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जबलपुर. मध्यप्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर मंहगाई की अब एक और मार पड़ी है. बिजली कंपनियों ने फ्यूल कास्ट एंड पावर पर्चस एडजस्टमेंट का हवाला देते हुए दाम बढ़ा दिए है ऐसे में अब प्रदेश के उपभोक्ताओं के बीच बिजली का खर्च और बढ़ जाएगा.
बिजली कंपनियों का कहना है कि ईंधन की मंहगाई के चलते यह कदम उठाना पड़ रहा है. अब जल्द ही बढ़े हुए बिजली के बिल भी उपभोक्ताओं तक पहुंचगेंए जो कि 200 से 300 यूनिट की खपत पर 35 से 87 रुपए तक अधिक होगें. खबर है कि एफसीपीपीए सरचार्ज 1.11 परसेंट से बढ़ाकर 3.77 परसेंट कर दिया गया है. यानी पिछले महीने की तुलना में उपभोक्ताओं पर 2.66 परसेंट अधिक सरचार्ज का बोझ पड़ेगा.
यह सरचार्ज बिजली बिल के एनर्जी चार्ज पर लागू होगा और प्रदेश के दो करोड़ से अधिक यूजर्स इससे प्रभावित होंगे. एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जुलाई 2026 के लिए फ्यूल और पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज 3ण्77 प्रतिशत निर्धारित किया गया है. यह निर्णय बिजली आपूर्ति और व्हीलिंग के टैरिफ से जुड़े रेगुलेशन.2021 तथा उसके संशोधित प्रावधानों के तहत लिया गया है. चीफ जनरल मैनेजर के निर्देशानुसार 24 जुलाई 2026 से यह सरचार्ज उपभोक्ताओं के एनर्जी चार्ज पर वसूला जाएगा. इसके लिए डिटेल जानकारी कंपनी की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई गई है.
प्रदेश में सामान्य से कम बारिश का असर बिजली उत्पादन पर भी पडऩे लगा है. जलाशयों में पानी की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय कई जगह 8 घंटे तक बिजली कटौती की जा रही है. जबलपुर और आसपास के जिलों के गांवों में भी रुक.रुककर बिजली गुल होने की शिकायतें सामने आ रही हैं. इसका असर प्रदेश के 2 करोड़ और भोपाल के 1.25 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा. बिजली कंपनियों के मुताबिक बिजली की डिमांड लगातार बढ़ रही है. जबकि उत्पादन क्षमता पर दबाव है. 27 जुलाई 2025 को प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 10024 मेगावाट थी जो 27 जुलाई 2026 को बढ़कर 13757 मेगावाट पहुंच गई. यानी एक साल में बिजली की मांग करीब 37 प्रतिशत बढ़ गई है.
विभाग के अनुसार पूर्वी मध्यप्रदेश के करीब 15 जिलों में सामान्य से लगभग 18 प्रतिशत कम बारिश हुई है. शहडोल, अनूपपुर, डिंडोरी, उमरिया, कटनी, मंडला, बालाघाट और सिवनी में पानी की कमी का असर बरगी, बाणसागर, इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर जैसी जलविद्युत परियोजनाओं पर पड़ा है. जलाशयों में कम आवक के कारण बिजली उत्पादन सीमित करना पड़ रहा हैए जिससे बिजली व्यवस्था पर अधिक दबाव बना हुआ है.
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घर के कोने-कोने से निकल रहे कोबरा, दो दिन में 14 कोबरा निकलने से डरा परिवार
उज्जैन। उज्जैन जिले के बड़नगर में एक घर में लगातार कोबरा सांप निकलने से परिवार दहशत में है। घर में बार-बार सांप निकलने की घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। जिस घर में सांप निकल रहे हैं उसके आसपड़ोस में स्थित मकानों में रहने वाले लोग सतर्क हो गए हैं और बार-बार अपने घरों की जांच कर रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं कोई कोबरा सांप उनके घर में न घुस आए।
बड़नगर के बदनावर रोड स्थित गंधर्व तलाई क्षेत्र में रहने वाले नंदकिशोर चौहान का परिवार इन दिनों सांपों की दहशत में है। दहशत की वजह घर में लगातार कोबरा सांप के बच्चे निकलना है। बीते दो दिनों में घर में एक दो नहीं बल्कि 14 कोबरा सांप के बच्चे निकले हैं। राहत की बात ये है कि सांप ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है। घर में लगातार निकल रहे कोबरा सांप के बच्चों को मकान मालिक नंदकिशोर चौहान किसी तरह पकड़कर सुरक्षित जंगल में छोड़कर आए हैं। नंदकिशोर चौहान के घर में लगातार निकल रहे कोबरा के बच्चों की घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
स्थानीय लोगों का अनुमान है कि मकान की नींव, किसी चेंबर या अन्य सुरक्षित स्थान पर कोबरा ने अंडे दिए होंगे, जिनसे अब एक-एक कर बच्चे बाहर निकल रहे हैं। लगातार सांप मिलने से परिवार भय के साये में रह रहा है, वहीं पूरे क्षेत्र के लोगों में भी चिंता बढ़ गई है। घटना के बाद इलाके में घर-घर तलाशी का दौर भी शुरू हो गया है। रहवासी अपने मकानों के आसपास सफाई रखने और संभावित छिपने वाले स्थानों की जांच कर रहे हैं। लोगों ने संबंधित विभाग से क्षेत्र का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि यदि कहीं और भी कोबरा के अंडे या घोंसले हों तो समय रहते उन्हें सुरक्षित हटाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव हो सके।
बता दें कि बारिश का सीजन शुरू हो चुका है और बारिश के साथ ही सांपों का खतरा भी बढ़ गया है। बारिश होने से सांपों के बिलों में पानी भर जाता है जिसके कारण सांप अपने बिलों से निकलकर लोगों के घरों या फिर किसी सुरक्षित स्थान में घुस जाते हैं। ऐसे में सावधानी बरतना बेहद आवश्यक होता है, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही आपकी जान ले सकती है। सांप के काटने पर कुछ बातों को याद रखने से किसी की भी जान बचाई जा सकती है। इसको लेकर जागरूक होना बेहद जरूरी है।
सांप के काटने पर क्या करें?
