपए नकद लिए गए, जबकि बाकी 5 हजार रुपए अगले दिन ष्टस्क्क के ड्राइवर के जरिए मंगवाए गए. हालांकि बाद में शिकायतकर्ता अपने बयान से पीछे हट गए और शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने की बात कही.
कटनी एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ष्टस्क्क के ड्राइवर कॉन्स्टेबल केशव सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. साथ ही नेहा पच्चीसिया के अधिकार क्षेत्र से कुठला, माधवनगर और रंगनाथ नगर थानों का प्रभार हटाकर अजाक डीएसपी शिवा पाठक को सौंप दिया गया. शिकायतकर्ता महेंद्र कुमार जैन का कहना है कि उनकी सभी गाडिय़ां वैध परिवहन में लगी थीं. चेकिंग के नाम पर जबरन वसूली की गई. साक्ष्यों के साथ एसपी से न्याय मांगा, लेकिन शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई.
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पुलिस की बड़ी कार्रवाई, यात्री बस से 65 किलो डोडाचूरा जब्त, 7 तस्कर गिरफ्तार
मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर प्रदेशभर में मादक पदार्थों और नशे के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत रविवार को नीमच जिले की नयागांव पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान एक यात्री बस से 65 किलोग्राम अवैध डोडाचूरा बरामद कर 7 तस्करों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए सभी आरोपी राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के निवासी हैं।
सूत्रों के मुताबिक नयागांव पुलिस चौकी प्रभारी राजेन्द्रसिंह सिसौदिया को 1 अगस्त 2026 की रात मुखबिर से अवैध मादक पदार्थ की तस्करी की गुप्त सूचना मिली थी। इसी सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने नीमच-निम्बाहेड़ा हाईवे फोरलेन टोल के पास सघन नाकाबंदी की।
वाहन की चेकिंग के दौरान नीमच से राजस्थान की ओर जा रही सांगवान ट्रेवल्स की बस (क्र. एमपी-44-जेडएफ-4005) को रोका गया है। जब तलाशी ली गई, तो बस में सफर कर रहे 7 संदिग्धों के पास 6 अलग-अलग बैग बरामद हुए। इन बैगों की जांच करने पर उनमें कुल 65 किलोग्राम अवैध डोडाचूरा पाया गया। पुलिस मौके से ही मादक पदार्थ जब्त कर लिया और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 8/15 एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जांच भी शुरू हो चुकी है। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह मादक पदार्थ कहां से लाया गया था और इसकी डिलीवरी किसे दी जानी थी। इस कार्रवाई नीमच के पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमलता अग्रवाल, एसडीओपी (जावद) हर्ष राठौर, जावद थाना प्रभारी निरीक्षक मनोजसिंह जादौन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों का नाम रणजीतसिंह पिता रेशमसिंह रायसिख (35 वर्ष) निवासी ग्राम गाडू, हनुमानगढ़, अजयकुमार पिता बलवन्तसिंह रायसिंह (24 वर्ष) निवासी ग्राम गाडू, अमरजीत पिता दिलीपसिंह रायसिख (51 वर्ष) निवासी सूरेवाला, रविन्द्रसिंह पिता मेजरसिंह रायसिख (39 वर्ष) निवासी ग्राम फतेहपुर, मंगतसिंह पिता महेन्द्रसिंह रायसिख (36 वर्ष) निवासी ग्राम सूरेवाला, जसविन्द्रसिंह पिता किशोरसिंह रायसिख (25 वर्ष) निवासी ग्राम सूरेवाला, रणजीत सिंह पिता कुलवंतसिंह रायसिख (23 वर्ष) निवासी ग्राम सूरेवाला बताया जा रहा है।

देश में पिछले कुछ समय से मंदिरों में में हुए चढ़ावा चोरी का मामला सुर्खियों में बना हुआ है, जिससे तमाम तरह के सवाल खड़े रहो रहे हैं. इन मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में भी जुबानी जंग भी जारी है. अब इसी कड़ी में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज ठाकरे ने एक बड़ा दावा करके महाराष्ट्र का सियासी पारा बढ़ा दिया है.
