


भोपाल। मध्य प्रदेश के भोपाल एयरपोर्ट पर डेढ़ करोड़ की ज्वेलरी गायब होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि एक महिला यात्री अमेरिका से भोपाल पहुंची थी। जिसने हीरे की चैन, अंगूठी और अन्य कीमती समान गायब होने की शिकायत दर्ज कराई है। यह पूरा मामला शनिवार की रात राजभोज हवाई अड्डे का है।
महिला यात्री शालिनी बाफना का दावा है कि उसने ज्वेलरी चेक इन बैग में रखी थी। इसकी शिकायत भोपाल एयरपोर्ट अथॉरिटी और इंडिगो को मेल के जरिए की गई है। वहीं CISF की टीम से एयरपोर्ट के सभी सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई गई। बैगेज स्क्रीनिंग के दौरान भी बैग में ज्वेलरी का कोई पैकेट या संदिग्ध सामग्री दिखाई नहीं दी। इस पूरे मामले की जानकारी संबंधित एयरलाइन इंडिगो को भी दी है।
हालांकि महिला पैसेंजर को बता दिया गया है कि सीसीटीवी फुटेज और स्कैनिंग रिपोर्ट में ज्वेलरी के गायब होने के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। महिला यात्री शालिनी अमेरिका से भोपाल पहुंची थीं। वह भोपाल से मुंबई जाने वाली इंडिगो की फ्लाइट में सवार होने वाली थीं। वहीं एयरपोर्ट प्रशासन का कहना है कि प्रथम दृष्टया जांच में किसी तरह की चोरी या गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल इंडिगो और शिकायतकर्ता शालिनी बाफना के बीच संपर्क बना हुआ है।
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एक ही घर या परिसर में दो बिजली कनेक्शन मिले तो होगी कार्रवाई
भोपाल। भोपाल में एक ही परिसर में दो कनेक्शन के खिलाफ कार्रवाई शुरू होगी, इसको लेकर मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी तैयारी कर रही है। शहर में इस तरह के करीब 32 हजार बिजली उपभोक्ता हैं। एक साल पहले इसको लेकर एसीएस स्तर से चर्चा व निरीक्षण भी हुआ था, तब दो कनेक्शन को लेकर नई नीति बनाना तय किया गया था। साथ ही एक साल से ही शहर में एक परिसर में दो कनेक्शन देने पर रोक लगाई गई है।
एक परिसर में दो कनेक्श पर रोक लगाने के पीछे की वजह यह है कि शासन ने 150 यूनिट तक की खपत को छूट के दायरे में रखा है। पहले 100 यूनिट के लिए प्रति यूनिट एक रुपया शुल्क, जबकि इसके बाद 50 यूनिट तक तय टैरिफ से राशि लेने का प्रविधान है।
यदि किसी परिसर में दो कनेक्शन हैं तो वहां 300 यूनिट तक की खपत पर छूट ली जा सकेगी। वहीं कंपनी को आशंका है कि इलेक्ट्रिक वाहन की बढ़ती संख्या को देखते हुए लोग दो कनेक्शन से बिल में लाभ ले रहे हैं।
मकान मालिक पहले किराएदार के लिए अलग कनेक्शन ले लिया करते थे। अब ऐसा नहीं हो रहा, जिससे हर माह बिल का विवाद बना रहता है। वहीं, एक ही घर में बंटवारा कर रह रहे भाई या अन्य रिश्तेदार बिजली का अलग कनेक्शन नहीं मिलने से परेशान हैं। बिल विवाद का सबब बना हुआ है। कनेक्शन के लिए अलग रजिस्ट्री मांगी जा रही जो संभव नहीं है।
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गणतंत्र दिवस की गूंज के बीच नेहरू पार्क बना अखाड़ा, छात्राओं के दो गुटों में जमकर मारपीट
बैतूल। जिले में एक ओर जहां पुलिस ग्राउंड पर गणतंत्र दिवस का मुख्य समारोह पूरे गौरव के साथ चल रहा था। वहीं दूसरी ओर कुछ ही दूरी पर स्थित नेहरू पार्क में उस वक्त हड़कंप मच गया। जब छात्राओं के दो गुट आपस में भिड़ गए। देखते ही देखते नेहरू पार्क अखाड़े में तब्दील हो गया।
बाल पकड़कर खींचना लात-घूंसे चलना और बीच सड़क तमाशा बन जाना यह सब कुछ गणतंत्र दिवस के माहौल के बीच कैमरे में कैद हो गया। हालात ऐसे बने कि गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम देखने आए लोग मुख्य समारोह छोड़कर इस मारपीट को देखने उमड़ पड़े।