काटे गए अंग को जितना संभव हो स्थिर रखें।
तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचें।
झाड़-फूंक, चीरा लगाने या जहर चूसने जैसी गलत विधियों से बचें।
यदि संभव हो तो सांप की पहचान करने की कोशिश करें, लेकिन उसे पकड़ने का प्रयास न करें।
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‘फर्जी प्लास्टर’ का एक और खेल? हीरानगर के बाद अब परदेसीपुरा थाने का मामला आया सामने, 2 आरोपियों के वीडियो वायरल
इंदौर। इंदौर पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हीरानगर थाने के चर्चित कथित ‘फर्जी प्लास्टर’ विवाद के बाद अब परदेसीपुरा थाने से जुड़ा एक पुराना मामला फिर चर्चा में आ गया है। पत्रकार से मारपीट के मामले में गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों के वायरल वीडियो ने पुलिस के उस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें कहा गया था कि आरोपी पुलिस को देखकर भागते समय गिर गए थे और उनके हाथ-पैर में चोट आने के कारण प्लास्टर चढ़ाया गया था।
मामला 13 अगस्त 2025 का बताया जा रहा है। आरोप है कि परदेसीपुरा क्षेत्र में लिस्टेड बदमाश शुभम चौकसे और कुणाल पवार अपने साथियों के साथ एक पत्रकार के घर के बाहर शराब पी रहे थे। पत्रकार के विरोध करने पर विवाद बढ़ गया और आरोपियों ने उसके साथ मारपीट कर क्षेत्र में दहशत फैलाने की कोशिश की। घटना के बाद पुलिस ने दोनों सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तारी के बाद परदेसीपुरा पुलिस ने बताया था कि आरोपी पुलिस को देखकर भागने लगे थे। इसी दौरान गिरने से उनके हाथ-पैर में चोट आई और इलाज के दौरान प्लास्टर चढ़ाया गया। पुलिस ने इसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के तौर पर पेश किया था।
अब सामने आए वीडियो ने पूरे मामले को नई चर्चा में ला दिया है। वीडियो में 16 मामलों में दर्ज लिस्टेड बदमाश शुभम चौकसे प्लास्टर चढ़ा होने के बावजूद सामान्य तरीके से चलता हुआ दिखाई दे रहा है। वहीं दूसरे आरोपी कुणाल पवार एक वीडियो में लंगड़ाकर चलता नजर आता है, जबकि दूसरे वीडियो में वह बिना किसी परेशानी के सामान्य चाल से चलता दिखाई देता है। एक वीडियो में वह थाने के भीतर पुलिसकर्मियों के साथ हंसी-मजाक करता भी नजर आ रहा है। इन वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन वीडियो के बाद कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं कि क्या परदेसीपुरा थाने में भी आरोपियों को कथित तौर पर फर्जी प्लास्टर चढ़ाया गया था। यह आरोप इसलिए भी लगाए जा रहे हैं क्योंकि हीरानगर थाने के कथित फर्जी प्लास्टर मामले में वीडियो सामने आने के बाद वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने दावा किया था कि आरोपियों को फर्जी प्लास्टर चढ़ाने के लिए 20 हजार रुपये के लेनदेन की बात हुई थी। हालांकि, परदेसीपुरा मामले में इस तरह के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
गौरतलब है कि हीरानगर थाना क्षेत्र में सामने आए कथित फर्जी प्लास्टर मामले को पुलिस कमिश्नर ने गंभीरता से लिया था। मामले में डीसीपी ने थाना प्रभारी और एसीपी से करीब एक घंटे तक पूछताछ की थी और जांच के आदेश दिए गए थे। अब परदेसीपुरा थाने से जुड़ा यह पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में नजर इस बात पर रहेगी कि पुलिस कमिश्नर इस मामले में भी जांच के आदेश देते हैं या नहीं। उल्लेखनीय है कि परदेसीपुरा थाना प्रभारी आर.डी. कनवा का प्रमोशन हो चुका है और वे जल्द ही थाने से रिलीव होने वाले हैं।

भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के सुनसरी जिले में रविवार को हिंसक झड़प के बाद स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है. रविवार देर रात बोलबम यात्रा के दौरान Nepal के सुनसरी जिले में दो समुदायों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया. हिंसा में एक व्यक्ति की मौत के बाद प्रशासन ने कई इलाकों में अनिश्चितकाल के लिए कर्फ्यू लागू कर दिया है. सुरक्षाकर्मियों समेत 12 से अधिक लोग घायल हो गए.