राज ठाकरे ने मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर से हर साल 18 करोड़ रुपये के दान की चोरी का आरोप लगाया है. राज ठाकरे के आरोपों पर बीजेपी व‍िधायक ने कहा क‍ि गणेश मंदिर के बारे में ऐसे आरोप लगाना ठीक नहीं है.
राज ठाकरे ने शनिवार (1 अगस्त) को मुंबई में अपनी पार्टी की छात्र इकाई की 20वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में सिद्धिविनायक मंदिर की दान पेटी से कथित तौर पर 18 करोड़ रुपए की चोरी का मुद्दा उठाया. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने दावा किया है कि मुंबई के मशहूर सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल 18 करोड़ रुपये का चंदा हड़प लिया जाता है.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अयोध्या के राम मंदिर में 1,400 करोड़ रुपए की चोरी हुई है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार के सभी नेता चुप हैं. ठाकरे ने कहा कि आजकल मंदिर भी सुरक्षित नहीं हैं और उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर बात करें.
उन्होंने दावा किया कि सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के आठ ट्रस्टियों ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग की है. एमएनएस प्रमुख ने कहा कि पत्र में दावा किया गया है कि मंदिर के कर्मचारी चोरी में शामिल थे. उन्होंने कहा कि सिद्धिविनायक मंदिर के ट्रस्टियों ने उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मंदिर के चंदे की लूट की जांच की मांग की है.
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पप्पू यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा, चप्पल फेंकने के बाद हमले का आरोप, सांसद बोले मुझे मारने की साजिश थी
नई दिल्ली। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस उस समय अफरातफरी में बदल गई, जब एक युवक ने प्रेस वार्ता के दौरान उन पर चप्पल फेंक दी। देखते ही देखते वहां मौजूद लोगों के बीच तीखी बहस, धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू हो गई। घटना के बाद पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि यह केवल विरोध नहीं, बल्कि उनकी हत्या की साजिश थी। उन्होंने दावा किया कि हमलावर चाकू या किसी नुकीले हथियार के साथ आया था और उनकी जान लेने की कोशिश की गई। पुलिस ने मौके से आरोपी युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
घटनाक्रम इस प्रकार सामने आया—
पप्पू यादव ने हाल के राजनीतिक घटनाक्रम और संसद परिसर में हुए विरोध-प्रदर्शन को लेकर अपना पक्ष रखने के लिए दिल्ली स्थित आवास पर मीडिया से बातचीत का आयोजन किया था। बड़ी संख्या में पत्रकार और समर्थक वहां मौजूद थे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मौजूद एक युवक ने संसद परिसर में हुए विरोध-प्रदर्शन, पप्पू यादव के भगवा वस्त्र धारण करने और सांसद अवधेश प्रसाद से जुड़े एक विवादित घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। इस दौरान माहौल धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बहस के बीच युवक ने अचानक पप्पू यादव की ओर चप्पल फेंक दी। इसके बाद वहां मौजूद समर्थक सक्रिय हो गए और युवक को पकड़ने का प्रयास किया। कुछ ही क्षणों में प्रेस कॉन्फ्रेंस स्थल पर धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू हो गई।
घटना के बाद मीडिया से बातचीत में पप्पू यादव ने दावा किया कि हमलावर का उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं था, बल्कि वह उनकी हत्या करने की नीयत से आया था। उन्होंने आरोप लगाया कि युवक के पास चाकू था और उसने उनकी छाती पर वार करने की कोशिश की। सांसद ने कहा कि यदि उनके समर्थक बीच में नहीं आते तो गंभीर अनहोनी हो सकती थी।
पप्पू यादव ने कहा कि हमले के दौरान उन्होंने खुद को बचाने के लिए नीचे झुककर या लेटकर बचाव किया। उनका दावा है कि हमलावर खुलेआम उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहा था और बाहर निकलने पर हत्या करने की बात भी कह रहा था।
मौके पर मौजूद एक समर्थक ने दावा किया कि उसने हमलावर को रोकने की कोशिश की, जिसके दौरान उसके हाथ में चोट आई। समर्थक का कहना था कि युवक के पास कोई कठोर लोहे की वस्तु या धारदार हथियार था, जिससे उसने वार करने का प्रयास किया।
घटना के बाद पप्पू यादव ने दिल्ली पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्रालय पर सुरक्षा में लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि एक सांसद के आवास पर इस प्रकार की घटना हो सकती है, तो यह सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग की।