छात्राओं की यह मारपीट अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। हालांकि अभी तक दोनों ही पक्षों की ओर से पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। विवाद की असल वजह क्या थी यह फिलहाल साफ नहीं हो पाया है।
इंदौर। शहर में मोबाइल लूट की वारदातों को अंजाम देने आए दो शातिर बदमाशों ने महज 10 मिनट के भीतर 8 जगह झपटमारी कर सनसनी फैला दी। आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए न सिर्फ चोरी की बाइक का इस्तेमाल किया, बल्कि उसकी नंबर प्लेट बदलकर फर्जी पहचान के साथ वारदातों को अंजाम दिया। हालांकि, विजय नगर पुलिस की मुस्तैदी के आगे बदमाश ज्यादा देर टिक नहीं सके और देवास भागने से पहले ही गिरफ्त में आ गए।
जानकारी के अनुसार आरोपी दूसरे शहर से इंदौर पहुंचे थे। वारदात से पहले उन्होंने एक बाइक चोरी की और उसकी नंबर प्लेट किसी दूसरी बाइक की लगा दी, ताकि पहचान छिपाई जा सके। इसके बाद शहर में लूट का सिलसिला शुरू हुआ। विजय नगर क्षेत्र में 10 मिनट के भीतर 5 मोबाइल झपटे गए, वहीं खजराना इलाके में 3 और वारदातों को अंजाम देकर आरोपी शहर की सीमा पार करने की फिराक में थे।
थाना प्रभारी चंद्रकांत पटेल ने बताया कि 22 जनवरी की रात कुछ ही समय के अंतराल में पांच फरियादी थाने पहुंचे और मोबाइल लूट की शिकायत दर्ज कराई। लगातार आ रही शिकायतों से पुलिस को अंदेशा हुआ कि किसी बाहरी गिरोह ने अचानक इलाके में दस्तक दी है। बिना समय गंवाए विशेष टीम गठित की गई और घटनास्थलों के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की गई।जांच में सामने आया कि वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक खजराना क्षेत्र से चोरी की गई थी, जबकि उस पर लगी नंबर प्लेट किसी अन्य वाहन की थी। पुलिस ने बदमाशों के कपड़ों, हुलिए और भागने के रूट को ट्रैक करना शुरू किया।
सीसीटीवी फुटेज में एक आरोपी लाल रंग की जैकेट पहने नजर आया, जो पुलिस के लिए अहम सुराग साबित हुआ। इसी बीच सूचना मिली कि विजय नगर के बाद खजराना में भी तीन मोबाइल लूट की घटनाएं हो चुकी हैं। इससे साफ हो गया कि आरोपी देवास की ओर भागने की योजना बना चुके हैं। पुलिस टीम ने संभावित रूट पर घेराबंदी की और देवास जिले के पानीगांव पहुंचने से पहले ही दोनों बदमाशों को दबोच लिया।
इन्हीं वारदातों में आदर्श मेघदूत नगर स्थित अपोलो प्रीमियम बिल्डिंग निवासी अपेक्षा बारोलिया भी शिकार बनीं। वे इंदरगढ़ होटल के सामने टहल रही थीं, तभी बाइक सवार बदमाशों ने उनका आईफोन 16 प्रो झपट लिया और मौके से फरार हो गए। इसके अलावा संस्कार गुप्ता, विष्णु मालवीय और धर्मेंद्र कुमार से भी मोबाइल लूटे गए थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कृष्ण मालवीय पिता रमेश मालवीय और चेतर उर्फ गोलू पिता मोहनलाल कहार के रूप में हुई है। दोनों देवास जिले के ग्राम पानीगांव, थाना कांटा फोड़ के निवासी बताए जा रहे हैं। पुलिस के उप निरीक्षक बलवीर रघुवंशी,प्रधान आरक्षक प्रमोद शर्मा ,आरक्षक पार्थ,आरक्षक मोनू और साइबर सेल के आरक्षक प्रणीन द्वारा आरोपियों के पास से लूटे गए मोबाइल बरामद कर लिए हैं और उनसे अन्य वारदातों को लेकर पूछताछ जारी है।
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तिरंगा फहराने के समय आया हार्ट अटैक, अचानक जमीन पर गिरा बुजुर्ग, CPR देकर बचाई गई जान
सिवनी। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के दौरान एक बुजुर्ग को हार्ट अटैक आ गया। वृद्ध को अचानक दिल का दौरा पड़ने से कार्यक्रम में मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। हालांकि तत्परता से सीपीआर देकर उनकी जान बचाई गई।
सिवनी जिले के छपारा नगर के वार्ड क्रमांक एक में सोमवार गणतंत्र दिवस के मौके पर मानवता की मिसाल देखने को मिली। झंडा वंदन कार्यक्रम के दौरान अचानक एक बुजुर्ग मुनीलाल उइके को हार्ट अटैक आ गया। जिसके चलते वह जमीन कर गिर गए और बेहोश हो गए। वहां मौजूद सह वार्ड प्रभारी प्रदीप उइके यह देख उनके पास दौड़ पड़े।
