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उज्जैन। उज्जैन के बड़नगर थाना पुलिस द्वारा मोहर्रम जुलूस के दौरान सार्वजनिक शांति एवं सुरक्षा को खतरे में डालने के मामले में अपराध क्रमांक 382/2026, धारा 110, 125(ए), 287, 288, 223(बी), 285, 3(5) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
23-24 जून की दरमियानी रात मोहर्रम जुलूस के दौरान जय स्तंभ चौक बड़नगर पर आरोपियों द्वारा भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में एक वाहन (क्रेन की सहायता से) हवा में लटकाकर उसमें फटाके रखकर विस्फोट किया गया। फटाकों के कारण वाहन के कांच एवं अन्य वस्तुएं आसपास गिरीं, जिससे आमजन की जान को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ। घटना के समय क्षेत्र में भारी भीड़ मौजूद थी।
पुलिस द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन आरोपी शोएब पिता गब्बू, जाहिद पिता भूरा खा, तपसील उर्फ तस्लीम उर्फ तस्लीम पिता नेहरू खा निवासी अडान मोहल्ला को हिरासत में लिया गया है अन्य आरोपियों की तलाश जारी है । बड़नगर पुलिस ने आरोपियों को सबक सिखाने और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आरोपियों का जुलुस निकाला।

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बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता 2000 की रिश्वत लेते ट्रैप: मीटर रीडर भी गिरफ्तार, लोकायुक्त ने की कार्रवाई
दमोह। दमोह के हटा में बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता राजेश सहाय को गुरुवार दोपहर 2000 रुपए की रिश्वत लेते सागर लोकायुक्त की टीम ने उन्हें कार्यालय में ही रंगे हाथों पकड़ा है। आरओ वाटर प्लांट संचालक से मीटर लोड बढ़ाने की एवज में यह रिश्वत मांगी गई थी, लेकिन फरियादी ने सागर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत कर दी। इस मामले में मीटर रीडर पर भी मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया।
फरियादी इंद्रकुमार पटेल उपकाशी मिनरल वाटर आरो प्लांट के संचालक है। इन्ही के वाटर प्लांट में लगे मीटर का लोड बढ़ाने के एवज में राजेश सहाय के द्वारा 7 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की गई थी। जिसकी पहली किश्त 2000 में तय हुई थी। फरियादी ने मामले की शिकायत सागर लोकायुक्त में की थी। टीम ने हटा पंहुचकर इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे लोकायुक्त इंस्पेक्टर रंजीत सिंह ने बताया कि आवेदक के वाटर प्लांट का निरीक्षण सहायक अभियंता राजेश सहाय के द्वारा किया गया था। प्लांट पर लगे मीटर का लोड कम पाया गया था। उस पर कार्रवाई न करने के एवज में सहायक अभियंता राजेश कुमार सहाय के द्वारा 7 हजार रुपए रिश्वत की मांग की जा रही थी। रिश्वत न देने पर आवेदक के विरुद्ध कार्रवाई करने की धमकी दी जा रही थी।
इंद्र कुमार पटेल ने सागर लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत का सत्यापन कराने के बाद गुरुवार को ट्रैप की कार्रवाई तय की गई। टीम गठित कर 2 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए सहायक अभियंता राजेश कुमार सहाय को गिरफ्तार किया गया है। इसमें एक ऑउट सोर्स कर्मचारी संदीप पटेरिया जो मीटर रीडर का कार्य करता है। इनकी भूमिका भी पाई गई है। जिसके संबंध में कार्रवाई की जा रही है। वही आवेदक इंद्र कुमार पटेल ने बताया उन्होंने मीटर लोड बढ़ाने की कार्रवाई भी करा ली थी इसके बाबजूद भी कनिष्ठ अभियंता राजेश सहाय के द्वारा धमकाया जा रहा था। रिश्वत की मांग की जा रही थी। पैसे न देने पर एक लाख रुपए का केस बनाकर कार्रवाई करने की धमकी दी जा रही थी।
पीड़ित 6 हजार रुपए पहले भी राजेश सहाय को दे चुका है उसके बाद 7 हजार रुपए की मांग की जा रही थी। जिसकी शिकायत उसने ने लोकायुक्त सागर से की रिकॉर्डिंग के आधार पर सागर लोकायुक्त टीम ने विधुत कार्यालय पहुचकर 2 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। सागर लोकायुक्त टीम में रोशनी जैन इंस्पेक्टर, प्रधान आरक्षक सफीक खान, आदेश तिवारी, प्रदीप दुबे, गोल्डी पासी, नीलेश चौबे, अरविंद नायक की अहम भूमिका रही।