प्रदर्शनकारियों द्वारा बाजार बंद कराने और उग्र प्रदर्शन को देखते हुए नेपाल प्रशासन ने जिले में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर नेपाली सेना तैनात कर दी है.
भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के सुनसरी जिले के देवानगंज में रविवार बोलबम यात्रा के दौरान दो धार्मिक समुदायों के बीच शुरू हुआ विवाद हिंसा का रूप ले लिया. पुलिस के मुताबिक, दो धार्मिक समुदायों के जश्न के दौरान हुए विवाद के बाद आपस में भिड़े समूहों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस की गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई और सुरक्षाकर्मियों समेत 12 से अधिक लोग घायल हो गए.
दो धार्मिक समुदायों के बीच शुरू हुआ विवाद हिंसक रूप लेते हुए पथराव, आगजनी और सुरक्षाबलों पर हमले के बाद स्थिति और बेकाबू हो गया. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले पुलिस को अश्रुगैस और हवाई फ़ायरिंग का सहारा लेना पड़ा. इतने पर भी भीड़ की स्थिति नहीं संभलने पर पुलिस ने फ़ायरिंग की जिसमें एक 24 साल के युवक ओम प्रकाश मेहता की मौत हो गयी.
हिंसा में 9 आम नागरिक, नेपाल पुलिस के 10 जवान और सशस्त्र पुलिस बल के 5 जवान घायल हो गए. पुलिस ने बताया कि घायलों में से दो की हालत गंभीर बनी हुई है.
इन इलाकों में मंगलवार को भी सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक पाबंदियां लागू रहीं. प्रशासन ने घोषणा की कि हालात सामान्य होने तक कर्फ्यू अगले आदेश तक जारी रहेगा.
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राहुल गांधी का बड़ा हमला, कहा- अमित शाह ने दिया फायरिंग का आदेश, लोकसभा में हंगामा, किरेन रिजिजू ने कहा प्रमाण दें
लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधनों की रोकथाम, संशोधन विधेयक, 2026 (Public Examinations Prevention of Unfair Means Amendment Bill, 2026) पर चर्चा के दौरान आज उस समय हंगामा हो गया जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने छात्रों पर गोलियां चलाने का आदेश दिया, सत्ता पक्ष ने इसपर आपत्ति जताते हुए हंगामा किया संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा राहुल गांधी जो कह रहे हैं उसका प्रमाण दे वर्ना माफ़ी मांगें।
लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बहुत आक्रामक अंदाज में दिखाई दिए, उन्होंने अपने अंदाज में भाषण दिया, प्रधानमंत्री मोदी सहित उनकी पूरी सरकार को नीट पेपर लीक मुद्दे पर कठघरे में खड़ा किया इस दौरान उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेकर एक ऐसी टिप्पणी कर दी जिससे लोकसभा में हंगामा हो गया
राहुल गांधी ने कहा आज मुझे यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि इस देश के तथाकथित गृह मंत्री में यहाँ आकर बैठने की हिम्मत नहीं है। मैंने उनका काफिला देखा और गृह मंत्री को कार के अंदर बैठे, कांपते हुए देखा। गृह मंत्री आज यहाँ क्यों नहीं हैं? क्योंकि वह डरे हुए हैं। गृह मंत्री डरे हुए हैं, उन्होंने ही हमारे छात्रों पर गोली चलाने की इजाज़त दी थी। उन्होंने हमारे छात्रों के शरीर में छर्रे घुसवाए, उन्होंने ही भारत के छात्रों पर गोली चलाने का आदेश दिया था।
राहुल गांधी के इस तरह सीधा कह देने से सत्ता पक्ष आक्रोशित हो गया, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पर आपत्ति जताते हुये कहा, आप ऐसा कैसे कह सकते हैं? आप विपक्ष के नेता हैं। आप किस आधार पर यह कह रहे हैं? आपको यह किसने बताया? आपने जो कहा, वह गलत है। मैं इस पर आपत्ति जताता हूं, इसे रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए। राहुल गांधी को माफ़ी मांगनी चाहिए, यह एक गंभीर आरोप है, यह उनके अपने पद और विशेषाधिकार का उल्लंघन है।
किरेन रिजिजू ने कहा राहुल गांधी ने कहा गृह मंत्री ने आर्डर दिया तो वे बताएं कौन सा आर्डर है उसकी कॉपी दिखाएँ आप ये बताइए किसने आपको बताया कि फायरिंग का आदेश गृह मंत्री ने दिया, आर्डर नंबर बताइए, किस व्यक्ति, किस अधिकारी को कहा वो बताइए, आप कॉपी निकालकर सदन में रखिये, ऐसे चर्चा नहीं होसकती कि कुछ भी बोलकर आप सदन से भाग जायेंगे हेड लाइन बटोरने के लिए। इसको हम हल्के में नहीं ले सकते, हम ऐसे आरोप लगाने नहीं देंगे, आपको माफी मांगनी होगी ऐसे बहस नहीं हो सकती है।