नगर परिषद के सह वार्ड प्रभारी प्रदीप उइके ने बुजुर्ग का सीना दबाकर सीपीआर देकर उनकी जान बचाई। इसके बाद नगर परिषद वार्ड के पार्षद दिनेश उइके और प्रभारी गणेश झरिया ने उनको तुरंत अस्पताल पहुंचाया। जहां उनका इलाज जारी है।
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बंदूक की दुकान में धमाका, आग में 3 झुलसे, क्षेत्र में फैली दहशत
रतलाम। शहर के व्यस्त चांदनी चौक क्षेत्र में सोमवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब एक आर्म्स दुकान में अचानक जोरदार धमाका हो गया। धमाके के बाद दुकान में आग लग गई, जिसमें तीन लोग गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। झुलसने के बाद एक व्यक्ति का मदद मांगते हुए वीडियो भी सामने आया है।
जानकारी के अनुसार चांदनी चौक स्थित अब्दुल कादरी की आर्म्स दुकान में बंदूकें और अन्य सामग्री रखी हुई थी। घटना के बाद दुकान के भीतर खाली कारतूस भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि दुकान में वेल्डिंग का कार्य चल रहा था, इसी दौरान निकली चिंगारी बारूद पर जा गिरी, जिससे विस्फोट हो गया।
धमाका इतना तेज था कि आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया। आग लगते ही मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से आग पर काबू पाने के साथ राहत कार्य किए गए।
सूचना मिलते ही पुलिस और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। फॉरेंसिक विशेषज्ञ यह पता लगाने में जुटे हैं कि दुकान में रखा बारूद ही फटा या धमाके के पीछे कोई अन्य कारण है। पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। फिलहाल घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है।
चमोली. उत्तराखंड के चारधाम- केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री समेत 48 मंदिरों में जल्द गैर-हिंदुओं की एंट्री पर प्रतिबंध लग सकता है. बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी), गंगोत्री और यमुनोत्री धाम मंदिर समिति की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर सरकार में सहमति बन गई है. यह प्रतिबंध सिख, जैन और बौध धर्म के अनुयायियों पर लागू नहीं होगा.
चारधाम के अलावा मंदिर समितियों के अधीन आने वाले 44 अन्य मंदिरों के लिए भी इसी तरह के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं. वहीं, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में तीर्थ पुरोहितों की आस्था को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने की बात कही है.
बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि बद्रीनाथ और केदारनाथ समेत मंदिर समिति के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा. इस बैठक में तीर्थ पुरोहित और धर्माधिकारी भी शामिल होंगे.
इससे पहले गंगोत्री मंदिर समिति ने रविवार को बैठक कर सर्वसम्मति से फैसला लिया कि अब गंगोत्री धाम में मंदिर और गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा. मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि सिख धर्म के अनुयायी हिंदू धर्म की ही एक शाखा माने जाते हैं, इसलिए उन पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा. वहीं यमुनोत्री धाम मंदिर समिति ने गैर-हिंदुओं की एंट्री पर बैन को लेकर प्रस्ताव तैयार कर लिया है. मंदिर समिति के सचिव पुरुषोत्तम उनियाल ने बताया कि इसे जल्द लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. उन्होंने साफ किया कि हिंदू धर्म की शाखाओं में आने वाले अनुयायियों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा.