हंगामे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। पुलिस घटना के दौरान मौजूद लोगों के बयान दर्ज कर रही है और उपलब्ध वीडियो फुटेज की भी जांच की जा रही है। अभी तक पुलिस की ओर से हमले में चाकू के इस्तेमाल अथवा बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। एक ओर पप्पू यादव और उनके समर्थक इसे सुनियोजित जानलेवा हमला बता रहे हैं, वहीं पुलिस घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना केवल हंगामे तक सीमित थी या इसके पीछे किसी बड़ी साजिश के संकेत मौजूद हैं।
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केरल में बारिश का कहर, आठ की मौत, आठ लापता हजारों लोग राहत शिविरों में पहुंचे
तिरुवनंतपुरम. केरल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. राज्य के कई जिलों में बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की घटनाओं के बीच स्थिति गंभीर बनी हुई है. मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने रविवार को बताया कि पिछले 24 घंटों में भारी बारिश से जुड़ी घटनाओं में आठ लोगों की मौत हो चुकी है, 13 लोग घायल हुए हैं और आठ अन्य अब भी लापता हैं. राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है, जबकि हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी रखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है.
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार राज्य में बारिश से अब तक 27 मकान पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं, जबकि 196 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है. प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के लिए विभिन्न जिलों में 209 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां 5,792 लोगों को अस्थायी रूप से ठहराया गया है. प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जिला प्रशासन को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने राज्य के 12 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. पथानामथिट्टा, अलाप्पुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, इडुक्की, त्रिशूर, पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में अगले कुछ घंटों तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है. विभाग ने फ्लैश फ्लड, भूस्खलन, सड़क धंसने और निचले इलाकों में जलभराव को लेकर भी चेतावनी जारी की है.
सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल इडुक्की में शनिवार सुबह पीरूमेड और थोडुपुझा तालुकों में 200 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई. लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ. जिला प्रशासन ने बताया कि एहतियात के तौर पर 187 लोगों को 13 राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया है. संवेदनशील इलाकों में राहत दल तैनात हैं और सड़क संपर्क बहाल करने का काम जारी है.
कासरगोड जिले में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने अगले दो दिनों के लिए हाई अलर्ट जारी रखा है. जिला कलेक्टर अर्जुन पांडियन ने सभी विभागों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं. जिले में फिलहाल पांच राहत शिविरों में 208 लोग रह रहे हैं. प्रशासन लगातार नदी जलस्तर और वर्षा की निगरानी कर रहा है.
बारिश के बीच मछुआरों की सुरक्षा भी बड़ी चिंता बन गई है. मौसम विभाग द्वारा समुद्र में जाने पर रोक लगाने के बावजूद कई मछुआरे आजीविका के दबाव में समुद्र का रुख कर रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में अलग-अलग तटीय क्षेत्रों से दो मछुआरों की मौत और पांच के लापता होने की घटनाएं सामने आई हैं. अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक मजबूरी के कारण कई मछुआरे चेतावनियों की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे उनकी जान खतरे में पड़ रही है.
इस बीच एर्नाकुलम जिले के लोगों को रविवार को कुछ राहत मिली. शनिवार को लगातार बारिश और जलभराव से प्रभावित रहे कई इलाकों में पानी का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगा है. कोथामंगलम और मुवट्टुपुझा जैसे क्षेत्रों में मौसम साफ होने के साथ सामान्य जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौटता दिखाई दिया. हालांकि प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है.
अलाप्पुझा जिले में भी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार पंपा और मणिमला नदियों में बढ़ते जलस्तर के बीच थोट्टापल्ली स्पिलवे के गेट समय पर खोल दिए जाने से कुट्टनाड और अंबालाप्पुझा क्षेत्रों में संभावित बड़े बाढ़ संकट को टालने में मदद मिली. सिंचाई विभाग लगातार नदी के बहाव और जलस्तर की निगरानी कर रहा है.