राहुल गांधी को टोकते हुए स्पीकर ओम बिरला ने कहा नेता प्रतिपक्ष से आग्रह है कि आप विधेयक पर बोलें, अगर कोई भी बात बोलें तो आप जांच की बात करें किसी का नाम न लें, राहुल गांधी ने कहा कि बच्चों के खिलाफ जो फोर्स यूज हुआ, उसकी इजाजत या तो गृहमंत्री या पीएम दे सकते हैं, हंगामा देखते हुए स्पीकर ने कहा ऐसे सदन नहीं चल सकता है फिर उन्होंने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
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कॉकरोच प्रोटेस्ट में पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर एक्शन, दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की
कॉकरोच प्रोटेस्ट में पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर दिल्ली पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल पर FIR दर्ज किया है। अभद्र भाषा का इस्तेमाल और इन वीडियो को सर्कुलेट करने के मामले में एफआईआर दर्ज की है। इसमें कुछ न्यूज पोर्टल और अलग-अलग X हैंल्डस को नोटिस भेजा गया है। भारत न्याय संहिता की धारा 351 (3) / 353 (2), / 356 (2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही लोगों को नोटिस भेजकर पुलिस ने जानकारी भी मांगी है।
आरोप है कि कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी (CJP) के प्रोटेस्ट में पीएम मोदी के खिलाफ अपमानजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया था। इन्हें सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया। ‘X’ और इंस्टाग्राम से वीडियो डिलीट करने की मांग की गई है और जिन हैंडल्स से वो सर्कुलेट हुए और वो वीडियो कहां से आए इसकी भी जानकारी मांगी गई है।
मामले में अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम लगातार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक कंटेंट की निगरानी कर रही है। ऐसे पोस्ट की पहचान होती है, तो संबंधित सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज को नोटिस जारी कर कंटेंट हटाने का निर्देश दिया जाता है। ऐसे नोटिस के बाद प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा वाले कई पोस्ट और वीडियो पहले ही हटा दिए गए हैं।
इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी की 23 जुलाई की सेल्फी वीडियो पोस्ट को कुछ समय के लिए हटाने के मामले में मंगलवार को सरकार के सख्त रुख अपनाने के बाद मेटा ने तकनीकी गलती मानते हुए माफी मांगी। हालांकि, सरकार ने मेटा के स्पष्टीकरण को अपर्याप्त बताते हुए उसे मामले की विस्तृत जानकारी देने को कहा है। इस संबंध में मेटा के अधिकारी को तलब किया गया है। सरकार कंपनी के स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है और उससे अधिक विस्तृत जानकारी मांगी है।

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध लिंग परीक्षण के बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। ऑपरेशन गरिमा के तहत की गई इस कार्रवाई में अधारताल स्थित डॉ. आर.के. अग्रवाल के आर.के. डायग्नोस्टिक सेंटर पर छापा मारकर कई अहम सबूत बरामद किए गए। कार्रवाई के बाद सेंटर को सील कर दिया गया। इसके अलावा अधारताल स्थित डॉ. अग्रवाल के एक अन्य डायग्नोस्टिक सेंटर को भी सील कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, कार्रवाई को सफल बनाने के लिए दो महिला पुलिसकर्मियों को गर्भवती बनाकर सेंटर भेजा गया। यहां कथित तौर पर ₹15 हजार में गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग बताने का सौदा तय हुआ। जांच के दौरान ऐसे कई सबूत मिले, जिनसे अवैध लिंग परीक्षण किए जाने की पुष्टि होने का दावा किया गया।
इतना ही नहीं, आरोप है कि यदि गर्भ में बेटी होने की जानकारी मिलती थी तो गर्भपात (अबॉर्शन) कराने के लिए अलग से रकम लेने की बात भी कही जाती थी। यह पूरा ऑपरेशन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अनु बेनीवाल के नेतृत्व में संचालित किया गया। फिलहाल पुलिस ने डायग्नोस्टिक सेंटरों को सील कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में संबंधित दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे और लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

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युवक-युवती का हाईवोल्टेज ड्रामा: गुस्से में लड़की ने बीच सड़क उतारे कपड़े...