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बाड़मेर की जिला कलेक्टर फिर चर्चा में, झंडारोहण के बाद उल्दी दिशा में ली सलामी
राजस्थान के बाड़मेर की जिला कलेक्टर टीना डाबी एक बार फिर सोशल मीडिया की सुर्खियों में हैं। इस बार वजह कोई प्रशासनिक फैसला या सम्मान नहीं, बल्कि गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगा फहराने का एक वीडियो है। वीडियो में सलामी के दौरान कुछ पलों के लिए उनकी दिशा को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
गणतंत्र दिवस की सुबह बाड़मेर में उत्सव और अनुशासन के साथ शुरू हुई। टीना डाबी ने सबसे पहले अपने सरकारी आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके बाद जिला कलेक्टर कार्यालय परिसर पहुंचीं, जहां अधिकारी, कर्मचारी और छात्राएं मौजूद थीं। पूरा परिसर राष्ट्रगान और ध्वजारोहण के लिए तैयार था।
जब तिरंगा फहराया गया और सलामी दी जा रही थी, तब कुछ क्षणों के लिए टीना डाबी विपरीत दिशा में खड़ी नजर आईं। हालांकि, सुरक्षा जवान के इशारे पर उन्होंने तुरंत अपनी दिशा ठीक कर ली। अधिकांश लोगों ने इसे सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा मानते हुए कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी।
कार्यक्रम खत्म होने के बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। एक्स (पूर्व ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रिया देने लगे।
यह पहला मौका नहीं है जब टीना डाबी चर्चा में आईं। इससे पहले उनके कार्यकाल से जुड़े कई मुद्दे ऑनलाइन बहस का विषय बन चुके हैं। ‘नवो बाड़मेर अभियान’ और अन्य विकास कार्यों को लेकर उन्हें सराहना भी मिली और आलोचना भी। यूपीएससी क्रैक करने से लेकर फील्ड में सक्रिय भूमिका तक, उनका हर कदम सोशल मीडिया पर नजर में रहता है।
टीना डाबी ने आजतक से कहा कि ध्वजारोहण के दौरान उनके दोनों ओर कर्मचारी खड़े थे। उन्हें देखकर वह थोड़ी तिरछी खड़ी हो गईं, लेकिन अगले ही पल उन्होंने दिशा ठीक कर ली। उन्होंने इसे सामान्य स्थिति बताया और कहा कि इसमें किसी अनादर या असावधानी का सवाल नहीं है।
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भारत का नया अंतरिक्ष हीरो : ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को मिला अशोक चक्र, गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान अंतरिक्ष यात्री बनने की उनकी बहादुरी और अदम्य हिम्मत के लिए दिया। शुभांशु भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री बन गए, जिन्हें शांति काल का वीरता पुरस्कार और अशोक चक्र दोनों मिले।
शुभांशु शुक्ला की यात्रा दिखाती है कि हिम्मत केवल युद्ध के मैदान के लिए नहीं, बल्कि अंतरिक्ष की ऊंचाइयों के लिए भी जरूरी है। लखनऊ के एक आम युवा से लेकर अंतरिक्ष मिशन तक की उनकी कहानी भारत के अंतरिक्ष सपनों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
राकेश शर्मा की उड़ान के 41 साल बाद, शुभांशु की सफलता ने नई उम्मीदें और प्रेरणा पैदा की है। यह सम्मान न केवल उनकी स्किल की पहचान करता है, बल्कि अंतरिक्ष में इंसानी सीमाओं को आगे बढ़ाने की हिम्मत को भी सराहता है।
लखनऊ में जन्मे शुभांशु शुक्ला ने 17 साल की उम्र में अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने कारगिल युद्ध और IAF एयरशो से प्रेरित होकर, एक दोस्त के फॉर्म का इस्तेमाल करके नेशनल डिफेंस एकेडमी के लिए अप्लाई किया।