राज्य में बारिश के दौरान राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया है कि आपदा की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त रहे. हालांकि सरकार का कहना है कि राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार समीक्षा की जा रही है और सभी जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं.
मुल्लापेरियार बांध सहित कई जलाशयों में जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है. विशेष रूप से घाट क्षेत्रों में रात के समय यात्रा से बचने की सलाह जारी की गई है. आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है.
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी रहेगा और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. एनडीआरएफ, राज्य आपदा मोचन बल, पुलिस, अग्निशमन विभाग और स्थानीय स्वयंसेवी संगठन मिलकर बचाव कार्यों में जुटे हैं. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की है, ऐसे में प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती संभावित बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की नई घटनाओं से समय रहते लोगों को सुरक्षित निकालना और जनहानि को न्यूनतम रखना है.

 

उज्जैन। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन एक बार फिर शर्मसार हुई है। यहां एक महामंडलेश्वर द्वारा शादी का झांसा देकर महिला के साथ दुष्कर्म किया गया है। महिला के आवेदन पर थाना महाकाल पुलिस ने जांच उपरांत आरोपी महामंडलेश्वर के खिलाफ दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी का मामला दर्ज किया है। हालांकि आरोपी अभी फरार है।
दरअसल पूरा मामला उज्जैन के सदावल मार्ग पर स्थित दादू राम आश्रम का है। आश्रम के संचालक निर्मोही अणि अखाड़े के महामंडलेश्वर ज्ञान दास महाराज पर दुष्कर्म के आरोप लगे हैं। एडिशनल एसपी आलोक शर्मा ने बताया कि फरियादी महिला सांस्कृतिक ग्रुप से जुड़ी हुई है। सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान ही महाराज से संपर्क हुआ। महाराज ने महिला को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी व व्हाट्सएप पर चैटिंग की। महिला का दादूराम आश्रम में लगभग एक वर्ष तक आना जाना लगा रहा।
बीएनएस की धारा 351(3) व 69 में केस दर्ज
इस दौरान महामंडलेश्वर ने महिला को शादी का झांसा दिया और लगातार दुष्कर्म करता रहा। जब शादी करने से इनकार किया तो महिला ने थाना महाकाल पुलिस में आवेदन दिया और घटना से संबंधित साक्ष्य दिए। जिसमें ऑडियो रिकॉर्डिंग व वाट्सएप चैटिंग थी। मामले में पुलिस ने आरंभिक जांच के बाद महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज के खिलाफ बीएनएस की धारा 351(3) व 69 में केस दर्ज कर लिया है । मामला दर्ज होने के बाद आरोपी फरार है।

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बड़ी मुश्किल है मौत की डगर : मुक्तिधाम पहुंचने से पहले दलदली सड़क से होता है सामना
कटनी । मध्य प्रदेश के कटनी जिले की ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत में लोगों को मौत के बाद भी सुकून नहीं नसीब हो रहा है। अंतिम संस्कार के लिए चिता लेकर जा रहे ग्रामीणों को दलदल भरी सड़क से होकर गुजरना पड़ता है। ग्राम पंचायत बरहटा के आश्रित ग्राम पड़रिया में शुक्रवार रात दो बुजुर्गों की मौत हो गई। 80 वर्षीय मलकिया बाई बर्मन और 82 वर्षीय अर्जुन कोल की मौत के बाद सुबह अंतिम संस्कार के लिए रिश्तेदार और ग्रामीण शामिल हुए।
मुक्तिधाम पहुंचने के लिए पक्की सड़क न होने के कारण दलदल भरी सड़क से कंधे में अर्थी लिए सभी को परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने बताया कि बीते कई सालों से शासन प्रशासन से गांव में पक्की सड़क निर्माण की मांग की जा रही है। पक्की सड़क तो छोड़िए, सड़कों के गड्ढों में भी सुधार नहीं हो पाया।