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गे डेटिंग एप पर ‘सेक्स चैटिंग’… 50 पुरुषों से संबंध: भोपाल मर्डर मिस्ट्री में बड़ा खुलासा, HIV पॉजिटिव निकला आरोपी
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ब्लाइंड मर्डर केस में हुए खुलासे से कई मर्द दहल उठे। पुलिस की जांच में आरोपी अजय मायना से बातचीत के बाद पुलिस भी हैरान हो गई। जांच में पता चला है कि आरोपी ‘गे डेटिंग’ एप पर लड़कों से सेक्स चेटिंग करता था और उनसे संबंध बनाने की बात करता था। इतना ही नहीं 50 पुरुषों से संबंध बनाने वाला आरोपी HIV पॉजिटिव निकला है।
रिमांड के दौरान आरोपी ने कई राज उगले। आरोपी ने बताया कि वह पुरुषों से संबंध बनाने के लिए पेसो का प्रलोभन भी देता था। मिसरोद थाने के 377 के मामले जेल में तीन साल की सजा काट चुका है। आरोपी की मिसरोद स्थित अपने घर के रास्ते में राजेश नाम के युवक से मुलाकात हुई थी। आरोपी ने उसे शराब पिलाई, खाना खिलाया फिर अपने साथ घर ले गया।
आरोपी अजय ने घर में राजेश के साथ जबरदस्ती सेक्स करने की कोशिश की थी। युवक ने इसका विरोध किया तो नाराज आरोपी ने पत्थर से उसके सिर पर हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने से युवक की मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी उसका मोबाइल लेकर फरार हो गया था। घटना वाले दिन वह न्यू मार्केट, VIP रोड पर काफी देर तक घूमंता रहा।
आरोपी अजय ने मृतक राजेश का मोबाइल दीपक नाम के व्यक्ति को बेच दिया। पुलिस ने लोकेशन ट्रेस की तो मोबाइल खरीदने वाले ने बताया कि उसने यह फोनअजय से खरीदा था। यहीं से पुलिस को सुराग मिला और जांच करते हुए हत्या की परतें खुल गई।
आरोपी अजय को पुलिस ने 5 दिन की रिमांड पर लिया है। रिमांड के दौरान मामले में बड़े खुलासे हो सकते हैं। बता दें कि 29 मई 2016 इकोलॉजिकल पार्क, झागारिया हाइवे पर 5 दिन पुराना शव मिला था। एक महीने के बाद पुलिस ने मामले का खुलासा किया है।

राजगढ़। राजगढ़ जिले के खारपरस गांव में एक आरोपित को महिला के पैरों से पायल लूटना महंगा साबित हुआ है। ग्रामीणों ने घटना के बाद सुबह आरोपित को पकड़कर ट्रैक्टर-ट्राली से बांधकर न सिर्फ मारपीट की है, बल्कि उसको लोहे का सरिया गर्म कर पैरों पर जलाया भी गया है। घटना के बाद दोनों महिला पक्ष की शिकायत पर युवक पर लूटपाट का मामला दर्ज किया है, जबकि युवक से मारपीट करने पर चार पर एफआईआर की है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक कालीपीठ थाना क्षेत्र के गांव खारपरस में 23 जून रात करीब साढ़े 11 बजे उसी गांव का गोविंद वर्मा नामक युवक गांव में ही 90 वर्षीय जतनबाई सौंधिया के घर में घुस गया। महिला परिवार से अलग अकेली रहती थी। यह देखकर युवक ने महिला के घर में घुसकर उसके पैरों में मौजूद चांदी की पायल निकाल ली और चांदी के कड़े उतारने का प्रयास करने लगा। तब ही महिला की नींद खुल गई। नींद खुलने के साथ ही बुजुर्ग महिला ने स्थिति को भांपते हुए शोर मचा दिया। शोर सुनते ही आरोपित गोविंद वर्मा वहां से भाग निकला।
इसके बाद 24 जून को लूट की जानकारी पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद ग्रामीणों ने आरोपित की तलाश शुरू कर दी। खोजने के बाद ग्रामीणों ने आरोपित गोविंद वर्मा को पकड़ लिया। उसे गांव के अंदर लाकर मारपीट की। फिर ट्रैक्टर-ट्राली से बांधकर पीटा गया। तब ही एक युवती लोहे के तार को गर्म करके ले आई और युवक के पैरों को दाग दिया। बार-बार जब दागा गया तो युवक दर्द से कराहता हुआ जमीन पर पड़ गया। कुछ लोग हालांकि ऐसा नहीं करने का भी बोलते नजर आए।
युवक को बांधकर मारपीट करने व लोहे से दागने का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गया। घटना के बाद जैसे ही पूरे घटनाक्रम का वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस भी हरकत में आ गई। इसी के साथ आरोपित युवक द्वारा बुजुर्ग महिला के घर में घुसकर चांदी की पयल लूटने व कड़े लूटने के प्रयास को लेकर महिला पक्ष की ओर से लूटपाट की धाराओ में एफआईआर दर्ज की है।
जबकि उधर युवक को ट्रैक्टर-ट्राली से बांधकर मारपीट करने पर पुलिस ने गोविंद वर्मा पक्ष की शिकायत के आधार पर आरोपित लाखन सौंधिया, देवराज सौंधिया, रामबाबू सौंधिया व एक युवती के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओ में एफआइआर दर्ज की है।इस पूरे मामले की जांच अब एसडीओपी स्तर पर की जा रही है।