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर के अलकापुरी इलाके से एक असहज कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां युवक और युवती के बीच हुए विवाद का एक CCTV वीडियो सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दोनों के बीच पहले बहस और फिर हाथापाई होती दिखाई दे रही है।
बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान गुस्से में युवती ने अपने कपड़े उतार दिए। इसके बाद वह रोती हुई भी दिखाई दी। वहीं, युवक उसे शांत कराने और कपड़े पहनाने की कोशिश करता नजर आया। हालांकि कुछ देर बाद युवती ने दोबारा कपड़े पहन लिए। घटना किस वजह से हुई, इसे लेकर अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि पूरे घटनाक्रम का CCTV फुटेज सामने आने के बाद मामला पुलिस के संज्ञान में पहुंच गया है।
यूनिवर्सिटी थाना पुलिस ने वीडियो के आधार पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और CCTV फुटेज की भी जांच की जा रही है। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति और विवाद की वजह स्पष्ट हो सकेगी।
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नेताजी के ‘बधाई वाले पोस्टर’ अब ले जाएंगे जेल? अवैध होर्डिंग्स-बैनरों पर हाईकोर्ट सख्त, अफसरों पर भी होगी FIR
भोपाल। मध्य प्रदेश में जन्मदिन, स्वागत और बधाई के नाम पर अवैध होर्डिंग्स-बैनरों से शहरों को बदरंग करने वाले नेताओं और उनके समर्थकों पर इंदौर हाईकोर्ट ने चाबुक चलाया है। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त आदेश जारी किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर लगे सभी राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक अवैध पोस्टरों को 24 घंटे के भीतर हटाया जाए।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में अवैध होर्डिंग्स नहीं हटाए गए तो इसके लिए संबंधित नगर निगम के ज़िम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सीधी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। अदालत का यह आदेश इंदौर के साथ-साथ राजधानी भोपाल और प्रदेश के सभी शहरों में लागू होगा।
राजधानी भोपाल और इंदौर समेत प्रदेश के लगभग सभी छोटे-बड़े शहरों के चौराहे, डिवाइडर और बिजली के खंभे स्थानीय नेताओं की पब्लिसिटी का अड्डा बने हुए हैं।
शहरों की रंगत हो रही खराब: सीनीयर नेताओं को खुश करने के लिए पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए जा रहे अवैध पोस्टरों और कटआउट्स से शहर की खूबसूरत सड़कें और चौराहे पूरी तरह बदरंग हो चुके हैं।
हाईकोर्ट ने नगर निगम और स्थानीय पुलिस प्रशासन को बेहद सख्त निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट का कहना है कि शिकायत दर्ज होते ही नगर निगम के अमले को 24 घंटे के भीतर मौके से अवैध बैनर-होर्डिंग हटाने होंगे।
यदि किसी एजेंसी या व्यक्ति के स्वीकृत होर्डिंग के ऊपर बिना अनुमति के किसी नेता या संगठन का पोस्टर चिपकाया जाता है तो ऐसा करने वालों पर सीधी एफआईआर दर्ज की जाएगी। हाईकोर्ट ने कहा कि नगर निगम का अमला ढिलाई बरतता है तो संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों पर कोर्ट के आदेश की अवहेलना की कार्रवाई होगी।

उज्जैन. पंचायती निर्मोही अणि अखाड़ा से जुड़े महामंडलेश्वर ज्ञान दास महाराज मुसीबत में फंस गए हैं. उन पर एक महिला ने दुष्कर्म, मारपीट और जान से मारने की धमकी के आरोप लगाए हैं. वहीं, ज्ञानदास महाराज ने इस मामले को ब्लैकमेलिंग व हनीट्रैप से जुड़ा बताया है. पुलिस दोनों ओर से की गई शिकायतों की जांच करने में जुटी है.
महिला ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि महामंडलेश्वर ज्ञान दास महाराज से उसकी दोस्ती फेसबुक पर हुई थी. इसके बाद दत्त अखाड़ा पर पहली मुलाकात हुई. विगत वर्ष गुरु पूर्णिमा पर वह उज्जैन पहुंची. इसके बाद वह वहीं रहने लगी. इसी दौरान ज्ञानदास महाराज ने उसके साथ दुष्कर्म किया. विरोध करने मारपीट की व जान से मारने की धमकी दी. उसके अश्लील वीडियो बनाकर प्रताडि़त किया जाने लगा. महिला ने ज्यादती की शिकायत गृह मंत्री, डीजीपी, आईजी व एसपी से भी की है.
ज्ञानदास का कहना है महिला ने उनसे 20-25 लाख रुपये व आश्रम अपने नाम करने की मांग रखी. महिला द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं. महिला पिछले एक वर्ष से ब्लैकमेल कर रही है. इसकी शिकायत मैंने महाकाल थाने पर की थी. इसके बाद महिला ने दुष्कर्म की शिकायत पुलिस से की. महिला द्वारा मेरे पर हमला भी करवाया गया था, जिस दिन मेरी गाड़ी पर हमला हुआ था, उसके पहले शाम को आश्रम पर पत्थरबाजी भी महिला और उसके प्रेमी द्वारा की गई.
महामंडलेश्वर का कहना है महिला द्वारा लगातार मोटी रकम की डिमांड की जा रही है. महिला ने मेरे ऊपर शादी का भी दबाव बनाया. उसने कहा था अगर नहीं करोगे तो दुष्कर्म के केस में जेल भिजवा दूंगी. महिला ने उन पर शादी के लिए लगातार दबाव बनाया और कहा कि इसके बाद सारा मैटर खत्म हो जाएगा. मैंने शादी भी कर ली. अब वह हिस्सा मांग रही व बदनाम कर रही है. महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल ने बताया दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत की है. महिला ने दुष्कर्म कर वीडियो बनाने मारपीट करने के साथ ही धमकी के आरोप लगाए हैं. महामंडलेश्वर ने महिला पर ब्लैकमेल करने के आरोप लगाए हैं. दोनों शिकायतों की जांच की जा रही है.