ग्रामीणों ने कलेक्टर आशीष तिवारी से जल्द से जल्द समस्या निराकरण करने की मांग की है। इस संबंध में ग्राम पंचायत सचिव सैयद अहमद अली से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि कुंसरी गांव से पड़रिया गांव तक की सड़क कच्ची है। मुक्तिधाम पहुंचने के लिए भी कच्ची सड़क से ही ग्रामीणों को जाना करना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क परियोजना के द्वारा सड़क निर्माण का सर्वे किया गया है और आश्वासन दिया गया था कि जल्द से जल्द निर्माण कार्य कराया जाएगा लेकिन निर्माण कार्य नहीं हो पाया।
इस संबंध में जनपद सीईओ यजुर्वेद कोरी से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क परियोजना के तहत सड़क निर्माण के संबंध में सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। विभाग से जानकारी ली जाएगी कि अभी तक निर्माण क्यों चालू नहीं किया गया और बारिश के मौसम में व्यवस्था बनाने को लेकर भी पत्र व्यवहार किए जाएंगे।
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‘सुरक्षा की गारंटी दो, आज ही आश्रम आ जाऊंगी’, आलोचनाओं पर साध्वी हर्षानंद का जवाब, बोलीं- हर बात पर आपत्ति करना संतों का धर्म नहीं
उज्जैन। गुरु पूर्णिमा पर उज्जैन में दिए गए अपने बयान को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच साध्वी हर्षानंद गिरि (हर्षा रिछारिया) ने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा है । उन्होंने कहा कि संन्यास लेने के बाद माता-पिता के साथ रहने पर कुछ संत सवाल उठा रहे हैं, लेकिन जब तक उनका अपना आश्रम नहीं बन जाता, तब तक उनके पास रहने के लिए दो ही स्थान हैं – गुरु का आश्रम और माता-पिता का घर।
वीडियो में साध्वी हर्षानंद ने कहा कि वह माता-पिता के घर इसलिए रहती हैं क्योंकि वहां खुद को सबसे अधिक सुरक्षित महसूस करती हैं । उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा की स्थिति किसी से छिपी नहीं है । ऐसे में यदि कोई संत सार्वजनिक रूप से यह जिम्मेदारी ले कि उनके रहते उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा, तो वह अपना सामान लेकर उसी आश्रम में रहने चली जाएंगी ।
उन्होंने कहा कि जिस दिन उनका अपना आश्रम बन जाएगा, उस दिन वह पूरी तरह आश्रम में रहकर संन्यासी जीवन का पालन करेंगी । फिलहाल स्थायी आश्रम नहीं होने के कारण माता-पिता के साथ रहना ही उनके लिए सबसे उचित और सुरक्षित विकल्प है।
वीडियो में उन्होंने कुछ संतों पर नाराजगी भी जताई । उन्होंने कहा कि उनकी हर बात पर आपत्ति जताई जाती है, जबकि संतों का स्वभाव प्रेम, धैर्य और सहनशीलता का होना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि यदि उनके रहने, पहनने, खाने या मिलने-जुलने से कुछ लोगों को हर बार परेशानी होती है, तो यह संतों के आचरण के अनुरूप नहीं है ।
गौरतलब है कि गुरु पूर्णिमा पर उज्जैन में मीडिया से बातचीत के दौरान साध्वी हर्षानंद ने महिलाओं की सुरक्षा और आश्रमों में रहने को लेकर बयान दिया था, जिसके बाद उनके बयान पर चर्चा शुरू हो गई थी। अब उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपने बयान का विस्तृत स्पष्टीकरण दिया है।

पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के टिकुरिया मोहल्ला स्थित एक मदरसे में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोप है कि मदरसे के मौलाना ने पहले छात्रा को कमरे में बंद किया और फिर उसके साथ गलत हरकत करने का प्रयास किया।
इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि मौलाना ने अपनी करतूत छिपाने के लिए मदरसे में लगे सीसीटीवी कैमरों की वायर भी काट दी, ताकि घटना रिकॉर्ड न हो सके। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मौलाना, जो सागर जिले का निवासी बताया जा रहा है, उसको गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने पॉक्सो (POCSO) एक्ट सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
एडिशनल एसपी वंदना सिंह चौहान ने बताया कि पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस जांच उपरांत ही मामला स्पष्ठ हो पायेगा।
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‘शिक्षा मंत्री’ के कार्यक्रम में स्वागत गेट पर उल्टा छपा राष्ट्रध्वज, तिरंगे के ऊपर लगाया भाजपा का झंडा
नर्मदापुरम। 15 अगस्त आने में चंद दिन बचे हैं। उस दिन सभी तिरंगा फहराकर अपने राष्ट्र के प्रति गौरव महसूस करेगा। लेकिन उससे पहले मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में शिक्षा मंत्री के स्वागत में जनप्रतिनिधि और कर्मचारी इतने मशगूल हुए कि उन्हें राष्ट्रध्वज की मर्यादा का जरा भी एहसास नहीं रहा। मंत्री के कार्यक्रम के दौरान बनाए स्वागत गेट पर न सिर्फ राष्ट्रध्वज उल्टा छाप दिया बल्कि तिरंगे के ऊपर भाजपा का झंडा लगा दिया। इस मामले के उजागर होने के बाद कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगने शुरू हो गए हैं।
दरअसल, पूरी घटना बनखेड़ी के निभोरा पंचायत क्षेत्र की है जहां पुलिया उद्घाटन के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर परिवहन और शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान जो स्वागत गेट बनाया गया था उसमें एक तरफ का तिरंगा उल्टा छाप दिया गया था। इतना ही नहीं, तिरंगे के ऊपर बीजेपी का झंडा भी लहराने लगा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर होने लगा और इसकी चर्चा हर तरफ होने लगी। टीवीऔर वीडियो डिवाइस
सवाल उठने लगे कि क्या पार्टी देश से बड़ी हो गई ? ​पुल का लोकार्पण तो हुआ, लेकिन स्वागत द्वार पर देश के आन-बान-शान की मर्यादा को ताक पर रखा गया। ​परिवहन और शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के कार्यक्रम में इतनी बड़ी चूक होने के बाद क्या निभौरा पंचायत और ठेकेदार पर एफआईआर होगी? ​ग्रामीणों को पुल की सौगात तो मिली लेकिन राष्ट्रध्वज के अपमान ने खुशियों पर लापरवाही का दाग लगा दिया।
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53 करोड़ का कलश और धर्म पर सवाल! ‘आयोजन सेवा के लिए हो, रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं’- आचार्य सुनील सागर महाराज
इंदौर। 16 करोड़…से लेकर 53 करोड़… और अब सवाल करोड़ों की उस बोली पर, जिसने बहस छेड़ दी है। आखिर क्या धर्म में करोड़ों की बोलियां लगाने की परंपरा है? क्या मंगल कलश जैन धर्म का अनिवार्य हिस्सा है? और धर्म के नाम पर आने वाले करोड़ों रुपये कहां खर्च होते हैं? इन सवालों पर पहली बार जैन समाज के वरिष्ठ धर्मगुरु आचार्य सुनील सागर महाराज ने खुलकर बातचीत की। आचार्य सुनील सागर महाराज ने साफ कहा कि जैन धर्म के मूल सिद्धांतों में कहीं भी मंगल कलश स्थापना का उल्लेख नहीं मिलता। यह परंपरा धर्म की नहीं बल्कि समय के साथ बड़े धार्मिक आयोजनों की व्यवस्था के लिए शुरू हुई।
सूत्रों के अनुसार चतुर्मास आयोजन में कलश स्थापना के लिए एक के बाद एक बोलियां लगती गईं। सबसे बड़ी बोली सपना मनीष गोधा और नवीन आनंद गोधा की ओर से 16 करोड़ 16 लाख रुपये की रही। इसके अलावा अन्य कलशों के लिए भी 5 करोड़, 3 करोड़ 55 लाख, 3 करोड़ 33 लाख और 2 करोड़ से अधिक की बोलियां लगीं। कुल मिलाकर यह आंकड़ा लगभग 53 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