इनका कहना है
युवक के साथ मारपीट करने व पूरे घटनाक्रम को लेकर हमने एफआइआर दर्ज कर ली है।साथ ही चारो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। अमित तोलानी, एसपी राजगढ़।
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नामांतरण करने के मामले में , कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन तहसीलदार, पटवारी समेत 4 पर धोखाधड़ी का केस दर्ज
डिंडौरी। पैतृक संपत्ति हड़पने के लिए फर्जी वसीयत और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर नामांतरण करने के मामले में कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन तहसीलदार, पटवारी समेत 4 लोगों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गिरजेश कुमार सनोडिया के आदेश पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
जिला मुख्यालय के वार्ड-4 निवासी इन्द्रपाल सोनपाली ने कोर्ट में परिवाद दायर किया था। आवेदन के अनुसार उनके दादा बालमुकुन्द सोनपाली का निधन 1989 में हुआ था। उनकी डिंडौरी नगर व आसपास अचल संपत्ति है। बंटवारे को लेकर इन्द्रपाल के चाचा नंदलाल सोनपाली और उसके बेटे रोहित सोनपाली से विवाद चल रहा है। सिविल केस 28ए/2021 डिंडौरी कोर्ट में निराकृत होने के बाद हाईकोर्ट जबलपुर में अपील विचाराधीन है। हाईकोर्ट ने 7 मई 2007 को अपील निराकरण तक संपत्ति विक्रय पर रोक लगाई थी।
इन्द्रपाल का आरोप है कि नंदलाल सोनपाली ने दादी के नाम से फर्जी वसीयत बनाकर तहसीलदार के प्रकरण क्र. 0345/अ-6/2022-23 में आदेश दिनांक 4 जुलाई 2022 से वार्ड-5 की 3.245 हेक्टेयर पैतृक भूमि अपने नाम करा ली। इस जमीन पर मकान, कुआं और बगीचा है। इसके बाद 5 अगस्त 2022 को बेटे रोहित के नाम दानपत्र कर दी।
इसी तरह ग्राम सुबखार वार्ड-1 की खसरा नं. 104 की 3.5450 हेक्टेयर जमीन भी फर्जी वसीयत से प्रकरण क्र. 0346/अ-6/2022-23 में 4 जुलाई 2022 को अपने नाम कराकर 26 अक्टूबर 2022 को अनिल खनूजा को बेच दी।
आवेदन में कहा गया कि दोनों नामांतरण में इन्द्रपाल के फर्जी हस्ताक्षर से शपथ पत्र तैयार किए गए, जिसमें लिखा था कि नामांतरण पर कोई आपत्ति नहीं है। इन्द्रपाल का कहना है कि वह कभी तहसील कोर्ट में पेश नहीं हुआ। हल्का पटवारी हिरेन्द्र सूर्याम और तत्कालीन तहसीलदार गोविन्दराम सलामे ने पद का दुरुपयोग कर अवैधानिक नामांतरण किया।
बताया गया कि वार्ड-5 की जमीन पर पैतृक मकान व वृक्ष होने के बावजूद राजस्व रिकॉर्ड से ‘परिवर्तित’ श्रेणी हटाकर कृषि भूमि दर्शा दी गई, ताकि कलेक्टर की अनुमति के बिना हस्तांतरण हो सके। दानपत्र में भी झूठा उल्लेख किया कि जमीन पर मकान, कुआं, वृक्ष नहीं है।
सीजेएम कोर्ट ने दांडिक पुनरीक्षण क्र. 11/25 और सुप्रीम कोर्ट के न्याय दृष्टांत माधव विरुद्ध स्टेट ऑफ महाराष्ट्र 2013 के परिप्रेक्ष्य में थाना प्रभारी को अपराध दर्ज कर जांच के आदेश दिए थे। इस पर कोतवाली पुलिस ने नंदलाल सोनपाली, रोहित सोनपाली, पटवारी हिरेन्द्र सूर्याम और तत्कालीन तहसीलदार गोविन्दराम सलामे के खिलाफ धारा 420, 468, 471 भादवि के तहत केस दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
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घोड़े पर दूल्हा… पानी में बारात! पहली बारिश में ही डूब गया ‘स्मार्ट’ इंदौर
इंदौर। ये नज़ारा किसी बाढ़ प्रभावित गांव का नहीं, बल्कि देश के सबसे स्वच्छ शहर और मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर का है। पहली ही बारिश ने नगर निगम के करोड़ों रुपये के दावों को पानी में बहा दिया। रोबोट चौराहे के पास न्याय नगर की सड़कें ऐसी डूबीं कि पूरा इलाका तालाब बन गया। हालात इतने बदतर थे कि दूल्हा तो किसी तरह घोड़े पर सवार होकर निकल गया, लेकिन बारातियों को घुटनों तक भरे गंदे पानी में चलकर बारात निकालनी पड़ी।
नगर निगम स्मार्ट सिटी और बेहतर ड्रेनेज के दावे करता रहा, लेकिन पहली ही बारिश ने उन दावों की हकीकत सबके सामने ला दी। अब इस बारात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब मानसून की शुरुआत में ही शहर डूब गया, तो आने वाले दिनों में इंदौर का क्या होगा?