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मंदिर में मांस रखने पर बवालः तांत्रिक के कहने पर अमीर बनने के चक्कर में..., आरोपी रज्जाक को पुलिस ने भेजा जेल
खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की पंधाना तहसील अंतर्गत स्थित प्रसिद्ध शिव और हनुमान मंदिर में मांस का टुकड़ा फेंके जाने के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी रज्जाक (पिता गनी खान) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी ने पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उसने अमीर बनने की चाहत में एक तांत्रिक बाबा के बहकावे में आकर मंदिर में मांस रखा था। हालाँकि, पुलिस प्रशासन का कहना है कि आरोपी की मानसिक स्थिति की भी तकनीकी जाँच कराई जाएगी।
मंदिर जैसी पवित्र जगह पर इस तरह की नापाक हरकत सामने आते ही पूरे पंधाना क्षेत्र में भारी हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों व हिंदू संगठनों में आक्रोश फैल गया। घटना के विरोध में बड़ी संख्या में हिंदू संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता पंधाना थाने पहुँचे और पुलिस प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराते हुए थाने का घेराव कर दिया। प्रदर्शनकारी आरोपी पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे। मौके पर पहुंचे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने आक्रोशित लोगों को जल्द व कड़ी कानूनी कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया, जिसके बाद स्थिति नियंत्रण में आई।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य कड़ियों को जोड़ते हुए आरोपी रज्जाक की पहचान की गई और उसे हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान अपराध स्वीकार करने के बाद आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से कोर्ट के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब मामले में संलिप्त तांत्रिक के एंगल सहित सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है।
महेंद्र तारनेकर, ASP ने बताया-आरोपी को साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। आरोपी के बयानों और उसकी मानसिक स्थिति की भी निष्पक्ष जांच की जा रही है। शांति और सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
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7 अगस्त से पूरे प्रदेश में शुरू होगा जन विश्वास अभियान, मंत्री, विधायक, कलेक्टर,अधिकारी गांव-वार्डों में पहुंचकर सुनेंगे समस्याएं
भोपाल। मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन सरकार ने जन समस्याओं के त्वरित समाधान और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए ‘जन विश्वास अभियान’ शुरू करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में यह अभियान 7 अगस्त से पूरे प्रदेश में शुरू होगा और हर शुक्रवार संचालित किया जाएगा। अभियान के तहत मंत्री, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी गांवों एवं शहरी वार्डों में पहुंचकर आम जनता से सीधे संवाद करेंगे, उनकी समस्याएं सुनेंगे और सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की समीक्षा करेंगे। इसका उद्देश्य शासन को जनता के और करीब लाना तथा प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में हुए निर्णय अनुसार अब प्रत्येक शुक्रवार मंत्रालय, जिला और संभाग स्तर पर नियमित बड़ी बैठकें नहीं होंगी। इसके बजाय मंत्री, जनप्रतिनिधि और अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर लोगों से सीधे संवाद करेंगे। अभियान के दौरान विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी, ताकि पात्र हितग्राहियों तक समय पर योजनाओं का लाभ पहुंच सके।
जनविश्वास अभियान का मुख्य उद्देश्य जन शिकायतों के त्वरित निराकरण के साथ शासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करना है। अधिकारी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनेंगे तथा जहां संभव होगा, वहीं उनका समाधान करेंगे। जिन मामलों में तत्काल समाधान संभव नहीं होगा, उनका समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा कि जनविश्वास अभियान सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद बढ़ेगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी। उन्होंने बताया कि मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों से अभियान की शुरुआत करेंगे।
अभियान के दौरान यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार, अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अभियान का मूल मंत्र संवाद, समाधान, संवेदनशीलता और सादगी रहेगा। इसके लिए किसी अतिरिक्त बजट का प्रावधान नहीं किया गया है और अनावश्यक तामझाम से भी बचा जाएगा। सरकार की प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे इस अभियान का लाभ उठाते हुए अपनी समस्याएं, शिकायतें और सुझाव सीधे अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के समक्ष रखें। सरकार का मानना है कि प्रशासन के सीधे जनता के बीच पहुंचने से शिकायतों के समाधान में तेजी आएगी, योजनाओं की प्रभावी निगरानी होगी और शासन व्यवस्था अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनेगी।
मध्य प्रदेश सरकार पहले भी जनकल्याण शिविरों और विभिन्न जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास करती रही है। जनविश्वास अभियान को इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का विश्वास है कि यह पहल न केवल योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेगी, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास के रिश्ते को भी और मजबूत बनाएगी।

नई दिल्ली। NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों और उन पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को अंतरिम राहत दी है। अदालत ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR में फिलहाल किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही केंद्र सरकार और सात राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पूरे मामले में ऐसे कई आरोप सामने आए हैं जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जिन प्रदर्शनकारियों की उम्र 18 वर्ष से कम है और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। अदालत ने माना कि नाबालिगों के साथ कानून के अनुसार संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए और बिना पर्याप्त आधार के उन्हें हिरासत में रखना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जिन राज्यों में प्रदर्शन हुए हैं, वहां मौजूद सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए ताकि भविष्य की जांच में किसी तरह की बाधा न आए।