साल 2006 में शुभांशु शुक्ला IAF में फाइटर पायलट बने। उन्होंने Su-30MKI, MiG-21, MiG-29, Jaguar और Hawk जैसे जेट पर 2,000 घंटे से अधिक उड़ान भरी। इसके बाद वे टेस्ट पायलट और कॉम्बैट लीडर बने। उन्होंने IISc बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री भी हासिल की।
साल 2019 में उन्हें ISRO ने गगनयान मिशन के लिए चुना। इसके बाद उन्होंने रूस के यूरी गगारिन सेंटर में ट्रेनिंग ली और NASA और ISRO के सेशंस में भी हिस्सा लिया। उन्हें इस प्रोग्राम के चार फाइनल उम्मीदवारों में से एक चुना गया।
सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में रविवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। सफेद मिट्टी की एक खदान अचानक धंस गई, जिससे उसमें काम कर रहे पांच लोग दब गए। इस हादसे में तीन महिलाएं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोगों को गंभीर हालत में सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। वहीं घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
लगातार कड़ी मेहनत के बाद दबे हुए दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिन्हें तुरंत इलाज के लिए देवसर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। यह हादसा जियावन थाना क्षेत्र की कुदवार चौकी के अंतर्गत आने वाले इलाके में हुआ। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सभी लोग सफेद मिट्टी, जिसे स्थानीय भाषा में ‘छूही’ कहा जाता है, निकालने के लिए खदान में उतरे थे। इसी दौरान खदान की मिट्टी अचानक धंस गई, जिससे यह भयावह दुर्घटना सामने आई। घटना के बाद इलाके में मातम का माहौल है।
शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि खदान में फंसे लोग परसोहर और हर्हा गांव के रहने वाले हैं। पुलिस को डर है कि मिट्टी के मलबे के नीचे अभी और लोग दबे हो सकते हैं। इसी वजह से मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार चलाया जा रहा है। दूसरी ओर घटना की खबर मिलते ही पुलिस के साथ-साथ प्रशासनिक अमला भी तुरंत घटनास्थल पर पहुंच चुका है।
यहां मशीनों और स्थानीय लोगों की मदद से राहत कार्य किया जा रहा है। हादसे के बाद पूरे इलाके में सन्नाटा और डर का माहौल है। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर खदान धंसने की नौबत क्यों आई।
सिंगरौली जिले के परसोहर गांव में हुए हादसे को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। बताया गया कि 5 महिलाएं और बच्चियां खुरपी लेकर गांव की छुई (पोतने वाली मिट्टी) की खदान में मिट्टी खोदने गई थीं। सुबह करीब 11:21 बजे अचानक खदान की मिट्टी भरभराकर धंस गई और सभी लोग उसके नीचे दब गए। घटना की सूचना मिलते ही आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और शोर मचाया। इस दर्दनाक हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है हालांकि शासन पूरे मामले की जांच कर रहा।
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जान जोखिम में डालने का ट्रेंडः मोबाइल टावर पर चढ़ा प्रेमी, पति से नाराज पत्नी भी चढ़ी
सिंगरौली। शहर में बीते दो दिनों के भीतर सामने आए दो अलग-अलग घटनाक्रम चर्चा का विषय बने हुए हैं। दोनों घटनाएं भले ही अलग-अलग परिस्थितियों से जुड़ी हों, लेकिन सवाल एक ही खड़ा करती हैं। आखिर लोग अपनी बात मनवाने के लिए जान जोखिम में डालने वाले ऐसे कदम क्यों उठाते हैं?