करोड़ों रुपये के ड्रेनेज प्रोजेक्ट, जल निकासी की योजनाएं और तैयारियों के तमाम दावों के बीच न्याय नगर की ये तस्वीरें सिस्टम की नाकामी की गवाही दे रही हैं। वीडियो इंदौर के न्याय नगर का है।

महाराष्ट्र सरकार बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को खत्म करने के लिए एक नई और अनोखी व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। राज्य में जल्द ही शादी के निमंत्रण पत्रों पर दूल्हे और दुल्हन दोनों की जन्मतिथि दर्ज करना अनिवार्य किया जा सकता है। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने विधानसभा में इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसका उद्देश्य शादी से पहले ही वर-वधू की उम्र की पुष्टि करना और बाल विवाह की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है।
सरकार ने बाल विवाह के खिलाफ एक स्पष्ट लक्ष्य तय किया है। मंत्री अदिति तटकरे के अनुसार, अगले पांच वर्षों में राज्य में बाल विवाह की दर को 10 प्रतिशत से नीचे लाने की योजना है। इस दिशा में महाराष्ट्र सरकार अन्य राज्यों के अनुभवों का भी अध्ययन कर रही है। विशेष रूप से राजस्थान में अपनाई जा रही व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाने के लिए राज्य सरकार ने वहां पत्र भेजा है। जल्द ही ग्रामीण विकास, कानून और न्याय विभागों के साथ मिलकर इस प्रस्ताव की व्यवहारिकता और प्रभाव का आकलन किया जाएगा।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि बाल विवाह रोकने के लिए केवल माता-पिता या अभिभावकों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा। यदि किसी बाल विवाह का आयोजन होता है, तो उसमें सहयोग करने वाले सभी लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें विवाह संपन्न कराने वाले पुजारी, बैंड-बाजा संचालक, कैटरर्स और अन्य सहयोगी शामिल हो सकते हैं। ऐसे मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज करने की भी व्यवस्था की जा सकती है, ताकि लोगों में कानून का डर पैदा हो और बाल विवाह की घटनाओं को रोका जा सके।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में बाल विवाह के मामलों में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2019-21 के सर्वेक्षण में जहां यह आंकड़ा 21.9 प्रतिशत था, वहीं 2023-24 में घटकर 19.6 प्रतिशत रह गया है। यह राष्ट्रीय औसत 20.1 प्रतिशत से बेहतर स्थिति मानी जा रही है। इसके बावजूद सरकार मानती है कि समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। वर्ष 2025-26 में अब तक 1,434 बाल विवाह रोके जा चुके हैं और 136 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है।
विधानसभा में उठाए गए सवालों के जवाब में मंत्री ने बताया कि बीड, छत्रपति संभाजीनगर और परभणी समेत छह जिलों में बाल विवाह की समस्या अपेक्षाकृत अधिक गंभीर है। इन क्षेत्रों में गन्ना कटाई के लिए परिवारों का बड़े पैमाने पर पलायन एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार प्रवासी मजदूरों के बच्चों हेतु विशेष बाल देखभाल केंद्र और आवासीय सुविधाओं का विस्तार करने की योजना बना रही है, ताकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिल सके और उनकी शिक्षा व भविष्य प्रभावित न हो।
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फ्री राशन नियम में बड़ा बदलाव, अब मिलेगा प्रति व्यक्ति 7 किलो अनाज, सरकार लाई नया प्रस्ताव
केंद्र सरकार अंत्योदय अन्न योजना के तहत राशन वितरण के नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है. नए प्रस्ताव के तहत अब इसे प्रति व्यक्ति 7 किलो के हिसाब से दिया जाएगा. सरकार का कहना है कि इससे बड़े गरीब परिवारों को ज्यादा लाभ मिलेगा. इसका मुख्य उद्देश्य वितरण प्रणाली में मौजूद असमानताओं को दूर कर बड़े और गरीब परिवारों को राहत देना है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक 2026 पर 13 जुलाई तक सुझाव मांगे गए हैं.
वर्तमान में अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को प्रति माह निश्चित रूप से 35 किलो राशन (अनाज) मिलता है, चाहे उस परिवार में सदस्यों की संख्या कितनी भी हो.
केंद्र सरकार के नए प्रस्ताव से अंत्योदय अन्न योजना के तहत मिलने वाले 35 किलो अनाज वितरण के तरीके में बदलाव हो सकता है. इसके लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में बदलाव से जुड़े एक प्रस्ताव का ड्राफ्ट तैयार किया गया है. खाद्य व सार्वजनिक वितरण विभाग ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है.
मौजूदा कानून के तहत, AAY के तहत पात्र परिवारों को हर महीने 35 किलोग्राम अनाज दिया जाता है. इसमें परिवार में कितने सदस्य हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है.
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अंत्योदय अन्न योजना के तहत मौजूदा परिवार-आधारित हक का मकसद सबसे कमज़ोर परिवारों की सुरक्षा करना था, लेकिन परिवार के आकार के आधार पर इससे काफ़ी असमानता पैदा होती है.
नए नियमों के मुताबिक, AAY के तहत पात्र परिवारों को हर महीने अब परिवार कि जगह प्रति व्यक्ति के आधार पर देने की योजना है. पर ध्यान देने वाली यह बात है कि अगर आपके परिवार में 5 से ज्यादा मेम्बर है तो फिर भी आपको 35 किलो ही मिलेगा.
दूसरी तरफ अगर आपके परिवार में 5 से कम मेम्बर अर्थात 3 है तो इस दिशा में नए नियमों के मुताबिक सरकार आपको 21 किलो ही किलोग्राम अनाज देगी.
इस प्रस्ताव को अभी सरकार कि ओर से अंतिम मंजूरी नहीं मिली है. फिलहाल इसके ड्राफ्ट पर आम लोगों, एक्सपर्ट्स और इससे जुड़े अन्य लोगों की राय ली जा रही है. खाद्य मंत्रालय ने ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर 13 जुलाई तक जनता से राय मांगी है.