पीठ ने सभी संबंधित राज्यों को निर्देश दिया कि प्रदर्शन से जुड़े CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा फुटेज, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड और PCR लॉग को सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों से जुड़ा यदि कोई डिजिटल डेटा या अन्य जानकारी एकत्र की गई है तो उसे सुरक्षित रखा जाए, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया जाए। कोर्ट ने माना कि डिजिटल साक्ष्य किसी भी स्वतंत्र जांच का महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं और इन्हें नष्ट होने से बचाना जरूरी है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि विभिन्न याचिकाओं में कई समान आरोप सामने आए हैं। इनमें एक 19 वर्षीय युवक की आंख की रोशनी पैलेट गन के इस्तेमाल से जाने का मामला भी शामिल है। अदालत के सामने इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल, गंभीर रूप से घायल एक युवती के ICU में भर्ती होने, वकीलों पर हमले और एक मीडिया कर्मी के साथ कथित मारपीट के आरोप भी रखे गए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह गंभीर चिंता का विषय है और इसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार यह एक शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन था, जिसमें संविधान के दायरे में रहते हुए कुछ मांगें उठाई जा रही थीं। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार ऐसे प्रदर्शनों में कुछ ऐसे लोग शामिल हो जाते हैं जिनका अपना अलग एजेंडा होता है और बाद में वही माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। हालांकि अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पुलिसकर्मियों के परिवारों की ओर से भी याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें पुलिस पर हमले के आरोप लगाए गए हैं। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि यह केवल दिल्ली तक सीमित मामला नहीं है बल्कि देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने अदालत के सामने एक वीडियो का हवाला देते हुए दावा किया कि उसमें एक सहायक उप निरीक्षक (ASI) खुद एक कार के शीशे तोड़ता दिखाई दे रहा है। उनका कहना था कि यदि जिम्मेदारी केवल निचले स्तर तक सीमित रही तो जवाबदेही तय नहीं हो पाएगी। वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने अदालत को बताया कि कई पुलिसकर्मी बिना नाम की पट्टी के ड्यूटी पर मौजूद थे, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया।
बिहार से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने कहा कि वहां हालात दिल्ली से भी अधिक गंभीर रहे। उन्होंने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने कुछ FIR वापस लेने का दावा किया है, लेकिन इसके बावजूद 140 से अधिक लोग अब भी हिरासत में हैं। इनमें बड़ी संख्या 16 से 18 वर्ष के किशोरों की है, जबकि एक 13 वर्षीय बच्चे का भी मामला सामने आया। उनका आरोप था कि इन नाबालिगों को 40 घंटे से अधिक समय बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि जुनैद मलिक नाम का एक युवक केवल प्रदर्शनकारियों को भोजन पहुंचाने गया था, लेकिन उसे हिरासत में लेकर आंखों पर पट्टी बांधकर मसूरी हाईवे पर छोड़ दिया गया। उन्होंने दावा किया कि उसके परिवार से भी पूछताछ की गई। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत के सामने यह मुद्दा उठाया कि जंतर-मंतर क्षेत्र में सुबह चार बजे पत्थरों से भरा ट्रक कैसे पहुंचा। उन्होंने कहा कि यदि ट्रक दिल्ली पुलिस की कई सुरक्षा परतों को पार करके अंदर पहुंच गया तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने भी अदालत से कहा कि यदि पुलिस को ही यह जानकारी नहीं है कि ट्रक वहां कैसे पहुंचा, तो यह पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
श्याम दीवान ने अदालत के सामने यह मुद्दा भी रखा कि प्रदर्शन के दौरान यदि चेहरा पहचानने वाली तकनीक (Facial Recognition) का इस्तेमाल किया गया है तो उससे जुटाए गए डेटा का उपयोग प्रदर्शनकारियों की प्रोफाइलिंग के लिए नहीं होना चाहिए। इस पर अदालत ने भी कहा कि प्रदर्शनकारियों से जुड़ा कोई भी डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाएगा और उसे केवल सुरक्षित रखा जाएगा ताकि जांच प्रभावित न हो।
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने पुलिसकर्मियों के सुरक्षा उपकरणों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भीड़ नियंत्रण के दौरान आक्रामक हथियारों की तुलना में सुरक्षात्मक उपकरण अधिक महत्वपूर्ण हैं। अदालत ने संकेत दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस व्यवस्था की भी समीक्षा की जानी चाहिए।
सुनवाई के अंत में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों और आरोपों को देखते हुए सबसे संयमित शब्दों में भी यह कहा जा सकता है कि मामले की स्वतंत्र जांच आवश्यक दिखाई देती है। अदालत ने संकेत दिया कि पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति या विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जा सकता है। फिलहाल केंद्र सरकार और सात राज्यों से जवाब तलब किया गया है और मामले की अगली सुनवाई में आगे की कार्रवाई तय होगी।
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नक्सलियों को बड़ा झटका, 6 इनामी समेत 16 माओवादियों ने किया सरेंडर, हथियार पुलिस को सौंपे
रांची. झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. मंगलवार को रांची में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़े 16 नक्सलियों ने झारखंड पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. आत्मसमर्पण करने वालों में छह इनामी नक्सली शामिल हैं, जिन पर कुल 39 लाख रुपये का इनाम घोषित था. इस समूह में पांच महिला नक्सली भी शामिल हैं.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन का एक क्षेत्रीय समिति (रीजनल कमेटी) सदस्य, एक जोनल कमेटी सदस्य, दो सब-जोनल कमेटी सदस्य और दो एरिया कमेटी सदस्य भी शामिल हैं. इसे राज्य में नक्सल उन्मूलन अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.
आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे प्रमुख नाम संतोष महतो उर्फ बसुदेव दा उर्फ दिलीप का है. वह प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) का रीजनल कमेटी सदस्य था और उसके ऊपर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था. पुलिस के मुताबिक, संतोष महतो 128 आपराधिक मामलों में वांछित था. उसके ऊपर एक मार्च को मनोहरपुर, छोटानगर और झारियाकेला थाना क्षेत्र की सीमा से लगे जंगल में आईईडी विस्फोट की घटना में शामिल होने का भी आरोप है. इस विस्फोट में कोबरा बटालियन का एक जवान घायल हो गया था.
आत्मसमर्पण करने वालों में जोनल कमेटी सदस्य चंदन लोहरा भी शामिल है. उसके खिलाफ 78 मामले दर्ज हैं और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था. पुलिस का मानना है कि उसके आत्मसमर्पण से संगठन की गतिविधियों को बड़ा झटका लगेगा.
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी जमा कराया. इनमें छह इंसास राइफल, दो एके-47 राइफल, 38 मैगजीन और 1,562 कारतूस शामिल हैं. पुलिस का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों से पूछताछ की जा रही है और उन्हें सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आगे की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा.
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‘जो राम मंदिर का चढ़ावा नहीं बचा बचा सके, वे पेपर लीक कैसे बचाएंगे…,’ अखिलेश यादव बोले- प्रधान को हटाकर के प्रधानमंत्री को बचा लिया
संसद के लोकसभा में पेपर लीक कानून संशोधन बिल पर चर्चा हो रही है। चर्चा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शब्दों के बाण छोड़े जा रहे हैं। सपा चीफ अखिलेश यादव ने भी पेपप लीक चर्चा में भाग लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला। अखिलेश यादव ने कहा कि जो राम मंदिर का चढ़ावा नहीं बचा बचा सके, वे पेपर लीक कैसे बचाएंगे। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने प्रधान को हटाकर के प्रधानमंत्री को बचा लिया। सरकार की नियत साफ होगी, तब जाकर पेपर साफ होगा।
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए सपा चीफ अखिलेश यादव ने कहा कि आंदोलन को बहुत दूर से देख रहा था. उस आंदोलन में जीत के बाद एक नारा लगा, सरकार के खिलाफ नारा लगा कि सरकार को अहंकार था कि सरकार झुकती नहीं है। नई पीढ़ी ने नारा दिया कि सरकार भी झुकती है, झुकानेवाला चाहिए। सरकार झुक गई है।
खिलेश यादव ने कहा कि करोड़ों युवाओं की मांग थी कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। धर्मेंद्र प्रधान अब मंत्री नहीं है। जब वे सदन लौटे हैं तो उनका स्वागत हुआ। हमें स्वागत से समस्या नहीं है। कितनी राहत मिली होगी कि एक प्रधान जी को हटाकर के प्रधानमंत्री बचा लिए आपने। यह सरकार कई वर्षों से नकारात्मक राजनीति करती थी। कितने हजार करोड़़ रुपये नकारात्मक प्रचार के लिए खर्चा किया, युवा पीढ़ी को बधाई देता हूं कि युवाओं ने झुका दिया।
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर हम यह मानें कि 20 लाख बच्चों ने परीक्षा दी थी। अगर यह मानें कि एक परिवार में पांच लोग हों, तो एक करोड़ लोग होते हैं। हम राजनीतिक लोग हैं. आंदोलन करते हैं तो देखते हैं कि कितनी तैयारी करनी पड़ती है। पहला आंदोलन देखा, जिसमें बच्चों के मां-बाप ने कहा कि जाओ, आंदोलन करो. अगर यह गलत बात है, तो गृह मंत्री को लाइए, वे सब साफ कर देते हैं। जो लोग चढ़ावा नहीं बचा सके, वो लोग पेपर लीक कैसे बचा पाएंगे. भगवान के दरबार से दान गायब हो गया। लोगों की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। 20 परीक्षाएं लीक हो गईं। कोर्ट जाना पड़ा, इसके बाद परीक्षाएं रद्द हुईं। यूपी टीईटी का एक नहीं, तीन बार पेपर लीक हुआ। अखिलेश यादव ने पेपर लीक की घटनाओं का सिलसिलेवार तरीके से उल्लेख किया और कहा कि जहां से प्रधानमंत्री चुनकर आते हैं, उस यूपी में भी पेपर लीक हो रहा है। हमें आउटसोर्सिंग से डर लगता है, कहीं ऐसा न हो कि पूरी सरकार आउटसोर्स हो जाए। यही अकाउंटिबिलिटी है आपकी, कि सबसे महत्वपूर्ण संस्था को आउटसोर्स किए हुए हैं आप। एनटीए में सब आउटसोर्स. हमें पता होना चाहिए कि वो कौन लोग थे, जो एनटीए में बैठकर घोटाला कर रहे थे।
अखिलेश की स्पीच पर किरण रिजिजू ने कहा, अखिलेशजी तो समाजवादी हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार बिल लेकर आती है, ये अच्छा है या आंदोलन के बाद सरकार उसे कुचलने के लिए इमरजेंसी लगा देती है, वो अच्छा है? अखिलेश यादव का जवाब- इमरजेंसी तो नहीं देखी,लेकिन इमरजेंसी में क्या-क्या हुआ वो दिल्ली में भी देखने को मिल गया। याद दिला दूं इमरजेंसी के बाद परिवर्तन हुआ था इस बार भी परिवर्तन होगा।

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
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गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
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गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
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बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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