पहला मामला 23 जनवरी का है, देवसर जिआवान थाना अंर्तगत रवि कुशवाहा निवासी धनहा गांव में बने मोबाइल टावर पर चढ़ गया। प्रेम प्रसंग और अंतरजातीय विवाह को लेकर युवक ने परिजनों को मनाने के लिए फिल्म शोले की तर्ज पर खतरनाक कदम उठा लिया। हालांकि समय रहते पुलिस और परिजनों के समझाने पर स्थिति नियंत्रण में आई और बड़ा हादसा टल गया।
दूसरा मामला सराय थाना अंतर्गत 24 जनवरी का है, पीपलखाड़ गांव की रहने वाली युवती अपने पति के साथ मेला घूमने गई थी। पत्नी ने पति से बोला कि मुझे झूला झूलना है पति ने मना किया तो पत्नी टावर पर चढ़ गईं। उसके बाद मेला परिसर में लोगों का हुजूम इकट्ठा हो गया। सरई पुलिस ने सूझबूझ और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए संवाद किया, उसकी मांग पूरी करने का भरोसा दिलाया और आखिरकार युवती को सकुशल नीचे उतारा गया।
इन दोनों घटनाओं ने एक बात तो साफ कर दी है कि आज भी आम लोगों का भरोसा पुलिस पर कायम है, लेकिन साथ ही यह भी उजागर हुआ है कि समाज में संवाद की कमी और भावनात्मक असंतुलन किस हद तक खतरनाक रूप ले सकता है। क्या परिवारों की सख्ती युवाओं को ऐसे जोखिम भरे कदम उठाने को मजबूर कर रही है? क्या बच्चों की मानसिक स्थिति को लेकर हम अब भी लापरवाह हैं? और क्या इस तरह के “स्टैंड” अब अपनी बात मनवाने का तरीका बनते जा रहे हैं
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'बीमार' एंबुलेंस ने ली मरीज की जान, अस्पताल पहुंचने के बाद भी नहीं खुला का दरवाजा, हार्ट पेशेंट ने अंदर ही तोड़ा दम
सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की एक ऐसी लापरवाही सामने आई जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया। एक ओर जहां 108 एंबुलेंस को 'जीवनदायिनी' माना जाता है, वहीं इसकी तकनीकी खराबी और बदहाली एक अति गंभीर मरीज के लिए काल बन गई। अस्पताल पहुंचने के बावजूद एंबुलेंस का दरवाजा न खुलने के कारण मरीज समय पर इलाज के अभाव में दम तोड़ गया।
घटना के अनुसार, रामनगर क्षेत्र से हार्ट अटैक के शिकार मरीज राम प्रसाद को लेकर 108 एंबुलेंस जिला अस्पताल पहुंची थी। मरीज की हालत बेहद नाजुक थी और उसे तत्काल आपातकालीन चिकित्सा की आवश्यकता थी। जैसे ही वाहन अस्पताल की दहलीज पर रुका, एंबुलेंस का पिछला दरवाजा अचानक जाम हो गया। काफी कोशिशों के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला, तो गंभीर रूप से तड़प रहा मरीज और उसके दो परिजन वाहन के अंदर ही कैद होकर रह गए।
मरीज की बिगड़ती हालत और परिजनों की चीख-पुकार के बीच वहां अफरा-तफरी मच गई। जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो एंबुलेंस चालक ने सूझबूझ और कड़ी मशक्कत दिखाते हुए ड्राइवर वाली खिड़की से अंदर प्रवेश किया। इसके बाद अंदर से लॉक तोड़ने का प्रयास किया गया ताकि मरीज को बाहर निकाला जा सके। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय बर्बाद हो गया, जो कि एक हार्ट अटैक के मरीज के लिए बेहद कीमती था।
तकनीकी खराबी के कारण हुई इस देरी का खामियाजा अंततः मरीज को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा। पर्याप्त उपचार शुरू होने से पहले ही राम प्रसाद की मृत्यु हो गई। इस घटना ने जिले की 108 एंबुलेंस सेवाओं के रखरखाव और फिटनेस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि यदि एंबुलेंस सही स्थिति में होती और दरवाजा तुरंत खुल जाता, तो शायद समय पर डॉक्टरी सहायता मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती थी।
रीवा। जिले के ग्राम पंचायत गढ़ा 138 में सड़क और पुल निर्माण को लेकर लापरवाही अब बड़े विरोध का रूप ले चुकी है। गांव निवासी धनेश सोनकर कलेक्टरेट गेट के सामने भूख हड़ताल पर बैठ गए, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। धनेश एक बैनर के माध्यम से वर्षों से अधूरी पड़ी सड़क-पुल परियोजना की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। जिस पर लिखा है, 'किडनी बेचना है, ताकि सड़क-पुल बनवा सकूं।'