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‘डिजिटल अरेस्ट’ गैंग पर CBI की स्ट्राइक! 16 राज्यों में 80 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी, सुप्रीम कोर्ट की फर्जी वेबसाइट से करते थे ठगी
नई दिल्ली। देशभर में तेजी से बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर फ्रॉड के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। गुरुवार सुबह शुरू हुए विशेष अभियान में CBI ने 16 राज्यों के 80 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क को निशाने पर लिया।
इस कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क देशभर में 200 से अधिक डिजिटल अरेस्ट ठगी के मामलों से जुड़ा हो सकता है। आरोपियों पर फर्जी कंपनियां बनाकर और नकली बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर करने का आरोप है।
CBI ने इस अभियान को ‘ऑपरेशन चक्र-VI’ नाम दिया है। एजेंसी ने इसके लिए करीब 60 विशेष जांच टीमों का गठन किया, जिन्होंने पंजाब, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, कर्नाटक और ओडिशा सहित 16 राज्यों में एक साथ दबिश दी।
जांच एजेंसी का कहना है कि, कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य डिजिटल अरेस्ट ठगी से जुड़े संगठित नेटवर्क को खत्म करना और उसके वित्तीय तंत्र को ध्वस्त करना है।
छापेमारी के दौरान CBI ने चेन्नई से बी. नागेश (या बी. नरेश) और कोलकाता से संजीव साहा को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी कथित तौर पर शेल कंपनियां बनाने और ‘म्यूल अकाउंट’ यानी फर्जी बैंक खाते संचालित करने में शामिल थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर उसकी असली पहचान छिपाने के लिए किया जाता था। CBI के अनुसार, अब तक करीब 2 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है।
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला खुलासा एक फर्जी वेबसाइट को लेकर हुआ है। जांच के दौरान CBI ने ऐसी वेबसाइट का पता लगाया, जिसका यूआरएल भारत के सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट से काफी मिलता-जुलता था। आरोपी इस वेबसाइट का इस्तेमाल लोगों को यह विश्वास दिलाने के लिए करते थे कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई चल रही है।
इसके बाद उन्हें वीडियो कॉल, फर्जी नोटिस, नकली कोर्ट ऑर्डर और जांच एजेंसियों के नाम पर तैयार दस्तावेज दिखाकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाया जाता था। पीड़ितों को बताया जाता था कि, अगर उन्होंने तुरंत पैसे ट्रांसफर नहीं किए तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा या उनके बैंक खाते सीज कर दिए जाएंगे।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस फर्जी वेबसाइट की शिकायत सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री की ओर से की गई थी। शिकायत मिलने के बाद CBI ने एफआईआर दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की। एडवांस्ड फॉरेंसिक टूल्स और तकनीकी विश्लेषण की मदद से एजेंसी ने इस साइबर नेटवर्क के कई महत्वपूर्ण लिंक और ऑपरेशनल सिस्टम की पहचान की।
छापेमारी में क्या-क्या मिला?
देशभर में हुई कार्रवाई के दौरान CBI ने कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाए हैं। इनमें शामिल हैं-
मोबाइल फोन
लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस
बैंक ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड
शेल कंपनियों से जुड़े दस्तावेज
फर्जी पहचान पत्र और वित्तीय कागजात
साइबर ठगी से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक डेटा
बरामद सामग्री को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। एजेंसी इन डिजिटल सबूतों की मदद से नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
CBI की जांच में सामने आया है कि, यह साइबर नेटवर्क केवल भारतीय नागरिकों को ही निशाना नहीं बना रहा था। शुरुआती साक्ष्यों से पता चला है कि, कई विदेशी नागरिक भी इस गिरोह की ठगी का शिकार हुए हो सकते हैं। इसी वजह से एजेंसी संबंधित देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ भी जानकारी साझा कर रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
डिजिटल अरेस्ट एक साइबर ठगी का तरीका है, जिसमें ठग खुद को पुलिस, CBI, ED, कस्टम विभाग, RBI या किसी अदालत का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं। वे दावा करते हैं कि, पीड़ित का नाम किसी अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी या अवैध लेन-देन में सामने आया है। इसके बाद जांच या गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर लाखों रुपये वसूल लिए जाते हैं।
CBI का कहना है कि ऑपरेशन चक्र-VI के तहत मिली जानकारी के आधार पर जांच अभी जारी है। एजेंसी साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क, उसके आर्थिक स्रोतों और तकनीकी ढांचे की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। डिजिटल अरेस्ट और साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ यह अभियान आने वाले दिनों में और तेज किया जा सकता है।