आचार्य सुनील सागर महाराज ने बताया कि करीब 50 से 70 वर्ष पहले जब बड़े-बड़े धार्मिक आयोजन होने लगे, तब उनके खर्च की व्यवस्था के लिए समाज ने मंगल कलश की परंपरा शुरू की। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार राशि देते थे ताकि भोजन, प्रवचन, साधु-संतों की व्यवस्था और अन्य धार्मिक कार्य सुचारु रूप से चल सकें।
उन्होंने कहा कि शुरुआत में यह श्रद्धा और सहयोग का प्रतीक था लेकिन धीरे-धीरे इसकी बोली लगने लगी और अब यह करोड़ों तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि धर्म में कहीं नहीं लिखा कि मंगल कलश रखना अनिवार्य है। यह समय के साथ शुरू हुई व्यवस्था है, धर्म का मूल सिद्धांत नहीं।
आचार्य ने कहा कि पहले लाखों रुपये तक की राशि से धार्मिक आयोजन आराम से संपन्न हो जाते थे लेकिन अब करोड़ों की बोलियां लग रही हैं। उन्होंने माना कि आज इसका स्वरूप इतना बड़ा हो गया है कि इसे संभालना भी आसान नहीं रह गया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी राशि देखकर स्वाभाविक रूप से लोगों के मन में सवाल उठते हैं कि आखिर इतना पैसा कहां से आता है और उसका उपयोग किस तरह होता है।
आचार्य सुनील सागर महाराज ने धार्मिक संस्थाओं में आर्थिक पारदर्शिता की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु विश्वास और आस्था के साथ दान देते हैं, इसलिए यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उस धन का उपयोग किन कार्यों में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर करोड़ों रुपये किसी धार्मिक आयोजन में आ रहे हैं तो उसके उद्देश्य और उपयोग की जानकारी समाज के सामने भी होनी चाहिए। धर्म के नाम पर लोग पैसा देते हैं तो उसका सदुपयोग होना चाहिए। ऐसे मामलों में निगरानी भी जरूरी है और उद्देश्य भी स्पष्ट होना चाहिए।
आचार्य सुनील सागर महाराज ने कहा कि धार्मिक आयोजनों में सेवा और साधना से ज्यादा अब दिखावे की चर्चा होने लगी है। उनका कहना था कि धर्म का केंद्र त्याग, तप, संयम और आत्मकल्याण होना चाहिए, न कि करोड़ों की बोलियां और रिकॉर्ड। उन्होंने कहा कि अगर धार्मिक आयोजन समाज, शिक्षा, गौशालाओं, गरीबों के भोजन, चिकित्सा और जनकल्याण के लिए काम करें तो उसका वास्तविक लाभ समाज को मिलेगा।
आचार्य ने कहा कि यदि करोड़ों रुपये का उपयोग मेडिकल कॉलेज, शिक्षा, अस्पताल, गौशालाओं या अन्य सामाजिक कार्यों में हो रहा है तो यह अच्छी बात है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें संबंधित आयोजन की पूरी जानकारी नहीं है इसलिए वे उसके उपयोग पर अंतिम टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने केवल इतना कहा कि समाज को यह भरोसा मिलना चाहिए कि धर्म के नाम पर आया पैसा समाज के हित में खर्च हो रहा है
आचार्य सुनील सागर महाराज ने कहा कि जब किसी धार्मिक आयोजन में करोड़ों रुपये की चर्चा होती है तो लोगों का सवाल पूछना भी स्वाभाविक है। इसलिए धार्मिक संस्थाओं को खुद आगे आकर पारदर्शिता दिखानी चाहिए ताकि किसी तरह का भ्रम या विवाद पैदा न हो।
बातचीत के अंत में आचार्य ने कहा कि धर्म का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा, प्रतिष्ठा या रिकॉर्ड बनाना नहीं है। धर्म का उद्देश्य समाज को जोड़ना, सेवा करना और आत्मशुद्धि का मार्ग दिखाना है। यदि धार्मिक परंपराएं इन मूल्यों को मजबूत करती हैं तो उनका स्वागत होना चाहिए लेकिन यदि चर्चा केवल करोड़ों की बोलियों तक सीमित रह जाए तो धर्म का मूल संदेश पीछे छूट सकता है। 53 करोड़ के मंगल कलश को लेकर उठे सवालों के बीच जैन धर्मगुरु का यह बयान अब एक नई बहस को जन्म दे रहा है। सवाल सिर्फ रिकॉर्ड बोली का नहीं, बल्कि उस आस्था, पारदर्शिता और धर्म के वास्तविक स्वरूप का है, जिस पर करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास टिका हुआ है।

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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