वर्ष 2022 में ग्राम पंचायत गढ़ा 138 में सड़क-पुल निर्माण के लिए 2 करोड़ 51 लाख 15 हजार रुपए स्वीकृत किए गए थे। योजना के तहत 2200 मीटर लंबी सड़क का निर्माण होना था, लेकिन अब तक महज करीब 500 मीटर सड़क ही बन पाई है। शेष कार्य बिना किसी स्पष्ट कारण के बंद कर दिया गया। इससे गांव का संपर्क प्रभावित हो गया है और ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सुखराम, केशव, मकबूल आदि ग्रामीणों का कहना है कि, खराब और अधूरे रास्ते के कारण गांव तक एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती। आपात स्थिति में मरीजों को चारपाई पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है, जिससे जान जोखिम में पड़ती है। धनेश सोनकर का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद सुनवाई नहीं हुई, इसलिए मजबूरी में भूख हड़ताल करनी पड़ी।
समस्या के समाधान के लिए निर्देश दिए हैं
संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। युवक की समस्या के शीघ्र निदान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।
प्रतिभा पाल, कलेक्टर, रीवा
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गणतंत्र दिवस पर - पुलिस कमिश्नर सहित 4 अधिकारियों को राष्ट्रपति पदक, 17 को सराहनीय सेवा पदक
भोपाल। गणतंत्र दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार ने पुलिस, फायर, होमगार्ड एवं अन्य सेवाओं के लिए पदकों की घोषणा कर दी है। इस वर्ष मध्य प्रदेश पुलिस के लिए यह अवसर विशेष रहा है। आधिकारिक सूची के अनुसार राज्य के कुल 21 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विशिष्ट और सराहनीय सेवाओं के लिए पदकों से सम्मानित किया जाएगा।
राज्यवार जारी सूची में मध्य प्रदेश के चार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को प्रेसिडेंट्स मेडल फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस (राष्ट्रपति पदक) से सम्मानित करने की घोषणा की गई है, जबकि 17 अधिकारियों और कर्मचारियों को मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस (सराहनीय सेवा पदक) प्रदान किया जाएगा।
राष्ट्रपति पदक पाने वाले अधिकारी
गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची के अनुसार राष्ट्रपति पदक (PSM) से सम्मानित किए जाने वाले अधिकारियों में—
संतोष कुमार सिंह – पुलिस आयुक्त
मिथिलेश कुमार शुक्ला – पुलिस महानिरीक्षक
अवधेश कुमार गोस्वामी – उप पुलिस महानिरीक्षक
शिव कुमार पटेल – निरीक्षक
इन अधिकारियों को कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक दक्षता और दीर्घकालिक विशिष्ट सेवा के लिए यह सम्मान दिया जाएगा।
17 अधिकारियों को सराहनीय सेवा पदक-मध्य प्रदेश पुलिस के 17 अन्य अधिकारी और कर्मचारी विभिन्न रैंक पर रहते हुए उत्कृष्ट, निष्ठावान और अनुकरणीय सेवा के लिए मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस से सम्मानित किए जाएंगे। यह पदक फील्ड ड्यूटी, अपराध जांच, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।
सराहनीय सेवा पदक पाने वालों में—कृष्णावेणी देशावतु (आईजी), मनोज कुमार राय (एसपी), गितेश कुमार गर्ग (एसपी), दुर्गेश कुमार राठौर (एसपी), प्रवीण सिंह (इंस्पेक्टर), राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता (इंस्पेक्टर), निधि श्रीवास्तव (इंस्पेक्टर), संजय सिंह ठाकुर (डीएसपी), शफाली टकलकर (इंस्पेक्टर), श्रीराम मिश्रा (हेड कांस्टेबल), सुशील कुमार चौबे (कांस्टेबल), प्रेम किशोर व्यास (सब इंस्पेक्टर), उमराव प्रसाद जाटव (सब इंस्पेक्टर), महेंद्र सिंह नेगी (एएसआई), संतोष मेहरा (एएसआई), रविंद्र मिश्रा (कांस्टेबल) और राजू गुराने (इंस्पेक्टर) शामिल हैं।
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सीएम डॉ. यादव संतुलन बिगड़ने से घोड़े से नीचे गिरे, बड़ा हादसा टला, उज्जैन में हुई घटना
उज्जैन. बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में आयोजित राहगीरी आनंदोत्सव के दौरान रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. कार्यक्रम के दौरान जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव घुड़सवारी कर रहे थे, तभी अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वे घोड़े से नीचे गिर पड़े. इस अचानक हुई घटना से वहां मौजूद लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया.
हालांकि, मुख्यमंत्री के पास तैनात सुरक्षाकर्मियों ने गजब की फुर्ती दिखाई और स्थिति बिगड़ती उससे पहले ही सीएम को तत्काल संभालते हुए उठाया. गनीमत रही कि मुख्यमंत्री को कोई गंभीर चोट नहीं आई. घटना के बाद मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में अन्य गतिविधियों का भी आनंद लिया.
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