इंदौर। शहर के जूनी इंदौर थाना क्षेत्र में मोबाइल शोरूम में चोरी की वारदात को पुलिस ने महज डेढ़ घंटे के भीतर सुलझाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से चोरी किए गए चार कीमती मोबाइल फोन और ताले तोड़ने में इस्तेमाल किया गया औजार बरामद किया है।
जानकारी के अनुसार खातीवाला टैंक निवासी अशोक भाटिया की स्नेह नगर मुख्य मार्ग स्थित मोबाइल शोरूम में मंगलवार सुबह करीब 5 बजे चोरी की वारदात हुई थी। आरोपी ने दुकान के शटर का ताला तोड़कर मोबाइल फोन चोरी कर लिए थे। घटना की सूचना मिलते ही जूनी इंदौर, भंवरकुआं और रावजी बाजार थाना पुलिस ने संयुक्त रूप से घेराबंदी कर कार्रवाई शुरू की।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र की मदद से घटना के करीब डेढ़ घंटे के भीतर 21 वर्षीय पवन पटेल को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी मूल रूप से खंडवा का रहने वाला है। उसके बैग से चोरी किए गए चार मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। साथ ही चोरी में इस्तेमाल किया गया औजार भी जब्त कर लिया गया है।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने अपनी गर्लफ्रेंड को मोबाइल गिफ्ट करने के लिए चोरी की योजना बनाई थी। इसी उद्देश्य से उसने मोबाइल शोरूम को निशाना बनाया। फिलहाल पुलिस आरोपी से अन्य चोरी की घटनाओं के संबंध में भी पूछताछ कर रही है। जूनी इंदौर थाना प्रभारी अनिल गुप्ता ने बताया कि पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते आरोपी को कम समय में गिरफ्तार कर चोरी का माल बरामद कर लिया गया। मामले की जांच जारी है।

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अशोकनगर के 271 मंदिरों में पुजारी नहीं, 2164 एकड़ भगवान की जमीन नीलाम करेगा प्रशासन
अशोकनगर मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में शासन संधारित मंदिरों को लेकर प्रशासन अब एक्शन मोड में आ गया है। आय बढ़ाने जहां 10 एकड़ से अधिक कृषि भूमि वाले 98 मंदिरों की 2164 एकड़ जमीन को नीलाम करने की तैयारी कर ली गई है। लेकिन, जिले के 271 मंदिरों में भगवान की सेवा करने वाला कोई पुजारी ही नहीं है। इससे वहां भी पुजारियों की नियुक्ति की तैयारी है।
बता दें कि, जिले में कुल 443 शासकीय मंदिर हैं, जिनके नाम पर 3161.422 एकड़ कृषि भूमि है। जिनमें 10 एकड़ से ज्यादा कृषिभूमि वाले 98 ऐसे मंदिर हैं, जिनके पास 2164.949 एकड़ कृषि भूमि है। इससे धर्मस्व विभाग साल 2026-27 के लिए खरीफ व रबी सीजन की कृषि के लिए इस भूमि की कृषि के लिए नीलामी करेगा। ताकि इससे आय बढ़ाई जा सके। जिसमें सबसे ज्यादा जमीन ईसागढ़ तहसील के 29 मंदिरों की 615.281 एकड़ नीलाम होगी। लेकिन, इस पर संत समाज नाराजगी जता रहा है, जिनका कहना है कि, मंदिर की जमीन मंदिर की व्यवस्थाओं के लिए है, इससे सरकारी खजाना भरना गलत है।
शासन संधारित इन मंदिरों की संपटिा के साथ सरकारी आंकड़ों से मंदिरों के प्रबंधन की एक और बड़ी खामी उजागर हुई है। जिले के 443 मंदिरों में से मात्र 172 मंदिरों में ही पुजारी पदस्थ हैं। शेष 271 मंदिरों में भगवान की आरती और भोग के लिए पुजारियों के पद ही रि…त पड़े हैं। सबसे खराब स्थिति बहादुरपुर और पिपरई की है। बहादुरपुर के 44 मंदिरों में से केवल 2 में पुजारी और 42 रि…त, जबकि पिपरई के 17 मंदिरों में महज एक में पुजारी और 16 रि…त बताए गए हैं। मुंगावली और शाढ़ौरा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। हालांकि, अब प्रशासन ने इन रि…त पड़े 271 पदों पर पुजारियों की नियु…ित की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
55 एकड़ पर अतिक्रमण आय बढ़ाने की कवायद के बीच अतिक्रमण का एक खौफनाक सच भी सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है। शहर के मध्य स्थित श्री गोपाल मंदिर और धनुषधारी मंदिर के नाम पर कुल 340.372 एकड़ जमीन है। लेकिन इसमें से 55.59 एकड़ पर अतिक्रमण है। धनुषधारी मंदिर के पुजारी कमलदास ने ही फर्जी नोटरी से शासकीय भूमि बेच दी थी और इस जमीन पर करीब एक हजार प…के मकान बन चुके है। इस बड़े फर्जीवाड़े को लेकर पुजारी के खिलाफ पुलिस थाने में दो बार एफआइआर दर्ज हो चुकी है। हालांकि इस अतिक्रमण को हटाना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
संयुक्त कलेक्टर सोनम जैन का कहना है कि, 10 एकड़ से ज्यादा जमीन वाले मंदिरों की जमीन कृषि के लिए एक साल के लिए नीलाम की जाएगी। वहीं, जिन मंदिरों पर पुजारी नहीं हैं, वहां पर एसडीएम पुजारी नियुक्त कर रहे हैं।
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बजरंग दल के कारण 29 लाख रुपए का घाटा, महाकाल मंदिर के प्रबंधन का बड़ा दावा
उज्जैन मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा है। महाकाल मंदिर में वीआईपी कल्चर को लेकर लगातार सवाल उठ रहे है। अब महाकालेश्वर मंदिर की वीआईपी दर्शन व्यवस्था को लेकर मंगलवार को एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई। एक ओर बजरंग दल के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मंदिर परिसर में प्रदर्शन कर वीआईपी कल्चर खत्म करने और सभी श्रद्धालुओं के लिए समान दर्शन व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई, वहीं दूसरी ओर मंदिर प्रशासन से जुड़े सूत्रों ने दावा किया कि विरोध करने वाले संगठन के नाम पर ही पिछले छह महीनों में हजारों निःशुल्क दर्शन कराए गए, जिससे मंदिर को करीब 29 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ।
वीआईपी दर्शन व्यवस्था को लेकर मंगलवार को विवाद गहरा गया। बजरंग दल के सैकड़ों कार्यकर्ता मंदिर के निर्माल्य द्वार पर पहुंचे और वीआइपी कल्चर के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि आम श्रद्धालुओ को घंटों लंबी कतारो और तेज धूप में इंतजार करना पड़ता है, जबकि प्रभावशाली लोगों को सीधे और तत्काल प्रवेश देकर दर्शन कराए जाते है। इसे धार्मिक असमानता बताते हुए कार्यकर्ताओं ने मंदिर प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर श्रद्धालुओ के लिए समान और निष्पक्ष दर्शन व्यवस्था की मांग की। विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री जसवंत सिंह ठाकुर ने कहा मंदिर की व्यवस्था चरमरा चुकी है और वीआईपी संस्कृति समाप्त किए बिना आम श्रद्धालुओ को न्याय नहीं मिल सकता।
प्रदर्शन के बीच मंदिर प्रशासन से जुड़े सूत्रों ने छह माह के रिकॉर्ड के आधार पर अलग ही तस्वीर सामने रखी। सूत्रों के अनुसार, वीआईपी व्यवस्था का विरोध करने वाले संगठन के नाम अब कई सवाल उठ रहे है। मंदिर सूत्रो का कहना है कि एक ओर वीआईपी संस्कृति समाप्त करने की मांग उठाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर मुफ्त दर्शन सुविधा का बड़े पैमाने पर लाभ भी लिया गया। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या विरोध और व्यवहार में विरोधाभास है, या फिर एफओसी पास जारी करने की प्रक्रिया पर ही पारदर्शिता और जवाबदेही तय किए जाने की जरूरत है।
सूत्रों के अनुसार छह माह का रिकॉर्ड
विवरण (6 महीने का रिकॉर्ड) आंकड़े/प्रभाव।
निःशुल्क दर्शन (एफओसी पास) 11,568 श्रद्धालुओं को कराए गए।
भस्म आरती प्रवेश 2,068 लोगों को फ्री एंट्री दिलाई गई।
मंदिर के खजाने को नुकसान 29,00,000 (29 लाख रुपए) की राजस्व हानि

बालाघाट। बालाघाट में वन विभाग बैहर की टीम द्वारा विशेष कार्रवाई करते हुए वन्य प्राणी बाघ के संदिग्ध अवयवों की अवैध खरीद-फरोख्त की योजना को विफल करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने खरीददार बनकर योजनाबद्ध तरीके से यह कार्रवाई की।
जानकारी के मुताबिक मुखबिर की सूचना पर वन अधिकारी कर्मचारी ग्राहक बनकर पहुंचे थे। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि उनके कब्जे से बरामद दो अलग-अलग हड्डियां/कंकाल है वह बाघ की बताई गई है। जिनमें से एक बाघ की हड्डी बम्हनी बंजर, जिला मंडला से लाया जाना बताया गया। द्वितीय बाघ का कंकाल कहा से लाया गया इस बात की पुष्टि होना शेष है। प्रथम दृष्टया दोनों कंकाल बाघ के ही प्रतीत हो रहे हैं। बरामद अवयवों की वास्तविक पहचान एवं पुष्टि हेतु उन्हें विधिवत वैज्ञानिक परीक्षण (फॉरेंसिक जांच) के लिए भेजा जा रहा है।
आगे की पूछताछ हेतु वन विभाग द्वारा आरोपियों को अभिरक्षा में लिया गया है। जिसमें रामलाल टेकाम, उम्र 52 वर्ष निवासी ग्राम कुरवाही, दशरथ परते, उम्र 45 वर्ष, निवासी बिछिया, भीम सिंह परते निवासी हर्राभाट, रविन्द्र सोनकुसरे निवासी छपारा, राजकुमार सोनकुसरे निवासी छपारा, देवीदयाल ढोढरे निवासी छपारा है। मामले में अन्य भी आरोपी हो सकते हैं। जिसमें देवीदयाल का नाम सामने आया है। मामले में सभी के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
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लखनऊ अग्निकांड के बाद भी ग्वालियर के कोचिंग संस्थान लापरवाह, बिल्डिंग सील
ग्वालियर। लखनऊ में कोचिंग सेंटर के दर्दनाक हादसे के बाद भी ग्वालियर के कोचिंग संस्थानों ने कोई सबक नहीं लिया। शहर की लक्ष्मीबाई कॉलोनी, जिसे कोचिंग हब कहा जाता है, वहां नगर निगम की फायर ब्रिगेड टीम जब फायर सेफ्टी नॉर्म्स की जांच करने पहुंची तो एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। आरोप है कि कार्रवाई से बचने के लिए कोचिंग, लाइब्रेरी और जिम में मौजूद छात्रों को अलग-अलग फ्लोर पर रोक दिया गया और मुख्य चैनल गेट पर अंदर और बाहर से ताला लगा दिया गया।
दरअसल, लखनऊ हादसे के बाद नगर निगम की टीम जब लक्ष्मीबाई कॉलोनी में फायर सेफ्टी जांच के लिए पहुंची तो चार मंजिला बिल्डिंग के मुख्य चैनल गेट पर अंदर और बाहर दोनों तरफ ताला लगा मिला। ताला बंद होने के कारण टीम को शुरुआती जांच किए बिना ही लौटना पड़ा।
कुछ देर बाद फायर ब्रिगेड की टीम नोडल ऑफिसर रजनीश गुप्ता के नेतृत्व में दोबारा मौके पर पहुंची। अनाउंसमेंट कर कोचिंग संचालकों को ताला खोलने की सख्त चेतावनी दी गई, जिसके बाद वर्धानी कोचिंग संचालक डॉ. करण वर्धानी बेसमेंट के रास्ते बाहर आए और टीम को अंदर ले गए।
अंदर जांच शुरू हुई तो वर्धानी कोचिंग में बड़ी संख्या में छात्रों के बीच सिर्फ दो फायर एक्सटिंग्विशर मिले। टीम ने जब छात्रों की संख्या के बारे में पूछा तो कोचिंग संचालक ने दावा किया कि सभी छात्र घर जा चुके हैं और कोचिंग खाली है। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, तस्वीर बदलती चली गई।
टीम जब ऊपर स्थित धाकड़ लाइब्रेरी पहुंची तो उसका दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी देर तक दरवाजा नहीं खोला गया। सख्ती के बाद जब गेट खुला तो अंदर करीब 70 से 80 छात्र-छात्राएं मौजूद मिले। कार्रवाई के दौरान कुछ छात्रों और फायर अमले के बीच हल्की बहस भी देखने को मिली।
इसके बाद टीम चौथी मंजिल पर संचालित जिम पहुंची। वहां भी दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर तक कोई बाहर नहीं आया। कार्रवाई की चेतावनी देने के बाद जब दरवाजा खुला तो अंदर आधा दर्जन से ज्यादा लोग मिले। इनमें ग्राउंड फ्लोर पर चल रही वर्धानी कोचिंग के कुछ छात्र-छात्राएं भी मौजूद थे।
छात्रों ने दावा किया कि कार्रवाई की सूचना मिलने पर कोचिंग की मैडम ने उन्हें ऊपर जिम में भेज दिया था। कुछ छात्रों ने यह भी बताया कि कार्रवाई से बचने के लिए कुछ बच्चे पास की बिल्डिंग की छत पर कूदकर वहां से नीचे सीढ़ियों के जरिए उतर गए।
जब इस बारे में कोचिंग संचालक डॉ. करण वर्धानी से सवाल किया गया तो उन्होंने जिम में मिले छात्र-छात्राओं को अपना स्टूडेंट मानने से ही इनकार कर दिया। इसके बाद ऐसा बहाना सुनाया, जिसके बाद अब हैरान रह गए। उनका कहना था कि हो सकता हे कि छात्र लाइब्रेरी में पढ़ने गए हों या जिम में मौजूद गए हों, क्योंकि उनकी कोचिंग टाइम पूरी हो चुकी थी।
हालांकि लाइब्रेरी संचालक अवधेश धाकड़ ने कोचिंग संचालक के दावे का खंडन किया। उनका कहना था कि उनकी लाइब्रेरी में आमतौर पर 12वीं के बाद के विद्यार्थी आते हैं और उन्होंने कभी छोटे छात्रों को भी जिम में आते जाते नहीं देखा। उनके अनुसार कोचिंग संचालक का दावा सही नहीं है।
पूरी चार मंजिला बिल्डिंग की जांच में सिर्फ दो फायर एक्सटिंग्विशर मिले। फायर ब्रिगेड के अनुसार प्राथमिक जांच में फायर सेफ्टी से जुड़े जरूरी इंतजाम नहीं पाए गए। ऐसे में जहां कुछ देर पहले स्टूडेंट ताला लगा होने के चलते बाहर नहीं निकल पा रहे थे वही कुछ देर बाद ऐसी तस्वीर भी देखने के लिए मिली जहां भारी संख्या में चैनल गेट से ही बाहर स्टूडेंट निकलते हुए नजर आए।
इसके बाद पूरी बिल्डिंग को सील कर दिया गया। फायर नोडल ऑफिसर रजनीश गुप्ता ने बताया कि यह भी जांच की जाएगी कि भवन आवासीय है या व्यावसायिक। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर सहित सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
बहरहाल लखनऊ हादसे के बाद भी अगर कोचिंग संस्थानों में फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी होती रही और छात्रों की सुरक्षा से समझौता किया गया, तो यह किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। फिलहाल नगर निगम की कार्रवाई के बाद शहर के कई कोचिंग संस्थानों में हड़कंप का माहौल है।
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शादी में अवैध देशी पिस्‍टल लेकर कर रहा था डांस, वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने धर लिया
डेहरी। शादी समारोह में अवैध देशी पिस्टल लेकर डांस करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपित युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपित के कब्जे से एक अवैध देशी पिस्टल बरामद की गई है।
पुलिस के अनुसार चौकी डेहरी अंतर्गत ग्राम झडदी में आयोजित शादी समारोह के दौरान एक युवक देशी पिस्टल लेकर डांस करता दिखाई दिया था।
इस घटना का वीडियो मोबाइल पर रिकार्ड होकर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो पुलिस तक पहुंचने पर पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डावर तथा एसडीओपी कुक्षी सुनील गुप्ता के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित की गई। टीम में थाना प्रभारी बाग कैलाश चौहान तथा चौकी प्रभारी डेहरी एसआइ भूपेंद्र खरतिया सहित पुलिसकर्मी शामिल थे।
जांच के दौरान पुलिस ने वीडियो में दिखाई दे रहे युवक की पहचान सुमित पुत्र दिनेश चौहान निवासी खलघाट के रूप में की। 23 जून को मुखबिर की सूचना पर डेहरी-मनावर रोड पर वाहन चेकिंग के दौरान आरोपित को मोटरसाइकिल सहित पकड़ा।
तलाशी लेने पर आरोपित के कब्जे से एक अवैध देशी पिस्टल बरामद हुई, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया। इसके बाद आरोपित को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की गई।
पुलिस आरोपित से बरामद पिस्टल के संबंध में पूछताछ कर रही है। आरोपित को न्यायालय कुक्षी में पेश किया जाएगा।

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
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बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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